Friday, July 3, 2026
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डीएम ने किया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरपुर महंत का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाएं परखी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री आरोग्य मेलों के आयोजन के बीच जिलाधिकारी संतोष शर्मा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकांत शुक्ल के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरपुर महंत का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का बारीकी से मूल्यांकन किया। अधिकारियों ने प्रयोगशाला कक्ष, इमरजेंसी कक्ष, प्रसव कक्ष, स्टोर रूम और दवा वितरण कक्ष का विस्तृत अवलोकन किया।

दवा वितरण कक्ष में मौजूद फार्मासिस्ट सतीश चंद्र पटेल से स्टोर में उपलब्ध दवाओं का विवरण भी पूछा गया।डीएम ने उपस्थिति रजिस्टर का निरीक्षण करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों को समय से उपस्थित रहने और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान डा. सोनी सिंह, फार्मासिस्ट सतीश चंद्र पटेल, एलटी उपेंद्र कुमार, एएनएम विजयलक्ष्मी गुप्ता, मुनिता गुप्ता, स्टाफ नर्स सुनीता शर्मा, अनीता समेत सभी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहें।

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उपनगर जिला स्तरीय कैडेट प्रतियोगिता उत्साहपूर्वक संपन्न

स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी राज्य स्तर पर करेंगे प्रतिनिधित्व

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)l उपनगर जिले के 12 से 14 आयु वर्ग के कैडेट खिलाड़ियों के लिए आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता मीना ताई ठाकरे मैदान, चेंबूर वाशी नाका में उत्साह के साथ संपन्न हुई। प्रतियोगिता में बच्चों ने बड़ी संख्या में सहभाग लिया और विभिन्न गटों में तेज, दमदार और कौशलपूर्ण खेल प्रदर्शन देखने को मिला।
इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी मुंबई उपनगर जिले का प्रतिनिधित्व राज्य स्तरीय स्पर्धा में करेंगे। इस कारण खिलाड़ियों में विशेष उत्साह और खुशी का माहौल देखा गया।
कार्यक्रम में जिला सचिव जयदीप कदम, कोषाध्यक्ष संतोष वस्त, मुंबई जिला सचिव विजय कांबले और अनिल रोडे की प्रमुख उपस्थिति रही। वहीं प्रतियोगिता निरीक्षक के रूप में रेलवे पुलिस विभाग के प्रशिक्षक अजय लोखंडे ने मार्गदर्शन किया।
जिला स्तर से राज्य स्तर तक आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करने वाली यह प्रतियोगिता सफलतापूर्वक संपन्न होने पर पालकों, प्रशिक्षकों और आयोजकों ने समाधान व्यक्त किया।

मतदाता सूची अपलोड में लापरवाही पर डीएम सख्त, शिथिलता पर जताई नाराजगी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ग्राम पंचायत चुनावी कार्यक्रम के तहत जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने सदर तहसील और ब्लॉक घुघुली में डुप्लीकेट मतदाता सूची अपलोड कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने गणना प्रपत्रक के आधार पर हो रहे अपडेट की स्थिति को बारीकी से परखा।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने मतदाता सूची अपलोड में हो रही शिथिलता पर कड़ा असन्तोष जताया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संवेदनशील कार्य में लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने उप जिलाधिकारी सदर को निर्देश देते हुए कहा कि जहां भी शिथिलता मिले, उसकी तत्काल रिपोर्ट की जाए और दोषियों पर कार्यवाही सुनिश्चित हो।उन्होंने बताया कि सदर तहसील में 118 केंद्रों की सूची अपलोड करने के लिए 12 कंप्यूटर ऑपरेटर लगाए गए हैं, जबकि घुघुली ब्लॉक में 295 केंद्रों की सूची के लिए 15 कंप्यूटर ऑपरेटर कार्यरत हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि डुप्लीकेट मतदाता सूची अपलोड का कार्य जनपद के सभी ब्लॉकों में तेजी से कराया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत शुक्ल, एसडीएम सदर जितेन्द्र कुमार, नायब तहसीलदार सदर तथा घुघली के खण्ड विकास अधिकारी राज कुमार मौजूद रहें।

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जिला ताइक्वांडो कैडेट और सीनियर चैंपियनशिप संपन्न

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)
मुंबई के गुरुनानक खालसा कॉलेज, माटुंगा में 9 नवंबर 2025 को आयोजित 14वीं क्योरुगी और 6वीं पूम्से मुंबई जिला ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2025-26 उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। यह स्पर्धा ताइक्वांडो एसोसिएशन, मुंबई इस अधिकृत जिला संघटना द्वारा भव्य रूप से आयोजित की गई थी।
इस चैंपियनशिप में कैडेट और सीनियर दो आयु वर्गों में क्योरुगी (लड़ाकू मुकाबले) और पूम्से (तांत्रिक प्रस्तुति) इन दो मुख्य वर्गों की प्रतियोगिताएँ संपन्न हुईं। संपूर्ण स्पर्धा मुंबई जिला ताइक्वांडो संघ के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में सुव्यवस्थित ढंग से संचालित की गई|स्पर्धा के रेफरी इंचार्ज निशांत शिंदे ने पूरी प्रतियोगिता का संचालन अनुशासनपूर्वक और सफलतापूर्वक किया।
इस अवसर पर संघ के सचिव विजय कांबले, तथा जयेश वेल्हाल, संतोष वालुंज, राजेश मुरव और ओमकार पाटिल ने मुंबई जिला ताइक्वांडो टीम की घोषणा की
मुंबई जिले से चयनित यह टीम 13 से 14 नवंबर 2025 को साई सिल्वर लांस, शिर्डी (जिल्हा अहमदनगर) में होने वाली राज्यस्तरीय कैडेट ताइक्वांडो चैंपियनशिप में भाग लेगी। टीम मैनेजर: प्रिती देब, पूम्से कोच: यश दळवी, पूम्से टीम मैनेजर: प्रिती देब. सभी अधिकारी और खिलाड़ी मुंबई जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे
इस चैंपियनशिप में पूम्से इवेंट में सिद्धकला ताइक्वांडो अकादमी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

गोरखपुर विश्वविद्यालय में संविदा सहायक प्रोफेसर परीक्षा सम्पन्न, 36 पदों के लिए 104 अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)।दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा संविदा सहायक प्रोफेसर पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा रविवार को कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन के निर्देशन में शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से सम्पन्न हुई। विश्वविद्यालय परिसर में निर्धारित समयानुसार आयोजित इस परीक्षा में विभिन्न विषयों और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। परीक्षा की सभी व्यवस्थाएँ विश्वविद्यालय प्रशासन की निगरानी में सुव्यवस्थित रूप से सुनिश्चित की गई थीं।
विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर एंड नेचुरल साइंस, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी तथा अन्य विभागों के स्ववित्तपोषित कार्यक्रमों में सहायक प्रोफेसर के कुल 36 पदों के लिए कुल 176 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 104 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में उपस्थिति दर्ज कराई।
विभिन्न विषयों में उपस्थित अभ्यर्थियों की संख्या इस प्रकार रही, एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन में 3 में से 1, एग्रीकल्चर बॉटनी में 3 में से 3, प्लांट पैथोलॉजी में 5 में से 3, एग्रोनॉमी में 4 में से 3, बी.कॉम (बैंकिंग एंड इंश्योरेंस) में 21 में से 10, लॉ (फाइव ईयर कोर्स) में 33 में से 24, फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री में 16 में से 9, फार्मास्युटिक्स में 14 में से 8, फार्माकोग्नोसी में 4 में से 4, फार्माकोलॉजी में 12 में से 8, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 54 में से 28 तथा बीसीए में 7 में से 3 अभ्यर्थी उपस्थित रहे।
पूरी परीक्षा प्रक्रिया विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों की देखरेख में पारदर्शी, निष्पक्ष और अनुशासित ढंग से सम्पन्न हुई। परीक्षा के परिणाम एवं आगे की प्रक्रिया से संबंधित सूचना पात्र अभ्यर्थियों को शीघ्र ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

ज्ञान का दीपक जलाना है बाल विवाह मिटाना है

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर प्रात: 8:45 बजे बाल विवाह की सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन से आदर्श राय, रितेश चौरसिया एवं बृजमा तत्काल मौके पर ब्रह्मस्थान मऊ पहुंची और बालिका रंजन चौहान को अपने संरक्षण में लेकर थाना कोतवाली पहुंची जहां बालिका की कॉउंसलिंग की गई जिसमें बालिका द्वारा बताया गया कि वह मूल रूप से भिटिया सोनाडीह थाना पकडी जनपद बलिया की रहने वाली है उसकी उम्र लगभग 14 वर्ष है इसके पश्चात भी उसके घर वाले उसका जबरदस्ती विवाह कर रहे हैं, जब बालिका द्वारा इसपर आपत्ति जताई गई तो घर वालों द्वारा उसे मारा पीटा गया इसके बाद वह घर से भाग कर मऊ आ गई। जिसमें थाना कोतवाली द्वारा कार्यवाही करते हुए बालिका की शिकायत दर्ज करने के उपरांत बालिका को चाइल्ड हेल्पलाइन मऊ को सुपुर्द किया गया। चाइल्ड हेल्पलाइन टीम द्वारा संध्या सिंह सेंटर मैनेजर वन स्टॉप सेंटर के सहयोग से बालिका को सुरक्षित वन स्टॉप सेंटर में अग्रिम कार्यवाही पूर्ण होने तक संरक्षित कराया गया।

नागरी प्रचारिणी सभा में शब्दों की साधना से गूंजा

भावों से सराबोर कवि गोष्ठी: देवरिया में गूंजे ओज, प्रेम और जीवन के स्वर

नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया की द्वितीय रविवारीय कवि गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। साहित्य की पवित्र धरती देवरिया एक बार फिर कविताओं की अमृतधारा से सराबोर हो गई। नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया की द्वितीय रविवारीय कवि गोष्ठी रविवार को उत्साहपूर्वक संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात गीतकार इन्द्र कुमार दीक्षित ने की। गोष्ठी की शुरुआत कवयित्री पार्वती देवी गौरा की वाणी वंदना से हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक भावों से भर दिया।

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कार्यक्रम में कवि गोपाल जी त्रिपाठी ने “सपने सजाने की चाहत लिए मैं सपने बोता रहा हूं” के माध्यम से आशा और संघर्ष की ज्योति प्रज्वलित की। वहीं योगेन्द्र पाण्डेय की प्रेरक कविता “तुम जागो और आंखें खोलो, तुम्हारे जागने से ही आएगा नया सबेरा” ने श्रोताओं में नई ऊर्जा भर दी।

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विकास तिवारी विक्की ने “महंगाई पर तंज” कसते हुए सामाजिक यथार्थ को उजागर किया, जबकि कीर्ति त्रिपाठी ने अपनी रचना “मैं लिखती हूं निर्मल निर्झरणी बनकर” से लेखनी की शक्ति को नमन किया। पार्वती देवी गौरा ने “जिंदगी धीरे-धीरे चली जा रही है” से जीवन की क्षणभंगुरता को भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया।

गीतकार सरोज कुमार पाण्डेय ने “अपने बचपन के दिन, नौजवानी के दिन” गीत से सबको अतीत की स्मृतियों में ले गए, और अध्यक्ष इन्द्र कुमार दीक्षित की ग़ज़ल “दास्ताने दिले दर्द सुनाए नहीं जाते…” ने सभागार में भावनाओं का सागर उमड़ा दिया।

संचालन कर रहे भोजपुरी रचनाकार सौदागर सिंह ने अपनी पंक्तियों “इक इंसान होकर जो सुधरे नहीं, तो आदमी के तन पाने से क्या फायदा” से मानवता का संदेश दिया।

गोष्ठी में क्षमा श्रीवास्तव, शिखा गौड़, राधा मोहन सिंह, नित्यानंद आनंद, सीमा नयन, फिगार देवरियावी समेत अनेक कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से समां बांधा।
कार्यक्रम में जितेन्द्र प्रसाद तिवारी, अधिवक्ता बृजेश पाण्डेय, रवीन्द्र नाथ तिवारी, प्रबंधक बृजेश पाण्डेय, विनोद अग्रवाल, प्रीति पाण्डेय सहित अनेक साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

सरकारी बैंकों की भूमिका और जनता का भरोसा — क्या खतरे में है?

क्या वास्तव में बैंक निजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है?-वित्त मंत्री के बयानों से उत्पन्न हलचल, संकेत और सच्चाई- बैंक राष्ट्रीयकरण से निजीकरण की बहस तक का सटीक विश्लेषण

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत में बैंकिंग क्षेत्र हमेशा से आर्थिक नीति और सामाजिक न्याय का केंद्र रहा है। 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 14 प्रमुख बैंकों के राष्ट्रीयकरण के साथ जिस नए युग की शुरुआत हुई, उसका उद्देश्य केवल पूंजी का पुनर्वितरण नहीं था बल्कि समाज के हाशिए पर खड़े लोगों को वित्तीय समावेशन में लाना था।बैंक शाखाओं का ग्रामीण विस्तार,प्राथमिक क्षेत्र को ऋण प्रवाह,और आम नागरिक की आर्थिक पहुँच को सुनिश्चित करना,ये सब उस नीति का सार था। परंतु अब, जब भारत की अर्थव्यवस्था वैश्वीकरण, डिजिटलीकरण और प्रतिस्पर्धा की नई लहर में प्रवेश कर चुकी है,तो सवाल उठता है,क्या राष्ट्रीयकृत बैंक अपनी सामाजिक भूमिका के साथ-साथ आर्थिक दक्षता भी निभा पा रहे हैं? इसी संदर्भ में हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान ने न केवल नीति निर्माताओं,बल्कि बैंक यूनियनों,उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय विश्लेषकों में भी हलचल पैदा कर दी है।केंद्रीय वित्त मंत्री ने हाल ही में कहा कि “जिस उद्देश्य से बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था, वह अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है।” यह कथन अपने आप में दोहरे अर्थों से भरा है।मैंएडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि एक तरफ यह स्वीकारोक्ति है कि राष्ट्रीयकरण की मूल भावना, ग्रामीण ऋण पहुंच, सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता,अब भी अधूरी है।वहीं दूसरी ओर, यह भी संकेत देता है कि सरकार इस“अधूरेपन”को पूरा करने के लिए नई नीतिगत दिशा में सोच रही है।बयान के तुरंत बाद मीडिया और बैंकिंग हलकों में सवाल उठा,क्या इसका अर्थ यह है कि सरकार अब निजीकरण की प्रक्रिया को धीमा कर रही है? या यह केवल रणनीतिक ‘रीपोज़िशनिंग’ है, जिसमें सरकार अपने कदमों को अधिक राजनीतिक और सामाजिक स्वीकार्यता दिलाने का प्रयास कर रही है? 

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साथियों बात अगर हम 4 नवंबर 2025, क़ो दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स हीरक जयंती व्याख्यान में वित्तमंत्री का आर्थिक दृष्टिकोण को समझने की करें तो, दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आयोजित हीरक जयंती समापन व्याख्यान (4 नवंबर 2025) में वित्तमंत्री  ने जिस स्पष्टता से निजी बैंकों के प्रदर्शन की सराहना की,वह संदेश सीधा था,सरकार निजी क्षेत्र की कार्यक्षमता को स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा कि निजी बैंक “बेहतर ढंग से कार्य कर रहे हैं” और उनकी गवर्नेंस, कर्ज प्रबंधनऔर टेक्नोलॉजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर सरकारी बैंकों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी है।इस वक्तव्य को विशेषज्ञों ने एक “सॉफ्ट सिग्नल” के रूप में देखा है,यह संकेत कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भी उसी दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मक भावना में लाना चाहती है, जो निजी क्षेत्र में दिखाई देती है। हालांकि वित्त मंत्री ने यह भी जोड़ा कि “राष्ट्रीयकरण का मकसद अभी पूरा नहीं हुआ”, जो यह बताता है कि सरकार सामाजिक दायित्वों को नज़र अंदाज़ नहीं कर रही।फिर भी, यह स्पष्ट था कि सरकार अब बैंकिंग क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों के अंतिम चरण में प्रवेश करने जा रही है और इनमें निजीकरण एक महत्वपूर्ण घटक हो सकता है। 

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साथियों बात अगर हम एसबीआई बैंकिंग एंड इकॉनमिक्स सम्मेलनमें वित्त मंत्री क़े दूसरे संकेत को समझने की करें तो,12 वें ‘एसबीआई बैंकिंग एंड इकॉनमिक्स सम्मेलन 2025’ में वित्त मंत्री ने वित्तीय संस्थानों से उद्योग जगत के लिए कर्ज प्रवाह को बढ़ाने और व्यापक बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि “विकास के अगले दशक में बैंकों को उद्योगों, स्टार्टअप्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अधिक ऋण देना होगा, ताकि भारत वैश्विक निवेश केंद्र बन सके।”यह बयान सिर्फ आर्थिक प्रोत्साहन का आग्रह नहीं था, बल्कि यह एक नीतिगत संकेत भी था,सरकार बैंकिंग प्रणाली को प्रतिस्पर्धी और नवाचार आधारित बनाना चाहती है। निजी क्षेत्र की बैंकिंग प्रणाली पहले से ही इस दिशा में अग्रणी मानी जाती है,फिनटेक, डिजिटल पेमेंट्स,माइक्रो-लेंडिंग और ग्राहक अनुभव के क्षेत्र में। ऐसे में वित्तमंत्री के शब्दों में “निजीकरण का समर्थन झलकना”स्वाभाविक था।विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत सरकार का “मिश्रित मॉडल” की ओर झुकाव दर्शाता है—जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सामाजिक जिम्मेदारी निभाते रहें, और निजी बैंक आर्थिक गतिशीलता को आगे बढ़ाएँ।

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साथियों बात अगर हम  इस बात को समझने की करें कि क्या वास्तव में निजीकरण प्रक्रिया शुरू हो गई है?यहाँ सवाल का मूल यही है। क्या सरकार ने बैंक निजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है या यह केवल संकेतों की राजनीति है?वास्तविक स्थिति यह है कि 2021 में वित्त मंत्री ने बजट भाषण में दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी, जिसे “वित्तीय क्षेत्र सुधार” का हिस्सा बताया गया था। हालांकि तब से अब तक इस दिशा में कोई औपचारिक अधिसूचना या बिक्री प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। नीति आयोग ने जिन दो बैंकों का चयन किया था उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए, पर चर्चा में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नाम रहे।2023- 24 में सरकार ने इन बैंकों के प्रदर्शन को सुधारने पर अधिक ध्यान दिया,नॉन परफॉर्मेंगएसेट्स कम करने और पूंजी निवेश बढ़ाने की कोशिश की। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार पहले बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत करना चाहती है ताकिनिजीकरण से पहले उन्हें बाजार में बेहतर मूल्यांकन मिल सके।वित्त मंत्री के हालिया बयान कि “राष्ट्रीयकरण का उद्देश्य अभी अधूरा है”को इसी संदर्भ में देखा जा सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार पीछे हटी है, बल्कि यह कि सरकार निजीकरण को धीरे और रणनीतिक तरीके से लागू करना चाहती है, ताकि न तोराजनीतिक विरोध बढ़े और न ही वित्तीय अस्थिरता उत्पन्न हो।अर्थात, निजीकरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है, पर उसकी तैयारी और माहौल निर्माण स्पष्ट रूप से जारी है।

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साथियों बात अगर हम बैंक यूनियनों की प्रतिक्रिया:तरफदारी वाले बयान से असहजता को समझने की करें तो वित्तमंत्री के इन बयानों ने जहां उद्योग जगत और निजी क्षेत्र में उत्साह बढ़ाया, वहीं बैंक कर्मचारियों और यूनियनों में चिंता की लहर दौड़ गई। ऑल इंडिया बैंक इम्प्लॉइज एसोसिएशन, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस जैसी संस्थाओं ने बयान कोनिजीकरण समर्थक झुकाव बताया।उनका तर्क है कि निजी बैंकों में लाभ प्राथमिक उद्देश्य होता है,जबकि सरकारी बैंकों की भूमिका समाजिक जिम्मेदारी निभाना है, गांवों में शाखाएँ खोलना, गरीबों को सस्ती दर पर ऋण देना, और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार निजीकरण की ओर बढ़ती है तो ये सामाजिक लक्ष्य पीछे छूट सकते हैं।इसके अलावा कर्मचारी वर्ग को नौकरी की सुरक्षा, पेंशन, और ट्रांसफर नीतियों को लेकर भी आशंकाएँ हैं। यूनियनों ने 2024 में इस विषय पर देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी थी, जिसके बाद सरकार ने निजीकरण पर बयानबाजी को सीमित रखा था।

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साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण: क्या निजीकरण हमेशा लाभदायक रहा है? को समझने की करें तो,वित्तीय सुधारों का वैश्विक अनुभव बताता है कि बैंकिंग क्षेत्र में निजीकरण का प्रभाव मिश्रित रहा है।ब्रिटेन में 1980 के दशक में बैंकिंग निजीकरण से कार्यकुशलता तो बढ़ी, परंतु ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच सीमित हो गई।रूस और लैटिन अमेरिकी देशों में निजीकरण के बाद वित्तीय संकट और सामाजिक असमानता बढ़ी।वहीं सिंगापुर और दक्षिण कोरिया ने“हाइब्रिड मॉडल” अपनाया,जिसमें सार्वजनिक और निजी बैंक दोनों को समान नीति- आधारित स्वायत्तता दी गई और ये देश वित्तीय स्थिरता के उदाहरण बने।भारत इस समय इन अनुभवों के बीच संतुलन खोज रहा है। पूरी तरह निजीकरण करने से पहले उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि वित्तीय समावेशन, रोजगार सुरक्षा और सामाजिक न्याय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि वित्त मंत्री के हालिया बयानों को अगर शब्दशः देखा जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार ने निजीकरण से पीछे हटने की घोषणा नहीं की, बल्कि नीति को नए ढंग से प्रस्तुत करने की रणनीति अपनाई है।बैंकिंग क्षेत्र में सुधार अब केवल स्वामित्व परिवर्तन का विषय नहीं रहा, बल्कि यह प्रदर्शन, पारदर्शिता प्रौद्योगिकी और उत्तरदायित्व का समग्र कार्यक्रम बन चुका है। सरकार चाहती है कि जब निजीकरण की औपचारिक घोषणा हो, तब तक बैंकों की वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत हो कि कोई भी बिक्री “बचाव का उपाय” नहीं बल्कि “नीतिगत सुधार” प्रतीत हो।इसलिए यह कहना उचित होगा कि“बैंक निजीकरण की प्रक्रिया अभी औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है, लेकिन उसके संकेत, दिशा और नीतिगत तैयारी स्पष्ट रूप से प्रगति पर हैं।”

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

बढ़ी सर्दी: तापमान लुढ़का, सुबह-शाम कोहरा और ठंडी हवाओं का असर तेज

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया है और ठंड ने अपने कदम तेज कर दिए हैं। सुबह-शाम बह रही सर्द हवाओं ने तापमान में गिरावट ला दी है। कई जगहों पर भोर से ही कोहरे की हल्की परत दिखाई देने लगी है। ग्रामीण इलाकों में तो लोगों ने रात में कंबल-रजाई निकाल लिए हैं, जबकि दिन की धूप भी अब ताप नहीं दे पा रही है, जिससे ठंडक और अधिक महसूस हो रही है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोग अब गर्म कपड़ों का सहारा लेने लगे हैं। हालांकि अभी कड़ाके की सर्दी नहीं पड़ी है, फिर भी मौसम विशेषज्ञ आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट का अनुमान जता रहे हैं। सुबह और शाम के अलावा दिन में भी हल्की ठंडक बनी रह सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी और पश्चिमी यूपी में अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है। कहीं भी कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। सुबह और देर रात हल्का कोहरा छाया रह सकता है, जबकि दिन में धूप खिली रहेगी। हालांकि जैसे ही सूर्य ढलता है, तापमान में तेजी से गिरावट होती है, जिससे ठंड का असर बढ़ जाता है। अनुमान है कि 14 नवंबर तक प्रदेश में मौसम लगभग शुष्क ही रहेगा और किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, जिसके चलते पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही है। वहीं से आने वाली पछुआ हवाएँ उत्तर प्रदेश के तापमान को लगातार नीचे ला रही हैं। पिछले 2–3 दिनों में प्रदेश में पारा 4–5 डिग्री तक गिर चुका है। अगले एक सप्ताह तक ऐसे ही ठंडे मौसम का दौर जारी रहने का अनुमान है।
बाराबंकी प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहाँ विगत रात का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी लखनऊ में भी सीजन में पहली बार रात का पारा 13.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि दिन में 29.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ हल्की गर्मी महसूस की गई।

भ्रष्टाचार से प्राप्त धन करता है सर्वनाश- डाक्टर श्रीप्रकाश

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। कपरवार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं को कथा श्रवण कराते हुए कथा व्यास डाक्टर श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि जुआ व भ्रष्टाचार के द्वारा इकठ्ठा किया गया धन इहलोक व परलोक दोनों का नाश कराता है। दुर्योधन इत्यादि ने युधिष्ठिर के सामने जुआ का प्रस्ताव रखा जिसे युधिष्ठिर ने स्वीकार कर लिया। जुआ में राजपाठ धन दौलत और द्रोपदी को भी हार गए। तब दुर्योधन ने अपने भाई दु:शासन को आदेश किया कि द्रौपदी अपनी दासी हो गई है उसे सभा में लाकर नंगा कर दो, आदेश पाते ही दु:शासन द्रोपदी का साड़ी खींचने लगा द्रौपदी हाथ जोड़कर अपनी लाज बचाने के लिए सभा मे उपस्थित सभी जनो से प्रार्थना करने लगी । लेकिन कोई बचाने नहीं आया तो थक-हार कर अंत में भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा । द्रोपदी की पुकार सुन श्रीकृष्ण ने आकर साडी के रुप में प्रवर्तित होकर द्रोपदी की लाज बचाकर दुर्योधन और दु:शासन इत्यादि का अहंकार चूर चूर कर दिया । यहीं से पूरे कौरवकुल के विनाश की नींव रख दी गई । इस अवसर पर सुरेन्द्र प्रसाद गुप्त, राम अवध गुप्त, अनिल गुप्त, राम अधार, अमित मिश्र,जयप्रकाश, जयशंकर आदि मौजूद रहे।

विजिलेंस से रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर ने की आत्महत्या, लाइसेंसी दुनाली से खुद को मारी गोली – जानिए पूरी घटना

व्यासपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उपमंडल व्यासपुर के गांव धर्मकोट में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। विजिलेंस विभाग से सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर सरदार कंवर सिंह (72 वर्ष) ने रविवार सुबह अपनी लाइसेंसी दुनाली बंदूक से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

जानकारी के अनुसार, कंवर सिंह सुबह अपने पशु बाड़े में गए थे। वहीं उन्होंने बंदूक को गर्दन के पास सटाकर पांव के अंगूठे से ट्रिगर दबाया, जिससे गोली सिर के आर-पार हो गई। गोली की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो उन्होंने उन्हें खून से लथपथ अवस्था में पड़ा पाया।

सूचना मिलते ही थाना व्यासपुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटना स्थल से उनकी लाइसेंसी दुनाली बंदूक भी जब्त कर ली है।

रास्ते के विवाद से थे परेशान
जांच में यह सामने आया है कि कंवर सिंह का गांव में रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के कारण वह मानसिक रूप से परेशान रहते थे।
मृतक की दो बेटियां हैं, जिन्होंने बताया कि पिता रोज की तरह सुबह पशु बाड़े गए थे और कुछ देर बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी।

पुलिस इस मामले को विवाद और मानसिक तनाव दोनों एंगल से जांच रही है। जिन लोगों के साथ विवाद था, उनसे भी पूछताछ की जाएगी। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

🔌 बनकटिया दुबे विद्युत उपकेंद्र पर नया पैनल लगा, आठ घंटे बाधित रही सप्लाई — अब होगी निर्बाध बिजली आपूर्ति: अवर अभियंता

भाटपार रानी/बनकटा, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
तहसील क्षेत्र के बनकटिया दुबे विद्युत उपकेंद्र पर शनिवार को विद्युत आपूर्ति सुचारू रखने के उद्देश्य से मुख्य पैनल (फीडर) को बदला गया। इस दौरान तकरीबन आठ घंटे तक क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप रही, जिससे उपभोक्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, उपकेंद्र पर पिछले कई दिनों से बार-बार मेन सप्लाई बाधित हो रही थी। पैनल के भीतर बार-बार “मास्चर” आने से बिजली बहाल करने में घंटों का समय लग जाता था। समस्या की गंभीरता को देखते हुए अवर अभियंता अवधेश प्रसाद के निर्देशन में शनिवार को पुराना पैनल हटाकर नया पैनल लगाया गया।

अवर अभियंता अवधेश प्रसाद ने बताया कि “नए पैनल के लगने से अब आपूर्ति जल्दी बहाल होगी और अनावश्यक देरी या मास्चर मिटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” उन्होंने कहा कि यह कार्य अचानक उत्पन्न तकनीकी दिक्कत के कारण तत्काल करना आवश्यक हो गया था, इसलिए पूर्व सूचना देना संभव नहीं हो सका।

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बिजली बाधित रहने की सूचना पहले से मिल जाती, तो वे अपने दैनिक कार्य उसी अनुसार निपटा लेते। इसके बावजूद, उपकेंद्र क्षेत्र में अब बेहतर और स्थायी विद्युत आपूर्ति की उम्मीद जग गई है।

ददरी मेले में पार्किंग शुल्क तय, साइकिल वालों के लिए सुविधा नि:शुल्क

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। ऐतिहासिक ददरी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं व आगंतुकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पार्किंग व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है। मेले में वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुचारु यातायात व्यवस्था के लिए पार्किंग शुल्क निर्धारित किया है।

साइकिल वालों के लिए पार्किंग पूरी तरह नि:शुल्क रहेगी, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। वहीं, दोपहिया वाहनों के लिए ₹50 और चारपहिया वाहनों के लिए ₹100 का शुल्क तय किया गया है। पार्किंग स्थलों पर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

प्रशासन ने मेले में आने वाले लोगों से अपील की है कि वे अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करें, जिससे जाम की स्थिति न उत्पन्न हो और मेले का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से हो सके।

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यूपी में बड़ा पुलिस फेरबदल: 23 एडिशनल एसपी के तबादले, देखें पूरी सूची – किसे, कहां मिली नई तैनाती

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में रविवार को बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। राज्य सरकार ने 23 एडिशनल एसपी (Additional SP) के ट्रांसफर के आदेश जारी किए हैं। इन तबादलों के बाद कई जिलों में नई तैनाती दी गई है।

जारी सूची के अनुसार, बीएस वी कुमार को उपसेनानायक, 47वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद में तैनात किया गया है, जबकि सच्चिनानंद को अपर पुलिस अधीक्षक एसएसएफ मुख्यालय लखनऊ भेजा गया है। वहीं डॉ. संजय कुमार को 27वीं वाहिनी पीएसी सीतापुर में उपसेनानायक बनाया गया है।

सुबोध गौतम को अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) हरदोई, और नृपेंद्र को अपर पुलिस उपायुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के पद पर तैनाती दी गई है।
निवेश कटियार अब अपर पुलिस अधीक्षक, यूपी 112 रहेंगे, जबकि दिनेश कुमार पुरी को अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) गोरखपुर में तैनात किया गया है।

इस बीच संतोष कुमार द्वितीय का पूर्व आदेश निरस्त कर दिया गया है। उन्हें पहले गोरखपुर भेजा गया था, पर अब उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया गया है।
सीताराम को अपर पुलिस अधीक्षक (विधि प्रकोष्ठ) मुख्यालय, लखनऊ में नियुक्त किया गया है।

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इसके अलावा, सिद्धार्थ वर्मा को कुशीनगर, सुमित शुक्ला को शामली, और ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद को गोरखपुर (उत्तरी) भेजा गया है।
अशोक कुमार सिंह अब बहराइच (नगर) में तैनात होंगे, जबकि राजकुमार सिंह को ईओडब्ल्यू, लखनऊ में पदस्थापित किया गया है।
संतोष कुमार सिंह को अपर पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा), गोरखपुर, और जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव को सीआईडी, लखनऊ भेजा गया है।

रामानंद कुशवाहा को हाथरस, जितेंद्र कुमार प्रथम को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, और चिरंजीव मुखर्जी को अपर पुलिस उपायुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज में नियुक्त किया गया है।

श्वेताभ पांडेय को एटा (नगर), आलोक कुमार जायसवाल को फतेहगढ़, शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव को सहारनपुर (यातायात) और डॉ. राकेश कुमार मिश्र को गाजीपुर (नगर) में नई तैनाती दी गई है।

इस फेरबदल के साथ प्रदेश पुलिस में नई ऊर्जा और जिम्मेदारी के साथ अधिकारियों से बेहतर कार्य निष्पादन की उम्मीद जताई जा रही है।

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पूर्व सभासद हामिद अली उर्फ पप्पू की गोली मारकर हत्या, रेल पटरी पर मिला शव

एटा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब शहर कोतवाली क्षेत्र में रेल की पटरी पर पूर्व सभासद हामिद अली उर्फ पप्पू (50) का शव बरामद हुआ। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने जब शव की जांच की, तो उसके सीने में गोली लगने के निशान पाए गए, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह हत्या का मामला है।

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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्याम नारायण सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वे स्वयं मौके पर पहुंचे और मामले की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस प्रारंभिक जांच में यह भी खंगाल रही है कि कहीं इस हत्या के पीछे जमीन विवाद या आपसी रंजिश तो नहीं है।

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मृतक के भाई कफील अहमद, जो सभासद संघ के अध्यक्ष हैं, ने बताया कि हामिद अली प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करते थे। फिलहाल पुलिस हत्या के हर कोण से जांच कर रही है। इस घटना ने पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

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स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करे और मृतक के परिवार को न्याय दिलाए।

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