Wednesday, July 1, 2026
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राप्ती नदी के पट्टाशुदा जलक्षेत्र में चोरी से मछली मारने पर रोक लगाने की मांग

चोरी से मछली मारकर बेचने वालों पर कार्यवाही को लेकर सौपा पत्रक

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। राप्ती नदी के जलक्षेत्र, खण्ड संख्या- 07 भदिला से कपरवार तक मत्स्य आखेट का पट्टा हुआ है, विगत 23 सितम्बर को बरहज तहसील सभागार में राप्ती नदी के जलक्षेत्र के नीलामी में मत्स्य जीवी सहकारी समिति लिमिटेड, पैना- बरहज ने प्रतिभाग कर मत्स्य आखेट का एक वर्षीय पट्टा लिया है I जिस जलक्षेत्र में कुछ मनबढ़ व्यक्तियों द्वारा आये-दिन चोरी से मछली मारकर बेचने की शिकायत समिति के विजय प्रताप व जितेन्द्र भारत ने शनिवार को तहसील दिवस में की है I

सौपें पत्रक में उन्होंने लिखा है कि मत्स्य विभाग द्वारा निर्धारित मूल्य जमा करके मत्स्य आखेट के लिए राप्ती नदी का नीलामी/पट्टा कराया गया है। नदी का पट्टा होने के बाद भी कपरवार के राजू यादव व विजय यादव पुत्रगण परदेशी यादव, गंगा पुत्र कोमल यादव अपने खेत में बकायदे टेंट डलवाकर मुबारकपुर आजमगढ़ के मुस्लिमों से जलक्षेत्र में मत्स्य आखेट करवा रहें हैं व विक्री कर रहे हैं, मना करने पर मान नहीं रहें हैं, कह रहें हैं कि हम दशकों से अपने खेत के सामने नदी में मछ्ली मरवा रहे हैं, हम मछली मरवाएंगे, कोई रोक नहीं सकता है, वहीं राजू यादव द्वारा फोन करके जान-माल की धमकी दी जा रही है।

इसी तरह ग्राम- कटैलवा के रहने वाले मन्नू व पारस पुत्र गण रामनरेश बिंद झुण्ड में अपने कुछ लोगों को लेकर आए दिन नाव से नदी में चोरी से मछली मार रहे हैं। कपरवार के शिव पुत्र कमला, भीम पुत्र लालपरीखा, नागेन्द्र व् वीरेन्द्र पुत्र गण स्वामीनाथ, हरिश्चंद पुत्र बाजीलाल आदि भी आए- दिन जब भी मौका पा रहे हैं, जबरदस्ती मछली मारकर बेच रहे हैं। मना करने विवाद पर उतारू हो जा रहे हैं, कह रहे हैं आजतक नदी की नीलामी नहीं हुई, कैसे नीलामी हो गया? हम लोगों से कहीं पूछकर पट्टा किया गया है ? हम लोग मछली मारेंगे और बेचेंगे।

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ऐसी परिस्थिति में उक्त राप्ती नदी के जलक्षेत्र का पट्टा लेने का कोई मतलब ही नहीं रह गया है, समिति को काफी आर्थिक क्षति हो रही है । शिकायतकर्ताओं ने चोरी से मछली मारकर बिक्री कर रहे मनबढ़ व्यक्तियों पर क़ानूनी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से मत्स्य आखेट व विक्री पर रोक लगाने की मांग किया है।

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बोर्ड की बैठक मे सदस्यों द्वारा निंदा प्रस्ताव

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शनिवार को नगर पालिका परिषद गौरा बरहज की बोर्ड की बैठक पालिका कार्यालय में सम्पन्न हुई, जिसमें सभासदगणों एवं अन्य की उपस्थिति में पालिका के बोर्ड व्यक्तिगत रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से की जा रही अभद्र टिप्पणी पर सामूहिक रूप से सभी सदस्यों द्वारा खेद व्यक्त करते हुए निन्दा प्रस्ताव पारित किया गया है।

जिससे स्पष्ट हो रहा है कि पालिका में निर्वाचित बोर्ड द्वारा नगर के विकास में किये कतिपय लोगों द्वारा किए जा रहे अनावश्यक रूप से व्यवधान पर अत्यन्त खेद व्यक्त किया है।

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तथा बैठक में नगर में हो रहे विकास कार्य पर चर्चा किया गया।
इस मौके पर सभासदगण, अधिशासी अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, अवर अभियंता, लेखाकार, विद्युत प्रभारी, निर्माण लिपिक, एस बी एम लिपिक उपस्थित रहे।

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डीएम-एसपी ने सम्पूर्ण समाधान दिवस में सुनी जन समस्याएँ


126 शिकायतें दर्ज, 7 का मौके पर निस्तारण – लेखपाल-कानूनगो को कड़ी चेतावनी

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। तहसील बैरिया में शनिवार को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने दूर-दराज़ से पहुंचे फरियादियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। समाधान दिवस में कुल 126 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 07 मामलों का तत्काल निस्तारण कर अधिकारियों ने राहत पहुंचाई। शिकायतों में भूमि विवाद एवं राजस्व मामलों की संख्या सर्वाधिक रही।
जिलाधिकारी ने राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम को निर्देश दिया कि सभी भूमि विवादों का मौके पर जाकर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि जन समस्याओं के समाधान में लापरवाही किसी भी दशा में स्वीकार नहीं होगी। नवकागांव के प्रधान ने अन्नपूर्णा भवन निर्माण में बाधा की शिकायत की, जिस पर डीएम ने नायब तहसीलदार को पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर जाकर निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया। वहीं प्राथमिक विद्यालय में विद्युत कनेक्शन न होने की शिकायत पर डीएम ने खंड शिक्षा अधिकारी और बीएसए को तुरंत कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने का आदेश दिया।डीएम ने समाधान दिवस के दौरान लेखपालों और कानूनगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि आबादी संबंधित सभी शिकायतों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए। उन्होंने सभी लंबित पट्टा मामलों को एक सप्ताह में हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी आदेशित किया कि प्रत्येक लेखपाल-कानूनगो प्रतिदिन 20 फार्मा रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से पूरा करें, अन्यथा लापरवाही पाए जाने पर वेतन रोक दिया जाएगा। समाधान दिवस में एसडीएम बैरिया आलोक प्रताप सिंह, सीएमओ, डीडीओ, बीएसए मनीष कुमार सिंह, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय एकता पदयात्रा की तैयारी बैठक सम्पन्न

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

बुधवार को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय एकता पदयात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए सिकंदरपुर के निकट गांधी आश्रम में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व मंत्री राजधारी ने सभी लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पदयात्रा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत बनाने के लिए यह पदयात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार पदयात्रा दोपहर 12 बजे फिरोजपुर (वनशक्ति देवी) से प्रारंभ होगी। पहला पड़ाव सूर्या हॉस्पिटल पंदह में तय किया गया है, जहां थोड़े विश्राम और जनसंवाद के बाद पदयात्रा आगे बढ़ेगी। इसके बाद पदयात्री शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए लगभग 3 बजे बस स्टैंड चौराहा पहुंचेंगे, जहां विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी। सभा में क्षेत्रीय समस्याओं, सामाजिक एकता और विकास के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। तैयारी बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, स्वागत प्रबंध, जनसंपर्क अभियान और मार्ग निर्धारण पर विशेष जोर दिया गया। विभिन्न टीमों को उनकी जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं। उपस्थित लोगों ने पदयात्रा को सफल और ऐतिहासिक बनाने का संकल्प व्यक्त किया।बैठक में प्रयाग चौहान, भोला सिंह, सुरेश सिंह, जयराम पांडे, मंजय राय, मैनेजर चौहान, विनोद शंकर गुप्ता, शेरू गुप्ता, अजय श्रीवास्तव, राजू सिंह, दयाशंकर भारती सहित कई सम्मानित नागरिक मौजूद रहे।19 नवंबर की पदयात्रा में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद सलेमपुर रविन्द्र कुशवाहा तथा भाजपा जिला अध्यक्ष संजय मिश्रा होंगे। अंत में पूर्व मंत्री ने बिहार में एनडीए की जीत पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नितीश कुमार को बधाई दी तथा कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की।

जिगना दीक्षित गाँव में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का शुभारंभ

भटनी/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) —

जिगना दीक्षित गाँव में शनिवार को भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। मंगल ध्वनियों, वैदिक मंत्रोच्चारण और श्रद्धालुओं के उत्साहपूर्ण सहभाग के बीच यह दिव्य यात्रा निकाली गई।

महायज्ञ का प्रथम दिवस अत्यंत मंगलमय रहा, जिसमें पूज्य पंडित बाल व्यास विष्णुदास शास्त्री जी के पावन मुखारविंद से भागवत महात्म की रसपूर्ण कथा का श्रवण किया गया। कथा में उन्होंने श्रीमद् भागवत के महात्म्य, भक्ति की शक्ति और सत्संग के महत्व को सरल एवं प्रेरणादायक शैली में प्रस्तुत किया।

गाँव के सैकड़ों भक्तजन, महिलाएँ, युवा एवं वरिष्ठजन बड़ी श्रद्धा व भक्ति भाव से कथा में उपस्थित रहे। वातावरण “हरे राम हरे कृष्ण” के मंत्रों से गुंजायमान हो उठा। यह कथा 14 नवंबर 2025 से 20 नवंबर 2025 तक होगी ।

मांगों को लेकर लेखपालों का तहसीलों में शांतिपूर्ण धरना, मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर शुक्रवार को सलेमपुर तहसील सहित प्रदेशभर की तहसीलों में लेखपालों ने अपनी वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना दिया। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस धरने में लेखपालों ने मुख्यमंत्री को संबोधित विस्तृत ज्ञापन उपजिलाधिकारी/तहसील समाधान दिवस प्रभारी को सौंपा और संवर्ग की दशकों पुरानी समस्याओं की ओर शासन का ध्यान आकृष्ट कराया।

ज्ञापन में कहा गया कि पिछले 9 वर्षों से लेखपाल संवर्ग की महत्वपूर्ण मांगें—प्रारंभिक वेतनमान उच्चीकरण, पदनाम परिवर्तन, एसीपी विसंगति निवारण, मृतक आश्रित लेखपालों को पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ, राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार के अतिरिक्त पदों का सृजन, स्टेशनरी व वाहन भत्ता में वृद्धि—पर अनेक चरणों में हुई बैठकों एवं पत्राचार के बावजूद अभी तक कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया है।

संघ ने यह भी बताया कि प्रदेश के 3000 से अधिक लेखपाल अपने परिवारों से 500 से 1000 किलोमीटर दूर तैनात हैं, पर 23 अगस्त 2018 के शासनादेश के अनुरूप अंतर्मंडलीय स्थानांतरण हेतु लिए गए ऑनलाइन आवेदनों की सूची छह वर्षों बाद भी जारी नहीं की गई। अन्य विभागों में हजारों कर्मचारियों के स्थानांतरण सम्पन्न हो चुके हैं, लेकिन लेखपाल संवर्ग का मामला अब भी लंबित है।

संघ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन को कार्य बहिष्कार, अतिरिक्त क्षेत्र छोड़ने, जनप्रतिनिधियों के आवासों पर प्रदर्शन तथा राजस्व परिषद एवं विधानसभा पर बड़े आंदोलन को बाध्य होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लेखपाल संवर्ग सदैव अनुशासन और संवाद में विश्वास रखता है, परंतु वर्षों की उपेक्षा से संवर्ग में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

धरना स्थल पर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ उप-साखा सलेमपुर के पदाधिकारी एवं सभी लेखपाल बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख पदाधिकारी—
तहसील अध्यक्ष लकमुद्दीन अंसारी, मंत्री परशुराम मिश्र, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल कुमार, कनिष्ठ उपाध्यक्ष आकाश कुशवाहा, उप मंत्री सतेन्द्र कुमार, कोषाध्यक्ष संतोष कुमार और ऑडिटर ब्रजेश पाण्डेय शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त नितेश चतुर्वेदी, मुन्ना प्रसाद, ओमप्रकाश कुशवाहा, संदीप यादव, अनुज वर्मा, कुलदीप चाहर, इंदुप्रकाश पाठक, अमजद अली, प्रीति मिश्रा, अंजली सिंह समेत अनेक लेखपालों की सक्रिय उपस्थिति रही।

धरना पूर्णतः शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में सम्पन्न हुआ।

देवरिया में सब जूनियर हैंडबॉल व सीनियर पुरुष कबड्डी टीमों के चयन/ट्रायल की तिथि घोषित

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देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। खेल निदेशालय उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार जनपद में सब जूनियर बालक हैंडबॉल एवं सीनियर पुरुष कबड्डी की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए जिला और मंडल स्तर पर टीम चयन/ट्रायल की तिथियां घोषित कर दी गई हैं। इसके तहत खिलाड़ियों का जिला स्तरीय ट्रायल 16 नवम्बर 2025 को प्रातः 10 बजे से रविन्द्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम, देवरिया में आयोजित होगा। वहीं मंडलीय चयन/ट्रायल 17 नवम्बर 2025 को प्रातः 11 बजे से क्षेत्रीय खेल कार्यालय, गोरखपुर में संपन्न होंगे।

पहली प्रतियोगिता प्रदेश स्तरीय सब जूनियर हैंडबॉल (बालक) की है, जिसका मुख्य आयोजन 21 से 24 नवम्बर 2025 तक अमेठी में किया जाएगा। इसमें भाग लेने हेतु खिलाड़ियों की आयु 31 दिसम्बर 2025 को 15 वर्ष या उससे कम होनी चाहिए, अर्थात जन्म तिथि 01 जनवरी 2011 के बाद की हो।

दूसरी ओर प्रदेश स्तरीय सीनियर पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन 19 से 21 नवम्बर 2025 तक सीतापुर में प्रस्तावित है। इसके लिए भी जिला व मंडलीय चयन की प्रक्रिया 16 व 17 नवम्बर को ही तय की गई है।

जिला खेल कार्यालय ने जनपद के सभी प्रधानाचार्यों/प्रधानाचार्याओं से अपील की है कि वे अपने स्कूल/कॉलेज के योग्य खिलाड़ियों को समय से चयन प्रक्रिया में भेजें। जनपदीय चयन में केवल देवरिया जनपद के खिलाड़ी ही प्रतिभाग कर सकेंगे।

चयन प्रक्रिया में सम्मिलित होने के लिए खिलाड़ियों को अनिवार्य रूप से आयु प्रमाण हेतु हाई स्कूल प्रमाणपत्र/आधार कार्ड/नगर पालिका द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र, साथ ही पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो साथ लाना होगा। बिना वैध दस्तावेजों के किसी भी खिलाड़ी को चयन में शामिल नहीं किया जाएगा।

जिला खेल कार्यालय ने इस संबंध में स्थानीय समाचार पत्रों, सूचना विभाग, शिक्षा विभाग, युवा कल्याण विभाग तथा जिला कबड्डी एवं हैंडबॉल संघ को आवश्यक जानकारी और सहयोग हेतु पत्र जारी किया है। चयन/ट्रायल की निगरानी प्रशिक्षकों एवं संबंधित संघ अधिकारियों की उपस्थिति में कराई जाएगी।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मनाई गई बिरसा मुंडा की जयंती

बिरसा मुंडा की जयंती पर जिलाधिकारी ने उनके चित्र पर किया माल्यार्पण व पुष्प अर्पित

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) शनिवार को जिलाधिकारी प्रवीण मिश्रा की अध्यक्षता में बिरसा मुंडा की जयंती जनपद के तहसील घोसी में मनाई गई। जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी और उपनिवेशवाद विरोधी बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में भारत में हर साल 15 नवंबर को जनजाति गौरव दिवस मनाया जाता है। बिरसा मुंडा का जन्म 1874 में हुआ था। वर्ष 2024-25 को उनके जन्म के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किया गया। इस दौरान जिला उप जिलाधिकारी घोसी, जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास रश्मि मिश्रा, जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों ने भी बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित किया।

कांग्रेस बोली—नतीजे चौंकाने वाले, जांच होनी चाहिए

बिहार चुनाव में ‘वोट चोरी’ का आरोप फिर गर्माया—कांग्रेस ने चुनाव आयोग और PM मोदी पर साधा निशाना

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान 69 लाख वोट विपक्षी मतदाताओं के निशाने पर रखकर हटाए गए, जिसे उसने साफ तौर पर “Bihar Election Vote Chori” की साजिश बताया।

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कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अन्य राज्यों—दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और बेंगलुरु में वोट डालने के बाद विशेष ट्रेनों के माध्यम से बिहार पहुंचकर भी मतदान किया। पार्टी का कहना है कि इन ट्रेनों में यात्रियों को टिकट दिलवाकर खास पहचान पटका पहनाकर भेजा गया था, जिससे भाजपा को अतिरिक्त वोट मिल सकें।

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कांग्रेस ने दावा किया कि 6 अक्टूबर को जब चुनाव की घोषणा हुई, तब बिहार के कुल मतदाता 7.42 करोड़ बताए गए। लेकिन 11 नवंबर को वोटिंग पूरी होने के बाद यह संख्या बढ़कर 7.45 करोड़ हो गई। कांग्रेस ने सवाल किया कि मतदान के बीच अचानक तीन लाख वोटर कैसे बढ़ गए?

रिपोर्टर्स कलेक्टिव की जांच का हवाला देते हुए कहा गया कि 1.32 करोड़ से ज्यादा संदिग्ध वोटर सूची में मिले। इनमें 39 विधानसभा सीटों पर 3.76 लाख संदिग्ध वोट चिन्हित हुए, जबकि 1.88 लाख नाम दोहरी प्रविष्टि के साथ दर्ज थे। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि चुनाव आयोग ने डुप्लीकेट वोट पकड़ने वाले सॉफ़्टवेयर का उपयोग नहीं किया, जिसके कारण 14.35 लाख फर्जी वोटर लिस्ट में शामिल हो गए।

आचार संहिता लागू होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को 10,000 रुपये की किस्त भेजे जाने को भी कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करार दिया। अजय माकन ने कहा कि नतीजे अप्रत्याशित हैं और “दाल में कुछ तो काला है।” उन्होंने आश्वासन दिया कि पार्टी जल्द ही फॉर्म 17C और वोटर लिस्ट के साथ तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करेगी।

लेखपालों का एकदिवसीय धरना प्रदर्शन, आठ सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर बढ़ा दबाव

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) बरहज तहसील प्रांगण में शनिवार को लेखपाल संघ बरहज ने अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया। लंबे समय से लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई न होने से नाराज़ लेखपालों ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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धरना स्थल पर लेखपालों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में उन्हें कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी प्रमुख मांगों में प्रारम्भिक वेतनमान का उच्चिकरण, पदोन्नति के अवसर बढ़ाना, भत्तों में वृद्धि, अंतर्मण्डलीय स्थानांतरण व्यवस्था, पेंशन तथा एसीपी विसंगतियों का निराकरण, पदनाम परिवर्तन, तथा राजस्व पुलिस चौकी की स्थापना शामिल हैं।

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लेखपाल संघ बरहज के अध्यक्ष सुकेश तिवारी ने कहा कि संगठन की मांगें पूरी तरह व्यावहारिक और न्यायसंगत हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा—“यदि सरकार जल्द ठोस कार्रवाई नहीं करती है तो लेखपाल संघ कार्य बहिष्कार जैसे कठोर कदम उठाने को बाध्य होगा।”

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धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लेखपाल मौजूद रहे। इनमें गोविन्द कुमार, रमेश पटेल, राजू यादव, रिंकू कुमारी, पवन पाण्डेय, विवेक सिंह, नेहा यादव, राहुल मिश्रा, राहुलदेव गुप्ता, आनंद सिंह सहित अन्य कई लेखपाल शामिल रहे।
धरने के दौरान संगठन की एकता और अपनी मांगों के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

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इस प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है, वहीं लेखपालों की इन मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है, यह देखने वाली बात होगी।

तनाव से नाता क्यों नहीं छूटता? — व्यस्त जीवन में मानसिक संतुलन बचाने का सबसे सरल मंत्र

आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में तनाव (Stress) किसी अनचाहे मेहमान की तरह हमारे जीवन में घुस आया है। ऑफिस का दबाव, आर्थिक चुनौतियाँ, पढ़ाई का बोझ, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ, रिश्तों में बढ़ती दूरी—इन सबके बीच आम आदमी हर दिन एक अदृश्य लड़ाई लड़ रहा है। तनाव दिखाई नहीं देता, आवाज नहीं करता, लेकिन धीरे-धीरे पूरा जीवन खोखला कर देता है।

दुनिया विकसित हो चुकी है, पर इंसान भीतर से टूटता जा रहा है। अस्पतालों में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और अनिद्रा के मरीजों की बढ़ती संख्या बताती है कि तनाव अब शारीरिक बीमारी का सबसे बड़ा कारक बन चुका है।

ऐसे समय में यह समझना बेहद जरूरी है कि तनाव हमारे जीवन का हिस्सा है, पर इसका प्रबंधन हमारी जिम्मेदारी है।

तनाव क्यों बढ़ रहा है?

  1. डिजिटल दबाव — 24 घंटे मोबाइल की गूंज ने दिमाग को आराम देना बंद कर दिया है।
  2. व्यस्त जीवनशैली — काम और निजी जीवन के बीच संतुलन लगभग खत्म हो चुका है।
  3. अधिक अपेक्षाएँ — हम खुद से भी और दूसरों से भी ज़रूरत से ज्यादा उम्मीद कर रहे हैं।
  4. भागदौड़ का समाज — हर कोई एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में है।

दैनिक जीवन में तनाव कम करने के 7 सरल और कारगर उपाय

  1. 15 मिनट का सुबह का मौन — मानसिक रीसेट बटन

दिन की शुरुआत कुछ क्षण खुद को सुनने से करें। यह मन को स्थिर करता है और दिनभर का तनाव कम करता है।

  1. मोबाइल डिटॉक्स — हर दिन 1 घंटे स्क्रीन से दूरी

इस दौरान न मोबाइल, न सोशल मीडिया। आप देखेंगे कि दिमाग हल्का महसूस करेगा।

  1. 20 मिनट की वॉक — मुफ्त की दवाई, सबसे असरदार

चलना मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य के लिए वरदान है।
थोड़ी तेज़ चाल से चलने पर तनाव हार्मोन Cortisol तेजी से गिरता है।

  1. काम बाँटें, थकान नहीं

हर जिम्मेदारी खुद पर लेना तनाव को निमंत्रण देना है।
घर और ऑफिस दोनों जगह छोटे काम दूसरों को दें।

  1. रिश्तों में संवाद — तनाव का सबसे बेहतर इलाज

घर में 15 मिनट “नो-फोन टाइम” रखें, जिसमें परिवार एक-दूसरे से बात करे।
भावनाएँ साझा करने से आधा तनाव उसी वक्त खत्म हो जाता है।

  1. 7 घंटे की नींद — दिमाग की सबसे जरूरी जरूरत

नींद की कमी हर बीमारी का द्वार खोलती है।
सोने से 1 घंटे पहले मोबाइल बंद रखें—नींद की गुणवत्ता बदलते देखेंगे।

  1. खुद के लिए वक्त

5 मिनट का चाय का समय भी सिर्फ “खुद” के नाम कीजिए।
यह छोटा सा ब्रेक पूरे दिन की थकान को आधा कर देता है।

तनाव का सच — मौन हत्यारा, पर रोका जा सकता है

तनाव कोई बीमारी नहीं, लेकिन बीमारी की जड़ ज़रूर है।
भारत में लगभग हर चौथा व्यक्ति तनाव से प्रभावित है, लेकिन मात्र 8% लोग इसके लिए मदद लेते हैं।
समस्या इतनी नहीं जितनी हमारी चुप्पी बड़ी है।

हम अपने काम, नाम, धन और शोहरत के पीछे भागते-भागते खुद को भूल गए हैं।
जब तक मन स्वस्थ नहीं, कोई लक्ष्य, कोई सफलता, कोई उपलब्धि खुशी नहीं दे सकती।

इसलिए समय रहते खुद को बचाएँ।
तनाव से लड़ना मजबूरी नहीं, आत्म-देखभाल का तरीका है।

आज की पीढ़ी को सबसे ज्यादा जरूरत है—
एक शांत मन, संतुलित जीवन और मानसिक स्थिरता की।

इस लेख का संदेश यही है कि

“हम तनाव को रोक नहीं सकते, लेकिन जीवन की रफ़्तार को अपने अनुसार ढालकर उसे आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं।”

साहित्य, समाज और संस्कृति के महान नक्षत्रों को स्मरण का दिन

15 नवंबर को हुए महान व्यक्तित्वों के निधन: इतिहास के पन्नों में दर्ज अमर विरासतें

भारत के इतिहास में 15 नवंबर केवल तिथि नहीं, बल्कि उस दिन को याद करने का अवसर है, जब कई महान विभूतियाँ इस पृथ्वी से विदा होकर अपनी अमर स्मृतियाँ छोड़ गईं। साहित्य, समाज सेवा, अभिनय, इतिहास, आध्यात्म और क्रांतिकारी विचारों की अलग-अलग राहों पर चलने वाले इन व्यक्तियों ने अपने जीवन से वह उदाहरण स्थापित किए, जिन्हें समय कभी मिटा नहीं सकता।
2021 – बाबासाहेब पुरंदरे
बाबासाहेब पुरंदरे, जिन्हें “शिवशाहीर” भी कहा जाता है, मराठी साहित्य, इतिहास और नाटक जगत की सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों में गिने जाते थे। उनका महाकाव्यात्मक नाटक ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ और छत्रपति शिवाजी महाराज पर लिखा गया विस्तृत ऐतिहासिक साहित्य उनकी गहन शोध क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने शिवकाल की गौरवगाथा को आम जनता तक पहुँचाने में जीवन समर्पित किया। उनके निधन से मराठी संस्कृति और इतिहास प्रेमियों की दुनिया में गहरी रिक्तता उत्पन्न हुई।

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2020 – सौमित्र चटर्जी
प्रसिद्ध बंगाली अभिनेता सौमित्र चटर्जी, सत्यजीत रे के प्रिय कलाकारों में से एक थे। उनकी असाधारण अभिनय शैली ने भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। ‘अपूर संसार’, ‘चारुलता’, ‘अभिजान’ जैसी क्लासिक फिल्मों में उनका प्रदर्शन आज भी अभिनय कला का मानक माना जाता है। मंच, कविता, लेखन और आवाज—हर क्षेत्र में वे प्रतिभा की मिसाल थे। उनका निधन भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति थी।
2013 – कृपालु महाराज
मथुरा के प्रसिद्ध संत कृपालु महाराज अपने आध्यात्मिक ज्ञान, भक्ति आंदोलन में योगदान और ‘प्रेम मंदिर’ जैसी भव्य संरचना के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं। उनका उपदेश प्रेम, करुणा, सरलता और कृष्ण भक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने दुनिया भर में असंख्य लोगों के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन लाने का कार्य किया। उनकी भक्ति-साधना और दानशीलता का स्वरूप आज भी अनगिनत हृदयों में जीवित है।

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1961 – बंकिम मुखर्जी
बंकिम मुखर्जी भारत के पहले ऐसे कम्युनिस्ट नेता थे जो विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। सामाजिक न्याय, मजदूरों के अधिकार, और समानता वाली राजनीति के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने भारतीय मजदूर आंदोलन को एक वैचारिक दिशा दी। संघर्षों के बीच भी वे जनता के बीच जमीन से जुड़े नेता के रूप में प्रसिद्ध थे। उनका निधन भारतीय वामपंथी राजनीति में एक संवेदनशील अध्याय का अंत था।
1937 – जयशंकर प्रसाद
आधुनिक हिन्दी साहित्य के स्तंभ जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रमुख कवि, नाटककार और उपन्यासकार थे। ‘कामायनी’, ‘आंसू’, ‘स्कंदगुप्त’ जैसी रचनाएँ हिन्दी साहित्य को नई गहराई और दर्शन प्रदान करती हैं। वे भाषा में सौंदर्य, भाव और भावना की शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। प्रसाद का निधन साहित्य जगत के लिए ऐसा क्षण था, जिसने हिन्दी भाषा को सदैव के लिए एक अनमोल मार्गदर्शक खो दिया।
1938 – महात्मा हंसराज
पंजाब के महान आर्य समाजी नेता, समाज सुधारक और शिक्षा के अग्रदूत महात्मा हंसराज, डीएवी संस्थान के प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज परिवर्तन की नींव रखी और भारतीय युवाओं को आधुनिक परंतु संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सेवाओं ने शिक्षण के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित किए। उनका जीवन समाज उत्थान और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।
1982 – विनोबा भावे
विनोबा भावे गांधीवादी दर्शन के सर्वश्रेष्ठ अनुयायियों में से थे। ‘भूदान आंदोलन’ के माध्यम से उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से सामाजिक समरसता का वह मार्ग दिखाया, जिसकी मिसाल विश्व में दुर्लभ है। वे साधना, तपस्या और नैतिक नेतृत्व के प्रतीक थे। साधारण जीवन जीते हुए उन्होंने असमानता मिटाने के लिए पूरी उम्र समर्पित कर दी। उनका निधन युगांतकारी विचारधारा के महान संत का विदा होना था।
1996 – आर.सी. प्रसाद सिंह
आरसी प्रसाद सिंह हिन्दी के प्रतिष्ठित कवि, कथाकार और एकांकीकार थे। उनकी लेखनी में समाज, मानव संवेदना और बदलते परिवेश की तीव्र अनुभूति झलकती थी। भाषा की सरलता और विषयों की गहराई ने उन्हें साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दी। उनके नाटक और कविताएँ आज भी साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका निधन हिन्दी साहित्य को एक संवेदनशील रचनाकार से वंचित कर गया।
1981 – कमलाबाई होसपेट
कमलाबाई होसपेट महाराष्ट्र की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता थीं, जिन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों की upliftment के लिए लंबा संघर्ष किया। शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला अधिकारों के लिए उनके द्वारा चलाए गए अभियान व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार बने। वे ग्रामीण क्षेत्रों की आवाज थीं और उन्होंने समाज सेवा को जीवन का धर्म माना। उनका निधन समाज सेवा के क्षेत्र में बड़े शून्य का कारण बना।
2017 – कुंवर नारायण
कुंवर नारायण आधुनिक हिन्दी कविता के अत्यंत सम्मानित कवि थे, जिनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, इतिहास, दर्शन और सामयिक प्रश्नों की गहरी पड़ताल करती हैं। उनकी कविता में बौद्धिकता और भावनात्मकता का अनूठा संतुलन मिलता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित कई सम्मान उनके रचनात्मक वैचारिक योगदान का प्रमाण हैं। उनका निधन हिन्दी साहित्य के स्वर्णिम अध्याय का खोना माना जाता है।

इन 5 सब्ज़ियों से कम हो सकता है फैटी लिवर, जानें इन्हें खाने का सही समय और फायदे

नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ (NAFLD) आज युवाओं में तेजी से बढ़ती समस्या बन चुकी है। शुरुआती चरण में यह ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाती, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह गंभीर लिवर रोग का कारण बन सकती है। अच्छी बात यह है कि हल्के फैटी लिवर को सही खान-पान, वजन नियंत्रित रखने और वर्कआउट के जरिए काफी हद तक रिवर्स किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ खास सब्ज़ियां लिवर की फैट जमा करने वाली प्रक्रिया को धीमा करती हैं और डिटॉक्स प्रक्रिया को मजबूत बनाती हैं। इन सब्ज़ियों को नियमित डाइट में शामिल करने से लिवर के कार्य में सुधार देखा गया है।

  1. चुकंदर – लिवर का सुपरफूड

चुकंदर में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और नाइट्रेट्स की भरपूर मात्रा होती है। यह लिवर में खून के प्रवाह को बढ़ाकर डिटॉक्स क्षमता को बेहतर करता है। चुकंदर पित्त बनने में मदद करता है, जिससे शरीर में जमा वसा तेजी से टूटती है। इसे सलाद, जूस या रोस्टेड रूप में लिया जा सकता है।

  1. लेग्यूम्स – फैट घटाने में सहायक

राजमा, चना, मसूर और छोले जैसे लेग्यूम्स पौधे आधारित प्रोटीन और फाइबर के बेहतरीन स्रोत हैं। इनमें फैट कम होता है और यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखते हैं, जो फैटी लिवर वाले लोगों के लिए बेहद ज़रूरी है। कई स्टडीज़ में पाया गया है कि मांस की जगह दालें लेने से लिवर फैट कम होता है।

  1. लहसुन – प्राकृतिक डिटॉक्स बूस्टर

लहसुन में मौजूद सल्फर कंपाउंड लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करता है और लिवर की प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है। रोज़ाना खाने में लहसुन शामिल करने से सूजन भी घटती है।

  1. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां – लिवर की सफाई में असरदार

पालक, मेथी और केल में मौजूद क्लोरोफिल शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है। इनमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो लिवर पर oxidative stress को कम करते हैं। रिसर्च के मुताबिक, नियमित रूप से पालक का सेवन फैटी लिवर के जोखिम को कम करता है।

  1. क्रूसीफ़ेरस सब्ज़ियां – सूजन और फैट दोनों कम

ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी जैसी सब्ज़ियां फाइबर और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं। इनमें मौजूद ‘इंडोल’ नामक कंपाउंड लिवर में चर्बी और सूजन कम करने में मदद करता है। हफ्ते में 2-3 बार इन सब्ज़ियों का सेवन लाभकारी माना जाता है।

इन सब्ज़ियों को खाने का सही समय

चुकंदर: सुबह सलाद या जूस में

लेग्यूम्स: दोपहर या रात के भोजन में

लहसुन: सुबह कच्चा या सब्ज़ियों में

हरी सब्ज़ियां: दोपहर या रात के भोजन के साथ

ब्रोकली/फूलगोभी: हफ्ते में 2-3 बार लंच या डिनर में

लिवर को बेहतर रखने के लिए संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह भी उतनी ही जरूरी है।

प्रेरणा, संघर्ष और सफलता की जीवंत कहानियाँ

15 नवंबर को जन्मे महान व्यक्तित्व – इतिहास में अमर योगदान देने वाली प्रेरक विभूतियाँ


मानव इतिहास के पन्नों में कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं जो केवल कैलेंडर नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति, राष्ट्र और मानवीय मूल्य की नई इबारतें लिखते हुए दिखाई देती हैं। 15 नवंबर ऐसी ही एक तिथि है, जब अनेक विभूतियाँ जन्मीं, जिनकी प्रतिभा, समर्पण और अदम्य साहस ने देश को गौरव और नई दिशा प्रदान की। स्वतंत्रता संघर्ष से लेकर साहित्य, खेल, प्रशासन और वीरता के शिखर तक—यह दिन भारतीय इतिहास को स्वर्णिम अध्यायों से भर देता है। आइए, इस विशेष दिन पर अवतरित उन महापुरुषों के जीवन और योगदान पर गहराई से प्रकाश डालते हैं।

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  1. शहीद ज्योति प्रकाश निराला – अशोक चक्र से सम्मानित अमर गरुड़ कमांडो
    जन्म: 15 नवंबर 1986, बकुला गाँव, सुपौल जिला, बिहार
    भारतीय वायुसेना के गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति की जीती-जागती मिसाल थे। सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े निराला ने शिक्षा पूरी करने के बाद वायुसेना में भर्ती होकर राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। 2017 में कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में उन्होंने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए कई आतंकियों को मार गिराया। शहीद होने के बाद उन्हें भारत के सर्वोच्च शौर्य पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनका जीवन युवाओं के लिए साहस और कर्तव्यनिष्ठा की अद्भुत प्रेरणा है।
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  3. सानिया मिर्जा – भारतीय टेनिस का चमकता सितारा
    जन्म: 15 नवंबर 1986, मुंबई, महाराष्ट्र
    सानिया मिर्ज़ा भारतीय टेनिस की वह पहचान हैं जिन्होंने देश को वैश्विक मंच पर अभूतपूर्व सम्मान दिलाया। हैदराबाद में शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे टेनिस के अंतरराष्ट्रीय सर्किट में उतरीं और जल्द ही भारत की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी बन गईं। ग्रैंड स्लैम डबल्स खिताब जीतकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में नया अध्याय लिखा। अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से सानिया ने न केवल अनेक पदक जीते, बल्कि देश की अनगिनत बेटियों को खेल मंच पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी।
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  5. सुमराइ टेटे – भारतीय महिला हॉकी की अदम्य योद्धा
    जन्म: 15 नवंबर 1979, खूंटी जिला, झारखंड
    झारखंड की मिट्टी से उभरकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाली सुमराइ टेटे भारतीय महिला हॉकी टीम की एक मजबूत खिलाड़ी रहीं। गाँव के विद्यालय से प्रारंभ हुई उनकी हॉकी यात्रा उन्हें एशियाई खेलों और विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं तक ले गई। सीमित साधनों के बावजूद खेल के प्रति उनका समर्पण असाधारण रहा। अपने कौशल और मेहनत से टेटे ने आदिवासी क्षेत्र की युवतियों में खेल के प्रति नई ऊर्जा भरी।
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  7. पंकज चौधरी – जनसेवा में समर्पित लोकप्रिय सांसद
    जन्म: 15 नवंबर 1964, महाराजगंज, उत्तर प्रदेश
    उत्तर प्रदेश के महाराजगंज से आने वाले पंकज चौधरी लंबे समय से भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं। प्रदेश की शिक्षा पद्धति से जुड़े रहने के बाद उन्होंने जनसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। 16वीं लोकसभा में सांसद के रूप में उन्होंने क्षेत्रीय विकास, सड़क, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रयास किए। शांत स्वभाव और सरल कार्यशैली उन्हें जनता के निकट बनाए रखती है।
  8. अश्विनी कुमार – सीबीआई के पूर्व निदेशक एवं अनुशासन का प्रतीक
    जन्म: 15 नवंबर 1950, पंजाब
    भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अश्विनी कुमार ने अपनी शिक्षा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पूरी की। उनकी कार्यशैली ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के लिए जानी जाती है। वे सीबीआई के निदेशक पद तक पहुँचे और कई महत्वपूर्ण मामलों को निष्पक्षता से आगे बढ़ाया। अपने दृढ़ नेतृत्व और सख्त प्रशासनिक क्षमता के कारण वे देश के प्रमुख सुरक्षा अधिकारियों में गिने जाते हैं।
  9. रमेश चंद्र शाह – हिंदी साहित्य के बहुमुखी साधक
    जन्म: 15 नवंबर 1937, सागर, मध्य प्रदेश
    हिंदी साहित्य के दिग्गज लेखक, नाटककार, उपन्यासकार और बेहद कुशल समालोचक रमेश चंद्र शाह का जन्म मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक भूमि पर हुआ। उच्च शिक्षा प्राप्त कर वे साहित्य की विविध विधाओं से जुड़े। उनकी लेखनी में भारतीय संस्कृति, मानव मनोविज्ञान और सामाजिक प्रश्नों का अत्यंत संवेदनशील चित्रण मिलता है। ‘विमर्श’, ‘कथा’, ‘उपन्यास’—हर क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य है।
  10. टी. एस. मिश्रा – असम के भूतपूर्व राज्यपाल एवं प्रशासकीय व्यक्तित्व
    जन्म: 15 नवंबर 1922, बिहार
    टी. एस. मिश्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा के सुदृढ़ स्तंभ रहे। बिहार की पृष्ठभूमि से आने वाले मिश्रा ने शिक्षा पूर्ण कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और बाद में असम के राज्यपाल बने। उनका शासनकाल अनुशासन, विकासोन्मुख नीतियों और शांतिपूर्ण वातावरण के निर्माण के लिए जाना जाता है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में सुशासन की मिसाल कायम की।
  11. एस. वी. कृष्णमूर्ति राव – स्वतंत्र भारत की राजनीति के समर्पित कार्यकर्ता
    जन्म: 15 नवंबर 1902, आंध्र प्रदेश
    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सक्रिय नेता एस. वी. कृष्णमूर्ति राव स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीतिक कार्यों में नेतृत्व का परिचय दिया। आज़ादी के बाद वे लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। उनका जीवन समाज-सेवा और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।
  12. बिरसा मुण्डा – आदिवासी गौरव और स्वतंत्रता संघर्ष के अमर नायक
    जन्म: 15 नवंबर 1875, उलिहातू, खूंटी, झारखंड
    भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी समाज के सबसे बड़े नायक धरती आबा बिरसा मुण्डा का जन्म झारखंड की धरती पर हुआ। अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे बिरसा ने शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक शोषण और ब्रिटिश अत्याचारों को करीब से देखा। उन्होंने उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसमें आदिवासी समाज ने एकजुट होकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष छेड़ा। बिरसा मुण्डा ने कम आयु में ही भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष को नया स्वरूप दिया। उनकी जयंती देशभर में ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।
  13. कार्नेलिया सोराबजी – भारत की प्रथम महिला बैरिस्टर
    जन्म: 15 नवंबर 1866, नासिक, महाराष्ट्र
    कार्नेलिया सोराबजी भारतीय न्यायिक इतिहास की वह प्रथम महिला थीं जिन्होंने सामाजिक बाधाओं को तोड़ते हुए बैरिस्टर बनने का गौरव हासिल किया। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से विधि शिक्षा प्राप्त करने वाली कार्नेलिया ने भारत की महिलाओं, विशेषकर पुरदाह-प्रथा में बंद जीवन जीने वाली स्त्रियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई। वे महिलाओं के अधिकार और न्याय के लिए आजीवन संघर्ष करती रहीं। भारतीय न्याय व्यवस्था में उनके योगदान को सदैव सम्मान से याद किया जाता है।
    15 नवंबर को जन्मे ये सभी महानुभाव अपने-अपने क्षेत्रों में ऊंचाइयों पर पहुंचे और उन्होंने भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक, प्रशासनिक, साहित्यिक, खेल तथा स्वतंत्रता की धारा को नई दिशा प्रदान की। इनका जीवन हमें बताता है कि जन्म तिथि चाहे कोई भी हो—समर्पण, साहस, दृढ़ता और राष्ट्रप्रेम से कोई भी व्यक्ति इतिहास में अमर हो सकता है।

एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी

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• डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी,
किसी एक समझदार शख़्स ने,
कह कर सुनाई अपनी ज़ुबानी,
जिसने सुना उसको हुई हैरानी,
जीवन क्षणभंगुर, न बचती निशानी,
एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी।

प्यासे सिकंदर को रेतीले रेगिस्तान में
नहीं दिया फ़क़ीर ने एक लोटा पानी,
सारा साम्राज्य देने को तैयार था वह,
तड़पने को मजबूर दुनिया का विजेता,
पानी लिये फ़क़ीर की न हुई मेहरबानी,
एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी।

सफल जीवन के चार सूत्र हैं,
मेहनत करने से धन बनता है,
धीरज रखने से काम बनता है,
मीठे बोल से पहचान बनती है,
इज्जत करने से नाम बढ़ता है,
यही है हमारे जीवन की कहानी,
एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी।

शौक भले ही कितने ऊँचे रखिए,
लेकिन जिम्मेदारी से बढ़कर नहीं,
जीवन तो प्रेम, दया, धर्म के लिये है,
शासन, सत्ता, ताक़त क्षण भर की हैं,
कब छिन जाएँगी, न हो परेशानी,
एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी।

धन दौलत, ज्ञान व ताक़त का अभिमान,
ये कौन हैं कोई न सका अब तक पहचान,
मैं कौन हूँ, आप कौन हैं, कोई न सके जान,
वक्त बदलते ये न साथ रह पाते,
इनका कोई वजूद भी नहीं रहता,
आदित्य अहंकार वश न हो अभिमानी,
एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी।