Tuesday, June 30, 2026
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भक्ति के माध्यम से होता है मोक्ष की प्राप्ति – आचार्य अजय शुक्ल

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अहिरौली में चल रहे देवी भागवत पुराण कथा का तीसरा दिन

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।सांसारिक मोह माया से मुक्ति का माध्यम है भक्ति जिसके बल पर मानव शरीर को मोक्ष की प्राप्ति होती है।उक्त बातें क्षेत्र के अहिरौली में चल रहे देवी भागवत पुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा।उन्होंने भगवान शिव की पहली पत्नी सती की कथा सुनाते हुए कहा कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती ने पिता के विरोध के वावजूद भगवान शिव से विवाह किया था। जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया था तो शिवजी को अपमानित करने के लिए निमंत्रण नही भेजा था ,लेकिन सती बिना बुलावे के ही यज्ञ में पहुंच गई।वहां कोई उनका आवभगत नही किया। जिससे कुपित होकर सती ने आत्मदाह कर लिया। इस पर नाराज हो कर भगवान शिव ने वीरभद्र को दक्ष का वध करने का आदेश दिया।जिसके बाद सती के शव को उठाकर तांडव नृत्य करने लगे।पृथ्वी पर हाहाकार मच गया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से मां सती के 51 टुकड़े कर दिया वही भारत में 51 शक्तिपीठ बन गए।बाद में सती ने राजा हिमांचल के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया तथा भगवान शिव से विवाह किया। इस संसार में किसी भी व्यक्ति को बिना बुलाये कहीं भी किसी मांगलिक या शुभ कार्य में नही जाना चाहिए।क्योंकि हो सकता है कि आप का वहां सम्मान न हो और आपको अपमानित होना पड़े।अपने दिनचर्या के साथ ही बचे हुए समय को भगवान की सेवा और आराधना में लगावें।आपका कल्याण परमात्मा करेंगे। कथा के दौरान गोरख प्रसाद गुप्ता, पिंकी देवी,गुड्डू बाबा,चंद्रभूषण तिवारी, प्रतीक मिश्र, मुन्ना, विमला देवी, पार्वती देवी,विनोद कुमार, सुशील कुमार आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम सख्त,मातृ मृत्यु दर घटाने व आयुष्मान कार्ड अभियान तेज करने के निर्देश

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार को जिला स्वास्थ्य समिति की महत्वपूर्ण बैठक जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में मातृ मृत्यु दर में कमी, आयुष्मान कार्ड निर्माण में तेजी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रसव किसी भी स्थिति में निजी संस्थानों में न कराए जाएं। उन्होंने आशा कार्यकत्रियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एनआरएलएम टीम को यह निर्देश दिया कि सभी प्रसव सरकारी अस्पतालों में ही सुनिश्चित कराए जाएं। डीएम ने सभी एमओआईसी (चिकित्सा अधीक्षक) को फील्ड स्तर पर कड़ी निगरानी रखने और निजी संस्थानों में डिलीवरी कराने वाली आशा व अन्य कार्यकर्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मातृ मृत्यु दर को गंभीर विषय बताते हुए डीएम ने कहा कि इसे हर हाल में कम करना जिले की प्राथमिकता है। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों को गांव-गांव जाकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में 275 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर सीएचओ व एएनएम की तैनाती है, लेकिन कई केंद्रों पर इनके अनुपस्थित रहने की शिकायतें मिल रही हैं। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए जांच के आदेश दिए और सभी एमओआईसी को नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आयुष्मान कार्ड निर्माण की धीमी प्रगति पर भी डीएम ने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जिले को 16 लाख कार्ड बनाने का लक्ष्य मिला है, जिसके सापेक्ष अभी तक मात्र 9 लाख 60 हजार कार्ड ही बनाए जा सके हैं। शेष लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही मुरलीछपरा के एमओआईसी को निर्देशित किया गया कि आशा और एएनएम के माध्यम से आभा आईडी निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। संचारी रोगों की रोकथाम के लिए विशेष टीमें गठित कर प्रभावी अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सारथी वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अनेक अधिकारी उपस्थित
रहे

मिशन शक्ति के तहत चितबड़ागांव में महिला सुरक्षा जागरूकता अभियान।

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) शनिवार को पुलिस अधीक्षक बलिया के निर्देशन में मिशन शक्ति फेज-5.0 अभियान के अंतर्गत थाना चितबड़ागांव क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण एवं महिला सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान कस्बा चितबड़ागांव में बालिकाओं व महिलाओं को उनकी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया। अभियान के दौरान उपस्थित बच्चियों व महिलाओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई तथा उनकी सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के बारे में विस्तार से बताया गया। पुलिस टीम द्वारा यह भी समझाया गया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, विवेक और संयम से काम लेते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें। महिला सुरक्षा हेतु जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों जैसे डायल 112, 1076, 1090, 102 और 108 की जानकारी दी गई और आवश्यक स्थिति में तत्काल कॉल करके सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर ठगी से बचाव पर विशेष जोर दिया गया। आमजन को अनजान लिंक पर क्लिक न करने, अनचाही कॉल रिसीव न करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत टोल फ्री नंबर 1930 पर देने की अपील की गई। इस जागरूकता अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं में सुरक्षा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाना एवं उन्हें कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना रहा।

संदिग्ध हालात में युवक की मौत से मचा हड़कंप, हत्या का आरोप लगाकर परिजनों ने किया हंगामा

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के मानपुर में 20 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की खबर मिलते ही गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। मृतक की पहचान सुमित वर्मा पुत्र सुधामा वर्मा के रूप में हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक सुमित वर्मा रोज की तरह घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने जब उसकी तलाश शुरू की तो अगले दिन गांव से कुछ दूरी पर उसका शव संदिग्ध हालत में बरामद हुआ। शव मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं, मृतक के पिता ने थाना में तहरीर देकर गांव के पांच लोगों पर हत्या का सीधा आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि पुरानी रंजिश के चलते उनके बेटे की निर्मम हत्या की गई। घटना के बाद पूरे गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर गांव में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सके। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस जघन्य घटना का जल्द खुलासा कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।

पीड़िया विसर्जन में उमड़ा जनसैलाब,

सरयू किनारे डीजे पर बजे भक्ति गीत

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा ) मईल थाना क्षेत्र के भागलपुर में परंपरागत पीड़िया विसर्जन का भव्य आयोज सरयू तट स्थित कालीचरण घाट पर उत्साह और आस्था के माहौल में संपन्न हुआ। आसपास के लगभग 20 गांवों से हजारों की संख्या में माताएँ, बहनें और युवतियाँ विसर्जन कार्यक्रम में शामिल हुईं। सुबह घाट पर मेले जैसा दृश्य देखने को रहा।
घाट पर महिलाओं ने अपनी सजी हुई पीड़िया—जिन्हें कई लोग पत्र, थाली और टोकरी में फूल-गुब्बारे के साथ लेकर आए थे। पीडिया पारंपरिक विधि-विधान से विसर्जन किया। इस अवसर पर चाट , फूल्फी, मिठाई व खिलौनों की कई दुकानें लगी रहीं जिन पर काफी भीड़ थी।
गोवर्धन पूजा के बाद शुरू होने वाली इस परंपरा के तहत महिलाएँ गोबर से बनी पीडिया को एक माह तक घर में कथा, भजन और पूजा के साथ स्थापित रखती हैं। ठीक एक महीने बाद इसे नदी तालाब में प्रवाहित किया जाता है। मान्यता है कि इस पूजा से भाइयों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना पूर्ण होती है। इसी अनुष्ठान के दौरान महिलाएँ ‘16 दाना’ चावल के दाने जल से निग़लकर अपने भाइयों की मंगलकामना करती हैं।
भागलपुर, छित्तूपुर, रेवली, देवकली, बलिया, नेमा,धरहरा, धाकपुरा, धर्मनेर,महलिया, लीलइकोठी, सतीहरा , इशारू, जिरासों, मुरासो, नारियांव सहित विभिन्न गांवों की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी निभाई। पूरे आयोजन में जगह-जगह डीजे भी लगाए गए, हालांकि कुछ लोगों ने बताया कि कुछ स्थानों पर बज रहे गीत पारंपरिक माहौल के अनुरूप नहीं थे।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की थी। पुलिस बल की तैनाती, मार्ग-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण सुचारू रहा। देर रात तक घाट और आसपास के क्षेत्रों में चहल-पहल बनी रही, और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न।

वंशवाद बनाम योग्यता: बिहार में बढ़ती राजनीतिक लड़ाई, सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय नेतृत्व पर उठते प्रश्न

गोंदिया – बिहार विधानसभा चुनाव क़े आए हैरत अंगेज़ नतीजों के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर से परिवारवाद के आरोपों के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। नई सरकार के गठन के बाद 21 नवंबर 2025 को देर श्याम जिस तरह से आरजेडी ने मुख्यमंत्री और भारत क़े प्रधानमंत्री पर तीखे सवाल दागे हैं,उसी तीव्रता से बीजेपी ने भी जवाबी हमला करके पूरे राजनीतिक विमर्श को नई दिशा की ओर मोड़ दिया है। बिहार में सत्ता परिवर्तन के हर चरण के साथ परिवारवाद का मुद्दा किसी धधकते अंगारे की तरह सामने आता रहा है,कभी शांत, तो कभी भड़कता हुआ।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह बहस महज़ राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र के भीतर वंशवाद बनाम योग्यता के बड़े विमर्श का हिस्सा है, जो दशकों से विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रूपों में सामने आता रहा है।नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद आरजेडी ने जिस आक्रामक अंदाज़ में नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री मोदी को घेरा,उससे यह साफ़ हो गया कि आने वाला राजनीतिक सीज़न सिर्फ़ विकास या प्रशासनिक मुद्दों पर नहीं, बल्कि सत्ता में “कौन और क्यों” शामिल है,इस सबसे संवेदनशील प्रश्न पर भी केंद्रित रहेगाआरजेडी ने कहा कि परिवारवाद पर सबसे ज़्यादा शोर मचाने वाले अब स्वयं उसी प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं, इसलिए उन्हें अपने ही आरोपों का जवाब देना चाहिए। यह हमला इसलिए भी तीखा माना गया क्योंकि आरजेडी ने सीधे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे दो शीर्ष पदों को इस बहस के केंद्र में रख दिया।आरजेडी का तर्क स्पष्ट है,यदि हमारी पार्टी पर वर्षों से परिवारवाद के आरोप लगाए जाते रहे हैं, तो फिर वही कसौटी उन लोगों पर क्यों न लागू की जाए जो इस मुद्दे को नैतिकता और राजनीतिक शुचिता के चश्मे से देखने की बात करते हैं? इस आरोप के उठने भर से बिहार का राजनीतिक माहौल गरमाना स्वाभाविक था।
साथियों बात अगर हम कैबिनेट गठन के बाद बढ़ाविवाद कौन किसका बेटा की सूची और बयानबाज़ी की तीक्ष्णता को समझने की करें तो,नीतीश सरकार के नए मंत्रिमंडल ने जैसे ही शपथ ली,आरोपों की नई पर्तें खुलनी शुरू हो गईं। आरजेडी ने मंत्रियों की एक सूची जारी की, जिसमें दिखाया गया था कि नए कैबिनेट के कई चेहरे किसी न किसी रूप में राजनीतिक परिवारों की अगली पीढ़ी से आते हैं,कोई पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा, कोई पूर्व मंत्री का वारिस, कोई जिला स्तर के शक्तिशाली परिवार का सदस्य।आरजेडी का तर्क था कि यही वही तत्व है जिसे एनडीए “परिवारवाद का विरोध” कहकर चुनावी मंचों पर चुनौती देता रहा है।यह सूची जारी होते ही राजनीतिक तापमान और बढ़ गया। आरोप और प्रत्यारोप इस कदर गहरे हो गए कि बहस अब राजनीतिक समीकरणों से निकलकर राजनीतिक नैतिकता और सिद्धांतों के बड़े दायरे में पहुंच गई। आरजेडी ने कहा कि जो लोग चुनावों में वंशवाद के ख़िलाफ़ क्रांति की बात करते थे, अब वही अपने शासन में परिवारों को ही सबसे बड़ी भूमिका दे रहे हैं।

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साथियों बात अगर हममंत्रिमंडल में जगह पाए इस परिवारवादी सूची तथा व्यंग्य, कहावतें और राजनीतिक कटाक्ष,बिहार की सियासत की सदाबहार शैली को देखकर समझने की करें तो (1) संतोष सुमन-पूर्वसीएम व गया से सांसद और वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का पुत्र, वर्तमान विधायक ज्योति मांझी का दामाद और वर्तमान विधायक दीपा मांझी का पति संतोष सुमन मांझी (2) सम्राट चौधरी-पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी और पूर्व विधायक दिवंगत पार्वती देवी का उपमुख्यमंत्री पुत्र सम्राट चौधरी। (3) दीपक प्रकाश-पूर्व केंद्रीय मंत्री, वर्तमान राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा और वर्तमान विधायक स्नेहलता का पुत्र दीपक प्रकाश।(4) श्रेयसी सिंह- पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की पुत्री श्रेयसी सिंह।(5) रमा निषाद -पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जय नारायण निषाद की बहु और पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी रमा निषाद। (6) विजय चौधरी- पूर्व विधायक जगदीश प्रसाद चौधरी का पुत्र विजय चौधरी। (7) अशोक चौधरी-पूर्व मंत्री महावीर चौधरी का पुत्र और समस्तीपुर की वर्तमान सांसद शांभवी चौधरी का पिता अशोक चौधरी (8) नितिन नबीन-पूर्व विधायक नवीन किशोर सिन्हा का पुत्र नितिन नबीन।(9)सुनील कुमार- पूर्व मंत्री चन्द्रिका राम का पुत्र और पूर्व विधायक अनिल कुमार का भाई सुनील कुमार।(10) लेसी सिंह-समता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष दिवंगत भूटन सिंह की पत्नी लेसी सिंह।व्यंग्य, कहावतें और राजनीतिक कटाक्ष, बिहार की सियासत कीसदाबहार शैली-बिहार की राजनीति में व्यंग्य हमेशा ही बहस का एक प्रमुख हथियार रहा है। आरजेडी ने परिवारवाद पर अपने हमले को और तीखा करनेके लिए प्रसिद्ध कहावतों और दोहों का इस्तेमाल किया।वंशजों की पालकी उठवाए चारों दिशाम, फिर दूसरों के नीति पर दें कैसे वो ज्ञान इसी तरह आरजेडी ने सबको परिचित कहावत का सहारा लिया-“जिनके सूप ही हजारो छेद है, वो चलनी पर क्या सवाल खड़े करेंगे।”ये पंक्तियाँ केवल शाब्दिक कटाक्ष नहीं थीं, बल्कि यह संकेत भी थीं कि राजनीतिक बहस अब तर्क के स्तर से भावात्मक और सांस्कृतिक प्रतीकों के स्तर पर जा चुकी है। बिहार जैसे राज्य, जहाँ लोककथाएँ और कहावतें सामाजिक चेतना का हिस्सा हैं, वहाँ इस प्रकार के व्यंग्य राजनीतिक प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।

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साथियों बात अगर हम एनडीए का पलटवार,परिवारवाद की ‘नई परिभाषा’ और राजनीति की बदलती भाषा को समझने की करें तो, जैसे ही आरजेडी के आरोपों ने गति पकड़ी, वैसे ही एनडीए नेताओं का जवाब भी तेजी से सामने आया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिलीप जायसवाल ने सीधे तौर पर कहा कि विपक्ष आज तक परिवारवाद की परिभाषा समझ ही नहीं पाया है। उनके अनुसार, परिवारवाद केवल मंत्री या विधायक का बेटा मंत्री बनने तक सीमित नहीं है;परिवारवाद का असली अर्थ है,जब कोई प्रधानमंत्री का बेटा प्रधानमंत्री बने, मुख्यमंत्री का बेटा मुख्यमंत्री बने,और सत्ता पूरी तरह वंशगत विरासत में बदल जाए।उनका संकेत स्पष्ट रूप से कांग्रेस,समाजवादी पार्टी और आरजेडी की ओर था। वे कह रहे थे कि नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, या भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में परिवारवाद का कोई स्थान नहीं है, इसलिए आरजेडी के आरोप निराधार हैं।एनडीए की यह “नई परिभाषा” राजनीतिक बहस के नए विमर्श की तरह सामने आई। अब सवाल केवल पद पाने का नहीं, बल्कि सत्ता के शीर्ष वंश के जन्मगत अधिकारों का बनाम जनता के प्रतिनिधि चुनाव से मिलने वाली वैधता का बन गया।
साथियों बातें अगर हम सोशल मीडिया पर बहस समर्थन तंज़ और राजनीतिक ध्रुवीकरण को समझने की करें तो, राजनीति का हर मुद्दा अब सोशल मीडिया पर तुरंत ही ट्रेंड बन जाता है, और परिवारवाद का मुद्दा भी इससे अलग नहीं रहा। आरजेडी समर्थकों ने जैसे ही कैबिनेट में शामिल “परिवारवाद के चेहरे” वाली सूची सामने रखी, कई यूज़र ने इसे “एनडीए का दोहरा चेहरा” बताया। उनका कहना था कि भाजपा परिवारवाद को लेकर केवल उन दलों पर उंगली उठाती है,जिनसे उसका वैचारिक विरोध है, लेकिन जब बात सहयोगी दलों या अपनी सरकार के मंत्रियों की हो, तो वही मापदंड गायब हो जाते हैं।वहीं दूसरी तरफ़ एनडीए समर्थकों ने इस पूरे विवाद को “हार के बाद की निराशा” बताया। उनका तर्क था कि जिन दलों को जनता ने बार-बार अस्वीकार किया, वे अब उन्हीं मुद्दों को उछालकर अपनी खोई ज़मीन तलाश रहे हैं, जिन पर जनता अब भरोसा नहीं करती। सोशल मीडिया की यह दोहरी प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि बिहार की राजनीति केवल विधानसभा या संसद के मंच तक सीमित नहीं है; यह हर मोबाइल स्क्रीन का मुद्दा और हर मतदाता की भावनात्मक दुनिया का हिस्सा बन चुकी है।
साथियों बात अगर हम परिवारवाद पर बहस का गहरा पक्ष,लोकतंत्र, अवसर और बदलता राजनीतिक समाज इसको समझने की करें तो,परिवारवाद की बहस केवल बिहार की राजनति तक सीमित नहीं है; यह भारत की राजनीतिक संस्कृति का बड़ा प्रश्न है। लोकतंत्र का आधार समान अवसर और योग्यता है,जबकि वंशवाद इसेसीमित करता है। लेकिन भारतीय राजनीति में परिवारवाद का दूसरा पहलू भी है,राजनीतिक परिवारों की सामाजिक पहुंच, नेटवर्क और वर्षों का अनुभव कभी-कभी उन्हें चुनावी राजनीति के प्राकृतिक खिलाड़ी बना देता है।यही कारण है कि भारत के लगभग हर राज्य में, चाहे वह तमिलनाडु हो, उत्तर प्रदेश हो,या पंजाब,राजनीतिक परिवार अपनी भूमिका बनाए रखते हैं। बिहार भी इससे अलग नहीं है।वर्तमान बहस यही सवाल उठाती है कि क्या राजनीति में परिवारवाद स्वाभाविक है या इसे चुनौती देने की आवश्यकता है? क्या राजनीतिक परिवारों का होना अपने आप में समस्या है, या समस्या तब पैदा होती है जब निर्णय केवल वंश के आधार पर लिए जाते हैं और योग्यता को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है?एनडीए और आरजेडी का मौजूदा विवाद इसी बड़े प्रश्न का छोटा रूप है।
साथियों बात अगर हम भारतीय पीएम का उल्लेख और बहस का राष्ट्रीय विस्तार इसको समझने की करें तो,जब भी परिवारवाद की बात होती है, भारतीय पीएम का विशेष उल्लेख होता है क्योंकि उन्होंने कई चुनावों में परिवारवाद को राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी बीमारी बताया है।आरजेडी का यह दावा कि बिहार के कैबिनेट में परिवारवाद के उदाहरण मौजूद हैं, और पीएम को इसका जवाब देना चाहिए,इस बहस को तुरंत राष्ट्रीय राजनीति के स्तरपर ले आया।पीएम हमेशा यह कहते रहे हैं कि उनका परिवार “130 करोड़ भारतीय” हैं। यही कारण है कि बीजेपी यह तर्क देती है कि मोदी के नेतृत्व में परिवारवाद के आरोप बेमानी हैं। लेकिन विपक्ष के अनुसार,“परिवारवाद” शब्द का राजनीतिक उपयोगकेवल विरोधियों को बदनाम करने के लिए किया जाता है, न कि अपने गठबंधन के भीतर लागू करने के लिए।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि परिवारवाद के आरोपों से उठा सियासी तूफ़ान-आरजेडी बनाम एनडीए की टकराहट,परिवारवाद की बहस केवल बिहार की राजनीति तक सीमित नहीं;यह भारत की राजनीतिक संस्कृति का बड़ा प्रश्न है,वंशवाद,लोकतंत्र का आधार, समान अवसर और योग्यता क़ो सीमित करता है’

-संकलनकर्ता लेखक – लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

एसआईआर वेरिफिकेशन के नाम पर सक्रिय जालसाज: बीएलओ बनकर मांग रहे ओटीपी, प्रशासन ने जारी की सख्त चेतावनी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।जिले में इन दिनों SIR Verification Fraud तेजी से फैल रहा है। साइबर जालसाज खुद को बीएलओ (BLO) बताकर मतदाता सूची सत्यापन का हवाला देते हुए लोगों से मोबाइल पर भेजा गया ओटीपी (OTP) मांग रहे हैं। प्रशासन ने इसे एक संगठित साइबर ठगी करार देते हुए नागरिकों को आगाह किया है कि बीएलओ किसी भी स्थिति में ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी नहीं मांगते।
जालसाज बीएलओ बनकर कर रहे धोखाधड़ी
मतदाता सूची संशोधन और स्पेशल समरी रिवीजन के दौरान साइबर ठग नए तरीके अपना रहे हैं। वे कॉल कर कहते हैं कि आपका नाम, पता या परिवार विवरण सत्यापित करना है। इसी बहाने वे मोबाइल पर भेजा गया ओटीपी मांग लेते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ओटीपी साझा करते ही जालसाज बैंक अकाउंट, यूपीआई, डिजिटल वॉलेट, ईमेल और सोशल मीडिया तक पहुंच हासिल कर लेते हैं, जिससे खाते मिनटों में खाली हो सकते हैं।
प्रशासन की चेतावनी — “बीएलओ कभी ओटीपी नहीं मांगते”
जिला प्रशासन और चुनाव कार्यालय ने स्पष्ट कहा है कि बीएलओ केवल फॉर्म भरवाने और दस्तावेज सत्यापन तक सीमित रहते हैं।
वे न तो फोन पर सत्यापन करते हैं और न ही किसी प्रकार का ओटीपी मांगते हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी कि यदि कोई कॉल करने वाला खुद को बीएलओ बताकर ओटीपी मांग रहा है, तो वह निश्चित तौर पर जालसाज है।
ओटीपी साझा किया तो खाली हो सकता है बैंक खाता
साइबर सेल के अनुसार कई लोग सरकारी प्रक्रिया समझ न पाने के कारण ठगों के झांसे में आ जाते हैं।
ओटीपी साझा होने के बाद ठग पीड़ित के मोबाइल नंबर और बैंकिंग एप्स को लिंक कर लेते हैं और कुछ ही मिनटों में बचत खाता, यूपीआई बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट खाली हो जाते हैं। कई बार जालसाज पीड़ित की पहचान का दुरुपयोग अन्य अपराधों में भी कर लेते हैं।
कैसे बचें SIR Verification Fraud से?
किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी बिल्कुल न दें।
बीएलओ कभी फोन पर सत्यापन नहीं करते।
संदिग्ध कॉल आते ही कॉल काटें और नंबर ब्लॉक करें।
तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
वोटर आईडी, केवाईसी या बैंक अपडेट के बहाने ओटीपी मांगने वाली कॉल से सावधान रहें।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने कहा कि आम नागरिक इस जानकारी को परिवार, पड़ोस और बुजुर्गों के साथ साझा करें, ताकि कोई भी इस SIR Verification Fraud का शिकार न बने।
प्रशासन ने जोर देकर कहा— “सतर्कता ही सुरक्षा है, ओटीपी साझा करते ही आर्थिक नुकसान तय है।”

बीमारी में राहत: किस बीमारी में कौन-सा मंत्र जपें?

शास्त्रों में वर्णित मंत्र-चिकित्सा और सकारात्मक ऊर्जा का वैज्ञानिक आधार

भारतीय सनातन परंपरा में मंत्र-चिकित्सा (Mantra Healing) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। प्राचीन ग्रंथों—ऋग्वेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद, चरक संहिता, महाभारत और पुराणों में मंत्रों की शक्ति, ध्वनि तरंगों के प्रभाव और उनके चिकित्सा-संबंधी लाभों का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
आज के समय में भी मनोवैज्ञानिक व आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ यह स्वीकार करते हैं कि मंत्रोच्चारण से उत्पन्न कंपन शरीर, मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे स्वास्थ्य सुधार की गति तेज हो सकती है।

यह लेख बताता है कि किस स्वास्थ्य समस्या में कौन-सा शास्त्रोक्त मंत्र जपना लाभकारी माना गया है, और कैसे यह मानसिक, आध्यात्मिक व शारीरिक स्वास्थ्य को संतुलित करता है।
शास्त्रीय आधार: मंत्र क्यों प्रभावी माने जाते हैं?
मंत्र ध्वनि-ऊर्जा का विज्ञान है।
वेदों में ‘ध्वनि ही शक्ति है’ का सिद्धांत मिलता है।
जब कोई मंत्र सही उच्चारण के साथ जपा जाता है, तब उससे उत्पन्न सकारात्मक तरंगें शरीर के सूक्ष्म नाड़ियों (Ida, Pingala, Sushumna) को सक्रिय करती हैं।
● तनाव घटता है।
● रक्तचाप नियंत्रित होता है।
● नींद सुधरती है।
● प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
● मन शांत होकर उपचार क्षमता बढ़ाता है।
अब जानते हैं विशेष स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार कौन-सा मंत्र प्रभावी माना गया है।
बीमारी-विशेष मंत्र और उनके लाभ

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  1. बुखार, वायरल संक्रमण, कमजोरी
    🔸 महामृत्युंजय मंत्र
    “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥”
    शिवपुराण और रुद्राध्याय के अनुसार यह मंत्र रोगों, बुखार, विपत्ति और जीवन संकटों से रक्षा करता है।
    ● वायरल संक्रमण में मानसिक भय को दूर करता है।
    ● शरीर की उपचार क्षमता बढ़ाता है।
    ● रोग से शीघ्र मुक्ति की ऊर्जा प्रदान करता है।
    जप संख्या: 108 बार रोज या 5 माला
  2. मानसिक तनाव, अनिद्रा, अवसाद
    🔸 गायत्री मंत्र
    “ॐ भूमिर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं…।”
    गायत्री मंत्र को ‘ब्रह्मतेज मंत्र’ कहा गया है।
    ● मस्तिष्क की शुद्धि।
    ● मानसिक तनाव का निवारण।
    ● नींद की गुणवत्ता में सुधार।
    ● मनोबल बढ़ाता है।
    जप संख्या: प्रातः 108 बार
  3. हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, चिंता
    🔸 हनुमान चालीसा / हनुमान बीज मंत्र
    “ॐ हं हनुमते नमः।”
    हनुमान जी का स्मरण शरीर में स्थिरता व साहस बढ़ाता है।
    ● धड़कन स्थिर करने में सहायता
    ● बीपी सामान्य करने वाला प्रभाव
    ● चिंता व भय से मुक्ति
    जप संख्या: 21 या 108 बार
  4. यकृत (लीवर) और पाचन संबंधी रोग
    🔸 विष्णु सहस्रनाम
    विष्णु सहस्रनाम को ‘आरोग्य का महामंत्र’ माना गया है।
    ● पाचन-संस्थान को संतुलित करता है
    ● लीवर को ऊर्जा प्रदान करता है
    ● पित्त विकार के लिए लाभकारी
  5. त्वचा रोग, एलर्जी, पुराने घाव
    🔸 दुर्गा सप्तशती के मंत्र
    विशेषकर — “ॐ दुं दुर्गायै नमः।”
    ● शरीर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है
    ● त्वचा की सूजन शांत करता है
    ● रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत
  6. अस्थमा, श्वास संबंधी समस्याएँ
    🔸 राम नाम मंत्र
    “ॐ श्री रामाय नमः”
    ● फेफड़ों की ऊर्जा बढ़ाता है
    ● सांस की गति को नियंत्रित करता है
    ● मन और शरीर को शांत कर श्वास मार्ग खोलता है
  7. गंभीर रोग, ऑपरेशन के पहले-बाद
    🔸 दैवीय मंत्र—“नरसिंह कवच”
    शास्त्र कहते हैं कि यह कवच व्यक्ति को भय, पीड़ा, नकारात्मकता व रोग-संकटों से बचाता है।
    मंत्र जप के समय ध्यान रखने योग्य बातें
    ✔ मंत्र शुद्ध भाव, शुद्ध उच्चारण और शांत स्थान में जपें
    ✔ सुबह-शाम नियमितता रखें
    ✔ जप के समय दीपक या अग्नि का होना श्रेष्ठ
    ✔ बीमार व्यक्ति स्वयं जप न कर सके तो परिवार का कोई सदस्य कर सकता है
    ✔ मंत्र चिकित्सा चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी शक्ति है।
    शास्त्रों में मंत्रों को “औषध से अधिक प्रभावी मनोदैहिक चिकित्सा” कहा गया है।
    अगर चिकित्सा के साथ मंत्रजप भी जोड़ा जाए, तो यह बीमारी में राहत, मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
    इसलिए, मंत्र न केवल आध्यात्मिक साधना हैं, बल्कि शरीर-मन को स्वास्थ्य और शांति की दिशा में ले जाने वाली दिव्य प्रक्रिया भी हैं।
    इस मंत्र जप से बीमारी ठीक हो जाएगी इसकी दावा RKPnews नहीं करता किसी योग्य पंडित या डाक्टर से सलाह जरुर ले।

22 नवंबर: इतिहास की वे अंतिम सांसें, जिन्होंने भारत की आत्मा को दिशा दी

22 नवंबर भारतीय इतिहास में उन विभूतियों की स्मृति का दिन है, जिन्होंने अपनी सोच, कर्म और संघर्ष से समाज की धारा को बदला। विभिन्न युगों में जन्मी ये महान आत्माएँ भले आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनके योगदान की चमक आज भी मार्गदर्शक है।

राम नरेश यादव (2016)
आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में जन्मे राम नरेश यादव ने साधारण परिवार से शिक्षा प्राप्त कर राजनीति की ऊँचाइयों तक सफर तय किया। यूपी के मुख्यमंत्री और बाद में मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में उन्होंने प्रशासनिक ईमानदारी और संगठनात्मक मजबूती का उदाहरण प्रस्तुत किया।

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विवेकी राय (2016)
ग़ाज़ीपुर जिले के बकैनिया गांव में जन्मे विवेकी राय ने हिन्दी और भोजपुरी साहित्य को नई पहचान दी। शिक्षक के रूप में शिक्षा जगत से जुड़े रहते हुए उन्होंने ग्रामीण जीवन, सामाजिक संबंध और मानवीय संवेदनाओं को अपनी कलम से अमर किया।

तारा सिंह (1967)
ब्रिटिश भारत के पंजाब में जन्मे मास्टर तारा सिंह ने शिक्षा के साथ समाज-सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाया। वे शीरोमणि अकाली दल के प्रमुख नेताओं में रहे और सिख पहचान, अधिकारों तथा समुदाय की एकजुटता के लिए हमेशा अग्रणी भूमिका निभाते रहे।

अहमदुल्लाह (1881)
फैज़ाबाद (अवध) क्षेत्र में जन्मे मौलवी अहमदुल्लाह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से रहे। उन्होंने शिक्षा के साथ सैन्य रणनीति में दक्षता प्राप्त कर अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूंका और 1857 की क्रांति को धार दी।

रॉबर्ट क्लाइव (1774)
इंग्लैंड में जन्मा रॉबर्ट क्लाइव ईस्ट इंडिया कम्पनी का वह प्रशासक था जिसने भारत के राजनीतिक ढांचे पर निर्णायक प्रभाव डाला। शिक्षा के दौरान ही उसका झुकाव सैन्य सेवा की ओर हुआ और यही उसे भारत लाया, जहाँ उसके कदमों ने उपनिवेशी शासन की नींव मजबूत की।

22 नवंबर के नक्षत्र में जन्मे वे महान व्यक्तित्व, जिन्होंने भारत के इतिहास पर अमिट छाप छोड़ी

भारत के इतिहास में 22 नवंबर का दिन कई ऐसे महापुरुषों का जन्मदिवस लेकर आया, जिनकी जीवनी प्रेरणा, संघर्ष, त्याग और उत्कृष्ट उपलब्धियों की गवाही देती है। अलग-अलग युग, भिन्न क्षेत्र—लेकिन योगदान एकजैसा विराट। आज के इस विशेष दिवस पर जन्मे महान विभूतियों के जीवन, कर्मभूमि, उपलब्धियों और देशहित में किए गए उल्लेखनीय कार्यों पर 50 शब्दों के संक्षिप्त लेकिन समग्र प्रकाश में आइए उन्हें नमन करें।

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1963 पुष्पेन्द्र कुमार गर्ग
उत्तर प्रदेश के एक साधारण परिवार में जन्मे पुष्पेन्द्र गर्ग भारतीय नौकायन खेल के अग्रणी दिग्गज माने जाते हैं। नेवी में सेवा के दौरान जलक्रीड़ा में अद्वितीय दक्षता प्राप्त कर देश को वैश्विक मंचों पर पहचान दिलाई। एशियाई प्रतियोगिताओं में भारत को पदक दिलाने में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा।
1948 – सरोज ख़ान
महाराष्ट्र में जन्मी सरोज खान भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित कोरियोग्राफरों में शामिल थीं। गरीब परिवार से निकलकर उन्होंने बॉलीवुड में नृत्य-रचना की एक नई परंपरा गढ़ी। ‘एक दो तीन’, ‘धक-धक’ जैसे गीतों को अद्वितीय लय और अभिव्यक्ति देने का श्रेय उन्हें जाता है। भारतीय नृत्य संस्कृति की सशक्त पहचान बनीं।

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1940 – कुलदीप सिंह चाँदपुरी
अविभाजित पंजाब के एक गांव में जन्मे कर्नल चाँदपुरी 1971 के लौंगावाला युद्ध के नायक रहे। राजस्थान की रेतीली सीमाओं पर मात्र 120 सैनिकों के साथ दुश्मन की बटालियन को रोकने का अदम्य साहस दिखाया। वीरता, नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा के वह अनुपम उदाहरण बने।
1939 – मुलायम सिंह यादव
इटावा जिले के सैफई गांव में जन्मे मुलायम सिंह देश के प्रभावशाली जननेताओं में से एक बने। शिक्षक से लेकर उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री और केंद्र में रक्षा मंत्री तक का सफर उन्होंने जनसेवा के रंग में रचे-बसे विचारों के साथ तय किया। समाजवादी आंदोलन के मजबूत स्तंभ रहे।
1916 – शांति घोष
बांग्ला भूमि की वीरांगना शांति घोष भारत की युवाओं में स्वतंत्रता की चेतना जगाने वाली साहसी क्रांतिकारियों में थीं। किशोरावस्था में ही उन्होंने ब्रिटिश दमन के विरुद्ध सक्रिय भूमिका निभाई। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनका योगदान इतिहास में अमर है।
1913 – एल. के. झा
बिहार में जन्मे लक्ष्मीकांत झा भारतीय रिज़र्व बैंक के आठवें गवर्नर रहे। उच्च शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने देश की आर्थिक नीति, वित्तीय स्थिरता और बैंकिंग सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी प्रबंधन क्षमता और दूरदर्शिता के लिए जाने गए।
1901 – विष्णु सहाय
भारतीय सिविल सेवा के उत्कृष्ट अधिकारी विष्णु सहाय ने असम व नागालैंड के राज्यपाल के रूप में पूर्वोत्तर भारत में स्थिरता, शांति व प्रशासनिक सुधारों को मजबूत आधार दिया। क्षेत्रीय जटिलताओं को सरल करते हुए उन्होंने केंद्र–राज्य संबंधों को मजबूती प्रदान की।
1899 – शहीद लक्ष्मण नायक
ओडिशा के कोरापुट जिले के आदिवासी क्षेत्र में जन्मे लक्ष्मण नायक स्वतंत्रता संग्राम के अग्रज योद्धा थे। जंगलों में ब्रिटिश अत्याचार के विरुद्ध जनआंदोलन खड़ा किया। आदिवासी समाज को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। फांसी के साथ उनका नाम अमर हो गया।
1892 – मीरा बेन
लंदन में जन्मी मैडेलिन स्लेड, जिन्हें भारत ने ‘मीरा बेन’ के रूप में स्वीकारा, महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर भारत आईं। उन्होंने आश्रमों में रहकर खादी, स्वावलंबन और ग्रामीण सुधार के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। विदेशी होते हुए भी भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष की प्रमुख सहयोगी बनीं।
1882 – वालचंद हीराचंद
शोलेपुर, महाराष्ट्र के व्यवसायिक परिवार में जन्मे वालचंद हीराचंद भारत के औद्योगिक क्रांति के अग्रज माने जाते हैं। जहाजरानी, विमानन और इंजीनियरिंग कंपनियों की स्थापना कर उन्होंने स्वदेशी उद्योगों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। ‘वालचंद ग्रुप’ आज भी उनके सपनों की मिसाल है।
1864 – रुक्माबाई
बॉम्बे प्रेसीडेंसी में जन्मी रुक्माबाई भारत की प्रथम प्रशिक्षित महिला डॉक्टरों में अग्रणी थीं। बाल विवाह के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई ने महिलाओं के अधिकारों की दिशा बदल दी। बाद में चिकित्सा सेवा के माध्यम से उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार में बड़ा योगदान दिया।
1830 – झलकारी बाई
उत्तर प्रदेश के झाँसी से सटी बुंदेली भूमि में जन्मी झलकारी बाई रानी लक्ष्मीबाई के ‘दुर्गा दल’ की सेनापति रहीं। युद्ध कौशल, निडरता और नेतृत्व की वजह से वे झाँसी की सेना की रीढ़ मानी गईं। 1857 के संग्राम में उनका अद्भुत पराक्रम भारतीय इतिहास में दर्ज है।

ताकतवर होकर भी झुक जाना श्रेष्ठ गुण—एक कहानी जो मन को छू जाए

(राष्ट्र की परम्परा | कहानी डेस्क | शशांक भूषण मिश्र)

ताकतवर होकर भी झुक जाना श्रेष्ठ गुण है, और श्रेष्ठ होकर भी सामान्य बने रहना सर्वश्रेष्ठ गुण। जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं, जब इंसान चाहे तो बदला लेकर अपने ग़ुस्से को शांत कर सकता है, परंतु कुछ लोग माफ़ करना चुनते हैं—क्योंकि उन्हें पता होता है कि माफ़ कर देना किसी को छोटा नहीं बनाता, बल्कि भीतर से और अधिक सशक्त करता है।
इसी भाव को उजागर करती है यह कहानी—जो आपको भीतर तक स्पर्श करेगी।

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कहानी : “माफ़ी की ताकत”
गाँव का नाम था चाँदपुर, और वहीं रहता था दीपक—एक सामान्य परिवार का, शांत स्वभाव वाला, लेकिन अत्यंत तेज दिमाग और मेहनती युवा। गाँव के लोग उसे सम्मान देते थे क्योंकि वह अपनी सफलता का घमंड कभी नहीं करता था। उसके स्वभाव में विनम्रता, व्यवहार में शांति और आँखों में दुनिया बदलने का सपना था।
पर जहाँ सादगी होती है, वहाँ कुछ लोगों की ईर्ष्या भी जन्म लेती है।
गाँव का ही युवक राजीव, जो स्वभाव से अहंकारी और तनिक कठोर था, दीपक की बढ़ती लोकप्रियता से भीतर ही भीतर जलने लगा। कभी किसी बैठक में अपमानित कर देता, कभी उसकी किसी उपलब्धि का मज़ाक उड़ाता। कई बार मौका देखकर उसके काम में बाधाएँ भी खड़ी करता।

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लोग समझते थे कि दोनों के बीच एक दिन टकराव अवश्य होगा।
पर दीपक हर बार मुस्कुराकर चुप रह जाता।
लेकिन एक दिन बात हद से आगे बढ़ गई।
एक दिन की घटना जिसने कहानी बदल दी
गाँव में एक बड़ा सामाजिक समारोह था। दीपक को मंच संचालन का दायित्व दिया गया था। पर राजीव ने जानबूझकर सभी के सामने दीपक पर झूठा आरोप लगा दिया कि वह कार्यक्रम के पैसे में गड़बड़ी कर रहा है। भीड़ कुछ क्षणों के लिए सन्न रह गई।

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दीपक के सामने दो रास्ते थे—

  • एक, वह गुस्से में आकर राजीव को सबके सामने नीचा दिखा दे।
  • दूसरा, अपनी सच्चाई पर विश्वास रखे और धैर्य से स्थिति को संभाले।
    दीपक ने दूसरा रास्ता चुना।
    उसने शांत स्वर में कहा—
    “झूठ का जवाब अगर गुस्से से दिया जाए तो झूठ और ऊँचा हो जाता है। सच को केवल समय चाहिए, आवाज़ नहीं।”
    गाँव के बुजुर्गों ने पूरा हिसाब देखा। राजीव का झूठ उसी पर भारी पड़ा। भीड़ में उसके लिए फुसफुसाहट शुरू हो गई। चेहरा झुक गया। गलती उसकी थी, पर शर्म दीपक के धैर्य ने उसे और गहरी महसूस कराई।
    सभा के बाद राजीव अकेला खड़ा था, आँखों में ग्लानि लेकर।
    दीपक उसके पास गया और बोला—
    “अगर चाहो तो इस घटना को आज ही खत्म कर दो। मैं बदला नहीं लूँगा। पर तुम खुद को माफ़ कर सको, इतना तुम्हारे भीतर अभी भी अच्छा बचा है, इसी पर विश्वास रखो।”
    राजीव की आँखें नम हो गईं।
    माफी की उम्मीद उसे नहीं थी।
    जो इंसान अपमान का बदला ले सकता था, उसने माफ़ कर दिया…
    यही बात उसे उम्र भर सताती रही।
    क्योंकि बदले का दुख कुछ समय तक रहता है,
    पर माफ़ कर देने का बोझ—आरोपी को जीवन भर याद रहता है।
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  • कहानी का संदेश
  • ताकत होना बड़ी बात नहीं, ताकत होते हुए संयम रखना सबसे बड़ी बात है।
  • जो माफ़ कर देता है, वह जीतता वही है—क्योंकि वह खुद को अपने गुस्से का गुलाम नहीं बनने देता।
  • और जिसने गलती की… उसे वही बात उम्र भर याद रहती है।
    दीपक की तरह जीवन में भी कई बार हम ऐसी स्थितियों से गुजरते हैं।
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  • मगर याद रखें—
    माफी किसी को नहीं, आपके मन को मुक्त करती है।
    इस कहानी के पात्र स्थान काल्पनिक है किसी व्यक्ति विशेष से कोई शब्द मर्माहत करने की दृष्टिकोण से कोई लेना देना नहीं है।

युवा शक्ति को जगाने वाला विवेकानंद का जीवन-दर्शन

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युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद के सफलता मंत्र: परिवर्तन की राह दिखाती प्रेरणा को प्रस्तुत कर रहे हैं नवनीत मिश्र

स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व आज भी हर युवा के भीतर छिपी ऊर्जा को जगाने की क्षमता रखता है। उनका जीवन, उनके विचार और उनकी ओजस्वी वाणी हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि मनुष्य यदि चाहे तो असंभव को भी संभव कर सकता है। वे कहते थे “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” यही वाक्य उनके पूरे दर्शन का सार है, जागरण, कर्म और दृढ़ता।
स्वामी विवेकानंद युवाओं को सबसे पहले निर्भीक बनने का संदेश देते हैं। वे स्पष्ट कहते हैं कि मन का डर ही व्यक्ति की असली बाधा है। जब युवा साहस जुटाकर आगे बढ़ते हैं, तब वे जीवन की बड़ी चुनौतियों को सहज रूप से पार कर लेते हैं। निर्भीकता न केवल आत्मविश्वास बढ़ाती है, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करती है।
उनका दूसरा महत्वपूर्ण संदेश है, अपने भीतर की शक्ति को पहचानो। विवेकानंद बार-बार कहते थे कि खुद को कमजोर मानना सबसे बड़ा अपराध है। हर युवा के भीतर अनंत ऊर्जा छिपी होती है, बस जरूरत है आत्मविश्वास जगाने की। जो स्वयं पर विश्वास कर लेता है, उसके लिए कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।
जीवन में सफलता का तीसरा आधार है एकाग्रता और समर्पण। विवेकानंद का मानना था कि जिस काम में मनुष्य पूरी आत्मा से जुट जाता है, वही कार्य उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाता है। एक समय में एक ही कार्य पर ध्यान केंद्रित कर, पूरी निष्ठा के साथ मेहनत करने वाला व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में चमत्कार कर सकता है।
उनका चौथा संदेश विचारों की शक्ति पर आधारित है। वे कहते थे “जैसा तुम सोचते हो, वैसा ही बन जाते हो।” सकारात्मक विचार जीवन में ऊर्जा भरते हैं, जबकि नकारात्मक सोच व्यक्ति को कमजोर करती है। ऊँचे और सकारात्मक विचार ही अच्छे कर्मों का आधार बनते हैं और वही कर्म सफलता की राह तैयार करते हैं।
अंत में विवेकानंद धैर्य और दृढ़ संकल्प को सफलता का अनिवार्य सूत्र बताते हैं। उनका स्पष्ट मत था कि असफलता ही हमें नए मार्ग दिखाती है। इसलिए गिरकर उठ जाना, सीखकर आगे बढ़ना और लक्ष्य पर अविचल रहना ही सफलता की असली कुंजी है।
स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं को न केवल प्रेरित करते हैं, बल्कि जीवन में सही दिशा भी दिखाते हैं। उनका संदेश यह है कि यदि मन में साहस, आत्मविश्वास, सकारात्मकता और अटूट संकल्प हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं। उनका जीवन-दर्शन आज भी युवा शक्ति को नई ऊर्जा, नई दृष्टि और नई उड़ान देता है।

मातृशक्ति: सांस्कृतिक धरोहर

निर्णय व निश्चय के मध्य हमको
कुछ तो अंतर दिखलाई देता है,
निर्णय जब कुछ कदम बढ़ाता है,
निश्चय निर्णय कर आगे बढ़ता है।

जब हमको कुछ फुर्सत मिल जाये
तो यह अवश्य देखें कि हमारे बेटा व
बेटी कहीं असामान्य तो नहीं लगते हैं,
उनके संरक्षण में हम बेफ़िक्र तो नहीं हैं।

कोचिंग में पढ़ने ही जा रहे हैं वह,
मोबाइल फ़ोन में पासवर्ड तो नहीं है,
सोसल चैट का उपयोग कर रहे हों तो
चैट डिलीट का आप्शन तो नहीं है।

घंटों अकेले कमरे में या अपने दोस्तों
संग समय वह नहीं बिताते रहते हैं,
प्रोजेक्ट है या कुछ और कह दोस्तों
के घर बार बार तो नहीं जा रहे हैं ।

अगर बच्चे का स्कूल शिकायत करे,
स्कूल की बात पर अवश्य ध्यान दें,
शिक्षक की बात सुनें, गुस्सा न करें,
बच्चों को प्यार दें, पर अनुशासित रखें।

यद्यपि बेटे बेटी में फ़र्क़ नहीं रखना,
दोनो को एक समान प्यार भी देना,
बेटे अगर हमारे वंश के सम्वाहक हैं,
तो बेटियों हमारी घर की इज़्ज़त हैं।

हिंदू संस्कृति, हमारी मर्यादा है,
सदा सनातन भी है, वैदिक भी है,
बच्चे भविष्य के इनके संरक्षक हैं,
इसमें आफ़ताब की नहीं ज़रूरत है।

आदित्य ये शिक्षा आज ज़रूरी है,
अपनी बिटिया को जरूर पढाएँ,
आजादी भी दें, पर इतनी नहीं कि,
जंगल में उसके टुकड़े पाये जायें।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

मानवता की नब्ज़ पर समाज की जिम्मेदारी — कहां जाएगी संवेदना?

कैलाश सिंह

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। समाज की रगों में बहती संवेदनाओं की गर्माहट आज ठंडी पड़ती जा रही है। मदद की पुकार पर उठने वाले हाथ कम हो रहे हैं और तमाशबीनों की भीड़ बढ़ रही है। हालात ऐसे कि इंसानियत अब सवालों के कटघरे में खड़ी है और समाज अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ता दिख रहा है।
बीते कुछ दिनों से जिले में घटित घटनाओं ने समाज की सामूहिक चेतना पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सड़क किनारे घायल पड़े बुज़ुर्ग को उठाने की बजाय लोग वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। एक परिवार की आर्थिक तंगी ने उसे दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया, लेकिन पड़ोसियों के दरवाजे बंद ही रहे। ऐसे उदाहरण अब अपवाद नहीं रहे, बल्कि एक खौफनाक चलन बनते जा रहे हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि समय के साथ समाज में संवेदनाओं का क्षरण तेज हुआ है। डिजिटल युग में लोग एक-दूसरे के दुःख तकलीफ से दूर होते गए हैं।पोस्ट,लाइक और शेयर की दुनिया में वास्तविक मदद करने वाले हाथ कम पड़ रहे हैं। परिणामस्वरूप, जरूरतमंद लोग सरकारी तंत्र और सामाजिक संगठनों के भरोसे छोड़ दिए जाते हैं, जबकि समाज की पहली जिम्मेदारी ही संकट में फंसे इंसान के साथ खड़ा होना है।
पंडित हर्षवर्धन मिश्रा, सामाजिक चिंतक, कहते हैं— मानवता की धड़कन कमजोर तब पड़ती है, जब समाज अपनी ज़िम्मेदारियां भूलकर सिर्फ दर्शक बन जाता है। जरूरत है संवेदनाओं को पुनर्जीवित करने की।
उन्होंने कहा कि आज परिवार, स्कूल, समाज—तीनों स्तरों पर मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की जरूरत है, वरना कल की पीढ़ियां दया और करुणा को सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी।
जिले के कई गांवों में सामाजिक संगठनों ने संवेदना जागरूकता अभियान शुरू किया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक हर नागरिक अपनी भूमिका नहीं समझेगा, तब तक ये पहलें अधूरी ही रहेंगी। समाज तब मजबूत कहलाता है जब वह संकट में टूटे हुए को संभाले, अकेले पड़े को सहारा दे और पीड़ा में घिरे व्यक्ति के कंधे पर हाथ रखे।
मानवता की नब्ज़ कमजोर पड़ रही है—और इसका इलाज सिर्फ एक है: संवेदना।
अगर समाज आज जागा नहीं, तो आने वाली पीढ़ियां पूछेंगी—
कहाँ गई वो इंसानियत, जो कभी हमारी पहचान हुआ करती थी?

सभी 12 राशियों का आज का भाग्य – 22 नवंबर 2025

🔥 12 राशियों का विस्तृत राशिफल—22 नवंबर 2025

मेष (Aries)
नामाक्षर: अ, ल, ई
कार्य/व्यवसाय: रुके हुए काम आगे बढ़ेंगे। कार्यस्थल पर आपकी परफॉर्मेंस नोटिस होगी।
शिक्षा: छात्रों को कॉन्सेप्ट क्लियर होंगे।
कला-संगीत: नए अवसर मिल सकते हैं।
राजनीति: आपके शब्द प्रभाव पैदा करेंगे।
प्रशासन: निर्णय लेने में मजबूती रहेगी।
आर्थिक स्थिति: अनावश्यक खर्च रोकें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूजन: हनुमान जी का चोला अर्पित करें।

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वृषभ (Taurus)
नामाक्षर: ब, व, उ
कार्य/व्यवसाय: काम धीमी गति से पर स्थिरता बनी रहेगी।
शिक्षा: मन शांत रहेगा, पढ़ाई में फोकस बढ़ेगा।
कला: रचनात्मक सोच मजबूत रहेगी।
राजनीति: पुराने सहयोगी साथ देंगे।
प्रशासन: फाइल व दस्तावेज़ संबंधी काम में लाभ।
आर्थिक स्थिति: बजट के अनुसार निर्णय आवश्यक।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूजन: लक्ष्मी जी के समक्ष दीप जलाएँ।

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मिथुन (Gemini)
नामाक्षर: क, छ, घ
कार्य/व्यवसाय: कम्यूनिकेशन स्किल आपका हथियार बनेगा।
शिक्षा: किसी प्रोजेक्ट या असाइनमेंट में सफलता।
कला: नए लोगों से जुड़ने का अवसर।
राजनीति: आपके तर्क प्रभावी रहेंगे।
प्रशासन: यात्रा और बैठकें लाभ देंगी।
आर्थिक स्थिति: मध्यम पर लाभ की उम्मीद।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजन: गणेश जी की आराधना उत्तम रहेगी।
कर्क (Cancer)
नामाक्षर: ड, ह
कार्य/व्यवसाय: भावुकता के बावजूद कार्य में फोकस बढ़ेगा।
शिक्षा: याददाश्त बेहतर रहेगी।
कला: इमोशनल कंटेंट पर कार्य लाभकारी।
राजनीति: जनता से संवाद अच्छा रहेगा।
प्रशासन: पेंडिंग काम पूरे होंगे।
आर्थिक स्थिति: रुका धन वापस मिल सकता है।
शुभ रंग: चाँदी
शुभ अंक: 2
पूजन: चंद्र देव की उपासना करें।

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सिंह (Leo)
नामाक्षर: म, ट
कार्य/व्यवसाय: नेतृत्व क्षमता चमकेगी।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उत्तम दिन।
कला: पुरानी उपलब्धि का सम्मान मिल सकता है।
राजनीति: आपका प्रभाव क्षेत्र बढ़ेगा।
प्रशासन: पद व अधिकार बढ़ने के योग।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता व प्रगति।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूजन: सूर्य देव को अर्घ्य दें।
♍ कन्या (Virgo)

नामाक्षर: प, ठ, ण
कार्य/व्यवसाय: जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी पर आप निभा लेंगे।
शिक्षा: कठिन विषय हल होंगे।
कला: डिटेलिंग वाले कार्य सफल।
राजनीति: संगठन का पूरा सहयोग।
प्रशासन: वरिष्ठ प्रसन्न रहेंगे।
आर्थिक स्थिति: आवश्यक खर्च बढ़ सकते हैं।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 3
पूजन: विष्णु भगवान की आराधना।

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तुला (Libra)
नामाक्षर: र, त
कार्य/व्यवसाय: व्यस्तता अधिक रहेगी।
शिक्षा: समय प्रबंधन की जरूरत।
कला: लाइमलाइट में आने का अवसर।
राजनीति: भाषण या मीटिंग में लाभ।
प्रशासन: डॉक्यूमेंटेशन कार्य से फायदा।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 7
पूजन: दुर्गा माता की उपासना।
वृश्चिक (Scorpio)
नामाक्षर: न, य
कार्य/व्यवसाय: नए अवसर मिलेंगे।
शिक्षा: रिसर्च वाले विषय में सफलता।
कला: गहराई वाले कार्य में लाभ।
राजनीति: रणनीति कारगर साबित होगी।
प्रशासन: निर्णय शक्तिशाली रहेंगे।
आर्थिक स्थिति: आय में बढ़त।
शुभ रंग: मरून
शुभ अंक: 4
पूजन: काल भैरव जी की आराधना।
धनु (Sagittarius)
नामाक्षर: भ, ध, फ
कार्य/व्यवसाय: किस्मत साथ देगी, बाधाएँ दूर।
शिक्षा: नई शुरुआत संभव।
कला: विदेशी शैली के कार्यों में रुचि।
राजनीति: जनसमर्थन बढ़ेगा।
प्रशासन: अचानक लाभ।
आर्थिक स्थिति: रुका धन प्राप्त होगा।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 8
पूजन: बृहस्पति देव का पूजन करें।
मकर (Capricorn)
नामाक्षर: ख, ज
कार्य/व्यवसाय: भावनात्मक अस्थिरता के बावजूद प्रगति।
शिक्षा: फोकस की जरूरत।
कला: पुराने काम की समरीक्षण।
राजनीति: पुराने संपर्क सक्रिय होंगे।
प्रशासन: दिन सामान्य।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 10
पूजन: शिव जी की उपासना श्रेष्ठ।
कुंभ (Aquarius)
नामाक्षर: स, श
कार्य/व्यवसाय: ऊर्जा बढ़ी रहेगी, कार्य तेजी से पूरे होंगे।
शिक्षा: कठिन विषय समझ में आएगा।
कला: नई तकनीक सीखने का अवसर।
राजनीति: युवा वर्ग का समर्थन।
प्रशासन: यात्राएँ फलदायी।
आर्थिक स्थिति: अच्छा लाभ।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 11
पूजन: शनि देव की उपासना।
मीन (Pisces)
नामाक्षर: द, च
कार्य/व्यवसाय: समय पर काम पूरा होगा।
शिक्षा: अनुभवी व्यक्ति की सलाह काम आएगी।
कला: कल्पनाशक्ति बढ़ेगी।
राजनीति: सहयोगियों का समर्थन।
प्रशासन: निर्णय सटीक होंगे।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ेंगे पर आवश्यक।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 3
पूजन: विष्णु भगवान की उपासना फलदायी।
डिस्क्लेमर
इस ज्योतिषीय लेख में दी गई सभी जानकारी ज्योतिष गणना पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष को प्रमाणित नहीं करता। अपनी व्यक्तिगत जन्मकुंडली व समस्याओं के समाधान हेतु किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श लें।