Monday, June 29, 2026
Home Blog Page 440

महराजगंज का सबसे बड़ा युवा महोत्सव—इनोवेशन और लोककला की चमक से जगमगाया जनपद स्तरीय युवा उत्सव

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में शनिवार का दिन युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार के नाम रहा। महंत दिग्विजयनाथ बहुउद्देशीय इनडोर स्टेडियम, चौक में आयोजित जनपद स्तरीय युवा उत्सव जिले की अब तक की सबसे प्रभावशाली युवा प्रस्तुतियों का गवाह बना। युवा कल्याण विभाग महराजगंज के इस कार्यक्रम ने न सिर्फ प्रतिभाओं को मंच दिया, बल्कि यह साबित कर दिया कि महराजगंज का युवा वर्ग विज्ञान, रचनात्मकता और संस्कृति—तीनों क्षेत्रों में असाधारण क्षमता रखता है।
उत्सव का शुभारंभ उत्तर प्रदेश युवा कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष विभ्राट चंद कौशिक ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया। जिला युवा कल्याण अधिकारी वैभव सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर किया। पूरा स्टेडियम तब खास अंदाज में गूंज उठा जब इनोवेशन ट्रैक, साइंस मॉडल, लोकगीत, लोकनृत्य, पेंटिंग, कविता, भाषण और कहानी लेखन में युवाओं ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। हर प्रस्तुति ने दर्शकों को नए अंदाज में प्रभावित किया और निर्णायक भी प्रतिभाओं के स्तर से बेहद संतुष्ट दिखे।

इनोवेशन ट्रैक मे प्रथम आराधना चौधरी,द्वितीय अंबिकेश गुप्ता टीम कविता लेखन में प्रथम नितेश सिंह, द्वितीय उजाला लोकगीत में प्रथम सत्यप्रकाश एवं द्वितीय कविता लोकनृत्य में प्रथम निधि एवं टीम, द्वितीय सीमा एवं टीम पेंटिंग में प्रथम आदित्य गौर, द्वितीय श्वेता शर्मा भाषण प्रतियोगिता में प्रथम नितेश सिंह कहानी लेखन में प्रथम श्रेया पटेल, द्वितीय विजय लक्ष्मी रहें।
कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में बेचू दास और विपिन पांडेय शामिल रहें। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. दिवाकर सिंह, डॉ. हरेंद्र यादव, और मेजर रामपाल यादव की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमामयी बनाया। ‌
कार्यक्रम में बृजेश यादव, प्रवीण मिश्रा, राकेश पटेल, अर्जुन त्रिपाठी, जितेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
समापन में विजेताओं को सम्मानित किया गया, और महराजगंज के युवाओं ने यह फिर साबित किया कि उनका उत्साह व प्रतिभा जनपद का भविष्य बेहद उज्ज्वल बनाती है।

सिकंदरपुर–बालूपुर मार्ग पर बड़ा हादसा: नीलगाय से टकराकर बाइक सवार बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिकंदरपुर–बालूपुर मुख्य मार्ग पर हरदिया गांव के पास शनिवार शाम एक बड़ा सड़क हादसा हो गया, जिसमें बाइक सवार 58 वर्षीय हरिओम दुबे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सूत्रों के अनुसार, सरकंडा गांव निवासी हरिओम दुबे शाम करीब 6:30 बजे सिकंदरपुर में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौट रहे थे। तभी हरदिया गांव के पास सड़क पर अचानक तेज रफ्तार से दौड़ती नीलगाय उनकी बाइक पर कूद पड़ी। अचानक हुई इस टक्कर के चलते बाइक अनियंत्रित होकर पलट गई और हरिओम दुबे सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

ये भी पढ़ें – महराजगंज का गौरव: इंस्पायर अवार्ड जीतकर चमके अमन अहमद, जिला विद्यालय निरीक्षक ने किया सम्मानित

स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिकंदरपुर पहुंचाया। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें सदर अस्पताल, बलिया रेफर कर दिया।
घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई और लोग इस मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित नजर आए।

ये भी पढ़ें – खिचड़ी मेले को लेकर सीएम योगी का समीक्षा बैठक

खिचड़ी मेले को लेकर सीएम योगी का समीक्षा बैठक

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शनिवार को गोरखनाथ मंदिर के सभाकक्ष में सीएम योगी ने अधिकारियों संग आगामी खिचड़ी मेले को लेकर की समीक्षा बैठक । सीएम ने कहा कि सभी कार्य 20 दिसंबर तक पूरा काम कर ले सुरक्षा, सहूलियत का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। खिचड़ी मे नेपाल, यूपी, बिहार सहित देशभर से लोग आते हैं। इस बैठक मे मेयर, नगर आयुक्त, वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद।

महराजगंज का गौरव: इंस्पायर अवार्ड जीतकर चमके अमन अहमद, जिला विद्यालय निरीक्षक ने किया सम्मानित

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ऑलमाइटी पब्लिक इंटर कॉलेज, बृजमनगंज के मेधावी छात्र अमन अहमद ने राज्य स्तर पर इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में चयनित होकर जिला का मान बढ़ा दिया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि पर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) प्रदीप कुमार शर्मा ने डीआईओएस कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान अमन को मेडल, अंगवस्त्र और प्रमाण पत्र प्रदान किया।

ये भी पढ़ें – “शराब माफियाओं पर पुलिस की करारी कार्रवाई: दियारा में 2000 लीटर लहन नष्ट, नेटवर्क ध्वस्त”

समारोह को संबोधित करते हुए डीआईओएस ने कहा कि अमन अब राष्ट्रीय स्तर पर अपना इनोवेशन मॉडल प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने इसे अमन की कड़ी मेहनत, स्कूल के अनुशासन और शिक्षकों के उत्कृष्ट मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां जिले के अन्य विद्यार्थियों को विज्ञान, नवाचार और तकनीकी अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

डीआईओएस ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित इंस्पायर अवार्ड मानक योजना का उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और देश भर से नवाचारी प्रतिभाओं को पहचान देना है।

कार्यक्रम में जिले के विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने अमन की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

ये भी पढ़ें – जोगिया डिग्री कॉलेज में मुख्यमंत्री का आगमन: जनसैलाब उमड़ा, प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

“शराब माफियाओं पर पुलिस की करारी कार्रवाई: दियारा में 2000 लीटर लहन नष्ट, नेटवर्क ध्वस्त”

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

पुलिस अधीक्षक बलिया ओमवीर सिंह के नेतृत्व में सिकंदरपुर पुलिस ने शनिवार को एक बड़ी सफलता हासिल की। थाना क्षेत्र के लीलकर गांव स्थित दियारा इलाके में लंबे समय से चल रहे अवैध शराब कारोबार पर पुलिस ने भारी कार्रवाई करते हुए बड़ा नुकसान पहुँचाया है।
सूत्रों के अनुसार थाना अध्यक्ष मूलचंद चौरसिया के नेतृत्व में बनी विशेष टीम नाव के माध्यम से दियारा क्षेत्र में दाखिल हुई। घने झुरमुटों के बीच रखे गए प्लास्टिक के दर्जनों ड्रमों में अवैध शराब बनाने हेतु रखा गया करीब 2000 लीटर लहन बरामद हुआ। पुलिस टीम ने मौके पर ही लहन को नष्ट कर दिया तथा शराब बनाने में उपयोग होने वाले दर्जनों प्लास्टिक ड्रमों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान सेकंड अफसर सुरेश यादव, हेड कांस्टेबल दिनेश सिंह, अमित पटेल, कृष्ण कुमार चौधरी, संजय कुमार, पंकज सहित भारी संख्या में पुलिस कर्मी व चौकीदार मौजूद रहे। पुलिस के अचानक पहुंचने पर शराब बनाने वाले तस्कर भट्टी और सामान छोड़कर मौके से फरार हो गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दियारा क्षेत्र अवैध शराब निर्माण के लिए कुख्यात रहा है, लेकिन अब इस अवैध कारोबार पर पूरी सख्ती के साथ रोक लगाई जाएगी। पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि— “दियारा क्षेत्र में अब शराब का काला कारोबार नहीं चलेगा, और इसमें लिप्त हर व्यक्ति जेल की सलाखों के पीछे होगा।” स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस यदि ऐसे अवैध धंधों में शामिल सफेदपोश लोगों को भी सर्विलांस पर ले ले तो यह कारोबार पूरी तरह खत्म हो जाएगा। सिकंदरपुर पुलिस की इस तगड़ी कार्रवाई के बाद दियारा क्षेत्र में अवैध शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं ग्रामीणों ने पुलिस की इस मुहिम की सराहना की है।

जोगिया डिग्री कॉलेज में मुख्यमंत्री का आगमन: जनसैलाब उमड़ा, प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। घुघली और जोगिया क्षेत्र का शनिवार का दिन अविस्मरणीय बन गया, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री विशेष आमंत्रण पर जिले में पहुंचे। मुख्यमंत्री का काफिला जोगिया डिग्री कॉलेज के समीप पहुंचते ही हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों में उत्साह ऐसा कि सुबह से ही सड़क किनारे, कॉलेज परिसर और विवाह स्थल के पास जनसैलाब दिखाई देने लगा।
भीड़ बढ़ने के साथ प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, सीओ सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं मौके पर डेरा डालकर स्थिति का निरीक्षण किया। भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग, यातायात डायवर्जन और एस्कॉर्ट टीम को विशेष निर्देश दिए गए। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।
मुख्यमंत्री जोगिया क्षेत्र के प्रभावशाली नेता व हिंदू समाज के जुझारू प्रवर्तक वीरेंद्र सिंह के परिवार में आयोजित विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने वीरेंद्र सिंह की पौत्री के विवाह में सम्मिलित होकर परिवारजनों को आशीर्वाद दिया और नवविवाहित दंपति के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं कीं। उनके आगमन से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का माहौल बन गया।
कार्यक्रम स्थल पर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या देखी गई। मुख्यमंत्री को नजदीक से देखने की उत्सुकता में लोग सुबह से ही विवाह स्थल और डिग्री कॉलेज परिसर में पहुंच गए थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा, व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को अत्यंत सुचारु बनाए रखा। मुख्यमंत्री के आगमन ने जोगिया क्षेत्र की जनता में उत्साह भर दिया और यह दिन क्षेत्र के लिए यादगार बन गया, जब प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व आम लोगों के बीच पहुंचकर सामाजिक सौहार्द और पारिवारिक मूल्यों का संदेश देता दिखा।

पुलिस लाइन देवरिया में एस.जे.पी.यू. की मासिक समीक्षा बैठक सम्पन्न

बाल विवाह रोकथाम एवं बाल संरक्षण पर अधिकारियों ने किया मार्गदर्शन

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)
पुलिस लाइन देवरिया स्थित प्रेक्षागृह में विशेष किशोर पुलिस इकाई (एस.जे.पी.यू.) की माह नवंबर 2025 की मासिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता क्षेत्राधिकारी नगर संजय कुमार रेड्डी ने की, जबकि संचालन जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी जय प्रकाश तिवारी द्वारा किया गया।

बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं प्रतिभागियों का परिचय प्राप्त करने के पश्चात क्षेत्राधिकारी नगर ने बालकों के हित में नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। बैठक का प्रमुख विषय बाल विवाह रोकथाम रहा, जिस पर अधिकारियों को विशेष रूप से जागरूक किया गया।

जिला परिवीक्षा अधिकारी अनिल कुमार सोनकर ने बाल विवाह रोकने के उपायों एवं संबंधित कानूनों की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए जनपद को बाल विवाह मुक्त बनाने हेतु सक्रिय प्रयास करने की अपील की।
संरक्षण अधिकारी जय प्रकाश तिवारी ने अवगत कराया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 9 के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु की बालिका या 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह कराने पर अधिकतम दो वर्ष का कारावास तथा एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं की जानकारी होने पर 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, 181 महिला हेल्पलाइन, 112 पुलिस इमरजेंसी सेवा या संबंधित विभागों को तत्काल सूचना दी जानी चाहिए।

उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वाई.पी. यादव ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी दिनेश कुमार ने श्रम कानूनों एवं विभिन्न श्रम योजनाओं की जानकारी दी।
किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य ब्रजेश नाथ तिवारी ने जे.जे. बोर्ड की कार्यप्रणाली पर विस्तार से बताया।

राजकीय बाल गृह बालक के प्रभारी अधीक्षक रामकृपाल ने बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास एवं बाल गृह की संरचना व योजनाओं पर जानकारी साझा की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि ओम प्रकाश तिवारी (डिप्टी लिगल डिफेन्स) ने बाल विवाह अधिनियम तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग व संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

थाना ए.एच.टी.यू. के प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार वर्मा ने एस.जे.पी.यू. के कर्तव्यों व दायित्वों की रूपरेखा बताते हुए निर्देश दिया कि सभी थानों पर नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी प्राप्त जानकारी के अनुरूप नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।

बैठक में वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक नीतू भारती एवं चाइल्ड हेल्पलाइन देवरिया की प्रभारी कोऑर्डिनेटर सुश्री अनुराधा राज ने भी अपने-अपने विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में जिला बाल संरक्षण इकाई के अरविन्द यादव, उपनिरीक्षक अशोक यादव, मुख्य आरक्षी सत्यपाल चौहान, आकाश सिंह कुशवाहा, आरक्षी राहुल कुमार, महिला आरक्षी अर्चना कुशवाहा सहित जनपद के सभी थानों पर नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

“बिजली बिल राहत योजना 2025-26: देवरािया में शुरू हुआ तेज़ रफ्तार जागरूकता अभियान, गांव-गांव पहुंची टीम”

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।

जिले में बिजली बिल राहत योजना 2025-26 को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रशासन ने शुक्रवार से बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया गया है। योजना की जानकारी अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक पहुँच सके, इसके लिए बिजली विभाग की टीम ने विशेष रणनीति बनाकर गांवों और कस्बों में डोर-टू-डोर जागरूकता, लाउडस्पीकर घोषणाएँ, पोस्टर-बैनर अभियान और पंपलेट वितरण का व्यापक कार्यक्रम संचालित किया।

अधीक्षण अभियंता एवं अधिशासी अभियंता देवरिया के निर्देशानुसार, उपखंड अधिकारी अमित प्रताप सिंह के नेतृत्व में यह अभियान 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र पुरवा के अंतर्गत युद्धस्तर पर चलाया गया। अभियान को सफल बनाने में अभियंता अमर प्रसाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

टीम में रामनाथ, संविदा लाइनमैन संजय सिंह, पिंटू सिंह, बिट्टू सिंह, राजेश यादव, दिवाकर यादव, राजीव सहित कई कार्मिक सक्रिय रूप से शामिल रहे। सभी ने क्षेत्रवासियों को योजना के लाभ, पंजीकरण प्रक्रिया और राहत के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी देकर उन्हें योजना का फायदा उठाने के लिए प्रेरित किया।

यह जागरूकता अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा, ताकि जिले का हर उपभोक्ता बिजली बिल राहत योजना का लाभ प्राप्त कर सके।

हेमंत सरकार को ‘पद समाप्ति पत्र’ बांटना चाहिए: भाजपा सांसद आदित्य साहू का बड़ा हमला

0

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हेमंत सरकार पार्ट-2 की पहली वर्षगांठ पर आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह पर भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। साहू ने आरोप लगाया कि सरकार करोड़ों रुपये विज्ञापन और कार्यक्रमों पर खर्च कर स्वयं की पीठ थपथपा रही है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

सांसद साहू ने सवाल उठाया कि जिन 10,000 नियुक्तियों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, उनमें से कितनी वेकेंसी वर्तमान सरकार ने निकाली है। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश पद पूर्ववर्ती रघुवर सरकार के समय में निकाले गए थे, जिन्हें हेमंत सरकार ने कानूनी प्रक्रियाओं में उलझाकर वर्षों तक लटका दिया।

साहू ने कहा कि इंडी गठबंधन योजनाओं को “लटकाने, भटकाने और अटकाने” की राजनीति करता है, और जनता के कल्याण से इनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “10 लाख नौकरी देने का वादा करने वाली सरकार 10 हजार से भी कम नियुक्ति पत्र पर जश्न मना रही है।”

ये भी पढ़ें – शिक्षा से नाता जोड़ गोरख प्रसाद निषाद बने थे राज्यमंत्री- जितेन्द्र

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हेमंत सरकार ने दोबारा सत्ता में आते ही राज्य में 2 लाख से अधिक सरकारी पद समाप्त कर दिए, ऐसे में आज सरकार को ‘नियुक्ति पत्र’ नहीं बल्कि ‘पद समाप्ति पत्र’ बांटना चाहिए।

साहू ने कहा कि—

युवा हताश और निराश हैं, JSSC CGL परीक्षाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं, बेरोजगारी भत्ता पर सरकार चुप है और घोषित परीक्षा कैलेंडर का कोई अस्तित्व ही नहीं।

उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह “युवाओं के घाव पर नमक छिड़कने जैसा है।”

ये भी पढ़ें – देवरिया में एसजेपीयू की मासिक समीक्षा बैठक: बाल विवाह रोकथाम पर विशेष जोर, विभागों को सतर्क रहने के निर्देश

शिक्षा से नाता जोड़ गोरख प्रसाद निषाद बने थे राज्यमंत्री- जितेन्द्र

मछुआ समाज ने गोरख प्रसाद निषाद के निधन पर जताया शोक

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मत्स्य जीवी फिश फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड कार्यालय पर शनिवार को मछुआ समाज ने बैठक कर राज्यमंत्री रहे गोरख प्रसाद निषाद के निधन पर शोक व्यक्त किया। बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा मछुआरा प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश सह संयोजक निषाद जितेन्द्र भारत ने कहा कि गोरख प्रसाद निषाद ने पुश्तैनी काम छोड़कर पढ़ाई की और बाबा गयादास इंटर कॉलेज में शिक्षक बने।

बाद में भाजपा से विधान परिषद सदस्य और फिर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के मंत्रिमंडल में मत्स्य एवं पशुधन राज्यमंत्री बने। इस दौरान निषाद समाज के लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर उनके आत्मा के चीर शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना किया।

ये भी पढ़ें – देवरिया में एसजेपीयू की मासिक समीक्षा बैठक: बाल विवाह रोकथाम पर विशेष जोर, विभागों को सतर्क रहने के निर्देश

इस अवसर पर मछुआ प्रतिनिधि रामधनी निषाद, बृजा नंद निषाद, सूरज प्रसाद निषाद, कोदई मांझी, विजय निषाद, जगदीश निषाद, चिंतामणि साहनी, राजकेश्वर साहनी, दीनानाथ निषाद, सुभाष चंद साहनी, कमलेश साहनी , सोनू निषाद, सुरेन्द्र, सचिन व दीपक आदि उपस्थित रहें।

ये भी पढ़ें – मैं अपने सगे संबंधियों के गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठा सकता हूं…..बाबूलाल मरांडी

देवरिया में एसजेपीयू की मासिक समीक्षा बैठक: बाल विवाह रोकथाम पर विशेष जोर, विभागों को सतर्क रहने के निर्देश

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पुलिस लाइन देवरिया के प्रेक्षागृह में विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की मासिक समीक्षा बैठक (नवंबर 2025) आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता क्षेत्राधिकारी नगर संजय कुमार रेड्डी ने की, जबकि संचालन जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी जय प्रकाश तिवारी ने किया।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों से परिचय प्राप्त करने के बाद क्षेत्राधिकारी नगर ने सभी विभागों को बाल संरक्षण कानूनों और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों का संरक्षण शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और सभी विभाग इसके लिए एकजुट होकर कार्य करें।

बाल विवाह रोकथाम पर विशेष फोकस

बैठक का मुख्य एजेंडा बाल विवाह रोकथाम रहा। जिला परिवीक्षा अधिकारी अनिल कुमार सोनकर ने बाल विवाह विरोधी कानून, विभागीय जिम्मेदारियों और रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिले को “बाल विवाह मुक्त देवरिया” बनाने के लिए सभी विभागों का समन्वय आवश्यक है।

संरक्षण अधिकारी जय प्रकाश तिवारी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा-9 का उल्लेख करते हुए बताया कि—

18 वर्ष से कम आयु की बालिका

21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह कराना दो वर्ष की सजा, एक लाख रुपये जुर्माना, या दोनों दंड के प्रावधान में आता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है।

उन्होंने निर्देश दिया कि बाल विवाह की किसी भी सूचना पर तुरंत
1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 181 (महिला हेल्पलाइन) और 112 (पुलिस आपातकालीन सेवा) पर रिपोर्ट किया जाना अनिवार्य है।

ये भी पढ़ें – मैं अपने सगे संबंधियों के गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठा सकता हूं…..बाबूलाल मरांडी

विभागों द्वारा साझा की गई महत्वपूर्ण जानकारियाँ

डॉ. वाई. पी. यादव, उप मुख्य चिकित्साधिकारी—स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और भूमिका पर जानकारी।

दिनेश कुमार, श्रम प्रवर्तन अधिकारी—श्रम कानूनों और श्रम विभाग की योजनाओं का विवरण।

ब्रजेश नाथ तिवारी, सदस्य किशोर न्याय बोर्ड—जे.जे. बोर्ड की कार्यप्रणाली की जानकारी।

रामकृपाल, प्रभारी अधीक्षक, राजकीय बाल गृह—संरक्षण एवं पुनर्वास प्रक्रियाओं पर मार्गदर्शन।

ओमप्रकाश तिवारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण—बाल विवाह मामलों में विधिक सहायता की भूमिका।

सुरेश वर्मा, थाना AHTU प्रभारी निरीक्षक—एसजेपीयू के दायित्वों और थानों के बाल कल्याण अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश।

बैठक में चाइल्ड हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर और सभी थानों के नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

ये भी पढ़ें – जातीय अभद्र टिप्पणी के विरोध में परशुराम सेना का पुतला दहन, कार्रवाई की उठी मांग

मैं अपने सगे संबंधियों के गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठा सकता हूं…..बाबूलाल मरांडी

0

हेमंत सोरेन में हिम्मत है तो पंकज मिश्रा पर कार्रवाई कर दिखाएं

राँची (राष्ट्र की परम्परा)। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया एक्स के एक पोस्ट को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा रीट्वीट किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

मरांडी ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी के साथ उनकी तस्वीर पोस्ट की गई है और मुख्यमंत्री उसे रिट्वीट कर रहे हैं तो जवाब देना जरूरी हो जाता है।

कहा कि किसी के द्वारा किसी भी नेता का स्वागत करने या बैठकर बातचीत की तस्वीर का मतलब ये नहीं है कि नेता उसके कामकाज का लेखा जोखा रखे। कहा कि हेमंत जी को तो इस बात का गर्व होना चाहिये कि मुझ जैसे लोग वैसे लोगों के भी काले कारनामे उजागर कर सकते हैं।

जो कभी मेरे साथ तस्वीरों में दिखे हैं। कहा कि क्या हेमंत सोरेन जी अपने पंकज मिश्रा जैसे लोगों के कार्यकलापों की चर्चा या जॉंच का आदेश देने का नैतिक काम कर सकते हैं?

उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन लोगों के काले कारनामो की जानकारी मिलने पर उन्होंने नाम सामने लाया है उनमें से मेरे साथ किसी की तस्वीर तो क्या अगर कोई सगा संबंधी भी उस गलत काम में लिप्त है, तो मुख्यमंत्री उस पर कारवाई करायें वे उसका स्वागत करेंगे।

जातीय अभद्र टिप्पणी के विरोध में परशुराम सेना ने किया पुतला दहन, कार्रवाई की उठी मांग

कोपागंज/मऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा द्वारा कथित तौर पर की गई जातीय व अभद्र टिप्पणी को लेकर बीएसएस परशुराम सेना के कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखने को मिला। शनिवार को थाने मोड़ पर कार्यकर्ताओं ने वर्मा का पुतला फूंका और जोरदार नारेबाजी करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रदेश अध्यक्ष अजीत पांडे ने कहा कि संतोष वर्मा के बयान ने समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि एक उच्च पद पर रहते हुए इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी अमर्यादित है तथा ब्राह्मण समाज की महिलाओं का घोर अपमान है। यह बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला है।

ये भी पढ़ें – Thailand Floods & Landslides: थाईलैंड में तबाही! मौत का आंकड़ा 145 पार, 36 लाख लोग प्रभावित – सरकार पर गुस्सा फूटा

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह के विवादित बयान देकर समाजिक शांति को भंग न कर सके।

प्रदर्शन के दौरान सेना के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है, तो जिलेभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पुतला दहन कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष मुनींद्र मिश्रा, धनंजय पांडे, राजेश पांडे, पंकज पांडेय, शशांक मणि त्रिपाठी, दुर्गेश पांडे, प्रवीण कुमार तिवारी, मधु तिवारी, शुभम गिरी सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

ये भी पढ़ें – रेलवे का हाई-टेक भविष्य: 250 किमी/घंटा की रफ्तार वाली ट्रेनों पर तेज़ी से काम, एआई से बदलेगा ट्रैक मेंटेनेंस; जानें पूरा प्लान

पथरदेवा विधानसभा में अब 6 दिसम्बर को होगी विधायक खेल स्पर्धा, खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित होने वाली विधायक खेल स्पर्धा की तिथि में संशोधन किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी प्रत्यूष पाण्डेय ने जानकारी दी कि पूर्व निर्धारित तिथि 24 अक्टूबर को बदलते हुए अब प्रतियोगिता 6 दिसम्बर को आयोजित की जाएगी। कृषि मंत्री के निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया है।

ये भी पढ़ें –क्या सोशल मीडिया पर भी एससी/एसटी एक्ट जैसे कठोर नियम लागू हों? समझें सुप्रीम कोर्ट का इशारा

प्रतियोगिता दो स्थानों पर संपन्न होगी—राजेश्वरी देवी रामसुभग सिंह महाविद्यालय और महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज, कुर्मी पट्टी, पथरदेवा। आयोजक समिति के अनुसार इस बार खेल स्पर्धा बड़े स्तर पर की जा रही है, ताकि क्षेत्रीय खिलाड़ियों को बेहतर मंच मिल सके।

इस प्रतियोगिता में कुल आठ प्रमुख खेल विधाएँ शामिल की गई हैं—
कबड्डी, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, कुश्ती, बैडमिंटन, जूडो, फुटबॉल और भारोत्तोलन। इनमें सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर तीनों वर्गों के खिलाड़ियों को भाग लेने का अवसर मिलेगा।

प्रतिभागियों का पंजीकरण ऑनलाइन किया जा रहा है। इच्छुक खिलाड़ी yuvasathi.in और sansadkhelmahotsav.in पोर्टल पर जाकर अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद निर्धारित तिथि और स्थल पर खिलाड़ी अपनी-अपनी विधा में प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे।

आयोजकों का मानना है कि यह स्पर्धा न केवल युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।

क्या सोशल मीडिया पर भी एससी/एसटी एक्ट जैसे कठोर नियम लागू हों? समझें सुप्रीम कोर्ट का इशारा

क़्या सोशल मीडिया के लिए सेंसर बोर्ड?सोशल मीडिया के लिए भी एससी-एसटी की तरह  कानून लागू करने का सुझाव सराहनीय 

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर सोशल मीडिया आज दुनियाँ के  लोकतंत्र की सबसे प्रभावशाली, और कई बार सबसे खतरनाक, ताकत के रूप में उभरा है।सूचना के त्वरित प्रसार ने जहां संवाद को नई ऊर्जा दी है, वहीं गलत सूचना, घृणास्पद भाषण, मानहानि साम्प्रदायिक तनाव और संस्थानों के प्रति अविश्वास जैसी समस्याएँ भी अत्यंत तीव्रता से बढ़ी हैं। भारत जैसे व्यापक जनसंख्या वाले लोकतांत्रिक देश में यह चुनौती और अधिक जटिल हो जाती है, क्योंकि विविधता, राजनीतिक सक्रियता और इंटरनेट की तीव्र पहुंच मिलकर सूचना के प्रसार को बेकाबू बना देते हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि ऐसे समय में भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोशल मीडिया कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए सरकार को दिए गए नए दिशा- निर्देश न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक औरप्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर निरंतर बढ़ रहे हानिकारक कंटेंट को केवल पोस्ट-फैक्टो यानी घटना होने के बाद हटाने की प्रक्रिया से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।यह एक ऐतिहासिक टिप्पणी है, क्योंकि अब तक दुनिया के अधिकांश देशों ने सोशल मीडिया को मुख्य रूप से इसी पोस्ट- रेगुलेशन मॉडल पर चलाया है, जबकि भारत पहली बार प्रि-स्क्रीनिंग मॉडल पर विचार कर रहा है।केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रहे अश्लील और हानिकारक कंटेंट को रोकने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय एक नया नियामक ढांचा तैयार कर रहा है। सरकार ने कोर्ट से चार सप्ताह का और समय मांगा है ताकि इन नए दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देकर लोगों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जा सकें। 

ये भी पढ़ें –पटना में गमला और फार्मिंग बेड योजना शुरू: छतों पर जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

साथियों बात अगर हम इस केस को समझने की करें तो, मीडिया में जानकारी आई कि एक केस में सुप्रीम कोर्ट के अनुसारसोशल मीडिया पर वायरल होने वाला कंटेंट आधुनिक समय का सबसे कठिन सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा संकट है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक पहुँच जाती है। यह गति कई बार इतने बड़े स्तर पर हानि पहुँचाती है कि सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास हस्तक्षेप करने का समय ही नहीं बचता। अदालत ने कहा कि अगर किसी कंटेंट को हटाने से पहले ही वह समाज में तनाव, नफरत या हिंसा का कारण बन जाए,तो ऐसीस्थिति में पोस्ट- फैक्टो कार्रवाई का कोई वास्तविक प्रभाव नहीं रह जाता। ऐसे में केवल सुधारात्मक उपाय नहीं, बल्कि सुरक्षा-आधारित निवारक उपाय की आवश्यकता होती है।इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सोशल मीडिया कंटेंट के अपलोड होने से पहले प्रि-स्क्रीनिंग मैकेनिज्म का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया। यह निर्देश केवल प्रशासनिक नहीं,बल्कि डिजिटल युग में नागरिक अधिकारों अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तकनीकी नैतिकता के बीच एक नए संतुलन की खोज का संकेत भी है। 

ये भी पढ़ें –दिल्ली में जानलेवा स्मॉग का कहर जारी: AQI 400 के करीब पहुँचकर बिगड़ी हवा, एनसीआर में भी संकट गहराया

साथियों बात अगर हम अदालत का यह दृष्टिकोण विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है इसको समझने की करें तो  यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक समाचार एजेंसी,प्रसारण संस्थान और जनसंचार माध्यम केमिश्रित स्वरूप के रूप में देखता है। पारंपरिक मीडिया पर प्रि- सेंसरशिप या प्रि-अप्रूवल जैसी व्यवस्थाएँ पहले से मौजूद हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर यह लागू नहीं रही,क्योंकि इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मंच माना जाता रहा है। किंतु वर्तमान समय में व्यक्तिगत अभिव्यक्तियाँ गण-शक्ति का रूप ले चुकी हैं और उनका प्रभाव कई देशों में चुनाव परिणामों,जनदंगों, दंगों, बैंकिंग संकटों,स्वास्थ्य संबंधी अफवाहों और आतंकवादी गतिविधियों तक में देखा गया है।सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जब सोशल मीडिया कंटेंट समाज की संवेदनशीलता, सुरक्षा और व्यवस्था को सीधे प्रभावित कर रहा है, तब उसके लिए नए प्रकार की नियामक संरचना आवश्यक है। यही कारण है कि कोर्ट ने सरकार को हथियार थमाते हुए,जैसा कि मीडिया ने इसे वर्णित किया,एक कठोर लेकिन जरूरी ढांचे की कल्पना करने को कहा।इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया रेगुलेशन के लिए कोई सेल्फ- स्टाइल्ड या स्वयंभू संस्था पर्याप्त नहीं है। अभी तक कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने स्वयं के कम्युनिटी गाइडलाइंस और फैक्ट-चेकिंग मैकेनिज्म के आधार पर कंटेंट मॉडरेशन करते रहे हैं। परंतु अदालत के अनुसार ये संस्थाएँ न तो पारदर्शी हैं, न निष्पक्ष, और न ही बाहरी प्रभावों से मुक्त।

ये भी पढ़ें –दोहरे हत्याकांड से सनसनी: आपत्तिजनक हालत में मिले मां और प्रेमी का बेटे ने गला घोंटकर किया कत्ल

इनका संचालन निजी कंपनियों द्वारा किया जाता है, जिनके अपने हित, बाज़ार रणनीतियाँ और राजनीतिक दबाव हो सकते हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत को एक ऐसी न्यूट्रल,स्वतन्त्र,और संविधान -आधारित रेगुलेटरी बॉडी की आवश्यकता है, जो न उद्योग के हितों के प्रति झुकी हो और न किसी राजनीतिक प्रभाव के तहत काम करे।यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी है, क्योंकि दुनिया में अभी तक केवल कुछ ही देशों ने सोशल मीडिया के लिए स्वतंत्र रेगुलेटर बनाने की दिशा में कदम उठाया है।

ये भी पढ़ें –सागर अग्नि मेला 2025: अंगारों पर चलने की 400 साल पुरानी परंपरा शुरू, राजा के सपने से हुई थी अनोखी परंपरा की शुरुआत

साथियों बात अगर हम सुप्रीम कोर्ट की बेंच, की टिप्पणियों को समझने की करें तो, भारत को सोशल मीडिया रेगुलेशन के लिए ऐसा मॉडल चाहिए जिसमें दंडात्मक प्रावधान भी शामिल हों। इस चर्चा के दौरान सीजेआई ने एससी/एसटी एक्ट का उदाहरण दिया। यह एक कठोर कानून है जिसके तहत किसी भी व्यक्ति के प्रति जाति-आधारित अपमान या हिंसा के मामले में स्पष्ट और सख्त दंड तय है। इसी मॉडल को डिजिटल स्पेस में लागू करने का संकेत अदालत ने देते हुए कहा कि यदि दिव्यांग व्यक्तियों, अनुसूचित जाति या अन्य संवेदनशील समुदायों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी सोशल मीडिया पर अपलोड होती है, तो उस पर केवल रिपोर्ट और डिलीट करने की प्रक्रिया नहीं बल्कि तत्काल प्रभाव से दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह टिप्पणी पहली बार डिजिटल अपराधों को पारंपरिक संवेदनशीलता -आधारित अपराधों की श्रेणी में रखने का संकेत देती है, जो भारत के सामाजिक ढांचे के संदर्भ में अत्यंत क्रांतिकारी विचार है।

ये भी पढ़ें –रेलवे का हाई-टेक भविष्य: 250 किमी/घंटा की रफ्तार वाली ट्रेनों पर तेज़ी से काम, एआई से बदलेगा ट्रैक मेंटेनेंस; जानें पूरा प्लान

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी उस संदर्भ में की जब वह उन यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर्स की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन्होंने इंडियाज गॉट लेटेंट शो में कथित रूप से दिव्यांग व्यक्तियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और जिनके विरुद्ध कई राज्यों में एफआई आर दर्ज कराई गई थी। यूट्यूबर्स ने इन एफआईआर को चुनौती देते हुए कहा कि कंटेंट हल्के हास्य के रूप में था और मामला विचाराधीन नहीं होना चाहिए। लेकिन अदालत का दृष्टिकोण इस पर स्पष्ट था कि डिजिटल माध्यम पर अपलोड की गई कोई भी टिप्पणी केवल मनोरंजन या व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के दायरे में सीमित नहीं रह जाती, बल्कि उसका समाज शास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक प्रभाव व्यापक होता है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म अब महज मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि जनमत निर्माण के सबसे शक्तिशाली स्रोत बन चुके हैं। इसलिए इन पर मौजूद कंटेंट के लिए जिम्मेदारी भी समान रूप से बढ़ती है।

ये भी पढ़ें –WPL 2026 शेड्यूल जारी: 9 जनवरी से शुरू होगा महिला प्रीमियर लीग का अगला सीजन, पहले ही मैच में भिड़ेंगी हरमनप्रीत vs मंधाना

साथियों बात अगर हम इस मामले को अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में देखें तो सोशल मीडिया रेगुलेशन की यह बहस पूरी दुनियाँ में चल रही है।यूरोप में डिजिटल सर्विसेज एक्ट, अमेरिका में सेक्शन 230 पर चल रही बहस, ऑस्ट्रेलिया में न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड और कनाडा में ऑनलाइन हार्म्स एक्ट ये सभी इस बात का संकेत हैं कि सोशल मीडिया अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से ज्यादा सुरक्षा, गोपनीयता, गलत सूचना और लोकतांत्रिक स्थिरता का प्रश्न बन चुका है। भारत में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इस क्रम में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समाज की सुरक्षा के बीच नए संतुलन का निर्माण करना चाहती है। कोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया की स्वतंत्रता तभी तक स्वीकार्य है जब तक वह किसी व्यक्ति, समुदाय, संस्था या राष्ट्र की गरिमा और सुरक्षा को आघात न पहुँचाए। यदि कोई कंटेंट इस सीमा का अतिक्रमण करता है, तो उसे प्रि-स्क्रीनिंग के माध्यम से रोका जाना चाहिए।प्रि-स्क्रीनिंग मैकेनिज्म कई प्रकार से काम कर सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  आधारित स्वचालित फ़िल्टरिंग, ह्यूमन मॉडरेशन, स्वतंत्र सरकारी या अर्ध-सरकारी एजेंसी की स्क्रीनिंग,और प्लेटफॉर्म- आधारित कंसोर्टियम मॉडल इन सभी की भूमिका हो सकती है। हालांकि इसके साथ कई चुनौतियाँ भी हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव, यह कि कौन तय करेगा कि क्या आपत्तिजनक है, क्या यह सेंसरशिप की ओर नहीं बढ़ जाएगा, क्या यह तकनीकी रूप से संभव है कि भारत में रोज़ाना अपलोड होने वाले करोड़ों पोस्टों की पहले से स्क्रीनिंग की जाए ये प्रश्न स्वाभाविक हैं।लेकिन अदालत का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी सार्वजनिक व्यवस्था वाले लोकतंत्र में स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों समानांतर रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए। केवल स्वतंत्रता पर जोर देना उतना ही गलत है जितना केवल नियंत्रण पर जोर देना। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि सोशल मीडिया रेगुलेशन केवल दंडात्मक प्रक्रिया नहीं,बल्कि एक व्यापक सामाजिक-तकनीकी सुधार का हिस्सा है। इसमें शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, टेक कंपनियों की जवाबदेही, पारदर्शिता रिपोर्ट, डाटा सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन की स्पष्ट नीति जैसे तत्व भी महत्वपूर्ण हैं। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रि-स्क्रीनिंग का मॉडल ऐसा न बने जो लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाए,बल्कि ऐसा मॉडल बने जो हानिकारक कंटेंट को रोकते हुए अधिक सुरक्षित डिजिटल लोकतंत्र स्थापित करे।संक्षेप में कहा जाए तो सुप्रीम कोर्ट का सोशल मीडिया प्रि-स्क्रीनिंग मॉडल का सुझाव भारत में डिजिटल नैतिकता और कानून व्यवस्था के नए युग का संकेत देता है। यह प्रस्ताव न केवल तकनीकी दृष्टि से,बल्कि सामाजिक,राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी एक बड़े परिवर्तन की ओर इशारा करता है। वैश्विक मंच पर यह भारत को उन देशों की श्रेणी में रख सकता है जो डिजिटल दुष्प्रचार और ऑनलाइन अपराधों से निपटने के लिए साहसिक और ठोस कदम उठा रहे हैं। अब यह सरकार और संसद पर निर्भर करता है कि वह सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव को किस प्रकार लागू करती है, और क्या वह एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी रेगुलेटर तैयार कर पाती है जो सोशल मीडिया के भविष्य को सुरक्षित, संतुलित और जिम्मेदार बना सके।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318