Monday, June 29, 2026
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असमानता बढ़ी, समाधान की रफ्तार धीमी: विकास मॉडल पर उठ रहे गंभीर सवाल

डॉ. सतीश पाण्डेय | महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। देश में विकास के दावों के बीच जमीनी सच्चाई बिल्कुल अलग नजर आती है। आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक असमानता की खाई पहले से कहीं अधिक चौड़ी हो चुकी है। गांव और शहर के बीच सुविधाओं का फासला बढ़ता जा रहा है, जबकि समस्याओं के समाधान की रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई है। इससे आम लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था पर कमज़ोर होता दिख रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव

गांवों में साफ पेयजल, पक्की सड़कें, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार जैसी जरूरतें आज भी अधूरी हैं। सरकारी दावे बड़े हैं, लेकिन इन सुविधाओं का लाभ वास्तविक रूप से सीमित इलाकों तक ही पहुंच पा रहा है।
इसके विपरीत शहरों में संसाधनों की भरमार है—आधुनिक अस्पताल, चौड़ी सड़कें, बड़े बाजार और तेज आर्थिक गतिविधियां। यह असमानता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक स्तर पर भी गहरी होती जा रही है।

महंगाई और बेरोजगारी ने तोड़ी आम आदमी की कमर

गरीब और मध्यम वर्ग लगातार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है। कई रिपोर्टों के अनुसार, योजनाएं तो समय-समय पर शुरू की जाती हैं, लेकिन लाभ लोगों तक पहुंचने में महीनों या सालों लग जाते हैं। कई बार शिकायतें सिर्फ कागजों में निस्तारित दिखती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं होता।

विकास का मॉडल सवालों के घेरे में

विशेषज्ञों का कहना है कि विकास तभी संतुलित कहा जाएगा जब उसकी गति सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचे। वर्तमान स्थिति में समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन समाधान की प्रक्रिया बेहद धीमी है। यह प्रशासनिक तंत्र की कमियों की ओर संकेत करता है।

क्या है समाधान?

बढ़ती असमानता रोकने और विकास को संतुलित बनाने के लिए विशेषज्ञ कुछ अहम कदम सुझाते हैं—

• नीतियों को तेजी से जमीन पर उतारना

• संसाधनों का समान वितरण

• गरीब और वंचित वर्ग को प्राथमिकता

• जिम्मेदार विभागों पर कड़ी जवाबदेही

यदि समाधान की गति नहीं बढ़ी, तो असमानता की यह खाई इतनी गहरी हो सकती है कि समाज का संतुलन खतरे में पड़ जाए।

सभ्य समाज की पहचान—जिम्मेदारी! पर अब यह गुण तेजी से गायब, उठ रहे गंभीर सवाल

✍️ कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सभ्य समाज की बुनियाद जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग पर टिकती है। पर आज की परिस्थितियों को देखकर लगता है कि ये मूल्य धीरे-धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं। आधुनिकता की भीड़ में सामाजिक जिम्मेदारियां खोती दिख रही हैं—और इसी के साथ समाज की वह पहचान भी धुंधली पड़ रही है, जिस पर हमेशा गर्व किया जाता था। गांव से लेकर शहर तक, सड़क से लेकर दफ्तर तक और परिवार से लेकर समाजिक संस्थाओं तक—हर जगह एक बात आम होती जा रही है कि लोग अपने कर्तव्यों से कतराते हैं और सिर्फ अधिकारों की बात करते हैं। नतीजा यह है कि व्यवस्था कमजोर हो रही है और समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। सफाई की जिम्मेदारी किसी की नहीं, ट्रैफिक नियम तोड़ना आम बात,सरकारी कार्यालयों में काम के प्रति लापरवाही, सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान, और समाजिक कार्यक्रमों में कम भागीदारी—ये सब संकेत हैं कि जिम्मेदारी का भाव कमजोर पड़ चुका है। लोग समस्या देखते हैं लेकिन पहल नहीं करते, गलत होता देखते हैं लेकिन आवाज उठाने में हिचकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिम्मेदारी का अभाव सिर्फ सामाजिक कमजोरी नहीं, बल्कि भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। जब समाज के लोग अपनी भूमिका निभाना छोड़ देंगे—व्यवस्था चरमरा जाएगी ,अपराध बढ़ेंगे, विश्वास बढ़ेगा,और आपसी संबंध कमजोर पड़ेंगे, जिम्मेदारी का अभाव परिवारों के भीतर भी देखने को मिल रहा है। बुजुर्गों की देख भाल से लेकर बच्चों को संस्कार देने तक—कई परिवार अपनी मूल जिम्मेदारियों से दूर होते जा रहे हैं नतीजा: पीढ़ियों के बीच दूरी, नैतिक मूल्यों में गिरावट और रिश्तों में कड़वाहट।
प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी की कमी आम जनता साफ तौर पर महसूस कर रही है। शिकायतें दर्ज होती हैं, पर समाधान में देरी, नियम बनते हैं,पर पालन में कमी,योजनाएं तैयार होती हैं,पर निगरानी कमजोर।ऐसे में जनता का सवाल बिल्कुल उचित है—अगर हर कोई जिम्मेदारी दूसरों पर डाल देगा,तो समाज किस राह पर जाएगा?
अब समय आ गया है कि समाज अपने मूल्यों की ओर लौटे,नागरिक अपने कर्तव्यों को समझें विभाग जिम्मेदारी से काम करें,
परिवार अपने रिश्तों का मान रखें,और हर व्यक्ति समाज में अपनी भूमिका निभाए। क्योंकि सभ्य समाज की असली पहचान उसके विकास में नहीं,उसकी जिम्मेदारी निभाने की क्षमता में होती है—और यही गुण आज फिर जगाने की जरूरत है।

“वे महान नाम जिन्होंने जन्म लेकर समाज बदल दिया”

2 दिसंबर: वे नाम जिन्होंने समय को दिशा दी और इतिहास को पहचान

2 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन व्यक्तित्वों का प्रतीक है जिन्होंने अपने विचार, कर्म और योगदान से समाज, संस्कृति, राजनीति, विज्ञान और साहित्य को नई दिशा दी। आइए जानें इस दिन जन्मे प्रमुख महान व्यक्तियों के जीवन की संक्षिप्त लेकिन सशक्त झलक —

फैसल अली डार (जन्म: 2 दिसंबर 1988)
जन्म स्थान: जम्मू-कश्मीर | क्षेत्र: मार्शल आर्ट
फैसल अली डार भारत के आधुनिक मार्शल आर्ट प्रशिक्षकों में गिने जाते हैं। उन्होंने युवाओं को आत्मरक्षा और शारीरिक अनुशासन के प्रति जागरूक किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और युवाओं के लिए प्रेरणा बने।

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शिवा अय्यदुरई (जन्म: 2 दिसंबर 1963)
जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र | क्षेत्र: विज्ञान, तकनीक
शिवा अय्यदुरई एक प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक, शोधकर्ता और ई-मेल प्रणाली के विकास में योगदानकर्ता माने जाते हैं। उन्होंने अमेरिका में शिक्षा प्राप्त की और कंप्यूटर साइंस में उल्लेखनीय शोध कार्य किया, जिससे वैश्विक पहचान बनी।

जगत प्रकाश नड्डा (जन्म: 2 दिसंबर 1960)
जन्म स्थान: बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश | क्षेत्र: राजनीति
जेपी नड्डा भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नामों में शामिल हैं। विद्यार्थी जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। संगठन निर्माण, जनसेवा और नीति निर्धारण में उनके योगदान ने उन्हें राष्ट्रीय मंच पर एक प्रभावशाली पहचान दिलाई।

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ओम प्रकाश रावत (जन्म: 2 दिसंबर 1953)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश | क्षेत्र: प्रशासन
ओपी रावत प्रशासनिक सेवा के एक सम्मानित अधिकारी रहे हैं। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनका योगदान रहा। उन्होंने चुनावी पारदर्शिता और प्रक्रिया की स्वच्छता के लिए कई अहम कदम उठाए।

अचला नागर (जन्म: 2 दिसंबर 1939)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश | क्षेत्र: सिनेमा, लेखन
अचला नागर हिंदी फिल्म जगत की प्रसिद्ध पटकथा लेखिका थीं। उन्होंने महिलाओं और समाज से जुड़े विषयों को पर्दे पर जीवंत किया। उनके लेखन ने सामाजिक बदलाव की दिशा में एक सशक्त हस्ताक्षर छोड़ा।

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मनोहर जोशी (जन्म: 2 दिसंबर 1937)
जन्म स्थान: महाराष्ट्र | क्षेत्र: राजनीति
मनोहर जोशी एक अनुभवी नेता रहे, जिन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में विशेष योगदान दिया। उनका प्रशासनिक ज्ञान और नेतृत्व क्षमता उन्हें जनसेवा के क्षेत्र में एक विशेष स्थान दिलाती है।

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बी. नागी रेड्डी (जन्म: 2 दिसंबर 1912)
जन्म स्थान: आंध्र प्रदेश | क्षेत्र: सिनेमा
दक्षिण भारतीय सिनेमा के स्तंभ माने जाने वाले नागी रेड्डी एक महान निर्माता-निर्देशक थे। उन्होंने फिल्म उद्योग को नई दिशा दी और भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल (जन्म: 2 दिसंबर 1901)
जन्म स्थान: उत्तराखंड | क्षेत्र: साहित्य
वे हिंदी साहित्य के विद्वान और आचार्य रामचंद्र शुक्ल के सहयोगी रहे। भाषा, साहित्य और शोध क्षेत्र में उनका योगदान आज भी अकादमिक जगत के लिए अमूल्य निधि है।

बाबा राघवदास (जन्म: 2 दिसंबर 1886)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश | क्षेत्र: समाजसेवा
बाबा राघवदास एक संत और जनसेवक थे। उन्होंने समाज सुधार, निर्धनों की सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। उनका जीवन मानव सेवा का जीवंत उदाहरण है।

एन. जी. चन्दावरकर (जन्म: 2 दिसंबर 1855)
जन्म स्थान: महाराष्ट्र | क्षेत्र: स्वतंत्रता आंदोलन
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। शिक्षा और सामाजिक सुधार उनके मुख्य उद्देश्य रहे। उनके विचार राष्ट्रनिर्माण में सहायक बने।

बलरामपुर में भीषण बस-ट्रक टक्कर: दोनों वाहन जलकर खाक, 3 की मौत और 25 घायल; चीख-पुकार से दहला इलाका

बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बलरामपुर के कोतवाली देहात क्षेत्र स्थित फुलवरिया बाईपास पर मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें दिल्ली जाने वाली एक निजी बस और तेज रफ्तार मालवाहक ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कुछ ही क्षणों में दोनों वाहनों में भीषण आग लग गई और पूरा इलाका चीख-पुकार से गूंज उठा।

हादसे में मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कई यात्री आग की लपटों में झुलस गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, यातायात पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने के साथ राहत-बचाव कार्य शुरू किया।

प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे

दुर्घटना की खबर मिलते ही जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन और पुलिस अधीक्षक विकास कुमार तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने हालात का जायजा लेते हुए राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके बाद दोनों अस्पताल पहुंचे और घायलों की स्थिति जानी तथा बेहतर उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

कैसे हुआ हादसा?

सूत्रों के मुताबिक, बस सोनौली से दिल्ली जा रही थी और फुलवरिया चौराहे से गोंडा की ओर बढ़ रही थी। तभी ओवरब्रिज की दिशा से आ रहा ट्रक सीधे बस में घुस गया। टक्कर से बस सड़क किनारे लगे ट्रांसफार्मर से जा टकराई, जिससे बिजली तारों के संपर्क में आते ही बस में आग लग गई और आग ट्रक में भी फैल गई।

टक्कर के बाद ट्रक पलट गया था। उसे सीधा करने पर नीचे से एक व्यक्ति का बुरी तरह झुलसा शव मिला, जिसकी पहचान नहीं हो पाई है। आशंका है कि वह ट्रक में ही सवार था और पलटने के कारण बाहर नहीं निकल सका।

जांच जारी

पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी में तेज रफ्तार और कम दृश्यता को संभावित कारण बताया जा रहा है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है।

चैरिटी के बहाने ISI का जासूसी नेटवर्क नेपाल में सक्रिय, भारतीय सीमावर्ती जिलों पर बढ़ी निगरानी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने चैरिटी और मेडिकल सहायता कार्यक्रमों के नाम पर नेपाल में एक नया जासूसी नेटवर्क खड़ा कर लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों—गोरखपुर, लखनऊ और पिथौरागढ़—की गतिविधियों पर नजर रखना और खुफिया जानकारी जुटाना है। सुरक्षा एजेंसियों ने इन बढ़ती हलचलों पर गंभीर चिंता जताई है।

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में नेपाल में सक्रिय संदिग्धों की गतिविधियों के आधार पर भारत के सीमावर्ती जिलों में पांच डॉक्टरों की जांच की गई है, जिनमें से एक संदिग्ध अचानक दुबई भाग गया। उसकी यात्रा और दिल्ली धमाके से जुड़े कनेक्शन ने शक और गहरा कर दिया है।

नेपाल में चैरिटी के नाम पर बढ़ रही पाकिस्तानी गतिविधियां

केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई हालिया आईबी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नेपाल में चैरिटी, मेडिकल कैंप और रिसर्च से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए पाकिस्तानी और तुर्किए नागरिकों की आवाजाही बढ़ी है।
15 नवंबर को बहराइच से पकड़े गए दो ब्रिटिश नागरिकों में से एक पाकिस्तानी मूल का हस्सन अमान सलीम था, जो भी चैरिटी के नाम पर नेपाल आता था।

इससे पहले पाकिस्तानी सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल हबीब ने भी लुंबिनी क्षेत्र में इसी तरीके से नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश की थी।

पूर्व आईबी अधिकारी संतोष सिंह के अनुसार, इन गतिविधियों का मकसद सिर्फ “मानवीय सेवा” नहीं, बल्कि भारत पर दोतरफा निगरानी, सीमावर्ती क्षेत्रों की मैदानी जानकारी एकत्र करना और स्थानीय नेटवर्क तैयार करना भी है।

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जांच का दायरा बढ़ा

पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज से लगते नेपाली क्षेत्रों में यह पता लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान और तुर्किए से कौन लोग सेमिनार, फेलोशिप, रिसर्च प्रोजेक्ट
के नाम पर नेपाल की बार-बार यात्रा कर रहे हैं। संदेह है कि फंडिंग बाहरी स्रोतों से होती है और इसी माध्यम से नेपाल में एक संगठित जासूसी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

संदेहास्पद डॉक्टर हुआ विदेश रवाना

जांच में सामने आए दो चिकित्सकों में से एक अचानक दुबई चला गया।
दिल्ली धमाके के बाद उसकी विदेश यात्रा ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, और अब उसके पुराने संपर्कों व नेपाल यात्राओं की भी जांच की जा रही है।

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डिजिटल दुनिया में उलझा बचपन: मोबाइल ने दिया मनोरंजन, पर छीन ली मासूमियत

सोमनाथ मिश्रा की रिपोर्ट

आज का बच्चा खिलौनों, मैदानों और कहानियों की दुनिया से निकलकर मोबाइल और स्क्रीन की आभासी दुनिया में कैद होता जा रहा है। पहले जहाँ दादी-नानी की कहानियाँ, कबड्डी, लुका-छिपी और कंचे बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा थे, वहीं अब यूट्यूब, इंस्टाग्राम रील्स और ऑनलाइन गेम्स उनकी दुनिया बन चुके हैं। यह बदलाव केवल मनोरंजन की आदत नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया का बचपन पर असर गहराई से पड़ रहा है, जो बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की ध्यान शक्ति को कमजोर करता है। एक ही जगह बैठकर घंटों मोबाइल देखने से न केवल आंखों पर दबाव बढ़ता है, बल्कि दिमागी थकान, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। यह सोशल मीडिया का बचपन पर असर का एक गंभीर पहलू है, जिसे माता-पिता अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

सोशल मीडिया बच्चों को झूठी दुनिया दिखाता है, जहाँ हर चीज़ “परफेक्ट” नजर आती है। इससे बच्चों में हीन भावना विकसित होने लगती है। वे अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं और धीरे-धीरे असंतोष और अकेलापन उनके भीतर घर करने लगता है। कम उम्र में ही बच्चे लाइक, कमेंट और फॉलोअर्स के पीछे भागने लगते हैं, जो उनके आत्मसम्मान को भी कमजोर करता है। यही सोशल मीडिया का बचपन पर असर का दूसरा बड़ा खतरा है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि मोबाइल ने बच्चों से उनकी मासूमियत छीन ली है। वे उम्र से पहले ही बड़े होने की कोशिश कर रहे हैं। अशोभनीय कंटेंट, हिंसक गेम्स और आभासी रिश्ते, उन्हें वास्तविक जीवन से दूर कर रहे हैं। दोस्ती अब मैदान में नहीं, चैट बॉक्स में हो रही है। भावनाएं इमोजी तक सिमट कर रह गई हैं।

हालांकि तकनीक पूरी तरह बुरी नहीं है, लेकिन उसका असंतुलित उपयोग बच्चों के भविष्य के लिए खतरा बन गया है। अभिभावकों की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को डिजिटल अनुशासन सिखाएं। मोबाइल के लिए समय निर्धारित करें, आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा दें और परिवार के साथ समय बिताने की आदत विकसित करें।

यदि समय रहते इस सोशल मीडिया का बचपन पर असर को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाली पीढ़ी मानसिक और सामाजिक रूप से कमजोर बन सकती है। जरूरी है कि बच्चों को फिर से किताबों, खेलों और प्रकृति से जोड़ा जाए, ताकि उनका बचपन केवल स्क्रीन में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे भी सांस ले सके।

जहां वीरता ने भक्ति से हाथ मिलाया: हनुमान जी का दिव्य प्रवेश

हनुमानजी का श्रीराम से मिलन की अलिखित भूमिका

हनुमान जी का पम्पापुर जाना कोई साधारण यात्रा नहीं थी। यह एक ऐसी दिव्य घटना का प्रारंभ था, जिसने त्रेतायुग की दिशा बदल दी। यह उस महान संबंध की नींव थी, जो आगे चलकर श्रीराम और महाबली हनुमान के बीच एक अमर, अटूट और अविनाशी बंधन के रूप में स्थापित हुआ। पम्पा सरोवर की पावन भूमि पर रखा गया यह पहला चरण केवल एक भौगोलिक आगमन नहीं था, बल्कि धर्म, भक्ति, कर्तव्य और समर्पण की महागाथा का उद्घोष था।

पम्पापुर – आज का प्रसिद्ध “हंपी” – ऋषि मतंग की तपोभूमि और शबरी माता की आस्था की भूमि मानी जाती है। यहीं पर बाली के भय से व्यथित सुग्रीव अपने थोड़े से वानर साथियों के साथ शरण लिए हुआ था। यही वह समय था जब हनुमान, जो सुग्रीव के परम बुद्धिमान मंत्री और हितैषी थे, दूर से एक दिव्य तेज से युक्त दो राजकुमारों को वन में विचरण करते देख लेते हैं।

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जैसे ही हनुमान जी की दृष्टि श्रीराम और लक्ष्मण पर पड़ी, वैसे ही उन्हें अंतर्मन में एक अद्भुत स्पंदन का अनुभव हुआ। यह कोई सामान्य मानव नहीं थे। मर्यादा, तेज, शांति और करुणा का जो सम्मिलित स्वरूप उन्होंने देखा, वह उन्हें भीतर तक झकझोर गया। तभी उन्होंने ब्राह्मण का वेश धारण कर विनम्रता से प्रश्न किया—
“आप दोनों कौन हैं, जो इस घोर वन में भी दिव्य आभा से शोभित हैं?”

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यह संवाद इतिहास नहीं, अध्यात्म का शिखर है। यहीं से आरंभ होती है उस भक्ति की कहानी, जो आगे चलकर सीता माता की खोज, लंका दहन, संजीवनी और रावण वध जैसी महान घटनाओं का आधार बनी। हनुमान जी ने जब श्रीराम का परिचय जाना, तब उनके मन में संपूर्ण समर्पण का भाव जागृत हुआ। उन्होंने वहीं मन-ही-मन संकल्प कर लिया—
“अब मेरा जीवन इन्हीं प्रभु की सेवा के लिए है।”

हनुमान जी ने श्रीराम को सुग्रीव से मिलने का प्रस्ताव दिया। यह प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक या सैन्य गठबंधन का आरंभ नहीं था, बल्कि यह धर्म और न्याय की विजय का संकल्प था। पम्पापुर से किष्किंधा तक का यह मार्ग, इतिहास के सबसे पवित्र मार्गों में से एक बन गया—जहां श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान साथ-साथ चले। उस मार्ग पर न शब्द अधिक थे, न प्रश्न, केवल अनुभूति थी… एक अटूट भरोसे की।

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सरलता, विनम्रता और सेवा का जो स्वरूप हनुमान जी ने उस समय दिखाया, वह आज भी मानवता के लिए एक आदर्श है। उनका बल, उनकी बुद्धि, उनका पराक्रम बाद में संसार ने देखा, परंतु पम्पापुर की उसी भूमि ने उनकी सच्ची पहचान – एक भक्त, एक सेवक और एक राम-आज्ञाकारी योद्धा – को जन्म लेते देखा।

यह वही क्षण था जब श्रीराम के कार्यों को दिशा मिली और हनुमान को जीवन की सार्थकता। उस दिन वन में केवल दो पुरुष नहीं मिले थे, बल्कि भगवान और भक्ति का मिलन हुआ था। और जब यह दो शक्ति एक हुईं, तब संसार में अधर्म टिक नहीं सका।

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पम्पापुर का वह मौन साक्षी रहा —
एक युगपुरुष का आगमन
एक भक्त का समर्पण
और एक युद्ध का बीजोत्पत्ति
आज भी जब हम हनुमान जी का स्मरण करते हैं, तो उनके बल, पराक्रम और वीरता के साथ-साथ उस पल को भी स्मरण करते हैं जब उन्होंने पहली बार श्रीराम की ओर झुककर कहा था—
“प्रभु, अब मैं आपका हूँ।”
यही वाक्य भक्ति का चरम है। यही वाक्य इतिहास है। यही वाक्य रामायण की आत्मा है।

हनुमानजी की कथा का 5 वा एपिसोड है।

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आज का दिन बदलेगा आपकी किस्मत – 2 दिसंबर का महाशक्तिशाली राशिफल

दैनिक राशिफल – 2 दिसंबर (मंगलवार) 2025
ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा तैयार विशेष राशिफल

आज के दिन चंद्रमा मेष राशि (Aries) में स्थित है। सूर्य, शुक्र और मंगल वृश्चिक (Scorpio) में संयोग बना रहे हैं। गुरु कर्क (Cancer), शनि मीन (Pisces), राहु कुंभ (Aquarius) और केतु सिंह (Leo) में गोचर कर रहे हैं। इन ग्रह स्थितियों का सीधा प्रभाव आपके स्वास्थ्य, करियर, शिक्षा, राजनीति, प्रशासन और आर्थिक क्षेत्र पर पड़ेगा।

♈ मेष राशि (Aries) – अ, च, चू, चे, ला | ♈

आज आपके भीतर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होगा।
कार्य-व्यवसाय: नई योजनाएँ सफल होंगी। निवेश लाभकारी रहेगा।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए अनुकूल दिन।
कला-संगीत: रचनात्मकता में वृद्धि।
राजनीति/प्रशासन: आपके विचारों का समर्थन बढ़ेगा।
आर्थिक: धन लाभ के योग।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
उपास्य देव: हनुमान जी

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♉ वृषभ राशि (Taurus) – इ, उ, ए, ओ, वा | ♉

मन थोड़ा अस्थिर रह सकता है लेकिन कार्य सिद्ध होंगे।
व्यवसाय: खर्च अधिक रहेगा, लेकिन लाभ भी मिलेगा।
शिक्षा: ध्यान केंद्रित करने की जरूरत।
कला: मन भटकेगा।
राजनीति: विरोधियों से सावधान रहें।
आर्थिक: संतुलन बनाकर चलें।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6
उपास्य देव: माँ लक्ष्मी

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♊ मिथुन राशि (Gemini) – का, की, कु, घ | ♊

आज सफलता आपके कदम चूमेगी।
व्यवसाय: आय के नए स्रोत बनेंगे।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में प्रगति।
कला-संगीत: मंच पर पहचान मिलेगी।
राजनीति: नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
आर्थिक: बड़ा लाभ संभव।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
उपास्य देव: श्री गणेश

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♋ कर्क राशि (Cancer) – डा, डी, डू, हो | ♋

आज मान-सम्मान में वृद्धि होगी।
व्यवसाय: साझेदारी लाभकारी।
शिक्षा: प्रदर्शन उत्तम रहेगा।
राजनीति/प्रशासन: उच्च अधिकारी प्रसन्न।
आर्थिक: रुका हुआ धन मिलेगा।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 2
उपास्य देव: शिव जी

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♌ सिंह राशि (Leo) – मा, मी, मू, मे, मो | ♌

भाग्य का सितारा चमकेगा।
व्यवसाय: नई डील मिलेगी।
शिक्षा: रिसर्च के लिए उत्तम समय।
कला-संगीत: प्रशंसा प्राप्त होगी।
राजनीति: जनसमर्थन बढ़ेगा।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1
उपास्य देव: सूर्य देव

♍ कन्या राशि (Virgo) – टो, पा, पी, पू | ♍

आज सावधानी जरूरी है।
व्यवसाय: दुर्घटना से बचें।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है।
राजनीति: विवाद से दूर रहें।
आर्थिक: सामान्य लाभ।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 4
उपास्य देव: दुर्गा जी

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♎ तुला राशि (Libra) – रा, री, रू, रे, रो | ♎

आज शत्रु पर विजय मिलेगी।
व्यवसाय: प्रमोशन संभव।
शिक्षा: विदेश से लाभ।
राजनीति: पद की प्राप्ति का योग।
आर्थिक: आय में तेजी।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 6
उपास्य देव: श्री कृष्ण

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♏ वृश्चिक राशि (Scorpio) – ना, नी, नू, ने | ♏

स्वास्थ्य में हल्का उतार-चढ़ाव।
व्यवसाय: लाभ के संकेत।
शिक्षा/कला: दिमाग तीव्र रहेगा।
राजनीति: विरोधी कमजोर होंगे।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 8
उपास्य देव: सूर्य एवं विष्णु

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♐ धनु राशि (Sagittarius) – ये, यो, भा, धा | ♐

विद्यार्थियों के लिए श्रेष्ठ दिन।
व्यवसाय: नई शुरुआत उत्तम।
शिक्षा: उच्च अंक मिलेंगे।
राजनीति: दूरगामी सफलता।
शुभ रंग: केसरिया | शुभ अंक: 3
उपास्य देव: नारायण

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♑ मकर राशि (Capricorn) – भो, जा, जी, खा | ♑

घर में तनाव संभव पर संपत्ति योग।
व्यवसाय: भूमि-वाहन लाभ।
शिक्षा: मेहनत रंग लाएगी।
शुभ रंग: सिल्वर | शुभ अंक: 10
उपास्य देव: शनिदेव

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♒ कुंभ राशि (Aquarius) – गू, गे, गो, सा | ♒

आज आपके साहस से सब संभव होगा।
व्यवसाय: पार्टनर से लाभ।
शिक्षा: टॉप में नाम।
राजनीति/प्रशासन: पदोन्नति के योग।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 7
उपास्य देव: शिव

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♓ मीन राशि (Pisces) – दी, दू, थ, झ | ♓

आज खुशियों की दस्तक।
व्यवसाय: नया अवसर मिलेगा।
शिक्षा/कला: रचनात्मक सफलता।
आर्थिक: धन लाभ निश्चित।
शुभ रंग: आकाशी | शुभ अंक: 11
उपास्य देव: विष्णु जी

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यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। यह किसी राष्ट्र, धर्म या व्यक्ति की कुंडली का प्रमाण नहीं है। कृपया अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से अवश्य दिखाएं।

— पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय

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संत कबीर नगर: पुलिस पिकेट के पास युवक को गोलियों से घायल, हालत गंभीर—फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय खलीलाबाद बाईपास पर सोमवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया जब पुलिस पिकेट के बिल्कुल पास अज्ञात हमलावरों ने एक युवक को गोलियों से छलनी कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी नाजुक हालत देखते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर रेफर कर दिया गया।

युवक को गले में दो और सिर में लगी एक गोली

घायल युवक की पहचान संतोषपति त्रिपाठी, निवासी रनदौली उर्फ मठिया (सहजनवा, गोरखपुर) के रूप में हुई है। डॉक्टरों ने बताया कि उसके गले में दो और सिर में एक गोली लगी है, और उसकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।

एसपी पहुंचे अस्पताल, घटनास्थल का निरीक्षण

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना जिला अस्पताल पहुंचे और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे, जहां फोरेंसिक टीम ने महत्वपूर्ण साक्ष्य इकट्ठा किए।स्थानीय लोगों ने बताया कि मौके पर तीन गोलियों की आवाज सुनी गई थी।

आपसी रंजिश का मामला, पुलिस कर रही जांच

प्रारंभिक जांच में मामला आपसी रंजिश से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। एसपी संदीप मीना ने कहा कि मेंहदावल बाईपास पर युवक को गोली लगने की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और घायल को तुरंत अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि युवक की स्थिति अभी अचेत है। पुलिस परिजनों से तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज कर रही है और जल्द ही अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।

अंतर्राष्ट्रीय दासता उन्मूलन दिवस: मानव से लेकर मन तक- हर रूप की गुलामी से मुक्ति आवश्यक

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✍️ नवनीत मिश्र

अंतर्राष्ट्रीय दासता उन्मूलन दिवस हमें यह याद दिलाता है कि दासता केवल इतिहास के पन्नों में कैद कोई पुरानी व्यवस्था नहीं है, बल्कि आज भी कई नए रूपों में हमारे बीच मौजूद है। समय बदला, समाज बदला, लेकिन गुलामी का स्वरूप बदलकर आदतों और मानसिकता में बस गया है। यही कारण है कि आज दासता की चर्चा केवल मानव की शारीरिक बंधन तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिक दासता, विशेषकर नशे की लत पर भी उतनी ही गंभीरता से होनी चाहिए।
गुलामी सिर्फ इंसानों की नहीं होती, नशे की भी होती है। नशा इंसान के शरीर के साथ उसकी इच्छाशक्ति, सोच, निर्णय और भविष्य को भी कैद कर लेता है। यह ऐसी बेड़ी है जो दिखाई नहीं देती, पर भीतर से व्यक्ति को धीरे-धीरे खोखला कर देती है। जैसे पुराने समय में दासता मनुष्य की स्वतंत्रता छीन लेती थी, उसी तरह नशा मन और मस्तिष्क की स्वतंत्रता को बंधक बना लेता है। व्यक्ति यह मानने लगता है कि वह नशे के बिना जीवन नहीं जी सकता, और यहीं से शुरू होती है उसकी मानसिक गुलामी। नशे की लत व्यक्ति को सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक रूप से भी कमजोर बनाती है। परिवार की खुशियाँ तनाव में बदल जाती हैं, आर्थिक स्थिति बिखरने लगती है, रिश्ते टूटते हैं और आत्मविश्वास धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। नशा केवल एक को नहीं, पूरे परिवार को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। समाज में अपराध, दुर्घटनाएँ, घरेलू हिंसा और अविश्वास जैसे कई दुष्परिणाम इसी मानसिक दासता के कारण बढ़ रहे हैं। यह आधुनिक युग का मौन संकट है, जिसका बोझ हर वर्ग और हर आयु पर दिखने लगा है।
इसलिए आज आवश्यकता है कि जब हम दासता उन्मूलन की बात करें, तो केवल इतिहास की बेड़ियों की नहीं, वर्तमान की अदृश्य बेड़ियों की ओर भी ध्यान दें। असली स्वतंत्रता वही है जब मनुष्य सिर्फ शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वतंत्र हो। नशे से मुक्त होना एक व्यक्ति की निजी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। जागरूकता, संवाद, उपचार, परिवार का सहयोग और समाज का सकारात्मक माहौल, ये सब मिलकर नशे की दासता को तोड़ सकते हैं।
इस दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम न केवल स्वयं नशे से मुक्त जीवन जिएँगे, बल्कि दूसरों को भी इस बंधन से बाहर आने में सहायता करेंगे। क्योंकि गुलामी किसी भी रूप में हो, शरीर की, मन की या आदतों की वह मनुष्य की गरिमा और स्वतंत्रता के खिलाफ है।
सच्ची आज़ादी वही है, जब शरीर और मन दोनों बंधनों से मुक्त हों।
नशे की दासता खत्म करना ही आत्मसम्मान और उज्ज्वल भविष्य की ओर पहला कदम है।

भोपाल गैस त्रासदी के सबक सीख: प्रदूषण नियंत्रण का सामूहिक संकल्प

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✍️ पुनीत मिश्र

2- 3 दिसंबर 1984, भारतीय इतिहास का वह दर्दनाक अध्याय है, जहाँ विकास की तेज़ रफ़्तार ने मानव जीवन की सुरक्षा को पीछे छोड़ दिया। भोपाल गैस त्रासदी केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यह चेतावनी थी कि लापरवाही, कमजोर सुरक्षा व्यवस्थाएँ और गैर-जिम्मेदार औद्योगिक संस्कृति किस तरह एक पूरे शहर की सांसें छीन सकती हैं। आज भी यह घटना हजारों परिवारों की स्मृतियों में टीस की तरह मौजूद है। हम आहत परिवारों के प्रति आत्मीय संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस इसी त्रासदी की याद दिलाता है कि प्रदूषण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि जीवन और भविष्य का प्रश्न है।
आज प्रदूषण अपनी सीमाएं तोड़कर एक अदृश्य खतरे के रूप में हमारे आसपास फैला हुआ है। वायु, जल, मिट्टी और ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ रासायनिक और औद्योगिक प्रदूषण नई चुनौतियाँ बनकर उभरे हैं। महानगर ही नहीं, अब छोटे शहर भी प्रदूषण की चपेट में हैं। नदियाँ औद्योगिक कचरे से विषाक्त हो रही हैं, हवा में जहरीले तत्व बढ़ रहे हैं, और ध्वनि प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य पर गहरी चोट पहुंचा रहा है। रासायनिक इकाइयों की ढीली सुरक्षा संभावित दुर्घटनाओं की आशंका को लगातार बढ़ा रही है। प्रदूषण की यह व्यापकता बताती है कि यह किसी एक क्षेत्र या वर्ग की समस्या नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ा गंभीर संकट है।
इस स्थिति से निपटने के लिए केवल नियमों की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जन-सहभागिता की भी आवश्यकता है। रासायनिक और औद्योगिक इकाइयों में आधुनिक सुरक्षा मानकों का अनिवार्य रूप से पालन हो। वायु और जल प्रदूषण पर निगरानी के लिए स्मार्ट तकनीक और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को बढ़ावा दिया जाए। कचरा प्रबंधन सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक हो, खासकर प्लास्टिक, ई-वेस्ट और मेडिकल वेस्ट के मामले में। सौर, पवन और जैव-ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को व्यापक रूप से अपनाया जाए। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया जाए ताकि निजी वाहनों का दबाव कम हो और वायु प्रदूषण घटे। सबसे महत्वपूर्ण, समाज के हर वर्ग में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़े ताकि यह किसी सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन का रूप ले सके।
भोपाल की त्रासदी हमें यह सिखाती है कि विकास तभी सार्थक और टिकाऊ है जब वह सुरक्षित और मानवीय हो। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ का परिणाम हमेशा विनाशकारी होता है। राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने का संकल्प दिवस है कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो, न भोपाल में और न दुनिया के किसी भी कोने में।
आज जरूरत केवल भाषणों या औपचारिकताओं की नहीं, बल्कि ठोस संकल्प और निरंतर प्रयास की है। प्रदूषण के विरुद्ध हमारा हर छोटा कदम पेड़ लगाना, प्लास्टिक कम करना, स्वच्छ ऊर्जा अपनाना, और उद्योगों को जवाबदेह बनानाl अगली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वस्थ धरती देने की दिशा में बड़ा योगदान है। भोपाल गैस त्रासदी का मूल संदेश यही है कि पर्यावरण की सुरक्षा, मानव सुरक्षा की पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।

जड़ से खोखले बिजली के खम्बो को सूचना देने के बाद भी ठीक नहीं किया गया

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। नगरपालिका के वार्डो मे दर्जनों लोहे के विद्युत पोल जड़ से खराब होकर तार के सहारे लटक रहे हैं जिससे कभी बड़ा हादसा हो सकता है। इन जर्जर तारों व खराब हो चुके विद्युत के खम्बो की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा विभाग के अधिकारियों को कई बार दिया गया।

विभाग के अधिकारी कभी भी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। नगर के पटेल नगर, पुराना बरहज, केवटलिया, सहित कई वार्डो में दर्जनों विद्युत पोल जड़ से खराब हो चुके हैं, कई खम्भे तो नीचे से टूट कर दीवालों के सहारे लटके हुए हैं जिससे कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।

नगर निवासी श्रवण, चंदन, जीतू , भोला, राकेश, करन,अनूप सहित कई वार्डो के सदस्य गणो द्वारा भी शिकायत कर विभाग से बिजली के खम्बो को ठीक करने की मांग की गयी है लेकिन विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बन दुर्घटना का इंतजार कर रहे है। इस संबंध में अधिशासी अभियंता अरविंद सिंह गौतम से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

सड़क हादसे में भिटौली ने खोया अपना सच्चा साथी: नेताओं का उमड़ा स्नेह, पूर्व प्रधान आशीष गौतम की रिक्तता अपूर्णनीय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भिटौली उपनगर ने एक सच्चे, ईमानदार और जनसेवा के लिए समर्पित नेता को खो दिया है। पूर्व प्रधान आशीष गौतम की सड़क दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया। उनके निधन की खबर फैलते ही क्षेत्रवासियों और जनप्रतिनिधियों में शोक संवेदनाओं की लम्बी श्रृंखला शुरू हो गई।

नेताओं ने पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

सोमवार को विधान परिषद सदस्य सी.पी. चन्द भिटौली स्थित उनके आवास पर पहुंचे और परिजनों से मिलकर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आशीष गौतम राजनीति में अत्यंत सक्रिय, ईमानदार और जनहित कार्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित थे।
उन्होंने कहा— “आशीष गौतम लोगों के सच्चे साथी थे। उनका जाना हमारे लिए बड़ी क्षति है।”

इसके बाद पनियरा विधानसभा के पूर्व विधायक देवनरायण सिंह उर्फ जी.एम. सिंह भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि गौतम की लोकप्रियता सिर्फ भिटौली तक सीमित नहीं थी, बल्कि आसपास के कई गांवों में भी लोग उन्हें बेहद सम्मान और प्यार से देखते थे।
उन्होंने कहा— “यह रिक्तता किसी भी रूप में पूर्ण नहीं हो सकती।”

क्षेत्र में शोक की लहर, जनसेवा की कमी लंबे समय तक महसूस होगी

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल, प्रधान संघ अध्यक्ष एजाज खान, प्रधान संघ के वरिष्ठ नेता विजय मिश्रा, स्वामीनाथ गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की।

भिटौली क्षेत्र के लोग आज भी विश्वास नहीं कर पा रहे कि उनका प्रिय नेता और सहयोगी अब उनके बीच नहीं है। जनसेवा के हर कार्य में आगे रहने वाले आशीष गौतम की कमी लंबे समय तक खलती रहेगी।

कागज़ों में विकास, ज़मीन पर संकट: लोकल विकास में भ्रष्टाचार की सच्चाई

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)

ग्रामीण भारत से लेकर कस्बों और छोटे शहरों तक, विकास योजनाओं के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। नल-जल योजना, प्रधानमंत्री सड़क योजना, ग्रामीण आवास, श्मशान-घाट, तालाब खुदाई और नाली-निर्माण जैसी योजनाएँ न सिर्फ सरकारी फाइलों में बल्कि भाषणों और रिपोर्टों में भी चमचमाती दिखती हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। यहां लोकल विकास में भ्रष्टाचार एक ऐसी बीमारी बन चुका है, जो व्यवस्था की जड़ों को खोखला कर रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि नल-जल योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन कई जगह अधूरी पड़ी है, कहीं पाइप डालकर छोड़ दिए गए तो कहीं पानी पहुंच ही नहीं रहा। बरसों पहले स्वीकृत सड़कों की हालत ऐसी है कि बरसात के मौसम में गाड़ियां फंस जाती हैं और पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। गांवों के घाटों की मरम्मत के लिए पास हुए बजट सिर्फ कागजों में खर्च हो चुके हैं, जबकि वास्तविक स्थिति में वहां झाड़ियां और गंदगी फैली हुई है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्थानीय अधिकारी और संबंधित विभाग अक्सर शिकायतों को नजरअंदाज कर देते हैं। ग्राम सभाओं में सवाल उठाने पर ग्रामीणों को आश्वासन और तारीखें मिलती हैं, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं होता। कई मामलों में तो बिना काम कराए ही बिल पास कर दिए जाते हैं, जिससे साफ पता चलता है कि लोकल विकास में भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक फैल चुका है।

योजनाओं की निगरानी के लिए बनाए गए सिस्टम भी निष्क्रिय दिखाई देते हैं। सामाजिक अंकेक्षण और निरीक्षण जैसे प्रावधान केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। परिणाम यह है कि जनता का विश्वास धीरे-धीरे सरकारी योजनाओं से उठता जा रहा है। जिन योजनाओं का मकसद नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना था, वही आज अविश्वास और नाराजगी की वजह बन रही हैं।

अगर सच में विकास चाहिए, तो अब पारदर्शिता, जवाबदेही और जन-निगरानी को मजबूत करना ही होगा। जब तक लोकल विकास में भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक कागज़ों का विकास सिर्फ भ्रम बना रहेगा और जमीन पर धूल उड़ती रहेगी।

पोस्ट ऑफिस में भ्रष्टाचार चरम पर! कमीशन वसूली, अभद्रता और भुगतान न होने से उपभोक्ता त्रस्त

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। घुघली पोस्ट ऑफिस में अव्यवस्थाओं और कथित भ्रष्टाचार ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है। यहां तैनात बड़े बाबू उमेश कुमार पर अभिकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि वे खाता खोलने और नोट जमा कराने के नाम पर जबरन कमीशन वसूलते हैं। महिला अभिकर्ता से अभद्र व्यवहार और एजेंटों के साथ दुर्व्यवहार के भी आरोप सामने आए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में नाराजगी बढ़ गई है।

अभिकर्ताओं के अनुसार, खाता खोलने के लिए 50 रुपये और नोट जमा करने पर 40 रुपये अनिवार्य कमीशन के रूप में मांगा जाता है। जो अभिकर्ता इस अवैध वसूली का विरोध करते हैं, उनके खातों को 20 तारीख से लंबित रख दिया गया है। इससे एजेंटों और ग्राहकों के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है।

ग्राहक परेशान — भुगतान पूरी तरह ठप स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि ग्राहकों को समय पर भुगतान तक नहीं मिल पा रहा है। कई उपभोक्ता 5 से 15 दिनों तक पोस्ट ऑफिस के चक्कर काटने को मजबूर हैं। शादी-ब्याह और जरूरी खर्चों के लिए पैसा निकालने आए लोगों को भी हाथ खाली लौटना पड़ रहा है, जिससे लोग बेहद परेशान और नाराज हैं।

अभिकर्ताओं का कहना है कि ग्राहक उन पर गुस्सा करते हैं, जबकि वास्तविक समस्या पोस्ट ऑफिस की भ्रष्ट और मनमानी व्यवस्था है। जिसको जो करना है कर लो जैसे कथित बयान बड़े बाबू की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। भोली-भाली जनता का भरोसा टूट रहा — कार्रवाई की मांग तेज घुघली क्षेत्र के लगभग सभी एजेंट पोस्ट ऑफिस की कार्यप्रणाली से परेशान हैं।

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लोगों का कहना है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं की गई, तो पोस्ट ऑफिस पर जनता का भरोसा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।अभिकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने जिला बचत अधिकारी को एक लिखित शिकायत सौंपते हुए तत्काल जांच और बड़े बाबू उमेश कुमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगो का कहना है कि पोस्ट ऑफिस जनसेवा का केंद्र है, लेकिन यहां भ्रष्टाचार का बोलबाला जनता को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।