Monday, June 29, 2026
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लहू बोलेगा रक्तदान संगठन ने विधानसभा अध्यक्ष से की मुलाकात

रांची (राष्ट्र की परम्परा)
विश्व दिव्यांता दिवस के उपलक्ष्य में “लहू बोलेगा” रक्तदान संगठन रांची एवं झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन” का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल शाहनवाज अख़्तर के सहयोग से झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रवेंद्रनाथ महतो से झारखंड विधानसभा में प्रतिनिधिमंडल 14 सूत्री मांग थैलेसीमिया पीड़ितों/परिजनों के लिखित आवेदन,19 सूत्री रक्तदान के मुद्दों पर एवं 3 सूत्री दिव्यांता पर स्मार-पत्र दिया।
प्रतिनिधिमंडल को माननीय अध्यक्ष झारखंड विधानसभा रवेंद्रनाथ महतो ने बेहद गंभीरतापूर्वक सुना और समझा उसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड थैलेसीमिया एवं रक्तदान पर आपकी जो मांग है उस पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित होगी। मैंने भी आपने क्षेत्र में थैलेसीमिया पीड़ित एवं परिजनों का दर्द देखा है बल्कि बॉन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली भेजा था। सचिव से भी बात करूंगा।

वहीं से प्रतिनिधिमंडल झारखंड कांग्रेस के विधायक दल के नेता प्रदीप यादव से उनके रांची स्थित आवास पर स्मार-पत्र पर बातचीत के साथ मिला।

प्रतिनिधिमंडल में नदीम खान,पॉवेल कुमार, रोयान सुरंजन बाड़ा,रीना सुचित्रा टोप्पो, अजित कुमार मिश्रा,जयनाथ महतो,बिमला कच्छप,विनोद बैठा,ज़िलानी अंसारी, नईमउल्लाह खान,अकरम,बुलंद आदि शामिल थे।

मसूरी में 600 प्रशिक्षु आईएएस और एक सवाल

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उंगलियों पर हल होने वाला सवाल और भविष्य के प्रशासकों की तैयारी का सच”

मसूरी से उठता सवाल: क्या हमारी प्रशासनिक शिक्षा केवल पुस्तकीय हो गई है? मसूरी में 600 प्रशिक्षु और एक सवाल जिसने सबको सोचने पर मजबूर किया। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी का वास्तविक लक्ष्य: ‘थिंकिंग एडमिनिस्ट्रेटर’ तैयार करना। प्रशिक्षण का अर्थ केवल पाठ नहीं।

मसूरी की कक्षाओं में उठा एक छोटा-सा सवाल, बड़ी सीख। प्रशासनिक प्रशिक्षण का आईना: जब लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में एक साधारण सवाल ने बड़ा संदेश दिया। उत्तराखंड के मसूरी में 100वाँ फाउंडेशन कोर्स और नेतृत्व की बुनियादी समझ पर गहरा संकेत।
उत्तराखंड के शांत, अनुशासित और सुसंस्कृत वातावरण में स्थित मसूरी का प्रसिद्ध प्रशासनिक अकादमी परिसर—लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी—देश के सर्वोच्च सिविल सेवकों के निर्माण का केंद्र बिंदु है। यहाँ आज भी 600 से अधिक प्रशिक्षु अधिकारी भविष्य के भारतीय प्रशासन की रूपरेखा तय करने की तैयारी में डटे हैं। हाल ही में 100वें फाउंडेशन कोर्स का समापन समारोह आयोजित किया गया, जो किसी भी संस्थान के लिए गौरव का क्षण होता है। इस अवसर पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ा दी।

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने एक सरल-सा गणितीय प्रश्न पूछा— “एक आदमी के पास कुछ पैसे थे। उसने आधा ए को, एक-तिहाई बी को और शेष 100 रुपये सी को दिए। बताइए, कुल पैसा कितना था?”

दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाला यह सीधा-सा सवाल प्रशिक्षुओं के लिए अप्रत्याशित सिद्ध हुआ। कई प्रशिक्षु अधिकारी प्रश्न में उलझ गए, जबकि समाधान उंगलियों पर किया जा सकता था। बाद में स्वयं राजनाथ सिंह ने इसे सरल तरीके से हल कर समझाया। यह घटना भले ही साधारण प्रतीत हो, पर प्रशासनिक प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता की वास्तविक दिशा पर यह बेहद महत्त्वपूर्ण संकेत देती है।

प्रशासनिक कार्यों का मूल तत्व केवल कानून और नियमों का ज्ञान नहीं, बल्कि तुरंत समझने, तर्क लागू करने और व्यवहारिक समाधान निकालने की क्षमता है। कभी-कभी सबसे कठिन परिस्थितियों में सर्वाधिक सरल समाधान ही सर्वश्रेष्ठ होता है—पर इसके लिए मन का खुलापन और व्यावहारिक सोच आवश्यक होती है। यही गुण एक सक्षम प्रशासक को भीड़ से अलग करता है।

यह घटना इस बात का स्मरण भी कराती है कि सिविल सेवा केवल अकादमिक बौद्धिकता का अभ्यास नहीं है; यह मानव स्वभाव, सामाजिक व्यवहार, त्वरित निर्णय-क्षमता और सामान्य समझ की माँग भी करती है। किसी भी शासन प्रणाली में सबसे प्रभावशाली अधिकारी वही होता है जो जटिल समस्याओं को सरलता से हल करने की क्षमता रखता हो।

प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि व्यवहारिक बुद्धि का विकास भी है। एक छोटा सा प्रश्न प्रशिक्षुओं को यह याद दिलाता है कि वास्तविक प्रशासन वही है जो खेत-खलिहान, बाज़ार, थाने, पंचायत भवन और कार्यालयों में घटित होता है—जहाँ जटिलताएँ कम और सादगी अधिक काम आती है।

राजनाथ सिंह द्वारा पूछा गया प्रश्न प्रशासनिक सोच के दो महत्त्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करता है—
पहला, अधिकारी का ध्यान समस्या के मूल की ओर होना चाहिए, न कि उसकी सतही जटिलता की ओर।
दूसरा, किसी भी चुनौती में घबराना नहीं, बल्कि उसे विभाजित कर सरल रूप में हल करना चाहिए।

सिविल सेवाओं में ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब अधिकारी को अचानक लिए गए निर्णयों के आधार पर जनता को राहत, दिशा और सुरक्षा प्रदान करनी होती है। यदि वह क्षणिक दबाव में भी सामान्य तर्क बनाए रखने में दक्ष है, तो वह बेहतर प्रशासक बन सकता है।

यह प्रसंग इस व्यापक प्रश्न को भी जन्म देता है कि आधुनिक प्रशिक्षण पद्धति कहीं अत्यधिक तकनीकी, सैद्धांतिक या औपचारिक तो नहीं हो गई है? क्या हम प्रशासन के मूल तत्व—सरलता, संवेदनशीलता और सामान्य विवेक—को नजरअंदाज तो नहीं कर रहे?

सिविल सेवा का इतिहास बताता है कि देश के श्रेष्ठ अधिकारी वही रहे, जिन्होंने अत्यधिक बुद्धि के साथ-साथ सरल सोच, जन-संपर्क की क्षमता और सहज निर्णय-प्रक्रिया अपनाई। आज जब देश नई चुनौतियों—प्रौद्योगिकी, जटिल प्रशासनिक व्यवस्था, विस्तृत जनसंख्या और त्वरित परिवर्तनों—से गुजर रहा है, तब एक प्रशासक की भूमिका और भी विस्तृत और बहुआयामी हो चुकी है।

ऐसे समय में यह आवश्यक है कि प्रशिक्षण केवल परीक्षाओं और पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न हो। उसमें व्यवहारिक गणित, तर्कशक्ति, सामान्य समझ, मनोवैज्ञानिक संतुलन और परिस्थितिजन्य विश्लेषण को भी समुचित स्थान मिले।

राजनाथ सिंह द्वारा हल्का-सा पूछा गया यह प्रश्न प्रशासनिक तंत्र को यह संदेश देता है कि नेतृत्व की असल परीक्षा कभी-कभी छोटे-छोटे क्षणों में ही होती है। बड़े निर्णयों का आधार भी वही अधिकारी बनता है जो बेसिक समझ को खोने नहीं देता।

इस प्रसंग से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रशिक्षण के दौरान आने वाले ऐसे अप्रत्याशित प्रश्न अधिकारी के मन को गति देते हैं, उसे दबाव में सोचने की क्षमता प्रदान करते हैं और वास्तविक प्रशासनिक दुनिया के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हैं।

समय के साथ यह आवश्यक हो गया है कि सिविल सेवा प्रशिक्षण अकादमियाँ इस प्रकार के संवाद, प्रश्न-आधारित परीक्षण और व्यवहारिक अभ्यास को और भी अधिक बढ़ाएँ। इससे अधिकारी न केवल जनसेवा के लिए अधिक तैयार होंगे बल्कि प्रशासनिक जटिलताओं को सहजता से हल करने की क्षमता भी विकसित करेंगे।

निष्कर्षतः, मसूरी में घटित यह छोटा-सा घटना क्रम इस बात का प्रतीक है कि नेतृत्व की ताकत केवल बड़े भाषणों या उच्च ज्ञान में नहीं, बल्कि सरल तर्क और मौलिक समझ में भी निहित होती है। सिविल सेवा के भविष्य को आकार देने वाले प्रशिक्षुओं के लिए यह एक स्मरणीय संदेश है—प्रशासन की महानता सरलता में है, न कि जटिलता में।

डॉ प्रियंका सौरभ -हरियाणा

पृथ्वी की पुकार और विष्णु का अवतरण: शास्त्रोक्त कथा का चमत्कारी अध्याय

जब अधर्म ने तोड़ी सभी सीमाएँ और धर्म की पुनर्स्थापना का संकल्प जागा

पिछले एपिसोड में हमने जाना कि किस प्रकार कठिन समय में भी आशा का दीप बुझता नहीं, क्योंकि सृष्टि का संतुलन स्वयं ईश्वर के विधान से सुरक्षित रहता है। अधर्म चाहे जितनी भी शक्ति ग्रहण कर ले, अंततः पराजय उसी की होती है। अब हम उस शास्त्रोक्त प्रसंग की ओर बढ़ते हैं, जहाँ अधर्म अपने चरम पर पहुँच चुका था और भगवन विष्णु का अवतरण सृष्टि की रक्षा के लिए सुनिश्चित हो चुका था।

धरती काँप रही थी, आकाश उदास था, नदियों का प्रवाह रुक सा गया था और प्राणियों के हृदय में भय का अंधकार गहराता जा रहा था। धर्म के स्तंभ कमजोर पड़ चुके थे। असुरों का आतंक चारों ओर व्याप्त हो चुका था। देवगण पराजित और निराश हो चुके थे। यज्ञ रुक गए थे, वेदों के स्वरों पर मौन छा चुका था और पूजा स्थलों पर सन्नाटा पसरा था।

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असुरों का राजा कालकेय नामक महाबली, स्वयं को ईश्वर से भी श्रेष्ठ समझने लगा था। उसने समस्त राज्यों पर अधिकार जमाकर धर्म के मार्ग को कुचलने का प्रयत्न किया। मंदिरों को अपवित्र किया गया, साधु-संतों को तिरस्कृत किया गया और मासूम प्राणियों पर अत्याचार किया गया। पृथ्वी माता करुण विलाप कर रही थी।

तब सभी देवता, ब्रह्मा, शिव और अन्य दिव्य शक्तियाँ, क्षीरसागर में भगवान विष्णु की शरण में पहुँचे।

देवताओं ने प्रार्थना की—

“हे पालनहार! हे जगत के रक्षक! अब यह धरा अधर्म का भार सहने में असमर्थ हो चुकी है। कृपा करके अवतार लेकर संसार का कल्याण कीजिए।”

भगवान विष्णु ने अपने शांत, गंभीर और दिव्य स्वर में कहा—

“हे देवगण, जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म का विनाश होने लगता है, तब-तब मैं स्वयं अवतार लेकर संतुलन की स्थापना करता हूँ। यह युग भी उसी चरण पर खड़ा है। मैं मानव रूप में धरती पर जन्म लूँगा और अधर्म का विनाश करूँगा।”

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यह कहते ही क्षीरसागर प्रकाश से भर गया। एक अलौकिक ऊर्जा संपूर्ण ब्रह्मांड में प्रवाहित होने लगी। ऋषि-मुनियों को ध्यान में संकेत मिलने लगे कि भगवान विष्णु का नया अवतार शीघ्र आने वाला है।

धरती पर एक धर्मनिष्ठ राजा और सत्यवती नामक रानी थीं। वे वर्षों से संतान सुख के लिए तप कर रहे थे। उन्हीं के घर भगवान विष्णु ने बालक के रूप में जन्म लेने का संकल्प लिया। जिस रात वह बालक जन्मा, वह रात्रि साधारण नहीं थी—आकाश में दिव्य नक्षत्रों की रचना बन गई, पुष्पों की वर्षा होने लगी और दिशा-दिशा में मंगल ध्वनि गूँज उठी।

बालक के जन्म लेते ही उसके तेज से पूरा महल प्रकाशित हो गया। उसके मुख पर ऐसी दिव्यता थी मानो स्वयं सूर्य और चंद्रमा की छाया उसमें समा गई हो। ऋषि-मुनियों ने घोषणा कर दी—

“यह बालक साधारण मानव नहीं, स्वयं विष्णु का अंश है। यही अधर्म का विनाशक और धर्म का पुनर्स्थापक बनेगा।”

समय के साथ वह बालक बड़ा होने लगा। उसकी आँखों में सागर की गहराई, मुख पर करुणा और हृदय में असीम साहस था। वह कभी वन में जाकर ऋषियों से ज्ञान प्राप्त करता, कभी शस्त्र विद्या सीखता और कभी पीड़ितों की रक्षा करता। उसका नाम पड़ा — धर्मप्रकाश।

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उधर, असुर राजा कालकेय को आकाशवाणी से ज्ञात हुआ कि भगवान विष्णु मानव रूप में जन्म ले चुके हैं। यह सुनते ही उसका क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने प्रतिज्ञा की कि वह उस बालक को खोजकर नष्ट कर देगा।

असुरों की सेना गाँव-गाँव, नगर-नगर में उस बालक की तलाश करने लगी। हर जगह भय और आतंक फैलने लगा। किन्तु धर्मप्रकाश का संकल्प अडिग था। वह जान चुका था कि उसका जन्म किसी सामान्य उद्देश्य के लिए नहीं हुआ है।

एक दिन वह असुरों के अत्याचार से पीड़ित एक गाँव पहुँचा। वहाँ का दृश्य हृदयविदारक था—घर जले हुए, जलस्रोत सूखे हुए और स्त्रियाँ रोती हुईं। तब धर्मप्रकाश का तेज प्रज्वलित हुआ। उसने अपनी दिव्य शक्ति का प्रथम प्रदर्शन करते हुए अकेले ही दर्जनों असुरों को परास्त कर दिया।

लोगों की आँखों में आशा की किरण जाग उठी। पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि ईश्वर उनके साथ है।

यही वह क्षण था जब अधर्म को यह आभास हुआ कि उसका अंत अब निकट है।

और यहीं से आरंभ होती है वह महासंग्राम, जिसकी गाथा हम एपिसोड 5 में विस्तार से जानेंगे– जहाँ भगवान विष्णु का यह अवतार, न केवल अस्त्र-शस्त्र से, बल्कि करुणा, धर्म और सत्य की ताकत से अधर्म की जड़ों को उखाड़ फेंकता है।

यह कथा हमें सिखाती है कि:

सच्चाई कभी हारती नहीं ,अन्याय कितना भी बड़ा हो, अंत में जीत धर्म की होती है,ईश्वर हर युग में किसी न किसी रूप में हमारे साथ रहते हैं,“जहाँ आस्था होती है, वहाँ भगवान स्वयं मार्ग बनाते हैं।”

शोक और स्मृति का दिन: 4 दिसंबर और इतिहास की अनमोल विरासत

4 दिसंबर ने इतिहास से छीने अनमोल सितारे – स्मृतियों में अमर हुए महान व्यक्तित्वों की श्रद्धांजलि

इतिहास के पन्नों में 4 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उन असाधारण व्यक्तित्वों की स्मृति का दिन है, जिन्होंने अपने ज्ञान, कला, लेखनी और पत्रकारिता से पूरी दुनिया पर गहरी छाप छोड़ी। इस दिन अनेक ऐसी महान आत्माएं हमसे विदा हुईं, जिनका योगदान आज भी समाज, विज्ञान, साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में जीवित है। आइए जानते हैं 4 दिसंबर को हुए प्रमुख निधन और उन विभूतियों के जीवन, जन्म स्थान, योगदान और उनके अमूल्य कार्यों के बारे में विस्तार से।

नरिंदर सिंह कपानी (1926–2020) – फाइबर ऑप्टिक्स के जनक

नरिंदर सिंह कपानी का जन्म भारत के अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में प्राप्त की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए। कपानी को “फाइबर ऑप्टिक्स का जनक” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने ऑप्टिकल फाइबर टेक्नोलॉजी पर पहला बड़ा शोधपत्र प्रकाशित किया। आज जिस इंटरनेट, मेडिकल एंडोस्कोपी और संचार प्रणाली पर दुनिया निर्भर है, उसकी नींव उन्हीं के शोध पर आधारित है। वे भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिक विज्ञानी थे और अमेरिका में बसकर उन्होंने विज्ञान की दिशा बदल दी। 4 दिसंबर 2020 को 94 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ। उनका योगदान तकनीकी युग का आधार बना रहेगा।

विनोद दुआ (1954–2021) – निष्पक्ष पत्रकारिता की बुलंद आवाज

विनोद दुआ का जन्म शिमला, हिमाचल प्रदेश में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध हिंदी पत्रकार, टीवी एंकर और कार्यक्रम निर्देशक थे। उन्होंने भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता को नई दिशा दी। उनका कार्यक्रम “जनवाणी” आम जनता की आवाज बना। उन्होंने सवाल पूछने और सच दिखाने की जो परंपरा शुरू की, वह आज भी युवा पत्रकारों के लिए मिसाल है। मीडिया में बेबाकी और साहस के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया। 4 दिसंबर 2021 को उनका निधन हुआ, जिससे पत्रकारिता जगत को भारी क्षति पहुंची।

शशि कपूर (1938–2017) – सिनेमा का चमकता सितारा

शशि कपूर का जन्म कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। वे महान पृथ्वीराज कपूर के पुत्र और बॉलीवुड के सफल अभिनेताओं में से एक थे। उन्होंने ‘दीवार’, ‘कभी कभी’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ जैसी कालजयी फिल्मों में अभिनय किया। उनका अभिनय सादगी, भावनात्मक गहराई और रोमांटिक शैली का अनोखा संगम था। उन्होंने न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 4 दिसंबर 2017 को उनका निधन हुआ, लेकिन वे आज भी परदे पर जीवित हैं।

अन्नपूर्णानन्द (1899–1962) – शिष्ट हास्य के अग्रदूत लेखक

अन्नपूर्णानन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के बनारस (वाराणसी) जनपद में हुआ था। वे हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित लेखक और शिष्ट हास्य के प्रख्यात रचनाकार थे। उन्होंने व्यंग्य और हास्य के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर चोट की, लेकिन उनकी भाषा मर्यादित और सौम्य रहती थी। उनकी रचनाएँ पाठकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती थीं। 4 दिसंबर 1962 को उनका निधन हुआ, लेकिन हिन्दी साहित्य में उनका स्थान सदैव अमर रहेगा।

4 दिसंबर केवल एक दिन नहीं, बल्कि उन महान आत्माओं को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने अपने जीवन से समाज, विज्ञान, पत्रकारिता, साहित्य और सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका जाना भले ही एक युग का अंत था, लेकिन उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

जब जन्मदिन बना इतिहास की पहचान

जब 4 दिसंबर ने रचे इतिहास के सितारे – जिनकी रोशनी आज भी भारत को दिशा दे रही है

4 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, राजनीति, खेल, विज्ञान और कला के लिए एक स्वर्णिम अध्याय है। इस दिन जन्मे व्यक्तित्वों ने न केवल अपने क्षेत्र में गहरी छाप छोड़ी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा मार्ग भी प्रशस्त किया। कोई हॉकी के मैदान पर अपना जादू बिखेर रहा था, तो कोई संसद, राष्ट्रपति भवन या शोध प्रयोगशालाओं में देश के भाग्य का मार्ग लिख रहा था। आइए जानते हैं 4 दिसंबर को जन्मे उन महान विभूतियों के बारे में, जिनका योगदान भारतीय इतिहास के पन्नों में अमर हो चुका है।

रानी रामपाल (जन्म: 4 दिसंबर 1994) – भारतीय महिला हॉकी की लौह प्रतिभा

रानी रामपाल का जन्म हरियाणा के करनाल जिले के एक बेहद साधारण परिवार में हुआ। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। बचपन से ही हॉकी में रुचि लेने वाली रानी को शुरुआती प्रशिक्षण शाहाबाद हॉकी अकादमी में मिला। उनकी मेहनत, अनुशासन और जुनून ने उन्हें भारतीय महिला हॉकी टीम का एक चमकता सितारा बना दिया।

उन्होंने कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और कई महत्वपूर्ण मैचों में निर्णायक भूमिका निभाई। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों जैसे मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने भारतीय महिला हॉकी का कद विश्व स्तर पर ऊँचा किया। रानी को कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

उनकी कहानी उन गरीब और संघर्षशील बच्चों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

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सुनीता रानी (जन्म: 4 दिसंबर 1979) – एथलेटिक्स की स्वर्ण धाविका

सुनीता रानी उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में जन्मी एक महान एथलीट हैं। उन्होंने 1500 मीटर और 3000 मीटर स्टीपलचेज़ जैसी कठिन स्पर्धाओं में भारत का नाम रोशन किया। बचपन से ही दौड़ने में रुचि रखने वाली सुनीता ने कठिन प्रशिक्षण के बाद एशियाई खेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीते।

उनका सबसे बड़ा योगदान यह रहा कि उन्होंने महिलाओं को ट्रैक एंड फील्ड में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमाएं खुद-ब-खुद टूट जाती हैं।

सुनीता रानी को अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जो भारत के सर्वोच्च खेल सम्मानों में से एक है। उनका जीवन शारीरिक शक्ति के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता का प्रतीक है।

ओम बिड़ला (जन्म: 4 दिसंबर 1962) – राजनीति में सरलता और संगठन के प्रतीक

ओम बिड़ला का जन्म राजस्थान के कोटा जिले में हुआ। उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि लेना शुरू कर दिया और लगातार जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहे। वे एक कुशल संगठक और प्रभावशाली वक्ता के रूप में जाने जाते हैं।

राजनीति में उनका योगदान स्थानीय विकास से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक रहा है। युवाओं को राजनीति से जोड़ने, स्वच्छता अभियान, शिक्षा और सामाजिक विकास जैसे मुद्दों पर उन्होंने अनेक कार्य किए। उनके नेतृत्व में अनेक योजनाओं को गति मिली और जनहित की भावनाओं को प्राथमिकता दी गई।

उनकी छवि एक सरल, अनुशासित और मेहनती जनसेवक के रूप में बनी रही है।

श्रीपति मिश्रा (जन्म: 4 दिसंबर 1923) – स्वतंत्र भारत के सशक्त नेता

श्रीपति मिश्रा का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे और स्वतंत्रता के बाद देश की राजनीति में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कई बार सांसद के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और ग्रामीण विकास, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे अपने क्षेत्र में ईमानदार और जनप्रिय नेता के रूप में पहचाने जाते थे। जनता के बीच उनकी गहरी पकड़ थी और वे जमीनी समस्याओं को संसद तक पहुँचाने का कार्य करते थे।

उनका जीवन त्याग, सादगी और राष्ट्रहित में समर्पण का प्रतीक है।

घंटसाला वेंकटेश्वर राव (जन्म: 4 दिसंबर 1922) – सुरों के सम्राट

घंटसाला वेंकटेश्वर राव का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था और वे दक्षिण भारतीय सिनेमा के सर्वकालिक महान संगीतकारों में से एक रहे। उन्होंने तमिल और तेलुगू फिल्म उद्योग को अपनी मधुर रचनाओं से नई ऊंचाइयाँ दीं।

उनके गीत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। उन्होंने हजारों फिल्मों में संगीत दिया और उनकी आवाज़ दक्षिण भारत में श्रद्धा के साथ सुनी जाती है। गीत लेखन और शास्त्रीय संगीत पर उनका गहरा प्रभाव था।

वे न केवल संगीतकार बल्कि एक श्रेष्ठ गायक और अभिनेता भी रहे। उनके योगदान ने भारतीय फिल्म संगीत की दिशा ही बदल दी।

इन्द्र कुमार गुजराल (जन्म: 4 दिसंबर 1919) – एक शांत लेकिन मजबूत प्रधानमंत्री

गुजराल साहब का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में हुआ था (अब पाकिस्तान)। वे भारत के 12वें प्रधानमंत्री रहे और अपनी “गुजराल सिद्धांत” विदेश नीति के लिए प्रसिद्ध हुए। यह सिद्धांत पड़ोसी देशों के साथ प्रेम, सहयोग और बिना किसी अपेक्षा के संबंध बनाने पर आधारित था।

उन्होंने कूटनीति, पत्रकारिता और राजनीति हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। वे विदेश मंत्री और राजदूत भी रहे। भारत-पाकिस्तान और अन्य दक्षिण एशियाई देशों से संबंधों को सुधारने की दिशा में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है।

उनका राजनीतिक जीवन शांति, संवाद और संतुलन का प्रतीक था।

रामास्वामी वेंकटरमण (जन्म: 4 दिसंबर 1910) – संविधान का सच्चा रक्षक

रामास्वामी वेंकटरमण का जन्म तमिलनाडु के तंजावुर जिले में हुआ था। वे भारत के आठवें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और बाद में वित्त मंत्री तथा उपराष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया।

उनका प्रशासनिक अनुभव और संविधान के प्रति निष्ठा उन्हें एक कुशल राष्ट्रपति बनाती है। उन्होंने कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी संवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया।

उनका जीवन राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का श्रेष्ठ उदाहरण है।

मोतीलाल (जन्म: 4 दिसंबर 1910) – सिनेमा का चमकता सितारा

मोतीलाल हिंदी फिल्म जगत के एक प्रमुख अभिनेता रहे, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे अपने स्वाभाविक अभिनय और संवाद शैली के लिए प्रसिद्ध थे। 1940-50 के दशक में वे हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक गिने जाते थे।

उन्होंने सामाजिक फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई और अभिनय को एक नया स्तर दिया। वे दिलीप कुमार जैसे दिग्गजों के भी प्रेरणास्रोत रहे।

उनका योगदान भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग का अभिन्न हिस्सा है।

कार्यरतमानि वेंकट कृष्णन (जन्म: 4 दिसंबर 1898) – भारतीय विज्ञान का गौरव

प्रोफेसर कृष्णन एक प्रसिद्ध भौतिक वैज्ञानिक थे, जिन्होंने प्रकाश और ध्वनि विज्ञान में महत्वपूर्ण शोध किए। उनका जन्म तमिलनाडु में हुआ था और वे सी.वी. रमन के सहयोगी भी रहे।

उन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना और मार्गदर्शन किया। विज्ञान के क्षेत्र में भारत की वैज्ञानिक पहचान को मजबूत करने में उनका विशेष योगदान रहा।

उनकी खोजों का उपयोग आज भी वैज्ञानिक अनुसंधान में होता है।

विद्याभूषण विभु (जन्म: 4 दिसंबर 1892) – शब्दों के सशक्त साधक

विद्याभूषण विभु उत्तर भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक चेतना का प्रसार किया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश क्षेत्र में हुआ था।

उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत हैं। वे कवि, निबंधकार और शिक्षक के रूप में भी प्रसिद्ध थे।

उनका साहित्य भारत की सांस्कृतिक आत्मा को प्रतिबिंबित करता है।

रमेश चंद्र मजूमदार (जन्म: 4 दिसंबर 1888) – इतिहास के अमर रक्षक

डॉ. रमेश चंद्र मजूमदार का जन्म बंगाल प्रांत में हुआ था। वे भारतीय इतिहास के महानतम इतिहासकारों में से एक थे। उन्होंने भारत की प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास पर अनेक ग्रंथ लिखे।

उनकी लेखनी में तथ्यों की गहराई और राष्ट्र के प्रति गर्व स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने भारतीय इतिहास को पश्चिमी दृष्टिकोण से हटाकर भारतीय नजरिए से प्रस्तुत किया।

उनके ग्रंथ आज भी शोधकर्ताओं के लिए आधार स्तंभ हैं।

4 दिसंबर को किस मूलांक की बदलेगी किस्मत

📿 Numerology 4 December 2025: आज इन मूलांकों की चमकेगी किस्मत, जानें कैसा रहेगा आपका दिन – पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) के अनुसार

अंक ज्योतिष में जन्म की तारीख के आधार पर व्यक्ति का मूलांक निकाला जाता है और उसी मूलांक से उसके दिन, भविष्य, स्वभाव और सफलता का अनुमान लगाया जाता है।
आज (4 दिसंबर 2025) का दिन कुछ मूलांकों के लिए बेहद लाभकारी है तो कुछ के लिए धैर्य व संयम की परीक्षा ले सकता है।

🔢 मूलांक 1

आज का दिन: आत्मविश्वास और नई शुरुआत का संकेत दे रहा है।
कार्य / व्यवसाय: नया प्रोजेक्ट मिल सकता है, प्रमोशन या नई जिम्मेदारी की संभावना है।
शिक्षा: छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के योग बन रहे हैं।
कला व संगीत: रचनात्मक विचार जन्म लेंगे।
राजनीतिक क्षेत्र: नई जिम्मेदारी या पद मिलने के संकेत हैं।
प्रशासनिक क्षेत्र: वरिष्ठ अधिकारी आपके काम से प्रभावित होंगे।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के योग, निवेश शुभ रहेगा।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजा करें: भगवान सूर्य को जल अर्पित करें।

🔢 मूलांक 2

आज का दिन: भावनाओं और रिश्तों का दिन है।
कार्य / व्यवसाय: टीम वर्क में सफलता मिलेगी।
शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा, कला क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए समय शुभ।
कला व संगीत: गीत, लेखन, नृत्य में उन्नति के योग हैं।
राजनीतिक क्षेत्र: जनता से भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा।
प्रशासनिक क्षेत्र: लोगों से संवाद अच्छा रहेगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च पर नियंत्रण जरूरी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा करें: चंद्र देव की पूजा करें।

🔢 मूलांक 3

आज का दिन: सफलता और विस्तार का दिन है।
कार्य / व्यवसाय: बिजनेस में ग्रोथ होगी, नए क्लाइंट मिल सकते हैं।
शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति के योग हैं।
कला व संगीत: लेखन, फोटोग्राफी, डिजाइन में सफलता।
राजनीतिक क्षेत्र: भाषण और विचारों से प्रभावित करेंगे।
प्रशासनिक क्षेत्र: सम्मान मिलने की संभावना।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा करें: भगवान विष्णु या गुरु की पूजा करें।

🔢 मूलांक 4

आज का दिन: अनुशासन और मेहनत का है।
कार्य / व्यवसाय: योजनाबद्ध कार्य से सफलता मिलेगी।
शिक्षा: एकाग्रता जरूरी है, तब ही परिणाम बेहतर होगा।
कला व संगीत: धैर्य के साथ अभ्यास करें, लाभ होगा।
राजनीतिक क्षेत्र: जिम्मेदारी बढ़ सकती है।
प्रशासनिक क्षेत्र: नियम-कानून में रहकर काम करें।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा करें: भगवान गणेश की पूजा करें।

🔢 मूलांक 5

आज का दिन: बदलाव और नई दिशा का दिन है।
कार्य / व्यवसाय: नई शुरुआत के लिए दिन शुभ।
शिक्षा: नई चीज सीखने की प्रेरणा मिलेगी।
कला व संगीत: स्टेज परफॉर्मेंस के योग।
राजनीतिक क्षेत्र: फैसले सोच-समझकर लें।
प्रशासनिक क्षेत्र: ट्रांसफर या नई पोस्टिंग का योग।
आर्थिक स्थिति: लाभ संभव, पर जोखिम न लें।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा करें: मां दुर्गा की पूजा करें।

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🔢 मूलांक 6

आज का दिन: सुख-सुविधा में वृद्धि का है।
कार्य / व्यवसाय: व्यापार में फायदा।
शिक्षा: डिज़ाइन, फैशन, ब्यूटी फील्ड के लिए श्रेष्ठ दिन।
कला व संगीत: ग्लैमर और मीडिया से लाभ।
राजनीतिक क्षेत्र: लोगों के बीच लोकप्रियता बढ़ेगी।
प्रशासनिक क्षेत्र: सम्मान मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: धन आगमन के योग हैं।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा करें: मां लक्ष्मी की पूजा करें।

🔢 मूलांक 7

आज का दिन: आत्मचिंतन और आध्यात्म का है।
कार्य / व्यवसाय: रिसर्च और योजना का समय।
शिक्षा: विज्ञान व शोध क्षेत्र में सफलता।
कला व संगीत: शास्त्रीय कला में प्रगति।
राजनीतिक क्षेत्र: सोच-समझकर कदम उठाएं।
प्रशासनिक क्षेत्र: संयम से काम लेना होगा।
आर्थिक स्थिति: स्थिर रहेगी।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूजा करें: भगवान शिव की आराधना करें।

🔢 मूलांक 8

आज का दिन: फैसलों का दिन है।
कार्य / व्यवसाय: बड़े फैसले ले सकते हैं, लाभदायक रहेंगे।
शिक्षा: मेहनत का फल मिलेगा।
कला व संगीत: फिल्मों, थिएटर से जुड़े लोगों के लिए शुभ दिन।
राजनीतिक क्षेत्र: पदोन्नति के संकेत।
प्रशासनिक क्षेत्र: प्रगति के योग।
आर्थिक स्थिति: बहुत अच्छी रहने वाली है।
शुभ रंग: काला या गहरा नीला
शुभ अंक: 8
पूजा करें: शनि देव की पूजा करें।

🔢 मूलांक 9

आज का दिन: शक्ति और साहस का दिन।
कार्य / व्यवसाय: लीडरशिप रोल मिलेगा।
शिक्षा: खेलकूद और रक्षा क्षेत्र के लिए शुभ दिन।
कला व संगीत: देशभक्ति विषयों पर रचना करें।
राजनीतिक क्षेत्र: प्रभाव बढ़ेगा।
प्रशासनिक क्षेत्र: पुलिस, सेना से जुड़े लोगों के लिए शुभ दिन।
आर्थिक स्थिति: खर्च और लाभ दोनों होंगे।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूजा करें: हनुमान जी की पूजा करें।

👉 नोट: यह अंक ज्योतिष केवल सामान्य जानकारी के लिए है। “राष्ट्र की परंपरा” इस अंक ज्योतिष को प्रमाणित नहीं करता। अपनी जन्मकुंडली अवश्य किसी विशेषज्ञ से दिखाएं।

जानें आज आपकी राशि में क्या है खास

🔯 Rashifal / राशिफल – 4 दिसंबर 2025 (गुरुवार)

तिथि: 4 दिसंबर 2025, गुरुवार
दिन के स्वामी: देवगुरु बृहस्पति
पूज्य देवता: भगवान विष्णु
विशेष महत्व: गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण कर विष्णु जी या बृहस्पति देव की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति का योग बनता है।

ज्योतिषाचार्य: पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय

आज ग्रहों की चाल कुछ राशियों के लिए सौभाग्य लेकर आ रही है, तो कुछ को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यह दिन बुद्धि, विवेक और दूरदर्शिता से काम लेने का है।

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🔴 मेष राशि (Aries ♈)

अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज का दिन: आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन फिजूल खर्च से बचना जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: नया प्रोजेक्ट मिलने की संभावना। बिजनेस में लाभ।
शिक्षा: पढ़ाई में फोकस बढ़ेगा। प्रतियोगी छात्रों को सफलता।
कला-संगीत: नई रचना या प्रस्तुति से पहचान मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
प्रेम/परिवार: साथी का पूरा सहयोग मिलेगा।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: भगवान हनुमान

🟢 वृषभ राशि (Taurus ♉)

अक्षर: ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
आज का दिन: बड़ी उपलब्धि का योग। आत्मविश्वास बढ़ेगा।
कार्य/व्यवसाय: निवेश के शुभ संकेत। नौकरी में प्रमोशन की चर्चा।
शिक्षा: रिजल्ट उत्कृष्ट रह सकता है।
कला/संगीत: मंच पर सराहना मिलेगी।
राजनीति: जनसमर्थन में वृद्धि।
आर्थिक: धन लाभ के योग।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
देवता: मां लक्ष्मी

🟡 मिथुन राशि (Gemini ♊)

अक्षर: का, की, कु, घ, छ, के, को, हा
आज का दिन: अवसर आपके पास आएंगे, उन्हें पहचानना सीखें।
कार्य क्षेत्र: नए कॉन्टैक्ट बनेंगे। इंटरव्यू में सफलता।
शिक्षा: मेहनत का फल मिलेगा।
प्रेम जीवन: संबंधों में मधुरता।
कला/लेखन: क्रिएटिव सोच उभरेगी।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
देवता: भगवान गणेश

🔵 कर्क राशि (Cancer ♋)

अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
आज का दिन: मानसिक शांति के लिए संवाद जरूरी।
व्यवसाय: नौकरी के नए अवसर दिखेंगे।
शिक्षा: एकाग्रता बढ़ेगी।
प्रशासनिक: निर्णय लेने की क्षमता मजबूत।
आर्थिक: खर्चों पर नियंत्रण जरूरी।
शुभ रंग: दूधिया सफेद
शुभ अंक: 2
देवता: भगवान शिव

🦁 सिंह राशि (Leo ♌)

अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
आज: रिश्ते मजबूत होंगे, करियर में सुधार।
व्यापार: लाभ का दिन
कला-संगीत: पहचान बढ़ेगी
राजनीति: प्रभावशाली भाषण से सम्मान मिलेगा
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
देवता: सूर्यदेव

🌾 कन्या राशि (Virgo ♍)

अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
आज: मेहनत रंग लाएगी।
नौकरी: प्रमोशन का योग
शिक्षा: टॉप करने के संकेत
कला/डिजाइन: नाम बनेगा
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
देवता: माता सरस्वती

⚖️ तुला राशि (Libra ♎)

अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
आज: तनाव से दूर रहें।
व्यापार: नया रास्ता खुलेगा
राजनीति: छवि सुधरेगी
आर्थिक: निवेश सोच-समझकर करें
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
देवता: मां लक्ष्मी

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🦂 वृश्चिक राशि (Scorpio ♏)

अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
आज: आध्यात्मिक उन्नति के संकेत
नौकरी: बड़ी सफलता
प्रेम: भरोसा मजबूत
शुभ रंग: मैरून
शुभ अंक: 9
देवता: भगवान महाकाल

🎯 धनु राशि (Sagittarius ♐)

अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
आज: मेहनत का फल
आर्थिक: छोटी बचत से बड़ा लाभ
शिक्षा: विदेश जाने का योग
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
देवता: भगवान विष्णु

🐐 मकर राशि (Capricorn ♑)

अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
आज: परिवार सहयोग देगा
कार्य: दबाव अधिक रहेगा
प्रशासनिक: सावधानी जरूरी
शुभ रंग: स्लेटी
शुभ अंक: 8
देवता: शनि देव

🌊 कुंभ राशि (Aquarius ♒)

अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
आज: बड़ी सफलता का संकेत
व्यापार: लाभदायक सौदा
राजनीति: नई योजना सफल
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 11
देवता: भगवान शनि

🐟 मीन राशि (Pisces ♓)

अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
आज: प्रेम और भाग्य दोनों साथ देंगे
शिक्षा: रचनात्मकता बढ़ेगी
कला-संगीत: बड़ा मंच मिल सकता है
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
देवता: भगवान कृष्ण

डिस्क्लेमर (महत्वपूर्ण सूचना):
इस राशिफल को “राष्ट्र की परम्परा” प्रमाणित नहीं करता। यह सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से अवश्य कराएं।

एक तारीख, सैकड़ों कहानियाँ: 4 दिसंबर का ऐतिहासिक महत्व

4 दिसंबर: वह तारीख जिसने बार-बार इतिहास की धड़कन बदल दी — संघर्ष, खोज, सम्मान और क्रांति की गूंज

4 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि विश्व और भारतीय इतिहास के ऐसे निर्णायक क्षणों की गवाह है जिनका प्रभाव राजनीति, विज्ञान, समाज, युद्ध, मानवाधिकार और संस्कृति पर गहराई से पड़ा। इस दिन हुई घटनाओं ने कभी दुनिया को हिला दिया, कभी मानवता को नई दिशा दिखाई और कभी किसी राष्ट्र की नियति ही बदल दी। आइए जानें 4 दिसंबर की इन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में विस्तार से—

  1. 2012 — सीरिया में मोर्टार हमला: 29 लोगों की दर्दनाक मौत

साल 2012 में सीरिया में चल रहे भीषण गृहयुद्ध के दौरान 4 दिसंबर को मोर्टार हमला हुआ, जिसमें 29 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई। यह हमला सीरिया में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक विद्रोह और सत्ता संघर्ष का हिस्सा था। इस गृहयुद्ध ने लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया, पूरा देश युद्धभूमि में बदल गया और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ। यह घटना युद्ध की अमानवीयता और आम जनता की पीड़ा का प्रतीक बन गई।

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  1. 2008 — रोमिला थापर को ‘क्लूज सम्मान’

भारत की प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर को 2008 में प्रतिष्ठित क्लूज पुरस्कार (Kluge Prize) के लिए चुना गया। यह सम्मान मानविकी और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। रोमिला थापर ने प्राचीन भारत, मौर्य काल और बौद्ध इतिहास पर महत्वपूर्ण शोध किया। उनका चयन भारत के बौद्धिक जगत के लिए गर्व का विषय था और इससे यह सिद्ध हुआ कि भारतीय इतिहासकारों की समझ विश्व स्तर पर भी मान्य है।

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  1. 2006 — फिलीपींस में भूस्खलन से लगभग एक हज़ार मौतें

2006 में फिलीपींस के एक गांव में तूफान के बाद ज़मीन धंसने यानी भूस्खलन की भयानक घटना घटी। इस प्राकृतिक आपदा में लगभग एक हजार लोगों की जान चली गई। भारी बारिश, कमजोर मिट्टी और प्रशासनिक लापरवाही इसके प्रमुख कारण थे। इस हादसे ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन कितने जरूरी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।

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  1. 2004 — मारिया जूलिया मांतिला बनीं मिस वर्ल्ड

पेरू की मारिया जूलिया मांतिला गार्शिया को 2004 में मिस वर्ल्ड चुना गया। यह केवल सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि उनके सामाजिक कार्यों और आत्मविश्वास की जीत भी थी। उन्होंने गरीबी और शिक्षा के क्षेत्र में कई सराहनीय कार्य किए थे, जिसके चलते वे दुनिया भर की प्रेरणास्रोत बनीं। उनके चयन ने लैटिन अमेरिकी देशों में गर्व की लहर दौड़ा दी।

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  1. 2003 — अशोक गहलोत राजस्थान विधानसभा में निर्वाचित

4 दिसंबर 2003 को अशोक गहलोत राजस्थान विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। वे राज्य की राजनीति में एक मजबूत और अनुभवी नेता के रूप में उभरे। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में गरीब, किसान और युवा कल्याण से जुड़ी कई योजनाएँ शुरू कीं। यह दिन उनके राजनैतिक जीवन की एक बड़ी उपलब्धि बन गया।

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  1. 1999 — सिएटल वार्ता विफल, रूस ने ग्रोज्नी पर कब्ज़ा किया

संयुक्त राष्ट्र के व्यापारिक सम्मेलन के दौरान अमेरिका के कठोर रुख के कारण सिएटल वार्ता विफल हो गई और अगली बैठक जिनेवा में कराने की घोषणा हुई। इसी दिन रूस ने चेचन्या के महत्वपूर्ण शहर ग्रोज्नी पर कब्जा कर लिया। यह घटना वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ाने वाली साबित हुई और शीतयुद्ध के बाद की नई राजनीतिक जटिलताओं को दर्शाती है।

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  1. 1996 — नासा ने ‘मार्स पाथफाइंडर’ का प्रक्षेपण किया

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह के अध्ययन के लिए ‘मार्स पाथफाइंडर’ लॉन्च किया। यह मिशन भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की आधारशिला बना। इसने मंगल की सतह की पहली स्पष्ट तस्वीरें भेजीं और मानवता के लिए लाल ग्रह को समझने का रास्ता खोला। यह विज्ञान और तकनीक में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

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  1. 1995 — अमेरिका बना डेविस कप चैंपियन

1995 में अमेरिका ने टेनिस की प्रतिष्ठित प्रतियोगिता डेविस कप जीतकर खेल जगत में एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की। यह जीत न केवल खिलाड़ियों के लिए बल्कि अमेरिकन खेल इतिहास के लिए भी एक गौरवपूर्ण क्षण बन गई।

  1. 1984 — कुवैत विमान का अपहरण, चार यात्रियों की हत्या

हिज़्बुल्ला आतंकवादियों ने कुवैत एयरलाइंस के विमान का अपहरण किया और चार यात्रियों की हत्या कर दी। यह घटना अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के बढ़ते खतरे का संकेत थी। इसने दुनिया भर के देशों को अपनी विमान सुरक्षा कड़ी करने के लिए मजबूर कर दिया।

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  1. 1977 — मिस्र के विरुद्ध अरब मोर्चा

मिस्र के इज़राइल के प्रति नरम रुख अपनाने के कारण अन्य अरब देशों ने उसके खिलाफ एक अरब मोर्चा बना लिया। यह घटना मध्यपूर्व की राजनीति का बड़ा मोड़ थी और इससे अरब विश्व में विभाजन स्पष्ट हो गया।

  1. 1971 — UN का आपात सत्र और भारतीय नौसेना का हमला

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के कारण संयुक्त राष्ट्र ने आपात सत्र बुलाया। इसी दिन भारतीय नौसेना ने कराची पर हमला किया, जिससे पाकिस्तान की सैन्य शक्ति को भारी नुकसान पहुंचा। यह घटनाक्रम 1971 के युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण में निर्णायक साबित हुआ।

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  1. 1967 — ‘रोहिणी आरएच-75’ का प्रक्षेपण

भारत ने अपना पहला रॉकेट ‘रोहिणी आरएच-75’ थुम्बा से प्रक्षेपित किया। यह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ऐतिहासिक शुरुआत थी, जिसने आगे चलकर इसरो को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई।

  1. 1959 — भारत-नेपाल गंडक परियोजना पर हस्ताक्षर

गंडक सिंचाई और विद्युत परियोजना पर भारत और नेपाल के बीच समझौता हुआ। इससे दोनों देशों को कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में लाभ मिला और द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती आई।

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  1. 1952 — लंदन का ‘ग्रेट स्मॉग’

इंग्लैंड में छाए ज़हरीले धुएं के कारण हजारों लोगों की मौत हो गई। यह पर्यावरण प्रदूषण से हुई सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक थी और इसके बाद वायु प्रदूषण कानून बनाए गए।

  1. 1860 — पहले भारतीय को विदेश से डॉक्टरेट

गोवा के अगस्टिनो लॉरेंसो ने पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट प्राप्त की और वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने। यह भारतीय शिक्षा के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय है।

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  1. 1829 — सती प्रथा का अंत

लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया। यह महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम था और भारत के सामाजिक सुधार आंदोलन का मील का पत्थर बना।

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  1. 1796 — बाजीराव द्वितीय बने पेशवा

मराठा साम्राज्य में बाजीराव द्वितीय की नियुक्ति हुई, जिसने आगे चलकर ब्रिटिशों के साथ कई संघर्षों को जन्म दिया। यह मराठा इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था।

आज लिया गया संकल्प बदलेगा आने वाला भविष्य

पंचांग 04 दिसंबर 2025, गुरुवार | आज का संपूर्ण हिन्दू पंचांग (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)

आज का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा, देवी अन्नपूर्णा जयंती और सत्य व्रत जैसे पुण्य अवसर आज के दिन को और भी विशेष बना रहे हैं। चंद्रमा वृषभ राशि में संचार कर रहा है, जिससे स्थिरता, धन व सुख की ऊर्जा प्रबल मानी जाती है।

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तिथि
मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी – सुबह 08:37 बजे तक
शुक्ल पूर्णिमा (क्षय तिथि) – 08:37 AM से 04:43 AM (05 दिसंबर) तक
कृष्ण प्रतिपदा – 05 दिसंबर रविवार को 04:43 AM से

नक्षत्र
कृत्तिका – 02:54 PM तक
रोहिणी – 02:54 PM के बाद

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योग
शिव योग – 12:34 PM तक
सिद्ध योग – 12:34 PM के बाद

करण
वणिज – 08:38 AM तक
विष्टि (भद्रा) – 08:38 AM से 06:41 PM तक
बव – 06:41 PM से 04:44 AM (05 दिसंबर) तक
बालव – 05 दिसंबर प्रात: 04:44 के बाद

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वार– गुरुवार

विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त)
शक संवत – 1947 (विश्वावसु)
अमांत मास – मार्गशीर्ष
पूर्णिमांत मास – मार्गशीर्ष

सूर्य-चंद्र समय
सूर्योदय – 06:57 AM
सूर्यास्त – 05:36 PM
चन्द्रोदय – 04:55 PM
चन्द्रास्त – 07:12 AM (05 दिसंबर)

सूर्य राशि
सूर्य – वृश्चिक राशि

चंद्र राशि
चन्द्रमा – वृषभ राशि (पूरा दिन एवं रात)

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ऋतु
द्रिक ऋतु – हेमंत
अयन – दक्षिणायन

सर्वार्थसिद्धि योग
03 दिसंबर 06:00 PM से 04 दिसंबर 06:57 AM तक (बुधवार व कृत्तिका नक्षत्र के कारण)

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शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त – 05:22 AM से 06:10 AM
अभिजीत मुहूर्त – 11:55 AM से 12:38 PM
अमृत काल – 12:49 PM से 02:12 PM

अशुभ काल
राहुकाल – 01:36 PM से 02:56 PM
यमगण्ड – 06:57 AM से 08:17 AM
दुर्मुहूर्त – 10:30 AM से 11:13 AM, 02:46 PM से 03:28 PM
कुलिक – 09:37 AM से 10:57 AM
वर्ज्यम् – 04:49 AM से 06:12 AM

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आज के प्रमुख व्रत व पर्व

अन्नपूर्णा जयंती

मार्गशीर्ष पूर्णिमा

सत्य व्रत

पूर्णिमा व्रत

दिशाशूल (यात्रा निषेध) – गुरुवार को दक्षिण दिशा में यात्रा वर्जित रहती है।
यदि अत्यंत आवश्यक हो तो दही या गुड़ खाकर यात्रा करने से दोष में कमी आती है।

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लाभकारी यात्रा दिशा
उत्तर दिशा – सफलता, सम्मान व कार्यसिद्धि हेतु शुभ
पूर्व दिशा – शिक्षा व ज्ञान प्राप्ति के लिए लाभकारी

चंद्रबल आज किन राशियों को मिलेगा
वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन – इन राशियों को विशेष चंद्रबल प्राप्त होगा।

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दिन का संदेश
आज का दिन पूजा-पाठ, दान, व्रत, स्नान और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ है। माँ अन्नपूर्णा की कृपा जीवन में अन्न, धन और संतोष का वरदान देती है। पूर्णिमा की चंद्रमा की शीतल रोशनी मन को शांति और स्थिरता प्रदान करती है। आज संकल्प लिया गया कार्य शीघ्र पूर्ण होता है।

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नोट:इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं होगा। किसी भी शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान से पूर्व अपने नजदीकी योग्य पंडित या ज्योतिष विशेषज्ञ से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें।

भोजन ईश्वर का वरदान है इसे सम्मान दे बांटें और जरूरतमंदों तक पहुंचाएं- संजय सर्राफ

राँची ( राष्ट्र की परम्परा )
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता एवं कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अगहन माह में अन्नपूर्णा माता की पूजा का विशेष महत्व है, हर वर्ष मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को मां अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष अन्नपूर्णा जयंती 4 दिसंबर दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। अन्न और समृद्धि की देवी मां अन्नपूर्णा का यह पर्व भारत में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।अन्नपूर्णा का अर्थ है-अन्न से पूर्ण कराने वाली देवी, यानी वह शक्ति जो संसार को जीवनदायी भोजन प्रदान करती है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा,अन्नदान और भंडारे का आयोजन किया जाता है। यह पर्व मानव जीवन में अन्न के महत्व को स्मरण कराता है। हिंदू दर्शन में अन्न को “ब्रह्म” कहा गया है क्योंकि भोजन ही शरीर, मन और जीवन का आधार है। मां अन्नपूर्णा को अन्न, धान्य, पोषण, वैभव और दया की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जयंती के दिन उपवास व पूजन कर लोग जीवन में अन्न की निरंतर प्राप्ति और समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही, अन्नदान को सर्वोच्च दान माना गया है, इसलिए भक्त इस दिन गरीब व जरूरतमंदों को भोजन वितरित करते हैं।पौराणिक मान्यता के अनुसार एक समय ऐसा हुआ जब भगवान शिव ने माता पार्वती के सामने कहा कि संसार का सब कुछ मिथ्या है, यहां तक कि भोजन भी। शिव की यह बात पार्वती को अच्छी नहीं लगी। माता ने यह समझाने के लिए कि अन्न का जीवन में कितना महत्व है, पूरे संसार से अन्न को अदृश्य कर दिया। देखते ही देखते सृष्टि में अकाल पड़ गया, जीव-जंतु, मनुष्य सभी संकट में पड़ गए। कहीं भी अन्न का एक दाना तक उपलब्ध न रहा। जब भगवान शिव ने संसार में व्याप्त संकट को देखा, तब उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और वे माता पार्वती से क्षमा मांगने पहुंचे। उस समय माता पार्वती ने अन्नपूर्णा स्वरूप धारण कर लिया था। उन्होंने काशी (वाराणसी) में सोने के कलश से भगवान शिव को स्वयं अपने हाथों से अन्न परोसा। तभी से देवी अन्नपूर्णा को भोजन की अधिपति शक्ति माना गया और यह विश्वास स्थापित हुआ कि संसार में अन्न की धारा माता अन्नपूर्णा की कृपा से ही चलती है। इस दिन अन्नपूर्णा मंदिरों में विशेष आरती होती है। घरों में चावल, गेहूं आदि प्रमुख अन्नों का पूजन किया जाता है। लोग संकल्प लेते हैं कि वे भोजन का सम्मान करेंगे और किसी भी रूप में अन्न का अपमान या अपव्यय नहीं करेंगे। जनमानस में यह भी विश्वास है कि इस दिन अन्नदान करने से घर में कभी अभाव नहीं होता। मां अन्नपूर्णा जयंती केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि समाज को खाद्य सुरक्षा, अन्न का संरक्षण और “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से प्रेरित करने वाला अवसर है। इस दिन का सार यही है कि भोजन ईश्वर का वरदान है-इसे सम्मान दें, बांटें और जरूरतमंदों तक पहुंचाएं।

अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर उपकरण वितरण और जागरूकता रैली आयोजित

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश मोहन लाल विश्वकर्मा के नेतृत्व में दिव्यांगजनों को विभिन्न सहायक उपकरण वितरित किए गए तथा जागरूकता रैली निकाली गई।
कार्यक्रम में उपस्थित दिव्यांगजनों को उनके कानूनी अधिकारों के साथ ही सरकार द्वारा संचालित विभिन्न लाभकारी योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी गई, ताकि वे अधिकतम सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
न्यायिक अधिकारी देवेंद्र नाथ गोस्वामी तथा जिला दिव्यांगजन अधिकारी ने संयुक्त रूप से रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर वितरित किए गए उपकरणों में व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल सहित अन्य सहायक सामग्री शामिल रही।

एसआईआर कार्यक्रम की प्रगति का जिलाधिकारी ने किया स्थलीय निरीक्षण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी आलोक कुमार द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जनपद के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम की प्रगति का लगातार सघन निरीक्षण किया जा रहा है।
निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी श्री कुमार ने विधानसभा मेहदावल क्षेत्र के बूथ संख्या 480 एवं 481 का निरीक्षण किया। इस दौरान बीएलओ अवकाश पर पाए गए, जबकि मौके पर मौजूद वीडियो ने अवगत कराया कि एसआईआर कार्य का लगभग 70 प्रतिशत हिस्से को पूर्ण कर लिया गया है और शेष कार्य शीघ्र पूरा कर दिया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान उतरावल ग्राम पंचायत के प्रधान से मिली सूचना के अनुसार लगभग 400 ग्रामीणों से भरे गए गणना प्रपत्र अब तक बीएलओ द्वारा वापस प्राप्त नहीं किए गए हैं। इस पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी खलीलाबाद को निर्देशित किया कि सभी गणना प्रपत्र आज ही प्राप्त कराकर बीएलओ ऐप पर डिजिटलाइजेशन सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने बूथों पर उपस्थित बीएलओ एवं संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देश दिया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम में गुणवत्तापूर्ण प्रगति लाते हुए प्राप्त सभी गणना फॉर्मों को 100 प्रतिशत बीएलओ ऐप पर डिजिटाइज्ड किया जाए। उन्होंने एसआईआर से संबंधित फीडिंग सहित अन्य कार्यों की स्थिति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि इस महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे निर्धारित समयावधि में प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम : 624 जोड़ों का होगा विवाह, बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत आगामी 05 दिसंबर 2025 को केंद्रीय विद्यालय/राजकीय आईटीआई, देवरिया के प्रांगण में भव्य सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर पाण्डेय ने दी।जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि जनपद के विभिन्न विकास खंडों तथा नगर पालिका/नगर पंचायत क्षेत्रों से चयनित 624 जोड़ों का विवाह इस समारोह में संपन्न कराया जाएगा। सभी चयनित जोड़ों की बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी।उन्होंने बताया कि विवाह हेतु आने वाले वर-वधू को आधार कार्ड, दो पासपोर्ट साइज फोटो तथा आवेदिका/कन्या की बैंक पासबुक के साथ निर्धारित स्थल पर उपस्थित होना आवश्यक है।सुधीर पाण्डेय ने सभी खंड विकास अधिकारियों एवं नगर पालिका/नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के चयनित जोड़ों को 05 दिसंबर की सुबह 8:00 बजे तक सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित विवाह स्थल पर पहुँचने की सूचना समय पर उपलब्ध कराएं।

दान की जमीन पर चल रहे स्कूल का मुख्य गेट बंद छात्रों को प्रवेश में हो रही परेशानी

रांची / बुंडू ( राष्ट्र की परम्परा)l राहे प्रखंड स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय डोकाद में अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई है। विद्यालय की जमीन दान करने वाले व्यक्ति ने स्कूल प्रशासन से नौकरी की मांग पूरी न होने पर मुख्य द्वार पर दीवार खड़ी कर उसे पूरी तरह बंद कर दिया है। साथ ही स्कूल परिसर के चारों ओर बाउंड्री भी बना दी गई है, जिससे छात्रों के लिए स्कूल में प्रवेश करना मुश्किल हो गया है। जानकारी के अनुसार, छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचने के बाद प्रवेश के लिए नाली और दूसरे किनारों से होकर आना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जहां कीचड़ और पानी भरे होने के कारण बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि मुख्य गेट बंद होने की वजह से सड़क किनारे साइकिलें खड़ी करनी पड़ती हैं, जिससे अब तक दर्जनों साइकिल चोरी हो चुकी है। स्थिति से परेशान शिक्षक और छात्र कई बार शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी दे चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कोई पहल नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग और प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करे, ताकि बच्चों की पढ़ाई किसी भी बाधा के बिना जारी रह सके।

आश्रम में सेवा की भावना प्रेरणादायी समाज को बनाते हैं मजबूत-गोपाल शर्मा

राँची (राष्ट्र की परम्परा)l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के झारखंड प्रांतीय प्रचारक गोपाल शर्मा तथा समाजसेवी एवं व्यवसायी पंकज पोद्दार ने श्रीकृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग, रांची स्थित झारखंड के सबसे विशाल श्रीराधा कृष्ण प्रणामी मंदिर एवं सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम का भ्रमण किया। उनके आगमन पर मंदिर परिसर में हार्दिक स्वागत किया गया। मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने दोनों अतिथियों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने मंदिर परिसर की भव्यता आध्यात्मिक शांति और सुव्यवस्थित व्यवस्था की सराहना की। अतिथियों ने गर्भगृह में दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा ट्रस्ट द्वारा संचालित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के क्रम में गोपाल शर्मा एवं पंकज पोद्दार सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने आश्रम में रह रहे दिव्यांग एवं निराश्रित जनों से मिलकर उनका हालचाल जाना। अतिथियों ने आश्रम द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं-निःशुल्क भोजन, आवास, उपचार, देखभाल एवं पुनर्वास प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यहां सेवा की जो भावना दिखाई देती है, वह समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने ट्रस्ट सदस्यों एवं सेवकों के समर्पण को विशेष रूप से प्रशंसनीय बताया। इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल तथा प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने अतिथियों का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय एवं परित्यक्त लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से सहयोग और सहभागिता की अपील करते हुए कहा कि जनसहयोग बढ़ने से आश्रम की सेवाओं को और विस्तार दिया जा सकेगा।भ्रमण के उपरांत गोपाल शर्मा ने कहा कि ऐसे सेवा कार्य ही समाज को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने ट्रस्ट को भविष्य में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और अधिक से अधिक लोगों को इस सेवा से जुड़ने की प्रेरणा दी।