Sunday, June 28, 2026
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नाबालिग बालक सकुशल परिजनों से मिला, महराजगंज पुलिस की तत्परता और C-Plan ऐप बना मददगार

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महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। थाना कोतवाली क्षेत्र के बागापार चौराहे पर शनिवार देर शाम मानवता और सतर्कता का प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। स्थानीय पुलिस ने भटके हुए 14 वर्षीय किशोर को सुरक्षित परिजनों से मिलाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सूत्रों के अनुसार, किशोर गोरखपुर से यात्रा के दौरान रास्ता भटककर महराजगंज के बागापार पहुंच गया था। क्षेत्र में गश्त के दौरान चौकी प्रभारी उप निरीक्षक मनीष पटेल ने किशोर को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। पुलिस टीम ने तुरंत तकनीक का सहारा लेते हुए C-Plan ऐप की मदद से परिवार की जानकारी जुटाई और पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की।

खोजबीन में पता चला कि बालक का नाम गुलाम मोहम्मद, निवासी नागापार गांव, थाना गोल्हौरा, जनपद सिद्धार्थनगर है। पुलिस ने परिजनों से संपर्क स्थापित कर उन्हें चौकी पर बुलाया। औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बालक को सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया गया।

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परिवार ने अपने बच्चे को सकुशल पाकर राहत की सांस ली और महराजगंज पुलिस की संवेदनशीलता व त्वरित कार्रवाई के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

इस मानवीय कार्रवाई में उप निरीक्षक मनीष पटेल, हेड कांस्टेबल अनवर अली और कांस्टेबल निरंजन की अहम भूमिका रही, जिन्होंने तत्परता दिखाते हुए बालक की पहचान से लेकर परिजनों तक पहुंचाने तक सराहनीय योगदान दिया।

महराजगंज पुलिस की यह पहल दिखाती है कि तकनीक के सही उपयोग और जिम्मेदार पुलिसिंग से किसी परिवार की चिंता कुछ ही मिनटों में दूर की जा सकती है।

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भारत ने 61 गेंदें शेष रहते जीता निर्णायक वनडे, दक्षिण अफ्रीका को 2-1 से हराया; यशस्वी का शतक चमका

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खेल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। विशाखापत्तनम में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से हराते हुए तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 61 गेंदें शेष रहते शानदार जीत दर्ज की।
यशस्वी जायसवाल ने अपने वनडे करियर का पहला शतक लगाया, जबकि कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली ने अर्धशतकीय पारियों से टीम को मजबूती दी।

दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 47.5 ओवर में 270 रन बनाए। क्विंटन डिकॉक ने 106 रनों की बेहतरीन पारी खेली, जबकि कप्तान तेम्बा बावुमा ने 48 रन जोड़े। भारत की ओर से कुलदीप यादव और प्रसिद्ध कृष्णा ने चार-चार विकेट झटके और अफ्रीकी बल्लेबाजी क्रम को संभलने नहीं दिया।

भारत की पारी: रोहित-यशस्वी की शतकीय साझेदारी

लक्ष्य का पीछा करते हुए रोहित शर्मा और यशस्वी जायसवाल ने भारत को दमदार शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 155 रनों की साझेदारी की। रोहित ने 75 रन बनाकर आउट होने से पहले वनडे करियर का 61वां अर्धशतक लगाया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 20,000 रन पूरे किए।

रोहित के आउट होने के बाद विराट कोहली मैदान पर आए और उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाते हुए यशस्वी का शानदार साथ दिया।

यशस्वी जायसवाल: नाबाद 116 रन (121 गेंद, 12 चौके, 2 छक्के)

विराट कोहली: नाबाद 65 रन (45 गेंद)

दक्षिण अफ्रीका की ओर से एकमात्र विकेट केशव महाराज को मिला।

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सीरीज का सफर: रांची में भारत, रायपुर में दक्षिण अफ्रीका जीता

तीन मैचों की सीरीज में

पहला वनडे: भारत ने 17 रनों से जीत हासिल की।

दूसरा वनडे (रायपुर): दक्षिण अफ्रीका ने 4 विकेट से जीतकर सीरीज को 1-1 से बराबर किया।

तीसरा वनडे: भारत ने शानदार प्रदर्शन कर सीरीज 2-1 से जीत ली।

दक्षिण अफ्रीका की पारी: डिकॉक का शतक नहीं आया काम

दक्षिण अफ्रीका की ओर से डिकॉक और बावुमा ने दूसरे विकेट के लिए 114 रन जोड़े। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने मैच पर पकड़ मजबूत करते हुए नियमित अंतराल पर विकेट लिए।
डिकॉक के 106 रनों के अलावा,

• डेवाल्ड ब्रेविस – 29

• मैथ्यू ब्रिट्जके – 24

• केशव महाराज – नाबाद 20

कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह और रवींद्र जडेजा ने बेहतरीन गेंदबाजी की।

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महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। घुघली कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में निजी अस्पतालों की अनियमितताएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। दर्जनों छोटे–बड़े निजी अस्पताल बिना निर्धारित मानकों, पंजीकरण नियमों और योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता के बिना संचालित हो रहे हैं। क्षेत्र में फैला यह अवैध मेडिकल नेटवर्क आम लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार कई निजी अस्पताल नामी डॉक्टरों के पंजीकरण पर चलते हैं, जबकि वास्तविकता में ये डॉक्टर सप्ताह में केवल एक–दो बार ही अस्पताल पहुंचते हैं। ऑपरेशन जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं के बाद मरीजों की देखभाल अयोग्य और अप्रशिक्षित स्टाफ के भरोसे छोड़ दी जाती है। इससे गलत निदान, लापरवाह उपचार और मनमानी वसूली जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

सबसे चिंताजनक मुद्दा यह है कि घुघली क्षेत्र के किसी भी निजी अस्पताल में मान्यता प्राप्त एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ मौजूद नहीं है। इसके बावजूद अवैध रूप से जांचें कराई जा रही हैं, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

हाल ही में भुवनी रेलवे क्रॉसिंग के पास एक निजी अस्पताल में हुई गंभीर लापरवाही ने पूरे क्षेत्र में रोष बढ़ा दिया। मरीज की बिगड़ती हालत पर उसे बड़े अस्पताल में रेफर किया गया, जहां दूसरी चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान अस्पताल की गंभीर चूक उजागर हुई। इस घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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कप्तानगंज रोड, सिसवा रोड, ढोढिला चौराहा और बैकुण्ठी रोड सहित कई क्षेत्रों में स्थापित निजी अस्पताल मानकों की अनदेखी कर खुलेआम संचालन जारी रखे हुए हैं। नेबुआ–नौरंगिया रोड स्थित एक हड्डी रोग अस्पताल पर भी आरोप है कि उसका संचालन गैर-योग्य व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण अवैध अस्पतालों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। इससे लोगों में गहरा आक्रोश है।

इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी श्रीकांत शुक्ल ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। जल्द ही एक टीम गठित कर घुघली क्षेत्र में संचालित सभी निजी अस्पतालों की जांच कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि विभागीय कार्रवाई वास्तविक रूप में सामने आती है या नहीं।

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बेरोजगारी से अपराध तक: युवाओं का बिगड़ता संतुलन

युवाओं का भविष्य खतरे में: बढ़ती बेरोजगारी, मानसिक तनाव और अपराध की ओर बढ़ता समाज

शशांक भूषण मिश्र द्वारा राष्ट्र की परम्परा के लिए

भारत आज जनसंख्या के युवा बहुल राष्ट्रों में गिना जाता है, लेकिन यही युवा वर्ग जब रोजगार के लिए भटकने लगता है तो वही शक्ति एक गंभीर सामाजिक समस्या का रूप ले लेती है। तेजी से बढ़ती Youth Unemployment in India (भारत में युवा बेरोजगारी) अब केवल एक आर्थिक समस्या नहीं रही, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और अपराध दर से भी गहराई से जुड़ चुकी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लाखों शिक्षित युवा डिग्री हाथ में लेकर भी खाली बैठे हैं, जिससे उनके भीतर निराशा, हताशा और अवसाद तेजी से बढ़ रहा है।

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रोजगार के सीमित अवसर और प्रतियोगिता की अत्यधिक दौड़ ने युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर कर दिया है। जब वर्षों की पढ़ाई के बाद भी नौकरी नहीं मिलती, तो आत्मविश्वास डगमगा जाता है। कई मामलों में युवा खुद को समाज और परिवार पर बोझ समझने लगते हैं। यही मानसिक दबाव उन्हें गलत निर्णयों की ओर भी धकेल सकता है। Youth Unemployment in India के कारण बढ़ता अवसाद अब एक “मूक महामारी” की तरह फैल रहा है, जिस पर समाज और सरकार दोनों को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, बेरोजगारी और अपराध के बीच सीधा संबंध है। जब किसी के पास आय का साधन नहीं होता और ज़रूरतें बढ़ती हैं, तो कुछ लोग अवैध रास्तों को अपनाने से भी नहीं हिचकते। चोरी, साइबर अपराध, नशे का कारोबार और छोटे-मोटे आपराधिक कार्यों में युवाओं की भागीदारी का एक बड़ा कारण रोजगार की कमी भी है। Youth Unemployment in India समाज के भीतर असंतोष को जन्म देता है और यही असंतोष अपराध के रूप में सामने आने लगता है।

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ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां रोजगार के साधन पहले से ही सीमित होते हैं। खेती पर निर्भरता घट रही है और उद्योगों की कमी के कारण युवा शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। लेकिन शहरों में भी नौकरियों की मारामारी है। इससे झुग्गी-झोपड़ी, असमानता और सामाजिक अस्थिरता बढ़ती जा रही है, जिसका सीधा असर कानून-व्यवस्था पर पड़ता है।

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बेरोजगारी से निपटने के लिए सरकार की योजनाएं मौजूद हैं, जैसे स्किल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और मेक इन इंडिया, लेकिन वास्तविक स्तर पर इनका लाभ हर युवा तक नहीं पहुंच पाता। आवश्यकता है कि शिक्षा प्रणाली को रोजगारोन्मुख बनाया जाए और युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल भी दिया जाए। Youth Unemployment in India को कम करने के लिए निजी क्षेत्र, शिक्षा संस्थानों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय ज़रूरी है।

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साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए जितनी शारीरिक स्वास्थ्य को मिलती है। स्कूल और कॉलेज स्तर पर काउंसलिंग, करियर गाइडेंस और मोटिवेशनल प्रोग्राम चलाए जाने चाहिए ताकि युवा खुद को अकेला न समझें। अगर आज समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यही बेरोजगारी एक बड़े सामाजिक विस्फोट का कारण भी बन सकती है।

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युवाओं की ऊर्जा अगर सही दिशा में लगाई जाए, तो यही देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। लेकिन अगर Youth Unemployment in India जैसी समस्या अनदेखी होती रही, तो यह भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

कोरबा में 65 वर्षीय महिला से दुष्कर्म का मामला, ग्रामीणों में आक्रोश

कोरबा (राष्ट्र की परम्परा)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में 65 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। घटना उरगा थाना क्षेत्र की है, जहां खेत में कार्य करने गई बुजुर्ग महिला को एक युवक ने निशाना बनाया। पीड़िता ने घर लौटकर परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस को तत्काल सूचना दी गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार पीड़िता खेत में काम कर रही थी, तभी आरोपी युवक वहां पहुँचा और उस पर जबरन हमला किया। विरोध करने पर उसने धमकाने की कोशिश भी की। पीड़िता किसी तरह घर लौटी और परिजनों को घटना बताई। सूचना मिलते ही गांव में तनाव का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने आरोपी की तलाश शुरू की और उसे पकड़ने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया।

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प्राथमिक जानकारी के अनुसार आरोपी युवक पहले भी नशे और विवादों को लेकर चर्चा में रहा है। ग्रामीणों ने उसकी हरकतों पर कड़ी नाराजगी जताई है और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

उरगा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लिया है।
कोरबा सीएसपी भूषण एक्का ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

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सशस्त्र सेना झंडा दिवस: वीरों के सम्मान और हमारे कर्तव्य का राष्ट्रीय उत्सव

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✍️ नवनीत मिश्र

हर वर्ष 7 दिसंबर को मनाया जाने वाला सशस्त्र सेना झंडा दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, कृतज्ञता और सैनिकों के प्रति अटूट सम्मान का दिवस है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि सीमाओं पर तैनात सैनिकों का साहस और त्याग ही वह सुरक्षा कवच है, जिसकी बदौलत देश शांति, स्थिरता और विश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
हम अक्सर युद्धभूमि पर हुए बलिदानों को याद करते हैं, लेकिन इस दिन सैनिकों के परिवारों के मौन संघर्ष को भी उतने ही सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए। एक सैनिक जब सीमा पर तैनात होता है, तब उसका परिवार हर दिन एक अदृश्य युद्ध लड़ता हैl प्रतीक्षा, चिंता और अनिश्चितताओं को धैर्य के साथ झेलता है। झंडा दिवस इस मौन त्याग को पहचान देने का अवसर है।
भारतीय सशस्त्र बल, सेना, नौसेना और वायुसेना, विश्व की श्रेष्ठ सेनाओं में से हैं। कठिन पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर रेगिस्तानों तक, समुद्री सीमाओं से लेकर आकाशीय सुरक्षा तक, भारतीय सैनिक हर परिस्थिति में अपनी निष्ठा और पराक्रम के लिए जाने जाते हैं। वे केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि आपदाओं के समय देश को सबसे पहले संभालने वाले हाथ भी वही होते हैं।
झंडा दिवस का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन एकत्र की गई धनराशि युद्ध में घायल हुए सैनिकों के पुनर्वास, शहीदों के परिवारों, रिटायर्ड सैनिकों और उनके बच्चों की शिक्षा जैसे कल्याणकारी कार्यों पर खर्च की जाती है। यह केवल सहायता नहीं, बल्कि राष्ट्र की अपनी सेना के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन है।
आज भारत तेजी से आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीक, उन्नत हथियारों और सीमा सुरक्षा के नए मानकों के केंद्र में सैनिक ही है। उसके मनोबल को सशक्त बनाना किसी भी राष्ट्र का प्राथमिक कर्तव्य है, और झंडा दिवस इसी कर्तव्य को सामूहिक रूप से निभाने का अवसर देता है।
झंडा दिवस को हम केवल कैलेंडर की एक तारीख न मानें। यह वह अवसर है जब हम सक्रिय रूप से योगदान देकर, जागरूकता फैलाकर और शहीद परिवारों के प्रति संवेदनशील होकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। राष्ट्र के विकास का मार्ग तभी सुरक्षित है, जब उनके प्रहरी, हमारे सैनिक, सुरक्षित, सम्मानित और समर्थ हों।
अंततः यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता, हमारा आज और हमारा भविष्य उन वीरों की देन है जो सीमाओं पर खड़े होकर हर खतरे को अपने साहस से रोकते हैं। सशस्त्र सेना झंडा दिवस केवल सम्मान का नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक राष्ट्रीय कर्तव्य का उत्सव हैl उनके लिए, जिनकी वजह से यह देश सुरक्षित है।

चलती ट्रेन पर चढ़ा युवक, 40 मिनट तक हाई वोल्टेज ड्रामा; रेलवे ने ओएचई लाइन बंद कर बचाई जान

प्रतापगढ़/संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रतापगढ़ जिले के मां बेल्हा देवी धाम रेलवे स्टेशन के पास शनिवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक चलती काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस की छत पर चढ़ गया। घटना के बाद स्टेशन परिसर और ट्रेन के यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। रेलवे और पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया।

सूत्रों के अनुसार युवक की पहचान संत कबीर नगर निवासी मोहम्मद अनस के रूप में हुई है। ट्रेन के रुकते ही वह अचानक कोच की छत पर चढ़ गया और नीचे उतरने से इंकार करता रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे नियंत्रण कक्ष ने तुरंत ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) लाइन की बिजली आपूर्ति बंद कर दी, जिससे संभावित खतरे को टाला जा सका।

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करीब 40 मिनट तक ट्रेन रुकी रही, जिसके कारण वाराणसी–लखनऊ रेलमार्ग पर कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। रेलवे फाटक के पास भी लंबा जाम लग गया। सूचना पर जीआरपी और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची और युवक को समझाने की कोशिश की। प्रारंभिक विरोध के बाद सुरक्षा कर्मियों ने उसे सुरक्षित ढंग से नीचे उतार लिया। पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है।

घटना के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और यात्री मौके पर एकत्र हो गए। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि समय रहते की गई कार्रवाई की वजह से बड़ा हादसा टल गया।

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सूर्य की महिमा और समानता: वेदों से आधुनिक जीवन तक एक दिव्य संदेश

जब प्रकाश ने अपना स्वरूप साधा और जीवन को धर्म का मार्ग मिला

सूर्य केवल आकाश में चमकता हुआ अग्नि-पिंड नहीं है, वह सृष्टि की चेतना, काल का नियंत्रक और धर्म का प्रत्यक्ष साक्षी है। वेदों में सूर्य को “आत्मा जगतस्तस्थुषश्च” कहा गया है — अर्थात स्थावर और जंगम, दोनों संसारों की आत्मा। एपिसोड 2 में हमने जाना कि सूर्य की तीव्रता जब असंतुलित होती है तो वह संहार बन जाती है और जब संयमित होती है, तभी वह जीवन-रक्षक बनती है। अब एपिसोड 3 में हम उस दिव्य क्षण को देखते हैं जब सूर्य ने अपने तेज को संयमित कर, सृष्टि के कल्याण का संकल्प लिया और स्वयं को ‘धर्म-सूर्य’ के रूप में प्रतिष्ठित किया।

शास्त्रों के अनुसार, एक समय ऐसा भी आया जब पृथ्वी सूर्य की असहनीय ऊष्मा से झुलसने लगी। वनस्पति मुरझाने लगे, नदियां सिकुड़ने लगीं और जीव-जंतु व्याकुल हो उठे। देवताओं ने ब्रह्मा से पुकार की कि यह पृथ्वी के विनाश का कारण बन सकता है। तब ब्रह्मा ने सूर्य से कहा, “तुम्हारी ऊर्जा ही जीवन है, किंतु यह तभी कल्याणकारी होगी जब उसमें संतुलन होगा।” यह वही क्षण था, जब सूर्य ने पहली बार अपने भीतर झांका और स्वयं को एक तपस्वी की भांति संयमित किया।

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तभी विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा का प्रसंग आता है। शास्त्रों में वर्णन है कि संज्ञा सूर्य के तेज को सहन नहीं कर पाईं और छाया को अपना स्थान देकर चली गईं। यह घटना मात्र पारिवारिक नहीं, गूढ़ दार्शनिक अर्थ रखती है। यह दर्शाती है कि प्रेम केवल ऊष्मा नहीं, शीतलता और सहअनुभूति भी मांगता है। सूर्य ने तब अपने तेज का एक अंश त्याग कर उसे संयमित कर लिया, जिससे संज्ञा पुनः लौट सकें। यही वह क्षण था, जब सूर्य ने त्याग की सर्वोच्च परिभाषा को स्थापित किया।

ऋग्वेद में सूर्य को ‘मित्र’ कहा गया है — जो सबका मित्र है, बिना भेदभाव प्रकाश देता है। वह राजा को भी प्रकाश देता है और रंक को भी, पवित्र को भी और अपवित्र को भी। यही सूर्य की समानता है। यही उसकी सबसे बड़ी महिमा भी है। उसका प्रकाश न किसी जाति को देखता है, न किसी पंथ को। वह केवल कर्तव्य जानता है — प्रकाशित करना।

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भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि “मैं सूर्य में स्थित तेज हूँ।” इसका अर्थ केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि दार्शनिक है। सूर्य का अनुशासन ही कर्मयोग का सार है। हर दिन बिना रुके, बिना शिकायत किए, वह अपना कर्तव्य निभाता है। मनुष्य को भी यही संदेश देता है कि जब जीवन में अंधकार आए तो अपने भीतर सूर्य का जन्म कर, कर्तव्य के पथ पर डटे रहो।

अथर्ववेद में सूर्य को आरोग्य का मूल स्रोत बताया गया है। सूर्य किरणें रोगों का नाश करती हैं, शरीर में ऊर्जा का संचार करती हैं और मन को भी प्रकाशित करती हैं। भारत की प्राचीन सूर्य-उपासना — जैसे योग में सूर्यनमस्कार, चिकित्सा में सूर्य-स्नान और आध्यात्म में सूर्य ध्यान — ये सब उसी ज्ञान का विस्तार हैं, जिसे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व जान लिया था।

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रामायण में यह प्रसंग आता है कि जब भगवान राम लंका पर विजय के लिए रणभूमि में खड़े थे और कुछ क्षणों के लिए निराश हो उठे, तब अगस्त्य ऋषि ने उन्हें आदित्य हृदय स्तोत्र का उपदेश दिया। सूर्य की स्तुति करते ही राम के भीतर ऐसी ऊर्जा का संचार हुआ कि उन्होंने रावण का अंत कर दिया। यह कथा प्रमाण है कि सूर्य केवल बाहरी ऊर्जा नहीं, आंतरिक साहस और आत्मबल का भी स्रोत है।

सूर्य की यह शास्त्रोक्त कथा हमें यह भी सिखाती है कि शक्ति, यदि अहंकार से जुड़ जाए, तो विनाश बन जाती है और यदि धर्म व संयम से जुड़ जाए, तो सृष्टि का आधार बन जाती है। आज के युग में, जब मनुष्य भौतिक प्रगति की दौड़ में प्रकृति का संतुलन बिगाड़ कर स्वयं को सूर्य से भी अधिक शक्तिशाली मानने लगा है, सूर्य की यह कथा एक चेतावनी भी है और मार्गदर्शन भी।

सूर्य हमें सिखाता है कि चमकना जरूरी है, लेकिन जलाना नहीं। आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन कुचल कर नहीं। अपनी ऊर्जा को पहचानना जरूरी है, लेकिन उसका दुरुपयोग करना विनाश की ओर पहला कदम है।

एपिसोड 3 की यह शास्त्रोक्त कथा हमें एक गहरे सत्य की ओर ले जाती है — “ऊर्जा का असली धर्म संयम है।” सूर्य ने जब यह समझ लिया, तभी वह देव नहीं, पूज्य बन गया। तभी वह केवल आकाश का दीपक नहीं रहा, बल्कि आत्मा का प्रकाश बन गया।

आज भी जब सूर्योदय होता है, तो वह केवल दिन का आरंभ नहीं करता, बल्कि वह हर जीव को एक नया संदेश देता है — कि अंधकार चाहे जितना घना हो, यदि भीतर सूर्य जागृत हो जाए, तो प्रकाश स्वयं मार्ग बना लेता है।

प्रदूषण की गिरफ्त में भारत: कब रुकेगा पर्यावरण का शोषण?

पर्यावरण विनाश: क्या कंक्रीट के शहर थाम पाएंगे प्रदूषण का बढ़ता कहर ?

सोमनाथ मिश्र द्वारा राष्ट्र की परम्परा के लिए

तेजी से बढ़ता शहरीकरण और अंधाधुंध निर्माण आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा संकट बन चुका है। पेड़ों की जगह अब कंक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं और प्राकृतिक संसाधनों का असीमित दोहन पर्यावरण के अस्तित्व पर सीधा प्रहार कर रहा है। पर्यावरण विनाश अब केवल वैज्ञानिक चेतावनी नहीं, बल्कि धरती पर जी रहे हर इंसान की रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुका है।

शहरों का विस्तार विकास का संकेत माना जाता है, लेकिन जब इस विकास की कीमत साफ हवा, निर्मल पानी और हरियाली से चुकानी पड़े तो यह प्रगति नहीं, बल्कि विनाश बन जाती है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में जंगलों की कटाई, नदियों पर अवैध निर्माण, पहाड़ों को खोखला करना और तटीय क्षेत्रों को पाटना आम बात हो गई है। इससे न केवल जैव विविधता समाप्त हो रही है, बल्कि मौसम चक्र भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

गर्मी का बढ़ता कहर, असमय बारिश, सूखा, बाढ़ और आंधी-तूफान अब सामान्य बात बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनहाउस गैसों की अधिकता के पीछे सबसे बड़ा कारण औद्योगिक प्रदूषण और वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसें हैं। ये गैसें वातावरण में कार्बन की मात्रा बढ़ाकर तापमान को लगातार ऊपर की ओर धकेल रही हैं।

हाल के वर्षों में मेट्रो शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का स्तर खतरनाक सीमा को पार कर चुका है। बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी बीमारियां और एलर्जी तेजी से बढ़ रही हैं। यह सब पर्यावरण विनाश का ही परिणाम है, जिसे यदि समय रहते नहीं रोका गया तो स्थिति भयावह रूप ले सकती है।

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सवाल उठता है कि क्या कंक्रीट के इन जंगलों में कभी फिर से हरियाली लौट पाएगी? जवाब सरकार, उद्योग और आम जनता—तीनों की साझी जिम्मेदारी में छिपा है। अगर अब भी सतत विकास की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को शायद शुद्ध हवा और साफ पानी के बारे में सिर्फ किताबों में ही पढ़ने को मिलेगा।

सरकार को चाहिए कि वह बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए, उद्योगों पर सख्त पर्यावरणीय नियम लागू करे और प्लास्टिक, कोयला तथा पेट्रोलियम ईंधनों के उपयोग में कटौती को अनिवार्य बनाए। वहीं, आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सार्वजनिक परिवहन अपनाना, पौधारोपण करना, जल संरक्षण और ऊर्जा बचत पर ध्यान देना होगा।

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आज जरूरत है सोच बदलने की, वरना कंक्रीट की यह दुनिया बहुत जल्द एक ऐसे रेगिस्तान में तब्दील हो जाएगी, जहां सिर्फ प्रदूषण और बर्बादी का सन्नाटा होगा। यदि अब भी नहीं जागे, तो पर्यावरण विनाश मानव सभ्यता के अंत का कारण भी बन सकता है।

तेज़ रफ़्तार का कहर: अज्ञात वाहन की टक्कर से दवा व्यवसायी की मौत, चालक फरार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पनियरा–परतावल मार्ग पर शनिवार देर रात तेज रफ्तार के कारण हुआ एक बड़ा सड़क हादसा क्षेत्र में सनसनी का विषय बन गया। बभनौली चौराहे के पास एक अज्ञात वाहन ने बाइक सवार दवा व्यवसायी 48 वर्षीय धर्मेंद्र मौर्य को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई, जबकि आरोपी चालक वाहन समेत फरार हो गया।

मृतक धर्मेंद्र मौर्य, निवासी पनियरा नगर, अपने निजी कार्य से परतावल गए थे और देर रात बाइक से घर लौट रहे थे। लौटते समय बभनौली चौराहे से पहले तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि धर्मेंद्र सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत एंबुलेंस और पुलिस को सूचना दी। उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पनियरा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित किया।

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हादसे की जानकारी मिलते ही परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। पनियरा पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम हेतु भेजते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने बताया कि घटनास्थल के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और स्थानीय सूत्रों की मदद से अज्ञात वाहन व चालक की तलाश जारी है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपी चालक को जल्द ही चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

यह दुखद घटना एक बार फिर से यह दर्शाती है कि तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना कितनी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।

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स्मृतियों का अमर दिन — जिन महान आत्माओं की विरासत आज भी धड़कती है”

  1. स्वयं प्रकाश (2019) — विचारों की आग से समाज को जगाने वाला साहित्यकार

स्वयं प्रकाश का जन्म उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फरनगर जनपद में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के उन सशक्त हस्ताक्षरों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, जातिगत भेदभाव और शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाई। उनके उपन्यास और कहानियाँ यथार्थ के करीब थीं, जिनमें आम जीवन की पीड़ा और संघर्ष साफ झलकता है। प्रमुख कृतियों में नीलकंठ हुआ मरंग, भारतीय समाज की समस्याएँ जैसे विचारोत्तेजक लेखन शामिल हैं। उन्होंने दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों में रहते हुए साहित्यिक आंदोलनों को दिशा दी। उनका योगदान केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहा — वे सामाजिक चेतना के सशक्त वाहक बने। उत्तर प्रदेश से शुरू हुई उनकी वैचारिक यात्रा ने पूरे भारत के साहित्यप्रेमियों को प्रभावित किया। 7 दिसंबर 2019 को उनका निधन हुआ, किंतु उनके लिखे शब्द आज भी जलते दीपक की तरह समाज को राह दिखाते हैं।

  1. चो रामस्वामी (2016) — व्यंग्य की धार, जनमत की पहचान

चो रामस्वामी का जन्म मद्रास प्रेसीडेंसी (अब चेन्नई, तमिलनाडु) में हुआ था। वे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे — अभिनेता, हास्य कलाकार, नाटककार, फ़िल्म निर्देशक, राजनीतिक व्यंग्यकार और अधिवक्ता। दक्षिण भारत में उनके व्यंग्य लेख और पत्रिका तुगलक अत्यंत लोकप्रिय रही। उनके राजनीतिक विश्लेषण में तीखापन और सटीकता थी, जो सत्ता से लेकर समाज तक हर स्तर पर सवाल खड़ा करती थी।
चो रामस्वामी ने तमिल रंगमंच को नया आयाम दिया और फिल्मों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। उनके नाट्य कार्यों ने सामाजिक विसंगतियों पर तीखे कटाक्ष किए। तमिलनाडु की राजनीतिक चेतना को जाग्रत करने में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। 7 दिसंबर 2016 को चेन्नई में उनका देहांत हुआ, लेकिन उनका व्यंग्य आज भी जनमानस में जीवित है।

  1. बेगम आबिदा अहमद (2003) — समाजसेवा और सादगी की प्रेरणा

बेगम आबिदा अहमद का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद में हुआ था। वे भारत के पाँचवें राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की पत्नी थीं, लेकिन उनकी पहचान केवल “राष्ट्रपति की पत्नी” तक सीमित नहीं रही। वे एक सशक्त समाजसेविका, महिला अधिकारों की समर्थक और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहीं।
महिलाओं और अल्पसंख्यकों के हित में उन्होंने अनेक संगठनात्मक कार्य किए। वे राज्यसभा की सदस्य भी रही थीं और अपने सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती थीं। शिक्षा, बाल कल्याण और महिला उत्थान के लिए उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। 7 दिसंबर 2003 को उनके निधन के साथ एक शांत, परंतु दृढ़ आवाज़ हमेशा के लिए मौन हो गई — परन्तु उनके कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं।

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  1. दीप नारायण सिंह (1977) — बिहार की राजनीति का मजबूत स्तंभ

दीप नारायण सिंह का जन्म बिहार के रोहतास जनपद में हुआ था। वे बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री बने और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनके शासन काल में विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक समरसता पर विशेष बल दिया गया। वे दृढ़ निर्णयों और स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे।
उनकी राजनीतिक सोच जन-कल्याण पर केंद्रित थी। उन्होंने बिहार को पिछड़ेपन की छवि से बाहर लाने का प्रयास किया और बुनियादी ढांचे के विकास पर ज़ोर दिया। 1977 में 7 दिसंबर को उनका निधन हुआ, और बिहार की राजनीति ने एक दूरदर्शी नेता खो दिया।

  1. हैदर अली (1782) — मैसूर का शेर, साम्राज्यवाद का प्रखर विरोधी

हैदर अली का जन्म वर्तमान कर्नाटक के कोलार क्षेत्र में माना जाता है। वे किसी शाही वंश में पैदा नहीं हुए, बल्कि अपनी रणनीतिक कुशलता, शौर्य और नेतृत्व क्षमता के बल पर मैसूर के शासक बने। उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ कई निर्णायक युद्ध लड़े और दक्षिण भारत में अंग्रेज़ों के विस्तार को लंबे समय तक रोके रखा।
उनके शासनकाल में सेना का आधुनिकीकरण हुआ और आर्थिक ढाँचा मजबूत हुआ। वे आधुनिक युद्ध तकनीकों को अपनाने वाले पहले भारतीय शासकों में गिने जाते हैं। उनके पुत्र टीपू सुल्तान ने भी उनके मार्ग पर चलते हुए संघर्ष जारी रखा। 7 दिसंबर 1782 को उनका निधन हुआ, लेकिन भारतीय इतिहास में वे आज भी साहस और स्वाभिमान के प्रतीक बने हुए हैं।

7 दिसंबर: इतिहास का वह दिन जो मौन होकर भी बोलता है

7 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन व्यक्तित्वों की स्मृति है जिन्होंने सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और सैन्य क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी। इन महान आत्माओं के विचार, संघर्ष और योगदान आज भी हमारी चेतना में जीवित हैं।

जानिए आज आपका मूलांक क्या कहता है

🌞 मूलांक 1 (1, 10, 19, 28) – आत्मविश्वास और नेतृत्व का दिन

आज आपका कॉन्फिडेंस चरम पर रहेगा। रुके हुए काम फिर से गति पकड़ेंगे।

कार्य / व्यवसाय –
नौकरी करने वालों के लिए दिन अनुकूल है। प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। व्यापारियों को पुराने क्लाइंट से लाभ मिलेगा।

शिक्षा –
स्टूडेंट्स का फोकस अच्छा रहेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी सही दिशा में बढ़ेगी।

कला / संगीत –
नई रचना या संगीत प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं, सफलता मिलेगी।

राजनीति / प्रशासन –
नेतृत्व क्षमता उभरेगी। सरकारी अधिकारियों को मान-सम्मान मिलेगा।

आर्थिक स्थिति –
अचानक धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं। निवेश के लिए दिन शुभ है।

शुभ रंग – लाल
शुभ अंक – 1
पूजा करें – भगवान सूर्य की
मंत्र – “ॐ घृणि सूर्याय नमः”

🌙 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29) – भावनाओं पर नियंत्रण जरूरी

आज आप भावनात्मक रूप से संवेदनशील रहेंगे। फैसले सोच-समझकर लें।

कार्य / व्यवसाय –
पार्टनरशिप में काम करने वालों को फायदा होगा। ऑफिस में किसी सहकर्मी की मदद मिलेगी।

शिक्षा –
कला, साहित्य और मनोविज्ञान के छात्रों के लिए अच्छा दिन है।

कला / संगीत –
रचनात्मकता बढ़ेगी। नया गीत/कविता लिख सकते हैं।

राजनीति / प्रशासन –
बयान देने से पहले विचार करें, वरना विवाद हो सकता है।

आर्थिक स्थिति –
पैसा आएगा लेकिन खर्च भी बढ़ेगा। बजट पर ध्यान दें।

शुभ रंग – सफेद
शुभ अंक – 2
पूजा करें – देवी पार्वती की
मंत्र – “ॐ नमः शिवाय”

🔥 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30) – डिसिप्लिन और सफलता का योग

आज आप बेहद अनुशासित और योजनाबद्ध रहेंगे।

कार्य / व्यवसाय –
मैनेजमेंट, टीचिंग और बिजनेस में सफलता मिलेगी। बॉस आपसे प्रभावित रहेंगे।

शिक्षा –
विद्यार्थियों के लिए बेहतरीन दिन है। कठिन विषय भी आसान लगेंगे।

कला / संगीत –
धार्मिक गीत, मंत्र या भक्ति संगीत में रुचि बढ़ेगी।

राजनीति / प्रशासन –
उच्च अधिकारियों से संपर्क बनेगा, प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

आर्थिक स्थिति –
शेयर और योजनाओं से लाभ संभव है।

शुभ रंग – पीला
शुभ अंक – 3
पूजा करें – भगवान विष्णु की
मंत्र – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

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मूलांक 4 (4, 13, 22, 31) – बदलाव और सावधानी का दिन

आज अचानक परिवर्तन आपके मन को विचलित कर सकता है।

कार्य / व्यवसाय –
नई प्लानिंग करें लेकिन जल्दबाजी में निर्णय न लें।

शिक्षा –
एकाग्रता कम हो सकती है। मेडिटेशन लाभ देगा।

कला / संगीत –
थोड़ा मानसिक दबाव रहेगा, लेकिन रचनात्मकता बनी रहेगी।

राजनीति / प्रशासन –
विरोधी सक्रिय रहेंगे। धैर्य रखें।

आर्थिक स्थिति –
पैसे के लेन-देन में सावधानी बरतें।

शुभ रंग – नीला
शुभ अंक – 4
पूजा करें – भगवान गणेश की
मंत्र – “ॐ गं गणपतये नमः”

💨 मूलांक 5 (5, 14, 23) – संचार और यात्रा का योग

आज आपकी कम्युनिकेशन स्किल का कमाल दिखेगा।

कार्य / व्यवसाय –
मार्केटिंग, मीडिया, सेल्स वालों के लिए शानदार दिन है।

शिक्षा –
टेक्निकल और आईटी स्टूडेंट्स को खुशखबरी मिल सकती है।

कला / संगीत –
डांस, एंकरिंग, थिएटर में सफलता मिलेगी।

राजनीति / प्रशासन –
जनता से जुड़ाव बढ़ेगा, लोकप्रियता बढ़ेगी।

आर्थिक स्थिति –
छोटा निवेश बड़ा लाभ दे सकता है।

शुभ रंग – हरा
शुभ अंक – 5
पूजा करें – भगवान विष्णु की
मंत्र – “ॐ नमो नारायणाय”

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❤️ मूलांक 6 (6, 15, 24) – प्रेम और धन लाभ

आज आप सभी को आकर्षित करेंगे।

कार्य / व्यवसाय –
फैशन, ब्यूटी, कपड़ा, होटल और डिजाइनिंग में सफलता।

शिक्षा –
आर्ट स्टूडेंट्स के लिए उत्कृष्ट दिन।

कला / संगीत –
नई प्रेरणा और रोमांस से रचना होगी।

राजनीति / प्रशासन –
महिला नेताओं के लिए विशेष लाभ के योग।

आर्थिक स्थिति –
धन लाभ और सुख-सुविधाओं में वृद्धि।

शुभ रंग – गुलाबी
शुभ अंक – 6
पूजा करें – माता लक्ष्मी की
मंत्र – “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”

🌌 मूलांक 7 (7, 16, 25) – आत्मचिंतन और आध्यात्मिकता

आज आपका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर रहेगा।

कार्य / व्यवसाय –
रिसर्च, मेडिकल और आध्यात्मिक क्षेत्र में लाभ।

शिक्षा –
गंभीर विषयों में रुचि बढ़ेगी।

कला / संगीत –
शांत संगीत और सूफी गीतों से जुड़ाव रहेगा।

राजनीति / प्रशासन –
गोपनीय मामलों में सतर्क रहना होगा।

आर्थिक स्थिति –
लाभ धीमा लेकिन स्थिर रहेगा।

शुभ रंग – बैंगनी
शुभ अंक – 7
पूजा करें – भगवान शिव की
मंत्र – “ॐ नमः शिवाय”

🪨 मूलांक 8 (8, 17, 26) – मेहनत का फल मिलेगा

आज आपकी मेहनत सफलता में बदलने वाली है।

कार्य / व्यवसाय –
सरकारी काम, जमीन-जायदाद और उद्योग में लाभ।

शिक्षा –
संघर्ष का परिणाम मिलेगा।

कला / संगीत –
परिश्रम से बड़ा मंच मिल सकता है।

राजनीति / प्रशासन –
उच्च पद वालों का सहयोग मिलेगा।

आर्थिक स्थिति –
लोन, कोर्ट-कचहरी से जुड़ा मामला सुलझ सकता है।

शुभ रंग – काला
शुभ अंक – 8
पूजा करें – भगवान शनि की
मंत्र – “ॐ शं शनैश्चराय नमः”

🔴 मूलांक 9 (9, 18, 27) – ऊर्जा और साहस का विस्फोट

आज आप जोश और ताकत से भरपूर रहेंगे।

कार्य / व्यवसाय –
नया काम या स्टार्टअप शुरू करने का सही दिन है।

शिक्षा –
स्पोर्ट्स और डिफेंस की तैयारी करने वालों को लाभ मिलेगा।

कला / संगीत –
जोश से भरे गीतों व अभिनय में सफलता।

राजनीति / प्रशासन –
नेतृत्व में आगे बढ़ेंगे।

आर्थिक स्थिति –
रुक हुआ पैसा वापस मिल सकता है।

शुभ रंग – नारंगी
शुभ अंक – 9
पूजा करें – हनुमान जी की
मंत्र – “ॐ नमो भगवते हनुमते नमः”


7 दिसंबर का दिन कई मूलांकों के लिए उन्नति, प्रेम, धन और नए अवसरों से भरपूर रहेगा, जबकि कुछ के लिए यह सावधानी और आत्मचिंतन का संकेत दे रहा है। सही दिशा में किये गए प्रयास अवश्य शुभ फल देंगे।

वे जन्म, जिन्होंने इतिहास की धड़कन बदल दी

7 दिसंबर केवल साल का एक दिन नहीं है, बल्कि यह उन असाधारण व्यक्तित्वों की जन्मतिथि है, जिन्होंने अपने विचारों, साहस और सेवा से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। राजनीति, समाजशास्त्र, देशभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम जैसे विविध क्षेत्रों में योगदान देने वाले इन महान लोगों का जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

🌟 अर्जुन राम मेघवाल (जन्म: 7 दिसंबर 1954)

जन्म स्थान: बाईलास, जिला बीकानेर, राजस्थान
अर्जुन राम मेघवाल एक प्रमुख भारतीय राजनेता हैं, जो सामाजिक न्याय और जनकल्याण की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। साधारण परिवार में जन्मे मेघवाल ने आईएएस अधिकारी बनने के बाद राजनीति की ओर रुख किया। उन्होंने भारत सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व संभाला। अनुसूचित जाति उत्थान, ग्रामीण विकास, स्वच्छ भारत अभियान और प्रशासनिक सुधारों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे बीकानेर लोकसभा क्षेत्र से कई बार सांसद चुने गए और जनता के बीच एक सरल, कर्मठ और संघर्षशील नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।

🌍 मारियो सोरेस (जन्म: 7 दिसंबर 1924)

जन्म स्थान: लिस्बन, पुर्तगाल
मारियो सोरेस पुर्तगाल के लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने सत्तावादी शासन के खिलाफ संघर्ष किया और अपने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया। वे पहले प्रधानमंत्री और फिर राष्ट्रपति बने। सोरेस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकार और नागरिक अधिकारों के लिए निरंतर लड़ाई लड़ी। उन्हें आधुनिक पुर्तगाल का वास्तुकार भी माना जाता है। उनका जीवन संघर्ष, साहस और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का उदाहरण है।

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📚 राधाकमल मुखर्जी (जन्म: 7 दिसंबर 1889)

जन्म स्थान: गोपालगंज, बिहार
राधाकमल मुखर्जी आधुनिक भारत के महान समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री और सांस्कृतिक विचारक थे। उन्होंने भारतीय समाज की संरचना, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किए। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी उन्होंने शैक्षणिक विकास में योगदान दिया। उनके लेखन में भारतीय दर्शन, परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने न केवल शिक्षा बल्कि सामाजिक चिंतन की दिशा को भी नई ऊंचाई दी।

⚔️ गोविन्द सिंह राठौड़ (जन्म: 7 दिसंबर 1887)

जन्म स्थान: राजस्थान का एक राजपूताना क्षेत्र
गोविन्द सिंह राठौड़ भारत के वीर सैनिकों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने साहस और निष्ठा से देश की रक्षा में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। औपनिवेशिक काल में भी उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। उनका नाम भारतीय वीरता और आत्मबलिदान की परंपरा का प्रतीक है।

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🕊️ जतीन्द्रनाथ मुखर्जी (जन्म: 7 दिसंबर 1879)

जन्म स्थान: हावड़ा, पश्चिम बंगाल
जतीन्द्रनाथ मुखर्जी, जिन्हें ‘बाघा जतीन’ के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी नायक थे। वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र आंदोलन के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने युवाओं को संगठित कर देश के लिए बलिदान देने का साहस पैदा किया। अंग्रेज अधिकारियों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की, लेकिन उनका बलिदान स्वतंत्रता आंदोलन की चिनगारी को और अधिक प्रज्ज्वलित कर गया। उनका जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति की अमर गाथा है।

उत्तर भारत में बढ़ी ठंड: कई राज्यों में शीतलहर का कहर, IMD ने जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली/लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर भारत में दिसंबर की शुरुआत से ही ठंड अपना तेज असर दिखाने लगी है। पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी के चलते मैदानों में शीतलहर की स्थिति बन गई है। IMD (भारतीय मौसम विभाग) ने दिल्ली, एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के लिए अगले दो दिनों तक ठंड बढ़ने और कोहरा छाने का अलर्ट जारी किया है।

दिल्ली-NCR में ठंड के साथ जहरीली हवा

दिल्ली-NCR में तापमान तेजी से गिर रहा है, वहीं वायु गुणवत्ता भी लगातार बिगड़ती जा रही है। शनिवार को दिल्ली का एक्यूआई 335 दर्ज किया गया, जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है।
पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन और बढ़ा दी है, जिससे सुबह-शाम तापमान गिरते ही भीषण ठंड महसूस की जा रही है।

यूपी में बढ़ा पाला, कानपुर सबसे ठंडा

उत्तर प्रदेश में कई जिलों में पारा 6 डिग्री से नीचे दर्ज हुआ।

कानपुर 5°C, इटावा 5.6°C IMD ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में तापमान और नीचे जा सकता है। स्कूलों, परिवहन और सुबह के समय आवागमन पर ठंड और कोहरे का असर दिखाई देगा।

हिमाचल: ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, कांगड़ा, चंबा और कुल्लू के ऊंचाई वाले इलाकों में 8–9 दिसंबर को बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी में -5.6°C और ताबो में -4.4°C पारा दर्ज किया गया।
मंडी और बिलासपुर में सुबह के समय घने कोहरे के लिए येलो अलर्ट जारी है।

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तीन दिन तक बर्फबारी

जम्मू-कश्मीर में शोपियां न्यूनतम तापमान -6.4°C के साथ सबसे ठंडा रहा।
पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले तीन दिनों तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बर्फबारी व बारिश की संभावना है। कई क्षेत्रों में पानी जमने से पाला बढ़ गया है।

उत्तराखंड में 7 दिसंबर से मौसम बदलेगा

उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे पहाड़ी जिलों में 7 दिसंबर से बर्फबारी के आसार हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव बढ़ने से ठंड और तेज होने की संभावना है।

राजस्थान में 18 शहरों में पारा 10°C से नीचे

राजस्थान में 18 शहरों का तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज हुआ।

फतेहपुर (सीकर): 2.3°C, सीकर: 3°C, नागौर: 3.3°C, चूरू: 4.5°C, अलवर: 5°C

राज्य के कई हिस्सों में सुबह के समय तेज ठंड और कोहरा बना रहेगा।

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प्राचीन संस्कार बनाम आधुनिक विचार—समय के दो हिस्सों में पिसता समाज

✍️ डॉ. सतीश पाण्डेय
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज का समाज तेज परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा है, जहाँ पारंपरिक भारतीय संस्कार और आधुनिक जीवनशैली के बीच संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। एक ओर सदियों पुरानी मान्यताएँ और जीवन-मूल्य हैं, तो दूसरी ओर आधुनिकता, स्वतंत्रता और तेज रफ्तार वाला जीवन। इन दो धाराओं के बीच आम परिवार, युवा और बुजुर्ग स्वयं को उलझा हुआ महसूस कर रहे हैं।

परंपराओं की पकड़ ढीली, आधुनिकता का बढ़ता विस्तार

घर-परिवार से लेकर सामाजिक संरचना तक बदलाव की लहर स्पष्ट दिख रही है। पहले जहाँ बुजुर्गों का मार्गदर्शन जीवन का आधार माना जाता था, आज निर्णय लेने में युवा पीढ़ी की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जा रही है।
संयुक्त परिवार की परंपरा लगभग टूट चुकी है और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता, करियर और निजी आजादी सर्वोपरि बन गई है। वहीं बुजुर्ग सामाजिक मर्यादा और संस्कारों की रक्षा को अधिक महत्व देते हैं। यह विचार-भिन्नता परिवारों में तनाव का कारण बन रही है।

रिश्तों में घटती गर्माहट और संवाद की कमी

आधुनिक जीवनशैली की चकाचौंध में संवाद, मान-सम्मान और सहअस्तित्व जैसे मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं। तकनीक ने जीवन को आसान तो बनाया है, लेकिन रिश्तों में दूरियाँ बढ़ा दी हैं।
मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने बातचीत, मेल-मुलाकात और परिवार के साथ समय बिताने की परंपरा को कमजोर कर दिया है।

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सांस्कृतिक टकराव से बढ़ रही नैतिक चुनौतियाँ

समाज में मूल्य-भ्रम, नैतिक कमजोरी और जिम्मेदारियों से दूरी जैसी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। परंपरा जहाँ अनुशासन और मर्यादा सिखाती है, वहीं आधुनिकता स्वतंत्रता और सोच की उड़ान देती है।
इन दोनों के बीच संतुलन न बन पाने से सामाजिक आचरण और व्यक्तिगत व्यवहार में गिरावट देखी जा रही है।

संतुलन ही है समाधान — विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि परंपरा और आधुनिकता दोनों आवश्यक हैं। समस्या टकराव की नहीं, बल्कि संतुलन की कमी है।
यदि युवा प्राचीन मूल्यों की जड़ें समझें और बुजुर्ग आधुनिक सोच को स्वीकार करें, तो समाज में सामंजस्य और स्थिरता दोनों संभव हैं।
संस्कार, विज्ञान और आधुनिक विचार—संतुलित रूप से अपनाए जाएँ तो यही आगे का मार्ग है।

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