Sunday, June 28, 2026
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स्मार्ट रिवीजन रणनीति: परीक्षा में टॉप करने के लिए अपनाएँ ये वैज्ञानिक तरीके

राष्ट्र की परम्परा के लिए मिथलेश मिश्रा

परीक्षा का समय आते ही अधिकतर छात्र केवल किताबें खोलकर बार-बार पढ़ने लगते हैं। लेकिन आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में सफल वही होता है जो स्मार्ट रिवीजन तकनीक अपनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पढ़ना नहीं, बल्कि याद करना, अभ्यास करना और स्वयं को बार-बार जांचना ही असली तैयारी है।

यही कारण है कि अब छात्र नई और प्रभावी रणनीतियों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें एक्टिव रिकॉल, पोमोडोरो तकनीक, और माइंड मैपिंग जैसी आधुनिक पढ़ाई की विधियाँ शामिल हैं।

स्मार्ट रिवीजन क्या है?

स्मार्ट रिवीजन रणनीति का मतलब है कि छात्र अपना समय और ऊर्जा सही दिशा में लगाए। इसमें सिर्फ किताबों को दोहराना नहीं, बल्कि अपने दिमाग को सक्रिय रूप से शामिल करना ज़रूरी होता है। जब आप बिना देखे एक प्रश्न का उत्तर याद करने की कोशिश करते हैं तो मस्तिष्क मजबूत कनेक्शन बनाता है, जिससे याददाश्त बेहतर होती है।

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टॉपर्स अपनाते हैं ये तरीके

  1. एक्टिव रिकॉल तकनीक
    नोट्स पढ़ने की बजाय खुद से सवाल पूछें। जैसे– “इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु क्या है?” और बिना देखे उत्तर दें।
  2. फ्लैशकार्ड और की-वर्ड ट्रिक
    तारीखें, फार्मूले और परिभाषाएँ याद करने के लिए छोटे-छोटे कार्ड बनाएं। यह तरीका बहुत असरदार होता है।
  3. माइंड मैप्स का प्रयोग
    रंगों और चित्रों से बने माइंड मैप्स दिमाग को तेजी से जानकारी याद रखने में मदद करते हैं।
  4. पोमोडोरो तकनीक
    25 मिनट की फोकस्ड पढ़ाई और फिर 5 मिनट का ब्रेक। इससे पढ़ाई बोझ नहीं लगती और दिमाग थकता नहीं।
  5. पिछले सालों के प्रश्नपत्र
    न केवल प्रश्नों का पैटर्न समझ आता है बल्कि अपनी गलतियाँ भी पकड़ में आती हैं।
  6. टीचिंग मेथड
    किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को मुश्किल टॉपिक समझाएं। यह आपकी अपनी समझ भी मजबूत करता है।
  7. वॉइस नोट्स का उपयोग
    कठिन विषयों को मोबाइल में रिकॉर्ड करके बार-बार सुनें, खासकर यात्रा के दौरान।

पढ़ाई के साथ हेल्थ भी ज़रूरी

स्मार्ट रिवीजन रणनीति अपनाते समय शरीर का ध्यान रखना भी जरूरी है। लगातार पानी पीते रहना, हल्का भोजन करना और पर्याप्त नींद लेना याददाश्त को तेज करता है। लंबे समय तक स्क्रीन से जुड़े रहने से बचें और किताबों के साथ पढ़ाई को प्राथमिकता दें।

सोशल मीडिया और मोबाइल नोटिफिकेशन आज के समय का सबसे बड़ा व्यवधान है। पढ़ाई के दौरान फोन को साइलेंट रखकर दूर रखना फायदेमंद साबित हो सकता है।

मानसिक मजबूती भी है सफलता की चाबी

परीक्षा के समय तनाव आम बात है लेकिन सकारात्मक सोच से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। रोज़ाना 5-10 मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) करने से एकाग्रता काफी बढ़ती है। खुद पर भरोसा रखना, और नियमित अभ्यास करते रहना ही असली जीत का मंत्र है।

विशेषज्ञों के अनुसार अगर छात्र 21 दिन तक लगातार इन तकनीकों का पालन करता है, तो उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है और परिणाम भी बेहतर आते हैं।

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आज किस मूलांक का दिन चमकेगा? जानें सम्पूर्ण भविष्यफल**

अंक ज्योतिष बताता है कि हर व्यक्ति का स्वभाव, भाग्य और उसके दिन का फल उसकी जन्मतिथि (डेट ऑफ बर्थ) से बने मूलांक पर निर्भर करता है।
आज 9 दिसंबर 2025, मंगलवार को ग्रह-अंकों का विशेष योग बन रहा है, जो कई मूलांकों के लिए सौभाग्य और तरक्की का दरवाज़ा खोल रहा है।

मूलांक 1 (1, 10, 19, 28 जन्म वाले)

आज का दिन:
आज आप की सलाह और नेतृत्व को विशेष महत्व मिलेगा। किसी सौदे से लाभ या काम में प्रगति के संकेत।

काम/व्यवसाय:
ऑफिस में किसी वरिष्ठ का सहयोग मिलेगा। नए प्रोजेक्ट आपकी पकड़ में आएंगे।
शिक्षा:
प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए लाभदायक दिन।
कला–संगीत:
नई क्रिएटिविटी उभरकर सामने आएगी।
राजनीति:
आपकी बात प्रभावी होगी। कोई महत्वपूर्ण संपर्क जुड़ सकता है।
प्रशासन:
निर्णय क्षमता मजबूत रहेगी।
आर्थिक स्थिति:
सेविंग्स मोड ऑन रखें—भविष्य में बड़ा लाभ मिल सकता है।

शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
शुभ देवता/पूजा: सूर्य देव को अर्घ्य दें

मूलांक 2 (2, 11, 20, 29 जन्म वाले)

आज का दिन:
परिवार से जुड़ी जिम्मेदारी पूरी होगी। विदेश यात्रा का योग बन रहा है।

काम/व्यवसाय:
टीमवर्क अच्छा रहेगा। किसी बड़े प्रोजेक्ट पर चर्चा हो सकती है।
शिक्षा:
स्टडी प्लान में बदलाव फायदेमंद रहेगा।
कला–संगीत:
भावनात्मक अभिव्यक्ति शानदार रहेगी।
राजनीति:
परिवार और जनता के बीच आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी।
प्रशासन:
मामलों को संवेदनशील तरीके से हैंडल करें।
आर्थिक स्थिति:
नया घर/संपत्ति लेने का योग। अनहेल्दी खाने से बचें।

शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
शुभ देवता/पूजा: शिव–पार्वती की उपासना

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मूलांक 3 (3, 12, 21, 30 जन्म वाले)

आज का दिन:
कोई निवेश शानदार रिटर्न दे सकता है। किसी सौदे से अच्छा लाभ।

काम/व्यवसाय:
फाइनेंस या एडमिन क्षेत्र वाले लोगों को बड़ा फायदा।
शिक्षा:
स्टूडेंट्स के लिए कंसंट्रेशन हाई रहेगा।
कला–संगीत:
प्रोजेक्ट या परफॉर्मेंस के लिए बेस्ट टाइम।
राजनीति:
आपकी रणनीति प्रभावी साबित होगी।
प्रशासन:
महत्वपूर्ण फाइलें आसानी से पास होंगी।
आर्थिक स्थिति:
पुरानी संपत्ति से बेहतरीन लाभ।

शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
शुभ देवता/पूजा: विष्णु भगवान

मूलांक 4 (4, 13, 22, 31 जन्म वाले)

आज का दिन:
प्रोफेशनल सलाह से नया अवसर मिलेगा। यात्रा में किसी पुराने मित्र से भेंट संभव।

काम/व्यवसाय:
नया प्लानिंग फायदेमंद। सलाहकारों का पूरा साथ।
शिक्षा:
स्मार्ट स्टडी का फायदा।
कला–संगीत:
नया कोलैबोरेशन मिल सकता है।
राजनीति:
पुराने संपर्क फिर सक्रिय होंगे।
प्रशासन:
कानूनी मामलों में राहत।
आर्थिक स्थिति:
जरूरतमंद की मदद करने से भाग्य मजबूत होगा।

शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
शुभ देवता/पूजा: हनुमान जी

⭐ मूलांक 5 (5, 14, 23 जन्म वाले)

आज का दिन:
आपकी सलाह और बुद्धिमानी आपके लिए दरवाज़े खोलेगी।

काम/व्यवसाय:
प्रतिस्पर्धा में बाज़ी आपके हाथ में रहेगी।
शिक्षा:
रिकॉल क्षमता बढ़ेगी।
कला–संगीत:
नए आइडिया को सराहना मिलेगी।
राजनीति:
संदेश और भाषण प्रभाव डालेंगे।
प्रशासन:
आपकी रणनीति से बाधाएं दूर होंगी।
आर्थिक स्थिति:
घर में शुभ समाचार आर्थिक लाभ लाएगा।

शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
शुभ देवता/पूजा: गणेश जी

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⭐ मूलांक 6 (6, 15, 24 जन्म वाले)

आज का दिन:
ऑफिस में चुनौतियां होंगी लेकिन आप सफल होंगे। विदेश यात्रा के संकेत।

काम/व्यवसाय:
टीम पर पकड़ मजबूत रखें।
शिक्षा:
अंतरराष्ट्रीय अध्ययन या कोर्स में सफलता।
कला–संगीत:
ग्लैमर जगत में मौके बढ़ेंगे।
राजनीति:
पारिवारिक समर्थन से नई शक्ति मिलेगी।
प्रशासन:
नई जिम्मेदारी सम्भालनी पड़ सकती है।
आर्थिक स्थिति:
खर्च बढ़ेंगे, पर लाभ भी मिलेगा।

शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
शुभ देवता/पूजा: देवी लक्ष्मी

⭐ मूलांक 7 (7, 16, 25 जन्म वाले)

आज का दिन:
शादी के योग प्रबल। परिवार के साथ समय बीतेगा।

काम/व्यवसाय:
सहकर्मियों से सहयोग।
शिक्षा:
आध्यात्मिक या रिसर्च फील्ड में प्रगति।
कला–संगीत:
आपका काम आज खूब सराहा जाएगा।
राजनीति:
नए समर्थक जुड़ेंगे।
प्रशासन:
विदेश यात्रा संबंधित फाइलें आगे बढ़ेंगी।
आर्थिक स्थिति:
फालतू खर्च से बचें।

शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
शुभ देवता/पूजा: भगवान कृष्ण

⭐ मूलांक 8 (8, 17, 26 जन्म वाले)

आज का दिन:
मेहनत आपको सफलता दिलाएगी। प्रमोशन या वेतन बढ़ोतरी के संकेत।

काम/व्यवसाय:
नई संपत्ति को लेकर बड़ा निर्णय।
शिक्षा:
धीमी गति के बावजूद सफलता।
कला–संगीत:
प्रशंसक बढ़ेंगे।
राजनीति:
महत्वपूर्ण पोस्ट या मीटिंग फायदेमंद।
प्रशासन:
सख्त रुख आपको सफलता देगा।
आर्थिक स्थिति:
नई प्रॉपर्टी अच्छा लाभ देगी।

शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
शुभ देवता/पूजा: शनि देव

⭐ मूलांक 9 (9, 18, 27 जन्म वाले)

आज का दिन:
काम में सफलता और आपकी मेहनत की चर्चा चारों ओर होगी।

काम/व्यवसाय:
नया काम शुरू करने के लिए शुभ।
शिक्षा:
स्पोर्ट्स और कॉम्पिटिशन में सफलता।
कला–संगीत:
एनर्जी भरपूर—कलात्मक कार्य चमकेंगे।
राजनीति:
आपकी छवि मजबूत होगी।
प्रशासन:
कठिन फाइलें भी आसानी से पास होंगी।
आर्थिक स्थिति:
धन लाभ, सामाजिक सम्मान।

शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
शुभ देवता/पूजा: मां दुर्गा

👉 नोट – यह अंक ज्योतिष सामान्य गणना पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इसकी प्रमाणिकता का दावा नहीं करता। अपनी पूरी जन्मकुंडली किसी योग्य विशेषज्ञ को अवश्य दिखाएँ।

पोस्टमार्टम चौराहा के पास कार्यक्रम के दौरान मोटरसाइकिल चोरी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

देवरिया में कार्यक्रम के बीच मोटरसाइकिल चोरी, चोरों के बढ़ते हौसले से लोग चिंतित

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के बसीयवा (बास देवरिया) में स्थित पोस्टमार्टम चौराहा उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान अज्ञात चोर HF डीलक्स मोटरसाइकिल (नंबर UP 52 AL 7327) को लेकर फरार हो गए। भीड़-भाड़ वाले माहौल के बीच हुई इस वारदात ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी दौरान अवसर देखते ही चोरों ने बिना किसी डर के मोटरसाइकिल स्टार्ट की और कुछ ही सेकंड में मौके से निकल गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में जिले में चोरी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है और अपराधी अब खुलेआम भीड़ के बीच भी वारदात को अंजाम देने से नहीं हिचक रहे।

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घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने डायल 112 और सदर कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास के इलाकों की घेराबंदी की और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस टीम मोटरसाइकिल चोरी करने वाले आरोपियों की तलाश में जुट गई है और जल्द खुलासे का दावा कर रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भी पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था का उचित प्रबंधन हो, तो ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। चोरी की यह घटना क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल पैदा कर रही है।

रामायण का अमर क्षण: हनुमान का समर्पण और रामभक्ति की शुरुआत

“पम्पापुर में जन्मी भक्ति की अमर दीक्षा”

पम्पापुर… वह धरा जहाँ समय थम-सा जाता है। जहाँ पर्वतों की शृंखलाएँ आज भी उस दिव्य क्षण की साक्षी हैं, जब पहली बार एक युगपुरुष ने एक भक्त के भीतर छिपे दिव्य पुरुषार्थ को पहचाना था। यह वही पावन स्थल है, जहाँ वानरराज केसरी और अंजना के तेजस्वी पुत्र हनुमान, अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार प्राप्त करने वाले थे—रामनाम की दीक्षा, और उससे भी आगे, जीवन को प्रभु चरणों में समर्पित करने का संकल्प।

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🔱 1. पम्पापुर: जहाँ पहली भेंट में ही पूर्ण समर्पण झलक उठा

जब श्रीराम और लक्ष्मण सुग्रीव की खोज में पम्पापुर पहुँचे, तो वानरसेनापति हनुमान ने उन्हें पर्वत की ओर आते देखा। कहते हैं, शास्त्र बताते हैं कि महान आत्माएँ महान आत्माओं को तुरंत पहचान लेती हैं, और यही हुआ।

हनुमान ने ब्राह्मण-वेष धारण कर दोनों भाइयों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया। जैसे ही श्रीराम ने पहली बार हनुमान का वदन देखा, वे लक्ष्मण से बोले—

“लक्ष्मण, यह कोई साधारण वानर नहीं। इस वानर के मुख से निकलने वाले शब्द शास्त्रों की गरिमा और भक्तिभाव की पवित्रता लिए हुए हैं।”

उधर हनुमान के भीतर भी ऐसा ही भाव जागा। मानो जन्मों की दूरी मिट गई हो। मानो आत्मा अपने आराध्य को पहचान चुकी हो।

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🔱 2. हनुमान का पहला प्रण — “प्रभु, अब मैं आपका हूँ”

जब हनुमान ने पूछना आरम्भ किया—
“आप कौन हैं? किस उद्देश्य से इस वन में आए हैं?”

तो श्रीराम का उत्तर आते ही हनुमान की चेतना जैसे स्थिर हो गई।
उनका मन बोला—
“यही तो वह स्वर है, जिसे मेरे रोम-रोम ने युगों से खोजा था।”

तभी वह क्षण आया, जो भक्तिभाव का सर्वोच्च शिखर माना गया है।
हनुमान ने विनम्र व भावविह्वल स्वर में कहा—
“प्रभु, अब मैं आपका हूँ।”
इन पाँच शब्दों ने भविष्य का मार्ग निर्धारित कर दिया।
इन्हीं शब्दों से
एक अटूट संबंध जन्मा,
एक युग का नायक जगाया गया,
और एक धर्मयुद्ध का आधार स्थापित हुआ।
यह केवल संवाद नहीं था—
यह भक्त और भगवान का सम्पूर्ण मिलन था।
🔱 3. श्रीराम द्वारा हनुमान को दी गई शास्त्रोक्त दीक्षा
रामचरितमानस और आर्ष-ग्रंथों के अनुसार, उस भेंट के बाद श्रीराम ने हनुमान को तीन शास्त्रोक्त उपदेश दिए—

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1️⃣ “भक्ति का आधार विनय है”
राम ने कहा —
“जहाँ अहंकार है, वहाँ मैं नहीं। जहाँ विनय है, वहाँ रामस्वरूप सहज प्रकट होता है।”
हनुमान ने इसे जीवनभर आत्मसात किया।

2️⃣ “बल केवल शरीर का नहीं, संकल्प का भी होता है”
राम ने हनुमान को कर्म की श्रेष्ठता का बोध कराया“संकल्प शुद्ध हो तो सब बाधाएँ झुकती हैं।”इस उपदेश से हनुमान आगे चलकर वह पराक्रम दिखाते हैं, जिसकी तुलना संसार में नहीं।

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3️⃣ “सेवा ही सच्चा साधन है”
राम ने कहा—
“तप, योग, ज्ञान—सबसे बड़ा उपाय सेवा है।”
हनुमान ने इसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।

🔱 4. भक्ति का वह प्रारंभ जिसने युद्ध की दिशा बदल दी
जब हनुमान ने अपनी पहचान बताई और सुग्रीव से मिलने का प्रस्ताव रखा, तो श्रीराम मुस्कराए। उन्हें ज्ञात था कि आगे चलकर यही हनुमान…
माता सीता का प्रथम संदेश पहुँचाएँगे,
लंका दहन कर रावण को वास्तविक भय दिखाएँगे,युद्धभूमि में घोर परिस्थितियों में लक्ष्मण को जीवनदान देंगे,और रामराज्य की स्थापना में सबसे अग्रणी भूमिका निभाएँगे।
किन्तु उस समय हनुमान को यह सब ज्ञात न था।
उनके लिए एक ही सत्य था—
राम भक्ति,
और एक ही ध्येय था—
प्रभु की सेवा।
शास्त्र कहते हैं—
“जिस क्षण हनुमान ने राम को पहचाना, उसी क्षण रावण का अंत निश्चित हो गया।”
क्योंकि जहाँ रामभक्ति का संकल्प हो जाता है, वहाँ अधर्म टिक नहीं सकता।

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🔱 5. पम्पापुर का मूक साक्ष्य—भक्ति के जागरण का स्थल
पम्पापुर का पर्वत आज भी उन पावन पलों का साक्षी है।
वहाँ की वायु मानो आज भी कहती है—
“यही वह स्थान है जहाँ राम–हनुमान का पहला मिलन हुआ।
यही वह स्थल है जहाँ भक्त ने अपने आराध्य को हृदय सौंप दिया।”
कहा जाता है, उसी क्षण से हनुमान का प्रत्येक श्वास राममय हो गया—
उनका पौरुष राम को समर्पित,
उनका सामर्थ्य राम के लिए समर्पित,
उनका जीवन केवल राम-कार्य के लिए समर्पित।

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🔱 6. भक्ति और समानता का यह आदर्श आज भी समाज को शिक्षा देता है
हनुमान जी का यह प्रसंग हमें सिखाता है—
भक्ति जाति नहीं देखती,
भगवान केवल हृदय की पवित्रता देखते हैं,
सच्चा भक्त वह है जो सेवा में आनंद पाता है,
और संपूर्ण समर्पण ही सफलता का मूल है।
आज समाज में जब विभाजन दिखते हैं, हनुमानजी की भक्ति हमें याद दिलाती है कि—
प्रेम, विनय और सेवा—ये तीन सद्गुण हर असमानता को मिटा देते हैं।

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🔱 7. इसी क्षण से आरंभ होती है रामायण की “वीरगाथा”
पम्पापुर का यह मिलन केवल परिचय नहीं था—
यह वह दीप था जिसने धर्मयुद्ध की ज्योति प्रज्वलित कर दी।
श्रीराम ने हनुमान को देखकर कहा—
“भक्त ऐसा हो, तो अवतार सफल होता है।”
और हनुमान ने राम को देखकर कहा—
“भगवान ऐसे हों, तो भक्त धन्य हो जाता है।”
इन्हीं दो भावों के संगम से रामायण की सबसे अद्भुत जोड़ी जन्मी—
राम और हनुमान।

संदिग्ध परिस्थितियों मे युवती की मौतसे परिजन बेहाल

बरहज /देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवती की मौत से परिजन बेहाल हो गए।
हालत बिगड़ने पर परिजन उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया,जहां पर डाक्टरों ने प्राथमिक जाँच कर उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों द्वारा बुखार से मौत होने की बात कही जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के पैना गांव निवासिनी दिव्या पाण्डेय पुत्री रमाशंकर पाण्डेय काफी दिनों से बीमार चल रही थी। हालत गंभीर होने पर युवती को सोमवार को इलाज के लिए परिजनों द्वारा सीएचसी बरहज लाया गया, जहां पर डाक्टरों ने जांच कर मृत घोषित कर दिया। ततपश्चात् परिजन शव को लेकर अंतिम संस्कार के लिए गांव चले गए। वही युवती की मौत को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, किन्तु पिता रमाशंकर पाण्डेय का कहना है कि बेटी काफ़ी दिनों से बुखार से पीड़ित थी कि अचानक चक्कर खाकर गिर गई, उसे आनन फानन मे स्वास्थ्य केंद्र बरहज लाया गया जहाँ डाक्टरों ने जाँच कर उसे मृत घोषित कर दिया।

परंपरा की थकती साँसें और आधुनिकता की तेज चाल—समाज बीच में उलझा

डॉ. सतीश पाण्डेय

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। समय की गति कभी इतनी तीव्र नहीं रही जितनी आज है। आधुनिकता की तेज चाल ने जीवन को सुविधाजनक, तेज और तकनीक-आधारित बना दिया है, लेकिन इसी रफ्तार में परंपरा की साँसें थकती हुई दिखाई देने लगी हैं। इन दोनों के बीच आज का समाज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां दिशा स्पष्ट नहीं और रास्ता उलझनों से भरा है।
परंपरा किसी समाज का बोझ नहीं, बल्कि उसकी जड़ होती है। यही जड़ संस्कार, नैतिकता और सहअस्तित्व का आधार बनाती है। लेकिन बदलते दौर में परंपराओं को अक्सर पिछड़ेपन की संज्ञा दी जाने लगी है। नई पीढ़ी स्वतंत्र सोच और आधुनिक जीवन-शैली को प्राथमिकता दे रही है, वहीं पुरानी पीढ़ी को आशंका है कि इस तेज बदलाव में संस्कृति और मूल्य कहीं खो न जाएं।
आधुनिकता ने प्रगति के नए द्वार खोले हैं, पर उसकी तेज चाल ने समाज को ठहर कर सोचने का समय नहीं दिया। तकनीक ने संवाद को आसान बनाया, लेकिन रिश्तों की गर्माहट कम कर दी। परिवारों में बातचीत की जगह स्क्रीन ने ले ली है। परिणामस्वरूप पीढ़ियों के बीच दूरी बढ़ रही है और आपसी समझ कमजोर होती जा रही है। यह टकराव केवल परिवार तक सीमित नहीं है। शिक्षा, सामाजिक व्यवहार, विवाह व्यवस्था और जीवन-दृष्टि—हर क्षेत्र में यह द्वंद्व साफ नजर आता है। जब परंपरा बदलने से इंकार करती है और आधुनिकता सीमाएं मानने से, तब समाज बीच में उलझ जाता है। न पुराना ढंग पूरी तरह छूट पाता है, न नया ढंग पूरी तरह अपनाया जा सकता है।
सबसे चिंता की बात यह है कि इस उलझन का असर नैतिक मूल्यों पर पड़ रहा है। संयम, धैर्य और जिम्मेदारी जैसे मूल्य कमजोर हो रहे हैं। समाज की दिशा यदि केवल रफ्तार से तय होगी, तो वह संवेदना खो देगी, और यदि केवल परंपरा से बंधी रहेगी, तो वह विकास से वंचित रह जाएगी।
समाधान टकराव में नहीं, संतुलन में है। परंपरा को समय के अनुरूप साँस लेने दी जाए और आधुनिकता को विवेक की लगाम पहनाई जाए। जब दोनों साथ चलेंगे, तभी समाज इस उलझन से बाहर निकलेगा और प्रगति के साथ अपनी पहचान भी बचा पाएगा।

इंसानियत की पहचान क्या है? प्राचीन मर्यादा या आधुनिक आजादी

कैलाश सिंह

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। इंसानियत केवल शब्द नहीं, बल्कि आचरण, संवेदना और जिम्मेदारी का जीवंत रूप है। लेकिन आज के बदलते दौर में यह प्रश्न और भी प्रासंगिक हो गया है कि इंसानियत की असली पहचान आखिर कहां निहित है—प्राचीन मर्यादा में या आधुनिक आजादी में? समाज इसी द्वंद्व से गुजर रहा है, जहां दोनों धाराएं अपनी-अपनी सच्चाई के साथ आमने-सामने खड़ी हैं।
प्राचीन मर्यादा ने समाज को अनुशासन, संयम और कर्तव्य का बोध कराया। रिश्तों में आदर, सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक हित को प्राथमिकता इसी मर्यादा की देन है। बुजुर्गों का सम्मान, कमजोर की रक्षा और सीमाओं के भीतर रहकर स्वतंत्रता का उपयोग—यही मर्यादा इंसानियत का आधार रही है। यह मर्यादा इंसान को केवल अधिकार नहीं, कर्तव्य भी सिखाती है।वहीं आधुनिक आजादी ने व्यक्ति को अपनी पहचान चुनने, सवाल करने और आगे बढ़ने का साहस दिया। समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों की चेतना आधुनिक सोच की सकारात्मक देन है। लेकिन जब यहआजादी जिम्मेदारी से कट जाती है, तब वह स्वार्थ, असंवेदनशीलता और अराजकता का रूप लेने लगती है।
समस्या मर्यादा या आजादी में नहीं, उनके अतिवाद में है। केवल मर्यादा समाज को जड़ बना सकती है और केवल आजादी उसे दिशाहीन। आज हम ऐसे उदाहरण देख रहे हैं जहां अधिकारों की बात तो खूब होती है, लेकिन कर्तव्यों की चर्चा कम होती जा रही है। रिश्तों की मर्यादा टूट रही है और संवेदना शब्दों तक सीमित रह गई है।
तकनीक और आधुनिक जीवन-शैली ने इस द्वंद्व को और गहरा किया है। संवाद का अभाव, बढ़ती व्यस्तता और आभासी रिश्तों ने इंसानियत को औपचारिक बना दिया है। आज इंसान जुड़ा तो है, लेकिन समझने वाला कम होता जा रहा है। इंसानियत की पहचान किसी एक ध्रुव में नहीं, बल्कि संतुलन में छिपी है। आधुनिक आजादी को मानवीय मर्यादा का सहारा और प्राचीन मर्यादा को आधुनिक विवेक की रोशनी मिले—तभी समाज मानवीय बनेगा। वरना सवाल यही रहेगा कि हम आधुनिक तो हो गए, लेकिन इंसान कितने रह गए?

‘रीडिंग शॉर्ट स्टोरीज़’ पुस्तक का कुलपति ने किया लोकार्पण

स्नातक अंग्रेज़ी प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम सेमेस्टर के लिए तैयार की गई पुस्तक ‘रीडिंग शॉर्ट स्टोरीज़ : एन ईज़ी कम्पैनियन एंड क्रिटिकल स्टडी ऑफ सेलेक्टेड स्टोरीज़’ का लोकार्पण कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने किया। यह पुस्तक अंग्रेज़ी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. अजय कुमार शुक्ल तथा रिसर्च स्कॉलर विष्णु मिश्रा द्वारा संयुक्त रूप से लिखी गई है। इसका प्रकाशन डिस्काउंट ग्रुप ऑफ पब्लिकेशन, गोरखपुर द्वारा किया गया है।
यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत तैयार किए गए पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए लिखी गई है, ताकि विद्यार्थियों को विषय-वस्तु सरल, स्पष्ट और समझने योग्य रूप में मिल सके। इसमें भारत सहित विभिन्न देशों की चुनी हुई लघुकथाओं को सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक कहानी के साथ मुख्य बिंदु, सार, प्रश्न-उत्तर, परीक्षा उपयोगी नोट्स, किरदारों के चार्ट, स्टोरी मैपिंग और स्मरण सहायता हेतु विशेष संकेत (ऐक्रोनीम्स) भी दिए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ने और समझने में अधिक सुविधा मिले।
लोकार्पण के दौरान कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को समृद्ध और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है। यह पुस्तक पाठ्य-वस्तु को रटने योग्य न बनाकर समझने योग्य बनाती है, जिससे विद्यार्थियों की सोचने की क्षमता विकसित होगी और परीक्षा में भी उन्हें लाभ मिलेगा। उन्होंने इसे शैक्षिक गुणवत्ता में महत्वपूर्ण वृद्धि की दिशा में सार्थक कदम बताया।
पुस्तक के लेखक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि उनकी कोशिश रही है कि विद्यार्थी कहानी को केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि उसे महसूस करें और समझें। इसी उद्देश्य से प्रत्येक कहानी के साथ विश्लेषण, चार्ट, तालिकाएँ और सरल भाषा में विवरण जोड़े गए हैं, ताकि विद्यार्थी बिना दबाव के पढ़ सकें और आत्मविश्वास के साथ लिख सकें। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय और विभाग के लिए एक सार्थक शैक्षिक योगदान बताया।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता मुर्मू सहित अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की और कहा कि यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी और स्टूडेंट-फ्रेंडली है।

जब एक दिन बना विश्व इतिहास का निर्णायक मोड़

“9 दिसंबर — जब इतिहास ने करवट बदली, शौर्य, त्रासदी और राष्ट्रों की तक़दीर का दिन”

9 दिसंबर का दिन इतिहास के पन्नों में केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता, राजनीतिक परिवर्तन, युद्ध, विज्ञान, साहस और करुणा की अनेक प्रेरक व हृदय विदारक कहानियों का साक्षी रहा है। अलग-अलग युगों और देशों से जुड़ी घटनाएँ बताती हैं कि यह दिन बार-बार दुनिया की दिशा बदलने वाला साबित हुआ है। आइए, 9 दिसंबर की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं पर क्रमवार विस्तृत नजर डालते हैं।

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2013 – इंडोनेशिया के बिनटारो में भीषण ट्रेन हादसा

इंडोनेशिया के बिनटारो क्षेत्र में 9 दिसंबर 2013 को दो ट्रेनों के आमने-सामने की टक्कर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इस भयावह दुर्घटना में सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 63 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा रेलवे सुरक्षा उपायों में लापरवाही का प्रतीक बन गया, जिसके बाद वहां रेल सुरक्षा नियमों की व्यापक समीक्षा की गई। इस घटना ने सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर दुनिया का ध्यान खींचा।

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2012 – मेक्सिको में विमान दुर्घटना

9 दिसंबर 2012 को मेक्सिको में एक विमान क्रैश हो गया, जिसमें सात लोगों की जान चली गई। यह दुर्घटना, खराब मौसम और तकनीकी खराबी की आशंका के बीच हुई मानी जाती है। इस हादसे ने एक बार फिर हवाई सुरक्षा नियमों की कठोरता और आधुनिक नेविगेशन सिस्टम की अनिवार्यता को उजागर किया। पीड़ित परिवारों के लिए यह एक ऐसा दुख था, जिसकी भरपाई असंभव थी।

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2011 – कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल की वीरांगनाएँ

9 दिसंबर 2011 को कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में लगी भीषण आग के दौरान ‘रम्या राजन’ और ‘पी.के. विनीथा’ ने जो पराक्रम दिखाया, वह मानव इतिहास में साहस की मिसाल बन गया। जहरीले धुएँ और लपटों के बीच, जान की परवाह किए बिना उन्होंने आठ मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। दुर्भाग्यवश, एक अन्य मरीज को बचाने के प्रयास में दोनों वीरांगनाओं की मृत्यु हो गई। यह घटना आज भी नर्सिंग और मानवता के क्षेत्र में सर्वोच्च बलिदान के रूप में याद की जाती है।

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2008 – इसरो का अंतरराष्ट्रीय तकनीकी योगदान

9 दिसंबर 2008 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने यूरोप की प्रतिष्ठित संस्था ईएडीएम एस्ट्रीयस के लिए एक उपग्रह का निर्माण किया। यह उपलब्धि भारत की अंतरिक्ष तकनीक की विश्वसनीयता और वैश्विक स्तर पर ताकत का प्रमाण बनी। इस घटना ने भारत को केवल एक उपभोक्ता नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी प्रदाता राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

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2007 – बेनजीर भुट्टो का ऐतिहासिक कदम

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने 9 दिसंबर 2007 को पाकिस्तानी सरकार से अपने सभी संबंध खत्म करने की घोषणा की। यह एक बेहद संवेदनशील और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसला था। इससे पाकिस्तान की राजनीति में नया मोड़ आया और जनता के बीच भारी उथल-पुथल मची। यह कदम लोकतंत्र और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए एक साहसिक उदाहरण माना गया।

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2006 – पाकिस्तान का मिसाइल परीक्षण

पाकिस्तान ने 9 दिसंबर 2006 को मध्यम दूरी के परमाणु सक्षम प्रक्षेपास्त्र ‘हत्फ़-3 ग़ज़नवी’ का परीक्षण किया। यह दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन के लिए अहम माना गया। इस परीक्षण ने क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को काफी प्रभावित किया, जिससे पड़ोसी देशों में भी सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ गई।

2003 – मास्को में विस्फोट

रूस की राजधानी मास्को के केंद्रीय भाग में 9 दिसंबर 2003 को हुए जोरदार विस्फोट में छह लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। यह घटना आतंक और अस्थिरता का प्रतीक बन गई। इसके बाद रूस ने सुरक्षा नियमों को और अधिक सख्त किया और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई।

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2002 – जॉन स्नो बने अमेरिका के वित्त मंत्री

9 दिसंबर 2002 को जॉन स्नो को अमेरिका का नया वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण समय था, जब आर्थिक सुधारों की आवश्यकता थी। उनके नेतृत्व में कई आर्थिक नीतियाँ लागू की गईं, जिनका वैश्विक स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ा।

2001 – श्रीलंका में राजनीतिक परिवर्तन

संयुक्त राष्ट्र पार्टी के नेता रानिल विक्रमसिंघे ने 9 दिसंबर 2001 को श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसी दिन तालिबान में नार्दन एलांयस का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई। यह दिन दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ।

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2000 – दक्षिण कोरिया का विकसित राष्ट्र बनना

9 दिसंबर 2000 को दक्षिण कोरिया को विकासशील देश की श्रेणी से उन्नत कर विकसित राष्ट्र घोषित किया गया। यह उसकी आर्थिक प्रगति, तकनीकी विकास और शिक्षा प्रणाली की सफलता का प्रमाण था। यह घटना आज भी विकासशील देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

1998 – ऐतिहासिक स्वीकारोक्ति और परमाणु परीक्षण

रूस द्वारा आर्कटिक सागर में अपक्रांतिक परमाणु परीक्षण किया गया। साथ ही ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर शेन वार्न और मार्क वॉ ने 1994 की रिश्वत प्रकरण में संलिप्तता स्वीकार की। इसने खेल जगत को झकझोर दिया और खेलों में पारदर्शिता की मांग और तेज हो गई।

1992 – चार्ल्स और डायना का अलगाव

ब्रिटिश शाही परिवार के प्रिंस चार्ल्स और प्रिंसेस डायना ने आधिकारिक रूप से अपने अलग होने की घोषणा 9 दिसंबर 1992 को की। यह शाही इतिहास का ऐतिहासिक दिन था जिसने विश्व भर में करोड़ों लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया।

1946 – संविधान सभा की पहली बैठक

भारत की आज़ादी की दिशा तय करने वाली संविधान सभा की पहली ऐतिहासिक बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में हुई। यही वह मंच था जहाँ भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की नींव रखी गई। यह दिन भारत के संविधान निर्माण की शुरुआत के रूप में अमर हो गया।

1941 और उससे पहले की सामरिक घटनाएँ

चीन द्वारा जापान, जर्मनी और इटली के खिलाफ युद्ध की घोषणा से लेकर ब्रिटिश सेना द्वारा यरुशलम पर कब्जा, मोरक्को के अगादीर बंदरगाह पर फ्रांसीसी अधिकार, बेलूर मठ की स्थापना और ब्रिटिश संसद द्वारा पेरिस संधि को स्वीकृति—9 दिसंबर ने बार-बार वैश्विक इतिहास की दिशा बदल दी।

9 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि यह मानव साहस, पीड़ा, परिवर्तन और विकास की जीवंत कहानी है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि इतिहास हर पल हमारे आसपास बन रहा है और आज की घटनाएँ कल की विरासत बनती हैं।

आज का दिन: भाग्य बदलने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग – मौका न गँवाएं

हिन्दू पंचांग 09 दिसंबर 2025, मंगलवार – पौष कृष्ण पक्ष पंचमी

पौष माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर 09 दिसंबर 2025 का दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और सभी शुभ कार्यों की योजना बनाने के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे कई शुभ कार्यों के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना गया है। आइए जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग, शुभ-अशुभ समय, राहुकाल, शुभ योग, यात्रा दिशा और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी –

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तिथि विवरण (Tithi Details)

कृष्ण पक्ष पंचमी – 08 दिसम्बर 04:03 PM से 09 दिसम्बर 02:29 PM तक

कृष्ण पक्ष षष्ठी – 09 दिसम्बर 02:29 PM से 10 दिसम्बर 01:46 PM तक

🌙 नक्षत्र (Nakshatra)

आश्लेषा – 09 दिसंबर 02:52 AM से 10 दिसंबर 02:22 AM तक

मघा – 10 दिसंबर 02:22 AM से 11 दिसंबर 02:44 AM तक

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🕉️ योग (Yoga)

इन्द्र योग – 08 दिसम्बर 05:01 PM से 09 दिसम्बर 02:33 PM तक

वैधृति योग – 09 दिसम्बर 02:33 PM से 10 दिसम्बर 12:45 PM तक

🔸 करण (Karana)

तैतिल – 09 दिसम्बर 03:10 AM से 02:29 PM तक

गर – 02:29 PM से 10 दिसम्बर 02:01 AM तक

वणिज – 10 दिसम्बर 02:01 AM से 01:47 PM तक

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🔯 संवत की स्थिति

विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त)

शक संवत – 1947 (विश्वावसु)

अमांत मास – मार्गशीर्ष

पूर्णिमांत मास – पौष

ऋतु – हेमंत

अयन – दक्षिणायन

☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय

सूर्योदय – 07:00 AM

सूर्यास्त – 05:37 PM

चन्द्रोदय – 10:24 PM

चन्द्रास्त – 11:39 AM (10 दिसम्बर)

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⚠️ अशुभ काल (Inauspicious Time)

राहुकाल – 02:58 PM से 04:17 PM

यमगंड – 09:40 AM से 10:59 AM

कुलिक – 12:19 PM से 01:38 PM

दुर्मुहूर्त – 09:08 AM – 09:50 AM | 10:59 PM – 11:52 PM

वर्ज्यम् – 03:24 PM – 04:58 PM

शुभ काल (Shubh Muhurat)

अभिजीत मुहूर्त – 11:57 AM – 12:40 PM

अमृत काल – 12:48 AM – 02:22 AM

ब्रह्म मुहूर्त – 05:25 AM – 06:13 AM

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🌟 विशेष शुभ योग

सर्वार्थसिद्धि योग
“आश्लेषा नक्षत्र + मंगलवार”
समय – 07:00 AM से 10 दिसम्बर 02:22 AM तक
इस योग में आरंभ किए गए कार्य शुभ, लाभदायक व सफलता देने वाले माने जाते हैं।

🌍 सूर्य और चंद्र राशि

सूर्य राशि – वृश्चिक

चंद्र राशि –

10 दिसम्बर 02:22 AM तक – कर्क

इसके बाद – सिंह

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✈️ यात्रा दिशा फल (Travel Direction)

मंगलवार को यात्रा वर्जित दिशा – उत्तर दिशा

यदि मजबूरीवश जाना हो तो गुड़ खाकर यात्रा करें – बाधा दूर होती है।

लाभदायक दिशा – पूर्व और दक्षिण दिशा में यात्रा से सफलता व धन-लाभ के योग बनते हैं।

🧿 चंद्र बल (Chandra Bal)

10 दिसम्बर 02:22 AM तक –
वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर और कुंभ

02:22 AM के बाद –
मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ और मीन

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🔔 महत्वपूर्ण सूचना

नोट: इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए “राष्ट्र की परम्परा” जिम्मेदार नहीं होगा। कृपया किसी भी शुभ अथवा धार्मिक कार्य को करने से पहले योग्य विद्वान या आचार्य से परामर्श अवश्य लें।

पूर्व डीजीसी क्रिमिनल आनंद राय और पुत्र प्रसून राय की सड़क दुर्घटना में मृत्यु, जिले में शोक की लहर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता, भाजपा के खलीलाबाद नगर पूर्व अध्यक्ष तथा पूर्व शासकीय अधिवक्ता आनंद राय एडवोकेट और उनके पुत्र प्रसून राय (चंचल) की सड़क दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु से पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।
मिली जानकारी के अनुसार गोरखपुर जाते समय राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरवार गांव के निकट हुए इस हादसे में दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
स्व. राय जिले के प्रतिष्ठित अधिवक्ता थे। वहीं उनके पुत्र प्रसून राय स्नातक व बीएड की शिक्षा चुके थे। उन्होंने टीईटी और सीटीईटी परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की थीं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे थे। सोमवार को दोनों उपचार के लिए गोरखपुर जा रहे थे, तभी तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से यह दर्दनाक हादसा हो गया। वरिष्ठ अधिवक्ता और उनके पुत्र के आकस्मिक निधन से अधिवक्ता समाज, राजनीतिक वर्ग और आम नागरिकों में गहरा दुःख व्याप्त है। विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिवार को धैर्य प्रदान करने की कामना की है।

ऑनलाइन आवेदन शुरू, आगरा में 12 नए पशु औषधि केंद्र होंगे स्थापित

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। पशुपालकों को अब पशुओं की महंगी दवाओं के लिए बाजारों में भटकना नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार ने जन औषधि योजना की तर्ज पर ‘पशु औषधि केंद्र’ स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आगरा में पहले चरण में 12 नए पशु औषधि केंद्र खोले जाएंगे, जिनमें प्रत्येक ब्लॉक पर एक केंद्र प्रस्तावित है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं और पात्रता के आधार पर चयन किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और पशुपालकों के इलाज के खर्च को कम करना है। वर्तमान में पशु दवाओं की कीमतें निजी बाजारों में काफी अधिक होती हैं, जिससे पशुपालकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। नई योजना के तहत इन केंद्रों पर एंटीबायोटिक, विटामिन, हार्मोनल इंजेक्शन, प्राथमिक उपचार किट और टीकाकरण दवाएं किफायती दरों पर उपलब्ध होंगी।

केंद्र एवं प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के तहत पशुपालन को महत्वपूर्ण आधार मानकर आगे बढ़ रही है। पशु औषधि केंद्र खुलने से न केवल उपचार लागत कम होगी, बल्कि डेयरी उद्योग और पशुधन संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

आवेदन प्रक्रिया शुरू

अधिकारियों के अनुसार पशु औषधि केंद्र खोलने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए निम्न प्रमुख योग्यताएँ अनिवार्य हैं—

  • फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र
  • ड्रग लाइसेंस
  • कम से कम 120 वर्ग फीट स्थान

ऑनलाइन आवेदन pashuaushadhi.dahd.gov.in पोर्टल पर किए जाएंगे। विभाग द्वारा स्थान सत्यापन एवं निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर चयन किया जाएगा। योजना के सफल संचालन हेतु मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं अपर निदेशक ग्रेड–2 को प्रमुख जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।

यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ पशु दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

जिलाधिकारी के निर्देश: पेंशनर्स की हर समस्या का मिलेगा त्वरित समाधान

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। जिला प्रशासन आगरा द्वारा 17 दिसंबर 2025 को कलेक्ट्रेट सभागार में पेंशनर्स के लिए विशेष “आगरा पेंशन दिवस 2025” का आयोजन किया जा रहा है। यह महत्वपूर्ण बैठक सुबह 11:00 बजे से प्रारंभ होगी, जिसमें जिले के सभी पेंशनर्स अपनी समस्याएँ सीधे अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे।

पूर्व में कई बैठकों के दौरान विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति पर पेंशनर्स संगठनों ने असंतोष व्यक्त किया था। इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी ने सभी कार्यालयाध्यक्षों व विभागाध्यक्षों (मुख्य चिकित्साधिकारी सहित) को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

डीएम ने स्पष्ट कहा है कि प्रत्येक विभाग अपने-अपने पेंशनर्स को व्यक्तिगत रूप से सूचित करे, ताकि अधिक से अधिक पेंशनर्स इस बैठक में शामिल होकर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकें। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य लंबित प्रकरणों, भुगतान, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, पेंशन विसंगतियों तथा अन्य विभागीय मामलों का त्वरित और एक ही स्थान पर निस्तारण सुनिश्चित करना है।

पेंशनर्स दिवस को प्रभावी, पारदर्शी और परिणाममूलक बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं। अधिकारी स्थल पर ही समस्याओं का निस्तारण करेंगे ताकि पेंशनर्स को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

यह पहल न केवल पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत साबित होगी, बल्कि भविष्य में सुगम और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

एक वृक्ष जीवन के नाम: प्रदीप शर्मा

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। पीएस फाउंडेशन के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा ने गोरेगांव स्थित आरे कॉलोनी में “एक वृक्ष जीवन के नाम” अभियान के तहत पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

श्री शर्मा ने कहा कि “अपने लिए तो हर व्यक्ति जी लेता है, जो दूसरों के लिए जीता है, वही सच्चा जीवन है।” उन्होंने बताया कि वृक्षारोपण से पर्यावरण हरा-भरा रहता है, जिससे आमजन को स्वस्थ जीवन जीने में अतुलनीय सहायता मिलती है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधा अवश्य लगाना चाहिए।

स्वावलंबन महिला समिति की अध्यक्षा स्वीकृति प्रदीप शर्मा ने कहा कि वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अभियान में शामिल पीएस फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी को मिलकर ऐसे जनहित कार्यों में निरंतर सहयोग देना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

भारत की संवैधानिक धरोहर हिंसक नहीं है: प्रो. रजनीकांत पाण्डेय

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। पं. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय टीचर ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित 11वें गुरुदीक्षा कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारतीय संविधान, सतत विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैदिक चिकित्सा पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. रजनीकांत पाण्डेय ने कहा कि भारत की संवैधानिक धरोहर हिंसक नहीं है, बल्कि यह देश सदैव से शांति और मानवता का संदेश देता रहा है। उन्होंने ‘भारतीय संविधान: ऐतिहासिक अवधारणा एवं विकास’ विषय पर बोलते हुए संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्वतंत्रता आंदोलन की भूमिका, सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों और ब्रिटिश शासन की नीतियों की क्रमबद्ध व्याख्या की।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं गांधी, नेहरू, चन्द्रशेखर आजाद, अंबेडकर, पटेल और भगत सिंह की प्रतिबद्धता ने संविधान को केवल कानूनी दस्तावेज नहीं रहने दिया, बल्कि इसे राष्ट्र की चेतना और राष्ट्रीय मानसिकता का प्रतिबिंब बनाया। संविधान का निर्माण दो वर्ष ग्यारह महीने अठारह दिनों में पूरा हुआ, किंतु इसकी प्रक्रिया लगभग नब्बे वर्षों के संघर्षों और समाज में हुए गहरे परिवर्तनों का परिणाम थी। प्रो. पाण्डेय ने 1857 के विद्रोह, कर्ज़न की विभाजनकारी नीतियों, मिंटो-मॉर्ले सुधार, रॉलेट एक्ट, नेहरू समिति रिपोर्ट और भारत शासन अधिनियम-1935 को संवैधानिक विकास की प्रमुख कड़ियों के रूप में रेखांकित किया।
कार्यक्रम में प्रो. दिव्या सिंह ने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में उच्च शिक्षा की भूमिका पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य के उत्तरदायी और जागरूक नागरिकों का निर्माण करते हैं, इसलिए स्थिरता के सिद्धांतों को सभी संकायों के पाठ्यक्रम में शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने बहुआयामी शोध, उद्योग एवं शासन के साथ सहयोग और समुदाय के साथ सहभागिता को सतत विकास के लिए अनिवार्य बताया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर प्रो. अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि चैटजीपीटी, परप्लेक्सिटी, गूगल जेमिनी, नोटबुक एलएम और एआई स्टूडियो जैसे मंच शोध प्रक्रिया को सरल और सुलभ बना रहे हैं। अब शोधार्थी बड़ी संख्या में शोध पत्र अपलोड कर उनका सार, शोध अंतर और दिशा आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने इन तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण देते हुए बताया कि एआई आधारित साधन प्रस्तुतिकरण, संदर्भ प्रबंधन और शोध सर्वेक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।
डॉ. लक्ष्मी मिश्रा ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में वैदिक चिकित्सा पद्धतियाँ’ विषय पर आयुर्वेद की वैज्ञानिक संरचना, पंचभूत सिद्धांत, त्रिदोष वात, पित्त, कफ और त्रिगुण सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार प्रणाली नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन बनाए रखने की पूर्वनिवारक चिकित्सा पद्धति है। उन्होंने वेदों में जड़ी-बूटियों, रोगों, अंगों और शल्य चिकित्सा से जुड़े वैज्ञानिक संकेतों का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. राकेश तिवारी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. के. एम. मिश्रा ने किया। देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।