Sunday, June 28, 2026
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एआई आधारित वित्तीय भविष्य पर पुस्तक का लोकार्पण

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)l राइट वे पब्लिकेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रीशेपिंग द फ्यूचर ऑफ फाइनेंस इन इंडिया: बिल्डिंग अ डेवलप्ड इकॉनमी” भारत के वित्तीय तंत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टेक्नोलॉजी की भूमिका पर एक व्यापक एवं समकालीन शोध संकलन प्रस्तुत करती है।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग की डॉ. सुमन कन्नौजिया (असिस्टेंट प्रोफेसर) और अनुराग साहू (रिसर्च स्कॉलर) द्वारा संपादित यह पुस्तक देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों सिक्किम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार आदि से जुड़े शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के महत्वपूर्ण योगदानों को समाहित करती है।
इस शोध संग्रह में कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित वित्तीय नवाचार, डिजिटल भुगतान में साइबर धोखाधड़ी, नैतिक लेखांकन, फिनटेक विकास, डिजिटल मुद्रा, एचआर, एआई एकीकरण, हरित मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय समावेशन, फिनबर्ट के माध्यम से भावना विश्लेषण, तथा डिजिटल बैंकिंग में ग्राहक व्यवहार जैसे उभरते विषयों को शामिल किया गया है। यह पुस्तक भारत की वित्तीय प्रणाली में तकनीक के बढ़ते प्रभाव, उससे जुड़ी चुनौतियों और नीतिगत पहलुओं को गहनता से समझाती है।
प्रत्येक अध्याय तकनीक के सहारे अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और समावेशी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए संभावित रास्तों, रणनीतियों और व्यावहारिक समाधान पर प्रकाश डालता है।
छात्रों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, वित्तीय विशेषज्ञों और उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ताओं के लिए यह पुस्तक एक अत्यंत उपयोगी संदर्भ सामग्री है।
कुल मिलाकर, यह शोध-आधारित कृति इस बात की समझ विकसित करती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कैसे भारत की अर्थव्यवस्था को विकसित, नवाचार-संचालित और भविष्य उन्मुख दिशा में आगे बढ़ा सकती है।

गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस मनाया गया

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज का 350वां शहीदी दिवस गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा सोसाइटी खलीलाबाद में भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ मनाया गया। अखंड पाठ की समाप्ति के बाद ग्रंथी भाई सोहन सिंह एवं चंडीगढ़ से आए रागी जत्था कुलविंदर सिंह और उनके साथियों ने गुरु के शबद सुनाकर गुरुद्वारा परिसर को भक्ति मय कर दिया।
कार्यक्रम में सरदार अजीत सिंह ने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही सनातन सभ्यता और संस्कृति की सुरक्षा संभव है। सरदार जगबीर सिंह और प्रदीप सिंह ने गुरु के बलिदान और त्याग को याद करते हुए देश और धर्म की रक्षा में उनके योगदान को सलाम किया। हनुमानगढ़ी महंत विनयानन्द महाराज ने बलिदान को देशभक्ति की प्रेरणा बताया।
देर शाम तक लंगर चलता रहा। शोभा यात्रा खलीलाबाद के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब की सवारी, पंच प्यारे और गतका प्रदर्शनियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। भजन गायक हरि महेंद्र पाल सिंह रोमी और अन्य कलाकारों ने भजन-संगीत के माध्यम से भक्तों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालु, सरदार प्रीतपाल सिंह, जसबीर सिंह, सत्येंद्र पाल सिंह, सतविंदर पाल सिंह जज्जी, अमरजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, परविंदर सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

हत्या कांड का हुआ खुलासा: दो आरोपित गिरफ्तार, पुलिस ने सुलझाया रहस्यमयी मौत का मामला

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के थाना लार क्षेत्र के ग्राम बरडीहा दलपत में 27 जुलाई 2024 को रघुबीर बाबा स्थान के पास संदिग्ध परिस्थितियों में मिले एक युवक के शव ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। मृतक की माँ की तहरीर पर लार थाने में हत्या सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था और मामले की गंभीरता को देखते हुए तेज़ी से विवेचना शुरू की गई थी।

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पुलिस टीम ने तकनीकी और मानवीय खुफिया इनपुट के आधार पर लगातार प्रयास जारी रखा। जांच के दौरान घटना में शामिल दो आरोपितों की पहचान हुई —

  1. अखिलेश यादव उर्फ मिंकल पुत्र चन्द्रशेखर यादव निवासी बरडीहा दलपत, थाना लार, देवरिया
  2. परमेश्वर उरांव पुत्र बुधुवा उरांव निवासी खरटा, थाना कैरो, जिला लोहरदग्गा, झारखंड
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आज दिनांक 09 दिसंबर 2025 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि दोनों अभियुक्त क्षेत्र में मौजूद हैं। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपितों ने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है, जिसके आधार पर घटना का सफल अनावरण कर लिया गया है।

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अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी श्सनील कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की कड़ी दर कड़ी जांच की जा रही है और आगे की विधिक कार्रवाई तेज़ी से प्रचलित है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शने वाली नहीं है, और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

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इस बड़ी कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा का संदेश गया है तथा स्थानीय लोगों ने हत्या कांड के खुलासे पर पुलिस टीम की सराहना की है।

आईजीआरएस और कर-करेत्तर पर डीएम की सख्त समीक्षा, गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आईजीआरएस पोर्टल से संबंधित मुख्यमंत्री, आयुक्त और जिलाधिकारी संदर्भों सहित तहसील दिवस प्रकरणों एवं अन्य लंबित शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने संदर्भों की प्रगति से अवगत कराया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अधिकारी आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और संदर्भों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से करें, ताकि कोई भी प्रकरण डिफॉल्टर श्रेणी में न पहुंचे। उन्होंने कहा कि निस्तारण की गुणवत्ता बेहतर होगी तो शिकायतकर्ता का फीडबैक भी संतोषजनक प्राप्त होगा, इसलिए इस बिंदु को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि पोर्टल पर प्राप्त होने वाले नए संदर्भों पर तुरंत कार्यवाही शुरू करें और नियमित रूप से अपडेट दर्ज करते रहें। जिलाधिकारी ने कहा कि जनसामान्य की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में सीएम डैशबोर्ड पर जनपद की रैंकिंग को बेहतर बनाए रखने के लिए सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में लक्ष्य के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई। उन्होंने कहा कि योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की प्रगति समयबद्ध होनी चाहिए, जिससे समग्र प्रदर्शन में सुधार आए।

बैठक के दौरान कर-करेत्तर की स्थिति की विस्तृत समीक्षा भी की गई। आबकारी, व्यापार कर, परिवहन, स्टाम्प शुल्क, विद्युत देय, वन विभाग, सिंचाई एवं नलकूप, नगर निकाय, खनन, मंडी समिति, बांट-माप, खाद्य सुरक्षा सहित अन्य राजस्व संबंधित विभागों द्वारा लक्ष्य के सापेक्ष की गई वसूली की प्रगति पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने विभागों को राजस्व वसूली में सुधार लाते हुए निर्धारित समय के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जयप्रकाश, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह, परियोजना निदेशक विजयंत कुमार सिंह, अपर उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

इंडिया स्किल्स कम्पटीशन 2025: प्रतिभागियों को मिला सम्मान, प्रमाण-पत्र वितरित

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद स्तरीय कौशल प्रतियोगिता 2025 के सफल आयोजन के बाद मंडल स्तर पर प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मिशन निदेशक, कौशल विकास मिशन के निर्देशानुसार नवंबर माह में जनपद स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं के बाद 08 व 09 दिसंबर 2025 को मंडल स्तर पर कुल 20 सेक्टर में कौशल प्रतियोगिता आयोजित की गई।

आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी जिलों से जनपद स्तर पर चयनित 296 प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद 90 प्रशिक्षार्थियों ने मंडल स्तरीय परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी तकनीकी दक्षता साबित की। सभी चयनित प्रतिभागियों को संयुक्त निदेशक, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता संजय सागर द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

संयुक्त निदेशक ने कहा कि मंडल स्तर पर चयनित किए गए सभी प्रतिभागी अब राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता में जनपद का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कौशल विकास मिशन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मानसिंह भारती, नोडल प्रधानाचार्य राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बल्केश्वर आगरा; मोहित तिवारी, प्रधानाचार्य आईटीआई एत्मादपुर; वेद प्रिय आर्य, प्रधानाचार्य आईटीआई बाह; ध्रुव मग्गू, प्रधानाचार्य आईटीआई मथुरा; तथा हेमलता यादव, प्रधानाचार्य आईटीआई जारखी मौजूद रहे। सभी ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।

प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं में तकनीकी दक्षता विकसित कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना है। राज्य स्तर पर चयनित प्रतिभागी आगे चलकर इंडिया स्किल्स कम्पटीशन 2025 में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे।

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सरकारी योजनाओं में लंबित आवेदनों का यथाशीघ्र करें निस्तारण: जिलाधिकारी

ऋण जमा अनुपात(सीडी रेशियो) में वृद्धि हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में जिला सलाहकार समिति (डीसीसी)/ जिला स्तरीय समीक्षा समिति(डीएलआरसी) की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। बैठक के दौरान लीड बैक मैनेजर अनिल कुमार सिन्हा ने बताया कि ऋण जमा अनुपात माह जून में 39.62 प्रतिशत था। सितंबर माह में डिपॉजिट अधिक होने के कारण 39.62 से घटकर 39.44 प्रतिशत हो गई।जिलाधिकारी ने एक सब कमेटी गठित कर सभी बैंकों को दिसंबर माह तक ऋण जमा अनुपात 40% प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने प्रमुख बैंकर्स को उनके यहां लंबित बड़े ऋण वाले फाइलों का अनुमोदन करने को कहा। वार्षिक ऋण योजना में अब तक कुल 56% की वृद्धि दर्ज की गई। विभिन्न शासकीय योजनाओं यथा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक प्रोडक्ट योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, पीएम स्वनिधि योजना आदि की समीक्षा के दौरान उन्होंने सभी योजनाओं में विभिन्न बैंकों में लंबित फाइलों का शीघ्र निस्तारण करने को कहा जिससे इन योजनाओं से अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सके। साथ ही बिना ठोस कारण के किसी भी फाइल को रिजेक्ट न करने के भी निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए। बैठक के दौरान उन्होंने समस्त बैंकर्स को फसल बीमा योजना से किसानों को लाभान्वित करने हेतु इस संबंध में केसीसी कार्ड धारकों के माध्यम से किसानों को आच्छादित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने किसानों को प्रेरित कर इस योजना से लाभान्वित करने को भी कहा, साथ ही जिला कृषि अधिकारी को इस योजना का व्यापक प्रचार प्रसार करने तथा किसान गोष्ठियों के दौरान इसका प्रचार प्रसार करने को भी कहा। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं में पेंडेंसी की स्थिति की जानकारी लेते हुए संबंधित बैंकों को आवश्यक निर्देश भी दिए। इस दौरान लीड बैंक मैनेजर अनिल कुमार सिन्हा के अलावा जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी, जिला ग्राम उद्योग अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी तथा समस्त बैंकर्स उपस्थित रहे।

किसानों को 60% अनुदान पर सोलर पंप: आगरा में ऑनलाइन बुकिंग शुरू

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों के लिए अनुदान पर सोलर पंप प्राप्त करने का सुनहरा अवसर उपलब्ध हो गया है। उप निदेशक कृषि मुकेश कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के तहत सोलर पंपों की ऑनलाइन बुकिंग के लिए विभागीय पोर्टल 26 नवंबर 2025 से खोल दिया गया है, जो 15 दिसंबर 2025 तक सक्रिय रहेगा।

किसानों को बुकिंग के लिए कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा। पोर्टल पर उपलब्ध “अनुदान पर सोलर पंप हेतु बुकिंग करें” लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। आवेदन करते समय ₹5000 की टोकन मनी ऑनलाइन जमा करनी होगी।

जनपद आगरा के लिए 2 एचपी से 10 एचपी तक के सबमर्सिबल और सरफेस सोलर पंपों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन पर 60% तक सरकारी अनुदान मिलेगा, जबकि शेष राशि किसान को अंशदान के रूप में जमा करनी होगी। पंप की क्षमता के अनुसार मूल्य, अनुदान और किसान अंश अलग-अलग तय किए गए हैं।

कृषकों के लिए कुछ विशेष शर्तें भी बाध्यकारी होंगी—जैसे उपयुक्त बोरिंग साइज़, जलस्तर के अनुसार पंप का चयन, तथा स्थल परिवर्तन न करना। निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन आने पर चयन ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा। बुकिंग कन्फर्म होते ही किसानों को मोबाइल पर सूचना भेजी जाएगी।

किसान चाहें तो बैंक से ऋण लेकर भी अपना अंशदान जमा कर सकते हैं। इस पर एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के तहत कुल 6% ब्याज छूट का लाभ उपलब्ध है।

विद्युतविहीन क्षेत्रों में डीज़ल पंपों को सोलर पंप में परिवर्तित करने का विकल्प भी दिया गया है, जिससे सिंचाई में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों का अवलोकन कर बच्चों ने बढ़ाया ज्ञान

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों एवं दिव्यांग बच्चों का एक दिवसीय शैक्षिक भ्रमण उत्साहपूर्ण माहौल में आयोजित किया गया। प्रातः 10:00 बजे पुलिस लाइन से मुख्य विकास अधिकारी प्रत्यूष पांडेय और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने हरी झंडी दिखाकर बसों को रवाना किया। बच्चों के उत्साह को बढ़ाने के लिए सीडीओ द्वारा स्नैक्स व चॉकलेट वितरित किए गए।

इस कुशीनगर शैक्षिक भ्रमण 2025 में सभी विकास खंडों से कुल 151 दिव्यांग बच्चों ने प्रतिभाग किया, जिनमें 14 बच्चे पीएम श्री विद्यालय के शामिल रहे। बच्चों को बसों के माध्यम से कुशीनगर के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों—रामाभार स्तूप, माथा कुंवर मंदिर, मुख्य मंदिर, थाईलैंड मंदिर और चीनी मंदिर—का अवलोकन कराया गया।

जिला समन्वयक ज्ञानेंद्र सिंह ने शैक्षिक भ्रमण के महत्व को बताते हुए कहा कि कुशीनगर बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण स्थली है और इसकी ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित है। ऐसे भ्रमण बच्चों को प्रत्यक्ष अध्ययन के माध्यम से इतिहास, संस्कृति और धार्मिक विरासत को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

भ्रमण में शामिल बच्चों में आलोक कुमार, कविता, रानी, नीतीश, माझी, श्रवण कुमार और मंगिया प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। बच्चों के साथ उनके विशेष शिक्षक विजय कुमार पांडेय, संतोष पांडेय, ओमकार पांडेय एवं राजाराम दुबे भी पूरी यात्रा के दौरान मार्गदर्शन करते रहे।

दिनभर चले इस कुशीनगर शैक्षिक भ्रमण 2025 से बच्चों ने न केवल ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया, बल्कि अपनी कक्षा से बाहर वास्तविक जीवन से जुड़ा ज्ञान भी अर्जित किया, जो उनके शैक्षिक विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।

एकमुश्त समाधान योजना में बकायेदारों को बड़ी राहत, नियमित बिल जमा करने वाले उपभोक्ता नाराज

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के बकाया बिल निस्तारण हेतु चलाई जा रही एकमुश्त समाधान योजना ने जिले में नई बहस खड़ी कर दी है। इस योजना के तहत मार्च 2025 तक जिन उपभोक्ताओं का बिजली बिल बकाया है, उन्हें 1 दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के अंत तक समूचे ब्याज की माफी तथा मूलधन में 25% तक की छूट दी जा रही है। यह लाभ घरेलू श्रेणी के 02 किलोवाट और कमर्शियल श्रेणी के 01 किलोवाट कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को मिल रहा है।
बकायेदार उपभोक्ताओं के लिए यह योजना राहत का बड़ा अवसर मानी जा रही है। वर्षों से बकाया जमा न कर पाने वाले उपभोक्ता इस छूट का लाभ लेकर अपने बिलों का निस्तारण कर रहे हैं। विभाग का मानना है कि इससे बिजली राजस्व में सुधार होगा और उपभोक्ता भविष्य में नियमित भुगतान के लिए प्रेरित होंगे। लेकिन दूसरी ओर, हर माह समय से बिल जमा करने वाले नियमित उपभोक्ताओं में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार और विभाग की ऐसी योजनाएं लगातार केवल बकायेदारों को फायदा पहुंचाती हैं, जबकि ईमानदारी से समय पर बिल जमा करने वालों को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिलता। इससे उनमें उपेक्षा की भावना बढ़ रही है। नियमित उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि यदि सरकार वास्तव में भुगतान अनुशासन बढ़ाना चाहती है, तो उसे समय से बिल जमा करने वालों को भी किसी न किसी रूप में प्रोत्साहन देना चाहिए। जैसे—अगली बिलिंग में छूट, अतिरिक्त यूनिट बोनस या अन्य किसी प्रकार की राहत।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि संतुलित नीति ही विश्वास बहाल कर सकती है। केवल बकायेदारों को राहत देने से नियमित उपभोक्ता हतोत्साहित होते हैं और इसका नकारात्मक प्रभाव भविष्य में राजस्व वसूली पर भी पड़ सकता है। उपभोक्ताओं ने विभाग से मांग की है कि आगामी योजनाओं में नियमित बिल जमा करने वालों के हितों को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि सभी उपभोक्ताओं में निष्पक्षता का संदेश जाए।

अखिल गुजरात माली समाज का बढ़ाया गौरव

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गुजरात (राष्ट्र की परम्परा)
गुजरात के बनासकांठा जिले की डीसा तहसील के मालगढ़ गाँव की जोधपुरीयों की ढाणी की बेटी कुं तेजल जितेन्द्र कुमार टांक गुजरात पुलिस परीक्षा में महिला कैटेगरी में स्टेट फर्स्ट हुई है ! कुं तेजल टांक के पिताजी जितेन्द्र मगनाजी टांक “कवि जिम” डबल गोल्ड मेडलिस्ट डीसा ने पिछले 30 साल से अपने घर पे एवम डीसा-गांधीनगर में कोचिंग द्वारा 5000 से ज्यादा विद्यार्थियों को इंग्लिश ग्रामर की शिक्षा दी है और उनके 1000 से अधिक विद्यार्थी सरकारी नोकरी से जुड़े है। जितेन्द्र टांक ने भी तीन बार जी पी एस सी वर्ग 1-2 की परीक्षा उत्तीर्ण की थी लेकिन उनको सफलता नहि मिली थी। भजन एवम चालीसा लेखक टांक लिखित आलेखित आलेख गुजरात राजस्थान मध्यप्रदेश महाराष्ट्र उत्तराखंड के अग्रगण्य अखबार में प्रकाशित होते है। तेजल को पिताजी की संघर्ष गाथा से सतत प्रेरणा मिली थी। उसने गाँव की जगदम्बा लाइब्रेरी में सतत आयोजनपूर्वक 8 घण्टे तक गहन अध्ययन किया था और गाँव के प्रगति मैदान में दौड़ की सघन प्रैक्टिस की थी।ऑनलाइन वीडियो कोचिंग और प्रबल परिश्रम कर के तेजल ने पिताजी से भी सवाई सफलता हासिल की है।
तेजल ने गाँव शहर तहसील जिला एवम राज्य का गौरव बढ़ाया है। उल्लेखनीय है कि तेजल ने सी सी ई ग्रुप बी में कट ऑफ जितने अंक प्राप्त किये थे और फॉरेस्ट की परीक्षा में भी अच्छे नंबर प्राप्त किये थे लेकिन वह लॉन्ग जम्प में सफल नही हुई थी। वर्तमान में तेजल तेजी से अन्य प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई है।

सभी पशु चिकित्सालयों में चरणबद्ध खुलेगा पशु औषधि केंद्र, मिलेगी किफायती सुविधा

बलिया, संवाददाता (राष्ट्र की परंपरा)।जिले के पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने अब जन औषधि केंद्र की तर्ज पर पशु औषधि केंद्र खोलने की मंजूरी दे दी है। यह केंद्र चरणबद्ध तरीके से जिले के सभी 51 पशु चिकित्सा केंद्रों में स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के शुरू होने से पशुओं के इलाज पर आने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा, जिससे पशुपालकों को आर्थिक राहत मिल सकेगी। इन पशु औषधि केंद्रों पर रोजाना उपयोग होने वाली सभी जरूरी दवाएं, टीके, विटामिन, मिनरल और अन्य पशु चिकित्सा सामग्री बाजार के मुकाबले 50 से 70 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध होगी। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.के. मिश्र के अनुसार, बाजार में दवाएं महंगी होने के कारण कई बार पशुपालक उपचार कराने से हिचकिचाते हैं या डॉक्टर द्वारा बताई गई पूरी दवा भी नहीं खरीद पाते, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नए केंद्र शुरू होने से ऐसी समस्याओं पर रोक लगेगी और पशुओं का समय से सही उपचार सुनिश्चित होगा।यह है योजना के उद्देश्य और पात्रतायोजना का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है। जिले के हर ब्लॉक में कम से कम एक केंद्र खोले जाने का लक्ष्य है। इन केंद्रों के संचालन के लिए प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र, सहकारी समितियां और अन्य पात्र संस्थाओं को चयनित किया जाएगा। आवेदन करने वालों के पास फार्मासिस्ट का पंजीकरण प्रमाणपत्र, ड्रग लाइसेंस, तथा कम से कम 120 वर्ग फीट का स्थान होना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके लिए 5000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।डॉ. मिश्र ने बताया कि विभाग समय-समय पर दवाओं की सूची अपडेट करेगा और पशुपालकों को टीकाकरण, पोषण व दवाओं के सही उपयोग के प्रति जागरूक करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। 1962 पर कॉल कर घर बैठे मिलेगा उपचार जिले में पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना के तहत सात मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU) पहले से संचालित हैं। पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक घर बैठे अपने पशुओं का उपचार करा सकते हैं। इसके अलावा आकस्मिक स्थितियों के लिए विशेष MVU टीम तैनात है, जो सुबह 9 से शाम 7 बजे तक ऑन-कॉल सेवा प्रदान करेगी।पशु औषधि केंद्रों की शुरुआत से न केवल पशुपालकों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि पशुधन स्वास्थ्य में सुधार से किसानों की आय भी सुदृढ़ होगी।

अलाव व्यवस्था ठप, कड़ाके की ठंड में सिकन्दरपुर के लोग बेहाल — चिन्हित स्थानों पर नहीं जल रही है

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)सिकन्दरपुर तहसील क्षेत्र में इस वर्ष कड़ाके की ठंड ने आमजन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है, लेकिन राहत के लिए प्रस्तावित अलाव व्यवस्था अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। प्रशासन द्वारा चिन्हित 17 प्रमुख स्थानों—बस स्टेशन सिकन्दरपुर, नगरा मोड़, तहसील परिसर, पुरूषोतमपट्टी चट्टी, लखनापार चट्टी, बहेरी चट्टी, सिसोटार चट्टी, माल्दा चट्टी, बघुड़ी चट्टी, नवरतनपुर चट्टी, बंशी बाजार चट्टी, पूर चट्टी, खेजुरी (हथौज मोड़), हथौज चट्टी, खड़सरा (जिगिरिसड़ मोड़), पकड़ी और टंडवा—में एक भी जगह अलाव न जलना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। तेज होती शीतलहरी के बीच गरीब, असहाय, मजदूर, रिक्शा चालक और रात में बाहर रहने वाले लोग ठंड से बुरी तरह ठिठुर रहे हैं। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने स्वयं लकड़ियां जोड़कर अलाव जलाने का प्रयास किया, परंतु पर्याप्त सामग्री और निरंतर सप्लाई न होने से वे भी असफल हो रहे हैं। तहसीलदार सिकन्दरपुर ने शीतलहरी से राहत हेतु 255 राजस्व ग्रामों में रहने वाले गरीब व निराश्रित परिवारों के लिए कम्बलों की तत्काल आवश्यकता बताई है, लेकिन अलाव व्यवस्था की वास्तविक स्थिति बेहद खराब है। लोगों का आरोप है कि हर वर्ष केवल सूची बनाकर खानापूर्ति कर दी जाती है, जबकि मैदान में तैयारी नहीं दिखती।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द अलाव की व्यवस्था लागू कर सभी चिन्हित स्थलों पर लकड़ियों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि कमजोर वर्गों को कड़ाके की ठंड से राहत मिल सके।

एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा को डीएम की सर्वदलीय बैठक, 84% प्रपत्र हुए डिजिटाइज्ड

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने मंगलवार को मान्यता प्राप्त सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक का मुख्य फोकस मतदाता सूची के अद्यतन कार्य में राजनीतिक दलों की सक्रिय भूमिका और सहयोग सुनिश्चित करना था।
जिलाधिकारी ने प्रतिनिधियों को एसआईआर की वर्तमान प्रगति से अवगत कराते हुए बताया कि अब तक 84 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है, जो जनपद के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। शेष प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन को भी तत्परता के साथ पूरा करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। जिले के 99.97 प्रतिशत मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं।
उन्होंने ‘नो मैपिंग’ के मुद्दे पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ऐसे मतदाता, जिनका लिंक 2003 की निर्वाचक नामावली से नहीं जोड़ा जा सका है, उनकी मैपिंग तेजी से की जा रही है। इसके लिए बीएलओ और नगर–ग्रामीण क्षेत्रों के बीएलए को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता बताई गई। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अपने बूथ स्तर एजेंटों से सही जानकारी उपलब्ध कराकर इस समस्या के समाधान में योगदान दें।
उन्होंने यह भी कहा कि आगामी दिनों में सभी 2084 मतदेय स्थलों पर बीएलओ व बीएलए की संयुक्त बैठकें आयोजित की जाएंगी। इनमें एसआईआर में विलोपित नामों को पढ़कर सुनाया जाएगा, ताकि राजनीतिक दल या संबंधित व्यक्ति तुरंत आपत्ति दर्ज करा सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि दो दिनों के भीतर विशेष मतदाता पंजीकरण कैंप भी लगाए जाएंगे, जिनमें नए मतदाताओं से फॉर्म-06 भरवाया जाएगा। इस दौरान किसी भी पात्र नागरिक के छूटने न पाए, इसके लिए राजनीतिक दलों के सहयोग की अपेक्षा की गई।
बैठक में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने एसआईआर प्रक्रिया की प्रशंसा की और जिलाधिकारी को सफल संचालन के लिए बधाई दी। बैठक का समापन जिलाधिकारी द्वारा सभी प्रतिनिधियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए किया गया।

आशीष के मृत्यु के दोषियों पर दर्ज हो हत्या का मुकदमा – अजय राय

हर पीड़ित के साथ खड़ा है कांग्रेस का एक एक कार्यकर्ता

एसआईआर में ड्यूटी के दौरान हुए मृत आशीष कुमार के परिजनों से मिल अजय राय ने दी सांत्वना

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पूर्व मंत्री अजय राय ने मंगलवार को एसएआर ड्यूटी के दौरान मृत लेखपाल आशीष कुमार के गांव धनगड़ा के पलानी टोला पहुंचकर परिजनों से मिलकर सांत्वना दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मृत लेखपाल आशीष कुमार के उपर दबाब डालने वाले अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।परिवार के एक परिजन को सरकारी नौकरी व एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जाए। इस सरकार में हर वर्ग बहुत ही परेशान है।प्रदेश में जितने भी कर्मचारी एसआईआर ड्यूटी के दौरान मरे हैं उनके परिजनों को न्याय नही मिल पा रहा है।कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व व एक एक कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के साथ न्याय मिलने तक संघर्ष करता रहेगा। आशीष कुमार के पिता बाबूलाल व परिजनों को सांत्वना दिया। इस दौरान युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवचन्द यादव,जिलाध्यक्ष विजयशेखर मल्ल रोशन,सुयश मणि त्रिपाठी, धर्मेंद्र सिंह, रामजी गिरि, जयदीप त्रिपाठी,डॉ धर्मेन्द्र पांडेय, भरत मणि त्रिपाठी, चंद्रभूषण पांडेय, मार्कण्डेय मिश्र, वशिष्ठ मोदनवाल,आलोक त्रिपाठी राजन,संजीव मिश्र, गोविन्द मिश्र, सत्यम पांडेय, वरुण राय, मनीष रजक,वजीर अहमद,परमानन्द प्रसाद,प्रियंबद कांक्षी, दीनदयाल, जयप्रकाश पाल,अब्दुल जब्बार आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

फायर सेफ्टी से लेकर बिल्डिंग बायलॉज तक—क्यों फेल हो रही है भारत की सुरक्षा व्यवस्था?

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भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठानों में सुरक्षा संकट- भ्रष्टाचार की मिलीभगत क़ी संरचनात्मक भूमिका?

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत तेज़ी से शहरी विकास,बुनियादी ढांचे के विस्तार और जनसंख्या की बढ़ती आर्थिक भागीदारी के दौर से गुजर रहा है,जिसके परिणामस्वरूप देश के लगभग 780 जिलों में विशाल संख्या में मॉल,मल्टी-स्टोरी बिल्डिंगें, होटल, रेस्टोरेंट,नाइट क्लब, सिनेमाहॉल,सुपर बाजार,कोचिंग संस्थान, स्कूल, कॉलेज और मनोरंजन केंद्रों का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इन स्थानों पर प्रतिदिन हजारों-लाखों नागरिक आते हैं, जो आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। लेकिन इसी विकास की यात्रा के भीतर एक गंभीर प्रश्न भी मौजूद है,भ्रष्टाचार,गैर-जवाबदेही, फायर-सेफ्टी की अनदेखी और प्रशासनिक निरीक्षण की कमी, जो कई बार बड़े हादसों का कारण बन जाती है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि हाल ही में गोवा के नाइट क्लब में लगी भयंकर आग, जिसमें 25 लोगों की मृत्यु हुई, इस समस्या का चरम उदाहरण है।इस हादसे ने यह उजागर कर दिया कि देश के अनेक जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान सक्रिय हैं, जिनके पास न तो वैध फायर-सेफ्टी प्रमाणपत्र हैं,न बिल्डिंग बायलॉज की स्वीकृति, न ही नगर परिषद/महानगर पालिका/राज्य सरकार द्वारा जारी आवश्यक लाइसेंस। यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम नहीं है,बल्कि भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों, लाइसेंसों की अवैध खरीद- फरोख्त,और निरीक्षण एजेंसियों की मिलीभगत का दुष्परिणाम है। जिस प्रकार गोवा के नाइट क्लब को बिना उचित सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलने दिया गया,उसी प्रकार देश के विविध हिस्सों में भीड़भाड़ वाले संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन आम हो चुका है, जिसे रोकने के लिए अब कलेक्टर-स्तर पर स्वत: संज्ञान आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
साथियों बात अगर हम भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठानों में सुरक्षा संकट और भ्रष्टाचार की संरचनात्मक भूमिका को समझने की करें तो, भारत में एक ओर जहांआधुनिक मॉल, कैफे, मल्टीप्लेक्स और मनोरंजन केंद्र शहरों की पहचान बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा स्थिति भयावह रूप से कमजोर पाई जाती है।कई जिलों में यह पाया गया है कि(1) फायर-सेफ्टी ऑडिट वर्षों तक नहीं हुए,(2) आपातकालीन निकास अवरुद्ध हैं,(3)फायर-अलार्म और स्प्रिंकलर कार्यरत नहीं (4) बिल्डिंग बायलॉज का पालन न्यूनतम,(5)ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल वायरिंग,(6)अवैध निर्माण और अवैध विस्तार,(7) बिना अनुमति नाइट क्लब, बार, बेसमेंट रेस्टोरेंट और कोचिंग केंद्र संचालन,(8)और सबसे चिंताजनक- भ्रष्टाचार के चलते फर्जी लाइसेंस जारी करना।भारतीय नगर प्रशासन या स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार नई बात नहीं है, लेकिन जब यह भ्रष्टाचार नागरिक जीवन के मूलभूत अधिकार, सुरक्षित वातावरण को खतरे में डाल दे, तब यह केवल रिश्वत का मसला नहीं रहता,बल्कि नागरिकों की हत्या नरसंहार जैसी परिस्थितियों को जन्म देने वाली संरचनात्मक विफलता बन जाता है।गोवा की घटना हो या दिल्ली के मुंडका फायर हादसा, मुंबई का कमला मिल फायर, सूरत का कोचिंग सेंटर मामला,हर घटना के पीछे एक सामान्य कारण दिखाई देता है:भ्रष्टाचार के बदले मिले फर्जी प्रमाणपत्र और नियमों के क्रियान्वयन में गहरी प्रशासनिक उदासीनता?भारत में नागरिक सुरक्षा अधिनियम, फायर सेवा अधिनियम, नगर बायलॉज और राष्ट्रीय भवन संहिता जैसे कानून मौजूद हैं, लेकिन जब इन कानूनों के पालन की जिम्मेदारी संभालने वाला निचला -मध्यम प्रशासन ही भ्रष्टाचार में संलिप्त हो जाए, तो सुरक्षा व्यवस्थाएँ केवल कागज़ी बनकर रह जाती हैं। इसलिए यह मॉडल अब अप्रभावी माना जा रहा है और आवश्यक है कि निरीक्षण का अधिकार सीधे जिलाधिकारी /कलेक्टर के हाथों में आए, जो जिले का सर्वोच्च कार्यपालिका अधिकारी होता है और भ्रष्टाचार- रोधी शक्तियाँ भी रखता है।
साथियों बात अगर हम कलेक्टर द्वारा स्वत: संज्ञान आधारित आकस्मिक निरीक्षण की अपरिहार्यता को समझने की करें तो,प्रत्येक जिले में कलेक्टर स्वयं आकस्मिक निरीक्षण करें,वह वर्तमान भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में एक अत्यंत व्यवहार्य, प्रभावी और नागरिक-हितकारी समाधान है।इसका कारण स्पष्ट है (1) कलेक्टर भ्रष्टाचार-रोधी शक्तियों से लैस होता है।(2) स्थानीय निकाय, नगर परिषद या निगम पर होने वाले राजनीतिक दबाव का प्रभाव कलेक्टर पर कम पड़ता है। (3) स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति के कारण कलेक्टर किसी भी संस्था पर तात्कालिक जांच और कार्रवाई कर सकता है। (4) आकस्मिक निरीक्षण भ्रष्टाचार की रीढ़ तोड़ने वाला सबसे प्रभावी उपाय है।(5) कलेक्टर की प्रत्यक्ष निगरानी से स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही स्वत: बढ़ जाती है।देश में अक्सर देखा गया है कि फायर सेवा विभाग, नगर निगम या लाइसेंसिंग अधिकारी भ्रष्टाचार के कारण बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नियमों के उल्लंघन के बावजूद ‘क्लीन चिट’ दे देते हैं। ऐसे में यदि कलेक्टर हर जिले में-मॉल, होटल,नाइट क्लब,बड़े रेस्टोरेंट मल्टीप्लेक्स सुपर बाजार,स्कूल/कॉलेज,कोचिंग सेंटर,और उच्च भीड़- घनत्व वाली इमारतों का स्वत: संज्ञान लेकर निरीक्षण करें, तो नागरिक सुरक्षा का स्तर कई गुना बढ़ सकता है कलेक्टर- स्तरीय निरीक्षण से यह भी सुनिश्चित होगा कि फर्जी सर्टिफिकेट रखने वाले प्रतिष्ठानों की तुरंत पहचान की जाए और उन पर दंडात्मक कार्रवाई हो। गोवा हादसा इसी बात का प्रमाण है कि यदि जिला प्रशासन सक्रिय रूप से ऐसे प्रतिष्ठानों पर समय- समय पर निगरानी करता, तो शायद 25 निर्दोष नागरिकों की जान बच सकती थी।
साथियों बात अगर हम भीड़- उपस्थितियों वाले संस्थानों पर अनिवार्य नियमित निरीक्षण: एक नई राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता इसको समझने की करें तो, प्रत्येक जिले में सभी ऐसे संस्थानों पर जहाँ बड़ी संख्या में आम जनता एकत्रित होती है, नियमित निरीक्षण व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। यह निरीक्षण त्रैमासिक, अर्धवार्षिक अथवा वार्षिक न होकर व्यवसाय के प्रकार, भीड़ की मात्रा, जोखिम स्तर और भवन संरचना के आधार पर होना चाहिए।उदाहरण के लिए,नाइट क्लब, बार, बेसमेंट रेस्टोरेंट मासिक निरीक्षण,मल्टीप्लेक्स, मॉल, भीड़भाड़ बाजार हर तीन माह में निरीक्षण,स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर सत्रारंभ से पहले अनिवार्य निरीक्षण होटल और गेस्टहाउस प्रत्येक छह माह में निरीक्षण इन निरीक्षणों में निम्न बिंदुओं की सुनिश्चितता आवश्यक है (1) फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता (2) आपातकालीन निकास मार्ग (3)भीड़ नियंत्रक तकनीक (4) इलेक्ट्रिकल वायरिंग की सुरक्षा(5) एलपीजी/गैस सुरक्षा(6) बिल्डिंग बायलॉज का अनुपालन (7) सुरक्षा कर्मियों की प्रशिक्षित टीम(8) सीसीटीवी और नियंत्रण प्रणाली,भारत में कई हादसों की मुख्य वजह यह रही है कि ऐसे निरीक्षण या तो कभी हुए ही नहीं, या निरीक्षण रिपोर्ट भ्रष्टाचार के कारण कागज़ में पास दिखाई गई। इसलिए, कलेक्टर-स्तरीय निगरानी के साथ-साथ डिजिटल पब्लिक इन्स्पेक्शन रजिस्टर की व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए ताकि जनता खुद जान सके कि उनके जिले के प्रतिष्ठानों ने कौन-कौन से सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त किए हैं।
साथियों बात अगर हम सुरक्षा नियमों के पालन की सार्वजनिक घोषणा इंडिया सेफ्टी चार्ट का अनिवार्य प्रदर्शन इसको समझने की करें तो,विश्व के कई देशों में, जैसे सिंगापुर, जापान, कनाडा और जर्मनी, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एक पब्लिक सेफ्टी चार्ट प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है। भारत में भी ऐसा मॉडल अपनाने का समय आ चुका है।इस भारत सुरक्षा चार्ट / इंडिया सेफ्टी कम्पलायंस चार्ट में निम्नलिखित जानकारी शामिल होनी चाहिए- (1)अंतिम फायर सेफ्टी प्रमाणन की तिथि (2) बिल्डिंग बायलॉज अनुपालन स्तर (3) इमरजेंसी निकास योजना(4)अग्निशमन उपकरणों की क्षमता व स्थिति (5) अधिनियमों के अंतर्गत उठाए गए सुरक्षा कदम (6)स्वच्छता और विद्युत सुरक्षा जांच की तिथि (7) कलेक्टर अथवा अधिकृत अधिकारी का डिजिटल सत्यापन, इस चार्ट को रेस्टोरेंट, मॉल, होटल, थिएटर, संस्थानों व नाइट क्लब के प्रवेश द्वार पर अनिवार्य रूप से लगाया जाना चाहिए, ताकि नागरिक स्वयं जान सकें कि जिस स्थान पर वे जा रहे हैं, वह सुरक्षित है या नहीं। यदि कोई प्रतिष्ठान इस चार्ट को प्रदर्शित नहीं करता, तो उसे स्वत: जोखिम-श्रेणी में रखा जाए और कलेक्टर कार्रवाई करें।
साथियों बात अगर हम लाइसेंस उल्लंघन, अवैध संचालन और गैर-अनुपालन पर कठोर कार्रवाई इसको समझने की करें तो,बिना अनुमति या नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर तत्काल लाइसेंस रद्द किया जाए,एक व्यावहारिक और नागरिक- अधिकार आधारित मांग है। भारत में कई बार देखा गया है कि अवैध ढंग से संचालित प्रतिष्ठान- (1)राजनीतिक संरक्षण, (2)पुलिस/नगर निकाय भ्रष्टाचार,(3)या सिस्टम की ढिलाई, के कारण वर्षों तक चलाते रहते हैं। जबकि वे हजारों लोगों की जान खतरे में डालते हैं।यदि कलेक्टर स्तर पर निम्न नीतियाँ लागू की जाएँ-(1)पहली बार में ₹10 लाख तक का जुर्माना+15 दिन का निलंबन (2) दूसरी बार में लाइसेंस का स्थायी रद्दीकरण(3)तीसरी बार में आपराधिक मुकदमा (आईपीसी 304, 336, 337, 338 के तहत) तो ऐसे अपराधों पर अंकुश लगेगा।नियमों का उल्लंघन केवल प्रशासनिक गलती नहीं है,यह सीधे-सीधे नागरिक जीवन को खतरे में डालने की साजिश है, जो गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। कलेक्टर यदि इसपर कड़ाई से कार्रवाई करें, तो भ्रष्टाचार की श्रृंखला स्वत: टूट जाएगी।
साथियों बात अगर हम भ्रष्टाचार इन सभी हादसों की जड़ क़ा कारण है इसको समझने की करें तो, जनता जानती है,ऐसी लापरवाही बिना नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार की मिलीभगत के संभव ही नहीं। यह एक संरचनात्मक समस्या है, जिसमें शामिल होते हैं-निरीक्षण अधिकारी,लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी,स्थानीय निकाय कर्मचारी,राजनीतिक दबाव,भ्रष्ट ठेकेदार और बिल्डर और कभी-कभी पुलिस जब भ्रष्टाचार नियमों का स्थान ले लेता है तो,(1) आग सुरक्षा कागजों में पास हो जाती है,(2)लाइसेंस रिश्वत के आधार पर जारी हो जाता है,(3)निरीक्षण रिपोर्ट फर्जी तैयार हो जाती है,(4)अवैध निर्माण को अनदेखा कर दिया जाता है,(5) और किसी दुर्घटना से पहले कोई कार्रवाई नहीं होती।गोवा का नाइट क्लब हादसा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहाँ,(1) अवैध विद्युत कनेक्शन,(2)फर्जी लाइसेंस,(3)ओवर-कैपेसिटी भीड़,(4)आपातकालीन निकास बंद,और (5)फायर सिस्टम गैर- कार्यशील,जैसी खामियाँ बाद में सामने आईं। यह सब केवल एक ही चीज़ की ओर इशारा करता है -भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता।इसलिए भारत को अब एक ऐसी प्रणाली अपनानी चाहिए जिसमें-भ्रष्टाचार का जोखिम न्यूनतम,निरीक्षण डिजिटल,लाइसेंसिंग पारदर्शी, और जिम्मेदारी शीर्ष स्तर पर निश्चितहो।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारत वर्तमान में एक अहम मोड़ पर खड़ा है। आर्थिक विकास की तेज़ रफ्तार, शहरीकरण का विस्तार, और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की बढ़ती संख्या के बीच नागरिक सुरक्षा की चुनौती दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। गोवा नाइट क्लब की आग में 25 लोगों की दर्दनाक मृत्यु इस बात की चेतावनी है कि यदि हम भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और निरीक्षण तंत्र की विफलताओं को तुरंत ठीक नहीं करते, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी सामने आते रहेंगे इसलिए आवश्यक है कि कलेक्टर-स्तरीय स्वत: संज्ञान अनिवार्य नियमित निरीक्षण,सार्वजनिक सुरक्षा चार्ट का प्रदर्शन,उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई,भ्रष्टाचार-विरोधी तंत्र का सशक्तिकरण उपायों को लागू किया जाए।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया ।