Saturday, June 27, 2026
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कोविड वैक्सीन पर लग सकती है ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग? जानें कितनी गंभीर होती है FDA की यह चेतावनी

Covid Vaccine Black Box Warning: अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) जल्द ही कोविड वैक्सीन पर अपनी सबसे गंभीर चेतावनी ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग लगाने पर विचार कर सकती है। यह चेतावनी दवाइयों के पैकेज पर मोटे काले बॉर्डर में सबसे ऊपर लिखी जाती है और इसका मतलब होता है कि उस दवा में गंभीर या जानलेवा जोखिम हो सकता है।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, FDA के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है जब अमेरिका में एक बार फिर कोविड वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक और नीतिगत बहस शुरू हो गई है। हालांकि कई बाहरी मेडिकल एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर कोविड वैक्सीन पर ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग लगाने की कोई ठोस जरूरत नहीं दिखती।

ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग क्या होती है?

ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग FDA की सबसे सख्त चेतावनी मानी जाती है। यह तभी लगाई जाती है जब किसी दवा से

• मौत का खतरा

• दिल या दिमाग को गंभीर नुकसान

• स्ट्रोक

• स्थायी विकलांगता जैसे गंभीर साइड इफेक्ट्स का जोखिम पाया जाए

उदाहरण के तौर पर, ओपिओइड दवाओं पर लत और ओवरडोज से मौत की चेतावनी दी जाती है, वहीं कुछ दवाओं पर गर्भवती महिलाओं में जन्म दोष का खतरा लिखा होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, FDA के अंदर डॉ. विनय प्रसाद इस चेतावनी को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जो पहले भी वैक्सीन नीति और सुरक्षा पर सवाल उठा चुके हैं। हालांकि यह प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में नहीं है और इसमें बदलाव संभव है।

वैक्सीन कंपनियों का क्या कहना है?

मॉडर्ना और फाइजर दोनों कंपनियों ने साफ कहा है कि उनकी कोविड वैक्सीन की सुरक्षा करोड़ों डोज़ के वैश्विक डेटा से साबित हो चुकी है। कंपनियों के अनुसार, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कोई नया गंभीर खतरा सामने नहीं आया है।

वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, कोविड वैक्सीन ने पहले ही साल में दुनियाभर में करीब 2 करोड़ लोगों की जान बचाई। वहीं CDC की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 9 महीने से 17 साल तक के बच्चों में वैक्सीन से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा काफी कम हुआ है।

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मायोकार्डाइटिस को लेकर क्या है स्थिति?

वैक्सीन के शुरुआती दौर में कुछ युवाओं में मायोकार्डाइटिस (दिल की सूजन) के दुर्लभ मामले सामने आए थे। CDC के अनुसार, ज्यादातर मरीज पूरी तरह ठीक हो गए और अब इस साइड इफेक्ट की दर पहले की तुलना में काफी कम हो चुकी है।

FDA के भीतर क्यों चल रही है चर्चा?

FDA के कुछ अधिकारी मानते हैं कि वैक्सीन के लेबल पर दिल से जुड़े दुर्लभ लेकिन गंभीर जोखिमों को और स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए। इसी कारण ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग की संभावना पर चर्चा शुरू हुई है।

हालांकि, कई पूर्व FDA कमिश्नरों ने इस कदम पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि बिना ठोस और नए वैज्ञानिक सबूतों के ऐसी चेतावनी लगाना लोगों में डर फैला सकता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

एक्सपर्ट की राय

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. एरन केसेलहाइम के मुताबिक, आमतौर पर FDA किसी दवा या वैक्सीन की सुरक्षा पर सवाल उठने पर पहले सार्वजनिक जांच और सलाहकार समिति की बैठक करता है। इसमें स्वतंत्र विशेषज्ञ डेटा की समीक्षा कर एजेंसी को सुझाव देते हैं। ऐसे बड़े फैसले आमतौर पर पारदर्शी प्रक्रिया के बाद ही लिए जाते हैं।

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आगे क्या?

फिलहाल FDA इस मुद्दे पर आंतरिक समीक्षा कर रहा है। अगर कोविड वैक्सीन पर ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग लगती है, तो इसका वैश्विक स्तर पर बड़ा संदेश जाएगा कि इस दवा के उपयोग में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह न मानें। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

भारत की धमाकेदार जीत, गेंदबाजों के कहर के बाद अभिषेक शर्मा की आंधी से दक्षिण अफ्रीका 7 विकेट से हारा

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IND vs SA 3rd T20 Match Report: भारत ने तीसरे टी20 मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 7 विकेट से करारी शिकस्त देकर पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली है। धर्मशाला में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया, जो पूरी तरह सही साबित हुआ।

भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीकी टीम को महज 117 रनों पर ऑलआउट कर दिया। इसके जवाब में टीम इंडिया ने 25 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया।

गेंदबाजों ने बरपाया कहर

धर्मशाला की पिच पर भारतीय गेंदबाजों ने शुरू से ही दबाव बनाया। अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव ने दो-दो विकेट झटके। वहीं हार्दिक पांड्या और शिवम दुबे ने एक-एक विकेट लिया।
इस मैच में हार्दिक पांड्या ने अपने टी20 करियर के 100 विकेट पूरे कर एक अहम उपलब्धि भी हासिल की।

अभिषेक शर्मा की तूफानी शुरुआत

118 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल ने आक्रामक शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले 5 ओवर में ही टीम का स्कोर 60 रन तक पहुंचा दिया।
अभिषेक शर्मा ने 18 गेंदों में 35 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 3 छक्के और 3 चौके शामिल रहे। वह बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में एडन मार्करम को कैच थमा बैठे।

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बीच के ओवरों में धीमी बल्लेबाजी

अभिषेक के आउट होने के बाद भारतीय बल्लेबाजी की रफ्तार अचानक थम गई। पहले 5 ओवर में रन रेट 12 का रहा, लेकिन 60 से 100 रन तक पहुंचने के लिए टीम इंडिया को 53 गेंदों का सामना करना पड़ा, जिससे मध्यक्रम की धीमी बल्लेबाजी पर सवाल उठे।

गिल और सूर्या की फॉर्म पर सवाल

उपकप्तान शुभमन गिल ने 28 गेंदों में 28 रन बनाए, लेकिन उनका टी20 में अर्धशतक का इंतजार अब भी जारी है।
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 12 रन बनाए, मगर एक बार फिर बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। ऐसे में आगामी मैचों में दोनों की भूमिका पर चर्चा तेज हो सकती है।

सीरीज में भारत 2-1 से आगे

इस जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-1 की बढ़त हासिल कर ली है। भारतीय गेंदबाजों का अनुशासित प्रदर्शन और अभिषेक शर्मा की आक्रामक बल्लेबाजी इस मुकाबले की सबसे बड़ी खासियत रही।

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सिडनी के बॉन्डी बीच शूटिंग में पाकिस्तान कनेक्शन, लाहौर का रहने वाला था शूटर नवीद अकरम

Sydney Terror Attack Pakistan Connection: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस हमले में शामिल शूटरों में से एक की पहचान नवीद अकरम के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पाकिस्तान के लाहौर का निवासी बताया जा रहा है। इस आतंकी हमले की भारत, अमेरिका, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन समेत कई देशों ने कड़ी निंदा की है।

ऑस्ट्रेलिया के एक वरिष्ठ कानून प्रवर्तन अधिकारी के अनुसार, नवीद अकरम सिडनी के बॉनिरिग इलाके में रह रहा था। सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें और दस्तावेज वायरल हो रहे हैं, जिनमें वह पाकिस्तान क्रिकेट टीम की जर्सी पहने नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि नवीद ने इस्लामाबाद की एक यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी और बाद में सिडनी के अल-मुराद इंस्टीट्यूट में भी अध्ययन किया।

वायरल फोटो पर पुलिस की अपील

सोशल मीडिया पर शूटर की तस्वीरें वायरल होने के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यू साउथ वेल्स (NSW) पुलिस कमिश्नर मल लैन्यन ने कहा कि यह बदले की भावना दिखाने का समय नहीं है। उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और पुलिस को निष्पक्ष जांच करने देने की अपील की।

कमिश्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि संदिग्धों में से एक को लेकर फिलहाल पुलिस के पास सीमित जानकारी है और जांच जारी है।

12 लोगों की मौत, 11 घायल

स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:30 बजे बॉन्डी बीच पर यहूदी पर्व हनुक्का के आयोजन के दौरान दो शूटरों ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस आतंकी हमले में 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, एक शूटर को मौके पर ही मार गिराया गया, जबकि दूसरा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं कोई तीसरा हमलावर या अन्य सहयोगी तो इसमें शामिल नहीं था।

यहूदियों पर हमले से इजरायल नाराज़

इस हमले को लेकर इजरायल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार पर यहूदी-विरोधी भावना को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यहूदी-विरोधी भावना एक गंभीर बीमारी है, जो नेताओं की चुप्पी से और फैलती है।

इजरायल के राष्ट्रपति ने भी ऑस्ट्रेलिया में बढ़ती यहूदी-विरोधी घटनाओं पर चिंता जताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।

PM अल्बनीज ने बताया आतंकी हमला

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने बॉन्डी बीच गोलीबारी को स्पष्ट रूप से आतंकी हमला करार दिया है। उन्होंने पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा है।

कथावाचक कैसे बनें: तेजी से उभरता करियर, कोर्स, ट्रेनिंग और कमाई की पूरी जानकारी

सोमनाथ मिश्र की कलम से

आज के डिजिटल और आध्यात्मिक युग में कथावाचक कैसे बनें यह सवाल हजारों युवाओं के मन में है। पहले कथावाचन को केवल धार्मिक सेवा माना जाता था, लेकिन अब यह एक सम्मानजनक और तेजी से उभरता हुआ करियर विकल्प बन चुका है। राम कथा, श्रीमद्भागवत कथा, शिव महापुराण, देवी भागवत और अन्य धार्मिक–सांस्कृतिक कथाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने वाले कथावाचकों को देश-विदेश में पहचान, सम्मान और अच्छी कमाई मिल रही है।

हालांकि यह पेशा बाहर से जितना सरल दिखता है, हकीकत में उतना ही गहन साधना और अभ्यास मांगता है। इसके लिए केवल धर्मग्रंथ पढ़ लेना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि भाषा, प्रस्तुति, आवाज, भाव-भंगिमा और मंच संचालन जैसी कई विधाओं में दक्ष होना जरूरी है।

कथावाचक बनने के लिए कौन-सी योग्यताएं जरूरी हैं?
अगर आप जानना चाहते हैं कि कथावाचक कैसे बनें, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इसके लिए कोई एक निश्चित डिग्री नहीं होती। यह एक बहुआयामी कला है, जिसमें निम्नलिखित योग्यताओं का होना बेहद जरूरी है:

हिंदी और संस्कृत भाषा पर मजबूत पकड़
शास्त्रों, पुराणों और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान
स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज
भावपूर्ण अभिव्यक्ति और मंच पर आत्मविश्वास
श्रोताओं से संवाद बनाने की कला
इन सभी गुणों को विकसित करने के लिए आज कई तरह के कोर्स और ट्रेनिंग उपलब्ध हैं।

कथावाचक बनने के लिए किए जाने वाले प्रमुख कोर्स

  1. पब्लिक स्पीकिंग कोर्स
    कथावाचन मूल रूप से जनसमूह के सामने बोलने की कला है। ऐसे में पब्लिक स्पीकिंग कोर्स बेहद जरूरी हो जाता है। Udemy, Coursera और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह कोर्स उपलब्ध हैं, जहां से आप भाषण कला, मंच संचालन और आत्मविश्वास विकसित कर सकते हैं।

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  1. परफॉर्मिंग आर्ट्स और एक्टिंग ट्रेनिंग
    एक सफल कथावाचक वही होता है जो कथा को जीकर सुनाए। इसके लिए बॉडी लैंग्वेज, चेहरे के भाव और हाव-भाव का सही प्रयोग जरूरी है। परफॉर्मिंग आर्ट्स, थिएटर और एक्टिंग से जुड़े कोर्स स्टेट लेवल कॉलेजों और आर्ट इंस्टीट्यूट्स में उपलब्ध हैं।
  2. धार्मिक संस्थानों से विशेष प्रशिक्षण
    धार्मिक कथावाचक बनने के लिए इस्कॉन, हरिद्वार स्थित शांतिकुंज, मठ-मंदिरों और अन्य आध्यात्मिक संस्थानों से जुड़कर विशेष प्रशिक्षण लिया जा सकता है। यहां शास्त्र अध्ययन के साथ-साथ कथा प्रस्तुति की पारंपरिक विधियां सिखाई जाती हैं।
  3. हिंदी और संस्कृत में डिग्री कोर्स
    भाषा कथावाचक की सबसे बड़ी ताकत होती है। जेएनयू, बीएचयू, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, पटना यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से हिंदी या संस्कृत में स्नातक व स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त कर आप अपनी भाषा को बेहद समृद्ध बना सकते हैं।
  4. स्टोरीटेलिंग और ऑडियो नैरेशन कोर्स
    नए दौर में पॉडकास्ट और डिजिटल ऑडियो प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ऐसे में स्टोरीटेलिंग और ऑडियो नैरेशन कोर्स करके आप डिजिटल कथावाचक के रूप में भी करियर बना सकते हैं।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से कथावाचन की पढ़ाई
वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय कथावाचक बनने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां भाषा और शास्त्र से जुड़े कई कोर्स संचालित होते हैं। हाल ही में विश्वविद्यालय ने कथावाचन से जुड़े 10 ऑनलाइन कोर्स भी शुरू किए हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थी घर बैठे इस कला में पारंगत हो सकते हैं।
कथावाचक की कमाई कितनी होती है?
कथावाचक कैसे बनें के साथ-साथ सबसे बड़ा सवाल होता है कमाई का। इस पेशे में कोई फिक्स सैलरी नहीं होती। कमाई पूरी तरह आपकी लोकप्रियता, अनुभव और माध्यम पर निर्भर करती है।
शुरुआती स्तर पर: 10,000 से 1,00,000 रुपये प्रति कथा
प्रसिद्ध कथावाचक: लाखों रुपये प्रति कार्यक्रम
टीवी, यूट्यूब और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कथावाचक: महीने में लाखों से करोड़ों रुपये तक
जैसे-जैसे आपकी पहचान और फॉलोअर्स बढ़ते हैं, वैसे-वैसे आमदनी भी कई गुना बढ़ जाती है।

डिजिटल युग में कथावाचक के नए अवसर
आज कथावाचन केवल मंच तक सीमित नहीं रहा। यूट्यूब चैनल, फेसबुक लाइव, इंस्टाग्राम रील्स और पॉडकास्ट के जरिए कथावाचक देश-दुनिया तक अपनी आवाज पहुंचा रहे हैं। इससे न सिर्फ लोकप्रियता बढ़ती है, बल्कि विज्ञापन और ब्रांड सहयोग से अतिरिक्त आय भी होती है।
अगर आपके भीतर धर्म, भाषा और संवाद की शक्ति है और आप जानना चाहते हैं कि कथावाचक कैसे बनें, तो यह करियर आपके लिए बेहद उज्ज्वल हो सकता है। सही कोर्स, निरंतर अभ्यास, गुरु का मार्गदर्शन और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही उपयोग आपको एक सफल कथावाचक बना सकता है। यह पेशा न केवल आर्थिक समृद्धि देता है, बल्कि समाज में सम्मान और आत्मिक संतोष भी प्रदान करता है।

सही मुहूर्त, सही दिशा और सही कर्म—यही है पंचांग का संदेश

पंचांग 15 दिसंबर 2025 | आज का संपूर्ण हिंदू पंचांग (सोमवार)

आज का पंचांग भारतीय संस्कृति में केवल तिथि–गणना नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। 15 दिसंबर 2025, सोमवार का दिन सफला एकादशी व्रत के कारण विशेष पुण्यदायी माना गया है। इस दिन किए गए व्रत, दान और शुभ कर्म जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करते हैं।

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📿 आज की तिथि एवं संवत विवरण
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त संवत्सर)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
चन्द्र मास:
अमांत – मार्गशीर्ष
पूर्णिमांत – पौष
ऋतु: हेमंत
अयन: दक्षिणायन
वार: सोमवार
🗓️ तिथि
कृष्ण पक्ष एकादशी: 14 दिसंबर 06:50 PM से 15 दिसंबर 09:20 PM तक
कृष्ण पक्ष द्वादशी: 15 दिसंबर 09:20 PM से 16 दिसंबर 11:57 PM तक

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👉 आज सफला एकादशी व्रत का विशेष महत्व है।
🌟 नक्षत्र
चित्रा: 15 दिसंबर 11:08 AM तक
स्वाति: 11:08 AM के बाद
🔔 योग
शोभन योग: 12:30 PM तक
अतिगण्ड योग: 12:30 PM के बाद
🔄 करण
बव: 08:03 AM तक
बालव: 09:20 PM तक
कौलव: 09:20 PM के बाद

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☀️🌙 सूर्य एवं चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:04 AM
सूर्यास्त: 05:39 PM
चन्द्रोदय: 02:49 AM
चन्द्रास्त: 02:17 PM
राशि स्थिति
सूर्य राशि:
16 दिसंबर 04:18 AM तक – वृश्चिक
इसके बाद – धनु
चंद्र राशि: तुला (पूरा दिन एवं रात)

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शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: 05:29 AM – 06:17 AM
अमृत काल: 04:09 AM – 05:57 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:00 PM – 12:43 PM
⚠️ अशुभ काल
राहु काल: 08:24 AM – 09:43 AM
यमगण्ड: 11:02 AM – 12:22 PM
कुलिक काल: 01:41 PM – 03:00 PM

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दुर्मुहूर्त:
12:43 PM – 01:25 PM
02:49 PM – 03:32 PM
वर्ज्यम: 05:26 PM – 07:14 PM
विशेष योग
आनन्दादि योग:
मुद्गर – 11:08 AM तक
छत्र – इसके बाद
सर्वार्थसिद्धि योग: ❌ आज नहीं
🧭 दिशा शूल एवं यात्रा विचार
सोमवार: पूर्व दिशा की यात्रा वर्जित
यदि यात्रा आवश्यक हो तो दही या दूध का सेवन करके यात्रा करें।
लाभकारी दिशा: उत्तर एवं पश्चिम दिशा की यात्रा शुभ फल देती है।

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🌙 चंद्र बल (16 दिसंबर 07:05 AM तक)
मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु और मकर राशि वालों के लिए दिन अनुकूल।
🔱 आज का व्रत–त्योहार
सफला एकादशी व्रत
यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति, पाप नाश और जीवन में स्थिरता प्रदान करता है।

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📌 नोट– इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए “राष्ट्र की परम्परा” उत्तरदायी नहीं है। किसी भी धार्मिक, ज्योतिषीय या महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व कृपया योग्य विद्वान या आचार्य से परामर्श अवश्य लें।

युद्ध, शांति, साहित्य और विज्ञान की निर्णायक घटनाएँ

इतिहास के पन्नों में 15 दिसंबर: जब एक तारीख ने दुनिया की दिशा बदली

इतिहास केवल तारीखों का संकलन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की स्मृतियाँ, संघर्ष, उपलब्धियाँ और चेतावनियाँ भी है। 15 दिसंबर ऐसी ही एक तारीख है, जिसने विश्व राजनीति, युद्ध, साहित्य, विज्ञान, आपदा, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गहरी छाप छोड़ी है। इस दिन घटित घटनाएँ हमें बताती हैं कि समय का एक छोटा-सा पल भी आने वाली पीढ़ियों की सोच और व्यवस्था को बदल सकता है। आइए, 15 दिसंबर की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं पर क्रमवार विस्तार से दृष्टि डालते हैं।

2014 – सिडनी कैफे बंधक कांड
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में स्थित लिंड्ट चॉकलेट कैफे में हारुण मोनिस नामक व्यक्ति ने हथियार के बल पर कई लोगों को लगभग 16 घंटे तक बंधक बना लिया। यह घटना वैश्विक आतंकवाद के खतरे की गंभीरता को दर्शाती है। पुलिस की विशेष कार्रवाई के दौरान मोनिस सहित तीन लोगों की मृत्यु हुई। इस घटना ने ऑस्ट्रेलिया सहित पूरी दुनिया में सुरक्षा व्यवस्था और कट्टरपंथ पर नई बहस छेड़ दी।

2010 – क्रिसमस द्वीप नाव दुर्घटना
ऑस्ट्रेलिया के क्रिसमस द्वीप के समीप शरणार्थियों से भरी एक नाव दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें 48 से अधिक लोगों की जान चली गई। यह हादसा वैश्विक शरणार्थी संकट और अवैध प्रवासन के खतरों को उजागर करता है। बेहतर मानवीय नीति और समुद्री सुरक्षा की आवश्यकता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई।

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2008 – राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को मंजूरी
भारत सरकार ने आतंकवाद से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के गठन को स्वीकृति दी। यह निर्णय 26/11 मुंबई आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में लिया गया था। NIA आज भारत की आंतरिक सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है।

2007 – पाकिस्तान में आपातकालीन कानून
पाकिस्तान में आपातकालीन नागरिक कानून लागू किया गया, जिससे न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक स्वतंत्रताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा। इस निर्णय ने लोकतंत्र बनाम सैन्य प्रभाव की बहस को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभारा।

2005 – इराक में लोकतांत्रिक चुनाव
इराक में नई सरकार के गठन हेतु मतदान संपन्न हुआ। सद्दाम हुसैन के पतन के बाद यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया देश के पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी, हालांकि अस्थिरता की चुनौतियाँ बनी रहीं।

2003 – भूटान में उग्रवाद के विरुद्ध कार्रवाई
भूटान सरकार ने अपने क्षेत्र में सक्रिय भारतीय अलगाववादी संगठनों के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की। यह भारत-भूटान संबंधों में विश्वास और सहयोग का ऐतिहासिक उदाहरण माना जाता है।

2001 – पीसा की झुकी मीनार फिर से खुली
इटली की विश्वप्रसिद्ध पीसा की झुकी मीनार को 11 वर्षों के संरचनात्मक सुधार के बाद जनता के लिए पुनः खोला गया। यह इंजीनियरिंग और सांस्कृतिक संरक्षण की बड़ी सफलता थी।

2000 – चेरनोबिल परमाणु रिएक्टर बंद
यूक्रेन स्थित चेरनोबिल परमाणु संयंत्र को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। 1986 की भयावह दुर्घटना के बाद यह कदम परमाणु सुरक्षा के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था।

1997 – आतंकवादी विस्फोटों के खिलाफ UN प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सार्वजनिक स्थलों पर किए जाने वाले आतंकी विस्फोटों को अवैध घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया, जिससे वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध कानूनी ढांचा मजबूत हुआ।

अरुंधति रॉय को बुकर पुरस्कार
भारतीय लेखिका अरुंधति रॉय को उनके उपन्यास द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स के लिए बुकर पुरस्कार मिला। यह भारतीय साहित्य के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान का स्वर्णिम क्षण था।

1995 – यूरो मुद्रा पर सहमति
यूरोपीय यूनियन के देशों ने साझा मुद्रा यूरो को अपनाने पर सहमति जताई, जिसने यूरोप की आर्थिक एकता को नई मजबूती दी।

1993 – विश्व व्यापार समझौता
जेनेवा में 126 देशों ने गैट समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसने आगे चलकर विश्व व्यापार संगठन (WTO) की नींव रखी।

1991 – सत्यजीत रे को स्पेशल ऑस्कर
भारतीय सिनेमा के महान निर्देशक सत्यजीत रे को उनके अतुलनीय योगदान के लिए विशेष ऑस्कर से सम्मानित किया गया। यह भारतीय फिल्म जगत के लिए गर्व का क्षण था।

1953 – विजयलक्ष्मी पंडित का ऐतिहासिक चयन
भारत की विजयलक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष चुनी गईं। यह वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक शक्ति का प्रतीक था।

1911 – बीएचयू की स्थापना
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना ने भारत में आधुनिक शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण की दिशा को मजबूत किया।

1794 से 1803 तक की ऐतिहासिक घटनाएँ
फ्रांस में क्रांतिकारी ट्रिब्यूनल का अंत, ओडिशा पर ईस्ट इंडिया कंपनी का कब्ज़ा, और छत्रपति शिवाजी के वंश से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग—ये सभी घटनाएँ सत्ता, संघर्ष और परिवर्तन की कहानी कहती हैं।
15 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास की वह कड़ी है जिसने विश्व को युद्ध, शांति, लोकतंत्र, आपदा, संस्कृति और विज्ञान के अनेक सबक दिए। अतीत की इन घटनाओं को जानना हमें वर्तमान को समझने और भविष्य को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

मेष से मीन तक – जानिए आज का दिन करियर, धन, शिक्षा और जीवन पर क्या प्रभाव डालेगा

✍️ पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय

राशिफल | 15 दिसंबर 2025
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल आज कई राशियों के लिए उन्नति के नए द्वार खोल सकती है, वहीं कुछ जातकों को संयम और विवेक से काम लेने की आवश्यकता रहेगी। यह राशिफल चंद्र राशि के आधार पर तैयार किया गया है। आइए जानते हैं आज का दिन आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा।

मेष राशि (Aries ♈ | अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

आज ऊर्जा और आत्मविश्वास भरपूर रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में नए ऑर्डर या डील संभव है।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को लाभ होगा।
कला/संगीत: रचनात्मक विचार सराहे जाएंगे।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी, जनसंपर्क बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के संकेत, अनावश्यक खर्च से बचें।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
पूजन: भगवान शिव या हनुमान जी

वृषभ राशि (Taurus ♉ | अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

मानसिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: बदलाव के योग हैं, धैर्य से निर्णय लें।
शिक्षा: विषय बदलने या नई स्किल सीखने का विचार आएगा।
कला/संगीत: गायन व डिजाइन से जुड़े लोगों को अवसर।
राजनीति/प्रशासन: संयमित भाषा लाभ देगी।
आर्थिक स्थिति: निवेश सोच-समझकर करें।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6
पूजन: माता लक्ष्मी

मिथुन राशि (Gemini ♊ | अक्षर: का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को)
दिन व्यस्त लेकिन फलदायी रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: यात्रा या विदेश से जुड़ा काम बन सकता है।
शिक्षा: एकाग्रता की कमी हो सकती है, टाइम मैनेजमेंट जरूरी।
कला/संगीत: लेखन और मीडिया में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: रणनीति से लाभ।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
पूजन: भगवान गणेश

कर्क राशि (Cancer ♋ | अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
भावनात्मक रूप से सशक्त दिन।
कार्य/व्यवसाय: घर से काम या फैमिली बिजनेस में लाभ।
शिक्षा: आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज के छात्रों के लिए अच्छा।
कला/संगीत: अभिनय व फोटोग्राफी में प्रशंसा।
राजनीति/प्रशासन: जनसमर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता बनी रहेगी।
शुभ रंग: क्रीम | शुभ अंक: 2
पूजन: भगवान शिव

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सिंह राशि (Leo ♌ | अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आत्मसम्मान और रोमांस दोनों बढ़ेंगे।
कार्य/व्यवसाय: निवेश या फंडिंग मिलने के योग।
शिक्षा: मैनेजमेंट व टेक्निकल स्टूडेंट्स को लाभ।
कला/संगीत: मंच से जुड़े लोगों को पहचान।
राजनीति/प्रशासन: पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि।
आर्थिक स्थिति: आय में सुधार।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1
पूजन: सूर्य देव

कन्या राशि (Virgo ♍ | अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
स्वास्थ्य पर ध्यान आवश्यक।
कार्य/व्यवसाय: प्रमोशन से जुड़ा कार्य मिल सकता है।
शिक्षा: रिसर्च और मेडिकल छात्रों के लिए शुभ।
कला/संगीत: बारीक काम में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: कागजी कार्यों में सावधानी।
आर्थिक स्थिति: धन अटक सकता है।
शुभ रंग: हल्का हरा | शुभ अंक: 5
पूजन: भगवान विष्णु

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तुला राशि (Libra ♎ | अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
संतुलन और विवेक जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: ऑफिस पॉलिटिक्स से दूरी रखें।
शिक्षा: लॉ और सोशल साइंस में प्रगति।
कला/संगीत: फैशन व डिजाइन में अवसर।
राजनीति/प्रशासन: सहयोग से सफलता।
आर्थिक स्थिति: उधार देने से बचें।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 6
पूजन: माता दुर्गा

वृश्चिक राशि (Scorpio ♏ | अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
दिन अत्यंत प्रोडक्टिव।
कार्य/व्यवसाय: नई जिम्मेदारी या पद परिवर्तन।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता।
कला/संगीत: लेखन व रिसर्च में गहराई।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: लाभ के प्रबल योग।
शुभ रंग: मैरून | शुभ अंक: 9
पूजन: भगवान शिव

धनु राशि (Sagittarius ♐ | अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
भाग्य का साथ मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय: योजनाएं सफल होंगी।
शिक्षा: उच्च शिक्षा व विदेश अध्ययन के योग।
कला/संगीत: ट्रैवल ब्लॉगिंग व लेखन में लाभ।
राजनीति/प्रशासन: नीति-निर्धारण में भूमिका।
आर्थिक स्थिति: बचत बढ़ेगी।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3
पूजन: विष्णु जी

मकर राशि (Capricorn ♑ | अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
सामान्य लेकिन स्थिर दिन।
कार्य/व्यवसाय: मेहनत का फल देर से मिलेगा।
शिक्षा: अनुशासन से सफलता।
कला/संगीत: सीखने का समय।
राजनीति/प्रशासन: जिम्मेदारियां बढ़ेंगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च नियंत्रित रखें।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 8
पूजन: शनिदेव

कुंभ राशि (Aquarius ♒ | अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
योजना बनाकर आगे बढ़ें।
कार्य/व्यवसाय: क्लाइंट से मतभेद संभव, संवाद रखें।
शिक्षा: टेक्नोलॉजी छात्रों को लाभ।
कला/संगीत: इनोवेशन से पहचान।
राजनीति/प्रशासन: सुधारात्मक भूमिका।
आर्थिक स्थिति: संतुलित रहेगी।
शुभ रंग: बैंगनी | शुभ अंक: 4
पूजन: भगवान गणेश

मीन राशि (Pisces ♓ | अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
रचनात्मक ऊर्जा चरम पर।
कार्य/व्यवसाय: क्रिएटिव फील्ड में लाभ।
शिक्षा: पढ़ाई पर फोकस जरूरी।
कला/संगीत: संगीत, पेंटिंग में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: भाग्य का साथ मिलेगा।
शुभ रंग: आसमानी | शुभ अंक: 7
पूजन: भगवान विष्णु

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष की प्रमाणिकता का दावा नहीं करता। अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से अवश्य कराएं।

खेल, संगीत और राजनीति: एक तारीख, अनेक प्रेरणाएँ

15 दिसंबर: इतिहास के पन्नों में अमर नाम—जिन्होंने भारत की पहचान को नई ऊँचाइयाँ दीं

15 दिसंबर भारतीय इतिहास और समकालीन समाज के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन राजनीति, खेल, संगीत, अध्यात्म और संस्कृति के ऐसे-ऐसे महान व्यक्तित्वों का जन्म हुआ, जिन्होंने अपने कर्म, संघर्ष और प्रतिभा से न केवल देश का नाम रोशन किया बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बने। आइए, इतिहास के महत्वपूर्ण जन्मदिन पर उन व्यक्तित्वों को स्मरण करें, जिनकी छाप भारत के सामाजिक और राष्ट्रीय मानस पटल पर अमिट है।

गीता फोगाट (जन्म: 15 दिसंबर 1988)

जन्म स्थान: बलाली गाँव, चरखी दादरी जिला, हरियाणा, भारत
गीता फोगाट भारतीय महिला कुश्ती की अग्रदूत मानी जाती हैं। वह पहली भारतीय महिला पहलवान हैं जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। हरियाणा जैसे ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना आसान नहीं था, लेकिन गीता ने कठोर परिश्रम और आत्मविश्वास से यह कर दिखाया। उन्होंने न केवल खेल जगत में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया बल्कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी सामाजिक सोच को भी मजबूती दी। उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन और महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है।

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भरत छेत्री (जन्म: 15 दिसंबर 1981)
जन्म स्थान: उत्तर-पूर्व भारत (सिक्किम क्षेत्र), भारत
भरत छेत्री भारतीय हॉकी के जाने-माने खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी फुर्ती, टीम भावना और खेल कौशल से पहचान बनाई। हॉकी जैसे खेल में, जहाँ भारत की ऐतिहासिक विरासत रही है, छेत्री ने नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उनका योगदान भारतीय हॉकी के पुनर्निर्माण और खेल संस्कृति को जीवित रखने में अहम रहा है।

बाइचुंग भूटिया (जन्म: 15 दिसंबर 1976)
जन्म स्थान: तिनजुंग, दक्षिण सिक्किम, भारत
बाइचुंग भूटिया भारतीय फुटबॉल के सबसे चमकते सितारों में से एक हैं। ‘सिक्किम का शेर’ कहे जाने वाले भूटिया ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में भारत को नई पहचान दिलाई। वे यूरोपीय क्लब के लिए खेलने वाले पहले भारतीय खिलाड़ियों में शामिल रहे। खेल के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक मुद्दों, विशेषकर उत्तर-पूर्व भारत की पहचान और युवाओं के विकास के लिए भी काम किया। उनका जीवन नेतृत्व, अनुशासन और देशभक्ति का प्रतीक है।

बाबुल सुप्रियो (जन्म: 15 दिसंबर 1970)
जन्म स्थान: कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
बाबुल सुप्रियो बहुआयामी प्रतिभा के धनी हैं। एक सफल पार्श्वगायक के रूप में उन्होंने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए। इसके बाद राजनीति में प्रवेश कर वे सांसद बने और जनसेवा को अपना उद्देश्य बनाया। कला और राजनीति—दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित किया। उनका योगदान सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक मूल्यों को जोड़ने का उदाहरण है।
शुभेन्दु अधिकारी (जन्म: 15 दिसंबर 1970)
जन्म स्थान: पूर्व मेदिनीपुर जिला, पश्चिम बंगाल, भारत
शुभेन्दु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक प्रभावशाली नाम हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई। संगठन क्षमता, जमीनी पकड़ और स्पष्ट राजनीतिक दृष्टिकोण उनकी पहचान है। उनका योगदान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
भजन लाल शर्मा (जन्म: 15 दिसंबर 1966)
जन्म स्थान: भरतपुर जिला, राजस्थान, भारत
भजन लाल शर्मा राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की राजनीति में एक नई ऊर्जा लेकर आए हैं। संगठनात्मक अनुभव और अनुशासित नेतृत्व शैली के लिए जाने जाते हैं। उनका फोकस सुशासन, विकास और जनकल्याण पर रहा है। ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों के संतुलित विकास की उनकी सोच उन्हें एक जनप्रिय नेता बनाती है।
उषा मंगेशकर (जन्म: 15 दिसंबर 1935)
जन्म स्थान: गोवा, भारत
उषा मंगेशकर भारतीय संगीत जगत की एक सशक्त आवाज़ हैं। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन होने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। भक्ति गीतों से लेकर फिल्मी संगीत तक, उनकी मधुर आवाज़ ने श्रोताओं के दिलों में स्थायी स्थान बनाया। भारतीय संगीत परंपरा को सहेजने और आगे बढ़ाने में उनका योगदान अमूल्य है।
स्वामी रंगनाथानन्द (जन्म: 15 दिसंबर 1908)
जन्म स्थान: केरल, भारत
स्वामी रंगनाथानन्द रामकृष्ण संघ के महान संन्यासी और विचारक थे। उन्होंने वेदांत दर्शन को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत कर समाज को आध्यात्मिक दिशा दी। भारत और विदेशों में उनके प्रवचनों ने मानवता, नैतिकता और आत्मबोध का संदेश फैलाया। उनका जीवन सेवा, साधना और ज्ञान का अद्भुत संगम रहा।

आर. के. खाडिलकर (जन्म: 15 दिसंबर 1905)
जन्म स्थान: महाराष्ट्र, भारत
आर. के. खाडिलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ रहे। स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्र भारत की राजनीति में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता के पक्षधर थे। उनका जीवन सादगी और सार्वजनिक सेवा का प्रतीक है।
भगवंतराव मंडलोई (जन्म: 15 दिसंबर 1892)
जन्म स्थान: मध्य प्रदेश, भारत
भगवंतराव मंडलोई मध्य प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री थे। स्वतंत्रता के बाद राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही। कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुधार उनके कार्यक्षेत्र के प्रमुख बिंदु थे। उन्होंने जनसेवा को राजनीति का मूल उद्देश्य माना।

15 दिसंबर को जन्मे ये सभी महान व्यक्तित्व अपने-अपने क्षेत्र में दीपस्तंभ की तरह हैं। इनकी जीवन यात्राएँ हमें यह सिखाती हैं कि संकल्प, परिश्रम और सेवा भावना से कोई भी व्यक्ति इतिहास में अमर हो सकता है।

करियर–धन–राजनीति–कला पर अस

अंक राशिफल 15 दिसंबर 2025: मूलांक 1 से 9 तक का आज का भविष्य

करियर–धन–राजनीति–कला पर असर | पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा)

ज्योतिष शास्त्र की तरह अंक ज्योतिष भी व्यक्ति के जीवन, स्वभाव, भविष्य और निर्णय क्षमता को समझने का प्रभावी माध्यम है। जन्मतिथि के आधार पर निकाला गया मूलांक व्यक्ति की सोच, कर्म और भाग्य पर गहरा प्रभाव डालता है।
15 दिसंबर 2025 का दिन किन मूलांकों के लिए शुभ है और किन्हें सतर्क रहने की आवश्यकता है—आइए जानते हैं पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत विस्तृत अंक राशिफल।

🔢 मूलांक 1 (सूर्य का प्रभाव)
आज का प्रभाव: आत्मबल और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि
कार्य/व्यवसाय: प्रशासन, सरकारी सेवा, मैनेजमेंट और राजनीति से जुड़े लोगों के लिए दिन अनुकूल। निर्णय क्षमता मजबूत रहेगी।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता के संकेत।
कला/संगीत: मंचीय कला से जुड़े लोगों को पहचान मिल सकती है।
आर्थिक स्थिति: आय में सुधार, लेकिन दिखावे पर खर्च से बचें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव को जल अर्पित करें
🔢 मूलांक 2 (चंद्र का प्रभाव)
आज का प्रभाव: भावनात्मक संतुलन आवश्यक
कार्य/व्यवसाय: साझेदारी के काम में सावधानी रखें। सरकारी कागजात ध्यान से पढ़ें।
शिक्षा: मन भटक सकता है, ध्यान और एकाग्रता जरूरी।
कला/संगीत: लेखन, गायन और रचनात्मक क्षेत्र में प्रगति।
राजनीति: बयानबाजी से बचें।
आर्थिक स्थिति: सामान्य, अनावश्यक उधार से बचें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा: भगवान शिव या चंद्र देव

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🔢 मूलांक 3 (गुरु का प्रभाव)
आज का प्रभाव: सम्मान और प्रगति का दिन
कार्य/व्यवसाय: शिक्षा, मीडिया, प्रशासन, कंसल्टेंसी में लाभ।
शिक्षा: शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए श्रेष्ठ दिन।
कला/संगीत: साहित्य, लेखन, मंच संचालन में सफलता।
राजनीति: वरिष्ठ नेताओं से सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के प्रबल योग।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा: भगवान विष्णु या बृहस्पति

🔢 मूलांक 4 (राहु का प्रभाव)
आज का प्रभाव: संघर्ष के बाद सफलता
कार्य/व्यवसाय: तकनीकी, आईटी, निर्माण क्षेत्र में उतार-चढ़ाव।
शिक्षा: विषय समझने में समय लगेगा, धैर्य रखें।
कला/संगीत: नई शैली अपनाने से लाभ।
राजनीति/प्रशासन: विवादों से दूरी बनाए रखें।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा: मां दुर्गा
🔢 मूलांक 5 (बुध का प्रभाव)
आज का प्रभाव: अवसर और गतिशीलता
कार्य/व्यवसाय: व्यापार, मार्केटिंग, मीडिया, पत्रकारिता में उन्नति।
शिक्षा: कम्युनिकेशन और मैनेजमेंट स्टूडेंट्स के लिए शुभ।
कला/संगीत: सोशल मीडिया से पहचान।
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होगा।
आर्थिक स्थिति: लाभ के योग।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान गणेश

🔢 मूलांक 6 (शुक्र का प्रभाव)
आज का प्रभाव: सुख-सौंदर्य और प्रेम
कार्य/व्यवसाय: फैशन, डिजाइन, फिल्म, कला जगत के लिए लाभकारी।
शिक्षा: क्रिएटिव फील्ड में रुचि बढ़ेगी।
राजनीति: छवि निखरेगी।
आर्थिक स्थिति: धन आगमन के योग।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा: मां लक्ष्मी
🔢 मूलांक 7 (केतु का प्रभाव)
आज का प्रभाव: आध्यात्म और आत्मचिंतन
कार्य/व्यवसाय: रिसर्च, अध्यात्म, चिकित्सा क्षेत्र में लाभ।
शिक्षा: गूढ़ विषयों में रुचि।
कला/संगीत: शास्त्रीय संगीत और साधना से जुड़ाव।
राजनीति/प्रशासन: पर्दे के पीछे रहकर कार्य करना लाभकारी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूजा: भगवान गणेश व दुर्गा

🔢 मूलांक 8 (शनि का प्रभाव)
आज का प्रभाव: जिम्मेदारी और कर्म
कार्य/व्यवसाय: सरकारी ठेके, उद्योग, श्रम क्षेत्र में मेहनत अधिक।
शिक्षा: अनुशासन जरूरी।
राजनीति: संघर्ष के बाद लाभ।
आर्थिक स्थिति: निवेश सोच-समझकर करें।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजा: भगवान शनि या हनुमान

🔢 मूलांक 9 (मंगल का प्रभाव)
आज का प्रभाव: साहस और ऊर्जा
कार्य/व्यवसाय: पुलिस, सेना, खेल, राजनीति में सफलता।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़त।
कला/संगीत: जोशपूर्ण प्रस्तुति से प्रशंसा।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूजा: भगवान हनुमान

⚠️ डिस्क्लेमर:
यह अंक राशिफल अंक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित सामान्य अनुमान है। राष्ट्र की परम्परा इस अंक ज्योतिष की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएं।

मन, अमृत और शिव का संगम: शास्त्रों में चन्द्रमा की महिमा का रहस्य

🌙 जब चन्द्र बना आत्मा का साक्षी — शास्त्र, विज्ञान और भावना के संगम से जन्मी चन्द्रमा की दिव्य गाथा

✨ चन्द्र केवल आकाश का पिंड नहीं रहा, वह मानव चेतना का दर्पण बन चुका था। वहीं से कथा एक नए, गहन और आध्यात्मिक मोड़ पर पहुँचती है।चन्द्रमा का स्वरूप और अधिक विराट होता है—जहाँ वह देव, द्रष्टा, चिकित्सक, समय-नियंता और मन का अधिष्ठाता बनकर प्रकट होता है।
यह कथा केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि मानव जीवन, मनोविज्ञान और ब्रह्मांडीय संतुलन की शास्त्रोक्त व्याख्या है।

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🌕चन्द्र — मन का अधिपति और अमृत का वाहक
शास्त्रों में कहा गया है—
“चन्द्रमा मनसो जातः”
अर्थात् चन्द्रमा स्वयं मन से उत्पन्न है और मन पर शासन करता है।
जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, तब चेतना के प्रवाह को संतुलित रखने के लिए एक ऐसे तत्त्व की आवश्यकता थी जो शीतल, सौम्य और स्थिर हो। उसी क्षण चन्द्र का उदय हुआ—जो उग्र सूर्य के विपरीत शांति का प्रतिनिधि बना।

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📜 शास्त्रोक्त उत्पत्ति कथा: चन्द्र का ब्रह्मांडीय जन्म
ऋग्वेद और पुराणों में वर्णन आता है कि चन्द्रमा समुद्र मंथन से उत्पन्न अमृत का संरक्षक है। देवताओं को अमरत्व मिला, पर चन्द्र को मिला—अमृत का निरंतर पान करने का अधिकार, जिससे वह क्षय और वृद्धि के चक्र में बँधा।
👉 यही कारण है कि चन्द्रमा घटता-बढ़ता है—यह केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि कर्म और पुनर्जन्म का प्रतीक है।
🧠 चन्द्र और मानव मन: शास्त्र बनाम विज्ञान
आयुर्वेद कहता है—
चन्द्र = मन
सूर्य = आत्मा
आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार करता है कि—
पूर्णिमा को मानसिक संवेदनशीलता बढ़ती है
अमावस्या पर अवसाद और बेचैनी अधिक होती है।यह संयोग नहीं, बल्कि शास्त्र और विज्ञान का अद्भुत संगम है।
चन्द्र मन को:शीतल करता है,भावनाओं को दिशा देता है,स्मृति और कल्पना को जन्म देता है
🌊 चन्द्रमा और जल तत्त्व: जीवन का अदृश्य सूत्र
शास्त्रों में कहा गया है— “चन्द्र जलाधिपः”
चन्द्रमा समुद्र में ज्वार-भाटा ही नहीं, बल्कि—
शरीर के जल संतुलन,रक्त प्रवाह,हार्मोनल चक्र को भी नियंत्रित करता है।
👉 यही कारण है कि चन्द्रदोष से व्यक्ति—
अस्थिर,भ्रमित,भावुक,निर्णयहीन,हो जाता है।
🕉️ चन्द्र और शिव: वैराग्य तथा करुणा का संगम
भगवान शिव के मस्तक पर चन्द्र का वास यूँ ही नहीं है।
शिव = संहार और वैराग्य
चन्द्र = करुणा और मन
जब दोनों मिलते हैं, तब जन्म लेता है— संतुलित जीवन ,शिव के मस्तक पर चन्द्र यह सिखाता है कि— “मन को जीत लिया, तो सृष्टि स्वतः जीत ली।”

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🌙 चन्द्र की 27 कलाएँ और नक्षत्रों से संबंध
चन्द्र 27 नक्षत्रों में भ्रमण करता है—
प्रत्येक नक्षत्र एक मानसिक प्रवृत्ति दर्शाता है
व्यक्ति का जन्म नक्षत्र उसके चित्त-वृत्ति का आधार बनता है
👉 यही कारण है कि जन्म कुंडली में चन्द्र को सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है।
📿 शास्त्रोक्त चन्द्र उपासना का महत्व
पुराणों में वर्णन है कि—
सोमवार का व्रत,चन्द्र मंत्र जाप,शिव अभिषेक में दूध अर्पण,मन को शुद्ध करता है।,“ॐ सोम सोमाय नमः”यह मंत्र केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक चिकित्सा का सूत्र है।

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🌌 भावनात्मक निष्कर्ष: चन्द्र भीतर भी है
चन्द्र केवल आकाश में नहीं—वह हमारी स्मृति में है,वह हमारी करुणा में है,वह हमारे आँसुओं में है
जब मन अशांत हो, तब आकाश में चन्द्र को देखना—
स्वयं से मिलने जैसा होता है।
एपिसोड–6 यहीं नहीं रुकता, आगे की कथा में चन्द्र का कर्म, दोष, शाप और मोक्ष—मानव जीवन के और गहरे रहस्यों को उजागर करेगा।

भारतीय इतिहास की ऐसी तिथियाँ जो हमेशा याद रखी जाएँगी

इतिहास की अमर तिथियाँ: 15 दिसंबर को देश–दुनिया ने जिन महान व्यक्तित्वों को खोया

इतिहास केवल तिथियों का क्रम नहीं होता, बल्कि उन व्यक्तित्वों की स्मृति भी होता है, जिन्होंने अपने विचार, कला, त्याग और संघर्ष से समय को दिशा दी। 15 दिसंबर ऐसी ही एक तिथि है, जब भारत और विश्व ने अनेक महान आत्माओं को खोया। इन विभूतियों का जीवन आज भी समाज, संस्कृति, राजनीति और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। आइए 15 दिसंबर को हुए महत्वपूर्ण निधन पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।

उस्ताद जाकिर हुसैन (निधन: 15 दिसंबर 2024)
जन्म: 9 मार्च 1951
जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
विश्वविख्यात तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन भारतीय शास्त्रीय संगीत के ऐसे सितारे थे, जिन्होंने तबले को वैश्विक पहचान दिलाई। वे महान उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र थे और बचपन से ही संगीत की कठोर साधना में रमे रहे।
भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोप में भी उन्होंने भारतीय संगीत की आत्मा को मंचों तक पहुँचाया। पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित जाकिर हुसैन ने फ्यूजन संगीत को भी नई ऊँचाइयाँ दीं।
सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में उनका निधन भारतीय सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना गया।

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वरुण सिंह (निधन: 15 दिसंबर 2021)
जन्म: उत्तर प्रदेश, भारत
वरुण सिंह भारतीय वायु सेना के एक साहसी और कर्तव्यनिष्ठ जवान थे। वे हेलीकॉप्टर यूनिट से जुड़े थे और देश सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म मानते थे।
उनका नाम उस सैन्य दुर्घटना से जुड़ा है, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया। सीमित संसाधनों में भी अनुशासन, निष्ठा और साहस का परिचय देना उनके जीवन की पहचान रही।
वरुण सिंह जैसे सैनिक राष्ट्र की सुरक्षा के अदृश्य स्तंभ होते हैं, जिनका योगदान शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता।

गौर किशोर घोष (निधन: 15 दिसंबर 2000)
जन्म: 20 जुलाई 1928
जन्म स्थान: बंगाल, भारत
गौर किशोर घोष हिंदी पत्रकारिता के निर्भीक और प्रतिबद्ध स्वर थे। वे ऐसे लेखक थे जिन्होंने सत्ता, व्यवस्था और सामाजिक विसंगतियों पर बेबाक लेखनी चलाई।
आपातकाल के दौर में उनकी पत्रकारिता साहस का प्रतीक बनी। उन्होंने लेखन को केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व माना।
उनकी रचनाएँ आज भी पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक हैं और लोकतंत्र की आत्मा को जीवित रखती हैं।

शिवसागर रामगुलाम (निधन: 15 दिसंबर 1985)
जन्म: 18 सितंबर 1900
जन्म स्थान: मॉरिशस
शिवसागर रामगुलाम मॉरिशस के पहले प्रधानमंत्री और बाद में गवर्नर जनरल रहे। भारतीय मूल के इस नेता ने मॉरिशस को औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
उन्होंने भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं को मॉरिशस में संरक्षित रखने का कार्य किया।
उनका जीवन प्रवासी भारतीयों के गौरव, संघर्ष और सफलता की जीवंत मिसाल है।

पोट्टि श्रीरामुलु (निधन: 15 दिसंबर 1952)
जन्म: 16 मार्च 1901
जन्म स्थान: मद्रास प्रेसिडेंसी (अब तमिलनाडु, भारत)
पोट्टि श्रीरामुलु एक महान स्वतंत्रता सेनानी और महात्मा गांधी के अनुयायी थे। उन्होंने आंध्र प्रदेश राज्य के गठन के लिए आमरण अनशन किया।
उनकी मृत्यु के बाद देश में व्यापक जनआंदोलन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
श्रीरामुलु का त्याग भारतीय लोकतंत्र में जनभावनाओं की शक्ति का ऐतिहासिक उदाहरण है।

सरदार वल्लभभाई पटेल (निधन: 15 दिसंबर 1950)
जन्म: 31 अक्टूबर 1875
जन्म स्थान: नडियाद, गुजरात, भारत
सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें लौह पुरुष कहा जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री थे।
562 रियासतों का शांतिपूर्ण विलय कर उन्होंने भारत की अखंडता को सुनिश्चित किया।
उनका दृढ़ नेतृत्व, प्रशासनिक क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण भारत की नींव को मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ।
15 दिसंबर को हुए महत्वपूर्ण निधन हमें याद दिलाते हैं कि इतिहास व्यक्तियों से बनता है और उनके विचारों से जीवित रहता है। इन महान आत्माओं की विरासत आज भी हमारी संस्कृति, लोकतंत्र और राष्ट्रीय चेतना को दिशा दे रही है।

“बापू के नाम पर राजनीति: हिंदू राष्ट्र परियोजना और ग्रामीण गरीबों पर प्रहार”

महात्मा अब बापू बने जिनके रूप अनेक

लेखक-संजय पराते

इस देश में महात्मा केवल एक है — महात्मा गांधी, रघुपति राघव राजाराम वाले महात्मा गांधी। वहीं महात्मा गांधी, जो इस देश की बहुलतावादी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं और जिसके कारण गोडसे ने उनकी हत्या कर दी थी।

इस देश में बापू अनेक है। आसाराम बापू हैं, मोरारी बापू हैं। बापूओं की फौज हैं और इनमें से लगभग सभी उस हिंदुत्व की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसके लिए संघी गिरोह जाना-पहचाना जाता है। कथावाचक बापूओं की इस भीड़ में कोई श्री 420 हैं, तो कोई अपनी आशिकी के लिए प्रसिद्ध और कोई बलात्कारी के रूप में जेल में भी है। हालांकि बापू महात्मा गांधी को भी कहते हैं, लेकिन इस शब्द का उच्चारण करते शायद ही उनकी छवि कभी दिमाग में उभरती हो। बापू के नाम से किसी संघी बापू का चेहरा ही मन में उभरता है।

किसी का नाम बदलकर हत्या करना और इस तरह कि कोई इस अपकृत्य को साबित भी न कर सके, संघी गिरोह का जाना-पहचाना खेल है। गोडसे के जन्म दिन पर महात्मा गांधी की मूर्तियों पर गोलियां दागने से इनका मन नहीं भरा है, तो गांधीजी की हत्या का यह एक और तरीका ढूंढ निकाला गया है। मनरेगा अब पूबारेगा हो गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का नाम संघी गिरोह ने अब बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना कर दिया है। धीरे से योजना के बोर्डों से महात्मा गांधी की तस्वीर कब उतर जाएगी और कब आसाराम या मोरारी बापू चढ़ जाएंगे, पता भी नहीं चलेगा। नामों को बदलना और काम की गुणवत्ता को गिराना — इस धर्मनिरपेक्ष देश को हिंदू राज में बदलने की पहली निशानी है।

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महात्मा गांधी और मनरेगा संघी गिरोह के निशाने पर हमेशा से रहे हैं। आजादी के आंदोलन ने इस देश में जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का विकास किया, महात्मा गांधी उसके सबसे बड़े प्रतीक हैं। 1925 में अपने जन्म के बाद से आज तक जो साम्राज्यवाद के तलुवे चाट रहे हैं, उनकी महात्मा गांधी से जन्मजात दुश्मनी इसलिए हैं कि जब-तब वे अपनी अदृश्य और कृश काया के साथ इस संघी गिरोह की हिन्दू राष्ट्र परियोजना के खिलाफ आकर खड़े हो जाते हैं। संघी गिरोह गांधीजी को उनकी इस हरकत के लिए कभी माफ नहीं करेगा, बल्कि गालियां-गोलियां दागता ही रहेगा।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना वामपंथ की देन है। 2004-09 के दौरान इस देश में वामपंथ के समर्थन पर टिकी कांग्रेस की सरकार थी। चाहती तो, वामपंथी पार्टियां इस समर्थन का फायदा उठाकर अपनी तिजोरियां भर सकती थीं, जमीन-ज़ायदाद बना सकती थीं और इस पर अरबों के हवामहल खड़े कर सकती थीं। पिछले 11 साल से भाजपा और आरएसएस और इस गिरोह से जुड़े दूसरे संगठन और लोग यही कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कांग्रेस और मनमोहन सरकार पर दबाव डालकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, सूचना का अधिकार और आदिवासी वनाधिकार कानून जैसे कानून बनवाए। उस समय विपक्ष में रहते हुए भी भाजपा इन कानूनों के पक्ष में नहीं थी। सत्ता में आने के बाद उसने इन कानूनों को कमजोर करने की कोशिश की है, लेकिन इन कानूनों को खत्म करने का साहस वह कभी जुटा नहीं पाई। इन कानूनों के कारण ही उसने उस समय भी कहा था कि वामपंथ कांग्रेस सरकार को ब्लैकमेल कर रही है।

बहरहाल, आज संसद से वामपंथ का दबदबा खत्म होने के बाद भी उसके दबाव में बनाए गए ये कानून भूत बनकर भाजपा के सामने खड़े हैं, जिसे वह न निगल पा रही है, न उगल पा रही है। एक समय था, जब भाजपा ने मनरेगा को गड्ढे खोदने वाली योजना बताते हुए औचित्यहीन करार दिया था। वह इसे कांग्रेस की विफलताओं का स्मारक बनाना चाहती थी। लेकिन यह दुनिया में रोजगार देने वाली सबसे बड़ी योजना साबित हुई और इतनी प्रभावशाली साबित हुई कि चाहते हुए भी अपने 11 सालों के राज में भाजपा इसे खत्म नहीं कर पाई। हां, बजट में हर साल कटौती करके, मजदूरी भुगतान में कई कई महीनों की देरी करके इसमें काम करने वाले मजदूरों को हतोत्साहित करके और नियमों में हेर-फेर करके ग्रामीणों को इस योजना के दायरे से बाहर धकेलने की कोशिश जरूर की है। एक जीवंत योजना को स्मारक में बदलने का भाजपा का यह तरीका है।

इस योजना के क्रियान्वयन में लाख खामियां हों, लेकिन इस योजना के कारण ही ग्रामीण गरीबों की आय में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। स्वतंत्र और सरकारी अध्ययन बताते हैं कि इस योजना ने गरीब ग्रामीणों की सामूहिक सौदेबाजी की ताकत को बढ़ाया है और चाहे मनरेगा में उसे रोजगार मिले या न मिले, मनरेगा से कम मजदूरी दरों पर अन्यत्र काम करने से उसने इंकार किया है। प्रभुत्वशाली सामंती वर्ग इसे अपने लिए गरीब ग्रामीणों की सीधी चुनौती मानता है, जिसे भाजपा और उसके समर्थक पचा नहीं पा रहे हैं और इस योजना के कारण गांवों में मजदूर न मिलने का हल्ला मचाते हुए इसके खिलाफ खड़े हैं।

हमारे देश का सबसे धनी व्यक्ति 1236 करोड़ रुपए रोज कमा रहा है, जबकि मनरेगा में 8 घंटे हाड़-तोड़ काम करने वाले गांव के मजदूर को औसतन 200 रूपये ही मजदूरी मिलती है। सबसे गरीब और सबसे धनी व्यक्ति के बीच आय की असमानता 6.18 करोड़ गुना है। उल्लेखनीय है कि इस योजना के लागू होने के बाद से आज तक इसकी मजदूरी दर असंगठित अकुशल श्रमिकों के लिए तय न्यूनतम मजदूरी दर से भी बहुत नीचे बनी हुई है और देश का किसान आंदोलन इस योजना में काम देने और मजदूरी दर 600 रुपए करने की मांग को लेकर निरंतर आंदोलन कर रहा है। कोरोना जैसे कठिन संकटकाल में, जब शहरों से गांवों की ओर बड़ी भारी संख्या में पलायन हुआ था, यही योजना गरीब ग्रामीणों के जिंदा रहने का सहारा बनी थी और कृषि क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई थी। मनरेगा का यही चरित्र आज भाजपा के निशाने पर है।

यह एक योजना के नाम को बदलने का साधारण मामला नहीं है। दरअसल मोदी राज में एक अधिकारप्राप्त नागरिक को कृपापात्र प्रजा में बदलने की जो मुहिम चल रही है, यह नया नामकरण उसी की ओर एक बढ़ा हुआ कदम है। प्रसाद मिलना सौभाग्य की बात होती है। न मिले, तो भी नाराज नहीं होना चाहिए। इस योजना के नए नामकरण में ऐसा ही श्रद्धाभाव समाया हुआ है। इसी वर्ष 10अक्टूबर-14 नवम्बर के बीच एक माह में 27 लाख मजदूरों के नाम निष्क्रियता के आधार पर हटा दिए गए हैं, जबकि यह एक मांग आधारित योजना है। संदेश सीधा है : अब यह एक सार्वजनिक-सार्वभौमिक योजना नहीं, खैरात बांटने वाली योजना है, जिसके हितग्राहियों का चयन सत्ताधारी पार्टी की कृपा से किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मूल योजना में महात्मा गांधी ग्रामीणों को मांगने पर रोजगार की गारंटी देते थे, लेकिन पूज्य बापू अब ऐसी कोई गारंटी देने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि नई योजना में ‘गारंटी’ शब्द हटा दिया गया है।

नई पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना के बारे में मोदी सरकार का पहला बड़ा प्रचार तो यही है कि रोजगार के दिनों की संख्या अब 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है। यानी ग्रामीण मजदूरों को साल में ज्यादा दिनों तक काम मिलेगा। लेकिन कैबिनेट का यह निर्णय भरोसा इसलिए पैदा नहीं करता कि यह अब योजना अब काम की ‘गारंटी’ नहीं देती और पुराना अनुभव यह बताता है कि ग्रामीण परिवारों को गारंटी के बावजूद औसतन 35-40 दिनों का ही काम मिला है।

दूसरा बड़ा प्रचार है, न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर 240 रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है। यह ठीक वैसे ही प्रचार है, जैसे मजदूरों पर श्रम कानूनों की जगह श्रम संहिता को थोपते हुए किया जा साथ है। वास्तविकता यह है कि संसद की स्थायी समिति ने न्यूनतम मनरेगा मजदूरी 400 रुपए प्रतिदिन करने की सिफारिश की है, जिसे ‘पूज्य बापू’ की आंखों से नज़रअंदाज कर दिया गया है। आज भी कई राज्यों में मनरेगा मजदूरी केंद्र सरकार द्वारा घोषित इस न्यूनतम मजदूरी से ऊंची है। मसलन, इस समय हरियाणा में मनरेगा मजदूरी 400 रुपए, तो छत्तीसगढ़ में 261 रूपये है। इसलिए मोदी सरकार द्वारा घोषित यह न्यूनतम मजदूरी कई राज्यों को इस रोजगार योजना केडी लिए मजदूरी कम करने या फिर लंबे समय तक उन राज्यों में चल रही मजदूरी दरों पर स्थिर रहने को प्रेरित करेगा। ग्रामीण रोजगार योजना के लिए केंद्र द्वारा घोषित 240 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी विभिन्न राज्यों में अकुशल श्रमिकों के लिए घोषित न्यूनतम दैनिक मजदूरी से तो बहुत नीचे तो है ही। विभिन्न राज्यों द्वारा अकुशल श्रमिकों के लिए जो न्यूनतम मजदूरी घोषित की गई है, उसके अनुसार यह दिल्ली में सबसे ज्यादा 18456 रूपये प्रति माह है, तो जम्मू कश्मीर में बहुत कम मात्र 8086 रूपए प्रति माह है। विभिन्न राज्यों का औसत लें, तो यह अकुशल मजदूरों के लिए 12485 रूपये प्रति माह बैठता है। इस हिसाब से ग्रामीण रोजगार योजना के लिए घोषित मजदूरी दर अकुशल मजदूरों के लिए घोषित न्यूनतम मजदूरी के अखिल भारतीय औसत से 42 प्रतिशत कम है। दिल्ली की तुलना में तो यह 61 प्रतिशत कम है और जम्मू-कश्मीर की तुलना में भी 11 प्रतिशत कम है। इस प्रकार, गोदी मीडिया के सहारे मोदी सरकार द्वारा बहुप्रचारित दावों में थोड़ी-सी भी सच्चाई नहीं है।

सरकारी रिकॉर्ड ही बताते हैं कि मनरेगा में काम करने वाले अधिकांश आदिवासी हैं, दलित हैं, पिछड़े वर्ग के हैं और महिलाएं हैं। इसलिए रोजगार की गारंटी हटने और अपने समकक्ष अकुशल मजदूरों की तुलना में बहुत कम मजदूरी पाने से प्रभावित होने वाले लोगों में यही ज्यादा है। मनुस्मृति भी सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के उत्पीड़न और उनके शोषण की ही हामी है।

संघी गिरोह पर हमारे देश के गली-कूचों-सड़कों, शहरों-गांवों-स्टेशनों, योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने की सनक चढ़ी हुई है। वह इस देश को दुनिया के सामने ‘हिंदू लुक’ देने पर आमादा है। इससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने में भी मदद मिलती है। लेकिन मनरेगा को पूबारे करने से कोई फायदा नहीं मिलने वाला, क्योंकि लोगों की जुबां पर यह योजना मनरेगा है और मनरेगा ही रहेगी। मनरेगा को गरीब ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण का औजार बनाने और मनरेगा की तर्ज पर शहरी रोजगार गारंटी योजना शुरू करने का संघर्ष जारी रहेगा।

खरमास क्या है? ज्योतिष और धर्म में इसका विशेष महत्व

ज्योतिष शास्त्र में खरमास को एक विशेष और संवेदनशील काल माना गया है। यह समय सूर्य और गुरु की विशिष्ट स्थिति से बनता है, जिसे ज्योतिषीय भाषा में गुर्वादित्य योग कहा जाता है। इस अवधि में मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है, जबकि धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। खरमास को केवल वर्जनाओं का काल नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आत्मचिंतन का अवसर भी माना जाता है।

सूर्य–गुरु की युति से कैसे बनता है खरमास

ज्योतिष के अनुसार, सभी राशियों का संचालन ग्रहों द्वारा होता है। सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं, जबकि गुरु धनु और मीन राशि के अधिपति माने जाते हैं। खरमास तब आरंभ होता है जब सूर्य गुरु की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं या गुरु सूर्य की राशि सिंह में स्थित होते हैं। यही स्थिति गुर्वादित्य योग कहलाती है।
सूर्य लगभग एक माह में राशि परिवर्तन करते हैं, जबकि गुरु एक राशि में 12 से 13 माह तक रहते हैं। इसी कारण वर्ष में सामान्यतः दो बार खरमास आता है, प्रत्येक बार लगभग एक महीने की अवधि का।

खरमास में शुभ कार्य क्यों होते हैं वर्जित

सूर्य को अग्नि तत्व प्रधान और ज्योतिष में पाप ग्रह की श्रेणी में रखा गया है, जबकि गुरु को सबसे सौम्य और शुभ ग्रह माना जाता है। जब ये दोनों एक-दूसरे की राशि में होते हैं, तो उनके सकारात्मक प्रभाव में कमी आ जाती है। इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, नया व्यवसाय या बड़े निवेश जैसे शुभ कार्य इस काल में वर्जित माने जाते हैं।
मान्यता है कि इस समय ग्रहों की ऊर्जा सांसारिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं रहती।

खरमास में क्या करना माना जाता है शुभ

हालांकि मांगलिक कार्यों पर रोक होती है, लेकिन खरमास में दान-पुण्य, पूजा-पाठ, जप-तप, व्रत, तीर्थ यात्रा और जरूरत की वस्तुओं की खरीद अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यह समय आत्मविश्लेषण, संयम और आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस काल में किया गया दान कई गुना फल देता है।

क्षेत्र विशेष की मान्यता और विशेष स्थल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुर्वादित्य कुयोग का प्रभाव मुख्य रूप से गंगा और गोदावरी नदियों के मध्य क्षेत्र में अधिक माना जाता है। इस क्षेत्र के बाहर कुछ स्थानों पर शुभ कार्य किए जा सकते हैं। प्रयागराज का प्रह्लाद घाट विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए प्रसिद्ध है, जहां परंपरागत रूप से लोग खरमास में भी संस्कार संपन्न कराते रहे हैं।

खरमास में जन्मे जातकों का स्वभाव

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, खरमास में जन्म लेने वाले व्यक्ति स्वभाव से थोड़े कठोर हो सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान, विवेकी और धन संचय में सक्षम होते हैं। ऐसे जातक साधु-संतों और धर्म के प्रति सम्मान रखते हैं तथा अपने ज्ञान से दूसरों का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।

खरमास केवल निषेध का समय नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होने का अवसर है। सही जानकारी और समझ के साथ यदि इस काल का सदुपयोग किया जाए, तो यह आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

डीएम ने आरोग्य मेले का किया निरीक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता परखी

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी सन्तोष कुमार शर्मा ने रविवार को मिठौरा विकासखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरीहर पुर में आयोजित आरोग्य मेले का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने मेले में उपलब्ध विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं, मरीजों के पंजीकरण, जांच एवं उपचार व्यवस्था को बारीकी से देखा।जिलाधिकारी ने पैथालॉजी, स्वास्थ्य परीक्षण केंद्र, स्क्रीनिंग काउंटर तथा मौसम के अनुसार होने वाली बीमारियों से संबंधित मरीजों के उपचार की जानकारी ली। मौके पर मौजूद चिकित्सकों द्वारा मरीजों की जांच कर दवाओं का वितरण किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान ओपीडी में कुल 32 मरीजों का उपचार किया गया, जबकि स्क्रीनिंग के माध्यम से 17 मरीजों की जांच की गई। पैथालॉजी जांच में शुगर, एचआईवी सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए।
उन्होंने उपचार के लिए आए मरीजों से सीधे संवाद कर दवाओं की उपलब्धता, उपचार की गुणवत्ता तथा चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के व्यवहार के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सर्पदंश की दवाओं के स्टॉक के साथ-साथ अन्य आवश्यक दवाओं की उपलब्धता का भी निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत शुक्ला, डॉ. सत्येंद्र नाथ त्रिपाठी, आयुष चिकित्सक डॉ. उमेश, जिला प्रोग्रामिंग अधिकारी नीरज सिंह सहित अन्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम जनता को समय पर बेहतर और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: भव्य वैवाहिक समारोह में दर्जनों जोड़े बंधे परिणय सूत्र में

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। स्थानीय कस्बा सिसवा के सुभाष नगर वार्ड में रविवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत भव्य वैवाहिक समारोह का आयोजन किया गया। मांगलिक वातावरण में दर्जनों जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर विवाह संपन्न किया। बेटियों की शादी का सपना संजोए परिजनों के लिए यह आयोजन यादगार बन गया।

वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान पूरा पंडाल मंगल गीतों, बैंड-बाजे और शहनाई की मधुर धुनों से गूंजता रहा। एक ओर नवदम्पति नए जीवन की शुरुआत करते नजर आए, वहीं दूसरी ओर बेटियों की विदाई के समय परिजनों की आंखें नम हो गईं। सिसवा कस्बा इस मांगलिक अवसर का साक्षी बना।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक प्रतिनिधि धर्मवीर पटेल एवं विशिष्ट अतिथि नगरपालिका अध्यक्षा शकुंतला जायसवाल द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात सामूहिक रूप से विवाह की रस्में प्रारंभ हुईं। प्रत्येक वेदी पर पारंपरिक परिधान में सजे दूल्हों की द्वार पूजा की गई, जबकि सजी-धजी दुल्हनों को विधि-विधान के साथ वेदी तक लाकर सभी संस्कार संपन्न कराए गए।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को घरेलू उपयोग की सामग्री जैसे कुकर, पंखा, गद्दा, तकिया, साड़ी सहित अन्य आवश्यक सामान उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। इसके साथ ही 25 हजार रुपये मूल्य की सामग्री एवं 60 हजार रुपये की धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई। नवदम्पतियों को विवाह प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, ब्लॉक प्रमुख कोदई निषाद, जितेंद्र बहादुर सिंह, चंद्रशेखर सिंह, अरुण पटेल, जितेंद्र चौधरी, जितेंद्र सिंह सहित जिला एवं स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने नवदम्पतियों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखमय दांपत्य जीवन की कामना की।