Friday, June 26, 2026
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इतिहास के पन्नों में 19 दिसंबर : सत्ता, संघर्ष, स्वतंत्रता और परिवर्तन की गूंज

19 दिसंबर का दिन विश्व और भारत के इतिहास में सत्ता परिवर्तन, स्वतंत्रता संग्राम, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, खेल, संस्कृति और लोकतंत्र से जुड़ी कई निर्णायक घटनाओं का साक्षी रहा है। यह तारीख केवल कैलेंडर का एक पन्ना नहीं, बल्कि ऐसे फैसलों और घटनाओं की याद दिलाती है जिन्होंने देशों की दिशा और समाज की सोच को बदल दिया।

2012 – दक्षिण कोरिया को पहली महिला राष्ट्रपति
19 दिसंबर 2012 को पार्क ग्युन हे ने दक्षिण कोरिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनकर इतिहास रच दिया। यह एशिया की राजनीति में महिला नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि मानी गई। हालांकि, 2017 में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें पद से हटाया गया और 2018 में 25 वर्ष की सजा सुनाई गई। यह घटना सत्ता की जिम्मेदारी और जवाबदेही का प्रतीक बन गई।

2008 – भारत में होम लोन सस्ता
वर्ष 2008 में केनरा बैंक, एचडीएफसी और बैंक ऑफ राजस्थान ने आवास ऋण की दरों में कटौती की घोषणा की। इससे मध्यम वर्ग को राहत मिली और रियल एस्टेट क्षेत्र को नई गति मिली। यह फैसला वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में आम नागरिकों के लिए उम्मीद की किरण बना।

2007 – व्लादिमीर पुतिन ‘पर्सन ऑफ द ईयर’
टाइम पत्रिका ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ घोषित किया। रूस की वैश्विक राजनीति में वापसी और मजबूत नेतृत्व के कारण उन्हें यह सम्मान मिला, जिसने अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन पर गहरी छाप छोड़ी।

2006 – नेपाल का भारत में नया राजदूत
नेपाल ने शैलजा आचार्य को भारत में अपना नया राजदूत नियुक्त किया। यह कदम भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया, जिससे कूटनीतिक संवाद और सहयोग को नई ऊर्जा मिली।

2005 – अफगानिस्तान में लोकतंत्र की वापसी
तीन दशक बाद अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई संसद की पहली बैठक 19 दिसंबर को हुई। यह देश के लिए स्थिरता, शांति और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक क्षण था।

2003 – कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय संकेत
संयुक्त राज्य अमेरिका ने कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत हल करने की पाकिस्तान की मांग छोड़ने का स्वागत किया। इसी वर्ष लीबिया ने अपने रासायनिक हथियार नष्ट करने की घोषणा कर वैश्विक सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाया।

2000 – ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट बादशाहत
ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज को हराकर लगातार 13वां टेस्ट मैच जीता। यह जीत ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के स्वर्णिम दौर का प्रतीक बनी और टीम की मानसिक मजबूती को दर्शाया।

1999 – मकाऊ का चीन में विलय
443 वर्षों तक पुर्तगाली उपनिवेश रहने के बाद मकाऊ को चीन को सौंपा गया। यह घटना उपनिवेशवाद के अंत और चीन की क्षेत्रीय अखंडता की पुनर्स्थापना का प्रतीक थी।

1998 – अमर्त्य सेन और वैश्विक सम्मान
नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को बांग्लादेश ने मानद नागरिकता प्रदान की। इसी वर्ष अमेरिका में आयोजित विश्व विकलांग स्कीइंग प्रतियोगिता में भारत के शील कुमार को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया।

1998 – बिल क्लिंटन पर महाभियोग
अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर महाभियोग लगाया। हालांकि, सीनेट ने उन्हें बरी कर दिया। यह घटना अमेरिकी लोकतंत्र में संवैधानिक संतुलन का उदाहरण बनी।

1997 – ‘टाइटैनिक’ की ऐतिहासिक रिलीज
लियोनार्डो डि कैप्रियो और केट विंसलेट अभिनीत फिल्म ‘टाइटैनिक’ रिलीज हुई, जो आगे चलकर दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई। इसने सिनेमा के इतिहास में नया मानक स्थापित किया।

1984 – हांगकांग समझौता और भोपाल गैस त्रासदी
चीन और ब्रिटेन के बीच 1997 में हांगकांग को चीन को सौंपने का समझौता हुआ। इसी वर्ष भोपाल गैस त्रासदी में हजारों लोगों की मौत ने औद्योगिक सुरक्षा पर वैश्विक बहस छेड़ दी।

1974 – रिकी पोंटिंग का जन्म
ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर और वर्ल्ड कप विजेता कप्तान रिकी पोंटिंग का जन्म हुआ। उन्होंने क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

1961 – गोवा की आज़ादी
ऑपरेशन विजय के तहत भारतीय सेना ने गोवा, दमन और दीव को पुर्तगाल की गुलामी से मुक्त कराया। यह भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता का ऐतिहासिक क्षण था।

1941 – हिटलर का सैन्य नियंत्रण
जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने सेना की पूरी कमान अपने हाथ में लेकर स्वयं को कमांडर-इन-चीफ घोषित किया, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध और अधिक उग्र हो गया।

1934 – प्रतिभा पाटील का जन्म
भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील का जन्म हुआ। उनका जीवन भारतीय राजनीति में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बना।

1927 – उत्तर प्रदेश ऑटोमोबाइल संघ
उत्तर प्रदेश ऑटोमोबाइल संघ की स्थापना हुई, जिसने राज्य में मोटर खेल और परिवहन विकास को दिशा दी।

1919 – मौसम विज्ञान सोसायटी की स्थापना
अमेरिका में मौसम विज्ञान सोसायटी की स्थापना हुई, जिसने मौसम विज्ञान को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

1842 – हवाई को मान्यता
अमेरिका ने हवाई को प्रांत के रूप में मान्यता दी, जिससे प्रशांत क्षेत्र में उसकी उपस्थिति मजबूत हुई।

1154 – इंग्लैंड के नए सम्राट
किंग हेनरी द्वितीय इंग्लैंड के सम्राट बने और एक नए युग की शुरुआत हुई।

जन्मदिन जो प्रेरणा बन गए

19 दिसंबर: इतिहास को आकार देने वाले जन्म—जिन्होंने कर्म, साहस और विचार से दुनिया बदली

19 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि ऐसे असाधारण व्यक्तित्वों का जन्मदिवस है जिन्होंने राजनीति, न्याय, विज्ञान, खेल, सिनेमा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। नीचे दिए गए सभी महान व्यक्तित्वों पर अलग-अलग प्रकाश डालते हुए योगदान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।

जमुना टुडू (जन्म: 19 दिसंबर 1980)

जन्म स्थान: पश्चिमी सिंहभूम जिला, झारखंड, भारत
जमुना टुडू भारत की उन जुझारू महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने जंगलों की रक्षा को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया। आदिवासी बहुल क्षेत्र में जन्मी जमुना ने देखा कि अवैध कटाई से पर्यावरण और समुदाय दोनों संकट में हैं। उन्होंने “वन सुरक्षा समिति” बनाकर महिलाओं को संगठित किया और पेड़ों की रक्षा के लिए अहिंसक आंदोलन चलाया। उनका योगदान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व और सामुदायिक चेतना का सशक्त उदाहरण है। सरकार द्वारा उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। जमुना टुडू का जीवन यह सिद्ध करता है कि साधन सीमित हों, तब भी संकल्प बड़ा हो तो बदलाव संभव है।

रिकी पोंटिंग (जन्म: 19 दिसंबर 1974)

जन्म स्थान: लॉन्सेस्टन, तस्मानिया, ऑस्ट्रेलिया
रिकी पोंटिंग विश्व क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया को दो विश्व कप जिताने वाले पोंटिंग ने आक्रामक बल्लेबाज़ी और रणनीतिक नेतृत्व से क्रिकेट को नई दिशा दी। उनका करियर अनुशासन, निरंतरता और जीत की मानसिकता का प्रतीक है। खेल के माध्यम से उन्होंने युवा खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा और टीम भावना का महत्व सिखाया। क्रिकेट से संन्यास के बाद भी वे कोच और मार्गदर्शक के रूप में खेल के विकास में योगदान दे रहे हैं। पोंटिंग ने खेल को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैश्विक संस्कृति का माध्यम बनाया।

नयन मोंगिया (जन्म: 19 दिसंबर 1969)

जन्म स्थान: अहमदाबाद जिला, गुजरात, भारत
नयन मोंगिया भारतीय क्रिकेट के भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज़ रहे हैं। 1990 के दशक में उन्होंने सीमित संसाधनों में भी तकनीकी दक्षता और धैर्य का परिचय दिया। मोंगिया ने घरेलू क्रिकेट को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई और कई युवा खिलाड़ियों के लिए आदर्श बने। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका योगदान भले शांत रहा हो, लेकिन टीम संतुलन और विकेट के पीछे अनुशासन के लिए उन्हें जाना जाता है। क्रिकेट के बाद कोचिंग और मार्गदर्शन के जरिए वे खेल की जड़ों को मजबूत करने में लगे रहे।

रतन लाल कटारिया (जन्म: 19 दिसंबर 1951)

जन्म स्थान: अंबाला जिला, हरियाणा, भारत
रतन लाल कटारिया भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने संसद में रहते हुए सामाजिक न्याय, अनुसूचित जाति कल्याण और प्रशासनिक सुधारों पर प्रभावी कार्य किया। हरियाणा की राजनीति में उनकी पकड़ जमीनी रही और वे जनता की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच तक ले जाने के लिए पहचाने गए। मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाई। उनका राजनीतिक जीवन सेवा, संगठन और अनुशासन का उदाहरण है।

न्यायमूर्ति जी. बी. पटनायक (जन्म: 19 दिसंबर 1937)

जन्म स्थान: कटक जिला, ओडिशा, भारत
न्यायमूर्ति जी. बी. पटनायक भारत के 32वें मुख्य न्यायाधीश रहे। उनका कार्यकाल न्यायिक निष्पक्षता, संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए याद किया जाता है। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुदृढ़ करने में अहम योगदान दिया। उनके निर्णयों ने कानून की व्याख्या को अधिक मानवीय और व्यावहारिक बनाया। न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने आम नागरिक का न्याय व्यवस्था में विश्वास मजबूत किया।

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल (जन्म: 19 दिसंबर 1934)

जन्म स्थान: जलगांव जिला, महाराष्ट्र, भारत
प्रतिभा पाटिल भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति बनीं। उनका जीवन महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन का प्रतीक है। राजनीति में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं को सशक्त किया। एक साधारण पृष्ठभूमि से देश के सर्वोच्च पद तक का उनका सफर करोड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा है।

ओम प्रकाश (जन्म: 19 दिसंबर 1919)

जन्म स्थान: लाहौर (तत्कालीन पंजाब), ब्रिटिश भारत
ओम प्रकाश हिंदी सिनेमा के महान चरित्र अभिनेताओं में से थे। उन्होंने हास्य, संवेदना और सामाजिक यथार्थ को अपनी अदाकारी से जीवंत किया। सैकड़ों फिल्मों में उनके किरदार आम आदमी के दर्द और खुशी को दर्शाते हैं। उनका योगदान भारतीय सिनेमा की आत्मा को मजबूत करता है। ओम प्रकाश ने साबित किया कि सहायक भूमिकाएं भी इतिहास रच सकती हैं।

मैरेम्बम कोइरंग सिंह (जन्म: 19 दिसंबर 1915)

जन्म स्थान: इंफाल जिला, मणिपुर, भारत
मैरेम्बम कोइरंग सिंह मणिपुर के प्रथम मुख्यमंत्री थे। उन्होंने नवगठित राज्य में प्रशासनिक ढांचा खड़ा किया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया। क्षेत्रीय विकास, शिक्षा और सामाजिक स्थिरता उनके कार्यकाल की प्राथमिकताएं रहीं। उनका योगदान पूर्वोत्तर भारत की राजनीतिक पहचान को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण रहा।

मार्टिन लूथर किंग सीनियर (जन्म: 19 दिसंबर 1899)

जन्म स्थान: स्टॉकब्रिज, जॉर्जिया, अमेरिका
मार्टिन लूथर किंग सीनियर मानवाधिकार आंदोलन के सशक्त स्तंभ थे। उन्होंने नस्लीय भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और सामाजिक समानता के लिए संघर्ष किया। उनके विचारों ने उनके पुत्र मार्टिन लूथर किंग जूनियर को भी प्रेरित किया। उनका जीवन न्याय, गरिमा और अहिंसा के मूल्यों पर आधारित था, जिसने अमेरिकी समाज को नई दिशा दी।

राम नारायण सिंह (जन्म: 19 दिसंबर 1884)

जन्म स्थान: हजारीबाग जिला, झारखंड, भारत
राम नारायण सिंह स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। सामाजिक चेतना, शिक्षा और राजनीतिक जागरूकता उनके कार्यों का केंद्र रही। हजारीबाग क्षेत्र में उनका योगदान आज भी स्मरणीय है। वे जनसेवा को राष्ट्रसेवा मानते थे।

उपेन्द्रनाथ ब्रह्मचारी (जन्म: 19 दिसंबर 1873)

जन्म स्थान: जमालपुर, मुंगेर जिला, बिहार, भारत
उपेन्द्रनाथ ब्रह्मचारी भारत के महान वैज्ञानिक और चिकित्सक थे। उन्होंने कालाजार जैसी घातक बीमारी की प्रभावी दवा विकसित कर लाखों जानें बचाईं। उनका शोध चिकित्सा विज्ञान में मील का पत्थर साबित हुआ। सीमित संसाधनों में किया गया उनका कार्य मानवता के लिए अमूल्य योगदान है।

इतिहास के पन्नों से सीख: बलिदान और विचार

इतिहास के अमर सपूत: 19 दिसंबर को दुनिया से विदा हुए वे महान व्यक्तित्व जिन्होंने राष्ट्र और समाज को नई दिशा दी

इतिहास केवल तिथियों का क्रम नहीं, बल्कि उन व्यक्तित्वों की स्मृति है जिन्होंने अपने विचार, संघर्ष और कर्म से समय की धारा मोड़ी। 19 दिसंबर भारतीय और विश्व इतिहास में इसलिए विशेष है क्योंकि इस दिन अनेक ऐसे महान लोग हमसे विदा हुए, जिनका योगदान आज भी समाज, राजनीति, साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन में जीवित है। आइए, इन ऐतिहासिक निधनों पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।

अनुपम मिश्र (निधन: 19 दिसंबर 2016)

जन्म: 1961, नई दिल्ली | देश: भारत
अनुपम मिश्र भारत के प्रख्यात लेखक, पत्रकार और गांधीवादी पर्यावरणविद् थे। वे जल संरक्षण को केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का आधार मानते थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” ने पारंपरिक जल स्रोतों की महत्ता को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया। उन्होंने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर भारत में पारंपरिक जल प्रणालियों पर गहन शोध किया। उनका योगदान ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता और प्रकृति के साथ संतुलन की सीख देता है। अनुपम मिश्र का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत विकास का प्रेरक उदाहरण है।

बाबूभाई पटेल (निधन: 19 दिसंबर 2002)

जन्म: 1920, नडियाद, जिला खेड़ा | प्रदेश: गुजरात | देश: भारत
बाबूभाई पटेल भारतीय राजनीति के सशक्त स्तंभ और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री रहे। वे जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। आपातकाल के बाद लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी। उनका राजनीतिक जीवन सिद्धांतों और सादगी का प्रतीक रहा। वे सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे, जिसने उन्हें जननेता के रूप में स्थापित किया।

राम प्रसाद बिस्मिल (निधन: 19 दिसंबर 1927)

जन्म: 11 जून 1897, शाहजहांपुर | प्रदेश: उत्तर प्रदेश | देश: भारत
राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर क्रांतिकारी, ओजस्वी कवि और बहुभाषाविद् थे। काकोरी कांड के प्रमुख नायक के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। उनकी कविताएँ आज भी देशभक्ति की भावना को जागृत करती हैं। वे केवल हथियारों के क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि विचारों के योद्धा भी थे। मातृभूमि के लिए उनका बलिदान भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।

अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ (निधन: 19 दिसंबर 1927)

जन्म: 22 अक्टूबर 1900, शाहजहांपुर | प्रदेश: उत्तर प्रदेश | देश: भारत
अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे नायक थे जिन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की। राम प्रसाद बिस्मिल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया। उनका बलिदान यह सिद्ध करता है कि भारत की आज़ादी साझा प्रयास और साझा शहादत का परिणाम थी। वे युवाओं के लिए साहस, त्याग और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक बने।

ठाकुर रोशन सिंह (निधन: 19 दिसंबर 1927)

जन्म: 1892, नवादा, जिला शाहजहांपुर | प्रदेश: उत्तर प्रदेश | देश: भारत
ठाकुर रोशन सिंह भी काकोरी आंदोलन से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारी थे। उन्होंने अंग्रेजी सत्ता के अन्याय के विरुद्ध निर्भीकता से संघर्ष किया। फांसी स्वीकार करते समय उनका आत्मबल और देशप्रेम अद्वितीय था। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता केवल नेताओं से नहीं, बल्कि गुमनाम बलिदानियों से मिली है।

उमाशंकर जोशी (निधन: 19 दिसंबर 1988)

जन्म: 21 जुलाई 1911, बामना | प्रदेश: गुजरात | देश: भारत
उमाशंकर जोशी ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गुजराती साहित्य के महान रचनाकार थे। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, राष्ट्रप्रेम और आध्यात्मिक चेतना का सुंदर समन्वय मिलता है। स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने साहित्य को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया। वे साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में भारत की बौद्धिक विरासत को समृद्ध करने वाले स्तंभ रहे।

लॉर्ड डलहौजी (निधन: 19 दिसंबर 1860)

जन्म: 22 अप्रैल 1812, स्कॉटलैंड | देश: ब्रिटेन
लॉर्ड डलहौजी भारत में 1848 से 1856 तक गवर्नर जनरल रहे। उन्होंने रेल, डाक और टेलीग्राफ जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं की नींव रखी, लेकिन साथ ही Doctrine of Lapse जैसी नीतियों के कारण भारतीय असंतोष को भी जन्म दिया। उनका शासन भारतीय इतिहास में औपनिवेशिक विस्तार और उसके दुष्परिणामों के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

19 दिसंबर को हुए ये निधन केवल ऐतिहासिक घटनाएँ नहीं, बल्कि चेतना के दीप हैं। किसी ने स्वतंत्रता के लिए प्राण दिए, किसी ने साहित्य से समाज को दिशा दी, तो किसी ने पर्यावरण और लोकतंत्र को मजबूत किया। इन सभी का जीवन हमें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।

महादेव का मौन और आत्मा का जागरण: शिवपुराण की गूढ़ कथा

🔱 अंतर्मन में विराजमान महादेव: जब चेतना शिव बनकर जागती है 🔱

👉 शिवपुराण शंकर भगवान की शास्त्रोक्त कथा

शिवपुराण की कथा केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि मानव जीवन की आंतरिक यात्रा का दिव्य मानचित्र है। पिछले सप्ताह हमने जाना कि “शिव भीतर हैं, शक्ति भीतर है, बस जागरण की आवश्यकता है।”
अब यह कथा हमें उस अवस्था तक ले जाती है, जहाँ साधक समझता है कि शिव कोई दूरस्थ देवता नहीं, बल्कि हमारी चेतना की सर्वोच्च अवस्था हैं।

यह शास्त्रोक्त कथा बताती है कि जब मन, अहंकार, कामना और भय से मुक्त होकर मौन को धारण करता है—तभी भीतर छिपा शिव जाग्रत होता है। यही वह क्षण है जहाँ जीवन साधारण से दिव्य बन जाता है।

🕉️ शास्त्रोक्त कथा
महादेव का मौन और मानव का जागरण
शिवपुराण में वर्णन आता है कि एक समय देवताओं और ऋषियों ने महादेव से प्रश्न किया—
“हे देवाधिदेव! आप सदा मौन क्यों रहते हैं? सृष्टि को उपदेश क्यों नहीं देते?”

तब भगवान शंकर ने नेत्र खोले और कहा—
“मैं मौन इसलिए हूँ, क्योंकि सत्य शब्दों से नहीं, अनुभव से जाना जाता है।”
यह वाक्य केवल देवताओं के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक मनुष्य के लिए है।
शिव का मौन वास्तव में सबसे बड़ा उपदेश है।

🔱 शिव का स्वरूप — शास्त्रों की दृष्टि में
शिवपुराण, लिंगपुराण और स्कंदपुराण में शिव को—
निराकार भी कहा गया है (लिंग स्वरूप)
साकार भी (त्रिनेत्रधारी, चंद्रशेखर)
यह द्वैत नहीं, बल्कि पूर्णता का प्रतीक है।
शिव वही हैं जो—
सृजन से पहले भी थे
सृजन में भी हैं
और प्रलय के बाद भी रहेंगे

इसीलिए उन्हें महाकाल कहा गया—जो समय से भी परे हैं।

🌙 शिव और शंकर — समानता का रहस्य

शास्त्रों में शिव को दो रूपों में समझाया गया है—
शिव → शुद्ध चेतना, निर्विकार, मौन
शंकर → करुणामय, भक्तवत्सल, लोककल्याणकारी
यह कोई भिन्नता नहीं, बल्कि एक ही तत्व की दो अवस्थाएँ हैं।
जैसे मनुष्य—भीतर से शांत होता है (शिव)
और बाहर से कर्म करता है (शंकर)
यही कारण है कि शिव को आशुतोष कहा गया—
जो भीतर की सच्ची पुकार पर तुरंत प्रकट होते हैं।

🔥 कथा का भावार्थ — अंतःकरण की यात्रा
यह कथा हमें सिखाती है कि—
जब तक मनुष्य बाहरी पूजा, दिखावे और कर्मकांड में उलझा रहता है,
वह शिव को बाहर खोजता है।
लेकिन जिस दिन वह—अपने क्रोध को देख लेता है।
अपने अहंकार को पहचान लेता है।
और अपने भय से संवाद कर लेता है।
उसी दिन शिव उसके भीतर प्रकट हो जाते हैं।

🕯️ शिवलिंग का रहस्य — केवल पत्थर नहीं
शास्त्रों में शिवलिंग को केवल प्रतीक नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय चेतना का केंद्र माना गया है।
गोल आधार → प्रकृति (शक्ति)
ऊर्ध्व लिंग → पुरुष (चेतना)
जब दोनों का मिलन होता है,
तभी सृष्टि चलती है।
यही कारण है कि शिवलिंग की पूजा वास्तव में—
👉 अपने भीतर के संतुलन की आराधना है।
🌸 भक्ति और वैराग्य का अद्भुत संगम
महादेव न तो केवल योगी हैं, न केवल गृहस्थ।
वे दोनों हैं—और दोनों से परे भी।
वे कैलाश में ध्यानस्थ हैं
और श्मशान में भी रमते हैं
यह हमें सिखाता है कि—
जीवन से भागना नहीं, जीवन में रहते हुए उससे मुक्त होना ही शिवत्व है।

🕉️ आधुनिक जीवन में कथा का संदेश
आज का मानव—तनाव से घिरा है।
भय और प्रतिस्पर्धा में उलझा है।
और शांति खोज रहा है।
शिवपुराण की यह कथा कहती है—
“शांति कहीं बाहर नहीं, वह तुम्हारे भीतर सोई है।”
जब मन स्थिर होता है,
जब सांस सजग होती है,
जब इच्छाएँ संयम में आती हैं—
तभी भीतर का शिव जागता है।

🔔 शिवत्व की प्राप्ति
शिव कोई दूरस्थ देवता नहीं
वे हमारी चेतना की उच्चतम अवस्था हैं
और शक्ति हमारी इच्छाशक्ति है
जब चेतना और इच्छा का संतुलन होता है,
तभी मानव महादेव के मार्ग पर चलता है।
“शिव को जानना, स्वयं को जानना है।”

सलेमपुर में बृजवासी गौ रक्षक सेना की बैठक, बढ़ती गौ तस्करी पर जताया रोष

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। गुरुवार को बृजवासी गौ रक्षक सेना भारत की एक बैठक सलेमपुर में जिला अध्यक्ष (देवरिया) कमलेश कुमार धनगर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जिले में लगातार बढ़ रही गौ तस्करी की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि गौ तस्करों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे गौ रक्षा में लगे कार्यकर्ताओं की जान लेने से भी नहीं हिचक रहे हैं। हाल ही में मझौली राज क्षेत्र में गौ माता की रक्षा करते समय गौ रक्षकों सौरभ चतुर्वेदी और आशुतोष पांडे को गौ तस्करों ने वाहन से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया, जिससे जिलेभर के गौ रक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

जिला अध्यक्ष कमलेश कुमार धनगर ने इस संबंध में कोतवाल सलेमपुर एवं क्षेत्राधिकारी (सीओ) सलेमपुर से फोन पर संपर्क किया। अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया कि आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, बैठक में उपस्थित गौ रक्षकों ने कहा कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इस दौरान जिला अध्यक्ष सहित सभी गौ रक्षकों ने पुलिस अधीक्षक महोदय से मांग की कि घटना में शामिल सभी गौ तस्करों को अविलंब गिरफ्तार कर उन्हें कठोरतम दंड दिलाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

बैठक में जिला प्रवक्ता अंशुमान सिंह, रविंद्र पाल, जिला कानूनी सलाहकार शशांक सिंह, वतन सिंह, रौनक पांडे, पीयूष दुबे, हिमांशु पाठक, दुर्गेश यादव, अरुण दुबे, निखिल मिश्रा, प्रशांत पांडे सहित कई अन्य गौ रक्षक उपस्थित रहे।

गोपालगंज के प्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर में भीषण चोरी, माता का सोने का मुकुट व चांदी की छतरी लेकर फरार हुए चोर

गोपालगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार के प्रसिद्ध शक्तिपीठ थावे दुर्गा मंदिर में बीती रात भीषण चोरी की वारदात सामने आई है। नकाबपोश चोरों ने मंदिर परिसर में घुसकर माता का सोने का मुकुट, चांदी की छतरी और लाखों रुपये मूल्य के सोने के हार की चोरी कर ली। घटना के बाद जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार देर रात करीब 11:30 बजे दो नकाबपोश चोर मंदिर परिसर की चारदीवारी फांदकर अंदर दाखिल हुए। इसके बाद उन्होंने गैस कटर की मदद से गर्भगृह का ताला तोड़ा और वहां स्थापित मां थावे दुर्गा के बहुमूल्य आभूषणों को कुछ ही मिनटों में समेट लिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी उसी रास्ते से फरार हो गए।

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घटना की सूचना मिलते ही गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक अवधेश कुमार दीक्षित मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। एसपी ने बताया कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही मंदिर में तैनात सुरक्षा गार्ड और अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि घटना के समय इलाके में घना कोहरा और धुंध छाई हुई थी, जिससे दृश्यता लगभग शून्य थी। चोरों ने इसी का फायदा उठाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। हालांकि एसपी ने दावा किया है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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थावे दुर्गा मंदिर न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस घटना के बाद श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि इस चोरी में शामिल अपराधियों को जल्द ही पकड़कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विधायक खेल स्पर्धा-2025 का भव्य समापन

विधायक गणेश चन्द्र चौहान ने विजेता खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र एवं मेडल प्रदान कर किया सम्मानित

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। धनघटा विधानसभा क्षेत्र के सिरसी स्थित सीताराम इंटर कॉलेज परिसर में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग द्वारा विधायक खेल स्पर्धा-2025 का दो दिवसीय खेलकूद आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन में जूनियर, सब-जूनियर एवं सीनियर वर्ग के बालक एवं बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
खेल स्पर्धा के अंतर्गत एथलेटिक्स की 100 मीटर, 200 मीटर, 800 मीटर, 1500 मीटर दौड़, जेवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप, हाई जंप सहित वॉलीबॉल, कबड्डी, कुश्ती एवं जूडो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद खिलाड़ियों ने अनुशासन, प्रतिबद्धता और खेल भावना का शानदार प्रदर्शन किया।
समापन अवसर पर विधायक धनघटा गणेश चन्द्र चौहान ने विजेता खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए अधिकारी-कर्मचारी बनाम जनप्रतिनिधि-कार्यकर्ता के मध्य आयोजित रस्साकसी प्रतियोगिता में स्वयं भाग लिया। रस्साकसी में अधिकारी एवं कर्मचारियों की टीम का नेतृत्व उप जिलाधिकारी धनघटा डॉ सुनील कुमार ने किया।
अपने संबोधन में विधायक धनघटा ने कहा कि विधायक खेल स्पर्धा-2025 का आयोजन क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक भावना का विकास करती हैं।
जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी रामप्रताप सिंह ने बताया कि क्षेत्र में शीघ्र ही युवा कल्याण विभाग का ग्रामीण मिनी स्टेडियम आम जनमानस के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे युवाओं को खेल अभ्यास के साथ-साथ फोर्स एवं पुलिस भर्ती की तैयारी में भी सहायता मिलेगी।
प्रतियोगिता परिणामों में जूनियर बालक वर्ग में नाथनगर की टीम प्रथम तथा हैसर की टीम द्वितीय स्थान पर रही। सब-जूनियर कुश्ती प्रतियोगिता में 49 किग्रा वर्ग में आकाश, 53 किग्रा में मनीष, 56 किग्रा में गौरव तथा 70 किग्रा में अभिनव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जूनियर वर्ग में आकाश, नमन एवं दीपक विजेता रहे। सीनियर पुरुष वर्ग में 61 किग्रा में सीताराम तथा 74 किग्रा में सुधीर ने प्रथम स्थान हासिल किया। लंबी कूद में जूनियर वर्ग में विशाल, सीनियर वर्ग में नारद चौहान प्रथम रहे। जूनियर बालिका वर्ग में चपरा पूर्वी, हैसर बाजार की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
समापन समारोह में उप जिलाधिकारी धनघटा डॉ सुनील कुमार, खंड विकास अधिकारी कृष्ण कुमार दुबे, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अमर रॉय, धनेंद्र पाण्डेय, बुद्धि सागर पाण्डेय, सिट्टू राय, राजन पाण्डेय, ग्राम प्रधान सिरसी अर्जुन यादव, क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी रितेश वर्मा, राघवेंद्र पाल, गोरख, रमाकांत सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं खिलाड़ी उपस्थित रहे।

उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार के निर्देश के क्रम में सेमरियावा विकासखंड अंतर्गत उप कृषि निदेशक राकेश कुमार सिंह द्वारा उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान जमाल खाद भंडार (फुटकर एवं थोक विक्रेता), नूरुल हसन खाद भंडार, अवसर बीज भंडार तथा अवन फर्टिलाइजर करही में यूरिया उर्वरक की उपलब्धता पाई गई। किसानों को निर्धारित व्यवस्था के तहत उर्वरक का वितरण सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए।
वहीं आफताब खाद भंडार उसरा शहीद, जमील खाद भंडार नूरगंज चौराहा करही तथा शाहआलम एजेंसी करही निरीक्षण के समय बंद पाए गए। निरीक्षण में अनुपस्थित पाए जाने की स्थिति में संबंधित विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।

समस्त उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया गया कि यूरिया का विक्रय निर्धारित दर पर ही किया जाए तथा किसी भी प्रकार की टैगिंग न की जाए। क्षेत्र से किसानों की किसी भी प्रकार की समस्या या शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की संशोधित समय-सारिणी जारी

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी/उप जिलाधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की संशोधित समय-सारिणी जारी कर दी गई है। आयोग के निर्देशानुसार अब मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी 2026 को किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 11 दिसंबर 2025 को जारी पत्र के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की तिथियों में संशोधन किया गया है। इसके अंतर्गत गणना (एन्यूमरेशन) कार्य एवं मतदान केंद्रों के युक्तिकरण/पुनर्व्यवस्थापन की प्रक्रिया 26 दिसंबर 2025 तक पूर्ण की जाएगी। इसके बाद कंट्रोल टेबल का अद्यतन एवं प्रारूप मतदाता सूची का निर्माण 27 से 30 दिसंबर 2025 तक किया जाएगा, जबकि प्रारूप मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 31 दिसंबर 2025 को होगा।

प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही 31 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इस अवधि में नोटिस चरण के अंतर्गत दावों एवं आपत्तियों का निस्तारण, सुनवाई एवं सत्यापन की प्रक्रिया 21 फरवरी 2026 तक संपन्न की जाएगी। इसके उपरांत मतदाता सूची के स्वास्थ्य मानकों की जांच कर आयोग की अनुमति प्राप्त करते हुए 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

निर्वाचन आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि विशेष गहन पुनरीक्षण अवधि के दौरान मतदाता सूची से संबंधित कार्यों में लगे जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के पद रिक्त न रहें तथा संबंधित अधिकारियों का स्थानांतरण आयोग की पूर्व अनुमति के बिना न किया जाए।

सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को आयोग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे मतदाता सूची शुद्ध, त्रुटिरहित एवं अद्यतन तैयार की जा सके।

विधायक खेल स्पर्धा-2025 का भव्य समापन

विधायक गणेश चन्द्र चौहान ने विजेता खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र एवं मेडल प्रदान कर किया सम्मानित

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। धनघटा विधानसभा क्षेत्र के सिरसी स्थित सीताराम इंटर कॉलेज परिसर में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग द्वारा विधायक खेल स्पर्धा-2025 का दो दिवसीय खेलकूद आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन में जूनियर, सब-जूनियर एवं सीनियर वर्ग के बालक एवं बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
खेल स्पर्धा के अंतर्गत एथलेटिक्स की 100 मीटर, 200 मीटर, 800 मीटर, 1500 मीटर दौड़, जेवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप, हाई जंप सहित वॉलीबॉल, कबड्डी, कुश्ती एवं जूडो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद खिलाड़ियों ने अनुशासन, प्रतिबद्धता और खेल भावना का शानदार प्रदर्शन किया।
समापन अवसर पर विधायक धनघटा गणेश चन्द्र चौहान ने विजेता खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए अधिकारी-कर्मचारी बनाम जनप्रतिनिधि-कार्यकर्ता के मध्य आयोजित रस्साकसी प्रतियोगिता में स्वयं भाग लिया। रस्साकसी में अधिकारी एवं कर्मचारियों की टीम का नेतृत्व उप जिलाधिकारी धनघटा डॉ सुनील कुमार ने किया।
अपने संबोधन में विधायक धनघटा ने कहा कि विधायक खेल स्पर्धा-2025 का आयोजन क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक भावना का विकास करती हैं।
जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी रामप्रताप सिंह ने बताया कि क्षेत्र में शीघ्र ही युवा कल्याण विभाग का ग्रामीण मिनी स्टेडियम आम जनमानस के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे युवाओं को खेल अभ्यास के साथ-साथ फोर्स एवं पुलिस भर्ती की तैयारी में भी सहायता मिलेगी।
प्रतियोगिता परिणामों में जूनियर बालक वर्ग में नाथनगर की टीम प्रथम तथा हैसर की टीम द्वितीय स्थान पर रही। सब-जूनियर कुश्ती प्रतियोगिता में 49 किग्रा वर्ग में आकाश, 53 किग्रा में मनीष, 56 किग्रा में गौरव तथा 70 किग्रा में अभिनव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जूनियर वर्ग में आकाश, नमन एवं दीपक विजेता रहे। सीनियर पुरुष वर्ग में 61 किग्रा में सीताराम तथा 74 किग्रा में सुधीर ने प्रथम स्थान हासिल किया। लंबी कूद में जूनियर वर्ग में विशाल, सीनियर वर्ग में नारद चौहान प्रथम रहे। जूनियर बालिका वर्ग में चपरा पूर्वी, हैसर बाजार की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
समापन समारोह में उप जिलाधिकारी धनघटा डॉ सुनील कुमार, खंड विकास अधिकारी कृष्ण कुमार दुबे, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अमर रॉय, धनेंद्र पाण्डेय, बुद्धि सागर पाण्डेय, सिट्टू राय, राजन पाण्डेय, ग्राम प्रधान सिरसी अर्जुन यादव, क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी रितेश वर्मा, राघवेंद्र पाल, गोरख, रमाकांत सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं खिलाड़ी उपस्थित रहे।

विधायक डॉ. असीम कुमार ने निर्माण श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के स्वीकृति पत्र वितरित किए

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कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। तमकुहीराज विधायक डॉ. असीम कुमार ने अपने कैंप कार्यालय में श्रम विभाग अंतर्गत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत निर्माण श्रमिकों को स्वीकृति पत्र वितरित किए।
इस अवसर पर विधायक ने उपस्थित श्रमिकों को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, जिनका लाभ लेने के लिए निर्माण श्रमिकों को जनसेवा केंद्रों अथवा upbocw पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण शुल्क 40 रुपये तथा प्रतिवर्ष 20 रुपये नवीनीकरण शुल्क जमा कर पंजीकरण जारी रखना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि पंजीकृत श्रमिकों को संतान के जन्म पर मातृत्व शिशु बालिका मदद योजना के अंतर्गत बालक के जन्म पर 20,000 रुपये तथा बालिका के जन्म पर 25,000 रुपये की सहायता दी जाती है। मातृत्व हितलाभ योजना में पुरुष श्रमिकों को 6,000 रुपये तथा महिला श्रमिकों को तीन माह का न्यूनतम वेतन प्रदान किया जाता है। संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए 24,000 रुपये तक की सहायता, अटल आवासीय विद्यालय में चयन के बाद कक्षा 6 से 12 तक निशुल्क शिक्षा, पुत्री के विवाह पर 55,000 रुपये तथा सामूहिक विवाह पर 1,00,000 रुपये का अनुदान दिया जाता है।
इसके अतिरिक्त पंजीकृत श्रमिक की सामान्य मृत्यु पर आश्रित को 2,25,000 रुपये तथा दुर्घटना में मृत्यु पर 5,25,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है।
कार्यक्रम में कन्या विवाह योजना के 10 लाभार्थियों को कुल 5,50,000 रुपये, मातृत्व शिशु बालिका मदद योजना के 7 लाभार्थियों को 3,00,733 रुपये, मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना के 7 लाभार्थियों को 15,75,000 रुपये तथा अटल आवासीय विद्यालय योजना के 4 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया। इस प्रकार कुल 23,70,733 रुपये की सहायता राशि के स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। साथ ही बढ़ई का कार्य करने वाले एक श्रमिक का पंजीकरण कर पंजीयन कार्ड तथा तीन ई-श्रम कार्ड भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में श्रम प्रवर्तन अधिकारी अलंकृत्ता उपाध्याय, कंप्यूटर ऑपरेटर शशि शेखर मिश्रा, संदीप मल्ल, संदीप सिंह सहित रामेश्वर सिंह, दिलीप, राबिया खातून, विनय कुमार, सायरा खातून, आशुतोष पांडे, शांति देवी, धर्मेंद्र पांडे, दिलीप गुप्ता, स्वामीनाथ, रामप्रीत, नयनपति, बचन, दुर्गावती, रामवती, सीमा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

मुख्य डाकघर में आधार बनवाने के नाम पर धन उगाही का आरोप, लोगों में आक्रोश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद मुख्यालय स्थित जिलाधिकारी आवास के समीप बने मुख्य डाकघर में आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आधार पंजीकरण के नाम पर कथित रूप से धन उगाही किए जाने से आमजन में भारी आक्रोश व्याप्त है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए लोगों का कहना है कि बिना पैसे दिए आधार बनवाना लगभग असंभव हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डाकघर में तैनात आधार कार्ड कर्मी और वहां ड्यूटी पर लगे होमगार्ड की मिली-भगत से यह खेल चल रहा है। बताया जा रहा है कि एक दिन पूर्व ही लोगों से पैसे ले लिए जाते हैं और अगले दिन कोटा फुल होने का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। जिन लोगों से कथित तौर पर लेन-देन नहीं होता, उनका नंबर ही नहीं लग पाता। इससे आए दिन डाकघर परिसर में लोगों की नोकझोंक और बहस की स्थिति बनी रहती है।
पीड़ितों ने बताया कि वे भोर में ही लाइन में लग जाते हैं, लेकिन पूरे दिन इंतजार के बाद भी आधार बनवाने का मौका नहीं मिल पाता। वहीं, कुछ लोग कथित सिफारिश या पैसे के दम पर आसानी से अंदर पहुंच जाते हैं। लोगों का कहना है कि जब जनपद मुख्यालय स्थित मुख्य डाकघर की यह स्थिति है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के डाकघरों की दशा का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
यह भी हैरानी की बात है कि मुख्य डाकघर जिला मुख्यालय में स्थित है, जहां जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारी प्रतिदिन आते-जाते रहते हैं, इसके बावजूद इस तरह की अव्यवस्था और कथित धन उगाही पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता परदेसी, साहिल, प्रदीप, जितेंद्र, चंदन, सुरेंद्र सहित कई लोग मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने उच्चाधिकारियों से जांच कर कार्रवाई की मांग की। लोगों ने कहा कि यदि शीघ्र ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। आमजन ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

तानाशाही के विरोध में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, बीजेपी कार्यालय घेराव से पहले कार्यकर्ता हिरासत में

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर पूर्व घोषित कार्यक्रम के महराजगंज जनपद में कांग्रेस पार्टी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के जनपद आगमन के मद्देनज़र सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले, जिन्हें पुलिस ने रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लिया। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीते 11 वर्षों से कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को राजनीतिक द्वेष के तहत लगातार निशाना बनाया जा रहा है। नेताओं का आरोप है कि बीमारी की अवस्था में भी दोनों नेताओं से 56-56 घंटे तक पूछ-ताछ की गई और बिना किसी एफआईआर के राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसे तथ्यों के अभाव में न्यायालय ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
कांग्रेस नेताओं ने इसे सरकार प्रायोजित बदले की कार्रवाई करार देते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। भाजपा सरकार द्वारा ईडी की कार्रवाई को सही ठहराए जाने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतरे थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय सिंह ने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। वोट चोरी से लेकर संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर मोदी सरकार देश को तानाशाही की ओर धकेल रही है। कांग्रेस पार्टी इस तानाशाही के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करती रहेगी।
पूर्व प्रदेश महासचिव त्रिभुवन मिश्रा और पूर्व जिला अध्यक्ष शरद कुमार सिंह ने ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार से देश से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की कार्रवाइयां नहीं रुकीं तो कांग्रेस देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी।
मीडिया चेयरमैन जयप्रकाश लाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार है। आने वाले दिनों में भाजपा सरकार की तानाशाही नीतियों के खिलाफ आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, हालांकि स्थिति को पुलिस ने नियंत्रित कर लिया।
इस मौके पर सदा मोहन उपाध्याय, कपिल देव शुक्ला, विनोद सिंह, सुरेश साहनी, अनवर अली, गोपाल शाही, रमेश श्रीवास्तव, राम नारायण चौरसिया, राजन शुक्ला, राम प्रताप, प्रमोद पांडेय, अब्दुल गनी, विजयकांत सिंह, लक्ष्मी यादव, चंद्रजीत भारती सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहें।

संभागीय परिवहन अधिकारी ने किया एआरटीओ कार्यालय का निरीक्षण

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी मु. अज़ीम ने बताया कि सम्भागीय परिवहन अधिकारी, गोरखपुर द्वारा सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय, कुशीनगर का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित पाए गए।निरीक्षण के क्रम में सम्भागीय परिवहन अधिकारी द्वारा वाहन पंजीयन, वाहन हस्तांतरण, लाइसेंस अनुभाग एवं रिकार्ड रूम सहित विभिन्न पटलों का अवलोकन किया गया, जिसमें समस्त अभिलेख सही एवं संतोषजनक पाए गए। उन्होंने अभिलेखों एवं फाइलों को सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित रखने तथा कार्यालय परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही पुरानी पत्रावलियों की वीडिंग कराए जाने के भी निर्देश दिए गए।सम्भागीय परिवहन अधिकारी द्वारा ड्राइविंग टेस्ट का भी निरीक्षण किया गया तथा कार्यालय में उपस्थित आवेदकों से वार्ता कर उनकी समस्याओं के समाधान के संबंध में जानकारी ली गई। उन्होंने जनपद के राजस्व लक्ष्य के सापेक्ष वर्तमान में प्राप्त 90 प्रतिशत वसूली को शीघ्र 100 प्रतिशत तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान 45 दिनों से अधिक अवधि से निरुद्ध वाहनों की नीलामी की कार्यवाही सुनिश्चित करने, लंबित कर बकायेदारों को कर जमा कराने हेतु नोटिस प्रेषण के उपरांत आरसी जारी करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त सड़क सुरक्षा के अंतर्गत सीट बेल्ट, हेलमेट, रॉन्ग साइड ड्राइविंग एवं अन्य अभियोगों में सख्त प्रवर्तन कार्यवाही किए जाने के निर्देश भी दिए गए।

बाइक–ट्रक की आमने-सामने टक्कर में युवक की मौत, परिवार में मचा कोहराम

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। लखीमपुर खीरी जिले के पसगवां थाना क्षेत्र में बुधवार शाम हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में 28 वर्षीय युवक की मौत हो गई। बाइक और ट्रक की आमने-सामने हुई टक्कर में जैतीपुर थाना क्षेत्र के माडर गांव निवासी महावीर सिंह ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।

जानकारी के अनुसार महावीर सिंह अपने नाना की दवा लेने बाइक से जा रहे थे। उनके साथ निगोही थाना क्षेत्र के घुसगवां गांव निवासी अनुज यादव भी सवार थे। सुखवसा माइनर के पास सामने से आ रहे एक अज्ञात तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद दोनों युवक सड़क पर गिर पड़े, जबकि ट्रक चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया।

हादसे की सूचना मिलते ही पसगवां थाना पुलिस और 108 एम्बुलेंस टीम मौके पर पहुंची। दोनों घायलों को सीएचसी पसगवां ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने महावीर सिंह को मृत घोषित कर दिया। अनुज यादव की हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल ले गए। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी है।

महावीर सिंह छह बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी शादी पांच साल पहले खुशबू से हुई थी और उनका एक दो साल का बेटा है। हादसे की खबर मिलते ही माडर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पिता विशेष पाल, माता सावित्री, पत्नी खुशबू और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में घर-घर मातम पसरा हुआ है।