Friday, June 26, 2026
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खाद माफियाओं पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, ताबड़तोड़ छापेमारी से मचा हड़कंप

महराजगंज में कई खाद दुकानों पर नोटिस, लाइसेंस निरस्तीकरण की चेतावनी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए ताबड़तोड़ छापेमारी अभियान चलाया। अचानक हुई इस कार्रवाई से खाद विक्रेताओं में हड़कंप मच गया। कई दुकानदार दुकानें बंद कर मौके से फरार हो गए, जबकि कई प्रतिष्ठानों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर विकास खंड नौतनवा क्षेत्र के जमुहानी, जिगिना, रमगढ़वा और करमहवा गांवों में स्थित उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान शुक्ला खाद भंडार जमुहानी एवं यादव खाद भंडार करमहवा में उर्वरकों से संबंधित आवश्यक अभिलेख, स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रजिस्टर अद्यतन नहीं पाए गए। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए दोनों दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित लाइसेंस निरस्त कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

छापेमारी के दौरान कई खाद विक्रेता कार्रवाई से बचने के लिए दुकानें बंद कर फरार हो गए। इनमें खान ट्रेडिंग कंपनी जमुहानी, मां दुर्गा ट्रेडर्स जिगिना, मद्धेशिया खाद भंडार जिगिना, शुक्ला ट्रेडर्स खाद भंडार जिगिना और सिंह खाद भंडार जिगिना शामिल हैं। कृषि विभाग द्वारा इन सभी प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जवाब मिलने के बाद पुनः जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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जिला कृषि अधिकारी ने जनपद के सभी उर्वरक विक्रेताओं को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि खाद की दुकानें केवल प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक ही खुली रहेंगी। निर्धारित समय के बाहर किसी भी प्रकार की उर्वरक बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि खाद की बिक्री केवल जनपद के वास्तविक किसानों को ही की जाए तथा प्रत्येक बिक्री पर किसान का नाम, पता और मोबाइल नंबर बिक्री रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही यूरिया और डीएपी के साथ किसी अन्य उत्पाद की जबरन टैगिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

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कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति या फर्म उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, तस्करी या अवैध टैगिंग में लिप्त पाई गई तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल भेजने से भी विभाग पीछे नहीं हटेगा।

“जब सूर्य देव बने जीवन गुरु: पुराणों में छिपा चेतना का रहस्य”

🔱 “जब सूर्य केवल आकाश का दीप नहीं, आत्मा का देव बन जाता है: शास्त्रों में वर्णित सूर्य की महिमा, कथा और चेतना”

प्रस्तावना
जब अगली बार आप सूर्योदय देखें, तो उसे केवल एक प्राकृतिक दृश्य न समझें।
वह क्षण स्मरण कराता है कि —
“यदि भीतर का सूर्य जागृत हो जाए, तो अज्ञान, भय और अंधकार स्वयं मार्ग छोड़ देता है।”
इससे पहले हमने जाना कि सूर्य बाह्य नहीं, आंतरिक साधना का प्रतीक है।

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अब आगे हम शास्त्रों के आलोक में उस सूर्य को जानेंगे —
जो केवल ग्रह नहीं, चेतना, धर्म और जीवन का आधार है।
यह कथा केवल पढ़ने के लिए नहीं,
बल्कि अनुभव करने के लिए है।
☀️ शास्त्रों में सूर्य: केवल ग्रह नहीं, ब्रह्म का नेत्र
ऋग्वेद में सूर्य को “सविता”, “पूषा” और “मित्र” कहा गया है।

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उपनिषद स्पष्ट कहते हैं —
“आदित्यो ब्रह्मेति”
अर्थात सूर्य ही ब्रह्म का दृश्य स्वरूप है।
सूर्य को काल, कर्म और ज्ञान का साक्षी माना गया है।
जो कुछ भी जगत में घटित होता है,
वह सूर्य के साक्ष्य में होता है।
यही कारण है कि
सूर्य को ‘लोकचक्षु’ कहा गया —
समस्त लोकों की आँख।

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📜 शास्त्रोक्त कथा: राजा इक्ष्वाकु और सूर्य का वरदान
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार —
राजा इक्ष्वाकु, जो सूर्यवंश के प्रवर्तक थे,
एक बार गहन तपस्या में लीन हुए।
उन्होंने सूर्य से पूछा —
“हे देव! मनुष्य धर्म से विचलित क्यों होता है?”
सूर्यदेव प्रकट हुए और बोले —
“क्योंकि मनुष्य बाहर प्रकाश खोजता है,
भीतर नहीं।”
सूर्य ने इक्ष्वाकु को सूर्योपासना का विधान बताया
प्रातःकाल सूर्य को अर्घ्य,
सत्य आचरण और संयम।
यही उपासना आगे चलकर
रामराज्य की नींव बनी।

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🔥 सूर्य और आत्मा की समानता (शास्त्रों के अनुसार)
सूर्य
आत्मा
स्वयं प्रकाशित
स्वयं चेतन
सबको प्रकाश देता है
सबको जीवन देता है
कलंक से परे
कर्मफल से अछूती
उदय-अस्त दिखता है
जन्म-मरण का भ्रम
गीता कहती है —
“न तद्भासयते सूर्यो…”
आत्मा को सूर्य भी प्रकाशित नहीं कर सकता,
क्योंकि वह स्वयं प्रकाश है।
अर्थात —
सूर्य बाहरी प्रकाश है,
आत्मा आंतरिक सूर्य।

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🌅 सूर्योपासना: धर्म, विज्ञान और चेतना का संगम
शास्त्रों में सूर्य नमस्कार को
केवल योगासन नहीं,
जीवन-साधना बताया गया है।
आरोग्य — सूर्य किरणें प्राण देती हैं
धर्म — समय पालन सिखाती हैं
विज्ञान — जैविक घड़ी नियंत्रित करती हैं
अध्यात्म — आत्मबोध कराती हैं
इसलिए कहा गया —
“सूर्यः आत्मा जगतस्तस्थुषश्च”
सूर्य ही चर-अचर जगत की आत्मा है।

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🕉️ सूर्य की महिमा: क्यों हर युग में पूज्य?
सतयुग — तप और सत्य का प्रतीक
त्रेतायुग — श्रीराम का कुलदेव
द्वापर — श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता उपदेश से पूर्व स्मरण
कलियुग — प्रत्यक्ष देव, जो आज भी दिखता है
सूर्य न मंदिर मांगता है,
न पुजारी।
वह केवल दृष्टि और श्रद्धा चाहता है।
🌞 संदेश 5 वा एपिसोड
जिस दिन मनुष्य
सुबह उगते सूर्य को देखकर
अपने भीतर भी
सत्य, अनुशासन और साहस जगाएगा —
उसी दिन उसका जीवन धर्ममय होगा।
सूर्य बाहर उगता है,
पर मनुष्य को भीतर जगना होता है।

भारतीय परमाणु विज्ञान के शिल्पकार डॉ. पी.के. अयंगर

पुनीत मिश्र

भारतीय विज्ञान और विशेषकर परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में जिन व्यक्तित्वों ने बिना किसी दिखावे के राष्ट्र की वैज्ञानिक नींव को सुदृढ़ किया, उनमें डॉ. प्रमोद कालीकर अयंगर का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे न केवल एक उच्च कोटि के वैज्ञानिक थे, बल्कि दूरदर्शी प्रशासक और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले नीति-निर्माता भी थे। शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और पद्मभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत डॉ. अयंगर ने भारत के परमाणु कार्यक्रम को आत्मनिर्भरता, अनुशासन और वैज्ञानिक आत्मविश्वास प्रदान किया।
डॉ. पी.के. अयंगर का जन्म 1931 में हुआ। प्रारंभ से ही उनकी रुचि गणित और भौतिकी में रही, जिसने आगे चलकर उन्हें नाभिकीय भौतिकी जैसे जटिल और महत्वपूर्ण क्षेत्र की ओर अग्रसर किया। उच्च शिक्षा के दौरान उन्होंने वैज्ञानिक चिंतन और अनुसंधान की वह मजबूत आधारशिला तैयार की, जिसने उनके पूरे जीवन को दिशा दी। उन्होंने आधुनिक परमाणु विज्ञान को केवल सैद्धांतिक रूप में नहीं, बल्कि व्यावहारिक और राष्ट्रोपयोगी दृष्टि से समझा।
उनका अधिकांश वैज्ञानिक जीवन भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से जुड़ा रहा। यहां उन्होंने नाभिकीय रिएक्टरों, ईंधन चक्र और विकिरण विज्ञान से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण शोध कार्य किए। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के निदेशक के रूप में उन्होंने अनुसंधान को नई गति दी और स्वदेशी तकनीकों के विकास पर विशेष बल दिया। उनके नेतृत्व में यह संस्थान केवल अनुसंधान केंद्र नहीं रहा, बल्कि देश की ऊर्जा, चिकित्सा और रक्षा जरूरतों का एक मजबूत आधार बना।
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष के रूप में डॉ. अयंगर ने भारत की दीर्घकालिक परमाणु नीति को स्पष्ट दिशा दी। उनका मानना था कि परमाणु ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास और सुरक्षा का एक रणनीतिक आधार है। अंतरराष्ट्रीय दबावों और तकनीकी प्रतिबंधों के दौर में भी उन्होंने आत्मनिर्भरता के सिद्धांत से समझौता नहीं किया और भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा।
1974 के पोखरण शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण की वैज्ञानिक तैयारी और योजना में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। यह परीक्षण भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मविश्वास का प्रतीक बना। डॉ. अयंगर का दृष्टिकोण स्पष्ट था कि विज्ञान का उपयोग शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान और सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारत में विज्ञान के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से भी अलंकृत किया। ये सम्मान उनके व्यक्तिगत गौरव से अधिक भारतीय विज्ञान जगत की उपलब्धियों के प्रतीक थे। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में देश की साख को मजबूत किया।
डॉ. पी.के. अयंगर का मानना था कि विज्ञान का अंतिम उद्देश्य मानव कल्याण है। वे वैज्ञानिकों से न केवल उत्कृष्ट शोध की अपेक्षा रखते थे, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी को भी उतना ही आवश्यक मानते थे। उनके विचारों में वैज्ञानिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय दायित्व एक-दूसरे के पूरक थे, विरोधी नहीं।
आज जब भारत परमाणु ऊर्जा और उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़ा है, तो इसके पीछे डॉ. पी.के. अयंगर जैसे वैज्ञानिकों की दूरदृष्टि, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा है कि सच्चा वैज्ञानिक वही है, जो अपने ज्ञान को राष्ट्र और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दे।

यू. आर. अनंतमूर्ति : समाज, संस्कृति और संवेदना के आलोचक

नवनीत मिश्र

यू. आर. अनंतमूर्ति कन्नड़ साहित्य की उन विशिष्ट हस्तियों में हैं, जिन्होंने साहित्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और आत्मा के गहन आत्ममंथन का उपकरण बनाया। प्रसिद्ध साहित्यकार, आलोचक और शिक्षाविद के रूप में उन्होंने भारतीय समाज की जटिल संरचनाओं, धार्मिक रूढ़ियों, नैतिक दुविधाओं और आधुनिक मनुष्य की बेचैनी को अपनी रचनाओं के केंद्र में रखा। कन्नड़ साहित्य के ‘नव्या आंदोलन’ के प्रणेता के रूप में उनका योगदान साहित्यिक इतिहास में निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जाता है।
अनंतमूर्ति का साहित्य परंपरा और आधुनिकता के संघर्ष से जन्म लेता है। वे परंपरा को पूरी तरह नकारते नहीं, बल्कि उसकी आलोचनात्मक जाँच करते हैं। उनके लिए आधुनिकता पश्चिम का अंधानुकरण नहीं, बल्कि विवेक, तर्क और आत्मालोचना की प्रक्रिया है। यही वैचारिक दृष्टि नव्या आंदोलन की पहचान बनी, जिसने कन्नड़ साहित्य को भावनात्मक आदर्शवाद से निकालकर बौद्धिक गहराई और सामाजिक यथार्थ की ओर मोड़ा।
उनका बहुचर्चित उपन्यास ‘संस्कार’ भारतीय साहित्य की कालजयी कृतियों में गिना जाता है। यह कृति ब्राह्मण समाज की जड़ परंपराओं, नैतिक पाखंड और व्यक्ति की आंतरिक स्वतंत्रता के संघर्ष को अत्यंत सशक्त ढंग से प्रस्तुत करती है। उपन्यास का नायक केवल सामाजिक व्यवस्था से नहीं, अपने अंतर्मन से भी संघर्ष करता है। ‘संस्कार’ का महत्व इसी में है कि वह पाठक को किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुँचाता, बल्कि प्रश्नों के कठोर यथार्थ से रूबरू कराता है।
‘अवस्थे’, ‘भारतीपुरा’ और ‘मृदुला’ जैसी रचनाओं में अनंतमूर्ति ने आधुनिक समाज में सत्ता, नैतिकता, यौनिकता और पहचान के प्रश्नों को गहरी संवेदना के साथ उठाया। उनके पात्र आदर्श नहीं, बल्कि द्वंद्वग्रस्त मनुष्य हैंl जो सामाजिक दबावों और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच फँसे हुए हैं। यही कारण है कि उनका साहित्य पाठक को असहज करता है, लेकिन यही असहजता उसे सोचने को विवश भी करती है।
एक आलोचक के रूप में अनंतमूर्ति की दृष्टि अत्यंत अनुशासित और वैचारिक रूप से स्पष्ट है। उन्होंने भारतीय साहित्यिक आलोचना को आधुनिक दर्शन, अस्तित्ववाद और सामाजिक विमर्श से जोड़ा, लेकिन भारतीय संदर्भों और सांस्कृतिक अनुभवों से उसका रिश्ता बनाए रखा। उनका आलोचनात्मक लेखन साहित्य को समाज से काटकर देखने की प्रवृत्ति का विरोध करता है।
शिक्षाविद के रूप में उन्होंने विश्वविद्यालयों में साहित्य अध्ययन को जीवंत और प्रश्नाकुल बनाए रखने का प्रयास किया। वे मानते थे कि साहित्य का उद्देश्य केवल सौंदर्यबोध नहीं, बल्कि नैतिक चेतना का विस्तार भी है। सार्वजनिक बौद्धिक के रूप में वे समकालीन सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे। असहिष्णुता, सांप्रदायिकता और वैचारिक संकीर्णता के विरुद्ध उनकी आवाज़ ने उन्हें विवादों में भी डाला, लेकिन उन्होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया।
भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित यू. आर. अनंतमूर्ति की साहित्यिक विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। उनका लेखन हमें यह सिखाता है कि सच्चा साहित्य मनोरंजन से आगे बढ़कर समाज को आईना दिखाता है। समाज, संस्कृति और संवेदना के आलोचक लेखक के रूप में अनंतमूर्ति ने कन्नड़ साहित्य ही नहीं, बल्कि भारतीय बौद्धिक परंपरा को भी अधिक साहसी, अधिक मानवीय और अधिक विचारशील बनाया।

संपत्ति विवाद ने ली दो जिंदगियां, बेटे की हत्या के अगले दिन पिता की भी मौत

अलीगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में पैतृक संपत्ति विवाद ने एक ही परिवार की दो जिंदगियां लील लीं। गोली लगने से पहले बेटे की मौत हुई और उसके अगले ही दिन घायल पिता ने भी दम तोड़ दिया। इस दोहरे हत्याकांड से इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

घटना बरौला जाफराबाद के मोहल्ला जाहरवीर नगर की है, जहां गुरुवार सुबह करीब 10 बजे पारिवारिक संपत्ति को लेकर विवाद हिंसक हो गया। यहां रहने वाले प्रवेश सिंह अपने परिवार के साथ प्लॉट के एक हिस्से में रह रहे थे।

जानकारी के अनुसार, प्रवेश सिंह पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके पिता हरप्रसाद ने पैतृक संपत्ति की लिखापढ़ी प्रवेश को छोड़कर अपने अन्य तीन बेटों—रवेंद्र, छोटे और दिनेश—के नाम कर दी थी। यही नहीं, जाहरवीर नगर स्थित प्लॉट भी उन्हीं के नाम कर दिया गया, जिससे लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।

विवाद के दौरान फायरिंग

गुरुवार को रवेंद्र, छोटे और दिनेश महिलाओं के साथ प्लॉट पर पहुंचे। इसी दौरान संपत्ति को लेकर कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसा में बदल गई। आरोप है कि तीनों ने प्रवेश सिंह और उनके बेटे सोनू पर गोली चला दी।

• सोनू को दो गोलियां लगीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई

• प्रवेश सिंह को एक गोली लगी, उन्हें गंभीर हालत में जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया

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बेटे के अंतिम संस्कार के बाद टूटा दूसरा कहर

शुक्रवार को पुलिस सुरक्षा में सोनू का अंतिम संस्कार किया गया। बेटे की हत्या से परिवार पहले ही सदमे में था। इसी बीच रात को मेडिकल कॉलेज से खबर आई कि वेंटिलेटर पर भर्ती प्रवेश सिंह ने भी अंतिम सांस ले ली।
इस खबर के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मां और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।

पुलिस ने तीनों आरोपित किए गिरफ्तार

प्रवेश के छोटे बेटे कृष्णगोपाल ने चाचा रवेंद्र, दिनेश और चचेरे भाई कृष्णा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की आगे जांच जारी है।

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इलाके में दहशत

इस दोहरे हत्याकांड के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मौके पर अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को दिए 700 मिलियन डॉलर, जानिए शहबाज सरकार कहां करेगी इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल

इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए वर्ल्ड बैंक ने 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 5,800 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। यह मदद शनिवार 20 दिसंबर 2025 को स्वीकृत की गई, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान में व्यापक आर्थिक स्थिरता, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

किस योजना के तहत मिली मदद?

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वित्तीय सहायता पब्लिक रिसोर्सेज फॉर इन्क्लूसिव डेवलपमेंट – मल्टीफेज प्रोग्रामैटिक अप्रोच (PRID-MPA) के तहत दी जा रही है। इस ढांचे के अंतर्गत पाकिस्तान को भविष्य में कुल 1.35 अरब डॉलर तक की फंडिंग मिल सकती है।

700 मिलियन डॉलर का कहां होगा इस्तेमाल?

रिपोर्ट के अनुसार—

• 600 मिलियन डॉलर की राशि फेडरल सरकार की योजनाओं के लिए

• 100 मिलियन डॉलर सिंध प्रांत की एक विशेष पहल के लिए आवंटित की जाएगी

यह मंजूरी अगस्त 2025 में पंजाब में प्राथमिक शिक्षा सुधार के लिए दिए गए 47.9 मिलियन डॉलर के अनुदान के बाद आई है।

विश्व बैंक ने क्या कहा?

विश्व बैंक की पाकिस्तान कंट्री डायरेक्टर बोलोरमा अमगाबाजार ने कहा कि पाकिस्तान के समावेशी और सतत विकास के लिए घरेलू संसाधनों को बढ़ाना और उनका पारदर्शी व प्रभावी इस्तेमाल बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा, “PRID-MPA के जरिए हम फेडरल और सिंध सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि स्कूलों और क्लीनिकों को बेहतर फंडिंग, ज्यादा न्यायसंगत टैक्स सिस्टम और मजबूत आंकड़ों के आधार पर फैसले लिए जा सकें।

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राजनीतिक हस्तक्षेप बना बड़ी चुनौती

विश्व बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री टोबियास अख्तर हक ने कहा कि पाकिस्तान की राजकोषीय नींव को मजबूत करना व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने माना कि राजनीतिक हस्तक्षेप और कमजोर संस्थान निवेश और विकास में बड़ी बाधा रहे हैं।

उनके मुताबिक, PRID-MPA के जरिए—

• राजस्व प्रशासन मजबूत किया जाएगा

• बजट क्रियान्वयन सुधारा जाएगा

• ह्यूमन कैपिटल और जलवायु अनुकूलन में निवेश बढ़ेगा

• आंकड़ों और निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाया जाएगा

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसा सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचे और आम लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिले।

पाकिस्तान पर बढ़ती निर्भरता?

विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से कर्ज और सहायता लेना पाकिस्तान की आर्थिक निर्भरता को दर्शाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या शहबाज शरीफ सरकार इस भारी भरकम रकम का उपयोग वास्तव में सुधारों के लिए कर पाएगी या नहीं।

पीएम मोदी की कूटनीति से खाड़ी देशों के साथ रिश्तों को नई मजबूती, GCC के 5 देशों से मिला सर्वोच्च सम्मान

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय और व्यक्तिगत कूटनीति के चलते पिछले एक दशक में भारत और खाड़ी देशों (GCC) के बीच रिश्तों ने अभूतपूर्व मजबूती हासिल की है। हाल ही में हुई उनकी ओमान यात्रा को इस दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ओमान के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आने वाले समय में खाड़ी सहयोग परिषद के अन्य सदस्य देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को और गति देगा।

मोदी की कूटनीति ने बदली भारत-खाड़ी संबंधों की दिशा

राजनयिक जानकारों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-खाड़ी संबंधों को ऐसी ऊंचाई पर पहुंचाया है, जिसे पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने हासिल नहीं किया। यह केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का नया ढांचा है, जिसमें ऊर्जा, निवेश, रक्षा, तकनीक और मानव संसाधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

GCC देशों से मिला सर्वोच्च सम्मान

इन मजबूत रिश्तों का प्रमाण यह है कि GCC के छह में से पांच सदस्य देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने-अपने देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया है। हालिया ओमान यात्रा के दौरान उन्हें यह सम्मान मिला।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत और खाड़ी देशों की साझेदारी अब केवल हाइड्रोकार्बन और भारतीय श्रमिकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह बहुआयामी रणनीतिक सहयोग में बदल चुकी है।

खाड़ी नेताओं से मजबूत व्यक्तिगत संबंध

प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी देशों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत रिश्तों को हमेशा प्राथमिकता दी है।

• यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान

• सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज

• बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा

• कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह

• ओमान के सुलतान हैथम बिन तारिक

• कतर के अमीर शेख तमिम बिन हमद अल थानी

इन सभी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी के संबंधों को असाधारण रूप से सौहार्दपूर्ण बताया जाता है, जो किसी भी विदेशी नेता के लिए दुर्लभ माना जाता है।

कतर को छोड़ सभी GCC देशों ने किया सम्मानित

प्रधानमंत्री मोदी अब तक GCC देशों के 15 दौरे कर चुके हैं, जो किसी भी अन्य भारतीय प्रधानमंत्री से अधिक हैं।
GCC के छह सदस्य देशों में से कतर को छोड़ शेष पांच देशों ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है।

पीएम मोदी को मिले GCC सम्मान:

ओमान – द फर्स्ट क्लास ऑफ द ऑर्डर ऑफ ओमान (दिसंबर 2025)

कुवैत – ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर (दिसंबर 2024)

बहरीन – द किंग हमद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां (अगस्त 2019)

संयुक्त अरब अमीरात – ऑर्डर ऑफ जायद (अगस्त 2019)

सऊदी अरब – ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुल अजीज (अप्रैल 2016)

औपचारिकता नहीं, भरोसे का प्रतीक

विशेषज्ञों का मानना है कि ये सम्मान केवल औपचारिक नहीं हैं। GCC देशों में ये सम्मान उन्हीं नेताओं को दिए जाते हैं, जिन्हें विश्वसनीय और रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। यह भारत के प्रति खाड़ी देशों के बढ़ते भरोसे और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में भी भारत की भूमिका अहम

इसी बीच, एस्टोनिया में भारत के राजदूत आशीष सिन्हा ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका दुनिया के लिए उम्मीद की किरण है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की—दोनों से निजी संबंध हैं। भारत का शांति का संदेश बाल्टिक क्षेत्र सहित पूरी दुनिया में गूंज रहा है।

न्याय विभाग वेबसाइट से गायब हुईं जेफरी एपस्टीन से जुड़ी 16 फाइलें, ट्रंप की फोटो समेत अहम दस्तावेज लापता

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice – DOJ) की आधिकारिक वेबसाइट से जेफरी एपस्टीन से जुड़े 16 अहम दस्तावेज अचानक गायब हो जाने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। इन लापता फाइलों में एक ऐसी फोटो भी शामिल थी, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप, जेफरी एपस्टीन और उसकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल साथ नजर आ रहे थे।

जानकारी के अनुसार, ये दस्तावेज हाल ही में सार्वजनिक किए गए थे, लेकिन 24 घंटे से भी कम समय में वेबसाइट से हटा दिए गए। इस पूरे मामले पर न तो न्याय विभाग ने कोई आधिकारिक बयान जारी किया है और न ही यह स्पष्ट किया है कि फाइलें जानबूझकर हटाई गईं या तकनीकी कारणों से गायब हुईं।

कौन-कौन से दस्तावेज हुए गायब

गायब हुई फाइलों में

• निर्वस्त्र महिलाओं की पेंटिंग्स की तस्वीरें

• फर्नीचर और दराजों में रखे गए चित्रों का संग्रह

• ट्रंप, एपस्टीन, मेलानिया ट्रंप और घिस्लेन मैक्सवेल की साझा तस्वीर
जैसे संवेदनशील दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं।
इन फाइलों के अचानक हटने से सोशल मीडिया पर अटकलें तेज हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसे बचाने के लिए ये दस्तावेज हटाए गए।

डेमोक्रेट सांसदों का हमला

संसद की निगरानी समिति के डेमोक्रेट सदस्यों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर DOJ को घेरते हुए लिखा—
“और क्या-क्या छिपाया जा रहा है? अमेरिकी जनता को पारदर्शिता चाहिए।”

पहले से उठ रहे थे सवाल

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में लागू कानून के तहत एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए गए थे। हालांकि, इन दस्तावेजों में

• एफबीआई द्वारा पीड़ितों के इंटरव्यू

• अभियोजकों की आंतरिक टिप्पणिया

• यह जानकारी कि एपस्टीन को हल्की सजा क्यों दी गई
जैसे सबसे अहम रिकॉर्ड शामिल नहीं थे।

इस वजह से यह अब भी साफ नहीं हो पाया कि वर्षों तक एपस्टीन के खिलाफ गंभीर आरोपों के बावजूद संघीय एजेंसियों ने कड़े कदम क्यों नहीं उठाए।

बड़े नाम, लेकिन सीमित जानकारी

जारी दस्तावेजों में ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार प्रिंस एंड्रयू समेत कई बड़े नामों का उल्लेख तो है, लेकिन उनके संबंध में बहुत सीमित जानकारी दी गई है। इससे यह सवाल और गहरा गया है कि

• किन लोगों की वास्तव में जांच हुई

• और किन प्रभावशाली लोगों को नजरअंदाज किया गया

नई जानकारियों में 1996 की एक शिकायत का जिक्र भी था, जिसमें एपस्टीन पर बच्चों की तस्वीरें चुराने का आरोप लगाया गया था, साथ ही यह भी सामने आया कि 2000 के दशक में DOJ ने संघीय मुकदमे से पीछे हटने का फैसला किया था।

पारदर्शिता पर सवाल

DOJ वेबसाइट से फाइलों का यूं गायब होना न्यायिक पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब तक न्याय विभाग इस मामले पर स्पष्ट जवाब नहीं देता, तब तक एपस्टीन केस और उससे जुड़े प्रभावशाली नामों को लेकर संदेह बना रहेगा।

वे अमर नाम, जिनके जाने से इतिहास की आँखें नम हो गईं”

21 दिसंबर

भारत और विश्व के इतिहास में 21 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन महान व्यक्तित्वों की स्मृति का दिन है, जिन्होंने अपने कर्म, विचार और योगदान से समाज, राजनीति, विज्ञान, साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। इस दिन देश ने कई ऐसे रत्न खोए, जिनकी विरासत आज भी हमारे विचारों और कार्यों में जीवित है। आइए जानते हैं 21 दिसंबर को हुए महत्वपूर्ण निधन और उन महान व्यक्तियों के जीवन, जन्मस्थल और राष्ट्रहित में योगदान के बारे में विस्तार से।

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मोतीलाल वोरा (निधन : 21 दिसंबर 2020)
मोतीलाल वोरा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ और विश्वसनीय नेताओं में गिने जाते थे। उनका जन्म 20 दिसंबर 1928 को निमाच जिला, मध्य प्रदेश, भारत में हुआ। राजनीति में उनकी पहचान एक कुशल संगठनकर्ता और प्रशासक के रूप में रही। वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। कांग्रेस संगठन में कोषाध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से सुदृढ़ किया। उनका जीवन सादगी, निष्ठा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। राष्ट्रहित में उनका योगदान भारतीय राजनीति में स्थिरता और अनुशासन के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

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डॉ. पी. के. अयंगर (निधन : 21 दिसंबर 2011)
डॉ. पी. के. अयंगर भारत के प्रख्यात न्यूक्लियर फिजिसिस्ट और वैज्ञानिक थे। उनका जन्म 1931 में तिरुवनंतपुरम, केरल, भारत में हुआ। वे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के निदेशक रहे और भारत के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान की। पोखरण परमाणु परीक्षणों की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि तैयार करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। विज्ञान और राष्ट्र सुरक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। वे युवाओं के लिए वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान के प्रेरणास्रोत थे।

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तेजी बच्चन (निधन : 21 दिसंबर 2007)
तेजी बच्चन, प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन की पत्नी और महान अभिनेता अमिताभ बच्चन की माता थीं। उनका जन्म 12 अगस्त 1914 को लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ। वे एक शिक्षिका, सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्यप्रेमी महिला थीं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने महिलाओं को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभाई। तेजस्वी व्यक्तित्व और प्रखर विचारों की धनी तेजी बच्चन ने अपने परिवार के साथ-साथ समाज को भी संस्कार, शिक्षा और आत्मविश्वास की राह दिखाई। भारतीय सांस्कृतिक चेतना में उनका योगदान एक प्रेरक अध्याय के रूप में दर्ज है।

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महावीर प्रसाद द्विवेदी (निधन : 21 दिसंबर 1938)
महावीर प्रसाद द्विवेदी हिंदी गद्य साहित्य के युगप्रवर्तक माने जाते हैं। उनका जन्म 15 मई 1864 को दौसर, रायबरेली जिला, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे प्रतिष्ठित पत्रिका ‘सरस्वती’ के संपादक रहे और हिंदी साहित्य को व्यवस्थित, परिष्कृत और आधुनिक स्वरूप दिया। भाषा की शुद्धता, तार्किकता और सामाजिक चेतना उनके लेखन की विशेषता रही। पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से उन्होंने राष्ट्र जागरण में अहम भूमिका निभाई। हिंदी साहित्य का आधुनिक स्वरूप काफी हद तक उनके विचारों और संपादन दृष्टि का परिणाम है।

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गेंदालाल दीक्षित (निधन : 21 दिसंबर 1920)
गेंदालाल दीक्षित भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे। उनका जन्म 1885 में औरैया जिला, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के निकट सहयोगी थे और ‘मातृवेदी’ जैसे गुप्त क्रांतिकारी संगठन से जुड़े रहे। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष और जनजागरण उनके जीवन का उद्देश्य था। अल्पायु में ही उनका निधन हो गया, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान साहस, त्याग और देशभक्ति की अमिट मिसाल बन गया। उनका नाम भारतीय क्रांति इतिहास में सम्मान से लिया जाता है।

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21 दिसंबर को हुए महत्वपूर्ण निधन हमें यह स्मरण कराते हैं कि राष्ट्र का निर्माण केवल सत्ता से नहीं, बल्कि विचार, विज्ञान, साहित्य, संस्कृति और बलिदान से होता है। ये सभी विभूतियाँ भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनका योगदान भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में सदैव जीवित रहेगा।

आज का दिन किन राशियों के लिए बनेगा शुभ, जानें मेष से मीन तक का विस्तृत भविष्यफल

राशिफल 21 दिसंबर 2025: आज का दिन किन राशियों के लिए बनेगा शुभ, जानें मेष से मीन तक का विस्तृत भविष्यफल

पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय
ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर 21 दिसंबर 2025 का राशिफल तैयार किया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर राशि पर उसके स्वामी ग्रह का विशेष प्रभाव पड़ता है। आज का दिन कुछ राशियों के लिए उन्नति, सफलता और सुखद समाचार लेकर आ सकता है, वहीं कुछ को संयम और समझदारी से आगे बढ़ने की आवश्यकता रहेगी। सरल, सहज और जन-उपयोगी शब्दों में प्रस्तुत है मेष से लेकर मीन तक का आकर्षक और विस्तृत दैनिक राशिफल,

मेष राशि (Aries)
राशि चिन्ह: मेष | अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज का दिन मेहनत और धैर्य से आगे बढ़ने का है।
कार्य/व्यवसाय: काम का दबाव बढ़ेगा, लेकिन आपकी नेतृत्व क्षमता आपको आगे रखेगी।
शिक्षा: विद्यार्थियों को एकाग्रता बनाए रखनी होगी, तभी सफलता मिलेगी।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा बढ़ेगी, मंच या प्रस्तुति का अवसर मिल सकता है।
राजनीति/प्रशासन: निर्णय लेते समय जल्दबाजी न करें।
आर्थिक स्थिति: आय स्थिर रहेगी, अनावश्यक खर्च से बचें।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
पूजा: हनुमान जी की उपासना लाभकारी रहेगी।

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वृषभ राशि (Taurus)
राशि चिन्ह: वृषभ | अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
आज रिश्तों और व्यवहार में संतुलन जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: टीमवर्क से लाभ होगा, पुराने प्रोजेक्ट पूरे होंगे।
शिक्षा: पढ़ाई में स्थिर प्रगति रहेगी।
कला/संगीत: गायन या लेखन में मन लगेगा।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों से सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: धन संतुलित रहेगा, पुराने लेन-देन सुलझ सकते हैं।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6
पूजा: माता लक्ष्मी की आराधना करें।

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मिथुन राशि (Gemini)
राशि चिन्ह: मिथुन | अक्षर: का, की, कू, घ, छ, के, को, ह
आज संवाद और संपर्क आपके लिए लाभकारी रहेंगे।
कार्य/व्यवसाय: नए विचारों की सराहना होगी।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के संकेत हैं।
कला/संगीत: मीडिया, लेखन, अभिनय से जुड़े लोगों के लिए अच्छा दिन।
राजनीति/प्रशासन: भाषण और संपर्क से फायदा।
आर्थिक स्थिति: कोई फैसला लाभ दिला सकता है।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान गणेश की पूजा करें।

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कर्क राशि (Cancer)
राशि चिन्ह: कर्क | अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
कार्य/व्यवसाय: नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
शिक्षा: मन भटक सकता है, ध्यान जरूरी।
कला/संगीत: भावनात्मक रचनाएं सराही जाएंगी।
राजनीति/प्रशासन: छवि सुधारने का अवसर।
आर्थिक स्थिति: स्थिति मजबूत रहेगी।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 2
पूजा: भगवान शिव की आराधना करें।

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सिंह राशि (Leo)
राशि चिन्ह: सिंह | अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
कार्य/व्यवसाय: प्रशंसा और पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
शिक्षा: विद्यार्थियों को सफलता मिलेगी।
कला/संगीत: मंचीय कला में नाम मिलेगा।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
आर्थिक स्थिति: संतोषजनक रहेगी।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव को अर्घ्य दें।
कन्या राशि (Virgo)
राशि चिन्ह: कन्या | अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
नए अवसर आपके सामने आएंगे।
कार्य/व्यवसाय: योजना सफल होगी।
शिक्षा: शोध और तकनीकी पढ़ाई में लाभ।
कला/संगीत: सीखने का अवसर मिलेगा।
राजनीति/प्रशासन: नीतिगत फैसले सही रहेंगे।
आर्थिक स्थिति: मजबूत रहेगी।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान विष्णु की पूजा करें।

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तुला राशि (Libra)
राशि चिन्ह: तुला | अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
कामकाज में व्यस्तता रहेगी।
कार्य/व्यवसाय: सीनियर्स का सहयोग मिलेगा।
शिक्षा: समय प्रबंधन जरूरी।
कला/संगीत: सौंदर्य और डिजाइन से जुड़े लोगों के लिए अच्छा दिन।
राजनीति/प्रशासन: संतुलित रवैया लाभ देगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकते हैं।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 6
पूजा: माता दुर्गा की उपासना करें।
वृश्चिक राशि (Scorpio)
राशि चिन्ह: वृश्चिक | अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
मानसिक रूप से मजबूत रहेंगे।
कार्य/व्यवसाय: मेहनत रंग लाएगी।
शिक्षा: लक्ष्य स्पष्ट रहेगा।
कला/संगीत: गहराई वाले विषयों में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: अनुकूल रहेगी।
शुभ रंग: मैरून | शुभ अंक: 9
पूजा: भगवान भोलेनाथ की पूजा करें।

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धनु राशि (Sagittarius)
राशि चिन्ह: धनु | अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा
भाग्य साथ देगा।
कार्य/व्यवसाय: तरक्की के योग।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में सफलता।
कला/संगीत: यात्रा या प्रस्तुति का योग।
राजनीति/प्रशासन: विस्तार मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: मजबूत रहेगी।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3
पूजा: भगवान विष्णु की पूजा करें।
मकर राशि (Capricorn)
राशि चिन्ह: मकर | अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो
अनुशासन से लाभ होगा।
कार्य/व्यवसाय: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
शिक्षा: परिश्रम का फल मिलेगा।
कला/संगीत: अभ्यास से पहचान बनेगी।
राजनीति/प्रशासन: धैर्य जरूरी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर रहेगी।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 8
पूजा: शनि देव की पूजा करें।

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कुंभ राशि (Aquarius)
राशि चिन्ह: कुंभ | अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो
काम को प्राथमिकता दें।
कार्य/व्यवसाय: बदलाव के संकेत।
शिक्षा: तकनीकी क्षेत्र में लाभ।
कला/संगीत: नए प्रयोग सफल होंगे।
राजनीति/प्रशासन: विचारधारा मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है।
शुभ रंग: बैंगनी | शुभ अंक: 4
पूजा: भगवान शिव की पूजा करें।
मीन राशि (Pisces)
राशि चिन्ह: मीन | अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, च
संयम और समझदारी का दिन।
कार्य/व्यवसाय: जिम्मेदारी निभाने में सफल रहेंगे।
शिक्षा: रचनात्मक विषयों में लाभ।
कला/संगीत: कल्पनाशीलता बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: सलाहकार की भूमिका मजबूत।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 7
पूजा: भगवान विष्णु की आराधना करें।

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डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष की पुष्टि नहीं करता। अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अवश्य कराएं।

21 दिसंबर: इतिहास के पन्नों में अमर हुए महान जन्म—जिन्होंने भारत और विश्व को नई दिशा दी

इतिहास केवल तिथियों का संग्रह नहीं होता, बल्कि उन महान व्यक्तित्वों की जीवंत गाथा होता है, जिन्होंने अपने विचार, कर्म और संघर्ष से समाज, राष्ट्र और विश्व को दिशा दी। 21 दिसंबर ऐसी ही एक विशिष्ट तिथि है, जिस दिन राजनीति, न्याय, साहित्य, संगीत, खेल, प्रशासन और समाज सुधार के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ने वाले अनेक महान लोग जन्मे। आइए, इतिहास के इन महत्वपूर्ण जन्मदिनों पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।

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गोपाल सिंह (जन्म: 21 दिसंबर 2010 नहीं, वास्तविक जन्म वर्ष पूर्व का है)
गोपाल सिंह राजस्थान की राजनीति का एक सशक्त नाम रहे। वे राजस्थान विधानसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष रहे और लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म राजस्थान राज्य, भारत में हुआ। उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही को निष्पक्षता और गरिमा के साथ संचालित कर संसदीय मर्यादाओं को नई ऊंचाई दी। उनका योगदान राजस्थान की संसदीय संस्कृति के विकास में स्मरणीय है।

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तेजस्विन शंकर (जन्म: 21 दिसंबर 1998)
तेजस्विन शंकर का जन्म दिल्ली, भारत में हुआ। वे भारत के प्रतिभाशाली ऊँची कूद (High Jump) एथलीट हैं। कम उम्र में ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर रोशन किया। उनका संघर्ष और अनुशासन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। खेल के क्षेत्र में उनका योगदान भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊर्जा प्रदान करता है।

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संजीव चतुर्वेदी (जन्म: 21 दिसंबर 1974)
संजीव चतुर्वेदी का जन्म उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे 2002 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारी हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ बेबाक लड़ाई के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2015 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शिता और ईमानदारी के क्षेत्र में उनका योगदान भारत ही नहीं, विश्व स्तर पर सराहा गया।

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राजीव बजाज (जन्म: 21 दिसंबर 1966)
राजीव बजाज का जन्म मुंबई, महाराष्ट्र, भारत में हुआ। वे बजाज ऑटो लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उनके नेतृत्व में बजाज ऑटो ने वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बनाई। नवाचार, गुणवत्ता और रोजगार सृजन के माध्यम से उन्होंने भारतीय औद्योगिक विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे आधुनिक भारत के सफल उद्योगपतियों में गिने जाते हैं।

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श्यामामणि देवी (जन्म: 21 दिसंबर 1938)
श्यामामणि देवी का जन्म ओडिशा, भारत में हुआ। वे ओडिसी शास्त्रीय संगीत की प्रसिद्ध गायिका और संगीतकार थीं। उन्होंने ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाई। संगीत के माध्यम से उन्होंने भारतीय शास्त्रीय परंपरा को जीवंत बनाए रखा और अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित किया।
यू. आर. अनंतमूर्ति (जन्म: 21 दिसंबर 1932)
यू. आर. अनंतमूर्ति का जन्म मेलिगे, शिमोगा जिला, कर्नाटक, भारत में हुआ। वे कन्नड़ भाषा के प्रख्यात साहित्यकार, विचारक और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता थे। उनकी रचनाओं ने सामाजिक रूढ़ियों पर गहरा प्रहार किया। साहित्य के माध्यम से उन्होंने भारतीय समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।

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अमीन सयानी (जन्म: 21 दिसंबर 1932)
अमीन सयानी का जन्म मुंबई, महाराष्ट्र, भारत में हुआ। वे रेडियो जगत के ‘आवाज़ के जादूगर’ कहे जाते हैं और भारत के पहले लोकप्रिय रेडियो जॉकी माने जाते हैं। “बिनाका गीतमाला” के माध्यम से उन्होंने करोड़ों श्रोताओं के दिलों में जगह बनाई। भारतीय रेडियो इतिहास में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
प्रफुल्लचंद नटवरलाल भगवती (जन्म: 21 दिसंबर 1921)
प्रफुल्लचंद भगवती का जन्म गुजरात, भारत में हुआ। वे भारत के 17वें मुख्य न्यायाधीश रहे। न्यायपालिका में रहते हुए उन्होंने मानवाधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की। उनका योगदान भारतीय न्याय प्रणाली को अधिक संवेदनशील और जनोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण रहा।

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कुर्त वॉल्डहाइम (जन्म: 21 दिसंबर 1918)
कुर्त वॉल्डहाइम का जन्म सेंट एंड्रा-वोर्थर्न, ऑस्ट्रिया में हुआ। वे संयुक्त राष्ट्र संघ के चौथे महासचिव रहे। वैश्विक कूटनीति और शांति प्रयासों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास में उनका नाम विशेष स्थान रखता है।
एस. आर. कांथी (जन्म: 21 दिसंबर 1908)
एस. आर. कांथी का जन्म भारत में हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ थे। स्वतंत्रता संग्राम और उसके बाद राष्ट्र निर्माण में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। उनका जीवन राजनीतिक प्रतिबद्धता और राष्ट्रसेवा का प्रतीक रहा।

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भालचंद्र दिगंबर गरवारे (जन्म: 21 दिसंबर 1903)
भालचंद्र गरवारे का जन्म महाराष्ट्र, भारत में हुआ। वे गरवारे समूह के संस्थापक और प्रख्यात उद्योगपति थे। औद्योगिक विकास, तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन में उनका योगदान भारत की आर्थिक प्रगति से जुड़ा है।
ठाकुर प्यारेलाल सिंह (जन्म: 21 दिसंबर 1891)
ठाकुर प्यारेलाल सिंह का जन्म छत्तीसगढ़, भारत में हुआ। वे छत्तीसगढ़ में श्रमिक आंदोलन और सहकारिता आंदोलन के प्रणेता थे। सामाजिक न्याय और मजदूर अधिकारों के लिए उनका संघर्ष आज भी प्रेरणादायक है।
सुन्दरलाल शर्मा (जन्म: 21 दिसंबर 1881)
सुन्दरलाल शर्मा का जन्म छत्तीसगढ़, भारत में हुआ। वे सामाजिक क्रांति के अग्रदूत और जनजागरणकर्ता थे। शिक्षा, सामाजिक सुधार और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान छत्तीसगढ़ के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

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मान सिंह (जन्म: 21 दिसंबर 1550)
मान सिंह का जन्म अंबर (वर्तमान जयपुर), राजस्थान, भारत में हुआ। वे मुगल सम्राट अकबर के प्रमुख राजपूत सेनापति थे। प्रशासनिक दक्षता और सैन्य नेतृत्व में उनका योगदान मुगल इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।

21 दिसंबर को जन्मे ये महान व्यक्तित्व अपने-अपने क्षेत्र में प्रकाशस्तंभ की तरह रहे। इनका जीवन हमें यह सिखाता है कि कर्म, समर्पण और साहस से इतिहास रचा जा सकता है।

जानिए जन्मतिथि के अनुसार कैसा रहेगा आपका दिन

🔢 अंक राशिफल 21 दिसंबर 2025: जानिए जन्मतिथि के अनुसार कैसा रहेगा आपका दिन

पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) से जानें मूलांक 1 से 9 तक का विस्तृत अंक ज्योतिष फल

जिस प्रकार नाम के अनुसार राशि का निर्धारण होता है, उसी प्रकार अंक ज्योतिष में जन्मतिथि के अंकों के आधार पर व्यक्ति का मूलांक तय होता है।
21 दिसंबर 2025, रविवार का दिन है। सूर्य और मंगल के प्रभाव से यह दिन निर्णय, ऊर्जा और कर्म प्रधान रहेगा।
आज मूलांक 9 वालों को विशेष रूप से कार्यक्षेत्र में कोई अहम निर्णय लेना पड़ सकता है।
आइए जानते हैं पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा बताया गया मूलांक 1 से 9 तक का विस्तृत अंक राशिफल —

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🔴 मूलांक 1 (1, 10, 19, 28 को जन्मे जातक)
आज का प्रभाव
आज आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में जबरदस्त वृद्धि होगी। निर्णय लेने में आप खुद को पहले से अधिक सक्षम पाएंगे।
कार्य / व्यवसाय
नए प्रोजेक्ट या बिजनेस की शुरुआत के लिए दिन शुभ है। ऑफिस में वरिष्ठ अधिकारी आपकी बात को महत्व देंगे।
शिक्षा
प्रतियोगी परीक्षा और उच्च शिक्षा के लिए अनुकूल समय।
कला / संगीत
क्रिएटिव लोगों को मंच मिल सकता है।
राजनीति / प्रशासन
सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों को मान-सम्मान मिलेगा।
आर्थिक स्थिति
आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी।
शुभ रंग – लाल
शुभ अंक – 1
पूज्य देवता – सूर्य देव

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🔵 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)
आज का प्रभाव
भावनाओं में बहने से बचें। मानसिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
कार्य / व्यवसाय
कलीग्स का सहयोग मिलेगा, लेकिन अंतिम फैसला स्वयं लें।
शिक्षा
एकाग्रता में थोड़ी कमी आ सकती है, मेडिटेशन लाभकारी रहेगा।
कला / संगीत
भावनात्मक रचनाएं सफल होंगी।
आर्थिक स्थिति
सामान्य रहेगी।
शुभ रंग – सफेद
शुभ अंक – 2
पूज्य देवता – चंद्र देव

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🟡 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)
आज का प्रभाव
ज्ञान और नई स्किल्स सीखने का उत्तम दिन।
कार्य / व्यवसाय
सीनियर्स का मार्गदर्शन मिलेगा, प्रमोशन के योग बन सकते हैं।
शिक्षा
स्टूडेंट्स और शिक्षक वर्ग के लिए विशेष शुभ।
धर्म / आध्यात्म
धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति
धीरे-धीरे सुधार के संकेत।
शुभ रंग – पीला
शुभ अंक – 3
पूज्य देवता – बृहस्पति देव

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🟢 मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)
आज का प्रभाव
अचानक बदलाव संभव हैं, लेकिन ये आपके हित में होंगे।
कार्य / प्रशासन
फोकस के साथ काम करें, लापरवाही नुकसान दे सकती है।
यात्रा
वाहन चलाते समय सावधानी रखें।
आर्थिक स्थिति
मध्यम।
शुभ रंग – नीला
शुभ अंक – 4
पूज्य देवता – गणेश जी

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🟠 मूलांक 5 (5, 14, 23)
आज का प्रभाव
गतिशीलता और अवसरों से भरा दिन।
व्यवसाय
ट्रैवल, सेल्स, मार्केटिंग से जुड़े लोगों को लाभ।
आर्थिक स्थिति
धन लाभ के योग, खर्चों पर नियंत्रण जरूरी।
शुभ रंग – हरा
शुभ अंक – 5
पूज्य देवता – विष्णु भगवान

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💗 मूलांक 6 (6, 15, 24)
आज का प्रभाव
पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में मधुरता।
कला / फैशन
रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को पहचान मिलेगी।
आर्थिक स्थिति
खर्च बढ़ सकता है, बचत योजना बनाएं।
शुभ रंग – गुलाबी
शुभ अंक – 6
पूज्य देवता – माता लक्ष्मी

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🟣 मूलांक 7 (7, 16, 25)
आज का प्रभाव
एकांत और आत्ममंथन का दिन।
कार्य क्षेत्र
जल्दबाजी से बचें, योजनाएं गोपनीय रखें।
स्वास्थ्य
आराम आवश्यक।
शुभ रंग – बैंगनी
शुभ अंक – 7
पूज्य देवता – भगवान शिव

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मूलांक 8 (8, 17, 26)
आज का प्रभाव
जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, मेहनत का पूरा फल मिलेगा।
प्रशासन / राजनीति
सरकारी कामों में सफलता के संकेत।
आर्थिक स्थिति
निवेश सोच-समझकर करें।
शुभ रंग – काला
शुभ अंक – 8
पूज्य देवता – शनि देव

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🔴 मूलांक 9 (9, 18, 27)
आज का प्रभाव
ऊर्जा और आत्मबल उच्च स्तर पर।
कार्य क्षेत्र
ऑफिस में कोई बड़ा फैसला लेना पड़ सकता है। गुस्से पर नियंत्रण रखें।
राजनीति / प्रशासन
नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
आर्थिक स्थिति
खर्च सोच-समझकर करें।
शुभ रंग – गहरा लाल
शुभ अंक – 9
पूज्य देवता – हनुमान जी

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⚠️ डिस्क्लेमर
यह अंक राशिफल सामान्य गणनाओं पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष को प्रमाणित नहीं करती।
अपनी व्यक्तिगत जन्मकुंडली के लिए किसी विशेषज्ञ से अवश्य सलाह लें।

विज्ञान, संस्कृति, राजनीति और मानव साहस की वो तारीख़ जिसने दुनिया की दिशा बदली

21 दिसंबर का दिन विश्व इतिहास में केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन घटनाओं का संगम है जिन्होंने मानव सभ्यता, विज्ञान, राजनीति, कला और संस्कृति को नई दिशा दी। यह दिन कभी तकनीकी क्रांति का साक्षी बना, तो कभी वैश्विक कूटनीति और मानवीय संवेदनाओं की गहराई को उजागर करता रहा। आइए 21 दिसंबर की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं पर क्रमवार और विस्तार से प्रकाश डालते हैं—

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2012 – ‘गंगनम स्टाइल’ और डिजिटल युग का ऐतिहासिक मोड़
21 दिसंबर 2012 को साउथ कोरिया के पॉप सिंगर साई (PSY) का गीत ‘गंगनम स्टाइल’ यूट्यूब पर एक अरब बार देखा जाने वाला दुनिया का पहला वीडियो बना। इस उपलब्धि ने डिजिटल मीडिया, सोशल प्लेटफॉर्म और वैश्विक मनोरंजन उद्योग की शक्ति को पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट कर दिया। यह घटना यह दर्शाती है कि इंटरनेट ने भाषा और सीमाओं को तोड़ते हुए किस तरह वैश्विक संस्कृति को एक सूत्र में पिरो दिया।

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2009 – आईआईटी मंडी: तकनीकी शिक्षा की नई नींव
21 दिसंबर 2009 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी की पहली वित्त समिति और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (BOG) की बैठक आयोजित हुई। यह भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च तकनीकी शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। आईआईटी मंडी आज शोध, नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
2008 – सोनिया गांधी और शाहरुख़ खान की वैश्विक पहचान
अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका न्यूज़वीक ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख़ खान को दुनिया के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों की सूची में शामिल किया। यह भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक ताकत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रतीक था।

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2007 – तेजी बच्चन का निधन: साहित्य और संस्कृति की क्षति
21 दिसंबर 2007 को सामाजिक कार्यकर्ता, कवयित्री और महान कवि हरिवंश राय बच्चन की पत्नी तथा अमिताभ बच्चन की माता तेजी बच्चन का निधन हुआ। वे न केवल एक सशक्त व्यक्तित्व थीं, बल्कि भारतीय साहित्य और सामाजिक चेतना की महत्वपूर्ण आवाज़ भी थीं।

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2007 – भारत-चीन पहला संयुक्त सैन्य अभ्यास
इसी दिन चीन के युन्नान प्रांत स्थित कुनमिंग मिलिट्री एकेडमी में भारत और चीन के बीच पहला संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू हुआ। यह घटना दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और विश्वास निर्माण की दिशा में एक अहम पहल मानी जाती है।

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1991 – सोवियत संघ के पतन के बाद नया वैश्विक ढांचा
21 दिसंबर 1991 को कज़ाकिस्तान की राजधानी अल्मा अता में 11 सोवियत गणराज्यों ने मिलकर राष्ट्रमंडल (CIS) का गठन किया। यह शीत युद्ध के बाद विश्व राजनीति में आए बड़े परिवर्तन का प्रतीक था।
1988 – लॉकरबी विमान हादसा: मानव इतिहास का काला अध्याय
स्कॉटलैंड के लॉकरबी शहर के पास पैन एम एयरलाइंस का एक जंबो जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 258 यात्रियों की जान गई। यह घटना अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के इतिहास में सबसे भयावह हादसों में गिनी जाती है।

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1974 – INS सतवाहन: भारतीय नौसेना की सामरिक शक्ति
21 दिसंबर 1974 को पनडुब्बी प्रशिक्षण देने वाला भारत का पहला पोत आईएनएस सतवाहन विशाखापत्तनम में नौसेना बेड़े में शामिल किया गया। इसने भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई।

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1968 – अपोलो-8 और अंतरिक्ष इतिहास
अमेरिका ने केप केनेडी स्पेस सेंटर से अपोलो-8 को लॉन्च किया। यह पहला मानव मिशन था जिसने पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाकर चंद्रमा की परिक्रमा की। इसने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में मानव साहस और वैज्ञानिक क्षमता को नई ऊंचाई दी।

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1952 – सैफुद्दीन किचलू को लेनिन शांति पुरस्कार
प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सैफुद्दीन किचलू तत्कालीन सोवियत संघ का लेनिन शांति पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय बने। यह सम्मान भारत के स्वतंत्रता संग्राम और वैश्विक शांति प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने वाला था।

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1937 – ‘स्नो व्हाइट’ और एनीमेशन क्रांति
21 दिसंबर 1937 को ‘स्नो व्हाइट एंड सेवन ड्वार्फ्स’ रिलीज़ हुई, जो दुनिया की पहली फुल-लेंथ एनिमेटेड फीचर फिल्म थी। इस फिल्म ने वॉल्ट डिज़्नी को रचनात्मकता और नवाचार का प्रतीक बना दिया।
1898 – रेडियम की खोज: विज्ञान की ऐतिहासिक उपलब्धि
रसायनशास्त्री पियरे क्यूरी और मैरी क्यूरी ने रेडियम की खोज की। इस खोज ने चिकित्सा विज्ञान, विशेषकर कैंसर उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाए और दोनों को नोबेल पुरस्कार दिलाया।

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1784 – अमेरिका की कूटनीतिक नींव
21 दिसंबर 1784 को जॉन जे अमेरिका के पहले विदेश मंत्री बने। यह अमेरिका की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की आधारशिला रखने वाला क्षण था।

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21 दिसंबर का इतिहास यह सिद्ध करता है कि एक ही तारीख़ पर घटित घटनाएं मानव सभ्यता के विभिन्न पहलुओं—विज्ञान, कला, राजनीति, युद्ध, शांति और संस्कृति—को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं। यह दिन हमें अतीत से सीख लेकर भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।

आज का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग

🕉️ पंचांग 21 दिसंबर 2025 | आज का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग

📜 आज की तिथि, वार एवं संवत
तिथि: पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा (09:11 AM तक), उपरांत द्वितीया
वार: रविवार
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
चन्द्र मास: पौष (अमांत व पूर्णिमांत)
ऋतु: हेमंत
अयन: दक्षिणायन

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🌟 नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र:पूर्वाषाढ़ा (03:36 AM तक), उपरांत उत्तराषाढ़ा
योग:वृद्धि (04:35 PM तक), उपरांत ध्रुव योग
करण:बव (09:11 AM तक)
बालव (09:11 AM से 10:04 PM तक)
कौलव (10:04 PM के बाद)
☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:07 AM
सूर्यास्त: 05:41 PM
चन्द्रोदय: 08:07 AM
चन्द्रास्त: 06:49 PM

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सूर्य एवं चंद्र राशि
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि: धनु (पूरा दिन व रात्रि)
⛔ अशुभ काल (आज क्या न करें)
राहुकाल: 04:22 PM – 05:41 PM
यमगण्ड: 12:24 PM – 01:44 PM
कुलिक: 03:03 PM – 04:22 PM
दुर्मुहूर्त: 04:17 PM – 04:59 PM
वर्ज्यम्: 11:51 AM – 01:36 PM

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👉 इन समयों में शुभ कार्य, नई शुरुआत व यात्रा से बचें।
✅ शुभ काल (आज क्या करें)
ब्रह्म मुहूर्त: 05:32 AM – 06:20 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:03 PM – 12:46 PM
अमृत काल: 10:20 PM – 12:05 AM
✨ विशेष योग – चंद्र दर्शन व्रत
सर्वार्थसिद्धि योग:22 दिसंबर 03:36 AM – 07:08 AM (उत्तराषाढ़ा नक्षत्र व रविवार)
त्रिपुष्कर योग:22 दिसंबर 03:36 AM – 07:08 AM

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🧭 आज की यात्रा शुभ-अशुभ दिशा
आज किस दिशा की यात्रा वर्जित है:
👉 पश्चिम दिशा (रविवार)
यदि यात्रा आवश्यक हो तो क्या खाकर निकलें:
👉 गुड़ या सौंफ खाकर यात्रा करें।
किस दिशा की यात्रा से लाभ मिलेगा:
👉 पूर्व और उत्तर दिशा – धन, कार्य व सफलता के लिए श्रेष्ठ।

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🌙 चंद्रबल व ताराबल
चंद्रबल (22/12/25, 07:08 AM तक):
मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुंभ, मीन
ताराबल (03:36 AM तक):
अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, आद्रा, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा

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📝 नोट– इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए ‘राष्ट्र की परम्परा’ उत्तरदायी नहीं है। कृपया किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में पुलिस का सराहनीय कदम

देवरिया पुलिस लाइन में स्वास्थ्य जांच व रक्तदान शिविर का भव्य आयोजन, सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने किया स्वैच्छिक रक्तदान

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिसकर्मियों एवं उनके परिजनों के बेहतर स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार को ध्यान में रखते हुए देवरिया पुलिस लाइन में शनिवार, 20 दिसंबर 2025 को स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर देवरिया पुलिस रक्तदान समूह के तत्वावधान में तथा सावित्री हॉस्पिटल एवं ब्लड बैंक, देवरिया के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ।

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शिविर का उद्घाटन अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) आनंद कुमार पाण्डेय ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि “रक्तदान महादान है। इससे न केवल जरूरतमंदों की जान बचती है, बल्कि रक्तदाता का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। पुलिस बल को अपनी व्यस्त और तनावपूर्ण ड्यूटी के बीच नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता देनी चाहिए।”

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शिविर में सावित्री हॉस्पिटल की विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा पुलिसकर्मियों और उनके परिवारजनों का संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसमें ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन, सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया। चिकित्सा टीम में डॉ. मिनाक्षी सिंह, डॉ. नीलम पाण्डेय, डॉ. चन्दन, डॉ. विवेक शर्मा, दीपक तिवारी और अमरेश सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रक्तदान को लेकर पुलिसकर्मियों में खासा उत्साह देखने को मिला। “सेवा ही धर्म” के भाव को आत्मसात करते हुए बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों एवं जवानों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। रक्तदान करने वालों में निरीक्षक सादिक परवेज, कास्टेबल देवेंद्र कुमार चतुर्वेदी, शैलेन्द्र यादव, निर्मल कुमार, सैंकी कश्यप, आकाश सिंह यादव और सोनू कुमार दूबे सहित कई अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।

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कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रतिसार निरीक्षक विजय राज सिंह और सौरभ त्रिपाठी सहित अनेक पुलिसकर्मियों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। शिविर के समापन पर रक्तदान करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
यह आयोजन न केवल पुलिस बल के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रतीक बना, बल्कि समाज में रक्तदान के महत्व को लेकर एक सकारात्मक संदेश भी देने में सफल रहा।