Friday, June 26, 2026
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सिसवा राजा में गूंजेगा विष्णु महायज्ञ का दिव्य मंत्रोच्चार, 26 दिसंबर से 3 जनवरी तक भक्ति का महासंगम

कलश यात्रा, प्रवचन और विशाल भंडारे के साथ होगा भव्य आयोजन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद के ग्राम पंचायत सिसवा राजा में आगामी दिनों में श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिलेगा। सिसवा राजा स्थित काली स्थान परिसर में श्री श्री 1008 श्री विष्णु महायज्ञ का दिव्य एवं भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।
यह महायज्ञ 26 दिसंबर, शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य कलश यात्रा से प्रारंभ होगा। कलश यात्रा में क्षेत्र की सैकड़ों महिलाएं, पुरुष और श्रद्धालु पारंपरिक वेश-भूषा में शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित करेंगे। ढोल-नगाड़ों, जयघोष और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।

महायज्ञ के दौरान विद्वान आचार्यों द्वारा विधिवत हवन, पूजन, यज्ञ अनुष्ठान और धार्मिक प्रवचन संपन्न कराए जाएंगे। प्रतिदिन होने वाले प्रवचनों में सनातन संस्कृति, धर्म-कर्म, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव के संदेश दिए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और प्रेरणा प्राप्त होगी। आयोजन को लेकर यज्ञ मंडप और पूरे परिसर को भव्य एवं आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है।

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महायज्ञ की पूर्णाहुति 03 जनवरी 2026, शनिवार को संपन्न होगी। इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जो दोपहर 02 बजे से प्रारंभ होगा। भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की संभावना जताई जा रही है।

यज्ञ समिति एवं समस्त ग्रामवासियों ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर महायज्ञ में सहभागिता करें और पुण्य के भागी बनें। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा, बल्कि सामाजिक एकता, भाई-चारे और सांस्कृतिक चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

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ग्रामीण प्रतिभाओं को मिलेगी डिजिटल उड़ान

आगरा की 104 ग्राम पंचायतों में खुलेंगी अत्याधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी

आगरा(राष्ट्र की परम्परा) ग्रामीण युवाओं को शिक्षा और प्रतिस्पर्धा के समान अवसर देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम और दूरगामी पहल की है। माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के नेतृत्व में पंचायती राज विभाग द्वारा आगरा जनपद की 104 ग्राम पंचायतों में आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के डिजिटल अंतर को समाप्त करना और युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सक्षम बनाना है।आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित होंगी डिजिटल लाइब्रेरी इन डिजिटल लाइब्रेरी में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो कंटेंट और ऑनलाइन क्विज जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही विभिन्न विषयों की प्रामाणिक पुस्तकों का समृद्ध संग्रह भी मौजूद रहेगा। इससे ग्रामीण छात्र-छात्राओं को शहरों की महंगी कोचिंग और लाइब्रेरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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प्रति लाइब्रेरी 4 लाख रुपये का बजट मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह के अनुसार प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी पर लगभग 4 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें पुस्तकों के लिए 2 लाख रुपये, आईटी उपकरणों के लिए 1.30 लाख रुपये और आधुनिक फर्नीचर के लिए 7 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं। लाइब्रेरी में करीब 20 हजार डिजिटल कंटेंट उपलब्ध होंगे। इसका संचालन ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा किया जाएगा, जबकि नियमित निगरानी के लिए सहायक अधिकारी नियुक्त रहेंगे।
यूपी डेस्को से होगी पारदर्शी खरीद डिजिटल लाइब्रेरी के लिए चयनित पुस्तकों की खरीद यूपी डेस्को के माध्यम से की जाएगी, जिससे गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। योजना का क्रियान्वयन अंतिम चरण में है और जल्द ही ग्रामीण युवाओं को इसका लाभ मिलने लगेगा।
यह पहल ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर खोलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

मदरसा परीक्षा 2026: ऑनलाइन आवेदन की तिथि में बढ़ोतरी

कम आवेदन मिलने पर परिषद का निर्णय

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने मदरसा परीक्षाओं के ऑनलाइन आवेदन की समय-सीमा आगे बढ़ा दी है। मुंशी, मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा वर्ष 2026 के लिए अब आवेदन 26 दिसंबर तक किए जा सकेंगे। पहले यह अंतिम तिथि 20 दिसंबर निर्धारित थी, जिसे छह दिन बढ़ाया गया है।

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इसी तरह परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि भी संशोधित कर 24 दिसंबर कर दी गई है, जो पहले 19 दिसंबर थी। परिषद के अनुसार अब तक 54,200 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। अपेक्षित संख्या से कम आवेदन आने के कारण यह फैसला लिया गया है।
परीक्षा केंद्र निर्धारण और डेटा फीडिंग का कार्य 26 दिसंबर 2025 से 6 जनवरी 2026 तक किया जाएगा। मदरसों की परीक्षा केंद्रों पर मैपिंग 6 से 12 जनवरी 2026 के बीच होगी। प्रवेश पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज 15 जनवरी 2026 को जारी किए जाएंगे।
डीएमओ निधि गोस्वामी ने सभी प्रधानाचार्यों से तय समय-सारिणी के अनुसार कार्य पूरा करने की अपील की है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके।

देवरिया पुलिस का सख्त लेकिन संवेदनशील अभियान, अपराधियों पर कसी नकेल

मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के जरिए देवरिया पुलिस ने बढ़ाया सुरक्षा का भरोसा, 348 लोग व 216 वाहन जांचे


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने तथा आमजन में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से देवरिया पुलिस ने रविवार को व्यापक स्तर पर “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” संचालित किया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक पूरे जिले में एक साथ चलाया गया।

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अभियान के दौरान सभी थाना प्रभारियों व थानाध्यक्षों ने सुबह की सैर पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया। पुलिस अधिकारियों ने न केवल लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया, बल्कि उनकी समस्याएं भी गंभीरता से सुनीं। छोटे-मोटे विवादों का मौके पर समाधान कर मित्र पुलिसिंग की अवधारणा को और मजबूत किया गया।

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चेकिंग के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों पर विशेष नजर रखी गई। पुलिस टीमों ने चोरी की आशंका वाली गाड़ियों की जांच की, तीन सवारी चलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की, मॉडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया वाहनों के चालान काटे गए। इसके साथ ही नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों, असलहा एवं अवैध मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए तलाशी व पूछताछ की गई।
इस अभियान के तहत जनपद के कुल 22 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 348 व्यक्तियों और 216 वाहनों की जांच की गई। पुलिस की इस सक्रियता से आम नागरिकों ने स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस किया और इस पहल की खुलकर सराहना की।

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देवरिया पुलिस ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा, शांति व्यवस्था और जनता का विश्वास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में ऐसे जागरूकता व चेकिंग अभियान भविष्य में भी नियमित रूप से जारी रहेंगे, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और सुरक्षित समाज की स्थापना सुनिश्चित की जा सके।

मनरेगा अनियमितता पर जिला प्रशासन सख्त, वसूली के आदेश

🔴 मनरेगा घोटाले में बड़ी कार्रवाई: प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक के खिलाफ तहरीर, 7.80 लाख के दुरुपयोग का आरोप

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद बलिया के विकास खंड पंदह अंतर्गत ग्राम पंचायत मगुआपार में सामने आए मनरेगा घोटाले ने ग्रामीण विकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में मनरेगा के तहत कराए गए सात कार्यों में दोहरे भुगतान और फर्जी खर्च के जरिए 7.80 लाख रुपये की सरकारी धनराशि के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ है।
खंड विकास अधिकारी पंदह श्रवण गुप्ता के निर्देश पर एपीओ विनय वर्मा द्वारा थाना में दी गई तहरीर के अनुसार, अलग-अलग वित्तीय वर्षों में अलग आईडी का इस्तेमाल कर भुगतान कराया गया, जिसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर ग्राम प्रधान रजनी देवी, पंचायत सचिव प्रवीण कुमार यादव और तकनीकी सहायक वीरेंद्रनाथ यादव के खिलाफ तहरीर दी गई है।
संयुक्त जांच में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी तथा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता ने पाया कि पोखरे की खुदाई, अमृत सरोवर, नाली निर्माण और बंधा निर्माण जैसे कार्यों में कागजी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। डीसी मनरेगा की स्थलीय रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने दोषियों से एक माह के भीतर 7.80 लाख रुपये की वसूली के आदेश पहले ही जारी कर दिए हैं।
थाना प्रभारी लालमणि सरोज ने तहरीर मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि विधिक कार्रवाई प्रक्रिया में है। यह मामला गांव निवासी सुधीर कुमार यादव द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के बाद सामने आया।

भाजपा बनी हिंदू महासभा : राजेन्द्र शर्मा का तीखा राजनीतिक विश्लेषण

भाजपा बनी हिंदू महासभा — यह कथन केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि आज की भारतीय राजनीति की दिशा पर एक गंभीर सवाल है। भाजपा के पर्ची से निकले अध्यक्ष (कार्यकारी) नितिन नबीन ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में कुर्सी संभालते ही जब ‘सब का साथ, सब का विकास’ की बात दोहराई, तो यह वाक्य अपने ही राजनीतिक परिवेश में असहज और खोखला प्रतीत हुआ।
वास्तविकता यह है कि भाजपा बनी हिंदू महासभा की छवि अब किसी आलोचक की कल्पना नहीं, बल्कि पार्टी के आचरण और बयानबाजी से निर्मित सच्चाई बन चुकी है। 2019 के बाद से ‘सब का साथ, सब का विकास’ का नारा औपचारिक दस्तावेजों में भले मौजूद हो, लेकिन व्यवहार में यह लगभग अदृश्य हो चुका है। जिस तरह कभी ‘गांधीवादी समाजवाद’ भाजपा की मूल विचारधारा बताया गया था और आज वह केवल इतिहास के पन्नों में सिमट गया है, उसी तरह यह नारा भी अब केवल बचाव के औजार के रूप में बचा है।

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राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद संघ-भाजपा ने जिस तरह पूरे श्रेय को राजनीतिक हथियार में बदला, उसके बाद भाजपा बनी हिंदू महासभा की प्रक्रिया और तेज हो गई। अल्पसंख्यकों के प्रति व्यवहार, मुस्लिम-विरोधी बयानबाजी और धार्मिक प्रतीकों का चुनावी इस्तेमाल अब अपवाद नहीं, बल्कि रणनीति बन चुका है।
नितिन नबीन का राजनीतिक सफर बिहार से जुड़ा है, जहां नीतीश कुमार जैसे सहयोगी के कारण भाजपा को अब भी खुली सांप्रदायिक भाषा पर संयम रखना पड़ता है। शायद यही कारण है कि नए अध्यक्ष के मुंह से ‘सब का साथ’ निकल गया, लेकिन यह उस जगह की याद भर दिलाता है, जिसे भाजपा काफी पहले छोड़ चुकी है।
तमिलनाडु और बंगाल : जहां भाजपा बनी हिंदू महासभा की प्रयोगशाला दिखी
2025 के अंत तक भाजपा किस वैचारिक मुकाम पर पहुंच चुकी है, इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल हैं। ये वे राज्य हैं जहां अब तक सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोई मजबूत परंपरा नहीं रही। लेकिन भाजपा बनी हिंदू महासभा की राजनीति के लिए यही सबसे बड़ा ‘चैलेंज’ और ‘अवसर’ दोनों हैं।
तमिलनाडु के मदुरै जिले की तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी को ‘दक्षिण की अयोध्या’ बताकर वहां कृत्रिम धार्मिक विवाद खड़ा किया गया। जहां मंदिर, दरगाह और जैन गुफाएं सदियों से सह-अस्तित्व का प्रतीक रही हैं, वहीं संघ-भाजपा ने दरगाह को मंदिर साबित करने का अभियान छेड़ दिया। यह स्पष्ट करता है कि भाजपा बनी हिंदू महासभा की राजनीति किसी ऐतिहासिक सत्य पर नहीं, बल्कि तनाव पैदा करने की क्षमता पर निर्भर है।
इसी तरह पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की एक भड़काऊ घोषणा को बहाना बनाकर ‘सामूहिक गीता पाठ’ के नाम पर मुस्लिम-विरोधी गोलबंदी की गई। इस आयोजन के दौरान एक मुस्लिम फेरीवाले पर हमला और उसके बाद आरोपियों का राजनीतिक अभिनंदन इस बात का प्रमाण है कि भाजपा बनी हिंदू महासभा केवल भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि सड़क पर उतर चुकी है।
गांधीवादी समाजवाद से हिंदू महासभा तक
1980 में भाजपा ने खुद को गांधीवादी समाजवाद से जोड़ने का प्रयास किया था। लेकिन 1988 में पालमपुर अधिवेशन से लेकर बाबरी मस्जिद आंदोलन और फिर मोदी युग तक आते-आते पार्टी लगातार सांप्रदायिक ढलान पर फिसलती चली गई। वाजपेयी दौर में जो ‘तिनके की ओट’ बची थी, वह भी अब हट चुकी है।
मोदी के तीसरे कार्यकाल में भाजपा बनी हिंदू महासभा कहना किसी अतिशयोक्ति से अधिक, एक राजनीतिक निष्कर्ष बनता जा रहा है। जब चुनाव आयोग से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक धर्मनिरपेक्षता के सवाल पर मौन साधे हुए हों, तब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या भाजपा को अब औपचारिक रूप से अपना नाम बदलकर हिंदू महासभा नहीं रख लेना चाहिए?

तहसील में चोरी की घटना, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

तहसील परिसर से स्टांप विक्रेता की साइकिल चोरी, पुलिस कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज तहसील परिसर से शनिवार को स्टांप विक्रेता की साइकिल चोरी होने की घटना सामने आई है, जिससे तहसील परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। पीड़ित स्टांप विक्रेता ने काफी खोजबीन के बाद बरहज थाने में तहरीर देकर उचित कार्रवाई की मांग की है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरहज थाना क्षेत्र के पटेल नगर निवासी गोपाल गुप्त पुत्र हरिहर गुप्त, जो पेशे से स्टांप विक्रेता हैं, प्रतिदिन की भांति अपनी साइकिल से तहसील परिसर गए थे। दिनभर कार्य करने के बाद जब वे शाम को घर लौटने के लिए बाहर आए तो उनकी साइकिल वहां से गायब मिली। उन्होंने आसपास के क्षेत्रों में काफी देर तक तलाश की, लेकिन साइकिल का कोई सुराग नहीं लग सका।
घटना के बाद पीड़ित ने बरहज थाने में प्रार्थना पत्र देकर स्टांप विक्रेता की साइकिल चोरी की सूचना दी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। तहसील जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर से हुई इस चोरी ने आम नागरिकों और अधिवक्ताओं में भी चिंता बढ़ा दी है।

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इस संबंध में जब बरहज थाना अध्यक्ष दिनेश मौर्य से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि फिलहाल तहरीर प्राप्त नहीं हुई है, तहरीर मिलते ही मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जरूरतमंद बच्चों के लिए उम्मीद की गर्माहट बनी माही संस्था

सर्दी के कहर से बच्चों को मिली राहत, माही संस्था की मानवीय पहल से खिले मासूम चेहरे

रांची (राष्ट्र की परम्परा)कड़ाके की ठंड के बीच सामाजिक सरोकार की एक प्रेरणादायी मिसाल रांची के सिठियो क्षेत्र में देखने को मिली, जहां माही संस्था की ओर से 54 जरूरतमंद बच्चों को गर्म स्वेटर वितरित किए गए। इस मानवीय पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ठंड का प्रकोप इन बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और सपनों में बाधा न बने। स्वेटर पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी और सुकून साफ झलक रहा था।

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कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी मौलाना अंसार और इबरार अहमद ने माही संस्था की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद बच्चों की सहायता करना केवल दान नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को संवारने का कार्य है। ठंड से बचाव के साथ-साथ यह पहल बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ाती है।

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माही संस्था के सदस्यों ने बताया कि संस्था आगे भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों को निरंतर जारी रखेगी। स्थानीय लोगों ने भी इस अभियान को सराहा और इसे अन्य संगठनों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। सर्दी के इस मौसम में माही संस्था की यह मुहिम न सिर्फ बच्चों को राहत देने वाली साबित हुई, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी मजबूत करने का कार्य किया।

साधना सिंह गुंजा की मौजूदगी ने बढ़ाई रत्न श्री पुरस्कार कार्यक्रम की शोभा

झारखंड के 25वें स्थापना दिवस पर ‘रत्न श्री पुरस्कार’ समारोह का भव्य आयोजन, ऑड्रे हाउस में जुटीं नामचीन हस्तियां

रांची (राष्ट्र की परम्परा)।झारखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राजधानी रांची के ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस में 20 दिसंबर को ‘रत्न श्री पुरस्कार समारोह’ का भव्य और गरिमामयी आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, कला, संस्कृति, मीडिया एवं अन्य विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित कर राज्य की प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया गया।

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कार्यक्रम की शोभा उस समय और बढ़ गई जब हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘नदिया के पार’ की प्रसिद्ध अभिनेत्री साधना सिंह गुंजा सेलिब्रिटी गेस्ट के रूप में उपस्थित रहीं। उनकी मौजूदगी ने समारोह को खास बना दिया और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
समारोह की आयोजिका साधना झा कुमर ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड की 25वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने का यह उनका सपना था, जो आज सभी सहयोगियों और टीम के सामूहिक प्रयास से साकार हुआ। उन्होंने विशेष रूप से वसीम आलम, डेजी सिंह, सुनीता सराफ और अवधेश ठाकुर का आभार जताते हुए कहा कि इनके निरंतर सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।

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कार्यक्रम के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रेरणादायक विचार और सम्मान समारोह ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। ‘रत्न श्री पुरस्कार’ के माध्यम से न केवल झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित किया गया, बल्कि उन लोगों को भी सम्मान दिया गया, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में राज्य और समाज का नाम रोशन किया है।

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इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र कुमार हज़रा, डॉ. डेज़ी सिन्हा, स्वीटी कुमारी, नेहा थापा, सोनल, सौकत ख़ान, डॉ. स्वेता प्रिया, मधु संजीव, वंदना उपाध्याय, सुभांगी, माद्री शाह, प्रीति कुमारी, रीना सहाय, सोनाली भट्टाचार्य, वीणा श्री, विस आरोग्यम, मारिया साहेब, आसिफ़ ख़ान, सुनीता सराफ, सादिया, गुंजन चौहान, सुपर्णा चौधरी, अनु पाठक, सबिता मिश्रा, रश्मि रंजना, डॉ. कविता गुप्ता, आश्वी अग्रवाल, अव्यांश अग्रवाल, सुदीप्ता सरकार, मंजू मिंज़, मसूद, अभिलाषा चौधरी, गुंजन सिंह, निर्मला सोनी, डॉ. मेघा रानी, गीतांजलि अधिकारी, संगीता सिंह, प्रीतम कुमार, संजय मिश्रा, संतोष कुमार, देव ज्योति, शशि सहाय, रीना गुप्ता, डॉ. बिमलेश, डॉ. पंकज, निशांत, सिद्धेश जाधव, सुवर्णा, हुमा, दीपक राणा सहित कई गणमान्य लोगों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में कैमरा संचालन में अमृत जी सहित आयोजन टीम की भूमिका भी सराहनीय रही। कुल मिलाकर, झारखंड रत्न श्री पुरस्कार समारोह राज्य के 25 गौरवशाली वर्षों का प्रतीक बनकर उभरा और सामाजिक प्रेरणा का मजबूत संदेश दे गया।

बच्चों की डाइट में हरी सब्जी शामिल करने का स्मार्ट आइडिया

सर्दियों में हेल्दी डाइट का सुपरफूड: बथुआ से बना पौष्टिक पास्ता, स्वाद और सेहत दोनों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन

राष्ट्र की परम्परा हेल्दी खान पान डेस्क

सर्दियों के मौसम में बाजार हरी-भरी सब्जियों से गुलजार नजर आता है। इस दौरान सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले हरे सागों में बथुआ का नाम सबसे ऊपर आता है। पारंपरिक रूप से बथुआ का साग या पराठा तो खूब खाया जाता है, लेकिन अब इसे मॉडर्न अंदाज़ में डाइट में शामिल करने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में बथुआ पास्ता एक ऐसा हेल्दी विकल्प बनकर उभरा है, जो स्वाद के साथ-साथ पोषण की भी पूरी गारंटी देता है।

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बथुआ को आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना गया है। इसमें आयरन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन A और विटामिन C प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि सर्दियों में इसका सेवन इम्युनिटी मजबूत करने और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में सहायक माना जाता है। जब बथुआ को पास्ता जैसी रेसिपी में शामिल किया जाता है, तो यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आने लगता है।

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घर पर ऐसे बनाएं हेल्दी बथुआ पास्ता
बथुआ पास्ता बनाना बेहद आसान है और इसे आप कम समय में तैयार कर सकते हैं। सबसे पहले बथुआ को अच्छी तरह साफ कर उबाल लें और उसका स्मूद पेस्ट बना लें। इसके बाद एक पैन में ऑलिव ऑयल या घी गर्म कर हल्का सा लहसुन और प्याज भूनें। इसमें बथुआ का पेस्ट डालकर कुछ मिनट पकाएं। अब स्वादानुसार नमक, काली मिर्च, चिली फ्लेक्स और मिक्स हर्ब्स डालें। अंत में उबला हुआ होल व्हीट या मल्टीग्रेन पास्ता डालकर अच्छे से मिक्स करें। चाहें तो ऊपर से थोड़ा सा चीज डालकर सर्व करें।

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आखिर क्यों हेल्दी है बथुआ पास्ता?
बथुआ पास्ता के फायदे कई हैं। यह एक नेचुरल इम्युनिटी बूस्टर की तरह काम करता है, पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। आयरन से भरपूर होने के कारण यह एनीमिया से जूझ रहे लोगों के लिए भी फायदेमंद है। सही तेल और हेल्दी पास्ता के चुनाव से यह एक लो-फैट, वेट-फ्रेंडली मील बन जाता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग हेल्दी खाने के साथ स्वाद से समझौता नहीं करना चाहते, उनके लिए बथुआ पास्ता सर्दियों का परफेक्ट विकल्प है।

सरकारी दावे बनाम जमीनी सच्चाई

विकास के आंकड़ों और आमजन के जीवन के बीच बढ़ती खाई

कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र की आत्मा जनता में निहित होती है और सरकार का पहला दायित्व जनता की अपेक्षाओं, जरूरतों और विश्वास पर खरा उतरना होता है। हर चुनाव, हर मंच और हर सरकारी दस्तावेज में विकास, सुशासन और जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। योजनाओं की लंबी फेहरिस्त, बजट के भारी आंकड़े और उपलब्धियों के दावे यह संकेत देते हैं कि देश और प्रदेश निरंतर प्रगति की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन जब इन दावों को जमीनी सच्चाई के आईने में देखा जाता है, तो तस्वीर कई बार चिंताजनक नजर आती है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर वर्षों से योजनाएं चलाई जा रही हैं। कागजों में लक्ष्य पूरे होते दिखते हैं, लेकिन गांवों और कस्बों की वास्तविक स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव और गिरता शैक्षणिक स्तर बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, स्टाफ और दवाइयों की कमी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च उनकी आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ता है। यह स्थिति सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है।

रोजगार का मुद्दा सरकार और जनता के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। सरकारी आंकड़े रोजगार सृजन की तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में बेरोजगारी युवाओं के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। डिग्री और डिप्लोमा लेकर निकलने वाले युवा या तो अल्प वेतन वाले अस्थायी काम करने को मजबूर हैं या फिर वर्षों से रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। इसका सीधा असर युवाओं की मानसिक स्थिति और सामाजिक संतुलन पर पड़ रहा है।

किसानों की हालत भी सरकारी दावों के अनुरूप नहीं दिखती। न्यूनतम समर्थन मूल्य और बढ़ती लागत के बीच किसान पिस रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने के वादे किए गए, लेकिन आज भी खेतों में मेहनत करने वाला किसान कर्ज और असुरक्षा के साए में जीवन जीने को मजबूर है। वहीं मजदूर वर्ग को अपनी मेहनत का पूरा मूल्य न मिल पाने से सामाजिक असमानता और गहरी होती जा रही है।

सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की बात बार-बार दोहराई जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आज भी कई पात्र लोग योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। फाइलों और रिपोर्टों में योजनाएं सफल नजर आती हैं, पर जमीन पर उनका असर सीमित रह जाता है। जवाबदेही की कमी और भ्रष्टाचार के कारण शिकायतें दब जाती हैं और समस्याएं वर्षों तक जस की तस बनी रहती हैं।

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इन सभी स्थितियों का सीधा असर सरकार और जनता के बीच भरोसे पर पड़ता है। जब दावे और हकीकत के बीच अंतर बढ़ता है, तो विश्वास की खाई और गहरी होती जाती है। आज जरूरत इस बात की है कि सरकार केवल आंकड़ों और भाषणों तक सीमित न रहे, बल्कि नीतियों का असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी में साफ दिखाई दे।

विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह कागजों से निकलकर गांव, खेत, स्कूल, अस्पताल और रोजगार के अवसरों तक पहुंचे। यदि दावों और धरातल के बीच की दूरी कम नहीं की गई, तो सरकारी उपलब्धियां केवल रिपोर्टों और विज्ञापनों तक सिमट कर रह जाएंगी, जबकि जमीनी सच्चाई जनता के सवाल बनकर सरकार के सामने खड़ी रहेगी। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सरकार जनता की आवाज को सुने, समस्याओं को स्वीकार करे और उनके स्थायी समाधान की दिशा में ईमानदारी से प्रयास करे। तभी सुशासन और विकास के दावे वास्तव में सार्थक सिद्ध होंगे।

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नेचुरल ग्लो के लिए स्किनकेयर में किन बातों का रखें ध्यान

घर पर फेशियल से पाएं ग्लोइंग स्किन, जानें एक्सपर्ट-अप्रूव्ड स्टेप्स और होममेड उपाय


आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी, बढ़ता प्रदूषण और मौसम में नमी की कमी का सीधा असर हमारी त्वचा पर पड़ता है। रूखी, बेजान स्किन, फाइन लाइन्स, पिग्मेंटेशन और अनइवन स्किन टोन जैसी समस्याएं अब आम हो गई हैं। ऐसे में स्किन को हेल्दी और हाइड्रेटेड रखने के लिए महंगे पार्लर ट्रीटमेंट की जगह घर पर फेशियल एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। सही स्टेप्स और सही प्रोडक्ट्स के साथ किया गया होम फेशियल आपकी त्वचा को अंदर से पोषण देकर नेचुरल ग्लो लौटा सकता है।

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डबल क्लींजिंग से करें शुरुआत
घर पर फेशियल करने का पहला और सबसे जरूरी स्टेप है डबल क्लींजिंग। सबसे पहले ऑयल-बेस्ड या क्रीमी मिल्क क्लींजर से चेहरे की ऊपरी सतह पर जमी धूल, मेकअप और प्रदूषण को हटाएं। इसके बाद वॉटर-बेस्ड जेल क्लींजर से फेस वॉश करें, ताकि पोर्स की गहराई से सफाई हो सके और स्किन फ्रेश महसूस करे।

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टोनर से पाएं इंस्टेंट हाइड्रेशन
क्लींजिंग के बाद टोनर लगाना स्किनकेयर रूटीन का अहम हिस्सा है। टोनर स्किन का पीएच बैलेंस बनाए रखने के साथ-साथ आगे लगाए जाने वाले प्रोडक्ट्स को बेहतर तरीके से एब्जॉर्ब करने में मदद करता है। ज्यादा ड्राई स्किन वालों के लिए हाइड्रेटिंग मिस्ट या स्प्रे को 2–3 लेयर्स में लगाना फायदेमंद होता है।

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एक्सफोलिएशन और ट्रीटमेंट मास्क का कमाल
हफ्ते में एक बार एक्सफोलिएशन करने से डेड स्किन सेल्स हटती हैं और बंद पोर्स खुलते हैं। इसके बाद ट्रीटमेंट मास्क लगाने से स्किन को गहराई से पोषण मिलता है। एंटी-एजिंग, एक्ने कंट्रोल या ब्राइटनिंग मास्क को 20–30 मिनट तक चेहरे पर रखें। चाहें तो नाइट मास्क के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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होममेड मास्क और सीरम से बढ़ाएं असर
दही-शहद, एवोकाडो-शहद, ओट्स-शहद और नीम-तुलसी-मुल्तानी मिट्टी जैसे होममेड मास्क स्किन टाइप के अनुसार असरदार साबित होते हैं। मास्क हटाने के बाद विटामिन C, हयालूरोनिक एसिड या रेटिनॉल युक्त सीरम लगाकर स्किन को सील करें। इससे त्वचा लंबे समय तक मुलायम, चमकदार और हेल्दी बनी रहती है।

अलाव कागज़ों में, गरीब सड़कों पर — ठिठुरती ज़िंदगी ने खड़े किए बड़े सवाल

महराजगंज में ठंड से बचाव की व्यवस्था फेल, अलाव-रैन बसेरे केवल दावों तक सीमित

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, लेकिन ठंड से बचाव को लेकर शासन-प्रशासन की तैयारियां पूरी तरह नाकाम नजर आ रही हैं। हालात यह हैं कि ठंड से ज्यादा व्यवस्था की संवेदनहीनता गरीबों, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों के लिए जानलेवा बनती जा रही है। सड़कों, बस स्टैंडों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर रात होते ही इंसान नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता ठिठुरती दिखाई देती है।

सरकारी दावों के अनुसार जिले में अलाव जलाए जा रहे हैं, रैन बसेरे संचालित हैं और कंबल वितरण किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। अधिकांश चौराहों और बस स्टैंडों पर अलाव की कोई व्यवस्था नहीं है, और जहां अलाव जल भी रहा है वहां लकड़ी इतनी कम होती है कि कुछ ही देर में आग बुझ जाती है। यह व्यवस्था महज औपचारिकता बनकर रह गई है।

कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। रैन बसेरों की हालत भी सवालों के घेरे में है—न पर्याप्त बिस्तर, न साफ-सफाई और न ही सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था। मजबूरी में बड़ी संख्या में लोग खुले आसमान के नीचे ठंड भरी रात काटने को विवश हैं।

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चिंता की बात यह भी है कि ठंड बढ़ने के साथ जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्दी, खांसी, निमोनिया और हृदय रोग के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद ठंड से बचाव को लेकर प्राथमिक स्तर पर कोई प्रभावी और ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।

अब सवाल केवल प्रशासन से नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम से है—क्या गरीबों और बेसहारा लोगों की जिंदगी सिर्फ फाइलों और बैठकों तक ही सीमित रह गई है? स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सभी प्रमुख स्थानों पर नियमित रूप से अलाव जलाए जाएं, जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए जाएं, रैन बसेरों की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं।

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यदि अब भी व्यवस्था नहीं जागी, तो आने वाला समय यह सवाल जरूर करेगा कि जब लोग ठंड से जूझ रहे थे, तब जिम्मेदार आखिर कर क्या रहे थे।

सड़कों की बदहाली से थमी रफ्तार, गड्ढों में गुम हो रहा विकास का सपना

महराजगंज में NH-730 से जुड़ी दरौली-पनियरा सड़क बनी लोगों के लिए मुसीबत

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में एनएच-730 से जुड़ी दरौली से पनियरा को जाने वाली प्रमुख सड़कें बदहाली की चरम सीमा पर पहुंच चुकी हैं। कभी क्षेत्रीय विकास की रीढ़ मानी जाने वाली ये सड़कें अब आमजन के लिए परेशानी और खतरे का सबब बन गई हैं। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी गिट्टियां, टूटे किनारे और धंसी पटरियां राहगीरों की रफ्तार रोक रही हैं। हालात इतने खराब हैं कि पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है।

बरसात के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है। गड्ढों में भरा पानी सड़क को तालाब में तब्दील कर देता है, जिससे वाहन चालकों को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। आए दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं, जबकि चारपहिया वाहन गड्ढों में फंसकर जाम की स्थिति पैदा कर देते हैं। कई बार लोग घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों की भारी बर्बादी हो रही है।

खराब सड़कों का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों पर पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए रोज खतरा उठाना पड़ता है। बुजुर्गों के लिए हिचकोले खाते वाहनों में सफर करना पीड़ादायक हो गया है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आपात स्थिति में यदि एंबुलेंस फंस जाए तो जान बचाना भी मुश्किल हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि सड़क मरम्मत के नाम पर वर्षों से केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। कभी गड्ढों में मिट्टी भर दी जाती है तो कभी अस्थायी पैच वर्क कर दिया जाता है, जो कुछ ही दिनों में उखड़ जाता है। सड़क निर्माण की गुणवत्ता की न तो जांच होती है और न ही टिकाऊ समाधान पर ध्यान दिया जाता है, जिससे हर साल वही समस्या दोहराई जाती है।

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सड़कों की बदहाली का सीधा असर क्षेत्र के व्यापार और कृषि पर भी पड़ रहा है। दुकानदारों के अनुसार खराब रास्तों के कारण ग्राहक आने से कतराने लगे हैं। बाहरी लोग सड़क की हालत देखकर वापस लौट जाते हैं, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। वहीं किसानों को भी अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों की स्थिति का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराकर गुणवत्ता-युक्त और स्थायी सड़क निर्माण कराया जाए। लोगों का कहना है कि केवल पैच वर्क से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी सड़क का पुनर्निर्माण आवश्यक है। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जनता आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी।

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अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी जनता की पीड़ा को समझते हुए विकास के दावों को धरातल पर उतारेंगे, या फिर सड़कों की यह बदहाली भी अन्य समस्याओं की तरह फाइलों में दबी रह जाएगी।

Gmail में ई-मेल शेड्यूल करने का आसान तरीका

Gmail में ई-मेल शेड्यूल करने का आसान तरीका: समय की बचत और प्रोफेशनल कम्युनिकेशन का स्मार्ट उपाय

आज के डिजिटल दौर में Gmail केवल ई-मेल भेजने का माध्यम नहीं, बल्कि एक स्मार्ट कम्युनिकेशन टूल बन चुका है। व्यक्तिगत काम से लेकर प्रोफेशनल मीटिंग्स, ऑफिशियल नोटिस और क्लाइंट कम्युनिकेशन तक—हर जगह Gmail का उपयोग होता है। ऐसे में Gmail का ई-मेल शेड्यूल फीचर एक बेहद उपयोगी विकल्प है, जिसकी जानकारी कई यूज़र्स को लंबे समय तक Gmail इस्तेमाल करने के बाद भी नहीं होती।

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यह फीचर खासतौर पर तब काम आता है, जब आप ई-मेल पहले लिख लेना चाहते हैं, लेकिन उसे किसी निश्चित तारीख और समय पर भेजना जरूरी हो। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि प्रोफेशनल इमेज भी बेहतर बनती है।
डेस्कटॉप पर Gmail में ई-मेल कैसे शेड्यूल करें
Gmail के डेस्कटॉप वर्जन में ई-मेल शेड्यूल करना बेहद आसान है। सबसे पहले अपने ब्राउज़र में Gmail खोलें और अकाउंट में साइन इन करें। इसके बाद ऊपर बाईं ओर Compose पर क्लिक कर नया ई-मेल लिखें। रिसीवर का ई-मेल एड्रेस, सब्जेक्ट और मैसेज भरने के बाद

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सीधे Send पर क्लिक न करें।
Send बटन के पास मौजूद नीचे की ओर तीर (▾) पर क्लिक करें और Schedule send विकल्प चुनें। Gmail आपको कुछ सुझाए गए समय देगा, जैसे “कल सुबह” या “सोमवार सुबह”। चाहें तो Pick date & time पर क्लिक कर अपनी पसंद की तारीख और समय भी सेट कर सकते हैं। अंत में Schedule send पर क्लिक करते ही आपका ई-मेल तय समय पर अपने आप भेज दिया जाएगा।

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मोबाइल ऐप (Android और iPhone) में ई-मेल शेड्यूल करने का तरीका
Gmail का मोबाइल ऐप भी यह सुविधा देता है। सबसे पहले Gmail ऐप खोलें और Compose पर टैप करें। ई-मेल एड्रेस, सब्जेक्ट और मैसेज लिखने के बाद स्क्रीन के ऊपर दाईं ओर दिख रहे तीन डॉट्स (⋮) पर टैप करें। यहां Schedule send का विकल्प मिलेगा। समय चुनें या खुद तारीख और समय सेट करें और कन्फर्म कर दें।

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क्यों है Gmail ई-मेल शेड्यूल फीचर खास
यह फीचर अलग-अलग टाइम जोन में काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए बेहद फायदेमंद है। Gmail शेड्यूल किए गए ई-मेल को आपके टाइम जोन के अनुसार भेजता है। साथ ही, एक यूज़र एक समय में करीब 100 ई-मेल तक शेड्यूल कर सकता है, जिससे बड़े स्तर पर कम्युनिकेशन आसान हो जाता है।