Thursday, June 25, 2026
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थानाध्यक्ष को निलंबित करने को लेकर धरना प्रदर्शन कर चक्का जाम किया

बीते दिनों स्कूली बस के रौदने से युवक की हुई थी मौत

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
बुधवार को नगर के मुख्य चौराहे पर भारी संख्या मे इक्क्ठा होकर बरहज थानाध्यक्ष के निलंबन की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर चक्का जाम किया।कुछ दिन पूर्व नगर पालिका गेट के सामने नगर के जयनगर निवासी रतन सोनकर की स्कूली बस के रौदने से दर्दनाक मौत हो गई थी । इस संबंध में थानाध्यक्ष ने पीड़ित के परिजनों सहित स्कूल संचालक के बीच समझौता मुआवजे के रूप मे चौदह लाख रूपये की राशि को तय कराया, इसपर स्कूल संचालक ने दो लाख रुपया तत्काल दिया शेष धनराशि पंद्रह दिन के अंदर देने का करार किया गया । समय पूरा होने के बाद स्कूल के प्रबंधक आनंद यादव ने पीड़ित परिजन को रुपया देने मे हिला हवाली करने लगा। बुद्धवार को भारी संख्या में लोग नगर के मुख्य चौराहे को जाम कर स्कूल संचालक के गिरफ्तारी की मांग एवं मामले लापरवाही बरतने पर बरहज थानाध्यक्ष के निलंबन की मांग कर रहे थे। क्षेत्राधिकारी के लाख समझाने के बाद भी न्याय की मांग कर रहे लोग अपनी मांग को लेकर डटे रहे । प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए नगर की लगभग सारी दुकाने बंद रही । परिजनों का कहना है कि रतन की मौत के बाद थानाध्यक्ष अपने कक्ष में दोनों पक्षों सहित नगर के प्रमुख लोगों के बीच समझौता कराया था, कि पीड़ित को स्कूल संचालक चौदह लाख रुपया देगें । जबकि तत्काल परिजनों को दो लाख रुपया दिया गया । शेष बारह लाख रुपया पंद्रह दिन के अंदर देने को कहा गया । इधर स्कूल संचालक बाकी रुपया नहीं देने की बात करने लगा, जिससे नाराज परिजन एवं उनके समथर्क नगर के मुख्य चौराहे पर पहुँच स्थानीय पुलिस के विरोध में नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन कर चक्का जाम किये रहे । सूचना पाकर मौके पर पहुँचे सीओ राजेश चर्तुवेदी ने वार्ता कर मामले को शांत कराना चाहा लेकिन परिजन थानाध्यक्ष को निलंबित करने एवं स्कूल प्रबंधक के गिरफ्तारी की मांग पर अडे रहे । किन्तु उपजिलाधिकारी विपिन द्विवेदी एवं क्षेत्राधिकारी राजेश चतुर्वेदी द्वारा दो दिनों के अंदर मामले मे कार्यवाही करने के आश्वासन पर लगभग तीन घंटा से चल रहा धरना समाप्त हुआ। मौके पर पहुँचे उपजिलाधिकारी ने सीओ से वार्ता कर प्रदर्शनकारियों से कार्यवाही के लिए दो दिनों की समय माँगा उनके इस आश्वासन पर धरना प्रदर्शन समाप्त हुआ। इस दौरान पूर्व विधायक स्वामिनाथ यादव, पूर्व नपा अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता, पूर्व सभासद सचिन सिंह, अमित जायसवाल, अमरजीत सोनकर, सभासद लव सोनकर, मनोज सोनकर, धर्मेंद्र सोनकर, सोहित सोनकर, विकास, कमलेश, आकाश सोनकर सहित भारी संख्या मे लोग मौजूद रहे।

ततपश्चात् मौके पर पहुँचे उपजिलाधिकारी ने उनकी मांगो पर आश्वासन देकर प्रदर्शन को समाप्त कराया।

आर्मी पब्लिक स्कूल में हर्षोल्लास के साथ मना वार्षिकोत्सवछात्र-छात्राओं ने कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए

रांची (राष्ट्र की परम्परा) आर्मी पब्लिक स्कूल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया दो दिवसीय वार्षिकोत्सव ‘कैलाइडोस्कोप -2025’ आर्मी पब्लिक स्कूल ने दो दिवसीय (दिनांक 23 और 24 दिसंबर) वार्षिकोत्सव ‘कैलाइडोस्कोप 2025’ का आयोजन बड़े ही उत्साह के साथ कैरकट्टा सभागार दीपाटोली कैंट में किया। वार्षिकोत्सव के पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में विद्यालय के चेयरमैन ब्रिगेडियर राजकुमार, सेना मेडल, डिप्टी जी-ओ-सी, 23 इन्फेंट्री पैट्रन कोकरेल डिवीजन उपस्थित थे। वार्षिकोत्सव के दूसरे और अंतिम दिन मुख्य अतिथि के रूप में मेजर जनरल सज्जन सिंह मान, जी- आर्मी ओ-सी, 23 इन्फैंट्री कोकरेल डिवीजन, पैट्रन आर्मी पब्लिक स्कूल, रांची और श्रीमती संगीता मान उपस्थित थे। वि‌द्यालय के प्राचार्य अभय कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। इसमें छात्र-छात्राओं ने कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। यह एक प्रकार का आनंद उत्सव ही था। पहले दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर राजकुमार सेना मेडल, डिप्टी जी-ओ-सी 23 इन्फैंट्री डिवीजन, अध्यक्ष आर्मी पब्लिक स्कूल दीपाटोली रांची, द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दूसरे दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ मेजर जनरल सज्जन सिंह मान, जी-ओ-सी, 23 इन्फैंट्री डिवीजन और पैट्रन आर्मी पब्लिक स्कूल दीपाटोली रांची और श्रीमती संगीता मान द्वारा दीप प्रज्वलन करने के साथ हुआ। इस अवसर पर छात्रों ने कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इसमें समूह नृत्य, गान, नाटक, संगीत आदि की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन जीत लिया। कार्यक्रम की शुरुआत शिव वंदना के साथ हुई, जिसमें कक्षा छठी से आठवीं तक के छात्रों ने अपनी प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति ने सबको भक्ति के रंग में डुबो दिया। इसके बाद प्रधानाचार्य अभय कुमार सिंह ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर वि‌द्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, सह- पाठयक्रम गतिविधियों तथा वि‌द्यालय के आधुनिकीकरण आदि की जानकारी सबके साथ साझा की। कक्षा सातवीं और आठर्वी के विद्यार्थियों द्वारा भारत के गौरवशाली इतिहास की जीवंत झलकियां प्रस्तुत की गई। धूमिल हुआ इतिहास फिर आंखों में नजर आने लगा। मौर्य साम्राज्य से लेकर 1857 तक का विद्रोह तो कहीं संप्रभुता से भारत की स्वाधीनता तक की वीर गाथाएं दिखाई गई, जिसने दर्शकों में वीरता के आव को जागृत कर दिया।
विविधता में एकता, साल 1947 से 1950 और आशा की किरण 1950 से 1970 तक के नृत्य ने तो दर्शकों को मंत्रमुग्ध ही कर दिया। वर्ष 1980 से 2000 तक खेलों की झलकियां समूह नृत्य द्वारा प्रस्तुत की गई। कक्षा ग्यारहवीं के छात्रों ‌द्वारा अंग्रेजी नाटक प्रस्तुत किया गया। अंग्रेजी नाटक ‘Anight of magic and Mayhem’ ने सीख देने के साथ-साथ दर्शकों का काफी मनोरंजन भी किया। वर्ष 2000 से 2025 की भारत की यात्रा के ख‌ट्टे-मीठे अनुभव भी छात्रों द्वारा अपने नृत्य द्वारा प्रस्तुत किए गए। छात्रों ने वर्ष 2050 में भारत का भविष्य कैसा होगा, उसकी कल्पना करते हुए नृत्य पेश किया जिसने सबका मनमोह लिया। मुख्य अतिथि ने कई छात्रों को शैक्षणिक तथा खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन और शत प्रतिशत उपस्थिति के लिए सम्मानित किया। सरोजिनी नायडू सदन को इस वर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रथम पुरस्कार दिया गया। मुख्य अतिथि ने अपने भाषण में कहा कि बच्चों ने इस वार्षिकोत्सव में अपनी प्रतिभा का परिचय देकर यह साबित कर दिया है कि बच्चों में टैलेंट कूट-कूट कर भरा हुआ है, जरूरत है उनका सही मार्गदर्शन करने की और सर्वांगीण विकास करने की। मुख्य अतिथि ने अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए यह भी कहा कि बच्चों को जीवन में समय और अनुशासन का महत्व समझते हुए, संस्कारों को अपनाते हुए आगे बढ़ना है, तभी वह भविष्य में अच्छे नागरिक बनकर जीवन में सफल हो सकेंगे। जीवन मूल्यों को समझेंगे। मंच का संचालन कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं तथा कक्षा पाँचर्वी के छात्रों ने संभाला। उनके इस मंच संचालन की कला ने तो सबको चकित कर दिया। इस अवसर पर विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या कैप्टन गीता सिंह (रिटायर्ड) हेडमिस्ट्रेस श्रीमती निशा राय के साथ-साथ कई गणमान्य व्यक्ति, शिक्षकगण तथा छात्र भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षकगण के कठोर परिश्रम के साथ-साथ एन.सी.सी कैडेट्स ने भी अपना पूरा योगदान दिया। अंत में वि‌द्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, अभिभावको, शिक्षकगण एवं प्रतिभागियों तथा सभी विद्यार्थियों के प्रति आभार प्रकट किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।

आदिवासी अधिकार मंच ने पेसा नियमावली का किया स्वागतपंचायत कानून में संशोधन की मांग की

रांची (राष्ट्र की परम्परा)
आदिवासी अधिकार मंच, झारखंड ने राज्य की हेमंत सरकार द्वारा पेसा नियमावली गठित किए जाने का स्वागत करता है। मंच का यह मानना है कि यह बहुत देर से उठाया गया एक अच्छा कदम है और इससे आदिवासी और झारखंड की जनता की चिर प्रतिक्षित मांग पूरी हुई। मंच का यह भी मानना है कि पेसा के अनुरूप झारखंड पंचायत राज कानून में संशोधन किए
बगैर ग्राम गणराज्य का सपना अधूरा रहेगा। इसलिए आदिवासी अधिकार मंच, झारखंड हेमंत सरकार से यह मांग
करता है कि पेसा नियमावली के अनुरूप झारखंड पंचायत राज कानून में भी आवश्यक संशोधन अविलंब करे। इसे लेकर मंच के राज्य संयोजक सुखनाथ लोहरा ने आदिवासी अधिकार मंच की और से केंद सरकार से यह मांग किया है कि पेसा के जैसा ही अनुसूचित क्षेत्रों के शहरी क्षेत्रों के लिए भी अविलंब एक सशक्त केंद्रीय कानून बनाए ताकि शहरी क्षेत्रों में भी पांचवीं अनुसूची के अनुरूप स्वशासन व्यवस्था लागू हो सके।

सांसद खेल महोत्सव का भव्य समापन होगा – संजय सेठ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल खिलाड़ियों से संवाद करेंगे

रांची (राष्ट्र की परम्परा)
ओटीसी मैदान रांची में सांसद खेल महोत्सव के समापन समारोह के निर्माता एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, इस प्रेस वार्ता में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बताया कि कल संसद खेल महोत्सव का भव्य समापन ओटीसी मैदान में आयोजित होना है सेठ ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मोटिवेशन जिनके संकल्प हमारे देश के बच्चे कैसे भारत के पटल पर अपना परचम लहराए , कैसे हमारे बच्चे बड़े आयोजनों गेम कॉमनवेल्थ ओलंपिक, या एशियन गेम में पदक जीत कर भारत का नाम रोशन करें l सांसद खेल महोत्सव का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर कैसे आगे बढ़े इसका मुख्य उद्देश्य है सांसद खेल महोत्सव जिसका आयोजन पूरे भारतवर्ष में हो रहा है। कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समापन में देश के सभी सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ संवाद भी करेंगे। सेठ ने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खेल प्रेम खेल को मोटिवेशन करना हमारे देश के खिलाड़ी जब इंटरनेशनल गेम हो या राष्ट्रीय स्तर पर खेल में जीतने पर यह हारने पर खिलाड़ियों से बात कर खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाते हैं, ऐसे हमारे प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्पना को हम सब मिलकर आगे बढ़ने का एक प्रयास है l सेठ ने बताया सांसद महोत्सव सितंबर माह से शुरू हुई लगातार 4 महीने से विभिन्न खेलों का आयोजन रांची लोकसभा के 6 विधानसभा में संपन्न हुआ। फुटबॉल में कुल 147 टीमों ने भाग लिया जिसमें महिलाओं की 40 टीम में सम्मिलित है 20 अगस्त को साइक्लोथोन ,से इसे कार्यक्रम की शुरुआत हुई जिसमें लगभग 2000 प्रतियोगी ने भाग लिया जिसमें नेवी के अधिकारी रही गौरी मिश्रा ने भाग लिया स्वदेशी मैराथन का आयोजन में लगभग रांची के 25000 लोगों ने भाग लिया, इस कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष गंगवार ने भाग लिया। वहीं सांसद खेल महोत्सव में फुटबॉल में 147 टीम, बुशु में 225 और आर्चरी में 190 लॉन बॉल में 33, कबड्डी में बालक बालिका वर्ग में कुल 60 टीमों ने भाग लिया वही एथलेटिक्स में कुल 340 खिलाड़ियों ने भाग लिया है। कल फुटबॉल का फाइनल मैच, कबड्डी, का मैच खेला जाना है, वहीं परंपरागत खेल गुल्ली डंडा, रसाकशी ,पीटो ,का भी आयोजन होना है। इस खेल में जितने भी प्रतिभागियों ने भाग लिया सभी खिलाड़ियों को टी-शर्ट, मेडल, और सर्टिफिकेट दिया गया l कल सुबह 9:00 बजे से रंगारंग कार्यक्रम के साथ खेलों का आयोजन होना है साथ ही कल हृदय सम्राट पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की पुण्यतिथि पर एक कार्निवास लगाई जाएगी साथ ही फुटबॉल में भाग ले रहे सभी टीम को दो नेट एक फुटबॉल और बुशु में भाग लिए प्रति प्रतिभागी को खेल किट का वितरण किया जाएगा l आज के इस प्रेस वार्ता में ओलंपिक संघ के सचिव मधु कांत पाठक ,रांची महानगर भाजपा के अध्यक्ष वरुण साहू, रविंद्र कुमार, आनंद गोप,एसडी सिंह, ऐश्वर्या सेठ शामिल रहे।

जामताड़ा में लूट–फायरिंग पर आजसू का बंद को समर्थन

राज्य में कानून व्यवस्था ध्वस्त, सरकार,कोयला, बालू में मस्त : प्रवीण प्रभाकर

रांची (राष्ट्र की परम्परा) आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने जामताड़ा में सरेआम अपराधियों द्वारा ज्वेलरी दुकान में लूट और फायरिंग की घटना पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि फायरिंग में व्यवसायी अमन वर्मन घायल हुए हैं। प्रभाकर ने हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति ध्वस्त है और राज्य सरकार तथा पुलिस–प्रशासन कोयला–बालू चलाने में मस्त है। उन्होंने कहा कि आजसू की जामताड़ा जिला समिति ने चैंबर ऑफ कॉमर्स के जामताड़ा बंद का समर्थन किया है।प्रभाकर ने कहा कि आम जनता भय के वातावरण में जो रही है, लेकिन न तो सरकार की फिक्र है और न ही प्रशासन को। राज्य सरकार और पुलिस–प्रशासन का सरकार चलाने में कम और कोयला–बालू चलाने पर ज्यादा ध्यान है। राज्य में माफिया–अपराधी का राज कायम है। एक वर्ष के भीतर ही जनता का राज्य सरकार से भरोसा उठ चुका है। उन्होंने कहा कि अपराधियों की गिरफ्तारी 24 घंटे के भीतर नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा।

पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर कार्यवाही की मांग की मथुरा दास ने

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जैतीपुर थाना क्षेत्र के गौहावर निवासी बाबा मथुरादास ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।बताया गांव अवा के एक लकड़ी ठेकेदार ने गांव के ही रामकुमार के खेत से यूकेलिप्टस के पेड़ खरीदे थे, इन पेड़ों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से निकालने के लिए ठेकेदार ने उनके खेत में जेसीबी मशीन से खुदाई कर रास्ता बनाया था। ठेकेदार ने उस समय खेत को बाद में समतल कराने का आश्वासन दिया था।
लेकिन ठेकेदार द्वारा चार माह बीत जाने के बाद भी खेत को समतल नहीं कराया गया है।
जेसीबी द्वारा खोदे गए गड्डों के कारण उनका खेत अभी तक खाली पड़ा है और वे फसल नहीं बो पाए हैं। इस स्थिति से उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है।
वहीं पुलिस ने मामले में जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

विकास की राह मे मील का पत्थर बनेगा मोहन सेतु – कनक लता सिंह

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)पूर्व राजयसभा सांसद कनक लता सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग करते हुए कहाँ कि,जनपद के दक्षिण में स्थित बाबा राघव दास की कर्म भूमि तथा देवराहा बाबा की तपो भूमि बरहज नगर जो,प्राचीन काल में व्यापार का केंद्र रहा। और यहाँ से विदेशो तक आयात और निर्यात होता था । ब्रिटिश कॉल मे व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए बरहज को रेल मार्ग एवं परिवहन मार्ग से जोड़ा गया। लेकिन वर्तमान समय में अपनी दशा पर आँसू बहा रहा है। किसी ने भी बरहज की ऐतिहासिक एवं व्यवसायिक स्वरूप को स्थापित करने जरूरत नहीं समझा। ऐसे मे 24 नवम्बर 2013 को समाजवादी पार्टी के राजनितिक सचेतक सांसद मोहन सिंह के निधन पर, अंतिम दर्शन के लिए बरहज आये सपा के राष्ट्रीय मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बरहज सरयू नदी पर मोहन सिंह के नाम पर पक्का पुल निमार्ण के रूप मे विकास की नीव रखा जो विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।उन्होंने बताया कि 2014 में सरयू नदी पर पुल का निमार्ण कार्य शुरू हुआ। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ तब से प्रदेश की वागडोर भाजपा के योगी आदित्य नाथ के हाथ में है, और आपके के शहर गोरखपुर के दक्षिण छोर से सटा देवरिया जनपद मे बरहज तहसील स्थित है, जहाँ सरयू नदी पर बनने वाले पक्के पुल का निर्माण हो जाने से बरहज के विकास का दक्षिणी दरवाजा खुल जायेगा और बलिया, बनारस, गाजीपुर, मऊ जनपद सहित नदीपार के गांवों का भाग्योदय हो जायेगा। कनकलता सिंह ने कहाँ कि देवरिया जनपद के दाक्षिणांचल में स्थित बाबा राघव दास की कर्म भूमि तथा देवराहा बाबा की तपो भूमि बरहज नगर प्राचीन काल में व्यापारिक केंद रहा है। एक समय था कि नाँव से नदी के रास्ते आयात और निर्यात होता था । व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए बरहज को रेल मार्ग से जोड़ा गया। लेकिन वर्तमान समय में स्थित परिस्थित सब बदलता गया| 24 नवम्बर 2013 को समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक सांसद मोहन सिंह के निधन पर अंतिम दर्शन के लिए बरहज आये मुलायम सिंह यादव ने बरहज सरयू नदी पर मोहन सिंह के नाम पर पक्का पुल निमार्ण करने की घोषणा की । 2014 में सरयू नदी पर पुल का निमार्ण कार्य शुरू हुआ। प्रदेश में सत्ता परिवर्तित हुई । इसके बाद प्रदेश की वागडोर पूज्य योगी आदित्य नाथ महाराज जी के हाथ में है। मुख्यमंत्री जी के शहर गोरखपुर से सटा देवरिया जनपद है। सरयू नदी पर बनने वाले पक्का पुल के बन जाने से बरहज के विकास का दक्षिणी दरवाजा खुल जायेगा और बलिया, बनारस, गाजीपुर, मऊ जनपद सहित नदीपार के गांवों का भाग्योदय हो जायेगा। महाराज जी आपके नेतृत्व में प्रदेश में विकास कार्य गतिमान है, मै बरहज विधान सभा क्षेत्र सहित जनपद वासियों की तरफ से मांग करती हूँ कि मोहन सिंह सेतु का निमार्ण कार्य में जो भी बाधायें है उसे दूर कर शीघ्र पक्के पुल का निमार्ण कार्य पूरा कराकर जनमानस के सपनो को पूरा किया जाय। जिससे आम जनमानस को इसका लाभ मिल सके और बरहज कि ऐतिहासिक एवं व्यवसायिक स्वरूप को प्रतिस्थापित किया जाय।

बेटे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए मुख्यालय का चक़्कर काट रहे पिता

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जैतीपुर विकासखंड के करकौर गांव निवासी राम औतार पिछले पांच माह से अपने बेटे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें पंचायत सचिव द्वारा लगातार टरकाया जा रहा है।
राम औतार ने बताया कि उन्हें अपने बेटे अंकुर के कुछ आवश्यक कार्यों के लिए जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। उन्होंने अगस्त माह में ब्लॉक मुख्यालय पर सभी आवश्यक कागजात जमा कर दिए थे लेकिन पंचायत सचिव विश्वास शुक्ला लगातार उन्हें टालते आ रहे हैं। अब उन्होंने फोन उठाना भी बंद कर दिया है। जन्म प्रमाण पत्र न मिलने के कारण बेटे के जरूरी काम रुके हुए हैं।
इस परेशानी से तंग आकर राम औतार ने खंड विकास अधिकारी की अनुपस्थिति में सहायक विकास अधिकारी पंचायत को प्रार्थना पत्र दिया है। उन्होंने जन्म प्रमाण पत्र शीघ्र जारी करने की मांग की है।
सहायक विकास अधिकारी पंचायत राम अवतार शर्मा ने बताया कि उन्हें प्रार्थना पत्र प्राप्त हो गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जन्म प्रमाण पत्र जल्द ही जारी करवा दिया जाएगा।

आबकारी दुकानों के समय में अस्थायी बदलाव, डीएम ने जारी किया आदेश


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)।
क्रिसमस और नववर्ष के त्योहारों को ध्यान में रखते हुए कुशीनगर जनपद में आबकारी दुकानों के संचालन समय में अस्थायी संशोधन किया गया है। जिलाधिकारी एवं लाइसेंस प्राधिकारी कुशीनगर महेन्द्र सिंह तंवर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश शासन, आबकारी अनुभाग-2, लखनऊ द्वारा जारी शासनादेश के क्रम में लिया गया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनपद में संचालित समस्त देशी शराब, विदेशी मदिरा, बीयर, मॉडल शॉप एवं अन्य आबकारी दुकानों के संचालन समय में विशेष तिथियों पर बढ़ोतरी की गई है। क्रिसमस पर्व के अवसर पर शराब की दुकान बंदी 25 दिसंबर 2025, जबकि नववर्ष के अवसर पर 30 दिसंबर 2025 एवं 31 दिसंबर 2025 को सभी आबकारी दुकानों को प्रातः 10:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक खोलने की अनुमति प्रदान की गई है।
उन्होंने बताया कि इन चार विशेष दिनों को छोड़कर जनपद में आबकारी दुकानों का संचालन पूर्व निर्धारित समयानुसार ही किया जाएगा। सामान्य दिनों में सभी दुकानें सुबह 10:00 बजे से रात 10:00 बजे तक ही खुली रहेंगी। प्रशासन द्वारा समय सीमा का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
जिलाधिकारी ने आबकारी विभाग एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शासनादेश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता, अवैध बिक्री अथवा निर्धारित समय से अधिक दुकानें खुली पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रशासन का यह कदम त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

25 दिसंबर: जब इतिहास ने मौन होकर मानव सभ्यता की दिशा बदल दी

25 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि वह दर्पण है जिसमें सत्ता, साधना, विज्ञान, संस्कृति और मानवीय संवेदना—सब एक साथ प्रतिबिंबित होते हैं। इस दिन घटित घटनाओं ने कभी साम्राज्यों का अंत लिखा, कभी नई राजनीतिक संरचनाओं की नींव रखी, तो कभी कला-संगीत और आध्यात्मिक चेतना को अमर कर दिया। आइए, 25 दिसंबर की उन ऐतिहासिक घटनाओं पर विस्तार से दृष्टि डालें, जिन्होंने समय की धारा को नया मोड़ दिया।

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2012 – कज़ाकिस्तान में एएन-72 विमान हादसा
दक्षिणी कज़ाकिस्तान के शिमकेंट शहर के पास एन्टोनोव कंपनी का एएन-72 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में विमान में सवार सभी 27 लोगों की मृत्यु हो गई। यह घटना विमानन सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और मौसमीय जोखिमों पर वैश्विक विमर्श का कारण बनी। हादसे ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक के बावजूद मानवीय सतर्कता सर्वोपरि है।

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2007 – जैज़ संगीत के शिखर पुरुष ऑस्कर पीटरसन का निधन
कनाडा के महान जैज़ पियानोवादक और संगीतकार ऑस्कर पीटरसन का निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति था। उनकी उंगलियों से निकले सुर स्वतंत्रता, संघर्ष और सौंदर्य का संगम थे। उन्होंने जैज़ को वैश्विक पहचान दिलाई और नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध कला को सशक्त माध्यम बनाया।

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2005 – डोडो पक्षी का ऐतिहासिक अवशेष
मॉरीशस में 400 वर्ष पूर्व विलुप्त हो चुके डोडो पक्षी के लगभग दो हज़ार वर्ष पुराने अवशेष मिले। यह खोज केवल जीवाश्म विज्ञान की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि मानव हस्तक्षेप से विलुप्त होती जैव-विविधता के प्रति चेतावनी भी। डोडो, अब संरक्षण का प्रतीक बन गया।

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2002 – चीन-बांग्लादेश रक्षा समझौता
चीन और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग समझौते ने एशियाई भू-राजनीति में नई गतिशीलता पैदा की। इस करार से सैन्य प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक संतुलन को बढ़ावा मिला। यह समझौता दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।

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1998 – रूस और बेलारूस का संघ समझौता
रूस और बेलारूस ने संयुक्त संघ बनाने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम सोवियत विघटन के बाद क्षेत्रीय एकीकरण की कोशिशों का प्रतीक था। राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य सहयोग को मजबूत करने का यह प्रयास यूरोपीय राजनीति में विशेष महत्व रखता है।

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1991 – सोवियत संघ का अंत
राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव के त्यागपत्र के साथ ही सोवियत संघ का औपचारिक रूप से अंत हो गया। यह घटना 20वीं सदी की सबसे निर्णायक राजनीतिक घटनाओं में गिनी जाती है। शीत युद्ध का समापन, नई राष्ट्र-राज्यों की उत्पत्ति और वैश्विक शक्ति संतुलन में परिवर्तन इसी क्षण से जुड़ा है।

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1977 – चार्ली चैपलिन का निधन
हॉलीवुड के महान अभिनेता, निर्देशक और मानवतावादी चार्ली चैपलिन का निधन सिनेमा जगत के एक युग का अंत था। मूक फिल्मों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक असमानता, गरीबी और सत्ता के अहंकार पर गहरी चोट की। उनका चरित्र ‘द ट्रैम्प’ आज भी मानवीय करुणा का प्रतीक है।

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1974 – एयर इंडिया बोइंग 747 का अपहरण
रोम जा रहे एयर इंडिया के बोइंग 747 विमान का अपहरण अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों को सख्त करने और आतंकवाद-रोधी नीतियों को पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता को उजागर किया।

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1962 – सोवियत परमाणु परीक्षण
सोवियत संघ ने नोवाया जेमल्या क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया। यह शीत युद्ध के दौर में शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा था। ऐसे परीक्षणों ने विश्व को परमाणु विनाश की आशंका से रूबरू कराया और अंततः परमाणु अप्रसार समझौतों की राह प्रशस्त की।

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1947 – झनगड़ पर पाकिस्तानी कब्ज़ा
भारत-पाक विभाजन के बाद पाकिस्तानी सेना ने झनगड़ पर कब्ज़ा कर लिया। यह घटना कश्मीर विवाद की जटिलता को और गहरा करती है। सीमाई संघर्षों और मानवीय त्रासदी की यह कड़ी उपमहाद्वीप के इतिहास में आज भी पीड़ा के रूप में दर्ज है।

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1946 – ताइवान का संविधान अंगीकार
ताइवान में संविधान को अंगीकार किया गया, जिसने लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों की नींव रखी। यह एशिया में संवैधानिक विकास की महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने शासन प्रणाली को स्थिरता और दिशा प्रदान की।

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1924 – कानपुर में कम्युनिस्ट सम्मेलन
पहला अखिल भारतीय कम्युनिस्ट सम्मेलन कानपुर में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन ने भारत में श्रमिक आंदोलनों और वैचारिक राजनीति को संगठित रूप दिया। सामाजिक न्याय, समानता और श्रम अधिकारों की बहस यहीं से व्यापक हुई।

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1892 – स्वामी विवेकानंद की कन्याकुमारी साधना
स्वामी विवेकानंद ने कन्याकुमारी की समुद्र-मध्य चट्टान पर तीन दिन की साधना की। यह तपस्या उनके आध्यात्मिक पुनर्जागरण का केंद्र बनी। यहीं से ‘उठो, जागो’ का संदेश जन्मा, जिसने भारतीय चेतना को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया।

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1771 – शाह आलम द्वितीय का राज्यारोहण
मुग़ल शासक शाह आलम द्वितीय मराठाओं के संरक्षण में दिल्ली के सिंहासन पर बैठे। यह घटना मुग़ल साम्राज्य की निर्भरता और मराठा शक्ति के उत्कर्ष को दर्शाती है। भारतीय राजनीति में यह शक्ति-संतुलन का निर्णायक क्षण था।

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1763 – महाराजा सूरजमल की हत्या
भरतपुर के महान शासक महाराजा सूरजमल की हत्या भारतीय इतिहास की दुखद घटनाओं में से एक है। वे कुशल रणनीतिकार और जनप्रिय राजा थे। उनकी मृत्यु ने जाट शक्ति को गहरा आघात पहुंचाया और उत्तर भारत की राजनीति प्रभावित हुई।

आज का राशिफल: मेष से मीन तक भविष्यफल, जानिए करियर-धन-रिलेशनशिप का हाल

🔯 25 दिसंबर 2025 का आज का राशिफल: मेष से मीन तक भविष्यफल, जानिए करियर-धन-रिलेशनशिप का हाल

👉 25 दिसंबर 2025, गुरुवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए विशेष संकेत लेकर आया है। चाहे कार्य क्षेत्र, व्यवसाय, शिक्षा, कला-संगीत, राजनीति, प्रशासनिक सेवा या आर्थिक स्थिति—हर क्षेत्र पर ग्रहों का प्रभाव दिखाई देगा। नीचे आसान और प्रभावशाली शब्दों में विस्तृत राशिफल प्रस्तुत है।

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मेष (Aries)
राशि चिन्ह: मेष | अक्षर: अ, चू, चे, चो, ला
आज आत्मविश्वास चरम पर रहेगा।
करियर/व्यवसाय: नई जिम्मेदारी मिल सकती है, प्रशासनिक क्षेत्र में मान-सम्मान।
शिक्षा/कला: छात्रों को सफलता, कलाकारों को मंच।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: धार्मिक कार्यों में खर्च संभव।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
पूजा: हनुमान जी

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वृषभ (Taurus)
राशि चिन्ह: वृषभ | अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ
करियर/व्यवसाय: माता-पिता का सहयोग, व्यापार यात्रा संभव।
शिक्षा: पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी।
कला-संगीत: रचनात्मक कार्य सफल।
आर्थिक स्थिति: संतुलित रहेगी।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6
पूजा: मां लक्ष्मी

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मिथुन (Gemini)
राशि चिन्ह: मिथुन | अक्षर: का, की, कु, घ
करियर: भागदौड़ अधिक लेकिन परिणाम सकारात्मक।
शिक्षा: ध्यान केंद्रित रखें।
राजनीति: बयानबाजी में संयम जरूरी।
आर्थिक स्थिति: सामान्य।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान विष्णु

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कर्क (Cancer)
राशि चिन्ह: कर्क | अक्षर: डा, डी, डू, डे
व्यवसाय: लाभ के अवसर मिलेंगे।
शिक्षा: सफलता के योग।
प्रशासनिक सेवा: सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: मजबूत।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 2
पूजा: शिव जी
सिंह (Leo)
राशि चिन्ह: सिंह | अक्षर: मा, मी, मू, मे
करियर: पिता का सहयोग, पद-प्रतिष्ठा।
रिलेशनशिप: संवाद में संयम रखें।
आर्थिक स्थिति: जीवनसाथी से लाभ।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव
♍ कन्या (Virgo)
राशि चिन्ह: कन्या | अक्षर: टो, पा, पी, पु
करियर: उन्नति के योग।
फाइनेंस: जल्दबाजी से बचें।
शिक्षा: मेहनत सफल।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
पूजा: गणेश जी

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तुला (Libra)
राशि चिन्ह: तुला | अक्षर: रा, री, रू, रे
रिलेशनशिप: संबंध मजबूत होंगे।
ऑफिस: सहयोग मिलेगा।
व्यवसाय: शुभ समाचार।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 6
पूजा: मां दुर्गा
वृश्चिक (Scorpio)
राशि चिन्ह: वृश्चिक | अक्षर: ना, नी, नू, ने
व्यवसाय: विस्तार संभव।
प्रॉपर्टी: लाभ के योग।
शिक्षा: सफलता।
शुभ रंग: मैरून | शुभ अंक: 8
पूजा: भैरव बाबा
धनु (Sagittarius)
राशि चिन्ह: धनु | अक्षर: ये, यो, भा, भी
करियर: ट्रांसफर/सम्मान के योग।
सेहत: सावधानी रखें।
व्यवसाय: लाभ बढ़ेगा।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3
पूजा: विष्णु जी

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♑ मकर (Capricorn)
राशि चिन्ह: मकर | अक्षर: भो, जा, जी, खी
रिलेशनशिप: धैर्य जरूरी।
परिवार: मांगलिक खर्च।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
शुभ रंग: ग्रे | शुभ अंक: 4
पूजा: शनिदेव

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कुंभ (Aquarius)
राशि चिन्ह: कुंभ | अक्षर: गू, गे, गो, सा
व्यवसाय: नए काम की शुरुआत।
यात्रा: दूसरे स्थान पर जाना संभव।
राजनीति: नेटवर्क बढ़ेगा।
शुभ रंग: बैंगनी | शुभ अंक: 7
पूजा: शिव जी

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मीन (Pisces)
राशि चिन्ह: मीन | अक्षर: दी, दू, थ, झ
करियर: आत्मविश्वास से सफलता।
परिवार: धार्मिक कार्य।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ेगा।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3
पूजा: भगवान विष्णु

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⚠️ महत्वपूर्ण सूचना:
यह ज्योतिषीय विश्लेषण सामान्य ग्रह-गोचर पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष को प्रमाणित नहीं करती। कृपया अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य से अवश्य दिखाएं।

🔱 मौन में गूँजता धर्म: जब विष्णु की लीला से मानव हृदय बना धर्मस्थल

जब भगवान बोलते नहीं, तब भी संसार सुनता है।
जब वे हस्तक्षेप नहीं करते, तब भी दिशा बदल जाती है।
और जब धर्म केवल शास्त्रों में सीमित न रहकर मानव हृदय में प्रतिष्ठित हो जाता है—
तब समझ लेना चाहिए कि यह भगवान विष्णु की मौन लीला है।
यह शास्त्रोक्त विष्णु कथा – एपिसोड 8 उसी मौन, उसी करुणा और उसी अदृश्य हस्तक्षेप का दिव्य वर्णन है, जहाँ पालनकर्ता स्वयं मौन रहकर भी सृष्टि का संतुलन बनाए रखते हैं।

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🌿 मौन—विष्णु का सबसे बड़ा उपदेश
ऋग्वेद में कहा गया है—
“ऋतं धारयति विष्णुः”
अर्थात जो ऋत (सत्य, नियम, धर्म) को धारण करता है, वही विष्णु है।
भगवान विष्णु का धर्म शोर में नहीं, संतुलन में है।
उनकी लीला युद्ध में नहीं, मर्यादा में है।
उनका उपदेश शब्दों में नहीं, कर्म और करुणा में है।
एपिसोड 8 में हम उसी क्षण को देखते हैं, जब सृष्टि धर्म-संकट में थी—
पर विष्णु ने न तो शंख फूंका,
न चक्र उठाया,
बल्कि मौन रहकर मनुष्यों के भीतर धर्म को जगा दिया।

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🕉️ शास्त्रोक्त कथा: जब विष्णु मौन रहे और मानव बोल उठा
पुराणों में वर्णन आता है कि एक समय ऐसा आया जब
धर्म के चारों स्तंभ—सत्य, दया, तप और शौच—
कमज़ोर पड़ने लगे।
राजा तो थे,
शास्त्र भी थे,
पर धर्म केवल ग्रंथों में कैद हो गया था।
मनुष्य कर्म करता था,
पर करुणा के बिना।
दान देता था,
पर अहंकार के साथ।
देवताओं ने वैकुण्ठ में जाकर भगवान विष्णु से प्रार्थना की
“हे जगतपालक! अब अवतार लीजिए, अन्यथा धर्म नष्ट हो जाएगा।”
भगवान विष्णु ने नेत्र खोले,
मुस्कुराए—
और कुछ भी नहीं कहा।
न अवतार की घोषणा,
न युद्ध की तैयारी।
देवता चिंतित हो उठे।
तभी नारद मुनि ने कहा—
“जब विष्णु मौन होते हैं,
तब समझो धर्म का बीज मानव हृदय में बोया जा रहा है।”

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🌸 मौन लीला का प्रभाव: परिवर्तन बाहर नहीं, भीतर से
उसी समय पृथ्वी पर अद्भुत परिवर्तन होने लगा।
एक साधारण गृहस्थ—जो केवल अपने लिए जीता था—
अचानक पराए दुख से व्याकुल हो उठा।
एक राजा—जो दंड से शासन करता था—
न्याय को करुणा से तौलने लगा।
एक बालक—जिसे शास्त्रों का ज्ञान न था—
माता-पिता की सेवा में ही ईश्वर देखने लगा।
यह कोई चमत्कार नहीं था।
यह विष्णु की मौन लीला थी।
श्रीमद्भागवत कहता है—
“ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति”
भगवान हर प्राणी के हृदय में निवास करते हैं।
जब विष्णु ने बाहर से कुछ नहीं किया,
तब भीतर से सब कुछ बदल गया।

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🔔 विष्णु महिमा: पालन का अर्थ केवल रक्षा नहीं
भगवान विष्णु को केवल रक्षक मानना अधूरा सत्य है।
वे पालनकर्ता हैं—
और पालन केवल शरीर का नहीं,
चेतना का होता है।
ब्रह्मा सृष्टि रचते हैं
शिव संहार करते हैं
विष्णु चेतना को जीवित रखते हैं
जब मनुष्य भीतर से धर्मवान हो जाए,
तो बाहरी नियमों की आवश्यकता कम हो जाती है।

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यही विष्णु का आदर्श शासन है—
जहाँ तलवार नहीं, संवेदना शासन करती है।
⚖️ विष्णु और मानव: समानता का शास्त्रोक्त संदेश
विष्णु कभी स्वयं को ईश्वर सिद्ध नहीं करते।
वे मानव रूप में आकर मानव को श्रेष्ठ बनाते हैं।
राम बनकर मर्यादा सिखाते हैं,
कृष्ण बनकर कर्मयोग,
और मौन रहकर—
आत्मधर्म।
एपिसोड 8 का मूल संदेश यही है—
धर्म थोपने से नहीं,
जाग्रत करने से फैलता है।
जब मनुष्य अपने विवेक से सही चुनता है,
तब वही विष्णु की सच्ची पूजा है।

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🌼 भावनात्मक सार: आज के युग में मौन विष्णु
आज भी विष्णु मौन हैं।
पर—
जब कोई भूखे को भोजन देता है
जब कोई सत्य के लिए अकेला खड़ा होता है
जब कोई बिना नाम-यश के सेवा करता है
तब समझिए—
विष्णु मुस्कुरा रहे हैं।
धर्म आज भी ग्रंथों में नहीं,
हृदयों में जीवित होने की प्रतीक्षा कर रहा है।

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🔱 निष्कर्ष: जब मौन ही सबसे बड़ा शंखनाद हो
एपिसोड 8 हमें सिखाता है कि
हर बार ईश्वर अवतार नहीं लेते,
कभी-कभी वे हमें ही अवतार बनने देते हैं।
जब आप किसी के दुख में चुपचाप साथ खड़े होते हैं,
जब आप बिना कहे सही करते हैं—
तब आप ही विष्णु की मौन लीला बन जाते हैं।

“वीर बाल दिवस से विकसित भारत तक: 26 दिसंबर और भारत की बाल शक्ति की ऐतिहासिक विरासत”

छोटे साहबजादों का स्मरण आते ही सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है व सिर श्रद्धा से झुक जाता है

साहिबजादों का बलिदान किसी एक धर्म के वर्चस्व का नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता का प्रतीक है,सभ्य समाज में आस्था का सम्मान और विकल्प की स्वतंत्रता सर्वोपरि होनी चाहिए- एडवोकेट किशन

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आदि अनादि काल से भारत की अनेक गाथाएं इतिहास में दर्ज़ है, जिसका बखान उनके प्रकाशोत्सव वर्षगांठ या उस दुखद पल कुर्बानी दिवस के रूप में उसको याद किया जाता है। इसी कड़ी में 26 दिसंबर 2025 को सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार की शहादत को आज भी इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। छोटे साहिबजादों का स्मरण आते ही सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है और सिर श्रद्धा से झुक जाता है। देश में पहली बार पीएम के ऐलान के बाद ही 26 दिसंबर को गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी के साहस को श्रद्धांजलि देने के लिए वीर बाल दिवस पूरे देश-विदेश में मनाया जाता है। गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब उस स्थान पर खड़ा है, जहां साहिबजादों ने आखिरी सांस ली।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि साहिबजादों का बलिदान किसी एक धर्म के वर्चस्व का नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता का प्रतीक है। वीर बाल दिवस इस संदेश को रेखांकित करता है कि किसी भी सभ्य समाज में आस्था का सम्मान और विकल्प की स्वतंत्रता सर्वोपरि होनी चाहिए। यह विचार आज के वैश्विक संघर्षों और धार्मिक ध्रुवीकरण के दौर में अत्यंत प्रासंगिक है।

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26 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार वीर बाल दिवस मना रही हैं, जिसमें प्रधानमंत्री दिल्ली के भारत मंडपम में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, सुपोषित पंचायत योजना शुरू करेंगे और बच्चों को संबोधित करेंगे, बाल पुरस्कार अब 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के बजाय 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के मौके पर दिए जाते हैँ। राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में बाल पुरस्कार माननीय राष्ट्रपति द्वारा बैठ जाएंगे।साथ ही देशभर के स्कूलों और संस्थानों में साहिबजादों की वीरता पर आधारित विशेष कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी,जिससे बच्चों को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ा जा सके,26 दिसंबर का दिन भारतीय इतिहास, सिख परंपरा और मानव सभ्यता के नैतिक मूल्यों में एक अद्वितीय अध्याय के रूप में अंकित है।

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यह केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि साहस, धर्म, बलिदान और सत्य के लिए अडिग रहने की चेतना का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। वीर बाल दिवस उन दो बाल वीरों बाबा जोरावर सिंह जी (9 वर्ष) और बाबा फतेह सिंह जी (7 वर्ष) की अमर शहादत को समर्पित है, जिन्होंने अत्याचार, लोभ और भय के सामने झुकने से इनकार कर दिया और अपने जीवन से मानवता को अमर संदेश दिया। सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी केवल एक गुरु नहीं, एक युग थे,गुरु गोविंद सिंहजी केवल सिखों के दसवें गुरु ही नहीं थे, बल्कि वे धर्म, न्याय और मानव गरिमा के सार्वभौमिक रक्षक थे। उन्होंने ऐसे समय में नेतृत्व किया जब धार्मिक उत्पीड़न, सत्ता का दमन और नैतिक पतन अपने चरम पर था।

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उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर यह स्पष्ट कर दिया कि धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध सक्रिय संघर्ष है।गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन स्वयं में एक अंतरराष्ट्रीय नैतिक दर्शन है, जिसमें समानता, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान के मूल्य समाहित हैं।
साथियों बात अगर हम वीर बाल दिवस के महत्व व परिभाषा संशोधन की करें तो, यह दिवस खालसा के चार साहिबजादों के बलिदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। अंतिम सिख गुरु गोबिंद सिंह के छोटे बच्चों ने अपने आस्था की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। यह उनकी कहानियों को याद करने का भी दिन और यह जानने का भी दिन है कि कैसे उनकी निर्मम हत्या की गई-खासकर जोरावर और फतेह सिंह की। सरसा नदी के तट पर एक लड़ाई के दौरान दोनों साहिबजादों को मुगल सेना ने बंदी बना लिया था।इस्लाम धर्म कबूल नहीं करने पर उन्हें क्रमशः 8 और 5 साल की उम्र में कथित तौर पर जिंदा दफन कर दिया गया था। बदली परिभाषा, अब, वीर वह है जो अंधेरों को रोशन करें सरकार ने इस बार वीरता की परिभाषा को भी परिमार्जित किया है। इसमें कहा गया है, वीर वह है जो अंधेरों को रोशन करें। इसमें केवल साहस ही नहीं दया, क्रियाशीलता, नवप्रवर्तन के साथ कुछ कर गुजरे बच्चों जो समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनते हैं को शामिल किया गया है, ताकि इससे देश की युवा पीढ़ी और बच्चे भी ऐसा करने के लिए प्रेरित हों। सरकार का मकसद इसके जरिये समग्रता के साथ बच्चों की वीरता और कारनामों को पेश करना है। वीर सपूतों के अदम्य साहस से प्रेरणा लेना है।

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साथियों बात अगर हम 26 दिसंबर 2025 को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने व इसी दिन पीएम राष्ट्रीय बाल पुरस्कार वितरण की करें तो,पीएमआह्वान पर 2022 से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के दो छोटे साहिबजादे 9 साल के बाबा जोरावर सिंह और उनके छोटे भाई 5 साल के बाबा फतेह सिंह की वीरता को समर्पित है।भारत में परंपरागत बाल दिवस 14 नवंबर को मनाया जाता है,जो बाल शिक्षा और विकास पर केंद्रित है। वीर बाल दिवस इस परंपरा का विकल्प नहीं, बल्कि उसका नैतिक विस्तार है। यह दिन बच्चों में साहस, सत्य, न्याय,आत्मसम्मान और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने का अवसर देता है।

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बाल दिवस को केवल उत्सव नहीं, बल्कि मूल्य-आधारित चेतना के रूप में देखने की यह एक नई पहल है।बाल पुरस्कार की अवधारणा: वीरता का सम्मानवीर बाल दिवस पर बाल पुरस्कार देने की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पुरस्कार केवल शैक्षणिक या खेल उपलब्धियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन बच्चों को सम्मानित करना चाहिए जिन्होंने साहस,करुणा सामाजिक सेवा,आपदा प्रबंधन, मानवाधिकार रक्षा या नैतिक दृढ़ता का असाधारण परिचय दिया हो। ऐसे पुरस्कार बच्चों को यह विश्वास दिलाते हैं कि समाज केवल सफलता नहीं, बल्कि मूल्यों को भी सम्मान देता है।बाल पुरस्कार और वैश्विक प्रेरणा विश्व स्तर पर भी कई देश बच्चों को शांति, पर्यावरण संरक्षण और मानवाधिकारों में योगदान के लिए सम्मानित करते हैं। नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाली मलाला यूसुफ़ज़ई इसका प्रमुख उदाहरण हैं। वीर बाल दिवस के संदर्भ में भारत यदि अंतरराष्ट्रीय मंच पर बाल वीरता पुरस्कारों की पहल करता है, तो यह वैश्विक नैतिक नेतृत्व का प्रतीक बन सकता है।संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन बच्चों के जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा पर बल देता है। वीर बाल दिवस इस अंतरराष्ट्रीय ढांचे को ऐतिहासिक गहराई प्रदान करता है।

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साहिबजादों का बलिदान यह दर्शाता है कि जब बच्चों के अधिकारों का हनन होता है, तो यह केवल कानूनी नहीं,बल्कि नैतिक अपराध भी है। इस शहादत को नमन करने के लिए हर वर्ष वीर बाल दिवस के मौके पर बहादुर बच्चों को सम्मानित किया जा जाता हैं।भारत सरकार असाधारण उपलब्धियों के लिए सात श्रेणियों कला और संस्कृति, बहादुरी,नवाचार,विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा, खेल और पर्यावरण में बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (पीएमआरबीपी) प्रदान करती है।

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साथियों बात अगर हम वीर बाल दिवस के इतिहास की करें तो, बताते हैं कि मुगलों ने अचानक आनंदपुर साहिब के किले पर हमला कर दिया। गुरु गोबिंद सिंह जी मुगलों से लड़ना चाहते थे, लेकिन अन्य सिखों ने उन्हें वहां से चलने के लिए कहा। इसके बाद गुरु गोबिंद सिंह के परिवार सहित अन्य सिखों ने आनंदपुर साहिब के किले को छोड़ दिया और वहां से निकल पड़े। जब सभी लोग सरसा नदी को पार कर रहे थे तो पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि पूरा परिवार बिछड़ गया। बिछड़ने के बाद गुरु गोबिंद सिंह व दो बड़े साहिबजादे बाबा अजीत सिंह व बाबा जुझार सिंह चमकौर पहुंच गए। वहीं, माता गुजरी, दोनों छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह व बाबा फतेह सिंह और गुरु साहिब के सेवक रहे गंगू गुरु साहिब व अन्य सिखों से अलग हो गए। इसके बाद गंगू इन सभी को अपने घर ले गया लेकिन उसने सरहिंद के नवाज वजीर खान को जानकारी दे दी जिसके बाद वजीर खान माता गुजरी और दोनों छोटे साहिबजादों को कैद कर लिया। वजीर खान ने दोनों छोटे साहिबजादों को अपनी कचहरी में बुलाया और डरा-धमकाकर उन्हें धर्म परिवर्तन करने को कहा लेकिन दोनों साहिबजादों ने जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारे लगाते हुए धर्म परिवर्तन करने से मना कर दिया। वजीर खान ने फिर धमकी देते हुए कहा कि कल तक या तो धर्म परिवर्तन करो या मरने के लिए तैयार रहो। 27 दिसंबर को अगले दिन ठंडे बुर्ज में कैद माता गुजरी ने दोनों साहिबजादों को बेहद प्यार से तैयार करके दोबारा से वजीर खान की कचहरी में भेजा। यहां फिर वजीर खान ने उन्हें धर्म परिवर्तन करने को कहा लेकिन छोटे साहिबजादों ने मना कर दिया और फिर से जयकारे लगाने लगे। यह सुन वजीर खान तिलमिला उठा और दोनों साहिबजादों को जिंदा दीवार में चिनवाने का हुक्म दे दिया और साहिबजादों को शहीद कर दिया। यह खबर जैसे ही माता दादी माता गुजरी के पास पहुंची, उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि गुरु गोविंद सिंह जी के छोटे साहबजादों के साहस को श्रद्धांजलि-वीर बाल दिवस 26 दिसंबर 2025 पर विशेष,छोटे साहबजादों का स्मरण आते ही सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है व सिर श्रद्धा से झुक जाता है।साहबजादों बाबा जोरावर सिंह व फतेहसिंह के सम्मान में बाल दिवस के साथ बाल पुरस्कार 26 जनवरी के स्थान पर 26 दिसंबर को देना सराहनीय निर्णय है।

-संकलनकर्ता लेखक – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं,क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी)

भारतीय राजनीति के अजातशत्रु भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी

नवनीत मिश्र

भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ ऐसे नेता आए हैं, जिनका व्यक्तित्व और विचारधारा केवल उनके समय तक सीमित नहीं रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बन गए। पंडित अटल बिहारी वाजपेयी उन्हीं नेताओं में से एक थे। उन्हें भारतीय राजनीति का अजातशत्रु कहा जाता है, और यह उपाधि उन्होंने न केवल अपनी राजनीतिक दूरदर्शिता से अर्जित की, बल्कि अपने सौम्य स्वभाव, सहिष्णुता और राष्ट्रप्रेम से भी बनाई।
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ। वे राजनीति में सक्रिय होने से पहले पत्रकारिता और कविता के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ चुके थे। उनके लेख और कविताएँ भारतीय समाज, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का प्रतिबिंब थीं। यह विशेषता उन्हें सामान्य राजनीतिक नेताओं से अलग करती थी।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत में ही वाजपेयी जी ने साफ संदेश दे दिया कि उनका लक्ष्य केवल सत्ता नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा और जनहित है। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों और विचारधाराओं के नेताओं के साथ सहयोग करना सीखा। उनके सौम्य व्यवहार, मधुर वक्तृत्व और शांति प्रिय स्वभाव ने उन्हें विपक्ष और सहयोगी दोनों के बीच सम्मान दिलाया। यही कारण है कि उन्हें “अजातशत्रु” कहा गया कोई भी उनसे खुलकर विरोध कर सकता था, लेकिन कोई भी उनके प्रति कटुता नहीं रखता था।
प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने भारतीय राजनीति और समाज पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने आर्थिक उदारीकरण, भारतीय मिसाइल कार्यक्रम और कूटनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान और सम्मान को मजबूती दी। वे राष्ट्रहित में कठिन निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटे, लेकिन हमेशा नैतिकता और लोकतंत्र के मूल्यों को बनाए रखा।
अटल जी का व्यक्तित्व केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। वे एक प्रखर विचारक, कवि और समाज सुधारक भी थे। उनके भाषणों और लेखों में राष्ट्रभक्ति, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों की झलक मिलती है। यही कारण है कि उनके व्यक्तित्व को राजनीति में अजातशत्रु के रूप में याद किया जाता है। जो न केवल विरोधियों के बीच सम्मान पाता था, बल्कि जनता के दिलों में हमेशा अमिट स्थान बनाए रखता है।
अंततः अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन एक संदेश है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा और मानवता का कार्य है। उनका आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनका व्यक्तित्व इस बात का प्रतीक है कि नीति, सहिष्णुता और देशभक्ति का संगम किसी भी नेता को इतिहास में अमर बना सकता है।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक सम्पन्न

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक में जनपद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित समस्त योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान संस्थागत प्रसव, आशा कार्यकत्रियों के भुगतान, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थिति, विभिन्न प्रकार के टीकाकरण कार्यक्रम, स्वास्थ्य विभाग से सम्बन्धित निर्माण कार्य, नसबंदी, अंतरा इंजेक्शन, एईएस/जेई सहित अन्य सभी स्वास्थ्य योजनाओं में हुई प्रगति की जानकारी लेते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने बिना किसी गंभीर बीमारी के मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर किए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि बिना ठोस एवं उचित कारणों के मरीजों को रेफर करने की स्थिति में संबंधित चिकित्सकों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा उनके विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।डेथ ऑडिट एवं पोस्टमार्टम से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा निजी स्वार्थवश कोई आपत्ति दर्ज कराई जाती है अथवा रिपोर्ट को लेकर असंतोष व्यक्त किया जाता है, तो ऐसे मामलों में एक समिति का गठन कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि गठित समिति में एक निजी चिकित्सक को भी सम्मिलित किया जाए, जिससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी एवं विश्वसनीय हो सके।जिलाधिकारी ने जिला अस्पताल में सीएसआर मद से कराए जाने वाले विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए ओपीडी सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं को विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये के बजट में कार्यों को शीघ्र प्रारंभ कराया जाए, जिससे जिला अस्पताल आधुनिक स्वरूप में विकसित हो सके। साथ ही उन्होंने अस्पताल में मरीजों की बढ़ती भीड़ को सुव्यवस्थित ढंग से प्रबंधित करने तथा सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्क एवं सक्रिय रहने के निर्देश दिए।इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी ने निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों के संबंध में पृथक से बैठक आयोजित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी निर्धारित प्रणाली के अंतर्गत अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी मुस्तैदी, जिम्मेदारी एवं जागरूकता के साथ करें तथा किसी भी प्रकार की बहानेबाजी से बचते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित करें। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने तथा जनसामान्य को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी बंदिता श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्साधिकारी चन्द्र प्रकाश, जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक प्रियदर्शी , जिला कडीक्रम अधिकारी सहित एडिशनल सीएमओ एवं समस्त प्रभारी चिकित्साधिकारी आदि उपस्थित रहे।