Saturday, March 14, 2026
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औरैया में 14 अप्रैल तक धारा 163 लागू, बिना अनुमति रैली-जुलूस पर रोक

औरैया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। यह आदेश 14 अप्रैल 2026 तक पूरे जनपद में प्रभावी रहेगा।

जिला मजिस्ट्रेट डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में सीबीएसई व यूपी बोर्ड की परीक्षाएं संचालित हैं, साथ ही होली, ईद-उल-फितर, चैत्र नवरात्रि और राम नवमी जैसे प्रमुख पर्व भी आगामी दिनों में हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए एहतियातन यह कदम उठाया गया है।

क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित?

धारा 163 के तहत निम्न प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे—

• बिना संबंधित उपजिलाधिकारी (औरैया/बिधूना/अजीतमल) की अनुमति के कोई रैली, जुलूस या आमसभा नहीं होगी
• केवल शव यात्राएं प्रतिबंध से मुक्त
• सार्वजनिक स्थानों पर विधि-विरुद्ध एकत्रीकरण वर्जित
• सड़क जाम या यातायात बाधित करना प्रतिबंधित
• बिना अनुमति ड्रोन कैमरे का प्रयोग निषिद्ध (सुरक्षा एजेंसियों को छूट)
• लाउडस्पीकर/ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग पूर्व अनुमति के बिना नहीं
• बिना अनुमति पोस्टर, होर्डिंग, हैंडबिल या प्रचार-प्रसार नहीं

आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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परीक्षा और पर्वों को लेकर विशेष सतर्कता

प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। किसी भी प्रकार से परीक्षा की सुचिता प्रभावित करने पर सख्त कार्रवाई होगी।
होलिका दहन स्थलों की पूर्व जांच, रेलवे ट्रैक के आसपास निगरानी, तथा नए मार्ग से जुलूस निकालने पर रोक भी लागू रहेगी।

सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील

धार्मिक स्थलों पर शस्त्र लेकर प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। भड़काऊ भाषण, सांप्रदायिक तनाव फैलाने या अवैध सामग्री के संग्रह पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
जिला प्रशासन ने जनपदवासियों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।

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बलिया में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, अनाधिकृत अस्पताल सील

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के बैरिया कस्बे में संचालित एक अनाधिकृत निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला की मौत से हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल को सील कर दिया। घटना के बाद संचालक, चिकित्सक और स्टाफ मौके से फरार हो गए।

क्या है पूरा मामला?

दोकटी थाना क्षेत्र के रामपुर बाजिदपुर गांव निवासी मिथिलेश गोड़ की पत्नी ममता देवी अपने प्रथम प्रसव के लिए मायके सोनबरसा आई थीं। रविवार शाम आशा कार्यकर्ता की सलाह पर उन्हें बैरिया कस्बे के शकील कटरा स्थित ओम साई अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सोमवार सुबह अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. सुमन द्वारा ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया। नवजात शिशु स्वस्थ बताया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अधिक रक्तस्राव होने लगा और हालत बिगड़ती गई।

रेफर न करने का आरोप

ममता की मां चंद्रावती देवी के अनुसार, उन्होंने मरीज को बड़े या सरकारी अस्पताल में रेफर करने की मांग की, लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन और खून की समुचित व्यवस्था न होने के बावजूद रेफर नहीं किया गया। इस दौरान परिजनों से करीब 50 हजार रुपये भी जमा कराए गए। देर रात ममता देवी की मौत हो गई।

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अस्पताल सील, दस्तावेज जब्त

घटना की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक बैरिया आरपी सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति नियंत्रित की। उपजिलाधिकारी आलोक प्रताप सिंह एवं सीएचसी सोनबरसा के चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच में अस्पताल के अनाधिकृत रूप से संचालित होने की पुष्टि की।

प्रशासन के निर्देश पर अस्पताल को सील कर लेटर पैड, स्कैनर सहित अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए गए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और क्षेत्र में अवैध अस्पतालों के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।

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ठूठीबारी थाना से इंडो-नेपाल सीमा तक एडीजी का औचक निरीक्षण

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से अपर पुलिस महानिदेशक मुथा अशोक जैन ने मंगलवार को ठूठीबारी थाना और इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए निरीक्षण से पुलिस महकमे में हलचल रही और अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद तेज कर दी।

थाना परिसर और अभिलेखों की जांच

एडीजी ने थाना परिसर की साफ-सफाई, महिला हेल्प डेस्क, मिशन शक्ति केंद्र और कार्यालय व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। अभिलेखों के रख-रखाव की स्थिति की समीक्षा करते हुए लंबित विवेचनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

उन्होंने जनसुनवाई की गुणवत्ता सुधारने और फरियादियों के साथ संवेदनशील व्यवहार बनाए रखने पर भी जोर दिया।

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इंडो-नेपाल सीमा पर सुरक्षा समीक्षा

थाना निरीक्षण के बाद एडीजी ने इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र का दौरा कर सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। सीमा पर तैनात पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों से संवाद करते हुए सतर्कता और समन्वय बढ़ाने पर बल दिया।

अवैध तस्करी, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की आवाजाही और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए संयुक्त गश्त बढ़ाने तथा नियमित चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

सख्त संदेश

एडीजी ने स्पष्ट कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील होते हैं, इसलिए ड्यूटी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिसकर्मियों को अनुशासन, निष्ठा और सतर्कता के साथ कर्तव्य पालन करने की हिदायत दी गई।
निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना, क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी ठूठीबारी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का मानना है कि इस औचक निरीक्षण से सीमा क्षेत्र की सुरक्षा और मजबूत होगी।

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घोसी में होली को देखते हुए मिठाई की दुकानों पर की गई छापेमारी

टीम ने 45 हजार रुपए मूल्य के 180 किलो खोया सीज

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उ०प्र०, लखनऊ तथा जिलाधिकारी के निर्देशानुसार आगामी होली पर्व के अवसर पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम द्वारा मिठाईयों एवं अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के विरूद्ध चलाये जा रहे विशेष अभियान के क्रम में, जनपद के तहसील घोसी क्षेत्र के विभिन्न स्थलों पर मिलावट के संदेह में औचक निरीक्षण कर, छापेमारी करते हुये विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 03 नमूनें संग्रहित करते हुये कुल 180 किलोग्राम, मूल्य रू0 45,000 का खोया सीज किया गया। संग्रहित किये गये नमूनों का विवरण इस प्रकार है- थानीदास स्थित मेसर्स बजरंग मिष्ठान भण्डार, से खोया का नमूना। थानीदास स्थित मेसर्स वैष्णो मिष्ठान भण्डार से खोया का नमूना संग्रहित कर 15 किलोग्राम मिलावटी खोया को मौके पर विनष्ट कराया गया। थानीदास मोड पर प्राईवेट बस को रोककर, गाजीपुर से बलिया ले जा रहे खोया व्यापारी चन्द्रजीत पुत्र अयोध्या, निवासी-आरी पहाड़पुर, थाना-करण्डा, जनपद-गाजीपुर से खोया का नमूना संग्रहित कर 180 किलोग्राम खोया, मूल्य रू० 45,000 की सीज किया गया। संग्रहित किये गये उक्त नमूनों को वास्ते जांच प्रयोगशाला को प्रेषित कर दिया गया है। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरान्त मिलावट पाये जाने पर सम्बन्धित खाद्य कारोबारकर्ताओं के विरुद्ध, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अन्तर्गत सुसंगत धाराओं में विधिक कार्यवाही की जायेगी। जांच दल में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, देवेन्द्र सिंह यादव, खाद्य सुरक्षा अधिकारी विजय प्रकाश, अजीत कुमार त्रिपाठी तथा ओमप्रकाश यादव उपस्थित रहे।

राजनीति में कुछ बड़े चेहरे के पीछे छोटी-छोटी ओछी बातें होती हैं

चंद्रकांत सी पूजारी, गुजरात

राजनीति में कुछ बड़े चेहरे ऐसे होते हैं जिनकी चमक दूर से बहुत आकर्षक दिखाई देती है, पर जब उन्हें पास से देखा जाए तो उनके पीछे कई छोटी-छोटी, ओछी और स्वार्थपूर्ण बातें छिपी मिलती हैं। यही राजनीति का एक कटु यथार्थ है—जहाँ व्यक्तित्व का आकार बड़ा होता जाता है, पर कई बार चरित्र का कद उतना ही छोटा रह जाता है।

बाहरी चमक और भीतर की सच्चाई

राजनीति में छवि (इमेज) बहुत मायने रखती है। मंच पर दिया गया एक भाषण, जनता के बीच दी गई मुस्कान और मीडिया में दिखाया गया आदर्शवादी रूप—ये सब मिलकर एक “बड़ा चेहरा” तैयार करते हैं। लेकिन अक्सर यह चेहरा एक आवरण होता है, जिसके पीछे निजी स्वार्थ, अहंकार, पद-लालसा और छोटे स्तर की मानसिकता छिपी रहती है।
अर्थात् जो व्यक्ति जनता के सामने राष्ट्रहित की बड़ी-बड़ी बातें करता है, वही बंद कमरों में व्यक्तिगत लाभ की छोटी-छोटी गणनाएँ करता मिलता है।

उदाहरण 1: चुनाव और वादे

मान लीजिए एक नेता चुनाव के समय गाँव-गाँव जाकर लोगों की समस्याएँ सुनता है। वह मंच से कहता है—“मैं जनता का सेवक हूँ।” लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही नेता सबसे पहले अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुँचाने, अपने व्यवसाय को बढ़ाने या अपने पद की शक्ति का प्रदर्शन करने में लग जाता है।
यहाँ बड़ा चेहरा “जनसेवा” का है, पर पीछे छिपी बात “निजी स्वार्थ” की है। जनता के लिए किए गए वादे केवल भाषण तक सीमित रह जाते हैं।

उदाहरण 2: नैतिकता की बातें, व्यवहार में असंगति

कई राजनेता ईमानदारी, सादगी और नैतिकता की बातें करते हैं। वे दूसरों को आदर्श जीवन जीने का उपदेश देते हैं। लेकिन यदि उनके निजी जीवन या निर्णयों को देखा जाए, तो वही व्यक्ति छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए नियम तोड़ने में संकोच नहीं करता।
यह वैसा ही है जैसे कोई शिक्षक विद्यार्थियों को अनुशासन सिखाए, पर स्वयं नियमों का पालन न करे। यहाँ बड़ा चेहरा “नैतिकता का प्रतीक” है, पर भीतर छिपी बात “व्यवहारिक असंगति” की है।

उदाहरण 3: जनता की भावनाओं का उपयोग

कई बार बड़े चेहरे जनता की भावनाओं को भड़काकर अपना प्रभाव बनाए रखते हैं। वे लोगों को जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के नाम पर बाँटकर समर्थन जुटाते हैं। बाहरी रूप में वे समाज की रक्षा करने वाले महान नेता दिखाई देते हैं, लेकिन भीतर उनका उद्देश्य केवल सत्ता बनाए रखना होता है।
यह वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति आग बुझाने का दावा करे, पर भीतर ही भीतर उसी आग को हवा देता रहे।

उदाहरण 4: विकास के नाम पर दिखावा

कई बार कोई बड़ा चेहरा “विकास” के नाम पर भव्य योजनाओं की घोषणा करता है। बड़े-बड़े पोस्टर, विज्ञापन और उद्घाटन समारोह होते हैं। लेकिन वास्तविकता यह होती है कि योजनाएँ कागज़ों तक सीमित रह जाती हैं या उनमें पारदर्शिता का अभाव होता है।
जनता को विकास का सपना दिखाया जाता है, पर ज़मीनी स्तर पर लाभ सीमित लोगों तक पहुँचता है। यहाँ बड़ा चेहरा “विकास पुरुष” का होता है, पर पीछे छिपी बात “दिखावे और लाभ की राजनीति” की होती है।

ऐसा क्यों होता है?

इस प्रवृत्ति के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं—

  • सत्ता का आकर्षण – शक्ति और प्रतिष्ठा व्यक्ति को बदल देती है।
  • छवि-निर्माण की राजनीति – वास्तविकता से अधिक दिखावे पर जोर।
  • जवाबदेही की कमी – जब जवाबदेही कम होती है, तो छोटे स्वार्थ बढ़ते हैं।
  • जनता की भावनात्मकता – लोग व्यक्तित्व से प्रभावित हो जाते हैं, चरित्र को परखना भूल जाते हैं।

समाज पर प्रभाव

जब बड़े चेहरे के पीछे छोटी सोच छिपी होती है, तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। जनता का विश्वास टूटता है। आदर्शों का महत्व कम हो जाता है। राजनीति सेवा नहीं, अवसरवाद का माध्यम बन जाती है।
धीरे-धीरे लोग यह मानने लगते हैं कि राजनीति में ईमानदारी संभव ही नहीं—और यही लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

समाधान क्या हो सकता है?

इस स्थिति से बचने के लिए समाज और नागरिकों को सजग होना होगा।

  • व्यक्तित्व नहीं, कार्यों का मूल्यांकन करें।
  • प्रश्न पूछने की आदत विकसित करें।
  • नैतिकता को केवल भाषण में नहीं, व्यवहार में देखें।

जब जनता सजग होती है, तो बड़े चेहरे भी अपने पीछे की छोटी सोच छिपा नहीं पाते।

अंत में
राजनीति में बड़े चेहरे होना बुरा नहीं है—नेतृत्व के लिए प्रभाव और व्यक्तित्व आवश्यक है। समस्या तब पैदा होती है जब बाहरी महानता के पीछे छोटी, ओछी और स्वार्थपूर्ण मानसिकता छिपी हो।
सच्चा नेता वह नहीं जो बड़ा दिखे, बल्कि वह है जिसका चरित्र भी उसके व्यक्तित्व जितना ही विशाल हो।

इतिहास गवाह है—चमकदार चेहरे समय के साथ फीके पड़ जाते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपी सच्चाई अंततः सामने आ ही जाती है।

आज के समय में दिखावा बहुत बढ़ गया है। लोग अपने व्यक्तित्व से अधिक अपनी छवि बनाने में लगे रहते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा, बाहरी सफलता और प्रशंसा की चाह में कई बार वे मानवीय मूल्यों को भूल जाते हैं। परिणाम यह होता है कि बड़े नाम वाले लोग भी छोटी मानसिकता के शिकार हो जाते हैं।

सच्ची महानता चेहरे की चमक या नाम की ऊँचाई में नहीं, बल्कि विचारों की विशालता और व्यवहार की विनम्रता में होती है। इसलिए हमें हमेशा व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से करनी चाहिए, न कि उसकी प्रसिद्धि से।

याद रखिए
बड़ा चेहरा होना आसान है, बड़ा चरित्र होना कठिन।

परंपरागत मुख्यमंत्री के जुलूस को लेकर प्रशासन अलर्ट

घंटाघर क्षेत्र का डीआईजी एस. चनप्पा, डीएम दीपक मीणा व एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने किया निरीक्षण; चलते-चलते व्यापारियों से की बातचीत

रमजान को लेकर विशेष सुरक्षा के निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
होली के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घंटाघर क्षेत्र में परंपरागत रूप से खेले जाने वाले फूलों की होली शोभायात्रा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह सतर्क है। शोभायात्रा में सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए डीआईजी गोरखपुर परिक्षेत्र एस. चनप्पा, जिलाधिकारी दीपक मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने घंटाघर एवं आसपास के इलाकों का संयुक्त निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल, जुलूस मार्ग, प्रमुख चौराहों, छतों की स्थिति, बैरिकेडिंग, पार्किंग व्यवस्था और आपातकालीन निकास मार्गों का गहन अवलोकन किया। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रहे और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
डीआईजी एस. चनप्पा ने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा। पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, पीएसी एवं सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। संवेदनशील बिंदुओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी तथा सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने नगर निगम एवं संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि घंटाघर क्षेत्र में साफ-सफाई, सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल और जुलूस मार्ग पर किसी प्रकार का अतिक्रमण न रहे तथा भीड़ प्रबंधन के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने स्पष्ट किया कि जुलूस मार्गों पर प्रभावी बैरिकेडिंग की जाए और छतों पर अनधिकृत रूप से लोगों के चढ़ने पर रोक लगाई जाए। कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी कुछ समय तक पुलिस बल तैनात रहेगा ताकि किसी भी प्रकार की हुड़दंग या अप्रिय घटना की संभावना न रहे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी चलते-चलते स्थानीय व्यापारियों से भी बातचीत करते रहे। व्यापारियों से सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को लेकर सुझाव लिए गए। अधिकारियों ने उनसे अपील की कि वे प्रशासन का सहयोग करें, दुकानों के सामने अनावश्यक सामान न रखें और अपने प्रतिष्ठानों के सीसीटीवी कैमरे सक्रिय रखें। व्यापारियों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और बेहतर व्यवस्था के लिए धन्यवाद भी दिया।
इस वर्ष होली का पर्व रमजान के पवित्र महीने में पड़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। धार्मिक स्थलों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
निरीक्षण के दौरान एसपी सिटी अभिनव त्यागी, सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव, अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा, क्षेत्राधिकारी कोतवाली ओमकार दत्त तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे होली का त्योहार प्रेम, सौहार्द और परंपरागत उत्साह के साथ मनाएं तथा किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन की प्राथमिकता है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम सहित संपूर्ण होली पर्व शांतिपूर्ण, सुरक्षित और भाईचारे के माहौल में संपन्न हो।

बेटे की 6 मार्च की शादी पर संकट, एक लाख नकद और आभूषण ले जाने का आरोप भांजे संग फरार हुई महिला

अलीगढ़ के बीसनपुर गांव की घटना से मचा हड़कंप


अलीगढ़ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के थाना पालीमुकीमपुर क्षेत्र के गांव बीसनपुर में रिश्तों को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां तीन बच्चों की मां कथित रूप से अपने ही भांजे के साथ घर छोड़कर चली गई। इस मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
पति का आरोप है कि उसकी पत्नी घर से लगभग एक लाख रुपये नकद और कीमती आभूषण लेकर गई है। इस घटना के बाद परिवार आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि 6 मार्च को उनके बड़े बेटे की शादी तय है, जिस पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
25 जनवरी से लापता, बाद में खुला मामला
पीड़ित पति के अनुसार, 25 जनवरी को उसकी पत्नी अचानक घर से गायब हो गई। शुरुआती तौर पर परिवार को लगा कि वह किसी रिश्तेदार या परिचित के यहां गई होगी। लेकिन जब कई दिनों तक कोई जानकारी नहीं मिली, तो शक गहराया।
बाद में परिजनों को जानकारी मिली कि महिला अपने ही भांजे के साथ चली गई है। इस खुलासे के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। गांव में भी इस घटना की चर्चा तेज हो गई।
“अलीगढ़ महिला भांजे संग फरार” की यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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एक लाख नकद और आभूषण ले जाने का आरोप
पति का कहना है कि घर में शादी की तैयारियों के लिए रखी गई लगभग एक लाख रुपये की नकदी और कुछ कीमती आभूषण भी महिला अपने साथ ले गई है।
परिवार के मुताबिक, शादी की तैयारियां कई महीनों से चल रही थीं। रिश्तेदारों को निमंत्रण भेजे जा चुके थे। घर में सजावट और अन्य व्यवस्थाओं की योजना बन चुकी थी। लेकिन इस घटना के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया है।
अलीगढ़ महिला भांजे संग फरार मामले ने न केवल परिवार की खुशियों को झटका दिया है, बल्कि आर्थिक संकट भी खड़ा कर दिया है।
6 मार्च की शादी पर संकट
महिला का बड़ा बेटा शादी योग्य है और उसकी शादी 6 मार्च को तय है। परिवार के अनुसार, इस समय मां की गैरमौजूदगी शादी की तैयारियों पर सीधा असर डाल रही है।
पति ने पुलिस से गुहार लगाते हुए कहा है कि किसी भी तरह उसकी पत्नी को खोजकर वापस लाया जाए, ताकि बेटे की शादी बिना बाधा के संपन्न हो सके।
गांव के लोग भी इस बात से हैरान हैं कि जिस घर में शादी की खुशियां थीं, वहां अचानक ऐसा संकट आ गया।
ग्रामीणों में चर्चा, रिश्तों पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि महिला तीन बच्चों की मां है। बड़ा बेटा शादी के कगार पर है, जबकि दो बच्चे अभी छोटे हैं।
कुछ ग्रामीणों का दावा है कि पिछले कुछ समय से महिला और उसके भांजे के बीच बातचीत बढ़ी थी। हालांकि, परिवार को अंदेशा नहीं था कि मामला इतना आगे बढ़ जाएगा।
“अलीगढ़ महिला भांजे संग फरार” की घटना को लोग रिश्तों की मर्यादा से जोड़कर देख रहे हैं। गांव में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

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पति ने दर्ज कराई एफआईआर
पति ने थाना पालीमुकीमपुर में पत्नी और उसके भांजे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
थाना पालीमुकीमपुर पुलिस के अनुसार, संभावित ठिकानों पर तलाश की जा रही है। मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों की खोजबीन की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि जल्द ही महिला और युवक को बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।
परिवार पर मानसिक और सामाजिक दबाव
पति का कहना है कि पत्नी के जाने के बाद घर की स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई है। बच्चों की देखभाल, शादी की तैयारियां और समाज में उठ रहे सवाल — सब कुछ उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहा है।
परिवार को समाज में जवाब देना पड़ रहा है। रिश्तेदारों के सवालों और गांव में हो रही चर्चाओं ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
अलीगढ़ महिला भांजे संग फरार मामला अब केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। तकनीकी जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य माध्यमों से लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महिला बालिग है और अपनी मर्जी से गई है, तो कानूनी प्रक्रिया अलग होगी। वहीं, यदि आर्थिक लेन-देन या धोखाधड़ी के प्रमाण मिलते हैं, तो अलग धाराएं लग सकती हैं। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता दोनों की सुरक्षित बरामदगी है।
अलीगढ़ के बीसनपुर गांव की यह घटना रिश्तों, सामाजिक मर्यादाओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर कई सवाल खड़े करती है। एक तरफ 6 मार्च की शादी की तैयारियां अधर में लटकी हैं, तो दूसरी ओर तीन बच्चों का भविष्य चिंता का विषय बना हुआ है।
अलीगढ़ महिला भांजे संग फरार मामला यह दिखाता है कि पारिवारिक विवाद जब सार्वजनिक होते हैं तो उनका असर केवल एक घर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज में चर्चा का कारण बनता है।
पुलिस जांच जारी है और परिवार को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी।

अग्निकांड की भयावह कहानी: बेटियों की लाश से लिपटकर रोता रहा पिता

मेरठ अग्निकांड: लिसाड़ी गेट के किदवई नगर में 6 की दर्दनाक मौत, बाले मियां कब्रिस्तान में नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अग्निकांड ने पूरे शहर को गहरे सदमे में डाल दिया है। Meerut के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के किदवई नगर में हुए भीषण आग हादसे में पांच मासूम बच्चों और एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। मंगलवार को जब शवों को बाले मियां कब्रिस्तान ले जाया गया तो हर आंख नम थी और हर चेहरा गमगीन।
एक साथ उठे चार जनाजे, गूंज उठा कब्रिस्तान
मंगलवार दोपहर बाले मियां कब्रिस्तान में जब एक साथ चार जनाजे पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों की सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही थीं। जनाजे की नमाज के बाद सभी शवों को नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले 6 माह की दो जुड़वां मासूम बहनों को परिजनों ने सोमवार देर रात ही दफना दिया था।
मेरठ अग्निकांड की खबर जैसे ही फैली, किदवई नगर और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम विदाई के दौरान भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। हर कोई इस असहनीय दुख में परिवार के साथ खड़ा नजर आया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, लिसाड़ी गेट के किदवई नगर स्थित कपड़ा कारोबारी इकबाल के मकान में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि घर के अंदर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार मामले की विस्तृत जांच जारी है।
मेरठ अग्निकांड ने एक बार फिर घनी आबादी वाले इलाकों में फायर सेफ्टी और जर्जर बिजली तारों की समस्या को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में बिजली के तार काफी पुराने हैं और कई बार शिकायत के बावजूद सुधार नहीं हुआ।
आसिम का उजड़ गया पूरा संसार
इस दर्दनाक हादसे में इकबाल के बेटे आसिम का पूरा परिवार खत्म हो गया। उनकी पत्नी, एक बेटा और दो जुड़वां बेटियां आग की चपेट में आ गईं। अस्पताल पहुंचे आसिम बदहवास हालत में बच्चों और पत्नी के बारे में पूछते रहे।
जब उन्हें पत्नी और बच्चों की मौत की सूचना मिली तो वह टूट गए। दोनों जुड़वां बेटियों की लाश से लिपटकर आसिम फूट-फूटकर रोते रहे। यह दृश्य देखकर मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।
मेरठ अग्निकांड की यह तस्वीर शहर की यादों में लंबे समय तक दर्ज रहेगी।
इलाके में पसरा मातम और सन्नाटा
किदवई नगर की गलियां, जहां कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, अब सन्नाटे में डूबी हैं। हर घर में बस इसी हादसे की चर्चा है।
घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं और शांति व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
प्रशासन की कार्रवाई और जांच
जिलाधिकारी ने बताया कि आग लगने के कारणों की गहन जांच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि तकनीकी पहलुओं की जांच की जा सके।
यदि शॉर्ट सर्किट की पुष्टि होती है तो यह सवाल उठेगा कि क्या समय रहते बिजली व्यवस्था की मरम्मत की गई थी या नहीं।
मेरठ अग्निकांड के बाद प्रशासन ने शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के संकेत दिए हैं।
फायर सेफ्टी पर उठे सवाल
यह हादसा सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। विशेषज्ञों के अनुसार:
पुराने और जर्जर बिजली तार बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
घनी बस्तियों में फायर सेफ्टी उपकरणों की भारी कमी है।
संकरी गलियों में दमकल की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पातीं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इलाके में बिजली लाइनों की जांच और सुधार तुरंत किया जाए।
सामाजिक एकजुटता का उदाहरण
मेरठ अग्निकांड के बाद स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। कई सामाजिक संगठनों ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
जनाजे के दौरान जिस तरह लोग एकजुट होकर पहुंचे, वह सामाजिक भाईचारे की मिसाल भी बना।
मेरठ अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि चेतावनी है कि फायर सेफ्टी और बिजली व्यवस्था को लेकर लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
छह जिंदगियों की कीमत पर मिला यह सबक प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर सोच का विषय है। अब जरूरत है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

लखनऊ विश्वविद्यालय में धार्मिक गतिविधियों पर प्रशासन का सख्त रुख क्यों?

लखनऊ विश्वविद्यालय लाल बारादरी विवाद: 13 छात्रों पर 50-50 हजार का शांति बॉन्ड, एक साल तक कानून व्यवस्था की गारंटी का आदेश

लखनऊ विश्वविद्यालय लाल बारादरी विवाद: क्या है पूरा मामला?


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)लखनऊ विश्वविद्यालय में लखनऊ विश्वविद्यालय लाल बारादरी विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। ऐतिहासिक लाल बारादरी भवन के बाहर नमाज़ अदा करने और इफ्तार आयोजित करने के मामले में 13 छात्रों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 50,000 रुपये का निजी मुचलका और 50,000 रुपये के दो जमानतदार पेश करने का आदेश दिया है।
आदेश के अनुसार, छात्रों को एक वर्ष तक शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की गारंटी देनी होगी। यह कार्रवाई हसनगंज पुलिस स्टेशन की चालान रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

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क्यों बढ़ा लखनऊ विश्वविद्यालय लाल बारादरी विवाद?
रिपोर्ट के मुताबिक, लाल बारादरी भवन के गेट बंद होने के कारण कुछ मुस्लिम छात्रों ने बाहर नमाज़ पढ़ी। प्रशासन का कहना है कि इससे परिसर में तनाव की स्थिति बनी और भविष्य में शांति भंग होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसी आधार पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सभी 13 छात्रों को शांति बॉन्ड भरने का निर्देश दिया।
छात्र शुभम खरवार ने कहा कि लाल बारादरी के गेट बंद किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं छात्र अहमद रज़ा ने आरोप लगाया कि नमाज़ और इफ्तार को शांति भंग का कारण बताकर नोटिस जारी किया गया, जबकि छात्रों ने कोई आपत्तिजनक नारेबाजी नहीं की।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ बाहरी तत्वों ने धार्मिक नारे लगाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
प्रशासन का पक्ष
चालान रिपोर्ट में कहा गया है कि अनधिकृत धार्मिक गतिविधियों से परिसर में तनाव उत्पन्न हुआ। प्रशासन का मानना है कि ऐसी गतिविधियों से भविष्य में सार्वजनिक शांति प्रभावित हो सकती है।
इसलिए लखनऊ विश्वविद्यालय लाल बारादरी विवाद को देखते हुए एहतियातन शांति बॉन्ड की कार्रवाई की गई है।

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छात्रों का पक्ष
छात्रों का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से नमाज़ अदा की और कोई भड़काऊ नारे नहीं लगाए। उनका आरोप है कि शांति भंग का आधार तथ्यात्मक नहीं है।
13 छात्रों—जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं—को नोटिस जारी किया गया है।
आगे क्या?
लखनऊ विश्वविद्यालय लाल बारादरी विवाद अब छात्र-प्रशासन टकराव का रूप लेता दिख रहा है। यदि विरोध प्रदर्शन होता है तो प्रशासनिक सख्ती और बढ़ सकती है।
परिसर में फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय लाल बारादरी विवाद में अब छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। छात्र प्रशासन से गेट खोलने और नोटिस वापस लेने की मांग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि परिसर में किसी भी प्रकार की अनधिकृत धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, छात्रों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है। पुलिस प्रशासन ने कैंपस में निगरानी बढ़ा दी है। यदि आपसी संवाद नहीं हुआ तो यह विवाद और गहराने की आशंका है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावनाएं टटोलने की कोशिश की जा रही है।

बोर्ड परीक्षा में “नकल महायज्ञ” का खुलासा: मिश्रित सीटिंग ध्वस्त, वाइस रिकॉर्डिंग बंद, शिकायतकर्ता ही हटाए गए

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बोर्ड परीक्षा में नकल महायज्ञ का सनसनीखेज खुलासा
कुशीनगर बोर्ड परीक्षा इस समय गंभीर आरोपों के घेरे में है। जिले के कई परीक्षा केन्द्रों पर कथित “नकल महायज्ञ” चलने की चर्चा आम हो गई है। आरोप है कि शासन-प्रशासन की निगरानी के दावों के बावजूद मिश्रित सीटिंग व्यवस्था को दरकिनार कर सुनियोजित तरीके से नकल कराई जा रही है।
सबसे बड़ा खुलासा महर्षि वाल्मीकि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपरैचा केन्द्र से जुड़ा है, जहां के बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक विजय यादव और स्टेटिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने संयुक्त पत्र देकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की।

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194 केन्द्र, 1.08 लाख परीक्षार्थी और पारदर्शिता पर सवाल
18 फरवरी से जनपद में 194 परीक्षा केंद्रों पर बोर्ड परीक्षा संचालित है। वर्ष 2026 में कुल 1,08,159 छात्र पंजीकृत हैं।
हाईस्कूल में 58,282 परीक्षार्थी (29,268 बालक, 29,014 बालिकाएं) और इंटरमीडिएट में 51,361 छात्र (25,920 बालक, 25,441 बालिकाएं व अन्य) शामिल हैं।
इतने बड़े पैमाने पर आयोजित कुशीनगर बोर्ड परीक्षा में यदि पारदर्शिता पर सवाल उठें, तो यह पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।
मिश्रित सीटिंग व्यवस्था की उड़ रहीं धज्जियां
बोर्ड परीक्षा के नियमों के अनुसार परीक्षार्थियों को “मिश्रित सीटिंग” में बैठाना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य किसी एक विद्यालय के छात्रों को समूह में बैठाकर अनुचित लाभ देने से रोकना है।
शिकायत के अनुसार विद्यालय ने अपने छात्रों को अलग कमरों में बैठाया। बाहरी और आंतरिक परीक्षार्थियों को मिलाकर बैठाने की अनिवार्यता का पालन नहीं किया गया।
आरोप है कि इसी ‘अलगाव’ का फायदा उठाकर छात्रों को इमला बोलकर उत्तर लिखवाए गए। यदि यह सही है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि नकल महायज्ञ को संरक्षण देने जैसा है।

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वाइस रिकॉर्डिंग गायब, कैमरे निष्क्रिय
शिकायत पत्र में उल्लेख है कि कई कमरों में वाइस रिकॉर्डिंग की व्यवस्था नहीं थी।
सूत्रों का दावा है कि कुछ कक्षों में सीसीटीवी कैमरे या तो बंद थे या उनकी निगरानी प्रभावी नहीं थी। ऐसे में बोलकर उत्तर लिखवाने की संभावना बढ़ जाती है।
कुशीनगर बोर्ड परीक्षा में यदि तकनीकी निगरानी ही निष्क्रिय हो जाए, तो नकल रोकने के दावे खोखले साबित होते हैं।
शिकायत के बाद कार्रवाई उल्टी दिशा में
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि शिकायत के बाद नकल माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक को ही हटा दिया गया।
जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त का कहना है कि शिकायत की जांच कराई गई है, केन्द्र व्यवस्थापक को नोटिस दिया गया है और बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें बदला गया।

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लेकिन शिक्षा जगत में सवाल उठ रहे हैं—
क्या यह कदम दबाव में उठाया गया?
क्या सच उजागर करने वालों को हटाकर नकल महायज्ञ को बचाया जा रहा है?
अभिभावकों और मेधावी छात्रों में रोष
अभिभावकों का कहना है कि यदि कुशीनगर बोर्ड परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं रहेगी, तो मेहनती छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
मेधावी छात्रों ने आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने कथित रूप से पैसा नहीं दिया, उन्हें सीटिंग प्लान के जरिए नुकसान पहुंचाया गया।
यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

नकल महायज्ञ की जड़ें कितनी गहरी?
क्या संगठित नेटवर्क कर रहा है संचालन?
सूत्रों के अनुसार यह मामला केवल एक केन्द्र तक सीमित नहीं है। कई परीक्षा केन्द्रों पर कैमरा और वाइस रिकॉर्डिंग व्यवस्था को जानबूझकर प्रभावित किए जाने की चर्चा है।
यदि ऐसा है तो यह एक संगठित तंत्र की ओर इशारा करता है, जहां पहले सीटिंग प्लान तैयार होता है, फिर तकनीकी निगरानी कमजोर की जाती है और उसके बाद सुनियोजित तरीके से इमला बोलकर नकल कराई जाती है।

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तकनीकी निगरानी पर उठे सवाल
राज्य स्तर पर दावा किया गया था कि सभी केन्द्रों पर सीसीटीवी और वाइस रिकॉर्डिंग अनिवार्य है।
लेकिन कुशीनगर बोर्ड परीक्षा के इस मामले ने दिखाया कि तकनीकी व्यवस्था होने के बावजूद उसका प्रभावी उपयोग जरूरी है।
यदि कैमरे चालू नहीं हैं या रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं है, तो जांच कैसे होगी?
प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
सीटिंग प्लान में गड़बड़ी करने वाले
तकनीकी निगरानी में लापरवाही बरतने वाले
शिकायत के बाद कार्रवाई में पारदर्शिता न दिखाने वाले
इन सभी स्तरों पर जवाबदेही आवश्यक है।
शिक्षा व्यवस्था की साख दांव पर
नकल महायज्ञ जैसे आरोप केवल एक परीक्षा की साख को नहीं बल्कि पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
यदि मेधावी छात्र हतोत्साहित होंगे, तो भविष्य में ईमानदार प्रयासों का महत्व घटेगा।
आगे क्या?
अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।
क्या उच्चस्तरीय जांच होगी?
क्या दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी?
क्या भविष्य में मिश्रित सीटिंग और वाइस रिकॉर्डिंग व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा?

CTET पास उम्मीदवारों के लिए सरकारी नौकरियों की जानकारी

DSSSB Recruitment 2026: 911 पदों पर बंपर वैकेंसी, 24 फरवरी से आवेदन शुरू, ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई


DSSSB Recruitment 2026: दिल्ली सरकार में 911 पदों पर सुनहरा मौका
Delhi Subordinate Services Selection Board (DSSSB) ने DSSSB Recruitment 2026 के तहत 911 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में इंजीनियर, क्लर्क, असिस्टेंट, लीगल और टीचिंग पदों के लिए की जा रही है।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 फरवरी 2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट dsssb.delhi.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
DSSSB Recruitment 2026 उन अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अवसर है जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और दिल्ली में स्थायी पद पाना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण तिथियां
आवेदन शुरू: 24 फरवरी 2026
आवेदन की अंतिम तिथि: 25 मार्च 2026
फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 25 मार्च 2026
परीक्षा तिथि: बाद में घोषित की जाएगी
कुल पदों का विवरण – 911 वैकेंसी
DSSSB Recruitment 2026 के तहत विभिन्न कैटेगरी में पद निकाले गए हैं:

असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO)
किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन
कंप्यूटर की बेसिक नॉलेज आवश्यक

TGT (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक)
ग्रेजुएशन + BEd
CTET (Paper 2) अनिवार्य

असिस्टेंट टीचर (प्राइमरी)
12वीं (50% अंकों के साथ)
DElEd/BElEd डिप्लोमा
CTET (Paper 1) पास

जूनियर इंजीनियर (JE)
सिविल या इलेक्ट्रिकल में डिप्लोमा या डिग्री

LDC / जूनियर असिस्टेंट
12वीं पास
हिंदी या अंग्रेजी में टाइपिंग स्पीड
आयु सीमा
DSSSB Recruitment 2026 में अधिकतर पदों के लिए आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी।
सैलरी और पे लेवल
चयनित उम्मीदवारों को पे लेवल-6 के तहत वेतन मिलेगा।
सैलरी के साथ महंगाई भत्ता, HRA और अन्य सरकारी भत्तों का लाभ भी दिया जाएगा।
चयन प्रक्रिया
DSSSB Recruitment 2026 में चयन मुख्य रूप से लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।
कुछ पदों के लिए स्किल टेस्ट या टाइपिंग टेस्ट भी हो सकता है।
परीक्षा में सामान्य ज्ञान, रीजनिंग, गणित, हिंदी/अंग्रेजी और संबंधित विषयों से प्रश्न पूछे जाएंगे।
DSSSB ASO Recruitment 2026: ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
आधिकारिक वेबसाइट dsssb.delhi.gov.in पर जाएं।
न्यू रजिस्ट्रेशन पर क्लिक करें।
रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड से लॉगिन करें।
आवेदन फॉर्म भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
फॉर्म सबमिट कर प्रिंटआउट सुरक्षित रखें।
आवेदन शुल्क
सामान्य/OBC वर्ग: निर्धारित शुल्क (आधिकारिक नोटिफिकेशन देखें)
SC/ST/PwD/महिला उम्मीदवार: शुल्क में छूट
DSSSB Recruitment 2026 क्यों है खास?
911 पदों पर सीधी भर्ती
दिल्ली सरकार के विभागों में स्थायी नौकरी
अच्छा वेतनमान
पारदर्शी चयन प्रक्रिया
ऑनलाइन आवेदन सुविधा
DSSSB Recruitment 2026 सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा अवसर है। समय रहते आवेदन करें और परीक्षा की तैयारी शुरू करें।

चतरा सिमरिया कसारी जंगल विमान हादसा: तेज बारिश में गिरी एयर एंबुलेंस, 7 की मौत

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)चतरा सिमरिया कसारी जंगल विमान हादसा: बारिश, धमाका और आग की लपटें झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया स्थित कसारी जंगल में सोमवार रात दर्दनाक विमान हादसा हो गया। रात करीब 8:40 बजे तेज बारिश और हवा के बीच जोरदार धमाका सुनाई दिया। ग्रामीण जब जंगल की ओर दौड़े तो आग की लपटों के बीच एक विमान पूरी तरह ध्वस्त पड़ा था।

यह चतरा सिमरिया कसारी जंगल विमान हादसा उस समय हुआ जब रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस अचानक क्रैश हो गई। मलबे से धुआं उठ रहा था और एक महिला का अधजला शव भी दिखाई दिया। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी।
रांची से दिल्ली जा रही थी एयर एंबुलेंस
पुलिस के अनुसार विमान ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से शाम 7 बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के लगभग आधे घंटे बाद एटीसी से संपर्क टूट गया। आखिरी वायरलेस सिग्नल पलामू-गढ़वा क्षेत्र में शाम 7:30 बजे मिला था।
दुर्घटनाग्रस्त विमान रेड बर्ड कंपनी की एयर एंबुलेंस Cessna C90 बताया जा रहा है। इस चतरा सिमरिया कसारी जंगल विमान हादसा में कुल सात लोग सवार थे और सभी की मौत की सूचना है।
मृतकों में कौन-कौन शामिलविमान में सवार लोगों में शामिल थे:
पायलट विवेक विकास भगत,को-पायलट समरजीत सिंह,डॉ. विकास गुप्ता,मरीज संजय कुमार,अर्चना देवी,ध्रुव कुमार,पैरामेडिकल स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा यह चतरा सिमरिया कसारी जंगल विमान हादसा झारखंड के हालिया वर्षों की बड़ी त्रासदियों में गिना जा रहा है।
65% जले मरीज को ले जाया जा रहा था दिल्ली लातेहार जिले के चंदवा निवासी 41 वर्षीय संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। वे आगजनी की घटना में करीब 65% तक झुलस गए थे। 16 फरवरी से रांची के देवकमल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। स्थिति गंभीर होने पर परिजनों ने एयर एंबुलेंस से दिल्ली शिफ्ट करने का फैसला लिया था।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और यह सफर ही अंतिम साबित हुआ।
हादसे की वजह अब भी रहस्य
प्रशासन ने बताया कि चतरा सिमरिया कसारी जंगल विमान हादसा के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रारंभिक आशंका खराब मौसम, तेज बारिश और हवा को लेकर जताई जा रही है।
रात का समय और लगातार बारिश राहत एवं बचाव कार्य में बाधा बनी रही। आसपास के गांवों से करीब एक हजार ग्रामीण मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और जांच जारी है।

चतरा सिमरिया कसारी जंगल विमान हादसा मामले में प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। दुर्घटनास्थल से ब्लैक बॉक्स और तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की टीम भी मौके पर पहुंचने वाली है। प्रारंभिक जांच में खराब मौसम और तकनीकी खराबी दोनों पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है और डीएनए जांच की तैयारी की जा रही है। इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने आम लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की है और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करने को कहा है।

मऊ में DIG का थाना दक्षिण टोला का वार्षिक निरीक्षण

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। DIG आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह ने पुलिस अधीक्षक इलामारन के साथ थाना दक्षिण टोला का वार्षिक निरीक्षण किया। इस दौरान मिशन शक्ति टीम द्वारा गार्द की सलामी दी गई और गार्द का निरीक्षण किया गया।

अभिलेखों और शाखाओं की जांच

निरीक्षण के दौरान थाना कार्यालय के अपराध रजिस्टर, न्यायालय ऑर्डर बुक, भूमि विवाद रजिस्टर, त्यौहार रजिस्टर, जनसुनवाई रजिस्टर, सीसीटीएनएस शाखा, महिला हेल्प डेस्क, मालखाना, बंदीगृह और बैरिक का निरीक्षण किया गया।

डीआईजी ने अभिलेखों को समय से अद्यतन रखने तथा गैंगेस्टर, गुंडा एक्ट और हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

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अपराध नियंत्रण पर जोर

उन्होंने पूर्व में हुई हत्या, डकैती, लूट, नकबजनी एवं महिला संबंधी अपराधों में शामिल अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा।

• अभ्यस्त अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलने

• गैंग पंजीकरण कराने

• गैंगेस्टर एक्ट में कार्रवाई के बाद अर्जित चल-अचल संपत्ति की कुर्की/जब्ती
के निर्देश भी दिए गए।

महिला हेल्प डेस्क और चौकीदारों से संवाद

महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला आरक्षियों से वार्ता कर महिला संबंधी अपराधों के निस्तारण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

साथ ही थाना क्षेत्र के चौकीदारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें गमछा व टार्च भेंट किए। क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों से भी मुलाकात कर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया।
इस दौरान थानाध्यक्ष दक्षिण टोला बसंत लाल सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

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मोहन सेतु निर्माण में कटान से रुकावट, 10 नए पीलर बनाने की तैयारी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद मऊ की मधुबन तहसील के देवारा क्षेत्र में सरयू नदी पर निर्माणाधीन मोहन सेतु नदी कटान की जद में आ गया है। पिछले तीन वर्षों में सरयू की धारा ने इलाके का भूगोल बदल दिया है। वर्तमान में सेतु से लगभग 150 मीटर दूर तक कटान हो चुका है, जिससे पहुंच मार्ग के निर्माण में गंभीर बाधा उत्पन्न हो गई है।

10 नए पायों और गाइड बांध की योजना

सेतु की सुरक्षा और स्थायित्व को देखते हुए अब 10 नए पायों (पीलर) के निर्माण और परवलयाकार गाइड बांध बनाने की तैयारी की जा रही है।
विधान परिषद में एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि नदी के प्रवाह की मॉडल स्टडी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के प्रो. जुल्फिकार अहमद से कराई गई। वर्ष 2025 की वर्षा ऋतु में नदी की धारा सेतु से लगभग 300 मीटर दूर बहती पाई गई।

प्रस्ताव के अनुसार, सेतु की लंबाई वर्तमान 1200.08 मीटर से बढ़ाकर 1512.23 मीटर की जाएगी।

परियोजना की पृष्ठभूमि

• वर्ष 2014 में सेतु निर्माण को स्वीकृति मिली थी।
• 2017 तक कार्य पूर्ण करने की समय सीमा तय थी, लेकिन धनाभाव से कार्य रुक गया।
• वर्ष 2022-23 में राज्य योजना के तहत 161.14 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी गई।
1. 123.87 करोड़ रुपये उप्र सेतु निगम को
2. 37.27 करोड़ रुपये लोक निर्माण विभाग को पहुंच मार्ग हेतु

सेतु निगम ने 1200.08 मीटर लंबाई में 39 पायों का निर्माण पूरा किया था।

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कटान से बढ़ी चुनौती

वर्ष 2023 से 2025 के बीच सरयू नदी ने बरहज घाट के पार परसिया देवार व विशुनपुर देवार के सामने करीब 130 मीटर तक कटान कर दिया। इससे 950 मीटर पहुंच मार्ग निर्माण प्रभावित हुआ है।

अब 10 नए पायों के निर्माण पर करीब 42 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कर मुख्यालय भेजा गया है। वहीं 650 मीटर पहुंच मार्ग और गाइड बांध निर्माण के लिए 157.06 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार हो रहा है।

विधायक ने सीएम से की मुलाकात

मधुबन विधानसभा के विधायक रामबिलास चौहान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर निर्माण कार्य में तेजी लाने का अनुरोध किया है। विधायक के अनुसार मुख्यमंत्री ने शीघ्र कार्य पूर्ण कराने का आश्वासन दिया है।

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि बढ़ती लागत और कटान की चुनौती के बीच मोहन सेतु का निर्माण कार्य कब तक पूरा हो पाएगा।

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महराजगंज: बीआरसी घुघली में फूटा शिक्षकों का गुस्सा, काली पट्टी बांधकर लिया प्रशिक्षण

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 26 फरवरी को होगा महा घेराव

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों और सरकार के बीच टकराव तेज हो गया है। उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद जनपद महराजगंज में मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठन एक मंच पर आ गए हैं।

शिक्षकों ने 23 से 25 फरवरी तक स्कूलों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करने का ऐलान किया है। इसी क्रम में घुघली ब्लॉक स्थित बीआरसी पर चल रहे शारदा प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर प्रशिक्षण लिया और विरोध दर्ज कराया।

क्या है विवाद की जड़?

विवाद 1 सितंबर 2025 को जारी उस आदेश को लेकर है, जिसमें पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति पाने हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ था, इसलिए इस तिथि के बाद नियुक्त शिक्षकों पर ही टीईटी लागू होना चाहिए।

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शिक्षक नेता का बयान

शिक्षक नेता मनोज वर्मा ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक टीईटी की अनिवार्यता थोपना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने इसे शिक्षकों के आत्मसम्मान और सेवा सुरक्षा पर चोट बताया।

26 फरवरी को महा घेराव

शिक्षक संगठनों ने 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन और घेराव का ऐलान किया है। आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा और आदेश में संशोधन तक विरोध जारी रहेगा।
जनपद महराजगंज में यह मुद्दा अब केवल परीक्षा की अनिवार्यता तक सीमित नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बनता जा रहा है।

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