Monday, June 22, 2026
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गैंगस्टर एक्ट में बड़ी कार्रवाई: लूट गिरोह का सरगना बड़कू महिला सहयोगी सहित गिरफ्तार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।
जनपद में संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत भिटौली थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत वांछित चल रहे लूट गिरोह के सरगना अरविंद यादव उर्फ बड़कू और उसकी महिला सहयोगी माया देवी को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक तथा क्षेत्राधिकारी सदर के पर्यवेक्षण में अंजाम दी गई। पुलिस ने यह गिरफ्तारी मु.अ.सं. 08/2026 के तहत धारा 2(ख), 3(1) उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के अंतर्गत की है।
पुलिस के अनुसार, 22 वर्षीय अरविंद यादव उर्फ बड़कू निवासी ग्राम गाय घाट खुर्द, थाना रामगढ़ताल, जनपद गोरखपुर को 12 जनवरी 2026 की शाम करीब 4:30 बजे गिरफ्तार किया गया। वहीं उसकी सहयोगी 38 वर्षीय माया देवी, निवासी नक्शा नंबर-01, लोहे की बेलीमीर हाल के पीछे, थाना चिलुआताल, जनपद गोरखपुर को भी हिरासत में लिया गया।
जांच में सामने आया है कि अभियुक्तगण एक संगठित गिरोह के रूप में कार्य करते थे और भौतिक व अवैध लाभ के उद्देश्य से लूट की घटनाओं को अंजाम देते थे। गिरोह के सरगना बड़कू के खिलाफ गोरखपुर व महाराजगंज जनपद में आर्म्स एक्ट, लूट और अन्य गंभीर धाराओं में आधा दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। वहीं माया देवी भी गिरोह की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती रही है और उसका आपराधिक इतिहास भी सामने आया है।
इस प्रभावी कार्रवाई में थाना प्रभारी भिटौली मदन मोहन मिश्र, उपनिरीक्षक सचिदानंद कुमार, उपनिरीक्षक पूजा सिंह सहित पुलिस टीम के अन्य सदस्यों की अहम भूमिका रही। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने टीम की सराहना करते हुए इसे अपराध नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध अभियान पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ निरंतर कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

मानव जीवन का लक्ष्य: केवल अस्तित्व नहीं, समाज को दिशा देने की जिम्मेदारी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। वर्तमान समय में मानव जीवन का उद्देश्य एक गंभीर विमर्श का विषय बन चुका है। तेज़ रफ्तार जिंदगी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भौतिक सफलता की होड़ ने मनुष्य को आत्ममंथन से दूर कर दिया है। आज अधिकांश लोग जीवन को केवल कमाने, उपभोग करने और व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित मानने लगे हैं। लेकिन क्या यही मानव जीवन का लक्ष्य है? या जीवन का अर्थ इससे कहीं अधिक व्यापक और गहरा है?
भारतीय दर्शन और सांस्कृतिक परंपराएं स्पष्ट करती हैं कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति नहीं, बल्कि आत्मिक विकास, नैतिक आचरण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी है। मनुष्य का जीवन तब सार्थक माना जाता है जब वह अपने कर्मों से दूसरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए।
आज के सामाजिक परिदृश्य पर नजर डालें तो स्वार्थ, असहिष्णुता, हिंसा और संवेदनहीनता में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। व्यक्ति आर्थिक रूप से समृद्ध तो हो रहा है, लेकिन मानसिक तनाव, अवसाद और अकेलेपन की समस्या भी उतनी ही तेजी से बढ़ रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि केवल भौतिक प्रगति से जीवन की पूर्णता संभव नहीं है।
विशेषज्ञों और विचारकों का मानना है कि सार्थक जीवन वही है, जो सेवा, करुणा, सत्य, सदाचार और सामाजिक सहभागिता पर आधारित हो। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में योगदान देकर ही जीवन को सही दिशा मिलती है। इतिहास गवाह है कि महापुरुषों, संतों और समाजसेवियों ने त्याग और सेवा के मार्ग पर चलकर ही मानवता के लिए अमिट उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति आत्मकेंद्रित सोच से बाहर निकलकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझे। जब जीवन केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहकर मानव कल्याण के लिए समर्पित होगा, तभी वह वास्तव में मूल्यवान कहलाएगा।
अंततः यह कहा जा सकता है कि मानव जीवन का लक्ष्य केवल जीना नहीं, बल्कि ऐसा जीवन जीना है जो दूसरों के लिए प्रेरणा बने और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करे।

रिजर्व पुलिस लाइन में साप्ताहिक परेड, एएसपी ने ली सलामी

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के दिशा-निर्देशन में मंगलवार को रिजर्व पुलिस लाइन देवरिया में साप्ताहिक परेड का सफल आयोजन किया गया। परेड की सलामी अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) आनंद कुमार पाण्डेय ने ली। इस अवसर पर उन्होंने परेड का निरीक्षण कर पुलिसकर्मियों के अनुशासन, एकरूपता और शारीरिक दक्षता का आकलन किया।परेड के दौरान अधिकारियों के निर्देशानुसार पुलिसकर्मियों एवं नव-नियुक्त रिक्रूट आरक्षियों को शारीरिक व मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से सामूहिक दौड़ कराई गई। साथ ही टोलीवार ड्रिल के माध्यम से अनुशासन, समन्वय और टीम भावना को मजबूत किया गया। अधिकारियों ने कहा कि नियमित परेड न केवल फिटनेस बढ़ाती है, बल्कि ड्यूटी के प्रति सजगता और तत्परता भी विकसित करती है।परेड उपरांत एएसपी ने क्वार्टर गार्द, एमटी शाखा, यूपी-112 पीआरवी, मनोरंजन कक्ष, जिला मेस, स्टोर एवं आरटीसी मेस का विस्तृत निरीक्षण किया। यूपी-112 पीआरवी में उपलब्ध दंगा नियंत्रण उपकरण, फर्स्ट एड किट तथा अन्य संसाधनों की स्थिति की जांच करते हुए उनकी नियमित साफ-सफाई, उचित रख-रखाव और कुशल संचालन के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान गार्द कमांडरों एवं विभिन्न शाखाओं के रजिस्टरों का अवलोकन कर अभिलेखों को अद्यावधिक और सुव्यवस्थित रखने पर विशेष जोर दिया गया।एएसपी आनंद कुमार पाण्डेय ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसेवा, अनुशासन और त्वरित प्रतिक्रिया पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नियमित निरीक्षण और प्रशिक्षण से कार्यक्षमता बढ़ती है, जिसका सीधा लाभ आमजन को मिलता है। आयोजन के सफल संचालन से पुलिस लाइन में उत्साह और अनुशासन का माहौल देखने को मिला।

सड़क किनारे अज्ञात युवक का शव मिलने से मचा हड़कंप, पुलिस जांच में जुटी

देवरिया में अज्ञात युवक का शव मिलने से इलाके में दहशत

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जनपद के थाना मदनपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पकड़ी तिवारी में सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क किनारे एक अज्ञात युवक का शव संदिग्ध अवस्था में पड़ा मिला। देवरिया में अज्ञात युवक का शव मिलने की सूचना जैसे ही ग्रामीणों को मिली, मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। घटना की जानकारी तत्काल स्थानीय पुलिस को दी गई।
सूचना मिलते ही थाना मदनपुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 30 वर्ष के आसपास आंकी जा रही है। प्रथम दृष्टया शव पर किसी प्रकार की स्पष्ट चोट के निशान नहीं पाए गए हैं, हालांकि वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
मृतक की पहचान के लिए पुलिस कर रही प्रयास
पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार मृत युवक का हुलिया—एकहरा बदन, गेहूंआ रंग बताया गया है। उसने नीले रंग का लोवर, लाल स्वेटर, नीला-हरा शर्ट, नीला जैकेट और ग्रे रंग का मफलर पहन रखा था। दाहिने हाथ में कड़ा और पैरों में हवाई चप्पल पाई गई है।
देवरिया में अज्ञात युवक का शव मिलने के बाद पुलिस आसपास के थानों में सूचना भेजकर पहचान के प्रयास में जुट गई है।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव पुलिस ने शव को विधिक कार्रवाई के बाद मोर्चरी हाउस देवरिया भेज दिया है, जहां पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मामला दुर्घटना, बीमारी या किसी आपराधिक घटना से जुड़ा हुआ तो नहीं है।

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आमजन से की गई सहयोग की अपील
पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को देवरिया में अज्ञात युवक का शव से संबंधित कोई भी जानकारी हो या मृतक की पहचान से जुड़ा कोई सुराग मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
संपर्क नंबर—
थानाध्यक्ष मदनपुर: 9454403228
क्षेत्राधिकारी रूद्रपुर: 9454401407
पुलिस का कहना है कि पहचान होते ही आगे की विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बंगलादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की हत्या: भय और लापरवाही का अंजाम

बंगलादेश में एक और अल्पसंख्यक हिन्दू की निर्मम हत्या ने इस बात को जोरदार तरीके से उजागर कर दिया है कि वहाँ धार्मिक सहिष्णुता केवल शब्दों में मौजूद है। यह कोई दुर्भाग्यपूर्ण संयोग नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी भय और लापरवाही का नतीजा है।हिन्दू समुदाय, जो बंगलादेश की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता का अहम हिस्सा है, बार-बार हिंसा और उत्पीड़न का शिकार बन रहा है। प्रशासन की निष्क्रियता और कानूनी कार्रवाई में धीमी गति ने अपराधियों को निर्भीक बना दिया है। जब न्याय का डर ही मिट जाए, तो समाज में भय और अविश्वास का माहौल फैलना स्वाभाविक है।यह घटनाक्रम सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए खतरा नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। लोकतंत्र और मानवाधिकारों का मतलब सिर्फ चुनाव और संविधान तक सीमित नहीं है; यह हर नागरिक को सुरक्षा और सम्मान देने का वादा है। बंगलादेश के लिए यह समय की मांग है कि वह अपने बहुल समाज के प्रति जिम्मेदारी दिखाए। यदि इस तरह की घटनाओं पर तत्काल और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो न केवल निर्दोषों की जान खतरे में रहेगी, बल्कि देश की सामाजिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित होगी।बंगलादेश की सत्ता को अब केवल भाषणों और दलीलों में नहीं, बल्कि वास्तविक सुरक्षा उपायों में सक्रिय होना होगा। अल्पसंख्यक समुदाय पर लगातार हो रही हिंसा को नजरअंदाज करना किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है।

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लोहड़ी: उत्साह और लोक परम्परा का पवन पर्व

नवनीत मिश्र

भारत की सांस्कृतिक परंपरा में लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सामूहिक आनंद, आभार और नए जीवन-चक्र के स्वागत का प्रतीक है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पूर्व आने वाली लोहड़ी शीत ऋतु के विदा होने और बसंत के आगमन की दस्तक मानी जाती है। लोहड़ी का केंद्र बिंदु अग्नि है। सांझ ढलते ही गांव-शहरों में खुले मैदानों, आंगनों और चौपालों पर लकड़ियों से अलाव जलाए जाते हैं। अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हुए लोग तिल, मूंगफली, रेवड़ी, गुड़ और पॉपकॉर्न अर्पित करते हैं। यह अग्नि को धन्यवाद देने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की लोकपरंपरा है, जिसने पूरे वर्ष मानव जीवन का संरक्षण किया। इस पर्व का लोकजीवन और कृषि से गहरा संबंध है। रबी की फसलें खेतों में लहलहाने लगती हैं और किसानों के चेहरे पर संतोष की झलक दिखाई देती है। लोहड़ी श्रम, उम्मीद और समृद्धि के प्रतीक के रूप में किसानों को नए मौसम के लिए उत्साहित करती है। यही कारण है कि यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है। लोहड़ी की रौनक लोकगीतों और नृत्यों से और बढ़ जाती है। ढोल की थाप पर गिद्दा और भांगड़ा की मस्ती वातावरण को जीवंत कर देती है। पारंपरिक गीतों में वीरता, प्रेम, प्रकृति और सामाजिक एकता की गूंज सुनाई देती है। परिवार और समुदाय एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं, जिससे आपसी संबंधों में मधुरता और सहयोग की भावना प्रबल होती है। आधुनिक समय में भी लोहड़ी की मूल आत्मा जीवित है। भले ही उत्सव के स्वरूप में कुछ परिवर्तन आए हों, लेकिन अग्नि के चारों ओर एकत्र होकर खुशियां बांटने की परंपरा आज भी लोगों को जोड़ती है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्ची समृद्धि सामूहिक आनंद, प्रकृति के सम्मान और परस्पर सौहार्द में निहित है। लोहड़ी का पावन पर्व अतीत की लोकसंस्कृति से जोड़ते हुए भविष्य के प्रति आशा जगाता है। हर्ष, उल्लास और आस्था से परिपूर्ण यह पर्व भारतीय जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक एकता का सजीव उत्सव है।

रणनीति, साहस और राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक लेफ्टिनेंट जनरल जे.एफ.आर. जैकब

पुनीत मिश्र

भारत के सैन्य इतिहास में कुछ ही ऐसे सेनानायक हुए हैं, जिनकी रणनीतिक क्षमता, निर्भीक निर्णय और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा ने इतिहास की धारा को नई दिशा दी। लेफ्टिनेंट जनरल जैकब फ़र्ज़ राफ़ेल जैकब (जे.एफ.आर. जैकब) ऐसे ही असाधारण व्यक्तित्व थे, जिनका योगदान द्वितीय विश्वयुद्ध से लेकर 1965 और 1971 के भारत–पाक युद्धों तक अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उनकी पुण्यतिथि पर भारत माँ के इस महान सपूत का स्मरण करना राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान को नमन करने जैसा है।
लेफ्टिनेंट जनरल जैकब फ़र्ज़ राफ़ेल जैकब का सैन्य जीवन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान प्रारंभ हुआ। इस वैश्विक संघर्ष के दौरान उन्होंने युद्ध की जटिलताओं, सैन्य रणनीति, रसद प्रबंधन और नेतृत्व की वास्तविक चुनौतियों को गहराई से समझा। द्वितीय विश्वयुद्ध का यह अनुभव उनके पूरे सैन्य जीवन की मजबूत आधारशिला बना, जिसने उन्हें एक कुशल और दूरदर्शी रणनीतिकार के रूप में विकसित किया।

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स्वतंत्र भारत में जे.एफ.आर. जैकब ने भारतीय सेना में रहते हुए संगठनात्मक मजबूती और रणनीतिक सोच को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 1965 के भारत–पाक युद्ध के दौरान उनकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही। उन्होंने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच संतुलित निर्णय लेते हुए सैन्य योजनाएँ तैयार कीं। उनके नेतृत्व ने यह सिद्ध किया कि युद्ध केवल सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि सूझबूझ, अनुशासन और मनोबल से भी जीते जाते हैं।
1971 का भारत–पाक युद्ध लेफ्टिनेंट जनरल जैकब फ़र्ज़ राफ़ेल जैकब के सैन्य जीवन का स्वर्णिम अध्याय माना जाता है। पूर्वी मोर्चे पर उनकी रणनीति ने युद्ध को त्वरित और निर्णायक रूप दिया। उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हुए ऐसे निर्णय लिए, जिनसे अनावश्यक रक्तपात को रोका जा सका। ढाका में पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण न केवल एक ऐतिहासिक सैन्य विजय थी, बल्कि यह भारत की रणनीतिक श्रेष्ठता, नैतिक साहस और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक भी बनी। बांग्लादेश का निर्माण उनके दूरदर्शी और साहसिक नेतृत्व का जीवंत प्रमाण है।
सेना से सेवा निवृत्ति के बाद भी जैकब फ़र्ज़ राफ़ेल जैकब का राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण निरंतर बना रहा। उन्होंने गोवा के राज्यपाल के रूप में भी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रशासनिक कार्यों में ईमानदारी, संवेदनशीलता और स्पष्ट दृष्टि का परिचय दिया। उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता का आदर्श उदाहरण रहा।
लेफ्टिनेंट जनरल जैकब का जीवन इस बात का सशक्त संदेश देता है कि सच्चा सैनिक और सच्चा देशभक्त वह होता है, जो हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए यह कहना उचित होगा कि उनका साहस, रणनीतिक कौशल और राष्ट्रनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। भारत माँ का यह महान सपूत इतिहास के पन्नों के साथ-साथ देशवासियों के हृदय में भी अमर रहेगा।

UP News: बदायूं में मेंथा फैक्टरी के केबिन में 3 सुरक्षाकर्मी मृत, हत्या या दम घुटने से मौत? जांच जारी

बदायूं (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के उझानी थाना क्षेत्र स्थित गांव कुड़ा नरसिंहपुर में मंगलवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक मेंथा फैक्टरी के केबिन से तीन सुरक्षाकर्मियों के शव बरामद हुए। मृतक फैक्टरी में सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों की भारी भीड़ फैक्टरी परिसर में जुट गई।

केबिन में जमीन पर पड़े मिले तीनों शव

जानकारी के अनुसार, यह मेंथा फैक्टरी बैंक ऑफ बड़ौदा में बंधक है। मंगलवार सुबह फैक्टरी कर्मचारियों ने केबिन के अंदर जोगेंद्र यादव (30) पुत्र रामबहादुर, निवासी बसावनपुर (थाना मुजरिया), भानु यादव (26) पुत्र श्रीपाल, निवासी मुड़सैना (थाना दातागंज) और विवेक यादव को मृत अवस्था में पड़ा देखा। तीनों के शव केबिन के फर्श पर पड़े हुए थे।

परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, ग्रामीणों का हंगामा

घटना की सूचना मिलते ही मृतकों के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। जोगेंद्र यादव के परिजनों ने तीनों की हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। सूचना पर उझानी थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को संभाला।

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पुलिस की शुरुआती जांच: दम घुटने की आशंका

पुलिस के मुताबिक, तीनों शवों पर किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं। केबिन के अंदर हीटर लगा हुआ पाया गया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि दम घुटने से तीनों की मौत हुई हो सकती है। हालांकि, मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पहले भी आग की चपेट में आ चुकी है फैक्टरी

गौरतलब है कि यह वही मेंथा फैक्टरी है, जिसमें कुछ महीने पहले भीषण आग लग चुकी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं और हर पहलू से जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

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Himachal Pradesh Fire: अर्की बाजार में भीषण आग, 8 साल की बच्ची की जलकर मौत, 8 लोग लापता

सोलन (राष्ट्र की परम्परा)। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की बाजार में रविवार देर रात करीब 2:30 बजे भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। इस दर्दनाक हादसे में 8 वर्षीय बच्ची की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 7 से 8 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 2 महिलाएं, 2 पुरुष और 4 बच्चे शामिल हैं।

रिहायशी मकान से शुरू हुई आग, पूरा बाजार चपेट में

जानकारी के मुताबिक, आग की शुरुआत एक रिहायशी मकान से हुई, जो कुछ ही मिनटों में आसपास की दुकानों और मकानों तक फैल गई। देखते ही देखते पूरा अर्की बाजार धुएं और आग की लपटों में घिर गया। आग इतनी भयावह थी कि 6 से अधिक मकान पूरी तरह जलकर राख हो गए, जबकि कई दुकानें भी पूरी तरह तबाह हो गईं।

LPG सिलेंडर ब्लास्ट से बिगड़े हालात

आग लगने के दौरान कई LPG सिलेंडर फटने से स्थिति और भी भयावह हो गई। तेज धमाकों के कारण आग तेजी से फैलती चली गई, जिससे दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हादसे के बाद आसपास के लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए।

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घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक बाजार का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो चुका था।

आग के कारणों की जांच जारी

घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय विधायक संजय अवस्थी ने हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है, वहीं प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है।

इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। कई परिवारों का सब कुछ आग में जलकर खत्म हो चुका है।

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परीक्षा से पहले तनाव नहीं, सही प्लानिंग है जरूरी

जेईई मेन 2026: आखिरी 10 दिन कैसे बनाएं निर्णायक

नई दिल्ली (RkPnews शिक्षा डेस्क)जेईई मेन 2026 (JEE Main 2026) की उलटी गिनती अब शुरू हो चुकी है। 21 जनवरी 2026 से आयोजित होने वाली इस प्रतिष्ठित परीक्षा को लेकर देशभर के लाखों इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों में हलचल तेज है। परीक्षा नजदीक आते ही छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिरी दिनों में क्या पढ़ें, कैसे रिवीजन करें और तनाव को कैसे संभालें, ताकि बेहतर स्कोर हासिल किया जा सके।
ऐसे समय में जेईई टॉपर की सलाह किसी मार्गदर्शक की तरह काम करती है। जेईई टॉपर इंदू पटेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि परीक्षा से ठीक पहले की गई सही रणनीति कई बार महीनों की मेहनत से भी ज्यादा असरदार साबित होती है। आइए जानते हैं JEE Main Last Minute Preparation Tips के तहत वे 5 जरूरी टिप्स, जो परीक्षा से पहले हर छात्र को जरूर अपनाने चाहिए।

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लंबे नोट्स नहीं, शॉर्ट नोट्स से करें स्मार्ट रिवीजन
जेईई टॉपर इंदू पटेल के अनुसार, परीक्षा से कुछ दिन पहले भारी-भरकम नोट्स और लंबी थ्योरी पढ़ना गलत साबित हो सकता है। इससे दिमाग पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।
बेहतर होगा कि आप फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स तीनों विषयों के लिए शॉर्ट नोट्स तैयार करें।
इन शॉर्ट नोट्स में शामिल करें:
जरूरी फॉर्मूले
ट्रिक्स और शॉर्टकट
बार-बार भूलने वाले कॉन्सेप्ट
यह तरीका JEE Main Last Minute Preparation Tips में सबसे कारगर माना जाता है, क्योंकि इससे कम समय में अधिक रिवीजन संभव होता है।

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मॉक टेस्ट से बनाएं एग्जाम जैसा माहौल
आखिरी समय में मॉक टेस्ट देना बेहद जरूरी है। मॉक टेस्ट न सिर्फ आपकी तैयारी को परखते हैं, बल्कि आपको रियल एग्जाम का अनुभव भी कराते हैं।
मॉक टेस्ट के फायदे:
टाइम मैनेजमेंट बेहतर होता है
सवालों को हल करने की स्पीड बढ़ती है
कमजोर टॉपिक्स की पहचान होती है
टॉपर के अनुसार, रोजाना या एक दिन छोड़कर मॉक टेस्ट देने से आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है। यही कारण है कि JEE Main Last Minute Preparation Tips में मॉक टेस्ट को सबसे अहम माना जाता है।

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पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र (PYQs) जरूर हल करें
पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र यानी PYQs जेईई मेन की तैयारी का सबसे मजबूत हथियार हैं। इन्हें हल करने से आपको यह समझने में मदद मिलती है कि:
किस टॉपिक से बार-बार सवाल पूछे जाते हैं
एग्जाम का पैटर्न कैसा रहता है
प्रश्नों का लेवल क्या होता है
ज्यादा से ज्यादा PYQs हल करने से न सिर्फ कॉन्सेप्ट क्लियर होते हैं, बल्कि परीक्षा के डर में भी कमी आती है। JEE Main Last Minute Preparation Tips में PYQs को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

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बार-बार रिवीजन से करें अपनी तैयारी को मजबूत
सिर्फ पढ़ लेना ही काफी नहीं, बल्कि रिवीजन ही सफलता की असली कुंजी है। आखिरी दिनों में एक ही टॉपिक को बार-बार दोहराने से वह लंबे समय तक याद रहता है।
रिवीजन से लाभ:
कमजोरियों को सुधारने का मौका
आत्मविश्वास में वृद्धि
परीक्षा के दिन घबराहट कम
टॉपर का मानना है कि नियमित रिवीजन करने वाले छात्र एग्जाम में ज्यादा शांत और फोकस्ड रहते हैं।

आत्मविश्वास और पॉजिटिव सोच रखें बरकरार
कई बार छात्र पूरी तैयारी के बावजूद खुद पर शक करने लगते हैं। यही सबसे बड़ी गलती होती है। इंदू पटेल कहती हैं कि खुद पर भरोसा रखना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी:
आखिरी दिनों में नेगेटिव बातों से दूर रहें
डिमोटिवेट करने वाले लोगों की बातों को नजरअंदाज करें
असफलता के डर को चुनौती की तरह लें
अगर कोई कहे कि “अब कुछ नहीं हो सकता”, तो उसे अपनी ताकत बनाइए। यही सोच आपको एग्जाम में आगे ले जाएगी।

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निष्कर्ष
जेईई मेन 2026 अब बेहद करीब है और यह समय घबराने का नहीं, बल्कि सही रणनीति अपनाने का है। शॉर्ट नोट्स, मॉक टेस्ट, PYQs, नियमित रिवीजन और आत्मविश्वास—ये पांचों स्तंभ आपकी सफलता की नींव बन सकते हैं।
अगर आप इन JEE Main Last Minute Preparation Tips को ईमानदारी से अपनाते हैं, तो कम समय में भी बेहतर परिणाम हासिल करना संभव है। मेहनत पर भरोसा रखें, खुद पर विश्वास रखें और पूरे कॉन्फिडेंस के साथ परीक्षा में उतरें।

ईरान से कारोबार पर ट्रंप का बड़ा ऐलान, भारत पर बढ़ेगा टैरिफ दबाव?

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि जो भी देश ईरान से कारोबार जारी रखेगा, उस पर अमेरिका सख्त आर्थिक कार्रवाई करेगा। इस फैसले को ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पिछले दो हफ्तों से ज्यादा समय से हिंसक प्रदर्शन जारी हैं।

ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान से व्यापार करने वालों पर 25% टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इस फैसले का असर भारत, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की जैसे देशों पर पड़ सकता है। खासकर भारत के लिए यह फैसला चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

भारत–अमेरिका रिश्तों पर बढ़ता दबाव

भारत पहले ही रूस से तेल खरीद के कारण अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है। वर्तमान में कई भारतीय उत्पादों पर अमेरिका 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है। यदि ईरान के साथ व्यापार के कारण भारत पर नया 25% टैरिफ लगाया जाता है, तो कुल टैरिफ 75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में और तनाव बढ़ने की आशंका है।

भारत–ईरान व्यापार का आंकड़ा

ईरान में भारतीय दूतावास के अनुसार,

• FY 2024-25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का निर्यात किया

• ईरान से 0.44 अरब डॉलर का आयात किया

• कुल द्विपक्षीय व्यापार: 1.68 अरब डॉलर (करीब 14,000–15,000 करोड़ रुपये)

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किन वस्तुओं का सबसे ज्यादा कारोबार?

Trading Economics की रिपोर्ट के मुताबिक,

• ऑर्गेनिक केमिकल्स: 512.92 मिलियन डॉलर

• खाने योग्य फल, मेवे और खट्टे फलों के छिलके: 311.60 मिलियन डॉलर

• मिनरल फ्यूल और तेल से जुड़े उत्पाद: 86.48 मिलियन डॉलर

सुप्रीम कोर्ट का फैसला बनेगा गेमचेंजर?

इस पूरे मामले में अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। कोर्ट यह तय करेगी कि ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ कानूनी रूप से वैध हैं या नहीं। अगर अदालत ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाती है, तो ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की उनकी क्षमता कमजोर पड़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट का अगला फैसला बुधवार को आने की संभावना है।

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हनुमान चरित्र का शास्त्रोक्त रहस्य: नेतृत्व, भक्ति और विनय की अद्भुत मिसाल

“सेवा से साक्षात्कार तक: जब हनुमान बने श्रीराम की लीला के मौन सूत्रधार”


श्रीरामकथा में हनुमान जी का व्यक्तित्व केवल बल, बुद्धि या पराक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सेवा, विवेक, वैराग्य और विनय के ऐसे अद्भुत समन्वय हैं, जिसकी समानता स्वयं शास्त्रों में भी दुर्लभ है।
एपिसोड 9 में हमने देखा कि कैसे हनुमान जी सेवक, मंत्री, मित्र और मार्गदर्शक—चारों रूपों में प्रकट होते हैं। अब एपिसोड 10 में शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार हम उस गूढ़ प्रसंग में प्रवेश करते हैं, जहाँ हनुमान जी की सेवा केवल कर्म नहीं, बल्कि साक्षात्कार का माध्यम बन जाती है।

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🌿 कथा-प्रसंग: मौन सेवा और दिव्य पहचान
वाल्मीकि रामायण, सुंदरकाण्ड और किष्किन्धा काण्ड के शास्त्रोक्त संकेतों के अनुसार, श्रीराम और सुग्रीव के मैत्री-संधान के उपरांत वानर-सेना का संगठन आरंभ होता है।
इस समय हनुमान जी न तो स्वयं को नायक के रूप में प्रस्तुत करते हैं, न ही श्रेय की आकांक्षा रखते हैं। वे मौन रहकर कार्य करते हैं, क्योंकि उनके लिए श्रीराम की आज्ञा ही वेद-वाक्य है।

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“न किञ्चिद् आत्मनः कार्यं मन्यते हनुमान् कदा।”
— भावार्थ: हनुमान जी कभी भी अपने लिए कुछ नहीं मानते, उनका सब कुछ श्रीराम के लिए है।
यही वह बिंदु है जहाँ हनुमान जी सेवा की पराकाष्ठा बन जाते हैं। वे जानते हैं—
“कर्ता मैं नहीं, करण श्रीराम हैं।”

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🔥 शास्त्रोक्त महिमा: जब बल भी विनय से झुकता है
हनुमान जी को शास्त्रों में अष्टसिद्धि नव निधि के दाता कहा गया है, परंतु वे स्वयं को दाता नहीं, माध्यम मानते हैं। केंद्रीय भाव यही है—बल जब विनय से जुड़ता है, तभी वह लोकमंगलकारी बनता है।
हनुमान जी का प्रत्येक कार्य—
वानर-सेना का मनोबल बढ़ाना
दिशाओं में खोज-दल भेजना
शास्त्रसम्मत रणनीति सुझाना
और स्वयं को सबसे अंत में रखना
यह सब आदर्श नेतृत्व का शास्त्रोक्त उदाहरण है।
नेतृत्व वह नहीं जो आगे खड़ा हो,
नेतृत्व वह है जो सबको आगे बढ़ा दे।
— हनुमान चरित्र का मौन उपदेश
🌸 श्रीराम–हनुमान संबंध: दास्य से दैवीय मित्रता तक
श्रीराम पहली बार हनुमान जी के प्रति वह दृष्टि रखते हैं, जो केवल दास के लिए नहीं—आत्मीय के लिए होती है।
शास्त्र संकेत देते हैं कि श्रीराम जानते हैं—
यह वानर नहीं, मेरी लीला का स्तंभ है।
हनुमान जी के लिए श्रीराम—
आराध्य हैं
आदेश हैं
शरण हैं
और लक्ष्य भी
यही कारण है कि उनकी भक्ति अनन्य है—न शर्त, न अपेक्षा।

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🕉️ समानता नहीं, स्वयं मानक हैं हनुमान
शास्त्रों में कई महापुरुष हुए—बलशाली, बुद्धिमान, तपस्वी—
पर हनुमान जी की तुलना किसी से नहीं, क्योंकि वे स्वयं मानक (Benchmark) हैं।
गुण
अन्य महापुरुष
हनुमान जी
बल
अहं से युक्त
विनय से युक्त
बुद्धि
स्वयं के लिए
श्रीराम के लिए
भक्ति
अपेक्षायुक्त
निष्काम
नेतृत्व
आदेशात्मक
प्रेरणात्मक
इसलिए शास्त्र कहते हैं—
“हनुमान समो नास्ति।”
हनुमान के समान कोई नहीं।
🌺 वानर समाज के लिए आदर्श शासन-नीति एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि हनुमान जी सामाजिक संतुलन बनाए रखते हैं।
वे सुग्रीव के प्रति निष्ठावान हैं, पर सत्य से समझौता नहीं करते।
वे वरिष्ठों का सम्मान करते हैं, पर कनिष्ठों को भी अवसर देते हैं।
यह शास्त्रोक्त संकेत है कि—
सच्चा सेवक ही सच्चा शासक बनता है।

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🌞 भावात्मक निष्कर्ष: आज के मानव के लिए हनुमान संदेश
आज जब संसार अहं, प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ से ग्रस्त है,
हनुमान जी का यह शास्त्रोक्त चरित्र हमें सिखाता है—
बिना अपेक्षा सेवा
बिना प्रदर्शन पराक्रम
बिना पद के नेतृत्व
और बिना स्वार्थ भक्ति
यही कारण है कि हनुमान जी केवल पूजा के विषय नहीं, अनुकरण के पात्र हैं।
जहाँ अहं समाप्त होता है,
वहीं से हनुमान प्रारंभ होते हैं।

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🔔 एपिसोड 10 का शास्त्रोक्त सार
हनुमान जी सेवा के माध्यम से साक्षात्कार करते हैं
वे मौन रहकर रामकार्य सिद्ध करते हैं
उनका नेतृत्व प्रेरणा से चलता है, आदेश से नहीं
वे स्वयं को शून्य रखकर श्रीराम को पूर्ण करते हैं

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का भाजपा मुख्यालय दौरा, अंतर-दलीय संवाद बढ़ाने पर हुई अहम चर्चा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। चीन के सत्ताधारी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीपीसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सुन हैयान ने किया। भाजपा ने इस मुलाकात की जानकारी आधिकारिक तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की।

भाजपा की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भाजपा महासचिव और सांसद अरुण सिंह ने किया। बैठक के दौरान दोनों देशों के सत्ताधारी दलों के बीच अंतर-दलीय संवाद (Inter-Party Communication) को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

अंतर-दलीय संचार को बढ़ावा देने पर जोर

भाजपा के विदेश मामलों के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में भाजपा और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच संवाद के नए माध्यमों और सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया गया।

उन्होंने लिखा कि सुन हैयान के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा नेताओं से मुलाकात की, जिसमें भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग भी शामिल थे।

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गलवान के बाद रिश्तों में आई थी तल्खी

गौरतलब है कि साल 2020 में गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में भारी तनाव देखने को मिला था। सीमा विवाद के चलते दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों में भी खटास आ गई थी।

हालांकि अक्टूबर 2024 में सीमा से सैनिकों की आंशिक वापसी पर सहमति बनने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है।

सत्ताधारी दलों के स्तर पर संबंध सुधार की कोशिश

भाजपा और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को पारंपरिक रूप से वैचारिक विरोधी माना जाता रहा है। इसके बावजूद हालिया बैठक को दोनों देशों के सत्ताधारी दलों के बीच संबंध सुधारने की दिशा में एक अहम पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संवाद भविष्य में भारत-चीन संबंधों को स्थिर और व्यावहारिक दिशा देने में सहायक हो सकता है।

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एसआईआर मतदाता पुनरीक्षण: डीएम ने राजनीतिक दलों संग की बैठक, शुद्ध व गुणवत्तापूर्ण मतदाता सूची पर जोर

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी सन्तोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करते हुए निर्वाचक नामावलियों की शुद्धता, सटीकता और गुणवत्ता में सुधार करना रहा।

बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे बूथ स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं और छूटे हुए तथा नए मतदाताओं के नाम जुड़वाने में जिला प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पुरानी और नई मतदाता सूचियों का आपसी मिलान कर वास्तविक मतदाताओं के नाम जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, तभी एक सटीक, विश्वसनीय और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जा सकेगी।

जिलाधिकारी ने मतदाता सूची में नाम, उपनाम और पते से संबंधित त्रुटियों के सुधार पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि स्पेलिंग की गलतियां और हिंदी में मात्रा संबंधी अशुद्धियां मतदाता सूची की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं, इसलिए इन्हें ठीक करना बेहद जरूरी है। इसके लिए बूथ लेवल एजेंटों और राजनीतिक दलों के स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम की सफलता में सभी राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग अनिवार्य है।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि मतदाताओं की शिकायतों, दावों और आपत्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के लिए ईआरओ (निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) की संख्या बढ़ाकर 126 कर दी गई है। इससे शिकायतों की सुनवाई में तेजी आएगी और मतदाता सूची को और अधिक सटीक, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकेगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम/सहायक निर्वाचक अधिकारी नन्द प्रकाश मौर्या, अतिरिक्त उपजिलाधिकारी विजय यादव सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें बहुजन समाजवादी पार्टी से नारद राव, समाजवादी पार्टी से कुंवर दत्त, आम आदमी पार्टी से दामोदर प्रसाद गोयल, भारतीय जनता पार्टी से गौतम तिवारी, कांग्रेस पार्टी से अफजल अब्बास तथा अपना दल (एस) से प्रदुम्न पटेल शामिल रहे।

संत कबीर मगहर महोत्सव-2026: तैयारी बैठक में छह दिवसीय आयोजन को मंजूरी

28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 तक होगा महोत्सव का आयोजन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में कबीर मगहर महोत्सव-2026 के आयोजन को लेकर समिति की दूसरी बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह और मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में समिति द्वारा कबीर मगहर महोत्सव-2026 का आयोजन 28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 तक छह दिवसीय रूप में कराए जाने का निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी ने महोत्सव को भव्य और सफल बनाने के लिए खर्च, धन की उपलब्धता और व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
महोत्सव के दौरान विभिन्न तिथियों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा और कैलेंडर तैयार करने पर भी सहमति बनी। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विभाग अपने-अपने कार्यक्रमों को समयबद्ध और व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित करें। उन्होंने उप-समितियों के गठन कर दायित्वों का स्पष्ट निर्धारण करने, आयोजन स्थल के ले-आउट के अनुसार टेंट, कुर्सी सहित अन्य आवश्यक सामग्री से संबंधित टेंडर प्रक्रिया समय से पूरी करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी श्री कुमार ने कहा कि महोत्सव में संत कबीर की विचारधारा से जुड़े कार्यक्रमों को प्रमुखता दी जाएगी और स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं से संबंधित कार्यशालाओं के आयोजन और जनकल्याणकारी योजनाओं के स्टॉल लगाए जाएंगे।
समिति के सदस्यों द्वारा महोत्सव को और आकर्षक बनाने के लिए सुझाव दिए गए। जिलाधिकारी ने व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग महोत्सव में शामिल हों और संत कबीर दास के विचारों से प्रेरणा लें। उन्होंने सभी समितियों के सदस्यों से अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने की अपेक्षा जताई।
बैठक में समिति के सदस्यों के साथ संबंधित अधिकारी व कर्मचारी गण उपस्थित रहे।