बलिया (राष्ट्र कि परम्परा)
बलिया जनपद की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आयकर विभाग की टीम ने लखनऊ समेत बलिया जिले के उनके तीन ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की है।सूत्रों के अनुसार राजधानी लखनऊ के अलावा उनके पैतृक गांव खनवर, तथा रसड़ा स्थित आवास और एक करीबी के घर पर भी आयकर विभाग की टीम ने जांच की। रसड़ा में सुबह से ही विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी देखी गई, जिससे क्षेत्र में हलचल मच गई।हालांकि छापेमारी के संबंध में आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच की बात कही जा रही है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।गौरतलब है कि उमाशंकर सिंह पिछले दो वर्षों से ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच सार्वजनिक जीवन से कुछ हद तक दूर रहे हैं।इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। फिलहाल आयकर विभाग की जांच जारी है और आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह की मुश्किलें बढ़ीं
पंचांग 26 फरवरी 2026 (गुरुवार) – फाल्गुन शुक्ल दशमी, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चंद्र राशि
26 फरवरी 2026 का पंचांग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है, जो रात्रि 12:33 बजे तक रहेगी, उसके बाद एकादशी प्रारंभ होगी। आज चंद्रमा मिथुन राशि में संचार करेगा तथा सूर्य कुंभ राशि में स्थित है। विवाह, पूजन, व्रत और शुभ कार्यों के लिए दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें।
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🗓 आज का पंचांग 26 फरवरी 2026
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
मास: फाल्गुन (अमांत एवं पूर्णिमांत)
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: दशमी 12:33 AM तक, उपरांत एकादशी
वार: गुरुवार
🌞 सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 6:54 AM
सूर्यास्त: 6:24 PM
चंद्रोदय: 1:16 PM
चंद्रास्त: अगले दिन 3:35 AM
अयन: उत्तरायण
ऋतु: वसंत (वैदिक ऋतु: शिशिर)
🌙 नक्षत्र, योग और करण
नक्षत्र: मृगशीर्षा 12:11 PM तक, उसके बाद आद्रा
योग: प्रीति योग 10:33 PM तक, उपरांत आयुष्मान योग
करण: तैतिल 1:37 PM तक, बाद में गर, फिर वणिज
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⏳ अशुभ काल (राहुकाल सहित)
26 फरवरी 2026 के पंचांग के अनुसार अशुभ समय इस प्रकार है:
राहुकाल: 2:05 PM – 3:32 PM
यमगंड: 6:54 AM – 8:21 AM
कुलिक काल: 9:47 AM – 11:13 AM
दुर्मुहूर्त: 10:44 AM – 11:30 AM, 3:20 PM – 4:06 PM
वर्ज्यम्: 8:06 PM – 9:36 PM
इन समयों में नए कार्य प्रारंभ करने से बचें।
✅ शुभ मुहूर्त 26 फरवरी 2026
अभिजीत मुहूर्त: 12:16 PM – 1:02 PM
अमृत काल: 1:22 AM – 2:52 AM
ब्रह्म मुहूर्त: 5:18 AM – 6:05 AM
धार्मिक अनुष्ठान, जप-तप और मांगलिक कार्यों के लिए ये समय श्रेष्ठ माने गए हैं।
🌟 चंद्र राशि और चंद्रबल
चंद्र राशि: मिथुन (पूरा दिन-रात)
सूर्य राशि: कुंभ
चंद्रबल जिन राशियों को: मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर (27 फरवरी सुबह 6:54 AM तक)
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🕉 दिन का चौघड़िया (गुरुवार)
शुभ: 6:54 AM – 8:21 AM
रोग: 8:21 AM – 9:47 AM
उद्बेग: 9:47 AM – 11:13 AM
चर: 11:13 AM – 12:39 PM
लाभ: 12:39 PM – 2:05 PM
अमृत: 2:05 PM – 3:32 PM
काल: 3:32 PM – 4:58 PM
शुभ: 4:58 PM – 6:24 PM
📌 विशेष योग
सर्वार्थसिद्धि योग: 26 फरवरी 2026 प्रातः 6:54 AM तक प्रभावी
आनंदादि योग: मृत्यु योग 12:11 PM तक
📖 धार्मिक महत्व
26 फरवरी 2026 का पंचांग दर्शाता है कि दशमी तिथि और प्रीति योग का संयोग आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल है। गुरुवार होने से भगवान विष्णु एवं बृहस्पति देव की पूजा का विशेष महत्व है। व्रत-उपवास एवं दान-पुण्य से पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
चंद्रशेखर उद्यान में एक दिवसीय माटीकला जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
बलिया(राष्ट्र कि परम्परा)
उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा आयोजित एक दिवसीय माटीकला जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ बुधवार को चंद्रशेखर उद्यान में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कुम्हार समुदाय के लोग, जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मिट्टी से निर्मित वस्तुएं भारतीय संस्कृति और परंपरा की पहचान हैं। इन्हें आधुनिक बाजार से जोड़कर कुम्हार समुदाय की आय में वृद्धि की जा सकती है। इसी उद्देश्य से नि:शुल्क विद्युत चालित चाक वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
मंत्री ने बताया कि जिले के 17 विकास खंडों के ग्राम प्रधानों के सहयोग से अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत माटीकला टूल किट (विद्युत चालित चाक) 28 लाभार्थियों को वितरित की गई। इसके अतिरिक्त माटीकला टूल किट के तहत पागमील मशीन 5 लाभार्थियों को प्रदान की गई, जिससे मिट्टी को बेहतर ढंग से तैयार कर उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाभार्थियों को 10 हजार रुपये तक का मुक्त ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि कारीगर अपने कार्य को और सुदृढ़ कर सकें। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कुम्हार समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके पारंपरिक व्यवसाय को नई दिशा देना है।कार्यक्रम के दौरान जिले के 17 ब्लाकों के ग्राम प्रधानों को अंगवस्त्र और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंत्री ने ग्राम प्रधानों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक कुम्हार परिवारों को इस योजना से जोड़ें, ताकि उन्हें आधुनिक संसाधनों का लाभ मिल सके।जिला ग्रामोद्योग अधिकारी संस्कृति गुप्ता ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि माटीकला बोर्ड द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। इससे कारीगरों को आधुनिक डिजाइन और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में सहायता मिलेगी।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सरकार की इस पहल की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे जिले में माटीकला को नई रफ्तार मिलेगी तथा कुम्हार समुदाय आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम
मऊ में कृषि यंत्रों की बुकिंग शुरू: 5 मार्च को ऑटो लॉटरी, 6 मार्च को ई-लॉटरी
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) और क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) योजना के तहत कृषि यंत्रों की चौथे चरण की बुकिंग 25 फरवरी 2026 से शुरू हो गई है। आवेदन की अंतिम तिथि 4 मार्च 2026 निर्धारित की गई है।
जिला कृषि अधिकारी सोमप्रकाश गुप्ता के अनुसार, इस चरण में जनपद स्तर पर शेष बचे लक्ष्यों को शामिल करते हुए आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक पात्र किसानों को लाभ मिल सके।
क्या है SMAM और CRM योजना?
SMAM योजना का उद्देश्य कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना, उत्पादन लागत कम करना और उत्पादकता बढ़ाना है।
CRM योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन को प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे पराली जलाने की समस्या पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण संभव हो सके।
इन योजनाओं के तहत ट्रैक्टर संचालित यंत्र, हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रीपर, मल्चर, रोटावेटर, जीरो टिल सीड ड्रिल आदि पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
पूरी समय-सारिणी एक नजर में
• 25 फरवरी – 4 मार्च 2026: ऑनलाइन बुकिंग
• 5 मार्च 2026: ऑटो लॉटरी
• 6 मार्च 2026: ई-लॉटरी
• 16 मार्च 2026 तक: चयनित लाभार्थियों को अनिवार्य दस्तावेज अपलोड
• 17-18 मार्च 2026: सत्यापन व डीबीटी प्रक्रिया
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चयनित लाभार्थियों के लिए जरूरी निर्देश
ई-लॉटरी में चयनित किसानों को 16 मार्च 2026 तक विभागीय पोर्टल (दर्शन 20 एवं यूपी यंत्र ट्रैकिंग पोर्टल) पर निम्न दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा:
• कृषि यंत्र का बिल
• यंत्र की फोटो
• अन्य आवश्यक अभिलेख
समयसीमा में दस्तावेज अपलोड न करने पर चयन निरस्त किया जा सकता है।
डीबीटी से मिलेगा अनुदान
दस्तावेज सत्यापन के बाद 17 और 18 मार्च को डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से अनुदान राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया है।
किसानों के लिए बड़ा अवसर
• श्रम लागत में कमी
• समय की बचत
• उत्पादन क्षमता में वृद्धि
• फसल अवशेष प्रबंधन में सुधार
• पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना विशेष रूप से लाभकारी मानी जा रही है।
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रात में नहीं दिखता स्पीड ब्रेकर, धूल से ढका रिफ्लेक्टर बना हादसों की वजह
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जिले का भागलपुर पुल एक बार फिर सुर्खियों में है। पुल के दोनों ओर लगाए गए हाइट ब्रेकर ने भारी वाहनों की आवाजाही पर कुछ हद तक रोक तो लगाई है, लेकिन इससे जुड़ी नई समस्याएं भी सामने आ रही हैं। ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार पर नियंत्रण के उद्देश्य से की गई यह व्यवस्था अब स्थानीय नागरिकों के लिए राहत और चिंता—दोनों का कारण बन गई है।
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर को लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर बड़े ट्रकों और अत्यधिक ऊंचाई वाले वाहनों का प्रवेश कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से गिट्टी, बालू, सीमेंट और सरिया जैसी निर्माण सामग्री का परिवहन लगातार जारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है या सिर्फ वाहनों की श्रेणी बदल गई है?
तेज रफ्तार पर आंशिक नियंत्रण
पुल के भागलपुर छोर पर स्थित पुलिस चौकी के पास बनाए गए स्पीड ब्रेकर का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। यहां से गुजरने वाले वाहन अनिवार्य रूप से धीमे हो जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि पहले जहां तेज रफ्तार ट्रकों और बसों के कारण भय का माहौल रहता था, अब स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हुई है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हाइट ब्रेकर लगाना ही पर्याप्त समाधान नहीं है। यदि निगरानी और नियमित निरीक्षण न हो, तो ऐसी व्यवस्थाएं धीरे-धीरे प्रभावहीन हो जाती हैं।
दूसरे छोर पर बढ़ी समस्या
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर से जुड़ी सबसे बड़ी शिकायत पुल के दूसरे छोर से सामने आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, हाइट ब्रेकर पर किया गया पेंट धूल और मिट्टी से ढक जाता है, जिससे वह दूर से दिखाई नहीं देता। विशेष रूप से रात के समय यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।
कई वाहन चालक समय रहते ब्रेकर को पहचान नहीं पाते और अचानक ब्रेक लगाने या टकराने की स्थिति में वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में कई छोटे-बड़े हादसों की खबरें सामने आई हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान भी हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाइट ब्रेकर को स्पष्ट रूप से चिह्नित नहीं किया गया, तो यह दुर्घटनाओं को रोकने के बजाय स्वयं दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
रिफ्लेक्टर की गुणवत्ता पर उठे सवाल
कुछ माह पूर्व क्षेत्र के समाजसेवी युवाओं—अंब्रेश कुमार यादव उर्फ मणि, चंद्रकांत शर्मा, संतोष साहनी उर्फ गोलू और सुशील चौरसिया उर्फ बबलू—ने अपनी पहल पर हाइट ब्रेकर पर रात में चमकने वाला रेडियम पेपर लगाया था। उनकी इस पहल की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हुई, क्योंकि इससे रात में ब्रेकर की दृश्यता बढ़ी और दुर्घटनाएं कम हुईं।
हालांकि, समय बीतने के साथ उस रेडियम पेपर पर धूल और मिट्टी जम गई, जिससे उसका रिफ्लेक्शन कमजोर पड़ गया। हाल ही में लगाया गया पीले रंग का रिफ्लेक्शन पेपर भी मात्र दो दिनों में उखड़ गया। इससे व्यवस्था की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोगों का कहना है कि यदि उच्च गुणवत्ता वाले रिफ्लेक्टर और टिकाऊ सामग्री का उपयोग किया जाए, तो यह समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।
रात में गुजरते भारी वाहन, पारदर्शिता पर प्रश्न
क्षेत्रवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि रात के समय कुछ ऐसे भारी वाहन, जिनकी ऊंचाई निर्धारित सीमा से थोड़ी कम होती है, पुल से नियमित रूप से गुजर जाते हैं। इससे हाइट ब्रेकर की प्रभावशीलता और निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया और यूट्यूब पर स्थानीय लोग वीडियो साझा कर अपनी आवाज उठा रहे हैं। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस विभागीय कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर को लेकर क्षेत्रवासियों ने कई व्यावहारिक सुझाव दिए हैं—
हाइट ब्रेकर पर नियमित रूप से स्पष्ट और चमकीला रंग-रोगन कराया जाए।
उच्च गुणवत्ता वाले रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं।
पुल के दोनों छोर पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ओवरलोडिंग पर प्रभावी निगरानी के लिए नियमित पुलिस जांच हो।
रात के समय विशेष गश्त बढ़ाई जाए।
लोगों का मानना है कि यदि इन उपायों को गंभीरता से लागू किया जाए, तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
संतुलित समाधान की जरूरत
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाइट ब्रेकर तभी प्रभावी होते हैं जब उन्हें वैज्ञानिक मानकों के अनुसार बनाया और चिह्नित किया जाए। केवल ऊंचाई सीमित कर देना पर्याप्त नहीं है; उसकी दृश्यता, चेतावनी संकेत और नियमित रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि व्यवस्था में सुधार की काफी गुंजाइश है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह पहल राहत के बजाय जोखिम का कारण बन सकती है।
निष्कर्ष
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर ने ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार पर आंशिक नियंत्रण जरूर किया है, लेकिन इससे जुड़ी खामियां अब सामने आ रही हैं। धूल से ढके रिफ्लेक्टर, कमजोर गुणवत्ता की सामग्री और रात में अपर्याप्त दृश्यता दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है।
स्थानीय युवाओं की पहल प्रेरणादायक है, परंतु स्थायी समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने की आवश्यकता है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान दिया जाएगा, ताकि यह पुल सुरक्षा का प्रतीक बने, खतरे का नहीं।
सिकंदरपुर नगर पंचायत में बिजली कटौती से जनजीवन बेहाल, भीषण गर्मी में बढ़ी परेशानी
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। भीषण गर्मी के बीच सिकंदरपुर नगर पंचायत में लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। तापमान में बढ़ोतरी के साथ दिन और रात दोनों समय बिजली की आंख-मिचौली से आमजन परेशान हैं।
रोजाना कई घंटों की कटौती
नगर क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में प्रतिदिन कई-कई घंटे बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। कभी सुबह तो कभी देर रात बिजली चली जाती है, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। पंखे, कूलर और पानी की मोटरें बंद होने से उमस भरी गर्मी में रहना कठिन हो गया है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
पेयजल संकट गहराया
बिजली न रहने से पानी की समस्या भी बढ़ गई है। अधिकतर घरों में मोटर पंप के जरिए पानी की आपूर्ति होती है, जो बिजली पर निर्भर है। घंटों बिजली न आने से टंकियां खाली हो जाती हैं और लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है।
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व्यापार और पढ़ाई पर असर
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि गर्मी और बिजली कटौती के कारण ग्राहक कम आ रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। इन्वर्टर और बैटरी भी लगातार उपयोग से जवाब देने लगे हैं।
अघोषित कटौती का आरोप
नागरिकों का आरोप है कि अघोषित बिजली कटौती की जा रही है और पूर्व सूचना भी नहीं दी जाती। कई बार शिकायत के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि गर्मी के इस कठिन दौर में नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जनता का आक्रोश बढ़ सकता है।
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महराजगंज में पंचायत चुनाव पर संशय, आरक्षण सूची लंबित, एसआईआर बढ़ने से बढ़ी टेंशन
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर जिले में असमंजस की स्थिति गहराती जा रही है। आरक्षण सूची जारी न होने और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया मार्च के अंत तक बढ़ जाने से मौजूदा प्रधानों और संभावित उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है।
समय पर होंगे चुनाव या टलेंगे?
वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव की अधिसूचना मार्च में जारी हुई थी और मई तक प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। उसी आधार पर चुने गए प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों का पांच वर्षीय कार्यकाल जून 2026 में समाप्त होगा।
नियमों के अनुसार यदि समय पर चुनाव नहीं हो पाता है तो पंचायत का संचालन प्रशासक के हाथों में चला जाता है। ऐसे में मौजूदा प्रधानों के अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएंगे, हालांकि कई जनप्रतिनिधियों में कार्यकाल बढ़ने की उम्मीद बनी हुई है।
आरक्षण सूची पर अटका मामला
प्रशासन ने परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन पिछड़ा वर्ग आरक्षण की अंतिम रिपोर्ट तैयार न होने से आरक्षण सूची जारी नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट तैयार होने में दो से चार माह का समय लग सकता है। इसके बाद ही ग्राम और वार्डवार आरक्षण घोषित होगा और चुनाव अधिसूचना का रास्ता साफ होगा।
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एसआईआर से प्रभावित तैयारियां
बीएलओ फिलहाल मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में व्यस्त हैं, जो 28 मार्च तक चलेगा। इससे चुनावी तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में अप्रैल से पहले अधिसूचना जारी होना मुश्किल माना जा रहा है।
दावेदारों की रणनीति
आरक्षण और चुनाव तिथि स्पष्ट न होने से संभावित उम्मीदवार खुलकर प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पोस्ट, बैनर और होर्डिंग के जरिए सक्रियता दिखाई जा रही है। गांवों में राजनीतिक चर्चा तेज है, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार बना हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आरक्षण और अधिसूचना में और देरी होती है तो जून के बाद ग्राम पंचायतों में प्रशासक व्यवस्था लागू होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पंचायत चुनाव को लेकर संशय बरकरार है।
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शाहजहांपुर: हेडमास्टर पर मनमानी का आरोप, हफ्तों गायब रहने के बावजूद रजिस्टर में पूरी हाजिरी
शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार जहां मिशन कायाकल्प के तहत सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने का दावा कर रही है, वहीं तिलहर तहसील के जैतीपुर विकासखंड के ग्राम गोगेपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक Rakesh Manwal पर आरोप है कि वे लंबे समय तक विद्यालय से अनुपस्थित रहते हैं, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर में पूरे माह की हाजिरी दर्ज कर दी जाती है।
एसएमसी अध्यक्ष का आरोप
विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह के मुताबिक, प्रधानाध्यापक 19 फरवरी से 24 फरवरी तक विद्यालय नहीं पहुंचे। उनका दावा है कि हेडमास्टर महीने में केवल 4-5 दिन ही स्कूल आते हैं और बाद में रजिस्टर में पूरी उपस्थिति दर्ज कर देते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर भी प्रधानाध्यापक विद्यालय नहीं पहुंचे।
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मिड-डे मील और पढ़ाई पर असर
एसएमसी अध्यक्ष का कहना है कि विद्यालय में मिड-डे मील निर्धारित मीनू के अनुसार नहीं बन रहा है और पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है। उनका कहना है कि जब प्रधानाध्यापक ही नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहेंगे तो बच्चों की शिक्षा प्रभावित होना स्वाभाविक है।
अधिकारियों को दी गई सूचना
ग्रामीणों के अनुसार, 4 फरवरी को खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) जैतीपुर को शिकायत दी गई थी। कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक अधिकारियों का फोन भी नहीं उठाते और जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन हैं।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और विद्यालय की व्यवस्था में कब सुधार होता है।
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सीएम योगी जापान दौरा: निवेश की दिशा में बड़ा कदम
सीएम योगी का जापान दौरा: पहले ही दिन 11 हजार करोड़ के एमओयू, निवेश की नई उड़ान

हिरोशिमा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीएम योगी जापान दौरा के पहले ही दिन प्रदेश के लिए बड़ी आर्थिक उपलब्धि सामने आई है। जापान में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान राज्य सरकार ने करीब 11 हजार करोड़ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
इन समझौतों में प्रमुख जापानी कंपनियां शामिल हैं, जिनमें Kubota Corporation, Minda Corporation, Japan Aviation Electronics Industry और Nagase & Co., Ltd. जैसी वैश्विक स्तर की कंपनियां शामिल हैं।
यह 11 हजार करोड़ एमओयू उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, आधुनिक तकनीक और रोजगार सृजन के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
सीएम योगी जापान दौरा के दौरान हुए समझौते कई अहम क्षेत्रों से जुड़े हैं:
ऑटोमोबाइल और कृषि उपकरण निर्माण
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन
फूड प्रोसेसिंग और एग्रीटेक
लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग
हरित ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल तकनीक
विशेष रूप से Kubota Corporation द्वारा कृषि उपकरण निर्माण में विस्तार की योजना से प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई तकनीक मिलेगी। वहीं Japan Aviation Electronics Industry द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश से यूपी में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी।
प्रदेश सरकार के अनुसार, इन 11 हजार करोड़ एमओयू से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि, बिजली, कानून-व्यवस्था और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सीएम योगी जापान दौरा का मुख्य उद्देश्य यूपी को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है।
पहले दिन मुख्यमंत्री ने जापान के उद्योगपतियों और बिजनेस समूहों के साथ कई राउंड टेबल मीटिंग कीं।
बैठकों में उत्तर प्रदेश की नई औद्योगिक नीति, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की विस्तृत जानकारी दी गई।
निवेशकों को यह भी बताया गया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए सुधारों के कारण निवेश का वातावरण पहले से कहीं अधिक अनुकूल है।
सीएम योगी जापान दौरा के तहत आगामी दिनों में और भी निवेश प्रस्तावों पर बातचीत जारी रहने की संभावना है।
जापानी कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश आकर्षण का केंद्र बनने के प्रमुख कारण:
भारत का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार
मजबूत सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से कनेक्टिविटी
युवा और कुशल कार्यबल
निवेशकों के लिए पारदर्शी नीति
इन कारणों से 11 हजार करोड़ एमओयू के साथ शुरू हुआ यह दौर आने वाले समय में और बड़े निवेश में बदल सकता है।
राज्य सरकार का लक्ष्य यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाना है।
सीएम योगी जापान दौरा इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और तकनीकी विकास को बढ़ावा देना शामिल है।
सरकार का मानना है कि जापान के साथ तकनीकी सहयोग से प्रदेश में गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों बढ़ेंगी।
गोमतीनगर में IT रेड के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
लखनऊ समेत तीन जिलों में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह पर आयकर छापेमारी, 50 से ज्यादा अधिकारी जांच में जुटे
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह आयकर छापेमारी की कार्रवाई से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। उमाशंकर सिंह के लखनऊ समेत तीन जिलों में स्थित आवास और कार्यालयों पर आयकर विभाग की टीमों ने एक साथ छापेमारी शुरू की है। सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई उनकी एक पुरानी फर्म से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर की गई है।
बताया जा रहा है कि उमाशंकर सिंह आयकर छापेमारी के तहत पांच अलग-अलग टीमें पुलिस बल के साथ विभिन्न ठिकानों पर दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं। इन टीमों में 50 से अधिक अधिकारी शामिल हैं, जो बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े कागजात, निवेश और आय-व्यय का मिलान कर रहे हैं।
लखनऊ के गोमतीनगर आवास पर सुबह से जांच
सूत्रों के मुताबिक छापेमारी की कार्रवाई बुधवार सुबह शुरू हुई। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विधायक के आवास और कार्यालय में आयकर अधिकारियों ने प्रवेश कर दस्तावेजों की जांच प्रारंभ की। गोमतीनगर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
इस उमाशंकर सिंह आयकर छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, फर्म से जुड़े लेनदेन दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण कागजात जब्त किए हैं। आयकर विभाग की टीमों ने कर्मचारियों से भी पूछताछ की है।
बलिया समेत अन्य जिलों में भी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार लखनऊ के अलावा बलिया और एक अन्य जिले में भी एक साथ कार्रवाई की गई है। सभी स्थानों पर समन्वित तरीके से जांच चल रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह छापेमारी पूर्व में दर्ज शिकायतों और वित्तीय गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद की गई है।
हालांकि आयकर विभाग की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में कुछ अहम वित्तीय लेनदेन संदिग्ध पाए गए हैं।
पुरानी फर्म से जुड़े दस्तावेज जांच के केंद्र में
सूत्र बताते हैं कि विधायक की एक पुरानी फर्म से संबंधित आय और निवेश के दस्तावेज जांच के केंद्र में हैं। आयकर विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या आय के स्रोत और घोषित आय में कोई अंतर है।
उमाशंकर सिंह आयकर छापेमारी की कार्रवाई के दौरान संपत्ति के कागजात, बैंक खातों का विवरण, साझेदारी फर्म के दस्तावेज और पिछले कुछ वर्षों के आयकर रिटर्न की फाइलें खंगाली जा रही हैं।
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स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा
बताया जा रहा है कि विधायक का स्वास्थ्य पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रहा है। छापेमारी के दौरान उनके परिवार के सदस्य मौजूद थे। अधिकारियों ने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक औपचारिकताओं का पालन किया।
स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों और समर्थकों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, पुलिस बल तैनात
आयकर विभाग की टीमों के साथ भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। आवास और कार्यालय के बाहर मीडिया कर्मियों और स्थानीय लोगों की भीड़ देखी गई।
गोमतीनगर क्षेत्र में यातायात पर भी आंशिक प्रभाव पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी जाएगी।
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राजनीतिक मायने और संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई का राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। बहुजन समाज पार्टी के विधायक के खिलाफ चल रही इस उमाशंकर सिंह आयकर छापेमारी से प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
आयकर विभाग की प्रक्रिया क्या होती है?
आयकर विभाग को जब किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कर चोरी या आय में गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, तो प्रारंभिक जांच के बाद सर्च और सीजर की कार्रवाई की जाती है। इसमें दस्तावेज, नकदी, आभूषण, डिजिटल डेटा और अन्य संपत्ति की जांच की जाती है।
यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल उमाशंकर सिंह आयकर छापेमारी की कार्रवाई जारी है। दस्तावेजों की जांच के बाद विभाग की ओर से विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।इस मामले में आयकर विभाग की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान आएगा, स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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असम के कछार जिले में सामूहिक दुष्कर्म और वसूली: सिलचर में युवती से गैंगरेप, दो गिरफ्तार, जांच तेज

सिलचर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)असम के कछार जिले में सामूहिक दुष्कर्म का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। सिलचर शहर के पास घूमने आई 28 वर्षीय युवती के साथ कथित तौर पर सात लोगों ने उसके पुरुष मित्र के सामने सामूहिक दुष्कर्म किया और उससे जबरन पैसे भी वसूले। यह असम सामूहिक दुष्कर्म मामला 19 फरवरी का बताया जा रहा है, जिसकी शिकायत बाद में दर्ज कराई गई।
पुलिस के अनुसार, यह घटना सिलचर के समीप बाईपास रोड पर हुई। शिकायत के आधार पर कछार जिला में सिलचर सदर पुलिस थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस कछार गैंगरेप मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी ।
पीड़िता के परिजनों के अनुसार, युवती अपने पुरुष मित्र के साथ सिलचर से कुछ किलोमीटर दूर बाईपास रोड पर कार में बैठी थी। तभी एक एसयूवी में सवार करीब सात लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने पहले दोनों से पूछताछ की, फिर युवक के साथ मारपीट की और उसे बंधक बनाकर उसके सामने युवती से बारी-बारी से दुष्कर्म किया।
इस असम गैंगरेप मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने न केवल सामूहिक दुष्कर्म किया बल्कि उसे एक आरोपी के बैंक खाते में 10,000 रुपये ट्रांसफर करने के लिए भी मजबूर किया। यह कृत्य जान से मारने की धमकी देकर किया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया है
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें शामिल हैं:
धारा 70(1) – सामूहिक दुष्कर्म
धारा 308(5) – जान से मारने की धमकी देकर वसूली
धारा 310(2) – डकैती
धारा 351(2) – आपराधिक धमकी
धारा 61(2) – एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा गैरकानूनी कृत्य
धारा 76 – महिला का वस्त्र हरण करने की मंशा
धारा 79 – महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य
इस सिलचर गैंगरेप केस में पुलिस का कहना है कि पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और उसका बयान भी दर्ज कर लिया गया है।
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शुरुआत में पुलिस ने इस असम सामूहिक दुष्कर्म मामले पर चुप्पी साध रखी थी। लेकिन जब सिलचर के एक पत्रकार पर कथित तौर पर आरोपियों के परिवार के सदस्यों ने हमला किया, तब मामला तूल पकड़ गया। पत्रकार का दावा है कि नेशनल हाईवे रोड पुलिस थाना के पास उसे रोका गया, रिपोर्टिंग को लेकर सवाल पूछे गए और फिर उसके साथ मारपीट की गई।
स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से पत्रकार की जान बच सकी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सिलचर गैंगरेप केस ट्रेंड करने लगा और व्यापक जनाक्रोश देखने को मिला।
इस कछार गैंगरेप मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सुष्मिता देव ने कछार जिले के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली और कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस असम गैंगरेप मामले को दबाने की कोई कोशिश नहीं होनी चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी बयान जारी कर कहा गया है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाई जाए। राजनीतिक दबाव के बाद पुलिस ने जांच में तेजी लाने का आश्वासन दिया है।
पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पीड़िता द्वारा दो आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है। बैंक ट्रांजैक्शन के आधार पर भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
असम सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस ने कहा है कि तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
समाज में बढ़ती चिंता
सिलचर गैंगरेप केस ने कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कछार गैंगरेप की यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे असम में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि सुनसान इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए और महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
महिला अधिकार संगठनों ने भी इस असम गैंगरेप मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पीड़िता को सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
क्या कहते हैं कानून विशेषज्ञ?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सामूहिक दुष्कर्म और धमकी देकर वसूली जैसे अपराधों में कड़ी सजा का प्रावधान है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा डकैती और आपराधिक धमकी की धाराएं भी सजा की अवधि को बढ़ा सकती हैं।
असम सामूहिक दुष्कर्म और कछार गैंगरेप का यह मामला बेहद गंभीर है। सिलचर गैंगरेप केस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।
जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस असम गैंगरेप मामले में और कौन-कौन शामिल था। फिलहाल, दो गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
प्यार का खौफनाक अंजाम: बक्सर में दुल्हन पर फायरिंग
बक्सर फायरिंग: सनकी आशिक ने स्टेज पर दुल्हन को मारी गोली, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में नाजुक हालत
बक्सर फायरिंग: शादी की खुशियां मातम में बदलीं
बक्सर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) फायरिंग की यह घटना बिहार के बक्सर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चौसा बाजार मल्लाह टोली की है, जहां मंगलवार की रात एक शादी समारोह के दौरान सनकी आशिक ने स्टेज पर चढ़कर दुल्हन को गोली मार दी। वरमाला की तैयारी चल रही थी, मेहमानों की भीड़ मौजूद थी और माहौल पूरी तरह जश्न का था। तभी अचानक गोलियों की आवाज ने पूरे समारोह को दहला दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक दीनबंधु नाम का आरोपी लड़कियों के बीच से होता हुआ सीधे स्टेज तक पहुंचा और दुल्हन आरती कुमारी (पिता – नंद जी मल्लाह) को नाभि के पास गोली मार दी। घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई और आरोपी मौके से फरार हो गया।
स्टेज पर चढ़कर चलाई गोली, मचा हड़कंप
जानकारी के मुताबिक बारात उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुरेमनपुर से आई थी। दूल्हा-दुल्हन जयमाला के लिए स्टेज पर खड़े थे। इसी दौरान आरोपी युवक अचानक भीड़ को चीरते हुए स्टेज पर चढ़ गया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उसने दुल्हन पर फायरिंग कर दी।
गोली लगते ही दुल्हन स्टेज पर गिर पड़ी। मौके पर मौजूद परिजनों और बारातियों में भगदड़ मच गई। कई लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। शादी का माहौल कुछ ही सेकंड में मातम में बदल गया।
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पेट में लगी गोली, हालत गंभीर
घायल आरती कुमारी के बयान के अनुसार, गोली उसके पेट में नाभि के पास लगी है। परिजन उसे तुरंत सदर अस्पताल बक्सर लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रेफर कर दिया।
इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे बीएचयू ट्रॉमा सेंटर, वाराणसी भेजा गया, जहां उसका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
एकतरफा प्रेम या रंजिश? जांच में जुटी पुलिस
बक्सर फायरिंग मामले में शुरुआती जांच से यह बात सामने आ रही है कि आरोपी युवक दुल्हन से एकतरफा प्रेम करता था। शादी तय होने से वह नाराज था और इसी वजह से उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मुफस्सिल थाना पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
परिवार में पसरा मातम, शादी रुकी
घटना के बाद शादी की सारी रस्में रोक दी गईं। दूल्हा पक्ष और दुल्हन पक्ष दोनों ही सदमे में हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में शहनाई बज रही थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी समारोह में सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। अगर समय रहते किसी ने आरोपी को रोक लिया होता, तो शायद यह घटना टल सकती थी।
इलाके में दहशत, बढ़ी सुरक्षा
बक्सर फायरिंग के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने चौसा बाजार और आसपास के क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है। लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
प्रशासन का कहना है कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर
घटना के बाद बक्सर फायरिंग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। कई यूजर्स ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।
कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
इस सनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शादी जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम में हथियार लेकर पहुंचना और फायरिंग करना सुरक्षा तंत्र की बड़ी चूक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में स्थानीय प्रशासन और परिवार को मिलकर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए।
आगे क्या?
फिलहाल दुल्हन का इलाज जारी है और परिवार उसकी सलामती की दुआ कर रहा है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है। बक्सर फायरिंग मामले में आगे की कार्रवाई और गिरफ्तारी को लेकर सभी की नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं।
बक्सर फायरिंग की यह घटना समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है। एकतरफा प्रेम और सनक किस तरह हिंसक रूप ले सकती है, इसका यह ताजा उदाहरण है। शादी जैसे पवित्र और खुशी के मौके पर हुई यह वारदात न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे इलाके के लिए दर्दनाक है।
जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होता और पीड़िता की हालत में सुधार नहीं होता, तब तक यह मामला चर्चा में बना रहेगा।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सुबह-सुबह 14 स्थानों पर सघन चेकिंग
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) जनपद में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने सुबह विशेष देवरिया मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान चलाया। संजीव सुमन के निर्देशन में प्रातः 5:00 बजे से 8:00 बजे तक जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर चेकिंग और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर सुरक्षा का भरोसा दिलाना और सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा देना रहा। पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर छोटे-मोटे विवादों को मौके पर ही सुलझाने का प्रयास किया तथा मित्र पुलिस की अवधारणा को मजबूत किया।चेकिंग के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों पर विशेष नजर रखी गई।पुलिस टीमों ने कुल 14 स्थानों पर सघन जांच करते हुए 299 व्यक्तियों और 186 वाहनों की तलाशी ली। तीन सवारी बैठाने, मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान की कार्रवाई की गई।
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साथ ही अवैध असलहा, चोरी की गाड़ियों और मादक पदार्थों की रोकथाम को लेकर भी सघन निगरानी रखी गई।अभियान के दौरान आमजन ने पुलिस की सक्रियता की सराहना की और सुबह के समय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संतोष जताया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि Deoria Morning Walker Checking Abhiyan आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगा, ताकि जनपद में शांति, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण कायम रखा जा सके।जनपदीय पुलिस का यह कदम न केवल अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज और पुलिस के बीच मजबूत संवाद स्थापित करने की दिशा में भी एक प्रभावी पहल साबित हो रहा है।
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महराजगंज की ऐतिहासिक पहचान पर चला रेल का पहिया: 102 साल पुराना कोयला इंजन लखनऊ रवाना, लक्ष्मीपुर में आक्रोश

डॉ सतीश पाण्डेय
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की ऐतिहासिक धरोहर और औद्योगिक विरासत से जुड़ा 102 साल पुराना कोयला इंजन लखनऊ भेजे जाने के बाद पूरे क्षेत्र में गहरी नाराजगी और मायूसी का माहौल है। लक्ष्मीपुर में दशकों से स्थापित यह प्राचीन इंजन केवल एक मशीन नहीं, बल्कि महराजगंज की ऐतिहासिक पहचान का जीवंत प्रतीक माना जाता रहा है। रेल प्रशासन द्वारा इसे अचानक हटाकर लखनऊ भेज दिए जाने से स्थानीय नागरिकों, इतिहास प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में असंतोष खुलकर सामने आ रहा है।
बताया जाता है कि वर्ष 1924 में स्थापित यह 102 साल पुराना कोयला इंजन ब्रिटिश कालीन औद्योगिक परियोजना का हिस्सा था। उस समय यह क्षेत्र के आर्थिक और तकनीकी विकास का आधार माना जाता था। लक्ष्मीपुर कोयला इंजन ने न केवल माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को गति दी, बल्कि यहां की श्रम संस्कृति और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित किया। पीढ़ियों से यह इंजन स्थानीय लोगों के लिए गौरव और महराजगंज धरोहर का केंद्र बना हुआ था।
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नौतनवां क्षेत्र के किसान नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता नागेंद्र प्रसाद शुक्ला ने इस घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि महराजगंज की ऐतिहासिक पहचान की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जनप्रतिनिधि और प्रशासन पहल करते तो 102 साल पुराना कोयला इंजन जिले में ही संरक्षित रह सकता था। उन्होंने इसे जनपद की उपेक्षा बताते हुए कहा कि यह केवल एक इंजन का स्थानांतरण नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक क्षति है।
इतिहासकारों का मानना है कि लक्ष्मीपुर कोयला इंजन को हेरिटेज मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता था। यदि इसे संरक्षित कर संग्रहालय, पर्यटन स्थल या शैक्षिक केंद्र में परिवर्तित किया जाता, तो महराजगंज धरोहर को नई पहचान मिलती। इससे जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलता और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होते। विशेषज्ञों के अनुसार, 102 साल पुराना कोयला इंजन रेलवे इतिहास के अध्ययन और विरासत संरक्षण का महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता था।
स्थानीय व्यापारियों और युवाओं का कहना है कि महराजगंज की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करने के लिए ऐसे प्रतीकों का संरक्षण आवश्यक है। लक्ष्मीपुर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में इस विषय को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सोशल मीडिया पर भी #महराजगंजधरोहर और #लक्ष्मीपुरकोयला_इंजन जैसे शब्द ट्रेंड कर रहे हैं। लोगों का सवाल है कि क्या बिना व्यापक जनपरामर्श और ऐतिहासिक महत्व के आकलन के इतना बड़ा निर्णय लेना उचित था।
रेल प्रशासन की ओर से अब तक इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, इंजन को लखनऊ में संभावित संरक्षण या प्रदर्शन के उद्देश्य से भेजा गया है। यदि ऐसा है तो भी स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि महराजगंज की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी धरोहर को उसी स्थान पर संरक्षित किया जाना चाहिए था, जहां वह एक सदी से अधिक समय से खड़ी थी।
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धरोहर विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसी कई ऐतिहासिक संपत्तियां उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। यदि समय रहते संरक्षण की ठोस नीति नहीं बनाई गई तो आने वाले वर्षों में महराजगंज धरोहर जैसी अमूल्य विरासतें समाप्त हो सकती हैं। 102 साल पुराना कोयला इंजन केवल धातु और मशीन का ढांचा नहीं था, बल्कि यह उस दौर की तकनीकी प्रगति और स्थानीय इतिहास की कहानी कहता था।
लक्ष्मीपुर के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने बचपन से इस इंजन को देखा है। कई लोगों की यादें इससे जुड़ी हुई हैं। स्कूलों के बच्चे यहां आकर फोटो खिंचवाते थे और इतिहास के बारे में सीखते थे। ऐसे में लक्ष्मीपुर कोयला इंजन का अचानक हटाया जाना लोगों को भावनात्मक रूप से आहत कर गया है।
सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो इंजन को वापस महराजगंज लाया जाए या फिर यहां एक समर्पित हेरिटेज पार्क विकसित किया जाए, जहां महराजगंज की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित और प्रदर्शित किया जा सके। कई युवाओं ने ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की भी योजना बनाई है। उनका कहना है कि यदि 102 साल पुराना कोयला इंजन जिले से बाहर स्थायी रूप से चला गया, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी स्थानीय विरासत से वंचित हो जाएंगी।
यह प्रकरण अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रहा। यह महराजगंज धरोहर, स्थानीय अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा बन चुका है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य में ऐसे किसी भी निर्णय से पहले व्यापक जनसंवाद और ऐतिहासिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर पहल करें तो महराजगंज की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखना संभव है। जरूरत है एक समन्वित योजना, स्पष्ट नीति और स्थानीय सहभागिता की।
फिलहाल लक्ष्मीपुर में पसरी मायूसी इस बात का संकेत है कि लोग अपनी विरासत के प्रति सजग हैं। अब देखना यह है कि 102 साल पुराना कोयला इंजन और उससे जुड़ी महराजगंज धरोहर को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
भौतिक प्रगति बनाम नैतिक पतन: क्या हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं?
काम, क्रोध, लोभ और मोह की आग में झुलसता मानव जीवन: आधुनिकता की दौड़ में नैतिक पतन का गंभीर संकट
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज का समय अभूतपूर्व भौतिक प्रगति, तकनीकी उन्नति और सुविधाओं का युग है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक गहरी चिंता छिपी है—मानव के भीतर नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का निरंतर क्षरण। काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे चार प्रमुख विकार मानव जीवन को भीतर से खोखला करते जा रहे हैं। आधुनिकता की अंधी दौड़ में व्यक्ति अपने संस्कार, रिश्तों की मर्यादा और सामाजिक उत्तरदायित्वों को पीछे छोड़ता जा रहा है, जिसका परिणाम परिवारों के विघटन, सामाजिक तनाव और मानसिक अशांति के रूप में सामने आ रहा है।
यह प्रश्न आज केवल धार्मिक या दार्शनिक विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी गहराई से महसूस किया जा रहा है। काम, क्रोध, लोभ और मोह का बढ़ता प्रभाव व्यक्ति, परिवार और समाज—तीनों को प्रभावित कर रहा है।
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धर्मग्रंथों की चेतावनी और आज की वास्तविकता
भारतीय संस्कृति ने सदियों पहले ही इन विकारों के खतरे को पहचाना था।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि काम, क्रोध और लोभ नरक के तीन द्वार हैं, जो आत्मा का पतन करते हैं। वहीं रामचरितमानस में भी इन अवगुणों से बचकर संयमित और मर्यादित जीवन अपनाने की प्रेरणा दी गई है।
संत-महात्माओं का मत रहा है कि जब तक मनुष्य अपने मन पर नियंत्रण नहीं रखेगा, तब तक वास्तविक शांति और संतोष संभव नहीं है। लेकिन वर्तमान समाज में भौतिक उपलब्धियों की होड़ ने आत्मचिंतन की प्रक्रिया को लगभग समाप्त कर दिया है। व्यक्ति बाहरी सफलता को ही जीवन की अंतिम उपलब्धि मान बैठा है।
काम, क्रोध, लोभ और मोह: सामाजिक समस्याओं की जड़
आज यदि हम समाज की प्रमुख समस्याओं पर दृष्टि डालें, तो पाएंगे कि अपराध, भ्रष्टाचार, पारिवारिक कलह और हिंसा की जड़ में यही चार विकार हैं।
लोभ भ्रष्टाचार और अनैतिक कमाई को जन्म देता है।
क्रोध रिश्तों को तोड़ता और हिंसा को बढ़ाता है।
काम अनियंत्रित इच्छाओं के कारण अपराधों को बढ़ावा देता है।
मोह विवेक शक्ति को कमजोर कर निर्णय क्षमता को प्रभावित करता है।
काम, क्रोध, लोभ और मोह के कारण व्यक्ति सही और गलत के बीच संतुलित निर्णय लेने में असफल हो जाता है। परिणामस्वरूप समाज में विश्वास और सामंजस्य का संकट गहराता जा रहा है।
आभासी दुनिया और बढ़ती मानसिक अशांति
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार प्रतिस्पर्धा, दिखावा और तुलना की प्रवृत्ति ने लोगों के भीतर असंतोष को बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया और आभासी दुनिया की चकाचौंध ने अपेक्षाओं को अवास्तविक बना दिया है। हर व्यक्ति दूसरों की सफलता से अपनी तुलना करता है, जिससे हीन भावना और तनाव उत्पन्न होता है।
तेजी से बदलते जीवन में व्यक्ति के पास स्वयं के लिए समय नहीं है। ध्यान, योग, संवाद और पारिवारिक समय की कमी ने मानसिक संतुलन को प्रभावित किया है। काम, क्रोध, लोभ और मोह का प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। अवसाद, अकेलापन और असुरक्षा की भावना तेजी से बढ़ रही है।
परिवार और शिक्षा की भूमिका
समाजशास्त्रियों का मानना है कि इस चुनौती का समाधान केवल कानून या दंड से संभव नहीं है। इसके लिए मूल्य आधारित शिक्षा और संस्कारों की पुनर्स्थापना आवश्यक है।
परिवार में बच्चों को नैतिक शिक्षा, संयम और सहानुभूति का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। विद्यालयों में चरित्र निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि बचपन से ही बच्चों को काम, क्रोध, लोभ और मोह पर नियंत्रण का महत्व समझाया जाए, तो आने वाली पीढ़ी अधिक संतुलित और संवेदनशील होगी।
समाज में सकारात्मक संवाद, सामूहिक प्रार्थना, योग और ध्यान जैसे प्रयास भी आंतरिक शांति को बढ़ावा दे सकते हैं। जब व्यक्ति आत्मसंयम और संतोष को अपनाता है, तभी वह वास्तविक सुख का अनुभव कर पाता है।
आधुनिकता और नैतिकता का संतुलन
यह आवश्यक नहीं कि आधुनिकता को त्याग दिया जाए। बल्कि आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक विकास और नैतिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। तकनीक और सुविधाएं जीवन को सरल बनाती हैं, लेकिन जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सफलता नहीं हो सकता।
वास्तविक प्रगति वही है, जिसमें व्यक्ति आंतरिक शांति, संतोष और आत्मविश्वास प्राप्त करे। यदि समाज को स्थायी विकास और सामाजिक सौहार्द की दिशा में आगे बढ़ना है, तो काम, क्रोध, लोभ और मोह पर नियंत्रण की सामूहिक चेतना विकसित करनी होगी।
अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि मानव जीवन की वास्तविक सफलता बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन में निहित है। आत्मचिंतन, आत्मसंयम और नैतिकता ही वह मार्ग है, जो व्यक्ति को स्थायी सुख और शांति प्रदान कर सकता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वयं से प्रश्न करें—क्या हम केवल भौतिक उपलब्धियों के पीछे भाग रहे हैं, या अपने भीतर झांकने का साहस भी रखते हैं? जब तक काम, क्रोध, लोभ और मोह पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक सुख और शांति केवल एक भ्रम बनकर रह जाएंगे।
