Friday, June 12, 2026
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चेकिंग अभियान में बड़ी सफलता, गोतस्करों की साजिश नाकाम, 8 गोवंशीय पशु बरामद

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में गोतस्करी एवं गोवध की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस की सतर्कता से गोवध के लिए क्रूरता पूर्वक ले जाए जा रहे गोवंशीय पशुओं को बरामद कर तस्करों की साजिश नाकाम कर दी गई, हालांकि अंधेरे का फायदा उठाकर तस्कर मौके से फरार हो गए।
पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीना के निर्देशन में,अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी नौतनवां अंकुर गौतम के पर्यवेक्षण में थाना बरगदवां प्रभारी शैलेन्द्र शुक्ला के नेतृत्व में सोमवार को लगभग गौ-तस्करी की रोकथाम के लिए चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान ठूठीबारी थाना क्षेत्र के पड़िया ताल मंदिर के पास पुलिस टीम मौजूद थी। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि सफेद रंग की एक पिकअप वाहन में गोवंशीय पशुओं को गोवध के उद्देश्य से गड़ौरा बाजार ठूठीबारी से सीहाभार होते हुए खैरहवा जंगल टोला की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना पर तत्परता दिखाते हुए पुलिस टीम ने खैराटी चौराहे के पास घेराबंदी की। कुछ देर बाद सीहाभार की ओर से आती संदिग्ध पिकअप को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस को देखकर चालक वाहन को तेज गति से बेलहिया की ओर भगाने लगा।
पुलिस द्वारा पीछा करने पर ग्राम सेमरहना के पास चकरोड मार्ग पर पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने वाहन की तलाशी ली, जिसमें कोई अभियुक्त नहीं मिला, लेकिन वाहन के पीछे बने ढाले में कुल 8 गोवंशीय पशु अत्यंत क्रूरता से बंधे पाए गए।
सूचना पर पहुंचे पशु चिकित्साधिकारी द्वारा परीक्षण के उपरांत 3 गाय एवं 1 बछड़े को मृत घोषित किया गया, जबकि शेष 1 गाय और 3 बछड़े जीवित एवं स्वस्थ्य पाए गए। मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया गया।
इस संबंध में थाना बरगदवां मु.अ.सं. 06/2026 के तहत उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम की धारा 3/5A/8 एवं पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 में मुकदमा पंजीकृत कर आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है। पुलिस ने पिकअप वाहन संख्या UP57 BT 3844 को भी कब्जे में ले लिया है।
जनपद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गोतस्करी और पशु क्रूरता के विरुद्ध अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ लगातार जारी रहेगा।

Border 2 Advance Booking: रिलीज से पहले बॉक्स ऑफिस पर सनी देओल की फिल्म का तूफान, 48 घंटे में रिकॉर्ड प्री-सेल

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। सनी देओल स्टारर बहुप्रतीक्षित देशभक्ति ड्रामा फिल्म ‘बॉर्डर 2’ इस शुक्रवार 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। रिलीज से पहले ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार शुरुआत के संकेत दे दिए हैं। सोमवार से शुरू हुई फिल्म की एडवांस बुकिंग ने महज 48 घंटों में रिकॉर्ड तोड़ प्री-सेल दर्ज कर ली है।

इतना ही नहीं, ‘बॉर्डर 2’ ने सनी देओल की पिछली हिट फिल्म ‘जाट’ की कुल एडवांस बुकिंग को भी पीछे छोड़ दिया है। साथ ही इसने हालिया हिट फिल्म ‘धुरंधर’ और पैन-इंडिया एक्शन फिल्म ‘वॉर 2’ के एडवांस बुकिंग आंकड़ों को भी पार कर लिया है।


Border 2 Advance Booking Collection अब तक कितनी?

भारत में सोमवार सुबह ‘बॉर्डर 2’ की एडवांस बुकिंग शुरू हुई थी। फिल्म को लेकर जबरदस्त बज बना हुआ है, जिसके चलते पहले दिन का शो देखने के लिए दर्शकों में जबरदस्त होड़ मची हुई है।

Sacnilk के आंकड़ों के अनुसार:

• हिंदी 2D फॉर्मेट में अब तक 1,02,750 टिकटों की बिक्री

• बिना ब्लॉक सीटों के एडवांस बुकिंग कलेक्शन: ₹3.29 करोड़

• ब्लॉक सीटों के साथ कुल प्री-सेल कमाई: ₹6.53 करोड़

रिलीज से पहले ही करोड़ों की कमाई कर लेना फिल्म की जबरदस्त ओपनिंग का संकेत माना जा रहा है।

इन फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ चुकी है ‘बॉर्डर 2’

रिलीज से दो दिन पहले ही ‘बॉर्डर 2’ की पहले दिन की एडवांस बुकिंग कमाई ने सनी देओल की फिल्म ‘जाट’ को पीछे छोड़ दिया है।

• ‘जाट’ की एडवांस बुकिंग: ₹2.4 करोड़

• ‘जाट’ का ओपनिंग डे कलेक्शन: ₹9 करोड़

हालांकि, एडवांस बुकिंग के मामले में यह अभी भी ‘गदर 2’ से पीछे है, जिसने रिलीज से पहले ₹17.60 करोड़ का कलेक्शन किया था।
फिर भी ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज और कल की प्री-सेल में और उछाल आ सकता है, जिससे ‘बॉर्डर 2’ बमफाड़ ओपनिंग कर सकती है।

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Border 2 के बारे में सब कुछ

‘बॉर्डर 2’ जेपी दत्ता की 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बॉर्डर’ की सीक्वल है।

निर्देशक: अनुराग सिंह

मुख्य कलाकार: सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी

निर्माता: भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जे.पी. दत्ता, निधि दत्ता

रिलीज डेट: 23 जनवरी (गणतंत्र दिवस से पहले

जमीन रजिस्ट्री के दबाव में अपहरण और पुलिस उत्पीड़न का आरोप

राजेंद्र यादव ने प्रेस वार्ता में लगाए गंभीर आरोप

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जंगल सिकरी थाना खोराबार निवासी राजेंद्र यादव ने पुलिस और एक स्थानीय व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए। राजेंद्र यादव ने बताया कि 17 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 45 मिनट पर खोराबार थाने की गाड़ी से आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें घर के बाहर से अपहरण के तरीके से उठा लिया और बेलवार चौकी ले जाकर बंधक बनाकर रखा।
राजेंद्र यादव के अनुसार, उन्हें बिना किसी लिखित सूचना या कारण बताए चौकी पर रखा गया। लगभग शाम 4 बजे थानाध्यक्ष इत्यानंद (खोराबार) वहां पहुंचे और उन पर दबाव बनाने लगे कि वे जंगल सिकरी केसरवानी पेट्रोल पंप के पास स्थित 32 डिसमिल जमीन को होशिला सिंह के नाम रजिस्ट्री कर दें। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दबाव लगातार तीन दिनों तक बनाया जाता रहा।
राजेंद्र यादव ने बताया कि 18 जनवरी 2026 को होशिला सिंह स्वयं भी चौकी पर पहुंचे और खुलेआम धमकी दी कि यदि जमीन की रजिस्ट्री नहीं की गई तो पुलिस उनके साथ वही करेगी, जैसा वे चाहेंगे। राजेंद्र के अनुसार, उनसे कहा गया कि जब तक जमीन की रजिस्ट्री नहीं होगी, तब तक पुलिस उन्हें अपने कब्जे में रखेगी।
प्रेस वार्ता में राजेंद्र यादव ने एक बेहद संवेदनशील आरोप लगाते हुए कहा कि नवंबर 2025 में उनके बड़े भाई राजनाथ यादव ने आत्महत्या कर ली थी, और यह कदम उन्होंने होशिला सिंह के कथित दबाव में उठाया था। राजेंद्र ने दावा किया कि चौकी पर उनसे कहा गया कि जैसे उनके भाई को मजबूर किया गया, वैसे ही उन्हें भी किया जा सकता है।
राजेंद्र यादव ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों द्वारा यह कहा गया कि प्रदेश में एनकाउंटर अभियान चल रहा है और जरूरत पड़ी तो उनका भी एनकाउंटर कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि जमीन दिलवाने के लिए पुलिस द्वारा अपहरण कर बंधक बनाए रखने जैसी कार्रवाई की गई, जो कानून के खिलाफ है।
उन्होंने बताया कि जब परिजन राजेंद्र को खोजते हुए थानों में पहुंचे तो थानेदार ने यह कहकर इंकार कर दिया कि राजेंद्र को पुलिस नहीं लाई है। परिजन तीन दिनों तक शहरी क्षेत्र में अलग-अलग जगह भटकते रहे, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई।
राजेंद्र यादव के अनुसार, जब यह मामला एडीजी जोन मुथा अशोक जैन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राज करन नय्यर के संज्ञान में आया, तब तीन दिन बाद उन्हें खोराबार थाने से छोड़ा गया और परिजनों को सुपुर्द किया गया। इस पर उन्होंने दोनों अधिकारियों का धन्यवाद भी किया।
प्रेस वार्ता में राजेंद्र यादव ने सवाल उठाया कि
क्या थानाध्यक्ष ने उन्हें बिना किसी केस के तीन दिनों तक हिरासत में रखा?
क्या इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई थी या नहीं?
क्या पुलिस किसी निजी व्यक्ति के दबाव में आकर जमीन रजिस्ट्री कराने के लिए इस तरह की कार्रवाई कर सकती है?
राजेंद्र यादव ने यह आशंका भी जताई कि 32 डिसमिल पुस्तैनी जमीन को लेकर होशिला सिंह से उन्हें जान का खतरा बना हुआ है और कभी भी उनकी हत्या कराई जा सकती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रेस वार्ता के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Russia Sanctions Bill: रूसी तेल पर 500% टैरिफ की ट्रंप तैयारी

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित 500 प्रतिशत टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस टैरिफ को लागू करने के लिए अमेरिकी सीनेट की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बार टैरिफ की धमकी का मुख्य निशाना चीन है, न कि भारत।

स्कॉट बेसेंट ने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद कर दी है। उनके अनुसार, अमेरिका की सख्त व्यापार नीति के चलते भारत ने अपने आयात पैटर्न में बदलाव किया है।

500% टैरिफ वाला Russia Sanctions Bill क्या है?

जिस विधेयक का ज़िक्र बेसेंट कर रहे थे, उसे Russia Sanctions Bill कहा जा रहा है। इसके तहत अमेरिका उन देशों पर कम से कम 500% टैरिफ लगा सकता है जो रूस से तेल खरीदते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को आर्थिक समर्थन देते हैं। इस बिल को इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिल चुकी है।

स्कॉट बेसेंट का बयान

एक इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा,
“रूसी तेल खरीदने वालों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सीनेट में रखा है। हम देखेंगे कि यह पास होता है या नहीं, लेकिन हमारा मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप इसे IEPA (International Emergency Powers Act) के तहत सीधे लागू कर सकते हैं। सीनेट केवल उन्हें यह अधिकार औपचारिक रूप से देना चाहती है।”

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यूरोप पर भी अमेरिका का हमला

व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ने यूरोपीय देशों को भी घेरा। उन्होंने कहा कि
चार साल बाद भी यूरोप रूसी तेल खरीद रहा है, जो अपने ही खिलाफ चल रहे युद्ध को फंड करने जैसा है।
बेसेंट ने दावा किया कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना शुरू किया था, लेकिन 25% अमेरिकी टैरिफ के बाद भारत ने पहले खरीद कम की और अब पूरी तरह रोक दी है।

चीन पर साधा गया सबसे बड़ा निशाना

स्कॉट बेसेंट ने चीन को रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से चीन पर 500% तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि चीन सस्ता रूसी तेल खरीदकर रूस को आर्थिक मजबूती दे रहा है और युद्ध को अप्रत्यक्ष समर्थन दे रहा है।

500% टैरिफ बिल पर भारत का आधिकारिक रुख

इस रूस प्रतिबंध विधेयक पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,
“हम प्रस्तावित Russia Sanctions Bill से पूरी तरह अवगत हैं और इससे जुड़े सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।”

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सामूहिक विवाह कार्यक्रम मे 51 जोड़े सात फेरों में बंधे

नवदंपतियों को मिला सामाजिक संबल

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
गरीब, निर्धन, असहाय और जरूरतमंद परिवारों की 51 बेटियों का सामूहिक विवाह मंगलवार की देर शाम तक गोरखपुर में भव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन के साक्षी शहर के सैकड़ों संभ्रांत व प्रबुद्धजन, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिक बने। सभी ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
यह सामूहिक विवाह एक नई आशा फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित किया गया। फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मोदी ने कहा कि समाज को बेटियों की हर आवश्यकता पूरी करने के लिए आगे आना चाहिए। “सब कुछ भगवान या सरकार पर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। हमें अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए बेटियों का कन्यादान कर पुण्य का भागीदार बनना चाहिए,” उन्होंने कहा।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “सिर्फ बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ ही नहीं, बल्कि बेटी अपनाओ, घर बसाओ का संदेश भी समाज में बुलंद होना चाहिए।”
सुधा मोदी ने बताया कि सामूहिक विवाह में नवदंपतियों को गृहस्थी की आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई, ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि इस समारोह में नेपाल की दो बेटियों के भी हाथ पीले हुए, जो आयोजन की व्यापकता और मानवीय संवेदना को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि उनके मन में बेटियों के विवाह की कल्पना करीब दस वर्ष पहले जन्मी थी। शुरुआती दौर में एक-दो बेटियों के विवाह की व्यवस्था हो पाती थी, लेकिन समाज से बढ़ते सहयोग और विश्वास के चलते आज यह संख्या 51 तक पहुंच गई है, जो उनके लिए अत्यंत सुखद और प्रेरक अनुभव है।
कार्यक्रम के दौरान भरोहियां ब्लॉक के प्रमुख भाजपा नेता संजय सिंह ने कहा कि समाज में अभी भी व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है। संभ्रांत लोगों को आगे आकर बिना दहेज विवाह को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह को बढ़ावा देकर ही दहेज जैसी कुरीतियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि आयोजन में शामिल सभी अतिथियों, बारातियों और आमंत्रित मेहमानों के लिए भोज की व्यवस्था भी की गई थी। यह आयोजन केवल विवाह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बेटियों के सम्मान, गरिमा और सामाजिक स्वीकार्यता का उत्सव बना। कन्याओं का चयन उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों—कुशीनगर, हाटा, महाराजगंज, बस्ती सहित अन्य क्षेत्रों—में मौके पर जाकर किया गया।

विकसित भारत का सपना और ज़मीनी हकीकत

भारत की सड़कें, प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का संकट — विकसित भारत 2047 के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती



भारत आज स्वयं को 21वीं सदी की उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे, शासन क्षमता, नागरिक सुरक्षा और जीवन गुणवत्ता में आमूलचूल परिवर्तन का वादा करता है। लेकिन इसी भारत में सड़कों पर गड्ढों, खुले मैनहोल, निर्माण सामग्री के बेतरतीब ढेर, अधूरे अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स और प्रशासनिक उदासीनता के कारण हर वर्ष हजारों लोग जान गंवा रहे हैं या स्थायी रूप से अपंग हो रहे हैं। यह स्थिति महज़ विडंबना नहीं, बल्कि एक गहरी संरचनात्मक विफलता का संकेत है।
मैं, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, मानता हूं कि यह संकट केवल तकनीकी या वित्तीय नहीं, बल्कि जवाबदेही और संवेदनशीलता के अभाव से उपजा हुआ है। माननीय नेताओं की समय-समय पर की जाने वाली बयानबाज़ी, 10 से 50 प्रतिशत जैसे भ्रष्टाचार के आरोप, और अधिकारियों-कर्मचारियों व संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटीज़ द्वारा आंख मूंदकर बैठ जाना — मानो आंखों पर “परसेंट का कवर” चढ़ा दिया गया हो। अब आम जनता इस सच्चाई को समझने लगी है, और यही जागरूकता भारत की विकास यात्रा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

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नोएडा में 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की गड्ढे में गाड़ी फंसने से हुई दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि मानवीय लापरवाही का परिणाम थी। सोशल मीडिया पर यह मामला इसलिए ट्रेंड हुआ, क्योंकि लोगों ने सवाल उठाया — क्या टैक्स देने वाले नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं? क्या अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही की सज़ा केवल जांच और मुआवजे तक सीमित रहेगी? यह घटना एक व्यक्ति की मृत्यु भर नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विफलता का प्रतीक बन गई।
हाल ही में गोंदिया राइस सिटी में सड़कों के गड्ढों से परेशान नागरिकों ने “भीख मांगो रैली” निकाली और जनता से पैसे इकट्ठा कर नगर परिषद को देने की बात कही, ताकि गड्ढे भरे जा सकें। छत्तीसगढ़ की भाटापारा सिटी में मेरे एक रिश्तेदार रोड पर पड़े गड्ढे के कारण एक्टिवा से गिर पड़े, लगभग एक माह तक अस्पताल में भर्ती रहे और महंगे इलाज के बाद उनकी जान बच पाई। ये घटनाएं बताती हैं कि यह समस्या देशव्यापी है और हर परिवार को कभी न कभी प्रभावित कर सकती है।
भारत का सड़क नेटवर्क विश्व में दूसरा सबसे बड़ा है, जिसकी लंबाई 63 लाख किलोमीटर से अधिक है। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा, गुणवत्ता और रखरखाव के मामले में भारत वैश्विक सूचकांकों में काफी पीछे है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामलों में भारत लगातार शीर्ष पर है। इसका बड़ा कारण सड़कों की जर्जर स्थिति, गड्ढे, असमान सतह, जलभराव और अवैज्ञानिक डिजाइन हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी भयावह है, जहां बरसात के मौसम में गड्ढे दिखाई नहीं देते और दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

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शहरी भारत में अंडर-कंस्ट्रक्शन परियोजनाओं का मलबा सड़कों पर पड़ा रहना आम बात है। नियमों के अनुसार चेतावनी संकेत, सुरक्षा घेराबंदी और समय पर मलबा हटाना अनिवार्य है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनका खुलेआम उल्लंघन होता है। नगर निकाय, पुलिस और विकास प्राधिकरण अक्सर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर चुप्पी साध लेते हैं। दुर्घटना के बाद एम्बुलेंस की देरी, ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति और अस्पतालों में लापरवाही कई बार मौत को निश्चित बना देती है। यह व्यक्तिगत असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि एक ऐसी संस्थागत संस्कृति है, जहां जवाबदेही का अभाव है।
विकसित भारत 2047 की परिकल्पना में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर एक केंद्रीय स्तंभ है। भारतमाला, गति शक्ति, स्मार्ट सिटी मिशन और अमृत योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं इसी दिशा में कदम हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल नई सड़कों और एक्सप्रेसवे का निर्माण ही विकास है, या मौजूदा सड़कों की सुरक्षा और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है? बायो-बिटुमेन जैसी नई तकनीकें तब तक सफल नहीं हो सकतीं, जब तक उनके साथ गुणवत्ता नियंत्रण, पारदर्शिता और कठोर जवाबदेही सुनिश्चित न हो।
न्यायपालिका ने इस मुद्दे पर बार-बार सख्त रुख अपनाया है। बॉम्बे हाईकोर्ट सहित कई अदालतों ने स्पष्ट कहा है कि गड्ढों और खुले मैनहोल से होने वाली मौतें दुर्घटना नहीं, बल्कि मानव-निर्मित आपराधिक लापरवाही हैं। पीआईएल नंबर 71/2013 इसका जीवंत उदाहरण है, जिसमें वर्षों के निर्देशों के बावजूद जमीनी सुधार न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। अदालतों का मत है कि केवल मुआवजा नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो विकसित देशों में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर भारत की तुलना में कहीं कम है। इसका कारण बेहतर डिजाइन, नियमित रखरखाव, सख्त जवाबदेही और त्वरित आपातकालीन सेवाएं हैं। यदि भारत को वैश्विक शक्ति बनना है, तो उसे नागरिक सुरक्षा के मानकों में भी वैश्विक स्तर अपनाना होगा।
निष्कर्षतः, भारत की सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की शासन क्षमता और संवेदनशीलता का आईना हैं। युवराज मेहता जैसी मौतें हमें चेतावनी देती हैं कि विकास के दावों के बीच नागरिकों की जान सर्वोपरि है। विकसित भारत 2047 तभी संभव है, जब सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, प्रशासनिक लापरवाही पर कठोर कार्रवाई हो और न्यायपालिका के निर्देश ज़मीनी स्तर पर लागू हों। सड़क पर हर गड्ढा, हर खुला मैनहोल और हर अधूरा निर्माण कार्य एक संभावित मौत है। सवाल यह नहीं कि अगली दुर्घटना कब होगी, सवाल यह है कि क्या हम उससे पहले जागेंगे?

लेखक :एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
(कानूनी विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि, संगीत माध्यमा, सीए(एटीसी))
गोंदिया, महाराष्ट्र

“जब गणेश युद्ध नहीं, विवेक से विजयी हुए”

🕉️ अहंकार का क्षय और विवेक का उदय — शास्त्रोक्त गणेश कथा जहाँ गणेश केवल देव नहीं, आत्मा की विजय बन जाते हैं


यह कथा समाप्त नहीं होती।
यह हर मनुष्य के भीतर चलती है।
हर बार जब आप धैर्य चुनते हैं,
हर बार जब आप अहंकार त्यागते हैं—
गणेश विजयी होते हैं।हमने जाना कि कैसे गणेश तत्व केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक शास्त्रोक्त पद्धति है।
अब एपिसोड 10 में हम उस गूढ़ कथा में प्रवेश करते हैं जहाँ अहंकार का विसर्जन और विवेक की स्थापना होती है। यह कथा गणेश पुराण, मुद्गल पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित प्रसंगों से प्रेरित है और आज के मनुष्य के अंतर्मन से सीधा संवाद करती है।

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शास्त्रोक्त भूमिका : गणेश क्यों “विवेक के देवता” हैं?
शास्त्रों में भगवान गणेश को केवल विघ्नहर्ता नहीं कहा गया, बल्कि—
“बुद्धि-विद्या-विवेकाणां नायकः गणनायकः”
— गणेश पुराण
अर्थात गणेश बुद्धि, विद्या और विवेक के अधिपति हैं।
जहाँ अहंकार अंधकार है, वहीं गणेश तत्व प्रकाश है।
आज का युग बाह्य उपलब्धियों का है—पद, प्रतिष्ठा, सत्ता और प्रदर्शन।
पर शास्त्र कहते हैं—
👉 जो स्वयं को जीत ले, वही सच्चा विजेता है।
📜 शास्त्रोक्त कथा : “अहंकारासुर का पतन और विवेक की स्थापना”
(गणेश पुराण से प्रेरित कथा)
प्राचीन काल में अहंकारासुर नामक एक शक्तिशाली असुर हुआ।
उसने कठोर तप कर ब्रह्मा से वरदान पाया—

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👉 “मेरा कोई भी बाह्य शत्रु मुझे पराजित न कर सके।”
वरदान मिलते ही अहंकारासुर का नाम ही उसका स्वभाव बन गया।
वह देवताओं, ऋषियों और यहाँ तक कि स्वयं धर्म का भी उपहास करने लगा।
देवलोक में संकट छा गया।
देवगण ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास गए।
त्रिदेव बोले—
“इस असुर का अंत कोई शस्त्र नहीं कर सकता,
क्योंकि इसका मूल शत्रु बाहर नहीं—भीतर है।”
तभी त्रिदेवों ने भगवान गणेश का आवाहन किया।

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🐘 गणेश का आगमन : युद्ध नहीं, संवाद
गणेश युद्ध के लिए नहीं आए।
न कोई अस्त्र, न कोई सेना।
उन्होंने अहंकारासुर से केवल एक प्रश्न किया—
“तू कौन है?”
अहंकारासुर गर्जना कर बोला—
“मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ, मैं ही सब कुछ हूँ!”
गणेश मुस्कुराए और बोले—
“जो ‘मैं’ में डूबा हो,
वह ‘हम’ को कभी नहीं जान सकता।”
यह सुनते ही अहंकारासुर विचलित हो गया।
पहली बार उसके भीतर प्रश्न उठा—

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👉 “यदि मैं ही सब कुछ हूँ, तो भय क्यों है?”
🔥 अहंकार का क्षय : भीतर का युद्ध
शास्त्र कहते हैं—
👉 गणेश बाह्य युद्ध नहीं करते, वे भीतर परिवर्तन करते हैं।
गणेश ने अहंकारासुर को कोई दंड नहीं दिया।
उन्होंने उसे स्वविवेक का दर्पण दिखाया।
जैसे ही अहंकारासुर ने स्वयं को देखा—
उसकी शक्ति क्षीण होने लगी।
उसका अहंकार ही उसका सबसे बड़ा विघ्न था।
अंततः अहंकारासुर भूमि पर गिर पड़ा और बोला—
“हे गणनायक!
आज ज्ञात हुआ कि मेरा सबसे बड़ा शत्रु मैं स्वयं था।”
गणेश ने उसे क्षमा दी और कहा—
“जहाँ अहंकार का विसर्जन होता है,
वहीं से भक्ति और बुद्धि का जन्म होता है।”

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🌺 कथा का गूढ़ अर्थ : आज का मनुष्य और गणेश तत्व
यह कथा केवल पुराणों की नहीं—
यह कॉर्पोरेट ऑफिस, राजनीति, परिवार, समाज—हर जगह घट रही है।
जब हम सुनने से पहले बोलते हैं — अहंकारासुर जागता है
जब हम जीत से अधिक सत्य को चुनते हैं — गणेश प्रकट होते हैं
जब हम धैर्य रखते हैं — विघ्न स्वयं हट जाते हैं
👉 गणेश कोई बाहरी देव नहीं,
वे भीतर की चेतना हैं।
🪔 गणेश की महिमा : समानता और समरसता के देव
शास्त्रों में गणेश का स्वरूप ही एक संदेश है—
हाथी का सिर → स्मरण शक्ति और धैर्य
बड़ा पेट → सबको स्वीकार करने की क्षमता
छोटे नेत्र → सूक्ष्म विवेक
मूषक वाहन → इच्छाओं पर नियंत्रण
गणेश का संदेश है—
👉 “सब समान हैं, अहंकार ही भेद पैदा करता है।”
📖 आज के युग के लिए शास्त्रोक्त शिक्षा
समस्या नहीं, दृष्टि बदलो
प्रतिक्रिया नहीं, विवेक चुनो
अहंकार नहीं, स्वीकार्यता अपनाओ
जीत नहीं, सत्य को प्राथमिकता दो
जहाँ विवेक है, वहाँ गणेश हैं।
जहाँ अहंकार है, वहाँ विघ्न हैं।
🔔 निष्कर्ष : यह कथा समाप्त नहीं होती…
यह कथा हर उस क्षण चलती है—
जब आप क्रोध के स्थान पर करुणा चुनते हैं।
जब आप स्वयं को सही नहीं, सत्य मानते हैं।
हर बार गणेश विजयी होते हैं।

बेसिक शिक्षकों की समस्याओं पर प्राथमिक शिक्षक संघ का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षकों की वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का संकेत दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो शिक्षक सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेंगे।

संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश धर दुबे ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों की सबसे गंभीर समस्या बिना स्पष्ट नीति के किया जा रहा समायोजन है। वर्षों से चली आ रही ऑनलाइन समायोजन प्रक्रिया को अचानक बंद कर ऑफलाइन व्यवस्था लागू कर दी गई, जिससे महिला शिक्षकों सहित सैकड़ों शिक्षकों को असुविधाजनक और दूरस्थ विद्यालयों में तैनात कर दिया गया।

गलत समायोजन से बिगड़ी शिक्षा व्यवस्था

गलत समायोजन के कारण जिले के कई प्राथमिक विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। संघ ने इस समायोजन प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग को लेकर शासन, बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी को पत्र भेजा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

15 साल से पदोन्नति नहीं, 95% स्कूल प्रभारी के भरोसे

राकेश धर दुबे ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति नहीं हुई, जिसके चलते जिले के करीब 95 प्रतिशत विद्यालय प्रभारी प्रधानाध्यापकों के सहारे चल रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पात्र शिक्षकों को प्रधानाध्यापक का वेतन नहीं दिया जा रहा, जो न्याय का खुला उल्लंघन है।

मुख्यमंत्री के आदेश की अनदेखी

संघ के मीडिया प्रभारी ज्ञानेंद्र ओझा ने कहा कि सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया था कि शिक्षकों के प्रार्थना पत्रों पर तत्काल कार्रवाई हो और उनके साथ ट्रेड यूनियन जैसा व्यवहार न किया जाए। लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा।
उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 2200 विद्यालय हेडमास्टर विहीन हैं। न ईयर मिल रहा है, न हाफ सैलरी और न ही मुख्यमंत्री द्वारा घोषित चिकित्सा सुविधा का शासनादेश जारी हुआ है।

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ऑनलाइन काम का बढ़ता बोझ, शिक्षकों की छवि पर असर

संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश मंत्री श्रीधर मिश्रा ने कहा कि बेसिक शिक्षा से जुड़े लगभग सभी कार्य ऑनलाइन कर दिए गए हैं। शिक्षकों को 26 प्रकार के रजिस्टर ऑनलाइन भरने पड़ते हैं। विद्यालय में टैबलेट या मोबाइल पर काम करने से अभिभावकों को गलत संदेश जाता है कि शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल चला रहे हैं, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट का डर, नौकरी पर संकट

उन्होंने बताया कि टीईटी पास न कर पाने वाले पुराने शिक्षकों की नौकरी पर सुप्रीम कोर्ट की तलवार लटकी हुई है। प्रशासनिक दबाव, न्यायालयीय आदेश और अतिरिक्त कार्यभार के कारण शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं।
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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21 जनवरी को हुए महत्वपूर्ण निधन: इतिहास के अमर नाम

मृणालिनी साराभाई (निधन: 21 जनवरी 2016)
मृणालिनी साराभाई भारत की महान शास्त्रीय नृत्यांगना, कोरियोग्राफर और सांस्कृतिक चिंतक थीं। उन्होंने भरतनाट्यम और कथकली को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई। वे प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की पत्नी थीं और “दर्पण अकादमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स” की संस्थापक रहीं। मृणालिनी जी ने नृत्य को केवल कला नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मानों से अलंकृत मृणालिनी साराभाई भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में प्रेरणास्रोत के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगी।

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विष्णु राम मेधी (निधन: 21 जनवरी 1981)
विष्णु राम मेधी भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और असम के दूसरे मुख्यमंत्री थे। वे गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित थे और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रशासनिक कुशलता, सादगी और ईमानदारी उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने असम के सामाजिक और आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान दिया। मेधी जी राज्यपाल भी रहे और राष्ट्रीय राजनीति में सम्मानित स्थान प्राप्त किया। उनका जीवन सार्वजनिक सेवा, त्याग और राष्ट्रनिर्माण का आदर्श उदाहरण माना जाता है।
शिवपूजन सहाय (निधन: 21 जनवरी 1963)
शिवपूजन सहाय हिन्दी साहित्य के सशक्त स्तंभ थे। वे उपन्यासकार, कहानीकार, संपादक और पत्रकार के रूप में प्रसिद्ध रहे। उनकी रचनाओं में ग्रामीण भारत, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है। ‘देहाती दुनिया’ उनका चर्चित उपन्यास है, जिसने हिन्दी गद्य को नई दिशा दी। साहित्य के साथ-साथ पत्रकारिता में भी उन्होंने निर्भीक लेखन किया। शिवपूजन सहाय का योगदान हिन्दी साहित्य के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण और स्थायी माना जाता है।
रास बिहारी बोस (निधन: 21 जनवरी 1945)
रास बिहारी बोस एक प्रख्यात वकील, शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक थे। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के बौद्धिक पक्ष को मजबूत करने वाले व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। कानून और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने युवाओं में राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान की भावना को जाग्रत किया। बोस जी का जीवन अनुशासन, अध्ययन और देशहित के प्रति समर्पण का प्रतीक था। उनका निधन भारतीय बौद्धिक समाज के लिए अपूरणीय क्षति माना गया।

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ज्ञान चंद्र घोष (निधन: 21 जनवरी 1959)
ज्ञान चंद्र घोष भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और अनुसंधानकर्ता थे। वे भौतिक विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी रहे। भारत में वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना और अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद से जुड़े रहे और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया। ज्ञान चंद्र घोष का जीवन विज्ञान, नवाचार और राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहा, जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेती रहेंगी।
जॉर्ज ऑरवेल (निधन: 21 जनवरी 1950)
जॉर्ज ऑरवेल विश्वप्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक, निबंधकार और पत्रकार थे। ‘एनिमल फार्म’ और ‘नाइन्टीन एटी-फोर’ जैसी कृतियों ने उन्हें अमर बना दिया। उनके लेखन में तानाशाही, सत्ता, सामाजिक असमानता और स्वतंत्रता जैसे विषयों की गहरी पड़ताल मिलती है। ऑरवेल की रचनाएं आज भी वैश्विक राजनीति और समाज को समझने में प्रासंगिक हैं। उनका साहित्य विचारोत्तेजक, यथार्थवादी और चेतना जागृत करने वाला माना जाता है।

जन्मतिथि विशेष: विद्यार्थियों के लिए प्रेरक व्यक्तित्व

21 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: इतिहास, कला, राजनीति और साहित्य की प्रेरक गाथाएँ

सुशांत सिंह राजपूत (21 जनवरी 1986)
सुशांत सिंह राजपूत भारतीय सिनेमा के प्रतिभाशाली अभिनेता, प्रशिक्षित थिएटर कलाकार और टेलीविजन स्टार थे। उनका जन्म बिहार के पटना में हुआ। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने अभिनय को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। टीवी धारावाहिक पवित्र रिश्ता से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने काई पो चे, एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी और छिछोरे जैसी फिल्मों में सशक्त अभिनय किया। सुशांत विज्ञान, खगोलशास्त्र और पढ़ने में गहरी रुचि रखते थे। वे युवाओं के लिए आत्मविश्वास, जिज्ञासा और निरंतर सीखने की प्रेरणा बने।
दर्शना जरदोश (21 जनवरी 1961)
दर्शना जरदोश भारतीय जनता पार्टी की प्रमुख महिला राजनीतिज्ञ हैं। गुजरात में जन्मी दर्शना जरदोश ने संगठनात्मक क्षमता और जनसेवा के माध्यम से राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वे लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और केंद्र सरकार में मंत्री पद पर भी कार्य कर चुकी हैं। महिला सशक्तिकरण, श्रमिक कल्याण और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर उनका विशेष योगदान रहा है। सरल व्यक्तित्व और जमीनी राजनीति के कारण वे जनता के बीच लोकप्रिय हैं। उनका राजनीतिक जीवन अनुशासन, समर्पण और सेवा भावना का उदाहरण है।
बिली ओशन (21 जनवरी 1950)
बिली ओशन पश्चिम भारतीय मूल के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय संगीतकार और गायक हैं। उनका जन्म त्रिनिदाद और टोबैगो में हुआ। 1970 और 1980 के दशक में उन्होंने पॉप और आर एंड बी संगीत में वैश्विक पहचान बनाई। कैरिबियन क्वीन और गेट आउट्टा माई ड्रीम्स जैसे गीतों ने उन्हें विश्वभर में लोकप्रिय किया। उनके संगीत में कैरिबियन संस्कृति की झलक मिलती है। बिली ओशन का योगदान संगीत को सीमाओं से परे जोड़ने का प्रतीक है।

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प्रतिभा राय (21 जनवरी 1943)
प्रतिभा राय उड़िया भाषा की प्रख्यात लेखिका हैं। उनका जन्म ओडिशा में हुआ। उनके साहित्य में भारतीय संस्कृति, स्त्री जीवन और मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। उपन्यास यज्ञसेनी के लिए उन्हें विशेष पहचान मिली। वे ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हो चुकी हैं। प्रतिभा राय का लेखन शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री है। उनका साहित्य सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है।
पंडित नरसिंहलु वाडवती (21 जनवरी 1942)
पंडित नरसिंहलु वाडवती भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित संगीतज्ञ रहे हैं। उन्होंने हिंदुस्तानी संगीत परंपरा में उल्लेखनीय योगदान दिया। गुरु-शिष्य परंपरा के तहत उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की और अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित किया। मंचीय प्रस्तुतियों के साथ-साथ उन्होंने संगीत शिक्षण को भी समर्पित किया। उनका जीवन संगीत साधना, अनुशासन और परंपरा के संरक्षण का उदाहरण है। भारतीय संगीत के इतिहास में उनका योगदान सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाता है।
पॉल स्कोफील्ड (21 जनवरी 1922)
पॉल स्कोफील्ड प्रसिद्ध ब्रिटिश हॉलीवुड और थिएटर अभिनेता थे। उनका जन्म इंग्लैंड में हुआ। ए मैन फॉर ऑल सीजन्स जैसी फिल्म में उनके अभिनय को अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा मिली। वे क्वीज शो और अनेक थिएटर प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं। अभिनय में गंभीरता और गहराई उनकी पहचान थी। उन्होंने रंगमंच और सिनेमा दोनों में उत्कृष्टता स्थापित की। उनका जीवन अभिनय कला के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
हरचरण सिंह बराड़ (21 जनवरी 1919)
हरचरण सिंह बराड़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। उनका जन्म पंजाब में हुआ। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। कृषि, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुधारों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने जनहितकारी नीतियों पर बल दिया। उनका राजनीतिक जीवन ईमानदारी और सार्वजनिक सेवा के लिए जाना जाता है। वे पंजाब के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं।

1972 का भारत: नए राज्यों के गठन से बदला पूर्वोत्तर का राजनीतिक नक्शा

21 जनवरी का इतिहास: भारत और विश्व की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ


21 जनवरी इतिहास के पन्नों में राजनीति, विज्ञान, रक्षा, खेल और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के लिए विशेष स्थान रखता है। इस दिन भारत और विश्व में कई ऐसी घटनाएँ घटीं, जिन्होंने आने वाले समय की दिशा तय की।
21 जनवरी की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ
2009 – कर्नाटक के बीदर में भारतीय वायुसेना का प्रशिक्षण विमान सूर्यकिरण दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिससे प्रशिक्षण सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे।
2008 – भारत ने इज़रायल के जासूसी उपग्रह टेकसार (TecSAR) का सफल प्रक्षेपण कर उसे पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया, जिससे भारत की अंतरिक्ष क्षमता को वैश्विक पहचान मिली।

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2007 – पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान को वर्ष 2007 की हॉल ऑफ़ फ़ेम सूची में शामिल किया गया।
2007 – भारत ने वेस्टइंडीज़ को हराकर वनडे क्रिकेट श्रृंखला जीती, जो भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम दौर की एक उपलब्धि मानी जाती है।
2003 – चालक रहित अमेरिकी टोही विमान पाकिस्तान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर बहस तेज़ हुई।
2000 – एशिया का पहला स्प्लिट लिवर ट्रांसप्लांट हांगकांग में सफलतापूर्वक किया गया, चिकित्सा विज्ञान में यह ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
1996 – फ़िलिस्तीन में पहले आम चुनाव हुए, जिनमें यासर अराफ़ात को 85% मत मिले; इसी दिन बीजिंग में एशिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन का उद्घाटन हुआ।
1996 – इंडोनेशिया के सुमात्रा तट पर नाव डूबने से लगभग 340 लोगों की मृत्यु, यह समुद्री इतिहास की बड़ी त्रासदियों में शामिल है।
1981 – तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास में बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा किया गया, जिससे ईरान-अमेरिका तनाव में नया मोड़ आया।
1972 – मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा भारत के पूर्ण राज्य बने; यह दिन इन राज्यों का स्थापना दिवस है।
1958 – भारत में कॉपीराइट अधिनियम लागू हुआ, जिसने बौद्धिक संपदा अधिकारों को कानूनी सुरक्षा दी।
1924 – ब्रिटेन में पहली बार लेबर पार्टी की सरकार बनी और रैम्ज़े मैकडोनाल्ड प्रधानमंत्री बने।
1924 – रूसी क्रांति के नेता व्लादिमीर लेनिन का निधन हुआ, जिसके बाद जोसेफ स्तालिन ने सत्ता पर अपनी पकड़ मज़बूत की।

गोचर का असर: मेष से मीन तक कौन रहे सावधान, कौन पाए लाभ

🔯 ग्रह गोचर विशेष: गुरु–राहु की चाल में बदलता भाग्य | मेष से मीन तक 12 राशियों का आज का विस्तृत राशिफल 🔯
ग्रहों की वर्तमान स्थिति के अनुसार—गुरु मिथुन, केतु सिंह, सूर्य-बुध-शुक्र-मंगल मकर, चंद्रमा-राहु कुंभ और शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। इन ग्रह योगों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप से पड़ रहा है। आइए जानते हैं आज का विस्तृत राशिफल, जो आपके स्वास्थ्य, प्रेम, संतान, करियर, व्यापार और मानसिक स्थिति पर केंद्रित है।
मेष राशि
आय में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। अनावश्यक यात्रा से बचें, कष्ट संभव है। मन थोड़ा खिन्न रह सकता है और किसी समाचार से मानसिक तनाव मिल सकता है।
स्वास्थ्य: मध्यम
प्रेम/संतान: सामान्य
व्यापार: ठीक
उपाय: काली वस्तु का दान करें।
वृषभ राशि
आर्थिक स्थिति अस्थिर रह सकती है। कोर्ट-कचहरी या सरकारी मामलों में सावधानी रखें। वरिष्ठ अधिकारियों से टकराव संभव है।
स्वास्थ्य: अच्छा, सीने में विकार संभव
प्रेम/संतान: बहुत अच्छा
व्यापार: सामान्य
उपाय: लाल वस्तु का दान करें।

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मिथुन राशि
मान-सम्मान को लेकर हल्की परेशानी रह सकती है। यात्रा में नुकसान की आशंका है। समय अभी मध्यम चल रहा है।
स्वास्थ्य: सामान्य
प्रेम/संतान: ठीक
व्यापार: ठीक
उपाय: काली वस्तु का दान शुभ।
कर्क राशि
परिस्थितियां प्रतिकूल हैं। चोट-चपेट या अचानक परेशानी से सतर्क रहें।
स्वास्थ्य: मध्यम
प्रेम/संतान: अच्छा
व्यापार: अच्छा
उपाय: लाल वस्तु पास रखें।
सिंह राशि
जीवनसाथी के स्वास्थ्य और संबंधों में तनाव रह सकता है। स्वयं के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें।
स्वास्थ्य: कमजोर
प्रेम/संतान: अच्छा
नौकरी/व्यापार: औसत
उपाय: काली वस्तु का दान करें।
कन्या राशि
शत्रुओं पर दबदबा रहेगा, लेकिन मानसिक अशांति बनी रह सकती है। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
स्वास्थ्य: ध्यान देने योग्य
प्रेम/संतान: अच्छा
व्यापार: अच्छा
उपाय: शनि देव को प्रणाम करें।
तुला राशि
बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान दें। प्रेम संबंधों में विवाद से बचें। विद्यार्थियों के लिए नई शुरुआत का समय नहीं।
स्वास्थ्य: मानसिक तनाव
प्रेम/संतान: मध्यम
व्यापार: ठीक
उपाय: शनि देव को प्रणाम करें।
वृश्चिक राशि
घरेलू सुख में कमी रह सकती है। भूमि-भवन-वाहन से जुड़े मामलों में विवाद की आशंका।
स्वास्थ्य: मध्यम
प्रेम/संतान: ठीक-ठाक
व्यापार: ठीक
उपाय: काली वस्तु का दान करें।

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धनु राशि
नाक-कान-गला से संबंधित परेशानी हो सकती है। पराक्रम का फल अभी नहीं मिलेगा, लेकिन आगे सफलता मिलेगी।
स्वास्थ्य: सामान्य
प्रेम/संतान: अच्छा
व्यापार: ठीक
उपाय: काली वस्तु का दान करें।
मकर राशि
धन हानि के संकेत हैं। निवेश से बचें। वाणी पर संयम रखें, मुख रोग संभव है।
स्वास्थ्य: मध्यम
प्रेम/संतान: अच्छा
व्यापार: अच्छा
उपाय: काली वस्तु का दान करें और काली जी को प्रणाम करें।
कुंभ राशि
घबराहट और नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं। मानसिक चंचलता से नुकसान हो सकता है।
स्वास्थ्य: मानसिक अस्थिरता
प्रेम/संतान: अच्छा
व्यापार: अच्छा
उपाय: शनि देव को प्रणाम करें।
मीन राशि
सिर दर्द, नेत्र पीड़ा और बच्चों को लेकर चिंता संभव है। खर्च अधिक रहेगा, कर्ज की स्थिति बन सकती है।
स्वास्थ्य: कमजोर
प्रेम: नकारात्मक ऊर्जा
व्यापार: मध्यम
उपाय: काली वस्तु का दान करें।
⚠️ नोट: राशिफल में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं है। कृपया अंतिम निर्णय से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

आपका मूलांक आज क्या संकेत दे रहा है? जानिए सफलता और सावधानी के गुप्त सूत्र

🔮 अंक राशिफल 21 जनवरी 2026 (बुधवार)

जिस प्रकार नाम के आधार पर राशि राशिफल देखा जाता है, उसी प्रकार अंक ज्योतिष (Numerology) में जन्मतिथि (Date of Birth) के आधार पर मूलांक निकालकर भविष्य का आंकलन किया जाता है।
आज 21 जनवरी 2026, बुधवार का दिन है। बुधवार का स्वामी बुध ग्रह माना जाता है, जो बुद्धि, वाणी, व्यापार, संचार और तर्क शक्ति का कारक है।
आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक वालों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा, साथ ही आज का पंचांग भी 👇
🕉️ आज का पंचांग (21 जनवरी 2026)
वार: बुधवार
तिथि: माघ कृष्ण पक्ष तृतीया
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
योग: शुभ
करण: तैतिल
अभिजीत मुहूर्त: 12:05 PM – 12:48 PM
राहुकाल: 12:00 PM – 1:30 PM
सूर्योदय: 07:10 AM
सूर्यास्त: 05:55 PM
🔢 अंक राशिफल 21 जनवरी 2026 (मूलांक अनुसार)
🔴 मूलांक 1 (जन्म तिथि: 1, 10, 19, 28)
आज का दिन सामान्य लेकिन संतुलित रहेगा।
आत्मसम्मान और सेल्फ लव पर ध्यान दें
कार्यस्थल पर कोई बड़ी चुनौती नहीं
प्रेम जीवन में संवाद से रिश्ते मजबूत होंगे
आर्थिक स्थिति स्थिर और संतोषजनक
🟠 मूलांक 2 (जन्म तिथि: 2, 11, 20, 29)
आज का दिन शुभ संकेत लेकर आया है।
प्रेम संबंधों में विवाद सुलझाने का सही समय
ऑफिस में मेहनत का फल मिलेगा
धन प्रबंधन में सतर्कता जरूरी
मानसिक शांति बनी रहेगी
🟡 मूलांक 3 (जन्म तिथि: 3, 12, 21, 30)
आज का दिन भाग्यवर्धक रहेगा।
करियर में उन्नति के अवसर
आय में वृद्धि के संकेत
नई जिम्मेदारियां भविष्य बदल सकती हैं
आत्मविश्वास चरम पर रहेगा
🟢 मूलांक 4 (जन्म तिथि: 4, 13, 22, 31)
आज का दिन शानदार उपलब्धियों वाला हो सकता है।
प्रोफेशनल चुनौतियों पर विजय
आर्थिक स्थिति मजबूत
स्वास्थ्य उत्तम रहेगा
प्रेम में भावनाओं से ज्यादा तर्क का उपयोग करें

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🔵 मूलांक 5 (जन्म तिथि: 5, 14, 23)
आज आप ऊर्जा और रचनात्मकता से भरपूर रहेंगे।
कार्यक्षेत्र में प्रोडक्टिव दिन
नई सोच से समस्याओं का समाधान
स्वास्थ्य अच्छा रहेगा
सफलता को लेकर आश्वस्त रहें
🟣 मूलांक 6 (जन्म तिथि: 6, 15, 24)
आज का दिन व्यस्त लेकिन लाभकारी रहेगा।
प्रेम जीवन में रोमांस बढ़ेगा
प्रोफेशनल लाइफ में क्रिएटिविटी
निवेश के लिए समय अनुकूल
सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी
मूलांक 7 (जन्म तिथि: 7, 16, 25)
आज दिन में थोड़ी हलचल रह सकती है।
साहस और धैर्य से दिन संभालें
तनाव से दूरी बनाए रखें
खानपान संतुलित रखें
कार्य दबाव को आप बेहतर संभाल लेंगे
🟤 मूलांक 8 (जन्म तिथि: 8, 17, 26)
आज का दिन खुशियों से भरा रहेगा।
प्रेम जीवन में गलतफहमियां दूर होंगी
कार्यों में उत्तम परिणाम
आर्थिक स्थिति निवेश के योग्य
स्वास्थ्य सामान्य से अच्छा
🔴 मूलांक 9 (जन्म तिथि: 9, 18, 27)
आज का दिन उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है।
चुनौतियों के साथ अवसर भी
सकारात्मक सोच से सफलता मिलेगी
आत्मविकास के नए द्वार खुलेंगे
धैर्य सबसे बड़ा हथियार रहेगा
⚠️ डिस्क्लेमर– इस आलेख में दी गई जानकारी अंक ज्योतिष पर आधारित सामान्य अनुमान हैं। हम इसकी पूर्ण सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करते। किसी भी निर्णय से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
नोट: अंक मूलांक में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं होगी।

आज का राहुकाल और शुभ मुहूर्त: क्या करें, क्या न करें

पंचांग 21 जनवरी 2026: माघ शुक्ल तृतीया का सम्पूर्ण शुभ–अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया व राशिफल संकेत


पंचांग दिनांक: 21 जनवरी 2026, बुधवार
स्थान: भारत (द्रिक पंचांग आधारित)
🪔 आज का हिन्दू पंचांग (21/01/2026)
तिथि:माघ शुक्ल पक्ष तृतीया – 02:47 AM तक
उपरांत चतुर्थी
नक्षत्र:धनिष्ठा – 01:58 PM तक
उपरांत शतभिषा
योग:व्यातीपात – 06:58 PM तक
उपरांत वरीयान
करण:तैतिल – 02:48 PM तक
गर – 02:47 AM तक
वणिज – उसके बाद
वार: बुधवार
🌞 सूर्य–चन्द्र की स्थिति
सूर्योदय: 07:13 AM
सूर्यास्त: 06:02 PM
चन्द्रोदय: 08:50 AM
चन्द्रास्त: 08:30 PM
सूर्य राशि: मकर
चन्द्र राशि: कुंभ (पूरा दिन व रात)
🕉️ संवत एवं ऋतु
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
चन्द्र मास: माघ
अयन: उत्तरायण
ऋतु (वैदिक व द्रिक): शिशिर

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अशुभ काल
राहुकाल: 12:38 PM – 01:59 PM
यमगण्ड: 08:34 AM – 09:56 AM
कुलिक काल: 11:17 AM – 12:38 PM
दुर्मुहूर्त: 12:16 PM – 12:59 PM
वर्ज्यम्: 09:18 PM – 10:56 PM
शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: 05:37 AM – 06:25 AM
अमृत काल: 07:05 AM – 08:43 AM
अभिजीत मुहूर्त: नहीं है
🪔 दिन का चौघड़िया
लाभ – 07:13 AM – 08:34 AM
अमृत – 08:34 AM – 09:56 AM
काल – 09:56 AM – 11:17 AM
शुभ – 11:17 AM – 12:38 PM
रोग – 12:38 PM – 01:59 PM
उद्बेग – 01:59 PM – 03:20 PM
चर – 03:20 PM – 04:41 PM
लाभ – 04:41 PM – 06:02 PM
🌙 रात का चौघड़िया
उद्बेग – 06:02 PM – 07:41 PM
शुभ – 07:41 PM – 09:20 PM
अमृत – 09:20 PM – 10:59 PM
चर – 10:59 PM – 12:38 AM
रोग – 12:38 AM – 02:16 AM
काल – 02:16 AM – 03:55 AM
लाभ – 03:55 AM – 05:34 AM
उद्बेग – 05:34 AM – 07:13 AM
🌙 चन्द्रबल (22/01/26 सुबह 07:13 तक)
मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुंभ
ताराबल
01:58 PM तक अनुकूल नक्षत्र:
भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
उसके बाद अनुकूल नक्षत्र:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा
⚠️ महत्वपूर्ण सूचना
नोट: पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा उत्तरदायी नहीं है। किसी भी शुभ कार्य से पूर्व योग्य पंडित अथवा ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

प्रशासनिक उदासीनता या मिलीभगत? शहर की सेहत से खिलवाड़

देवरिया में नगर पालिका की घोर लापरवाही, जिला जेल के पास खुले में फेंका जा रहा संक्रमित मेडिकल वेस्ट, महामारी का खतरा


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। एक ओर केंद्र व राज्य सरकारें स्वच्छ भारत अभियान और संक्रामक रोगों की रोकथाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका परिषद देवरिया की गंभीर लापरवाही शहरवासियों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। जिला जेल के समीप, प्रमुख कुष्ट आश्रम के ठीक सामने देवरिया–सलेमपुर मुख्य मार्ग किनारे खुलेआम संक्रमित मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। यह नजारा न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों की खुली अवहेलना भी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क किनारे सिरिंज, इस्तेमाल की गई पट्टियां, दवाइयों की खाली बोतलें, इंजेक्शन और अन्य खतरनाक मेडिकल कचरा लंबे समय से पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से नगर पालिका और अन्य विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों का नियमित आवागमन होता है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। नगर पालिका के कूड़ा ढोने वाले वाहन इस संवेदनशील कचरे को सामान्य घरेलू कचरे की तरह आबादी वाले इलाके के पास डंप कर रहे हैं, जो कानूनन अपराध है।

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इस लापरवाही से राहगीरों, स्थानीय निवासियों और आवारा पशुओं के जीवन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। खुले में पड़े मेडिकल कचरे को जानवर मुंह मारते हैं, जिससे रेबीज, हेपेटाइटिस, एचआईवी और अन्य गंभीर संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। बारिश के दौरान यही कचरा पानी के साथ बहकर आसपास के इलाकों में पहुंच सकता है, जिससे महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह कृत्य जिला जेल और कुष्ट आश्रम जैसे संवेदनशील स्थान के सामने किया जा रहा है, जहां पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक होते हैं। नियमों के अनुसार, मेडिकल वेस्ट का निस्तारण केवल अधिकृत एजेंसियों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए, लेकिन देवरिया में नियमों को ताक पर रख दिया गया है।

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अब जनता नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी से सीधे जवाब मांग रही है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? मेडिकल वेस्ट फेंकने वाले कर्मचारियों और ठेकेदारों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते? जिला प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, अन्यथा यह लापरवाही देवरिया के लिए भारी संकट बन सकती है।