संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला उद्योग बन्धु समिति, जिला निर्यात प्रोत्साहन समिति, पीएम विश्वकर्मा जिला क्रियान्वयन समिति तथा उद्योग विभाग द्वारा संचालित स्वरोजगारपरक योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मेहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी और अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) जय प्रकाश उपस्थित रहे।
बैठक में उपायुक्त उद्योग ने निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित प्रकरणों की जानकारी प्रस्तुत की। इस पर अपर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) वित्त पोषण योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की प्रगति से समिति को अवगत कराया गया।
सीएम युवा अभियान को लेकर अपर जिलाधिकारी ने अग्रणी जिला प्रबंधक एसबीआई और उद्योग विभाग को निर्देश दिए कि व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित की जाए। बैंकों में लंबित आवेदनों के फॉलोअप और स्वीकृति-वितरण में तेजी लाने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि सीएम डैशबोर्ड की प्रगति में सुधार हो सके।
बैठक में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तहत प्राप्त एमओयू और जीबीसी/5.0 के लिए तैयार प्रस्तावों की भी गहन समीक्षा की गई। उद्यमी मित्र विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि जनपद के लिए 2000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष अब तक 1047 करोड़ रुपये के प्रस्ताव जीबीसी रेडी पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। इस पर संबंधित विभागों को अधिक से अधिक एमओयू हस्ताक्षरित कराने के निर्देश दिए गए।
पीएम विश्वकर्मा योजना की अद्यतन प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि प्राप्त सूची का भौतिक सत्यापन कर पात्र और अपात्र लाभार्थियों की सूची समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाए।
बैठक को संबोधित करते हुए विधायक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश सरकार उद्यमियों और व्यापारियों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। अधिकारियों और बैंक समन्वयकों से अपेक्षा है कि युवाओं और नवउद्यमियों को प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। उन्होंने ओडीओपी योजना को और अधिक बढ़ावा देने पर भी बल दिया।
बैठक में पीएम विश्वकर्मा योजना के नामित सदस्य शिव शंकर विश्वकर्मा, औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी, उद्यमी और व्यापारी उपस्थित रहे।
उद्योग बन्धु की बैठक में निवेश मित्र व स्वरोजगार योजनाओं की प्रगति पर जोर
अपराध पर जीरो टॉलरेंस का संदेश, डीआईजी एस. चेनप्पा ने किया व्यापक निरीक्षण
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गोरखपुर परिक्षेत्र के डीआईजी एस. चेनप्पा ने बुधवार को महराजगंज का निरीक्षण किया। पुलिस लाइन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराध पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जाएगा और आमजन में सुरक्षा की भावना हर हाल में मजबूत होनी चाहिए।
डीआईजी ने लूट, नकबजनी और वाहन चोरी की घटनाओं पर सख्त नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि ऐसी घटनाएं किसी भी कीमत पर न हों। यदि कोई घटना घटित होती है तो उसका तत्काल, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण अनावरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अवैध शराब, मादक पदार्थों की तस्करी, पशु तस्करी और समाज को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के निर्देश भी दिए।
हत्या (धारा 302) के मामलों की विवेचना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, पुरस्कार घोषित अपराधियों की गिरफ्तारी, महिला अपराध, अपहृता की बरामदगी और लंबित मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न करने के निर्देश डीआईजी ने दिए। अपहृत बरामदगी के मामलों में संवेदनशीलता, तत्परता और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
महिला सुरक्षा को लेकर डीआईजी ने कहा कि मिशन शक्ति, एंटी रोमियो स्क्वाड और महिला हेल्पडेस्क की निरंतर मॉनिटरिंग जरूरी है। 1090, 112, 108 और UP COP ऐप के जरिए जनजागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों को त्वरित सहायता देने के निर्देश दिए गए। गोवध निवारण अधिनियम के कड़े अनुपालन, थानों में लंबे समय से खड़े जब्त वाहनों के शीघ्र निस्तारण और एनसीआरबी पोर्टल की नियमित जांच पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
निरीक्षण के दौरान डीआईजी ने पुलिस अधीक्षक के साथ परतावल चौक पर पैदल गश्त कर यातायात व्यवस्था का जायजा लिया और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
डीआईजी के इस दौरे से पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है और संदेश साफ गया है कि महराजगंज में अपराध और अपराधियों के लिए अब कोई जगह नहीं।
पिंक कार्ड अभियान से पूर्वांचल की महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संरक्षण मिलेगा: कुलपति प्रो. पूनम टंडन
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की बड़ी पहल, 200 से अधिक महिलाओं का बना पिंक कार्ड
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण और जागरूकता को सशक्त बनाने की दिशा में “पिंक कार्ड अभियान” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महिला अध्ययन केंद्र, डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय, एम्स गोरखपुर तथा जिला स्वास्थ्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के GUWWA हॉल में संपन्न हुआ। अभियान के अंतर्गत महिला शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय परामर्श और स्वास्थ्य प्रोफाइल आधारित पिंक कार्ड तैयार किए गए।
कार्यक्रम की संरक्षक कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संदेश में कहा कि पिंक कार्ड अभियान महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संरक्षण उपलब्ध कराने की एक प्रभावी पहल है। नियमित स्वास्थ्य जांच से गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होती है, जिससे स्वस्थ महिला, स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज का निर्माण होता है। विश्वविद्यालय महिला शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
अभियान का उद्देश्य विश्वविद्यालय की समस्त महिला शिक्षकों और कर्मचारियों को एक ही मंच पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना रहा। इस दौरान 200 से अधिक महिलाओं के पिंक कार्ड बनाए गए, जिनमें उनके स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जानकारियां दर्ज की गईं।
स्वास्थ्य परीक्षण एम्स गोरखपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सेठ के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा किया गया। डॉ. प्रीति प्रियदर्शी और उनकी टीम ने भी जांच और परामर्श में सक्रिय भूमिका निभाई। परीक्षण में गैर-संचारी रोगों की जांच, एनीमिया की जांच, स्तन परीक्षण, गर्भाशय ग्रीवा जांच और मौखिक स्वास्थ्य जांच शामिल रही।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश झा अपनी पूरी टीम के साथ मौजूद रहे। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण चौधरी और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विनय पांडेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे जिले के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया।
कार्यक्रम के संयोजन में प्रो. दिव्या रानी सिंह, विभागाध्यक्ष गृह विज्ञान एवं महिला अध्ययन केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि यह अभियान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ नियमित जांच की संस्कृति को बढ़ावा देगा। परीक्षण के बाद सामने आया कि लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित थीं, जबकि 5 से 10 प्रतिशत महिलाओं में हाइपरटेंशन और मधुमेह की समस्या पाई गई। सीने में गांठ और दर्द जैसी समस्याओं का भी समाधान किया गया।
महिला आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया और जिला अस्पताल की ओर से उन्हें निःशुल्क दवाएं वितरित की गईं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहीं और उन्होंने अभियान को अत्यंत उपयोगी बताया।
प्रो. अनुभूति दूबे, प्रो. नंदिता सिंह, प्रो. सुषमा पांडेय, प्रो. सुनीता मुर्मू, प्रो. वीना बत्रा कुशवाहा, प्रो. सुधा यादव, प्रो. सुनीता दूबे सहित अनेक शिक्षकों और महिला कर्मचारियों ने पिंक कार्ड बनवाया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, डॉ. गार्गी पांडे, डॉ. गरिमा यादव और शोधार्थियों का योगदान रहा। अंत में आयोजकों ने चिकित्सकों, स्वास्थ्य विभाग की टीम और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
छात्रों में जगी ब्रह्मांड को जानने की जिज्ञासा
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में कॉस्मोलॉजी पर विशेष व्याख्यान
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की ओर से विज्ञान लोकप्रियकरण कार्यक्रम के अंतर्गत कॉस्मोलॉजी (ब्रह्मांड विज्ञान) विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध विज्ञान संप्रेषक शिबेश जस पैसिफिक रहे।
व्याख्यान के दौरान मुख्य वक्ता ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति, उसके निरंतर विस्तार, डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और आधुनिक खगोलभौतिकी में हो रहे नवीन अनुसंधानों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बिग बैंग सिद्धांत, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और आकाशगंगाओं के विकास जैसे जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल, सहज और प्रभावशाली उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिससे श्रोताओं में विषय के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न हुई।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम जनमानस के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना तथा ब्रह्मांड से जुड़े आधुनिक वैज्ञानिक विचारों को सुलभ भाषा में प्रस्तुत करना रहा। मुख्य वक्ता ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि विज्ञान केवल अकादमिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में तार्किक सोच, विवेकपूर्ण दृष्टि और वैज्ञानिक चेतना विकसित करने का सशक्त माध्यम है।
व्याख्यान के दौरान श्रोताओं की सक्रिय और उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने ब्रह्मांड विज्ञान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे। कार्यक्रम के समापन पर भौतिकी विभाग के संकाय सदस्यों ने मुख्य वक्ता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विज्ञान लोकप्रियकरण कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में वैज्ञानिक चेतना के प्रसार और युवा पीढ़ी को अनुसंधान के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गन्ने के खेत में तेंदुए का हमला, किशोरी की दर्दनाक मौत; डीएम ने किया निरीक्षण, इलाके में हाई अलर्ट
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। निचलौल तहसील के ग्राम पंचायत बढ़या के टोला गेठीहवां में गन्ने के खेत में तेंदुए के हमले से किशोरी की मौत ने पूरे जनपद को स्तब्ध कर दिया। घटना में ग्राम निवासी आबिद अली की पुत्री सैरून निशा मौके पर ही असमय मृत पाई गई। घटना के बाद गांव में मातम और आस-पास के क्षेत्रों में भय का माहौल बना हुआ है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवार से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की। डीएम ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए शासन से दुर्घटना सहायता राशि शीघ्र दिलाने का आश्वासन दिया।
स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में गठित सुरक्षा समितियों को तुरंत सक्रिय किया जाए। तेंदुओं से सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाने, गांवों में ढोल-नगाड़े, पटाखे और सायरन की व्यवस्था सुनिश्चित करने, जंगल और खेतों के आसपास ट्रैप कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए।
वन विभाग को रणनीति बनाकर तेंदुए को शीघ्र पकड़ने और मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए गए। डीएम ने ग्रामीणों से अपील की कि रात में घरों के दरवाजे बंद रखें, पालतू पशुओं को सुरक्षित बाड़ों में रखें, जंगल या खेत की ओर अकेले न जाएं, झाड़ियों और लंबी फसलों में बिना देखे प्रवेश न करें। बच्चों को अकेले जंगल की ओर भेजने से बचाएं और समूह में चलें। यदि तेंदुआ दिखाई दे तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत गांव या वन विभाग को सूचना दें।
इस दौरान प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) निरंजन सुर्वे, उपजिलाधिकारी निचलौल सिद्धार्थ गुप्ता सहित अन्य वन विभाग अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।
घटना के बाद गेठीहवा और आसपास के गांवों में भय का माहौल बना हुआ है और लोग खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन और वन विभाग की सक्रियता से ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही तेंदुए को पकड़ लिया जाएगा और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होगी।
125 दिन रोजगार की गारंटी, किसान-श्रमिक चौपाल में मिली योजनाओं की नई जानकारी
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विकास खंड बरहज में आयोजित किसान-श्रमिक चौपाल एवं जी राम जी योजना कार्यक्रम में ग्रामीणों को केंद्र सरकार की रोजगार और ग्रामीण विकास योजनाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान ग्रामीणों ने अपने सवाल पूछे और अधिकारियों ने उनका समाधान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि पूर्व में नरेगा और मनरेगा योजनाओं में कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आई थीं। बार-बार एक ही गड्ढा खुदवाना, नालियों का पुनर्निर्माण दिखाकर भुगतान जैसी धांधली को खत्म करने के लिए जी राम जी योजना लाई गई है।
उन्होंने बताया कि जी राम जी योजना के तहत अब 100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण मजदूरों को अधिक समय तक काम और आय का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष विवेक गुप्ता ने की।
जिला संयोजक राजेश मिश्रा ने कहा कि अब आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण भी योजना के अंतर्गत किया जाएगा। फसलों की बुवाई और कटाई के समय मजदूरों को आसानी से रोजगार और मजदूरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि पहले सरकारी कार्य उपलब्ध न होने का बहाना दिया जाता था, लेकिन अब समस्या का समाधान हो गया है।
कार्यक्रम में अंगद तिवारी, ब्लॉक प्रतिनिधि, और निखिल सिंह राजा ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि जी राम जी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, पारदर्शिता और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
किसान-श्रमिक चौपाल के दौरान किसानों ने मजदूरी, सिंचाई, फसल बुवाई-कटाई और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं उठाईं। आयोजकों ने भरोसा दिया कि इन मुद्दों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर समाधान किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन भाजपा जिला उपाध्यक्ष संजय सिंह ने किया। अंत में मंडल अध्यक्ष विवेक गुप्ता ने सभी अतिथियों और ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। इस अवसर पर निशिकांत दीक्षित, सचिन सिंह, काशिपति शुक्ला, राम जोखन निषाद, अभ्यानंद तिवारी, अशोक सोनकर, धर्मवीर सिंह, आशुतोष तिवारी, विजय, गोविंद आर्यन, अश्वनी दीक्षित, प्रमोद तिवारी, राजू मिश्रा, कोटवा के प्रधान कृष्ण मोहन पाठक, मिथुन, राम भवन, दीनबंधु सिंह, जितेंद्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में किसान, श्रमिक और महिलाएं उपस्थित रहीं।
1 से 9 मूलांक वालों के लिए कैसा रहेगा गुरुवार का दिन, जानें पूरा भविष्यफल
अंक राशिफल 22 जनवरी 2026: 1 से 9 मूलांक वालों के लिए कैसा रहेगा गुरुवार का दिन, जानें पूरा भविष्यफल
अंक ज्योतिष के अनुसार जिस तरह नाम और राशि के आधार पर राशिफल देखा जाता है, उसी तरह जन्मतिथि से तय होने वाले मूलांक के जरिए भी व्यक्ति के दिन, स्वभाव और संभावनाओं का आंकलन किया जाता है। 22 जनवरी 2026, गुरुवार का दिन है। आज का दिन कई मूलांकों के लिए अवसर लेकर आ रहा है, तो कुछ के लिए सावधानी का संकेत देता है। आइए जानते हैं 22 जनवरी को मूलांक 1 से 9 तक का अंक राशिफल और दिनभर की संभावनाएं।
मूलांक 1
आज 22 जनवरी के दिन आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और पेशेवर क्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं। अनुशासन आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा। धन के मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। प्रेम जीवन में नए अनुभव मिल सकते हैं, लेकिन किसी पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
मूलांक 2
आज कोई भी समस्या आपके लिए बड़ी नहीं होगी। जीवन में समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहेगा। स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें। प्रेम जीवन सकारात्मक रहेगा और पार्टनर के साथ ज्यादा समय बिताने का अवसर मिलेगा।
मूलांक 3
आज अपने पैसों को स्मार्ट तरीके और सावधानी के साथ संभालना जरूरी है। छोटे-मोटे मतभेदों के बावजूद प्रेम संबंध मजबूत रहेंगे। कार्यस्थल पर उत्पादकता बनी रहेगी, लेकिन वर्क और पर्सनल लाइफ में संतुलन बनाकर चलें।
मूलांक 4
आज का दिन दिलचस्प और संभावनाओं से भरा रहेगा। आपकी बुद्धि और रचनात्मकता नई जिम्मेदारियों में निखरकर सामने आएगी। सामाजिक और करियर ग्रोथ के अच्छे योग बन रहे हैं। हर मौके का सही उपयोग करें।
मूलांक 5
आज मुस्कुराते हुए चुनौतियों का सामना करें। प्रेम भावनाओं को खुलकर जाहिर करना आपके रिश्तों को मजबूत बनाएगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। कठिन परिस्थितियों से निकलने के लिए अपने अंतर्ज्ञान पर भरोसा रखें।
मूलांक 6
आज हर पेशेवर अवसर का भरपूर लाभ उठाने का दिन है। दिन थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए सोच-समझकर कदम उठाएं। करियर और प्रेम जीवन में नए रास्ते खुल सकते हैं, अवसर हाथ से न जाने दें।
मूलांक 7
आज धन से जुड़े मामलों में सतर्कता जरूरी है। स्वास्थ्य से संबंधित मामूली परेशानी हो सकती है। दिन बदलावों से भरा रहेगा, इसलिए नई संभावनाओं और अवसरों के लिए खुद को खुला रखें।
मूलांक 8
आज का दिन मिला-जुला रहने वाला है। प्रेम जीवन में रोमांस पर ध्यान दें, इससे रिश्तों में मधुरता आएगी। हर चुनौती को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करें। कार्यस्थल की राजनीति से दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा।
मूलांक 9
आज आपका दिन काफी प्रोडक्टिव रहेगा। प्रेम जीवन में ईमानदारी बनाए रखें। सौंपे गए हर पेशेवर कार्य को समय पर पूरा करने के लिए ठोस प्रयास करें। लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना आज आपकी सफलता की कुंजी होगी।
अंक ज्योतिष का महत्व
अंक ज्योतिष व्यक्ति के मूलांक के आधार पर उसके स्वभाव, निर्णय क्षमता और आने वाले समय की दिशा को समझने में मदद करता है। दैनिक अंक राशिफल से दिन की योजना बनाना आसान हो जाता है।
आज का दिन किसके लिए शुभ
आज मूलांक 1, 3 और 9 वालों के लिए करियर और आत्मविश्वास के लिहाज से दिन बेहतर है, जबकि मूलांक 6 और 8 वालों को सोच-समझकर निर्णय लेने की जरूरत है।
अंक राशिफल क्यों पढ़ें
दैनिक अंक राशिफल जीवन में सही समय पर सही निर्णय लेने में मार्गदर्शन करता है और मानसिक रूप से तैयार रहने में सहायक होता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य अंक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पूर्ण सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करते। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
शिक्षा, सत्ता और संवैधानिक विवेक: भारतीय लोकतंत्र का कठिन प्रश्न
जब पढ़ा खड़ा हो और अनपढ़ बैठा हो: लोकतंत्र में शिक्षा का अपमान
डॉ. सत्यवान सौरभ
किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी शिक्षा-व्यवस्था और उस शिक्षा को मिलने वाले सम्मान से होती है। शिक्षा केवल डिग्रियों का संग्रह नहीं, बल्कि विवेक, अनुशासन, संवैधानिक समझ और सार्वजनिक जिम्मेदारी का संस्कार है। प्रश्न यह है कि क्या भारत जैसा लोकतांत्रिक राष्ट्र वास्तव में इस शिक्षा का सम्मान कर रहा है, या फिर सत्ता के गलियारों में पढ़े-लिखे लोग केवल आदेश पालन की मुद्रा में खड़े रहने के लिए ही नियत कर दिए गए हैं।
भारत में लाखों युवा वर्षों तक कठिन तैयारी, असफलताओं और निरंतर संघर्ष के बाद सिविल सेवाओं तक पहुँचते हैं। वे संविधान, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र और नीति-निर्माण जैसे विषयों का गहन अध्ययन कर आईएएस, आईपीएस और अन्य सेवाओं में चयनित होते हैं। चयन के बाद भी प्रशिक्षण, फील्ड पोस्टिंग और जवाबदेही का कठोर अनुशासन उनका हिस्सा रहता है। इसके बावजूद अनेक अवसरों पर वही अधिकारी ऐसे जनप्रतिनिधियों के सामने हाथ बाँधकर खड़े दिखते हैं, जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक समझ सीमित होती है। यही वह दृश्य है जहाँ व्यंग्य नहीं, व्यवस्था की कड़वी सच्चाई बोलती है—अनपढ़ बैठे हैं, पढ़ा खड़ा है।
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एक सिविल सेवक बनने की यात्रा वर्षों की साधना है। यह परीक्षा केवल स्मरण-शक्ति की नहीं, बल्कि विश्लेषण, नैतिकता और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता की भी कसौटी है। सेवा में आने के बाद हर फाइल, हर आदेश और हर हस्ताक्षर भविष्य की जांच-परख के दायरे में रहता है। इसके विपरीत, राजनीति में प्रवेश के लिए न न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य है, न ही प्रशासनिक प्रशिक्षण। जनसमर्थन लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन जब वही जनसमर्थन योग्यता के अभाव को ढकने का साधन बन जाए, तो समस्या गहराने लगती है।
लोकतंत्र का अर्थ जनता का शासन है, लेकिन लोकतंत्र कभी भी अज्ञान का उत्सव नहीं रहा। दुनिया की सफल लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में राजनीतिक नेतृत्व और पेशेवर प्रशासन—दोनों को समान महत्व दिया गया है। वहाँ निर्णय भावनाओं से नहीं, तथ्यों और तर्कों से लिए जाते हैं। भारत में स्थिति यह बनती जा रही है कि बहस में शोर अधिक है और अध्ययन कम। आरोप-प्रत्यारोप की गर्मी अधिक है, जबकि आंकड़ों और तथ्यों की रोशनी कम। ऐसे माहौल में अफसरशाही, जो ज्ञान और प्रक्रिया की प्रतिनिधि है, केवल आदेश मानने वाली मशीन बनकर रह जाती है।
स्वतंत्र भारत की कल्पना में खादी और खाकी को एक-दूसरे का पूरक माना गया था। खादी जनमत और नीति-निर्माण का प्रतीक थी, खाकी कानून और निष्पक्ष क्रियान्वयन का। दोनों के बीच सम्मान आधारित संतुलन से ही सुशासन की नींव रखी जानी थी। आज स्थिति यह है कि खादी कई बार संख्या-बल और सत्ता की ताकत के सहारे अपनी बात थोपती दिखती है, जबकि खाकी स्थानांतरण, प्रतिशोध या आरोपों के डर से विवेकपूर्ण सलाह देने से कतराने लगती है। परिणामस्वरूप “सही क्या है” से अधिक महत्वपूर्ण “ऊपर क्या चाहते हैं” हो जाता है।
इस मानसिकता का सीधा असर समाज में शिक्षा की छवि पर पड़ता है। जब युवा देखते हैं कि जिसने वर्षों पढ़ाई की, वही अंततः केवल खड़ा है, और बिना तैयारी के सत्ता तक पहुँचा व्यक्ति बैठकर निर्णय ले रहा है, तो शिक्षा के प्रति निराशा स्वाभाविक है। संदेश स्पष्ट हो जाता है—ज्ञान से सत्ता नहीं मिलती, मेहनत से सम्मान सुनिश्चित नहीं। धीरे-धीरे शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम बन जाती है, समाज को दिशा देने का नहीं।
विडंबना यह भी है कि जब नीतियाँ विफल होती हैं या योजनाएँ जमीन पर नहीं उतरतीं, तो सबसे पहले जिम्मेदारी अफसरों पर डाल दी जाती है। जबकि वास्तविकता यह है कि बड़े निर्णय राजनीतिक स्तर पर लिए जाते हैं और अफसर उनका क्रियान्वयन करते हैं। यह दोहरा अन्याय है—निर्णय में सीमित भूमिका, लेकिन जवाबदेही पूरी।
यह प्रश्न उठाना आवश्यक है कि क्या नीति-निर्माण के लिए न्यूनतम शिक्षा और प्रशासनिक समझ जरूरी नहीं होनी चाहिए। यह जनप्रतिनिधियों की वैधता पर सवाल नहीं, बल्कि शासन की क्षमता पर चर्चा है। जनादेश सर्वोच्च है, लेकिन क्या जनादेश अपने-आप में हर क्षेत्र की विशेषज्ञता का प्रमाणपत्र है? जब डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक के लिए योग्यता अनिवार्य है, तो करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वाले मंत्रालयों के नेतृत्व के लिए क्यों नहीं?
समाधान किसी एक पक्ष को श्रेष्ठ या हीन ठहराने में नहीं है, बल्कि संतुलन में है। जनप्रतिनिधि नीति की दिशा तय करें, प्राथमिकताएँ निर्धारित करें और अफसर उस दिशा को संवैधानिक ढांचे व प्रशासनिक व्यावहारिकता के अनुसार लागू करें। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के लिए अनिवार्य संवैधानिक प्रशिक्षण, मंत्रियों और विधायकों के लिए व्यवस्थित ओरिएंटेशन, विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी और अफसरशाही को भय-मुक्त पेशेवर स्वतंत्रता आवश्यक है।
लोकतंत्र में शिक्षा का सम्मान मांगना लोकतंत्र-विरोधी नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का प्रयास है। जनता चाहती है कि निर्णय सोच-समझकर, तथ्यों और तर्कों के आधार पर हों। जब तक यह दृश्य बना रहेगा—खादी बैठी है, खाकी खड़ी है—तब तक शिक्षा का अपमान होता रहेगा। जिस दिन पढ़ा-लिखा केवल खड़ा नहीं, बल्कि सम्मान के साथ निर्णय करता दिखाई देगा, उसी दिन कहा जा सकेगा कि भारत में शिक्षा को उसका वास्तविक स्थान मिला है।
वर्दी, मर्यादा और विश्वास का संकट
— डॉ. प्रियंका सौरभ
लोकतंत्र में पुलिस व्यवस्था राज्य सत्ता का सबसे संवेदनशील, प्रभावशाली और भरोसेमंद चेहरा मानी जाती है। पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि राज्य की नैतिक शक्ति, अनुशासन और न्याय का प्रतीक भी होती है। ऐसे में जब पुलिस तंत्र का कोई शीर्ष अधिकारी गंभीर नैतिक आरोपों में घिरता है, तो सवाल केवल व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं रहते। यह पूरे प्रशासनिक ढांचे, उसकी जवाबदेही, आचरण और सार्वजनिक विश्वास पर गहरा असर डालता है। कर्नाटक के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं डीजीपी (सिविल राइट्स एन्फोर्समेंट) को कथित आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद निलंबित किया जाना इसी व्यापक संकट की ओर इशारा करता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो क्लिप्स ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी हलचल पैदा कर दी। राज्य सरकार द्वारा लिया गया त्वरित निलंबन निर्णय यह संकेत देता है कि मामले को केवल निजी आचरण तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि इसे सार्वजनिक पद की गरिमा और संस्थागत प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा गया। हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त यह भी है कि किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो। यही संतुलन लोकतंत्र की आत्मा है—न तो आरोपों को नज़रअंदाज़ करना और न ही जांच से पहले फैसला सुना देना।
पुलिस की वर्दी एक सामान्य पोशाक नहीं होती। यह नागरिकों और राज्य के बीच विश्वास का जीवंत प्रतीक होती है। विशेष रूप से डीजीपी स्तर का अधिकारी केवल आदेश देने वाला प्रशासक नहीं, बल्कि पूरे पुलिस बल के लिए नैतिक दिशा तय करने वाला नेतृत्व होता है। उसके आचरण से यह संदेश जाता है कि व्यवस्था किस मूल्यों पर खड़ी है और कानून लागू करने वाले स्वयं कितनी मर्यादा का पालन करते हैं।
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जब किसी शीर्ष अधिकारी पर ऐसे आरोप लगते हैं, तो आम नागरिक के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि यदि नीति निर्धारण और अनुशासन लागू करने वाले ही मर्यादाओं को लेकर लापरवाह हों, तो आम आदमी को न्याय और सुरक्षा का भरोसा कैसे हो। यहीं से व्यक्तिगत आचरण सार्वजनिक चिंता का विषय बन जाता है और संस्थागत साख पर सवाल खड़े होते हैं।
यह प्रकरण सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को भी उजागर करता है। आज किसी भी कथित वीडियो या डिजिटल सामग्री का कुछ ही समय में व्यापक प्रसार हो जाता है। इससे एक ओर पारदर्शिता बढ़ती है, वहीं दूसरी ओर अफवाह, छेड़छाड़ और दुरुपयोग का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में सरकार और जांच एजेंसियों के सामने दोहरी चुनौती होती है—जनभावना का सम्मान करते हुए तथ्यों की गहन और तकनीकी जांच सुनिश्चित करना।
सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई करना अत्यंत संवेदनशील निर्णय होता है। कर्नाटक सरकार द्वारा निलंबन का कदम यह दर्शाता है कि प्रारंभिक स्तर पर ही जवाबदेही तय कर निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करने का प्रयास किया गया। निलंबन स्वयं में दंड नहीं होता, बल्कि जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने का एक प्रशासनिक उपाय है—यह तथ्य समझना भी आवश्यक है।
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अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि किसी अधिकारी का निजी जीवन उसके पेशेवर दायित्वों से अलग होना चाहिए। सिद्धांत रूप में यह बात सही प्रतीत होती है, लेकिन उच्च संवैधानिक और प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए निजी और सार्वजनिक जीवन के बीच की रेखा अत्यंत पतली होती है। कारण स्पष्ट है—उनका हर आचरण सीधे संस्था की छवि और जनता के विश्वास से जुड़ा होता है।
यदि कथित कृत्य ऐसे हों जो सार्वजनिक नैतिकता, महिला सम्मान या पद की गरिमा के विपरीत माने जाएँ, तो उन्हें केवल “निजी मामला” कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषकर तब, जब उन कृत्यों का संबंध सार्वजनिक पद, वर्दी या आधिकारिक वातावरण से जोड़ा जा रहा हो।
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न व्यक्ति से आगे बढ़कर संस्थागत जवाबदेही का है। क्या हमारी प्रशासनिक संरचनाओं में ऐसे मजबूत तंत्र मौजूद हैं, जो समय रहते आचरण संबंधी विचलनों को पहचान सकें। क्या वरिष्ठ अधिकारियों के लिए बनी आचार संहिता केवल कागज़ों तक सीमित होकर रह गई है।
आईपीएस जैसे प्रतिष्ठित कैडर से समाज अपेक्षा करता है कि वह केवल कानून का पालन ही न कराए, बल्कि नैतिक नेतृत्व का उदाहरण भी प्रस्तुत करे। यदि किसी एक अधिकारी की कथित चूक पूरे पुलिस बल की छवि को प्रभावित करती है, तो यह संकेत है कि आंतरिक निगरानी, नैतिक प्रशिक्षण और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन पर नए सिरे से गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
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लोकतांत्रिक शासन का मूल संदेश यही होता है कि कानून सबके लिए समान है—चाहे वह आम नागरिक हो या सर्वोच्च पद पर आसीन अधिकारी। यदि जांच के बाद आरोप सिद्ध होते हैं, तो कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो यह स्पष्ट संदेश दे कि पद, प्रभाव और पहचान कानून से ऊपर नहीं हैं। वहीं यदि आरोप असत्य या बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए गए पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी की प्रतिष्ठा को पूरी तरह पुनर्स्थापित करना भी न्याय का अनिवार्य हिस्सा है।
आम नागरिक पुलिस से केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि नैतिक आश्वासन भी चाहता है। वह यह भरोसा रखना चाहता है कि जिन हाथों में कानून की बागडोर है, वे स्वयं कानून और मर्यादा के दायरे में हैं। जब इस प्रकार के प्रकरण सामने आते हैं, तो जनता का भरोसा डगमगाता है—और यही किसी भी लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा होता है।
इसलिए सरकारों और संस्थानों की जिम्मेदारी केवल तात्कालिक कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए निरंतर नैतिक प्रशिक्षण, आचरण आधारित मूल्यांकन, मनोवैज्ञानिक परामर्श और जवाबदेही की स्पष्ट व प्रभावी प्रक्रियाएँ विकसित करनी होंगी।
कर्नाटक डीजीपी प्रकरण केवल एक अधिकारी के कथित आचरण का मामला नहीं है। यह उस व्यापक प्रश्न का प्रतीक है कि सत्ता, नैतिकता और जवाबदेही के बीच हमारा संतुलन कितना मजबूत है। निलंबन एक प्रारंभिक कदम है, अंतिम निष्कर्ष नहीं। असली कसौटी निष्पक्ष जांच, पारदर्शी प्रक्रिया और न्यायसंगत निर्णय में निहित है।
लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब संस्थाएँ स्वयं को सुधारने का साहस दिखाती हैं। वर्दी की गरिमा, पद की मर्यादा और जनता का विश्वास—इन तीनों की रक्षा के लिए यह आवश्यक है कि कानून बिना भय और पक्षपात के अपना काम करे। यही इस पूरे प्रकरण से निकलने वाला सबसे महत्वपूर्ण और स्थायी संदेश होना चाहिए।
डॉ. प्रियंका सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान)
कवयित्री | सामाजिक चिंतक
जनतंत्र की खोखल होती नींव और तानाशाही की बढ़त: चुनाव प्रक्रिया पर बढ़ता सत्ता का शिकंजा
व्यंग्यकार – राजेंद्र शर्मा
नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपना राजनीतिक अभियान तेज कर दिया है। भले ही चुनाव आयोग ने अभी चुनाव की तारीखों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सत्ताधारी दल का चुनावी मोड पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। आमतौर पर माना जा रहा है कि अप्रैल में संभावित चुनावों के लिए फरवरी के दूसरे पखवाड़े में तारीखों का ऐलान किया जाएगा। इस अंतराल में सत्ताधारी पार्टी को सरकारी संसाधनों और योजनाओं के सहारे अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की लगभग खुली छूट मिल जाती है।
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वास्तविकता यह है कि चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद भी सत्ताधारी दल और उसके शीर्ष नेताओं पर कोई प्रभावी रोक-टोक देखने को नहीं मिलती। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि आयोग अब एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के बजाय सत्ता पक्ष के हितों के अनुरूप काम करता दिखाई देता है। ऐसे में चुनाव से पहले और बाद के दौर में फर्क लगभग समाप्त हो गया है।
यह स्थिति हमेशा से ऐसी नहीं थी। भारतीय चुनाव प्रणाली का विकास लंबे समय तक अधिक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी दिशा में हुआ था। टी. एन. शेषन के कार्यकाल में चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू कर कार्यपालिका से अपनी स्वायत्तता स्थापित की थी। यही वह दौर था जब चुनाव प्रक्रिया को लोकतंत्र की आत्मा माना जाता था।
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लेकिन बीते वर्षों में यह दिशा उलट गई है। आज चुनाव प्रक्रिया पर कार्यपालिका का सीधा प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। मतदाता सूचियों का विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे कदम, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मतदाताओं की राय जानने के बजाय, सत्ता के अनुकूल मतदाताओं को चुनने का माध्यम बनाते प्रतीत हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से आ रही खबरें इस आशंका को और गहरा करती हैं। अल्पसंख्यकों, दलितों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने, वहीं संदिग्ध तरीके से नए नाम जोड़े जाने के आरोप सामने आए हैं। यह सब एक संगठित और लक्षित प्रयास की ओर इशारा करता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा है।
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चुनावी दौर में एक और चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आती है—सांप्रदायिक मुद्दों का खुला उपयोग और सरकारी योजनाओं को निजी चुनावी लाभ में बदलना। घुसपैठ जैसे शब्दों का चयनात्मक प्रयोग, समाज में विभाजन को और गहरा करता है। वहीं सरकारी घोषणाओं को चुनावी उपकार के रूप में प्रस्तुत कर नागरिकों को अधिकार-संपन्न मतदाता के बजाय कृपा-आश्रित प्रजा में बदलने की कोशिश की जा रही है।
यह स्थिति लोकतंत्र को एक खोखले ढांचे में बदलने का संकेत देती है, जहां चुनाव केवल सत्ता को वैधता देने का औजार बनकर रह जाएं। यदि लोकतंत्र को तानाशाही के खोल में सिमटने से बचाना है, तो चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाना और हर उल्लंघन का हिसाब मांगना अनिवार्य होगा। नागरिकों को अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए सजग होना ही होगा, तभी चुनाव वास्तव में जनतंत्र का उत्सव बन सकेंगे।
औरैया में अपराध नियंत्रण को लेकर बड़ा फैसला
औरैया | (राष्ट्र की परम्परा) जनपद औरैया में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए तीन शातिर अपराधियों को छह माह के लिए जिला बदर करने का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई से जिले में आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
जिला बदर किए गए अपराधियों में नागेन्द्र सिंह उर्फ पिंकू पुत्र शिवपाल निवासी सिंकू थाना सहायल, रोहित पुत्र राजू कंजड़ निवासी गिहार बस्ती नारायणपुर थाना कोतवाली औरैया तथा संदीप कुमार पुत्र स्व. कमलेश कुमार निवासी पुरानी दिबियापुर थाना दिबियापुर शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार इन तीनों के विरुद्ध विभिन्न थानों में गंभीर धाराओं के तहत कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और इनकी गतिविधियां सार्वजनिक शांति के लिए खतरा बनी हुई थीं।
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जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि निष्कासन अवधि के दौरान इन अपराधियों की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा यह भी पुख्ता व्यवस्था की जाए कि वे छह माह तक जनपद औरैया की सीमा में प्रवेश न कर सकें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
विश्व और भारत को अलविदा कहने वाले महान व्यक्तित्वों के महत्वपूर्ण निधन
22 जनवरी का इतिहास: विश्व और भारत को अलविदा कहने वाले महान व्यक्तित्वों के महत्वपूर्ण निधन
22 जनवरी इतिहास में कई ऐसे महान व्यक्तित्वों के निधन का साक्षी है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। संगीत, सिनेमा, सैन्य सेवा और शासन के क्षेत्र में योगदान देने वाले इन व्यक्तियों का प्रभाव आज भी समाज और इतिहास में जीवित है। आइए 22 जनवरी को हुए प्रमुख निधन और उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।
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2021 – नरेंद्र चंचल (भारत, दिल्ली)
नरेंद्र चंचल भारत के प्रसिद्ध भजन और भक्ति संगीत गायक थे। उनका जन्म पंजाब में हुआ था, लेकिन कर्मभूमि दिल्ली रही। वे विशेष रूप से देवी भजनों के लिए जाने जाते थे और “दरबार में हाजिर” जैसे भजनों से उन्हें अपार लोकप्रियता मिली। नवरात्रि और धार्मिक आयोजनों में उनकी आवाज़ श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनती थी। उन्होंने भक्ति संगीत को जन-जन तक पहुँचाया और युवा पीढ़ी को भी धार्मिक संगीत से जोड़ा। 22 जनवरी 2021 को दिल्ली में उनका निधन हुआ। उनका योगदान भारतीय भक्ति संगीत को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण रहा।
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2014 – ए. नागेश्वर राव (भारत, आंध्र प्रदेश)
अक्किनेनी नागेश्वर राव तेलुगु सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और फ़िल्म निर्माता थे। उनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ और उन्होंने लगभग सात दशकों तक सिनेमा में सक्रिय योगदान दिया। वे रोमांटिक, सामाजिक और पौराणिक भूमिकाओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे। उन्होंने तेलुगु फ़िल्म उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अन्नपूर्णा स्टूडियो की स्थापना कर उन्होंने नई प्रतिभाओं को मंच दिया। 22 जनवरी 2014 को हैदराबाद में उनका निधन हुआ। भारतीय सिनेमा में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
2010 – कोमोडोर बबरूभान यादव (भारत, उत्तर प्रदेश)
कोमोडोर बबरूभान यादव भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ और उन्होंने देश सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। नौसेना में उनकी नेतृत्व क्षमता और अनुशासन की मिसाल दी जाती थी। सेवा काल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों में योगदान दिया और युवा अधिकारियों के लिए प्रेरणा बने। 22 जनवरी 2010 को उनका निधन हुआ। भारतीय नौसेना और देश की रक्षा में उनका योगदान गौरवपूर्ण इतिहास का हिस्सा है।
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1901 – महारानी विक्टोरिया (यूनाइटेड किंगडम)
महारानी विक्टोरिया ब्रिटेन की सबसे प्रभावशाली शासकों में से एक थीं। उनका शासनकाल 1837 से 1901 तक रहा, जिसे “विक्टोरियन युग” कहा जाता है। इसी काल में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों तक हुआ। भारत में वे “भारत की महारानी” भी रहीं और ब्रिटिश शासन का प्रशासनिक ढांचा मजबूत हुआ। औद्योगिक क्रांति, रेलवे विस्तार और वैश्विक व्यापार में वृद्धि उनके समय की प्रमुख विशेषताएँ थीं। 22 जनवरी 1901 को उनका निधन हुआ। उनका शासन विश्व इतिहास में निर्णायक मोड़ माना जाता है।
1666 – शाहजहाँ (भारत, मुग़ल साम्राज्य)
शाहजहाँ मुग़ल साम्राज्य के पाँचवें सम्राट थे और उनका शासनकाल स्थापत्य कला के स्वर्णयुग के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म लाहौर में हुआ और शासन की राजधानी आगरा व दिल्ली रही। उन्होंने ताजमहल, लाल क़िला और जामा मस्जिद जैसे अद्भुत स्थापत्य धरोहरों का निर्माण कराया। उनके शासन में कला, संस्कृति और वास्तुकला को विशेष संरक्षण मिला। हालांकि जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें कैद का सामना करना पड़ा। 22 जनवरी 1666 को आगरा में उनका निधन हुआ। भारतीय इतिहास में उनका नाम स्थापत्य वैभव का प्रतीक है।
22 जनवरी: इतिहास रचने वाले व्यक्तित्वों का जन्मदिन
22 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: कला, राजनीति और इतिहास में अमिट छाप
22 जनवरी भारतीय और विश्व इतिहास में एक विशेष तिथि है। इस दिन जन्मे व्यक्तित्वों ने कला, संस्कृति, राजनीति, स्वतंत्रता संग्राम और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। नीचे 22 जनवरी को जन्मे प्रमुख व्यक्तित्वों का जन्म-इतिहास सरल, तथ्यात्मक और पाठक-हितैषी शैली में प्रस्तुत है।
तरुण राम फुकन (जन्म: 22 जनवरी 1977)
तरुण राम फुकन असम के एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने युवाओं, शिक्षा और सामाजिक समानता के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया। वे जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़ने, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाने और जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। असम के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उनके प्रयासों ने सामाजिक सुधार को गति दी। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा सशक्तिकरण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया। समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक प्रेरक व्यक्तित्व बनाती है।
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टी. एम. कृष्णा (जन्म: 22 जनवरी 1976)
टी. एम. कृष्णा कर्नाटक संगीत के विश्वविख्यात गायक हैं। उन्होंने पारंपरिक संगीत को नई सामाजिक चेतना से जोड़ा और संगीत को जन-सरोकारों से जोड़ने का साहसिक प्रयास किया। वे मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित हैं। टी. एम. कृष्णा न केवल एक कलाकार हैं, बल्कि सामाजिक समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समावेशी संस्कृति के प्रबल समर्थक भी हैं। उनकी गायकी, लेखन और वैचारिक हस्तक्षेप ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को नया दृष्टिकोण दिया।
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नम्रता शिरोडकर (जन्म: 22 जनवरी 1972)
नम्रता शिरोडकर भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री और पूर्व मिस इंडिया हैं। उन्होंने हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपने अभिनय से पहचान बनाई। सौम्य व्यक्तित्व और सशक्त अभिनय उनकी विशेषता रही। अभिनय करियर के बाद उन्होंने पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता दी और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं। नम्रता शिरोडकर आज भी भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित नामों में गिनी जाती हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।
केसिनेनी श्रीनिवास (जन्म: 22 जनवरी 1966)
केसिनेनी श्रीनिवास भारत की सत्रहवीं लोकसभा के सांसद रहे हैं। वे आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे। जन-सरोकारों, बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों पर उनका विशेष फोकस रहा। संसद में उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों को मजबूती से उठाया। राजनीति के साथ-साथ वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे, जिससे जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ बनी।
माणिक सरकार (जन्म: 22 जनवरी 1949)
माणिक सरकार त्रिपुरा के 9वें मुख्यमंत्री रहे और अपनी सादगी व ईमानदार राजनीति के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने लंबे समय तक त्रिपुरा का नेतृत्व किया और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन की मिसाल पेश की। सीमित संसाधनों में भी उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया। उनका जीवन भारतीय राजनीति में नैतिक मूल्यों और जनसेवा का प्रतीक माना जाता है।
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विजय आनन्द (जन्म: 22 जनवरी 1934)
विजय आनन्द हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और लेखक थे। उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई तकनीक और सशक्त कहानी-शैली दी। उनकी फिल्में आज भी क्लासिक मानी जाती हैं। निर्देशन के साथ-साथ उन्होंने पटकथा लेखन में भी योगदान दिया। विजय आनन्द ने सिनेमा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विचार और कला का माध्यम बनाया।
यू. थांट (जन्म: 22 जनवरी 1909)
यू. थांट बर्मा के महान राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र के तीसरे महासचिव थे। उन्होंने विश्व शांति, परमाणु निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया। उनके कार्यकाल में कई वैश्विक संकटों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने का प्रयास किया गया। यू. थांट को एक शांत, संतुलित और सिद्धांतनिष्ठ वैश्विक नेता के रूप में याद किया जाता है।
जयंतीलाल छोटेलाल शाह (जन्म: 22 जनवरी 1906)
जयंतीलाल छोटेलाल शाह भारत के 12वें मुख्य न्यायाधीश थे। उन्होंने भारतीय न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता को मजबूत किया। कानून के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। न्यायिक सुधारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे भारतीय न्याय व्यवस्था के एक सशक्त स्तंभ थे।
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ठाकुर रोशन सिंह (जन्म: 22 जनवरी 1892)
ठाकुर रोशन सिंह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के साहसी क्रांतिकारियों में से एक थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। देशभक्ति, त्याग और साहस उनके जीवन के मूल मूल्य थे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान आज भी प्रेरणा देता है और उन्हें वीर शहीदों में सम्मान के साथ याद किया जाता है।
अज़ीज़न बाई (जन्म: 22 जनवरी 1824)
अज़ीज़न बाई एक प्रसिद्ध नर्तकी थीं, जिनके भीतर गहरी देशभक्ति की भावना थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने क्रांतिकारियों की सहायता की और अंग्रेजों के विरुद्ध संदेश पहुँचाने में भूमिका निभाई। कला और राष्ट्रप्रेम का उनका अद्भुत संगम इतिहास में विशेष स्थान रखता है। अज़ीज़न बाई नारी शक्ति और साहस की प्रतीक मानी जाती हैं।
22 जनवरी का इतिहास: दुनिया और भारत की महत्वपूर्ण घटनाएँ जिन्होंने समय की दिशा बदली
22 जनवरी का दिन इतिहास में अनेक राजनीतिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के लिए जाना जाता है। इस तिथि पर घटित घटनाओं ने न केवल अपने समय को प्रभावित किया, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय की। आइए 22 जनवरी को घटित प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं पर क्रमबद्ध और संक्षिप्त दृष्टि डालते हैं।
2015 – यूक्रेन के दोनेत्स्क शहर में हुए भीषण विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
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2009 – विश्वप्रसिद्ध फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर को ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला। इसी वर्ष भारत सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत तीन बंदरगाह परियोजनाओं को मंजूरी दी।
2008 – राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने लालकृष्ण आडवाणी को आगामी लोकसभा चुनाव में भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करने के प्रस्ताव का समर्थन किया। पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान में लाक्या किले पर आतंकवादी हमले में पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।
2006 – श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने विद्रोही संगठन लिट्टे से शांति वार्ता की पेशकश की। इसी दिन इवा मोरालेस ने बोलीविया के राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
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2002 – इस्रायल ने फिलिस्तीनी शहर तुल्कोरम पर कब्जा किया। अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए टोक्यो में हुई अंतरराष्ट्रीय बैठक में 3.5 अरब डॉलर की सहायता की घोषणा की गई।
1998 – अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर मोनिका लेविंस्की ने अवैध संबंधों का आरोप लगाया, जिससे अमेरिकी राजनीति में बड़ा भूचाल आया।
1996 – कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की वेधशाला के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से लगभग 3,50,000 प्रकाश वर्ष दूर दो नए ग्रहों की खोज की।
1993 – इंडियन एयरलाइंस का विमान औरंगाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 61 यात्रियों की मौत हुई।
1981 – रोनाल्ड रीगन ने संयुक्त राज्य अमेरिका के 40वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की।
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1970 – बोइंग 747 विमान की न्यूयॉर्क और लंदन के बीच पहली व्यावसायिक उड़ान शुरू हुई।
1963 – देहरादून में दृष्टिहीनों के लिए राष्ट्रीय पुस्तकालय की स्थापना हुई।
1924 – रैमसे मैकडोनाल्ड ब्रिटेन में लेबर पार्टी के पहले प्रधानमंत्री बने।
1905 – रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में मजदूरों पर गोलीबारी हुई, जिसमें 500 से अधिक लोग मारे गए, यह घटना ‘ब्लडी संडे’ के नाम से जानी जाती है।
1837 – दक्षिणी सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप में हजारों लोगों की जान गई।
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1760 – वांदीवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों को पराजित किया।
1673 – न्यूयॉर्क और बोस्टन के बीच डाक सेवा की शुरुआत हुई।
1517 – तुर्की साम्राज्य ने काहिरा पर कब्जा कर लिया।
यह सभी घटनाएँ 22 जनवरी को इतिहास में विशेष स्थान दिलाती हैं और हमें अतीत से सीख लेने का अवसर प्रदान करती हैं।
चौघड़िया, नक्षत्र और चंद्रबल की पूरी जानकारी
22 जनवरी 2026 का पंचांग: गणेश जयंती, वरद चतुर्थी, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया और ग्रह-नक्षत्र का संपूर्ण विवरण
प्रस्तावना: आज 22 जनवरी 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ आज गणेश जयंती और वरद चतुर्थी का पावन संयोग बन रहा है। चंद्रमा कुंभ राशि में संचार कर रहा है, जिससे कुछ राशियों को विशेष चंद्रबल प्राप्त होगा। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण पंचांग, शुभ-अशुभ समय, राहुकाल, चौघड़िया, नक्षत्र, योग और ग्रह स्थिति का विस्तृत विवरण।
आज का पंचांग | 22 जनवरी 2026
तिथि: माघ शुक्ल चतुर्थी (02:28 AM तक), इसके बाद पंचमी
वार: गुरुवार
संवत: विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त), शक संवत 1947 (विश्वावसु)
मास: माघ (अमांत एवं पूर्णिमांत)
ऋतु: शिशिर | अयन: उत्तरायण
🌙 नक्षत्र, योग और करण
नक्षत्र: शतभिषा (02:26 PM तक), उपरांत पूर्वभाद्रपदा
योग: वरीयान (05:37 PM तक), उसके बाद परिघ
करण: वणिज (02:41 PM तक), विष्टि (02:28 AM तक), बाद बव
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☀️ सूर्य-चंद्र समय
सूर्योदय: 07:13 AM
सूर्यास्त: 06:03 PM
चन्द्रोदय: 09:24 AM
चन्द्रास्त: 09:26 PM
⚠️ अशुभ काल
राहुकाल: 01:59 PM – 03:20 PM
यमगण्ड: 07:13 AM – 08:34 AM
कुलिक: 09:56 AM – 11:17 AM
दुर्मुहूर्त: 10:50 AM – 11:33 AM, 03:09 PM – 03:53 PM
वर्ज्यम्: 08:52 PM – 10:28 PM
✅ शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: 05:37 AM – 06:25 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:16 PM – 01:00 PM
अमृत काल: 07:05 AM – 08:43 AM
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🕉️ त्योहार और व्रत
गणेश जयंती
वरद चतुर्थी
♒ ग्रह और राशि स्थिति
सूर्य राशि: मकर
चंद्र राशि: कुंभ (पूरा दिन-रात)
🔔 चंद्रबल (23/01/26 सुबह 07:13 तक)
मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु और कुंभ
⭐ ताराबल
02:26 PM तक अनुकूल नक्षत्र: अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा
02:26 PM के बाद: भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुष्य, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा, रेवती
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⏰ दिन का चौघड़िया
शुभ 07:13–08:34
रोग 08:34–09:56
उद्बेग 09:56–11:17
चर 11:17–12:38
लाभ 12:38–13:59
अमृत 13:59–15:20
काल 15:20–16:41
शुभ 16:41–18:02
🌙 रात का चौघड़िया
अमृत 18:03–19:41
चर 19:41–21:20
रोग 21:20–22:59
काल 22:59–00:38
लाभ 00:38–02:17
उद्बेग 02:17–03:55
शुभ 03:55–05:34
अमृत 05:34–07:13
