Friday, June 12, 2026
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UP Division Demand: उत्तर प्रदेश को अलग राज्यों में बांटने की मांग तेज, जानिए किससे लेनी होती है परमिशन

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश—देश का सबसे बड़ा राज्य, सबसे ज्यादा आबादी और सबसे अधिक सांसदों वाला प्रदेश—एक बार फिर बंटवारे की मांग को लेकर चर्चा में है। लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि क्या इतना बड़ा राज्य एक साथ प्रभावी तरीके से संचालित हो पा रहा है? पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग भी तेज हो गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई यूपी का बंटवारा संभव है और इसके लिए अनुमति किससे लेनी होती है?

यूपी बंटवारे की मांग फिर क्यों उठी?

उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग कोई नई नहीं है। समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों से यह आवाज उठती रही है। हाल के महीनों में पश्चिमी यूपी में छोटे राज्य की जरूरत को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुईं। अब अमेठी से पूर्वांचल राज्य की मांग खुलकर सामने आई है।

एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने कहा कि पूर्वांचल का विकास तभी संभव है, जब उसे अलग राज्य का दर्जा मिले। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि जनभावनाओं से भी जुड़ा है।

पूर्वांचल अलग राज्य की दलील क्या है?

पूर्वांचल को लेकर यह तर्क दिया जाता है कि यहां विकास की रफ्तार पश्चिमी और मध्य यूपी की तुलना में काफी धीमी रही है।

• शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं कमजोर
• औद्योगिक निवेश की कमी
• रोजगार के सीमित अवसर

समर्थकों का कहना है कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बने, तो प्रशासनिक फोकस बढ़ेगा, योजनाएं तेजी से लागू होंगी और स्थानीय समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से हो सकेगा।

क्या राज्य को बांटना आसान है?

किसी भी राज्य को बांटना आसान प्रक्रिया नहीं होती। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें कई स्तरों पर सहमति और औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। भारत के संविधान में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

संविधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर:

• किसी राज्य का क्षेत्र घटा या बढ़ा सके
• दो या दो से अधिक राज्यों को मिला सके
• या नया राज्य बना सके

यानी राज्य विभाजन का अंतिम फैसला संसद के पास होता है।

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राज्य विधानसभा की भूमिका क्या है?

जब राज्य बंटवारे का प्रस्ताव आता है, तो राष्ट्रपति उस प्रस्ताव को संबंधित राज्य की विधानसभा के पास राय के लिए भेजते हैं। विधानसभा इस पर चर्चा कर अपनी राय देती है।
हालांकि विधानसभा की राय कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन राजनीतिक और व्यावहारिक रूप से इसे काफी महत्व दिया जाता है।

जनता से परामर्श क्यों जरूरी है?

राज्य के बंटवारे का सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है। इसलिए इस प्रक्रिया में जनता, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श किया जाता है, ताकि यह साफ हो सके कि मांग सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरत और जनसमर्थन पर आधारित है।

संसद में कैसे पास होता है राज्य गठन का कानून?

राज्य बंटवारे से जुड़ा विधेयक संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में पेश किया जाता है। इसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है।
यह संविधान संशोधन जैसा जटिल मामला नहीं होता, जिससे राज्य गठन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो जाती है।

राष्ट्रपति की मंजूरी क्यों अहम है?

संसद से कानून पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति की सहमति मिलते ही अधिसूचना जारी होती है और नया राज्य कानूनी रूप से अस्तित्व में आ जाता है। इसके बाद प्रशासनिक ढांचा, सरकार और अन्य व्यवस्थाएं लागू की जाती हैं।

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पहले भी बन चुके हैं नए राज्य

भारत में पहले भी राज्यों का पुनर्गठन हुआ है:

• 2000: उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़, बिहार से झारखंड

• 2014: आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना का गठन

इन उदाहरणों से साफ है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो, तो नया राज्य बनना संभव है।

दहेज हत्या का खुलासा, आरोपी सन्नी राव पुलिस गिरफ्त में

दहेज हत्या में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार, शाहपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई


गोरखपुर (राष्ट्रीय परम्परा)।जनपद गोरखपुर के थाना शाहपुर क्षेत्र में दहेज हत्या के एक गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। महिला अपराधों के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए शाहपुर पुलिस ने दहेज हत्या मामले में वांछित चल रहे अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई थाना शाहपुर में पंजीकृत मुकदमा संख्या 02/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम की सुसंगत धाराओं में की गई है।

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पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान सन्नी राव पुत्र इन्द्रमोहन राव, निवासी मौजा सरस्वतीपुरम कॉलोनी, लेन नंबर-01, जेल बाईपास रोड, थाना शाहपुर, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है। अभियुक्त पर आरोप है कि उसने दहेज की मांग को लेकर विवाहिता को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, जिसके चलते महिला की मृत्यु हो गई।
घटना के बाद मृतका के परिजनों की तहरीर पर थाना शाहपुर में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान अभियुक्त की संलिप्तता स्पष्ट होने पर उसे वांछित घोषित किया गया। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया।

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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराधों में शामिल किसी भी दोषी को कानून के शिकंजे से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा।
फिलहाल गिरफ्तार अभियुक्त को न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि विवेचना निष्पक्ष और त्वरित रूप से पूरी की जाएगी ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

EU–India Relations: ‘भारत के बिना हम अधूरे हैं’, गणतंत्र दिवस पर EU नेताओं की मौजूदगी से बदलेगा वैश्विक समीकरण

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। वैश्विक राजनीति में भारत इस समय एक मजबूत, निर्णायक और भरोसेमंद शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है। एक ओर जहां अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक डील को लेकर सक्रिय दिख रहा है, वहीं यूरोपीय यूनियन (EU) खुलकर यह स्वीकार कर रही है कि भारत के बिना उसकी वैश्विक रणनीति अधूरी है। इसी बदले हुए समीकरण का संकेत है कि इस वर्ष 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के रूप में भारत आ रहे हैं।

औपचारिक यात्रा नहीं, रणनीतिक संदेश

यूरोपीय नेता भारत केवल औपचारिक शिष्टाचार यात्रा पर नहीं आ रहे, बल्कि अपने साथ रणनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक प्रस्तावों का मजबूत एजेंडा लेकर आ रहे हैं। भारत आने से पहले ही EU नेतृत्व यह मान चुका है कि भारत अब सिर्फ एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि उनकी रणनीतिक मजबूरी बन चुका है।

’भारत के बिना हम अधूरे हैं’ जैसे शब्द बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन की साफ तस्वीर पेश करते हैं।

भारत बना EU का भरोसेमंद साझेदार

जब दुनिया युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक दबावों से जूझ रही है, तब यूरोपीय यूनियन को भारत एक स्थिर, लोकतांत्रिक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में नजर आ रहा है। राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित EU–India Summit को इसी बदले वैश्विक संतुलन का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
गणतंत्र दिवस के आसपास होने वाला यह सम्मेलन केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन बदलने का ऐलान माना जा रहा है। इसके असर दिल्ली से लेकर बीजिंग और इस्लामाबाद तक महसूस किए जा सकते हैं।

EU–India समिट क्यों है खास?

दिल्ली में होने वाला EU–India समिट कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस दौरान:

• रक्षा और सुरक्षा सहयोग
• आतंकवाद-रोधी रणनीति
• साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा

जैसे अहम मुद्दों पर समझौतों की संभावना है।
EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि भारत अब यूरोप की आर्थिक मजबूती और रणनीतिक स्थिरता के लिए अनिवार्य बन चुका है।

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इंडो-पैसिफिक में बदलेगा संतुलन

नई सुरक्षा साझेदारी के तहत हिंद महासागर में खुले समुद्री मार्गों की सुरक्षा, मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस और जबरदस्ती की राजनीति के खिलाफ साझा रणनीति तैयार की जाएगी। इसे चीन की आक्रामक समुद्री नीति पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

पाकिस्तान की क्यों बढ़ेगी बेचैनी?

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और EU का एक मंच पर आना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। काउंटर टेररिज्म सहयोग मजबूत होने से आतंकी नेटवर्क पर वैश्विक दबाव बढ़ेगा और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय लॉबिंग कमजोर होगी।

चीन को क्यों है चिंता?

इंडो-पैसिफिक में नियम आधारित व्यवस्था और खुले समुद्री रास्तों पर जोर सीधे तौर पर चीन की विस्तारवादी नीति को चुनौती देता है। EU–India साझेदारी के जरिए टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और साइबर सिक्योरिटी में भरोसेमंद मानक विकसित होंगे, जिससे चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया जा सकेगा।

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आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा दांव

सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी बड़ा खेल होने वाला है। भारत और EU के बीच लंबे समय से अटकी Free Trade Agreement (FTA) वार्ता को नई गति मिलने की उम्मीद है।

• स्वच्छ ऊर्जा
• फार्मा सेक्टर
• सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन

मे सहयोग से भारत को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है। साथ ही मोबिलिटी फ्रेमवर्क के तहत छात्रों, रिसर्चर्स और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलने की संभावना है।

सरकारी नौकरी और रेलवे ठेका दिलाने के नाम पर 29 लाख की ठगी, खोराबार पुलिस ने वांछित आरोपी को दबोचा

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।सरकारी नौकरी और रेलवे में ठेका दिलाने का झांसा देकर 29 लाख रुपये की बड़ी ठगी का मामला थाना खोराबार क्षेत्र से सामने आया है। खोराबार पुलिस ने इस गंभीर आर्थिक अपराध में वांछित अभियुक्त संजीव कुमार पुत्र विजेन्द्र कुमार, निवासी ग्राम चेरिया, थाना बेलीपार, जनपद गोरखपुर को गिरफ्तार कर लिया है। अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

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पुलिस के अनुसार अभियुक्त ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर पीड़ित को सरकारी नौकरी दिलाने और रेलवे में ठेका दिलवाने का भरोसा दिया। इस प्रलोभन में आकर पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में कुल 29 लाख रुपये आरोपी को सौंप दिए। लंबे समय तक न तो नौकरी मिली और न ही रेलवे से संबंधित कोई ठेका, जिसके बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ।
पीड़ित की तहरीर पर थाना खोराबार में मुकदमा संख्या 25/2026 पंजीकृत किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस को अभियुक्त की भूमिका से जुड़े ठोस साक्ष्य प्राप्त हुए, जिसके आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई। पुलिस का कहना है कि इस मामले में शामिल अन्य सहयोगियों की पहचान की जा रही है और शीघ्र ही उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से नौकरी और ठेका दिलाने के नाम पर चल रहे ठगी के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगेगा। फिलहाल पुलिस ठगी की धनराशि की बरामदगी और पूरे गिरोह की जड़ तक पहुंचने के प्रयास कर रही है।

बीटिंग रिट्रीट रिहर्सल 22 जनवरी: विजय चौक समेत नई दिल्ली में ट्रैफिक प्रतिबंध, AI स्मार्ट ग्लास से होगी सख्त निगरानी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बीटिंग रिट्रीट समारोह के पूर्वाभ्यास के मद्देनज़र 22 जनवरी को राजधानी के कई इलाकों में यातायात प्रतिबंध लागू रहेंगे। दिल्ली यातायात पुलिस के अनुसार, विजय चौक शाम 4:00 बजे से 6:30 बजे तक आम यातायात के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। साथ ही रायसीना रोड पर कृषि भवन गोलचक्कर से विजय चौक की ओर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और समय से पहले यात्रा की योजना बनाएं।
कौन-कौन से रास्ते रहेंगे बंद (दोपहर 2:00 बजे से रात 9:30 बजे तक)
रिहर्सल के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रमुख सड़कों पर डायवर्जन/प्रतिबंध लागू रहेगा।
विजय चौक क्षेत्र पूरी तरह बंद रहेगा।
कर्तव्य पथ (राजपथ) पर विजय चौक से इंडिया गेट के बीच यातायात सीमित रहेगा।

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रफी मार्ग पर सुनहरी मस्जिद से कृषि भवन तक आवागमन बंद रहेगा।
जनपथ पर उद्योग भवन और रेल भवन के आसपास ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।
मानसिंह रोड पर सुनहरी मस्जिद से गोल डाकखाना के बीच दबाव अधिक रहेगा।
इसके अलावा दारा शिकोह रोड, कृष्ण मेनन मार्ग और सुनहरी मस्जिद के गोलचक्करों से आगे विजय चौक की दिशा में भी आवाजाही रोकी जाएगी।

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मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन की स्थिति
मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी, लेकिन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और उद्योग भवन जैसे स्टेशनों पर भीड़ बढ़ सकती है। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों तक पहुंचने के लिए यात्रियों को अतिरिक्त समय रखने की सलाह दी गई है।
गणतंत्र दिवस से पहले हाईटेक सुरक्षा: AI स्मार्ट ग्लास तैनात
इस वर्ष पहली बार दिल्ली पुलिस इंटीग्रेटेड फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और थर्मल इमेजिंग से लैस AI-इनेबल्ड स्मार्ट ग्लास का उपयोग करेगी। ये पहनने योग्य डिवाइस अधिकारियों के मोबाइल से कनेक्ट रहेंगे और क्रिमिनल डेटाबेस से रियल-टाइम में लिंक होंगे।
एडिशनल सीपी (नई दिल्ली) देवेश कुमार महला के अनुसार, सिस्टम में हरा बॉक्स दिखने पर व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं, जबकि लाल बॉक्स दिखने पर रिकॉर्ड होने का संकेत मिलेगा। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में त्वरित पहचान और आवश्यक कार्रवाई संभव होगी।

मानवता आज भी जिंदा है, बस उसे सुनने और समझने वाला चाहिए


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। तेज रफ्तार, तकनीक और दिखावे से भरे इस दौर में अक्सर कहा जाता है कि मानवता मर चुकी है। लोग अपने स्वार्थ तक सिमट गए हैं और संवेदनाएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे अलग है। मानवता आज भी जीवित है, बस उसकी पीड़ा सुनने और उसका हाथ थामने वाला कोई चाहिए।
हर गांव, हर मोहल्ले और हर शहर में ऐसे लोग मौजूद हैं जो चुपचाप संघर्ष कर रहे हैं। कोई सरकारी योजनाओं से वंचित है, तो कोई इलाज और भोजन के अभाव में टूट रहा है। ये लोग नारे नहीं लगाते, न ही सुर्खियां बनते हैं। वे सिर्फ इंतजार करते हैं कि कोई उनकी बात सुने, कोई उनकी तकलीफ समझे।
सरकारी योजनाएं और नीतियां कागजों पर प्रभावशाली दिखती हैं, लेकिन जब तक उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तब तक विकास अधूरा रहता है। असली समस्या संसाधनों की नहीं, बल्कि संवेदनशीलता की कमी की है। फाइलों में दबे आवेदन और दफ्तरों के चक्कर काटते लोग हमारी व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करते हैं।
समाज की भूमिका भी उतनी ही अहम है। हर समस्या को सिर्फ सरकार पर छोड़ देना हमारी जिम्मेदारी से बचना है। जब तक आम नागरिक कमजोर की आवाज़ नहीं बनेगा, तब तक इंसानियत अधूरी रहेगी। मानवता नीतियों से नहीं, बल्कि नजरिए और नीयत से जीवित रहती है।

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आज जरूरत है कि शासन-प्रशासन अधिक संवेदनशील बने, समाज जागरूक हो और हर व्यक्ति अपने स्तर पर इंसानियत निभाए। क्योंकि जब सुनने वाला होगा, तभी दबे हुए शब्द आवाज़ बन पाएंगे। मानवता मरी नहीं है, वह आज भी उम्मीद की तरह सांस ले रही है।

महिला से मंगलसूत्र लूटने वाला शातिर अपराधी गिरफ्तार

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद गोरखपुर के थाना चिलुआताल क्षेत्र में महिला के गले से मंगलसूत्र लूटने की घटना का पुलिस ने सफल खुलासा करते हुए वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई अपराध नियंत्रण की दिशा में चिलुआताल पुलिस की एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
पुलिस के अनुसार, 21 जून 2025 को अभियुक्त जितेन्द्र कुमार पुत्र स्वर्गीय भागवत, निवासी वार्ड नंबर 11 बापू नगर जंगल झाझावा, थाना पीपीगंज, जनपद गोरखपुर ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक महिला के गले से मंगलसूत्र छीन लिया था। घटना के बाद पीड़िता के पति द्वारा थाना चिलुआताल में तहरीर दी गई, जिसके आधार पर मुकदमा संख्या 410/2025 भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में पंजीकृत किया गया।

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विवेचना के दौरान अभियुक्त की संलिप्तता स्पष्ट होने पर उसे वांछित घोषित किया गया था। लगातार दबिश और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया। वर्तमान में उसे न्यायालय में प्रस्तुत करने की विधिक प्रक्रिया जारी है।

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पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्त का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ गोरखपुर जनपद के विभिन्न थानों में लूट, छिनैती, मारपीट, धमकी और आर्म्स एक्ट से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज हैं। इसी कारण वह पुलिस की निगरानी सूची में शामिल था।
चिलुआताल पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से क्षेत्र में लूट और छिनैती की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। मामले से जुड़े अन्य फरार अभियुक्तों की तलाश भी तेज कर दी गई है।

एंटी करप्शन की बड़ी कार्रवाई: बिजली विभाग का टेंडर बाबू 5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार


गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत एंटी करप्शन टीम ने गोरखपुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग के एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 21 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 12:35 बजे की गई, जिसने विभागीय हलकों में हड़कंप मचा दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्युत वितरण मंडल द्वितीय में तैनात टेंडर बाबू अभिषेक भारती पर ठेकेदार से अवैध धनराशि मांगने का आरोप था। ठेकेदार शिव कुमार त्रिपाठी की जमानत धनराशि (एफडीआर) रिलीज करने के बदले 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। पीड़ित ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन विभाग से की, जिसके बाद गोपनीय जांच कर आरोपों की पुष्टि की गई।

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पूर्व नियोजित ट्रैप योजना के तहत जैसे ही ठेकेदार ने आरोपी को रिश्वत की रकम सौंपी, मौके पर तैनात एंटी करप्शन टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अभिषेक भारती को रंगे हाथ पकड़ लिया। तलाशी के दौरान रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई।
गिरफ्तारी के बाद टीम ने विद्युत वितरण मंडल द्वितीय स्थित कार्यालय को सील कराया और आरोपी को कैंट थाना ले जाया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से कार्यालय परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस घटनाक्रम से स्तब्ध नजर आए।

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एंटी करप्शन टीम द्वारा आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही विभागीय स्तर पर भी निलंबन व अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
इस कार्रवाई को आम जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि रिश्वतखोरी में लिप्त किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे

ED ने 57.78 करोड़ की संपत्ति की अटैच, MLA जीवन कृष्ण साहा सहित कई नाम शामिल

कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा)। पश्चिम बंगाल में सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की कोलकाता जोन टीम ने इस घोटाले से जुड़े करीब 57.78 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है। यह संपत्तियां कथित तौर पर अवैध शिक्षक भर्ती के जरिए कमाए गए पैसों से खरीदी गई थीं।

गलत भर्ती से कमाया गया पैसा, रियल एस्टेट में लगाया

ईडी के मुताबिक, सहायक शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी कर भारी रकम वसूली गई और फिर इस पैसे को जमीन, फ्लैट और विला खरीदने में निवेश किया गया। जिन लोगों की संपत्तियां अटैच हुई हैं, उनमें TMC विधायक जीवन कृष्ण साहा, प्रसन्न कुमार रॉय और अन्य आरोपी शामिल हैं।

ED जांच में बड़ा खुलासा

ईडी की जांच में सामने आया है कि ये प्रॉपर्टी कोलकाता के हाई-वैल्यू इलाकों—राजारहाट, न्यू टाउन, पाथरघाटा, गरगरी और आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं। इसके अलावा मुर्शिदाबाद और पूर्व वर्धमान जिलों में भी जमीन और मकान पाए गए हैं।

जांच के अनुसार, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान SSC (स्कूल सर्विस कमीशन) ने OMR शीट, मेरिट लिस्ट और पर्सनैलिटी टेस्ट तक में गड़बड़ी की। कई उम्मीदवारों से नकद पैसा लिया गया और फिर उसे बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाकर रियल एस्टेट में बदला गया।

प्रसन्न कुमार रॉय को बताया गया मुख्य बिचौलिया

ईडी ने प्रसन्न कुमार रॉय को इस शिक्षक भर्ती घोटाले का मुख्य बिचौलिया बताया है। आरोप है कि उसने अपने नेटवर्क के जरिए कई उम्मीदवारों से बड़ी रकम वसूली और उसी पैसे से प्रॉपर्टी खरीदी। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संपत्तियां उसकी करीबी और पूर्व पत्नी निलीमा मंगाल के नाम पर भी दर्ज हैं।

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MLA जीवन कृष्ण साहा की भूमिका भी उजागर

TMC विधायक जीवन कृष्ण साहा की भूमिका भी जांच के दायरे में है। ईडी के अनुसार, वह अवैध रूप से वसूले गए पैसे को इकट्ठा करने और आगे पहुंचाने में शामिल थे। अगस्त 2025 में मुर्शिदाबाद में हुई छापेमारी के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था। उनके और परिवार के नाम पर करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्तियां मिलीं, जिन्हें ईडी ने Proceeds of Crime बताया है।

अब तक 698 करोड़ की संपत्ति अटैच

ईडी इससे पहले भी पश्चिम बंगाल के विभिन्न भर्ती घोटालों में बड़ी कार्रवाई कर चुकी है।

• ग्रुप C और D भर्ती घोटाला: 247.20 करोड़

• सहायक शिक्षक भर्ती घोटाला (पहले): 238.78 करोड़

• प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाला: 154 करोड़

ताजा कार्रवाई के साथ अब तक कुल 698 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं, जो देश के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से एक मानी जा रही है।

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सुप्रीम कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है 25,000 नौकरियां

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2025 को बड़ा फैसला सुनाते हुए 25,000 से अधिक शिक्षक और नॉन-टीचिंग स्टाफ की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह भ्रष्ट करार दिया था। इसके बाद से ही ईडी और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है।
ईडी का कहना है कि मामले में आगे की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

Hyderabad Crime News: शक में पति ने पत्नी की बेरहमी से हत्या, व्हाट्सएप स्टेटस डालकर किया जुर्म कबूल

हैदराबाद/तेलंगाना। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बोराबंडा इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। शक के आधार पर एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी और इसके बाद व्हाट्सएप स्टेटस डालकर खुद अपराध कबूल कर लिया। यह सनसनीखेज वारदात बोराबंडा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के राजीव गांधी नगर की है।

पत्नी की कमाई पर निर्भर था आरोपी

पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान अंजनेयुलु के रूप में हुई है, जिसने अपनी 34 वर्षीय पत्नी सरस्वती की हत्या की। दोनों मूल रूप से तेलंगाना के वनपर्थी जिले के रहने वाले थे और उनकी शादी वर्ष 2013 में हुई थी। दंपती के दो छोटे बच्चे हैं।

सरस्वती एक आईटी कंपनी में हाउसकीपिंग सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थीं और उसी की कमाई से परिवार का खर्च चलता था। वहीं आरोपी अंजनेयुलु बेरोजगार था और पत्नी पर लगातार शक करता था, जिससे वह उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहता था।

बदलने का झांसा देकर पत्नी को घर लाया

लगातार प्रताड़ना से तंग आकर सरस्वती कुछ समय पहले अपने मायके चली गई थी। 17 जनवरी को आरोपी ने खुद को बदलने का भरोसा दिलाकर पत्नी को वापस घर ले आया, लेकिन यह वादा झूठा साबित हुआ।

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सोते समय रोलिंग पिन से हमला

सोमवार रात जब सरस्वती गहरी नींद में थी, तब अंजनेयुलु ने रोलिंग पिन (बेलन) से उसके सिर पर जोरदार वार किया। गंभीर चोट लगने से सरस्वती की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के वक्त पास में सो रहे बच्चे जाग गए, लेकिन आरोपी ने यह कहकर उन्हें शांत कर दिया कि उनकी मां सो रही है और फिर घर से फरार हो गया।

बच्चों ने देखा खून से लथपथ शव

कुछ देर बाद बच्चों ने अपनी मां को खून से लथपथ और निश्चल अवस्था में देखा तो वे घबरा गए। उन्होंने तुरंत अपने मामा सुधाकर को सूचना दी, जिसके बाद 100 डायल पर कॉल कर पुलिस को घटना की जानकारी दी गई।

व्हाट्सएप स्टेटस में किया अपराध कबूल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप स्टेटस लगाया, जिसमें लिखा था कि उसने अपने जीवन के आधे हिस्से को अपने हाथों से मार डाला। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी सरस्वती के एक भाई पर चाकू से हमला कर चुका था।

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आरोपी फरार, पुलिस तलाश में जुटी

सरस्वती के भाई सुधाकर की शिकायत पर बोराबंडा पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल आरोपी फरार है और पुलिस का कहना है कि उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

ग्रीनलैंड विवाद पर ट्रंप ने दिखाई नरमी, यूरोप पर टैरिफ लगाने का फैसला टला

दावोस/वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी और सैन्य कार्रवाई की अटकलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित टैरिफ को फिलहाल वापस लेने का फैसला किया है। इसे अमेरिका-नाटो संबंधों में व्यावहारिक और संतुलित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

1 फरवरी से टैरिफ नहीं होंगे लागू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी देते हुए कहा कि 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ अब आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई सकारात्मक और उपयोगी बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है।

ट्रंप ने लिखा,
“नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई बैठक के आधार पर हमने ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर भविष्य के एक संभावित समझौते की रूपरेखा तैयार की है।”

अमेरिका-नाटो सहयोग को बताया अहम

ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित ढांचा अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों—दोनों के हित में होगा। इसी कारण यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रीनलैंड से जुड़े ‘गोल्डन डोम’ प्रोजेक्ट पर बातचीत जारी है, जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ करेंगे।

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डेनमार्क ने फैसले का किया स्वागत

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने ट्रंप के फैसले का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की महत्वाकांक्षाओं के बीच तनाव कम करने में मददगार हो सकता है।

रासमुसेन ने प्रतिक्रिया में कहा,
“दिन की शुरुआत जैसी थी, उसका अंत उससे कहीं बेहतर हुआ है।”

नाटो महासचिव ने जताया भरोसा

नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने ट्रंप को भरोसा दिलाया कि संकट की स्थिति में नाटो सहयोगी देश अमेरिका के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने 9/11 के बाद अफगानिस्तान में नाटो की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि सहयोगी देशों ने अमेरिकी सेनाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी।

ग्रीनलैंड पर सैन्य बयानबाजी से पीछे हटे ट्रंप

दावोस में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर सैन्य नियंत्रण की पहले की बयानबाजी से भी दूरी बनाई। उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताते हुए कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण इसका रणनीतिक महत्व बढ़ गया है।
ट्रंप ने कहा,
“मैं जिस चीज की मांग कर रहा हूं, वह एक ठंडी और दूरस्थ जगह है, लेकिन यह विश्व शांति और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।”

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सच्चे भक्त के साथ कैसे खड़े होते हैं भगवान विष्णु

🔱 अदृश्य श्रीहरि और भक्त की अडिग आस्था
जब विष्णु स्वयं रक्षक बनकर साथ खड़े होते हैं

🔔 एपिसोड–11 का केंद्रीय शास्त्रोक्त संदेश
“भगवान विष्णु भक्त की परीक्षा नहीं लेते, वे भक्त की निष्ठा को संसार के सामने प्रकट करते हैं।”
भूमिका
पिछले एपिसोड में हमने देखा कि जब भक्त पूर्णतः अकेला प्रतीत होता है, तब श्रीहरि विष्णु अदृश्य रूप से उसके साथ खड़े होते हैं। यह शास्त्रों का अटल सत्य है कि ईश्वर कभी अपने भक्त को त्यागते नहीं, भले ही संसार उसे त्याग दे।
एपिसोड–11 उसी दिव्य क्षण का विस्तार है, जहाँ अदृश्य श्रीहरि केवल रक्षक नहीं, बल्कि धैर्य, धर्म और सत्य की जीवंत शक्ति बनकर प्रकट होते हैं। यह कथा केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत दर्शन है।

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🌺 शास्त्रोक्त कथा : जब भक्त मौन था और श्रीहरि सक्रिय
पुराणों में वर्णित है कि जब कोई भक्त निष्काम भाव से विष्णु का स्मरण करता है, तब भगवान स्वयं उसके जीवन की डोर थाम लेते हैं।
उस दिन भी ऐसा ही हुआ।
भक्त को चारों ओर से अपमान, छल और अन्याय ने घेर लिया था।
उसके पास न शक्ति थी, न साधन।
उसका एकमात्र सहारा था—“नारायण, नारायण”।
संसार की दृष्टि में वह पराजित था,
परंतु वैकुण्ठ में वही सबसे शक्तिशाली बन चुका था।
शास्त्र कहते हैं—
“अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥”
(भगवद्गीता 9.22)
अर्थात जो भक्त अनन्य भाव से मेरी भक्ति करता है,
उसका योग-क्षेम मैं स्वयं वहन करता हूँ।

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🌼 अदृश्य उपस्थिति का रहस्य
भगवान विष्णु हर बार सुदर्शन धारण कर प्रकट नहीं होते।
कभी वे विवेक बनते हैं,
कभी धैर्य,
तो कभी विपत्ति में सही निर्णय की शक्ति।
भक्त के साथ भी यही हुआ।
जब उसे अन्याय के विरुद्ध बोलने का अवसर मिला,
तो शब्द उसके नहीं थे—
वे श्रीहरि की प्रेरणा थे।
जब उसका हृदय टूटने को था,
तो जो शांति मिली—
वह श्रीहरि का स्पर्श था।

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🔱 विष्णु की महिमा : रक्षक, साक्षी और मार्गदर्शक
विष्णु केवल पालनकर्ता नहीं,
वे धर्म के सजीव प्रहरी हैं।
राम बनकर उन्होंने मर्यादा सिखाई
कृष्ण बनकर उन्होंने कर्म का रहस्य बताया
नरसिंह बनकर उन्होंने अन्याय का अंत किया
और इस कथा में—
वे अदृश्य बनकर यह सिखाते हैं कि सच्चा सहारा भीतर से मिलता है।

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🌸 समानता : प्रह्लाद से आज के भक्त तक
यह कथा हमें प्रह्लाद की याद दिलाती है।
जब हिरण्यकशिपु ने पूछा—
“तेरा भगवान कहाँ है?”
तो उत्तर मिला—
“हर जगह।”
आज का भक्त भी यही कहता है—
जब परिस्थितियाँ पूछती हैं,
“तेरा ईश्वर कहाँ है?”
तो उसका जीवन उत्तर देता है—
“मेरे धैर्य में, मेरे सत्य में, मेरी आस्था में।”

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🌼 भावनात्मक क्षण : जब संसार हारा और भक्ति जीती
भक्त रोया नहीं,
शिकायत नहीं की,
बस विष्णु का स्मरण करता रहा।
और वही स्मरण—
उसका कवच बन गया।
जिसे लोग उसकी कमजोरी समझ रहे थे,
वही उसकी सबसे बड़ी शक्ति बन गई।
📜 शास्त्रोक्त निष्कर्ष
एपिसोड–11 हमें सिखाता है कि—
ईश्वर की उपस्थिति शोर नहीं करती
विष्णु भक्त के साथ चलकर उसे महान बनाते हैं
सच्ची भक्ति का फल तुरंत नहीं, पर अमोघ होता है
जो विष्णु पर भरोसा करता है,
वह कभी वास्तव में अकेला नहीं होता।
🛕 (आगे की झलक – एपिसोड–12)
अगले एपिसोड में—
जब अदृश्य श्रीहरि स्वयं न्याय का द्वार खोलते हैं,
और भक्त के धैर्य का संसार साक्षी बनता है।

अमेरिकी दबाव बनाम नियम-आधारित व्यवस्था: भविष्य का संघर्ष

ट्रंप युग की नई भू-राजनीति और भारत–यूरोप की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: बदलती विश्व व्यवस्था का निर्णायक मोड़

21वीं सदी के तीसरे दशक में वैश्विक राजनीति एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय नियम, संप्रभुता की अवधारणा और बहुपक्षीय सहयोग की नींव हिलती दिखाई दे रही है। डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीतियाँ, ब्रिटेन व यूरोप की तीखी प्रतिक्रियाएँ और भारत–यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता—ये तीनों घटनाएँ मिलकर नई विश्व व्यवस्था की स्पष्ट आहट देती हैं। यह केवल सत्ता संतुलन का बदलाव नहीं, बल्कि यह तय करने की प्रक्रिया है कि भविष्य की दुनिया टकराव से चलेगी या सहयोग से।

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ट्रंप युग की भू-राजनीति: दबाव, धमकी और टैरिफ़ कूटनीति
डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पारंपरिक अमेरिकी कूटनीति से भिन्न रही है। टैरिफ़ को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना, पहले चीन फिर यूरोप और अब सहयोगी देशों पर शुल्क बढ़ाने की धमकी देना—इन कदमों ने वैश्विक व्यापार को अस्थिर किया है। ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और ब्रिटेन को लेकर दिए गए आक्रामक बयान यह संकेत देते हैं कि भूगोल और संसाधन भी अब सौदेबाज़ी का हिस्सा बन चुके हैं।

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यूरोपीय संघ पर 10 से 25 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाने की चेतावनी ने यूरोप को वैकल्पिक आर्थिक साझेदार तलाशने पर मजबूर किया। इसी बीच ब्रिटेन में ट्रंप को “इंटरनेशनल गैंगस्टर” कहे जाने जैसी प्रतिक्रियाएँ ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में आई गहरी दरार को दर्शाती हैं। यह स्थिति केवल अमेरिका–यूरोप संबंधों का संकट नहीं, बल्कि शीत युद्ध के बाद बनी अपेक्षाकृत स्थिर वैश्विक व्यवस्था को चुनौती है।
भारत–यूरोपीय संघ: ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का ऐतिहासिक महत्व
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की चर्चा 2007 में शुरू हुई थी, जो 2013 तक विभिन्न मतभेदों के कारण ठहर गई। 2022 में बातचीत दोबारा शुरू हुई और अब 27 जनवरी 2026 तक इसके पूर्ण होने की संभावना को ऐतिहासिक माना जा रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जाना इसके रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है।
दो अरब से अधिक आबादी वाला यह संयुक्त बाजार न केवल वैश्विक जीडीपी का नया पावर हाउस बनेगा, बल्कि नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था को भी मजबूती देगा। यूरोप के 27 देशों को ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ मिलने की बात इस समझौते की दूरगामी सोच को दर्शाती है।

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भारत के लिए क्यों निर्णायक है यह समझौता
अमेरिकी बाजार में अनिश्चितता और संभावित मंदी के बीच भारत के लिए निर्यात जोखिम बढ़ा है। ऐसे समय में यूरोपीय संघ के साथ दीर्घकालिक और स्थिर साझेदारी भारत के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी। कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट, चमड़ा, केमिकल और समुद्री उत्पाद जैसे रोज़गार-प्रधान उद्योगों को इससे सबसे अधिक लाभ होगा।
यूरोप में भारतीय उत्पादों पर लगने वाले 2 से 12 प्रतिशत तक के शुल्क में कमी या समाप्ति से भारतीय निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। साथ ही, दवा उद्योग के लिए यह समझौता गेम-चेंजर साबित हो सकता है। ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ कहे जाने वाले भारत को यूरोपीय बाजार में सरल मंजूरी प्रक्रिया के ज़रिये विशाल अवसर मिलेंगे।

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यूरोप के लिए भारत: रणनीतिक साझेदार
यूरोप के लिए भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि एशिया में स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थक रणनीतिक साझेदार है। अमेरिका की अनिश्चित और आक्रामक नीतियों के बीच भारत–EU संबंध यूरोप को वैकल्पिक शक्ति संतुलन प्रदान करते हैं। यह साझेदारी तकनीक, व्यापार और कूटनीति—तीनों स्तरों पर बहुध्रुवीय विश्व की नींव रखती है।

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भारतीय उपभोक्ता और घरेलू उद्योग पर प्रभाव
इस समझौते के बाद यूरोपीय कारें—मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी—और यूरोप से आने वाली वाइन व शराब अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा, लेकिन घरेलू उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। यह प्रतिस्पर्धा दीर्घकाल में गुणवत्ता सुधार और तकनीकी उन्नयन को प्रोत्साहित करेगी।

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भारत की कूटनीतिक चतुराई और वैश्विक संदेश
77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों को मुख्य अतिथि बनाना केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश है। जहाँ ट्रंप की नीति दबाव और एकतरफा फैसलों पर आधारित है, वहीं भारत–EU समझौता संवाद, सहमति और बहुपक्षीय सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह टकराव नहीं, बल्कि दृष्टिकोणों की प्रतिस्पर्धा है।

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निष्कर्ष: नई विश्व व्यवस्था की स्पष्ट आहट
डोनाल्ड ट्रंप की नीतियाँ, ब्रिटेन और यूरोप की प्रतिक्रियाएँ तथा भारत–यूरोप की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’—ये तीनों घटनाएँ मिलकर यह स्पष्ट करती हैं कि दुनिया बहुध्रुवीय दिशा में बढ़ रही है। कब्ज़े और दबाव की राजनीति के सामने सहयोग और साझेदारी की अर्थव्यवस्था खड़ी है। भारत–EU समझौता केवल व्यापारिक करार नहीं, बल्कि उस वैकल्पिक वैश्विक भविष्य की नींव है जहाँ नियम, संतुलन और साझा समृद्धि सर्वोपरि होंगे।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया

नौकरी, व्यापार और भाग्य का पूरा हाल

जानें 12 राशियों का भविष्य, अंक ज्योतिष का प्रभाव और आज के शुभ-अशुभ संकेत


वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुल 12 राशियों का वर्णन किया गया है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर दैनिक राशिफल का आकलन किया जाता है। 22 जनवरी 2026, गुरुवार का दिन कुछ राशियों के लिए उन्नति और लाभ के अवसर लेकर आ रहा है, वहीं कुछ राशि वालों को सतर्क रहकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। आज अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 4 और 5 का प्रभाव विशेष रहेगा, जो कार्यक्षेत्र में अनुशासन, योजना और संवाद को मजबूत करेगा। आइए जानते हैं 22 जनवरी 2026 का विस्तृत राशिफल।
मेष राशि
आज का दिन सकारात्मक रहेगा। नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी के संकेत हैं। तरक्की के योग बन रहे हैं, लेकिन स्थान परिवर्तन संभव है। नियमों और अनुशासन का पालन करने से लाभ होगा।
वृषभ राशि
व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में संयम रखें। कारोबार के लिए पिता या परिवार के वरिष्ठ सदस्य से सहयोग मिल सकता है। मित्रों का साथ बना रहेगा और प्रयासों में निरंतरता रहेगी।
मिथुन राशि
शिक्षा और बौद्धिक कार्यों में सफलता मिलेगी। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। परिवार की सेहत पर ध्यान दें। करियर और व्यापार में सुधार के संकेत हैं।
कर्क राशि
दिन शुभ रहेगा। कार्यों में गति आएगी और व्यापार में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहेगा।
सिंह राशि
आज आप नियंत्रण और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। लाभ बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। मित्रों पर भरोसा बढ़ेगा और प्रोफेशनल जीवन में अच्छे परिणाम मिलेंगे।
कन्या राशि
करियर और व्यवसाय में महत्वपूर्ण अवसर मिल सकते हैं। ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहेगा। लापरवाही से बचें। रिश्तों में विनम्रता और संतुलन बनाए रखें।
तुला राशि
भाग्य का साथ मिलेगा। हर दिशा से उन्नति के अवसर बनेंगे। रणनीति और विवेक से काम लेने पर सफलता मिलेगी। सहयोगियों का समर्थन प्राप्त होगा।
वृश्चिक राशि
आज धैर्य से काम लेना जरूरी है। अचानक खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में गोपनीय बातों को साझा करने से बचें। संयम से लाभ होगा।
धनु राशि
दिन औसत रहेगा। लाभ और विकास पर ध्यान केंद्रित रहेगा। मित्रों और परिवार का सहयोग मिलेगा। रिश्तों में संतुलन बना रहेगा।
मकर राशि
व्यावसायिक अवसरों का पूरा लाभ उठाएंगे। योजनाएं सफल होंगी। लक्ष्य स्पष्ट रहेंगे और क्षमता का सही उपयोग होगा।
कुंभ राशि
दिन सकारात्मक है। मन स्थिर रहेगा। यात्रा या महत्वपूर्ण मुलाकात संभव है। काम और व्यापार में सक्रियता बढ़ेगी।
मीन राशि
कार्य और व्यापार में समन्वय बना रहेगा। निजी जीवन में ऊर्जा और संतुलन रहेगा। सही निर्णय से लाभ मिलेगा।
अंक ज्योतिष का विशेष प्रभाव

गौरा बरहज में भगत सिंह तिराहा-रेलवे स्टेशन मार्ग निर्माण ठप, 27 जनवरी को आंदोलन की चेतावनी

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कैंप कार्यालय बरहज से बुधवार को जारी बयान में खेत मजदूर यूनियन के राज्य सचिव एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव अरविंद कुशवाहा ने नगर पालिका परिषद गौरा बरहज पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि 23 दिसंबर 2025 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रीय समानता दल के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने भगत सिंह तिराहा से रेलवे स्टेशन तक सड़क निर्माण को लेकर नगर पालिका परिषद गौरा बरहज के अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा था।
प्रतिनिधिमंडल को उस समय अधिशासी अधिकारी ने बताया था कि सड़क निर्माण में कुछ वैधानिक और तकनीकी खामियां थीं, जिन्हें दूर कर लिया गया है और एक सप्ताह के भीतर कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि रेलवे से एनओसी मिल जाती है तो शौचालय और पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी।
अरविंद कुशवाहा ने कहा कि सकारात्मक आश्वासन के एक माह बीत जाने के बाद भी न तो सड़क निर्माण शुरू हुआ और न ही रेलवे की ओर से शौचालय एवं पेयजल की कोई व्यवस्था की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी खामियां दूर कर ली गई थीं और अधिशासी अधिकारी के अनुसार इस कार्य के लिए एक करोड़ पंद्रह लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत है, तो फिर सड़क निर्माण में देरी क्यों हो रही है।
उन्होंने बताया कि 27 जनवरी को प्रतिनिधिमंडल पुनः अधिशासी अधिकारी से मुलाकात कर देरी का कारण पूछेगा। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो नगर पालिका परिषद के प्रांगण में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि 27 जनवरी से पहले जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सड़क निर्माण का कार्य तत्काल शुरू कराया जाए।