Friday, June 12, 2026
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विराट किसान मेला 2026: आधुनिक कृषि यंत्रों से सशक्त हुए किसान, मशीनरी व ड्रोन अनुदान वितरित

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। विराट किसान मेला 2026 के अंतर्गत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। जनपद में आयोजित चार दिवसीय मेले के दौरान कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने हेतु अनुदान वितरण किया गया। कार्यक्रम में सांसद विजय कुमार दुबे एवं रामकोला विधायक विनय प्रकाश गोंड की उपस्थिति रही।

सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना के तहत जगरूप फ़ार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को फ़ार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए ₹8,00,000 (आठ लाख रुपये) का अनुदान प्रदान किया गया। सांसद द्वारा एफपीओ प्रतिनिधियों को मशीनरी बैंक की चाबी सौंपी गई।

इसी क्रम में कसिया विकासखंड के शाहपुर कुरमौटा निवासी वीरेंद्र मिश्र (पुत्र जगदीश) को कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए ₹4,00,000 (चार लाख रुपये) का अनुदान स्वीकृत किया गया, जिसकी चाबी विधायक विनय प्रकाश गोंड ने प्रदान की।

इसके अतिरिक्त सेवरही निवासी रामजनम (पुत्र भुलई) को कृषि ड्रोन के लिए ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) का चेक सांसद द्वारा सौंपा गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत घटेगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। यह मेला किसानों के लिए नई तकनीकों को समझने और अपनाने का प्रभावी मंच बन रहा है।

उत्तर प्रदेश दिवस को भव्य और जनसरोकार से जोड़ने के निर्देश


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश दिवस के सफल, भव्य एवं यादगार आयोजन को लेकर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी भी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यूपी दिवस कार्यक्रम को सुव्यवस्थित, आकर्षक एवं पूरी तरह जनसरोकार से जोड़ा जाए, जिससे आमजन को प्रदेश सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों की समुचित जानकारी मिल सके।
उन्होंने बताया कि यूपी दिवस के अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त पदुम नारायण द्विवेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। मंच व्यवस्था, साज-सज्जा, सुरक्षा, स्वच्छता, पार्किंग तथा आगंतुकों की सुविधाओं को प्राथमिकता पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर अव्यवस्था न हो और आम जनता को बेहतर अनुभव प्राप्त हो।
यूपी दिवस कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही पात्र लाभार्थियों से संबंधित योजनाओं के लिए मौके पर ही आवेदन भी लिए जाएंगे, जिससे लोगों को सीधे लाभ मिल सके।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत एक विशेष मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जाएगा। इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलेगी।
कार्यक्रम में जनपद के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। इसके माध्यम से जिले की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन पहचान को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही यूपी दिवस के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
स्थानीय एवं लोक कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। यूपी दिवस के अवसर पर एसआईआर से संबंधित एक विशेष स्टॉल भी लगाया जाएगा, जहां मतदाता फॉर्म-06 भरकर निर्वाचक नामावली में पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
इसके अतिरिक्त लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा, जिससे जनपद के लोग प्रदेश स्तरीय आयोजन से सीधे जुड़ सकें।
निरीक्षण के दौरान जिला सूचना अधिकारी प्रभाकर मणि त्रिपाठी, जिला प्रोबेशन अधिकारी कन्हैया यादव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

युवाओं के लिए बड़े रोजगार की तैयारी, डीएम के निर्देश सख्त आदेश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के युवाओं को बेहतर, सुरक्षित और स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) से संबंधित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को केवल प्रमाण पत्र तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें सम्मानजनक, दीर्घकालिक और सुरक्षित रोजगार के वास्तविक अवसर भी उपलब्ध कराए जाएं।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनपद में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तभी बढ़ेंगे, जब बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों को यहां आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनपद की भौगोलिक स्थिति, संसाधनों और उपलब्ध मानव शक्ति को ध्यान में रखते हुए नामी कंपनियों से संपर्क करें, ताकि स्थानीय युवाओं को बाहर जाने की मजबूरी न हो और उन्हें अपने ही जिले में रोजगार मिल सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि कौशल विकास योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्रशिक्षण के बाद युवाओं को सम्मानजनक और स्थायी रोजगार मिलेगा। केवल प्रशिक्षण देना या रोजगार मेला आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोजगार मेलों को औपचारिकता न बनाकर परिणामोन्मुखी बनाया जाए, ताकि युवाओं को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भविष्य में जब भी रोजगार मेला आयोजित किया जाए, तो उसकी पूर्व सूचना अनिवार्य रूप से जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों को दी जाए। इससे यह स्पष्ट रूप से आकलन किया जा सकेगा कि किस रोजगार मेले में कौन-कौन सी कंपनियां आईं, उन्होंने कितने युवाओं का चयन किया और चयनित युवाओं को किस प्रकार का कार्य तथा किस वेतनमान पर रोजगार प्रदान किया गया।

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि रोजगार मेलों के बाद चयनित युवाओं की सूची को व्यवस्थित रूप से संधारित किया जाए। इसके साथ ही युवाओं से फीडबैक भी लिया जाए, ताकि यह जाना जा सके कि उन्हें मिला रोजगार उनकी अपेक्षाओं और प्रशिक्षण के अनुरूप है या नहीं। इससे भविष्य में रोजगार मेलों और कौशल विकास योजनाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

बैठक में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण भत्ता और अन्य शासकीय सुविधाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र विद्यार्थियों को योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी छात्र को केवल आर्थिक कारणों से प्रशिक्षण से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण भत्ते के भुगतान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि पात्र विद्यार्थियों को समय पर सहायता मिल सके और वे बिना किसी बाधा के अपना प्रशिक्षण पूरा कर सकें।

जिलाधिकारी ने कौशल विकास योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि प्रशिक्षण उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप नहीं होगा, तो युवाओं को रोजगार मिलने में कठिनाई आएगी। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और कार्यप्रणाली उद्योगों की वर्तमान मांग के अनुसार हों।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए। प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों की दक्षता, उपलब्ध संसाधन और प्रशिक्षण की व्यवहारिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि युवाओं की योग्यता वास्तव में उद्योगों के लिए उपयोगी बन सके।
बैठक के दौरान यह संदेश भी स्पष्ट रूप से दिया गया कि युवाओं का भविष्य जिला प्रशासन की प्राथमिकता में सर्वोपरि है। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि युवा सशक्त होंगे और उन्हें रोजगार मिलेगा, तो जनपद का समग्र विकास भी तेजी से होगा। इसलिए इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, आईटीआई प्राचार्य, सेवा योजना अधिकारी तथा कौशल विकास मिशन से जुड़े अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि कौशल विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से युवाओं तक पहुंचे।
अधिकारियों को यह भी कहा गया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखी जाए और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इससे न केवल योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी, बल्कि कमियों की पहचान कर समय रहते सुधार भी किया जा सकेगा।

जिलाधिकारी की इस समीक्षा बैठक को जनपद के युवाओं के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि कौशल विकास और रोजगार के बीच की खाई को पाटा जाए और युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ वास्तविक रोजगार के अवसर भी मिलें। यदि निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया गया, तो आने वाले समय में महराजगंज जनपद के युवाओं के लिए रोजगार के नए और बेहतर अवसर सृजित हो सकते हैं।

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Jammu Kashmir Accident: डोडा के खन्नीटॉप में जवानों से भरी गाड़ी खाई में गिरी, 10 सैनिक शहीद

डोडा/जम्मू-कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा)। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के खन्नीटॉप इलाके में गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। सेना के जवानों से भरी एक कैस्पर वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में 10 जवानों की मौत हो गई है, जबकि वाहन में कुल 17 सैनिक सवार थे। हादसे के बाद सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

200 फीट गहरी खाई में गिरी सेना की कैस्पर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेना का कैस्पर वाहन भद्रवाह–चंबा रोड से गुजर रहा था। यह सड़क पहले से ही बेहद जर्जर और जोखिम भरी बताई जा रही है। अचानक संतुलन बिगड़ने से वाहन करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा।
हादसे की सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया गया।

घायलों को मेडिकल कैंप, 3 की हालत गंभीर

रेस्क्यू टीम द्वारा घायलों को खाई से निकालकर पास के मेडिकल कैंप में भर्ती कराया गया है। वहीं, 3 सैनिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए उधमपुर स्थित सेना अस्पताल रेफर किया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक जारी रहा।

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पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

जम्मू-कश्मीर में पहाड़ी इलाकों और खराब सड़कों के कारण सेना के वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।

रामबन हादसा (4 मई 2025)
करीब 9 महीने पहले, रामबन जिले के बैटरी चश्मा इलाके में सेना का वाहन 600 मीटर गहरी खाई में गिर गया था। इस हादसे में 3 जवानों की मौत हुई थी। मृतक जवानों की पहचान अमित कुमार, सुजीत कुमार और मन बहादुर के रूप में हुई थी। यह वाहन जम्मू से श्रीनगर जा रहे काफिले का हिस्सा था।

पुंछ हादसा (24 दिसंबर)
24 दिसंबर को पुंछ जिले में सेना की एक वैन 350 फीट गहरी खाई में गिर गई थी। वैन में सवार 18 जवानों में से 5 की मौत हो गई थी। सभी जवान 11 मराठा रेजिमेंट से संबंधित थे। यह काफिला ऑपरेशनल ट्रैक के जरिए बनोई इलाके की ओर जा रहा था।

लगातार हादसे चिंता का विषय

लगातार हो रहे इन हादसों ने पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा और वाहनों की तकनीकी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खराब सड़कों, तीखे मोड़ों और मौसम की मार के बीच सेना के जवान लगातार जोखिम उठाकर ड्यूटी निभा रहे हैं।

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Gorakhpur News: तहसील सभागार में SIR के तहत दावे–आपत्तियों का निस्तारण जारी, 10 से 5 बजे तक पहुंच रहे मतदाता

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद गोरखपुर में चल रहे एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान के तहत मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों का निस्तारण लगातार किया जा रहा है। गोरखपुर सदर तहसील सभागार में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पीठासीन अधिकारियों के समक्ष मतदाता अपने साक्ष्यों के साथ उपस्थित होकर अपनी समस्याओं का समाधान करा रहे हैं।

कई पीठासीन अधिकारियों की तैनाती

सदर तहसील में इस कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए कई पीठासीन अधिकारियों की तैनाती की गई है। इनमें
ज्ञान प्रताप सिंह, सुनील सिंह, आकांक्षा पासवान, अरविंद नाथ पांडे और देवेंद्र यादव शामिल हैं। सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों से आए मतदाताओं की शिकायतें सुनते हुए नियमानुसार दावों और आपत्तियों का निस्तारण कर रहे हैं।

नाम जोड़ने और संशोधन के लिए पहुंच रहे लोग

तहसील सभागार में रोजाना बड़ी संख्या में नागरिक पहुंच रहे हैं।

• कोई नया नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहा है

• तो कोई नाम, पता, आयु या अन्य विवरणों में हुई त्रुटियों को ठीक कराने के लिए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर रहा है

मतदाताओं को आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड सहित अन्य वैध अभिलेख साथ लाने की सलाह दी जा रही है, ताकि मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा सके।

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साक्ष्यों की जांच के बाद हो रहा निर्णय

पीठासीन अधिकारियों द्वारा प्रत्येक प्रकरण को गंभीरता से सुना जा रहा है। प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद यदि दावा या आपत्ति सही पाई जाती है तो उसे स्वीकार कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। जिन मामलों में दस्तावेज अधूरे होते हैं, वहां आवेदकों को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर अगली तिथि पर पूर्ण अभिलेखों के साथ आने को कहा जा रहा है।

व्यवस्था सुचारु, मतदाताओं को राहत

मतदाताओं का कहना है कि शुरुआत में एसआईआर को लेकर भ्रम और परेशानी थी, लेकिन अब सदर तहसील सभागार में व्यवस्था सुचारु होने से राहत मिल रही है। अलग-अलग पीठासीन अधिकारियों की मौजूदगी से भीड़ का दबाव कम हुआ है और कार्य अपेक्षाकृत तेजी से हो रहा है।
बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज से आए मतदाताओं के लिए बैठने और मार्गदर्शन की भी उचित व्यवस्था की गई है।

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प्रशासन का उद्देश्य: शुद्ध और त्रुटिरहित मतदाता सूची

प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि एसआईआर अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इसी लक्ष्य के तहत गोरखपुर सदर तहसील में दावे और आपत्तियों का निस्तारण पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ किया जा रहा है।

Maharajganj News: गोवध निवारण अधिनियम में वांछित तीन गिरफ्तार, बरगदवां पुलिस–एसओजी–स्वाट का संयुक्त अभियान सफल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीना के निर्देशन में महराजगंज पुलिस ने गोवध निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। थाना बरगदवां पुलिस, एसओजी, स्वाट टीम और सर्विलांस सेल की संयुक्त कार्रवाई में तीन वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।

संयुक्त टीम की कार्रवाई में दबोचे गए आरोपी

अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के मार्गदर्शन एवं क्षेत्राधिकारी नौतनवा अंकुर गौतम के पर्यवेक्षण में यह अभियान चलाया गया। थानाध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार शुक्ला के नेतृत्व में मु0अ0सं0 006/2026, धारा 3/5A/8 गोवध निवारण अधिनियम एवं धारा 11 पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत वांछित अभियुक्तों की तलाश की जा रही थी।

पुलिस टीम ने 21 जनवरी की शाम और 22 जनवरी की सुबह करीब 6:30 बजे चकरार महाव नाला पुलिया के पास श्मशान घाट, चकरार रोड से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

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गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है—

• रामनयन यादव (58 वर्ष), निवासी शिवपुरी टोला श्रीनगर, थाना परसा मलिक, जनपद महराजगंज
• सराकत (35 वर्ष), निवासी फटकदौना खास, थाना खड्डा, जनपद कुशीनगर
• जयप्रकाश राम (46 वर्ष), निवासी बैरी स्थान, पश्चिमी चंपारण (बिहार), हाल मुकाम कुशीनगर

न्यायालय भेजने की प्रक्रिया शुरू

पुलिस ने तीनों अभियुक्तों के खिलाफ नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अपराधियों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी

पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीना ने स्पष्ट किया कि जनपद में अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे संयुक्त अभियान भविष्य में भी चलाए जाते रहेंगे।

यूजीसी एक्ट संशोधन ‘काला कानून’, शिक्षा की स्वतंत्रता पर सीधा हमला : रामइकबाल सिंह


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह ने यूजीसी एक्ट में प्रस्तावित संशोधन को शिक्षा जगत के लिए अत्यंत खतरनाक बताते हुए इसे “काला कानून” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन शिक्षा व्यवस्था में समानता, स्वतंत्रता और स्वायत्तता को कमजोर करने वाला है, जिससे शिक्षक, शिक्षण संस्थान और छात्र—तीनों प्रभावित होंगे।
रामइकबाल सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि वर्ष 2026 से इस संशोधन के नाम पर फर्जी मुकदमों की बाढ़ आ सकती है। इससे शिक्षकों में भय का माहौल बनेगा और संस्थानों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा। उन्होंने आशंका जताई कि इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा और प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं असमंजस और दबाव का शिकार होंगे।
पूर्व विधायक ने कहा कि शिक्षा नीति में किसी भी प्रकार का बदलाव व्यापक विमर्श, शिक्षाविदों की राय और छात्र संगठनों से संवाद के बाद ही होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी एक्ट में प्रस्तावित संशोधन पूरी तरह से एकतरफा है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। न तो शिक्षकों की सहमति ली गई और न ही छात्रों की आवाज सुनी गई।

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इसके साथ ही रामइकबाल सिंह ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उस पावन अवसर पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को सम्मानपूर्वक स्नान कराया जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने विवेक के बजाय बल प्रयोग किया, जो निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि यूजीसी एक्ट में प्रस्तावित संशोधन को तत्काल वापस लिया जाए और शिक्षा व धर्म जैसे संवेदनशील विषयों पर निर्णय लेते समय गंभीरता और संवेदनशीलता दिखाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस पर विचार नहीं हुआ, तो व्यापक जनविरोध देखने को मिलेगा।

भारत का गणतंत्र तभी सार्थक है, जब अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुँचे

छिहत्तर वर्ष, जीवन का तीन-चौथाई सफ़र,
आज़ादी के शताब्दी पर्व तक अब
केवल चौबीस वर्ष शेष हैं,
यह समय भारत के लिए निर्णायक विशेष है।
इसी काल को अमृत काल कहा गया,
पर अमृत कलश कितना भरा, कितना रिक्त है,
यह आत्ममंथन का विषय है,
क्योंकि जन-गण की दशा आज भी प्रश्न है।
कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति शान से
तिरंगा ध्वज फहराएंगे,
विशिष्ट जन, विशिष्ट समारोह,
लोकतंत्र के उत्सव के साक्षी बन जाएंगे।

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लोकतंत्र का तंत्र मज़बूत दिखता है,
पर लोक कल्याण कहाँ तक पहुँचा है,
ग़रीब जनता समारोह में नहीं होती,
क्योंकि उनके पास वहाँ पहुँचने का पास नहीं होता।
विशिष्टता की शिष्टता तो दिखेगी,
पर क्या उससे भूख और प्यास मिटेगी,
वे करोड़ों लोग जो जूठी-सूखी रोटी पर
जीवन गुज़ारते हैं, उनकी सुध कौन लेगी।
भारत का गणतंत्र तभी सार्थक है,
जब सबको समान अधिकार मिलें,
संविधान की आत्मा भी तभी जीवित है,
जब हर नागरिक को सम्मान से जीने के अवसर मिलें।
आदित्य, महलों में रहने वालों से आग्रह है,
झुग्गी-झोपड़ी वालों की दशा भी देखें,
जिनके सिर पर छत नहीं,
उनके लिए छत, भोजन और गरिमा की व्यवस्था करें।
— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

खुरपका–मुंहपका रोग रोकथाम अभियान शुरू, जिलाधिकारी ने टीकाकरण टीमों को दिखाई हरी झंडी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद मऊ में गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं को खुरपका–मुंहपका (एफएमडी) जैसे गंभीर संक्रामक रोग से सुरक्षित रखने के लिए वृहद टीकाकरण अभियान का शुभारंभ गुरुवार को किया गया। जिलाधिकारी श्री प्रवीण मिश्र ने कलेक्ट्रेट परिसर से सचल वाहनों को हरी झंडी दिखाकर टीकाकरण टीमों को रवाना किया। यह अभियान पशुधन सुरक्षा, दुग्ध उत्पादन संरक्षण और पशुपालकों की आर्थिक मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी.पी. सिंह कुशवाहा ने बताया कि यह टीकाकरण अभियान 22 जनवरी 2026 से 10 मार्च 2026 तक संचालित होगा, जो कुल 45 दिनों तक चलेगा। अभियान के अंतर्गत जनपद के 9 विकास खंडों में गठित 27 टीमें घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 4 माह से कम आयु के पशु तथा 8 माह से अधिक गर्भित गाय एवं भैंसों को छोड़कर सभी पात्र गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं को टीका लगाया जाएगा।
जनपद के नोडल अधिकारी डॉ. आर.बी. चौरसिया ने जानकारी दी कि टीकाकरण केवल कर्ण टैग लगे पशुओं में ही किया जाएगा। जिन पशुओं में कर्ण टैग नहीं है, उन्हें टीकाकरण के समय टैग लगाकर अभियान का लाभ दिया जाएगा। इसके साथ ही अभियान के तहत दो चयनित ग्रामों से टीकाकरण से पूर्व और पश्चात सीरम सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाएंगे, जिससे टीके की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।
टीकाकरण टीम द्वारा किए गए कार्य का विवरण पशुपालकों के द्वार पर ही ऑनलाइन पोर्टल पर फीड किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित हो सके। प्रशासन ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें और अपने पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण कराएं, ताकि रोगमुक्त पशुधन और सुरक्षित दुग्ध उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

गांधी के नाम पर राजनीति बनाम गांधी के विचार: तेज प्रताप का सवाल

नाम में गांधी लगाने से कोई गांधीवादी नहीं बनता: राहुल गांधी पर तेज प्रताप यादव का तीखा हमला

पटना(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा और तीखा हमला बोला है। बुधवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि केवल नाम में ‘गांधी’ लगाने से कोई व्यक्ति गांधीवादी नहीं हो जाता। गांधीवाद जीवनशैली, आचरण और विचारों में दिखना चाहिए, न कि सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सीमित रहना चाहिए।
तेज प्रताप यादव ने कहा कि राहुल गांधी की जीवनशैली और सोच महात्मा गांधी के आदर्शों से मेल नहीं खाती। महात्मा गांधी सादगी, आत्मनिर्भरता और अहिंसा के प्रतीक थे। उन्होंने चरखा, खादी और साधारण जीवन को जन-आंदोलन बनाया। ऐसे में आज के नेता यदि महंगे कपड़ों, जींस और टी-शर्ट में घूमते हैं, तो उन्हें यह आत्ममंथन करना चाहिए कि वे किस आधार पर गांधीवाद की बात कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि गांधी को मानने का मतलब केवल भाषण देना या उनकी तस्वीर लगाना नहीं है, बल्कि अपने जीवन में उनके विचारों को उतारना है। अगर कोई सच्चा गांधीवादी है, तो उसका आचरण, पहनावा और सोच खुद-ब-खुद गांधी के आदर्शों की झलक देगा।
मनरेगा विवाद पर राहुल गांधी को घेरा

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मनरेगा के नाम को लेकर उठे विवाद पर तेज प्रताप यादव ने कहा कि गांधी के अपमान की चिंता राहुल गांधी को क्यों हो रही है। पहले यह देखा जाना चाहिए कि कौन वास्तव में गांधी के विचारों पर चल रहा है और कौन केवल नाम का सहारा लेकर राजनीति कर रहा है।
आज की राजनीति और गांधीवाद
उन्होंने कहा कि गांधीजी ने कभी हिंसा या हथियार का रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने अहिंसा से देश को आजादी दिलाई। आज गांधी के नाम पर राजनीति करना लेकिन उनके मूल विचारों से दूर रहना सबसे बड़ा विरोधाभास है।

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वाराणसी की घटना पर सरकार को पत्र
तेज प्रताप यादव ने वाराणसी में बिहार की एक लड़की की मौत का जिक्र करते हुए बताया कि इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियों की सुरक्षा और न्याय सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इस पर राजनीति से ऊपर उठकर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

राष्ट्रीय जलमार्ग-1 से बिहार को वैश्विक बाजार से जोड़ने की तैयारी

बिहार में जल परिवहन का नया युग: एफआरपी नावों से बदलेगी तस्वीर, रोजगार और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

पटना (राष्ट्र की परम्परा)बिहार में जल परिवहन को आधुनिक, सुरक्षित और किफायती बनाने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया गया है। गेमचेंजर प्लान (निनि) के तहत अब छात्रों को पारंपरिक लकड़ी की नावों के स्थान पर फाइबर रिइनफोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) नावों के निर्माण की प्रशिक्षण सुविधा दी जाएगी। इस योजना की शुरुआत इस वर्ष के अंत तक होने की संभावना है, जिसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

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निनि में लगभग 10 मीटर लंबी एफआरपी नावों के निर्माण की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिनमें एक साथ 25 से 30 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। एक नाव को तैयार करने में लगभग चार महीने का समय लगेगा। इन नावों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें कम रखरखाव की जरूरत होगी और करीब 10 वर्षों तक मरम्मत की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे संचालन लागत में भारी कमी आएगी।

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प्रोजेक्ट निदेशक इंद्रजीत सोलंकी ने यह जानकारी परिवहन मंत्री श्रवण कुमार को दी, जब मंत्री ने गायघाट पहुंचकर शिप रिपेयरिंग सुविधा और निनि का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद छात्र स्वयं नाव और शिप निर्माण का व्यवसाय शुरू कर सकेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
परिवहन मंत्री ने गायघाट से दीघा घाट तक वाटर मेट्रो वेसल में यात्रा कर जल परिवहन की संभावनाओं का आकलन किया। उन्होंने कहा कि नदी परिवहन सड़क और रेल की तुलना में सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है। इससे बालू, सब्जियां और भारी सामान की ढुलाई आसान होगी, सड़क जाम और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
निनि के अनुसार, राष्ट्रीय जलमार्ग-1 बिहार को कोलकाता और हल्दिया जैसे समुद्री बंदरगाहों से जोड़ता है, जिससे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सकती है। साथ ही भागलपुर से विराटनगर (नेपाल) तक जलमार्ग व्यापार की संभावनाओं पर भी अध्ययन किया जा रहा है।
प्रदेश में 1550 घाट और 6600 से अधिक पंजीकृत नावें यह दर्शाती हैं कि बिहार में जल परिवहन के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। सरकार का मानना है कि एफआरपी नावें और आधुनिक जलमार्ग सुविधाएं बिहार की अर्थव्यवस्था को नया बल देंगी और राज्य को जल परिवहन के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएंगी।

पहचान सत्यापन में किन दस्तावेजों की होगी जरूरत

नागरिकता और पहचान सत्यापन के लिए मान्य दस्तावेजों की सांकेतिक सूची जारी, जानिए कौन-से अभिलेख होंगे स्वीकार्य

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)सरकार ने नागरिकता, पहचान और मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और विवाद-रहित बनाने के उद्देश्य से आवश्यक अभिलेखों की एक सांकेतिक सूची जारी की है। यह सूची पूर्ण नहीं है, लेकिन नागरिकों को यह स्पष्ट मार्गदर्शन देती है कि सत्यापन के दौरान किन दस्तावेजों को मान्य माना जाएगा। इससे आम नागरिकों को अनावश्यक भ्रम से राहत मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सुगम होगी।

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निर्देशों के अनुसार, यदि किसी प्रकरण में स्वयं, पिता और माता के अभिलेख मांगे जाते हैं, तो तीनों के लिए अलग-अलग स्व-सत्यापित दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। केंद्र या राज्य सरकार तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगियों को जारी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश को महत्वपूर्ण प्रमाण माना गया है, क्योंकि ये सरकारी अभिलेखों में दर्ज होते हैं।
इसके अतिरिक्त, 01 जुलाई 1987 से पूर्व भारत में सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, बैंक, डाकघर, एलआईसी या सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र या प्रमाणपत्र दीर्घकालिक निवास का सशक्त प्रमाण माना जाएगा। सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र, मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय के शैक्षणिक प्रमाण पत्र और पासपोर्ट भी स्वीकार्य दस्तावेजों में शामिल हैं, जो जन्मतिथि, जन्मस्थान और पहचान की पुष्टि करते हैं।

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राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र, ओबीसी, एससी, एसटी या अन्य जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र तथा जहाँ लागू हो राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर भी मान्य होंगे। आधार से जुड़े मामलों में आयोग के पत्र दिनांक 09.09.2025 के निर्देश लागू रहेंगे। वहीं, 01.07.2025 की संदर्भ तिथि के अनुसार बिहार एसआईआर की मतदाता सूची का अंश भी स्वीकार्य दस्तावेज है। यह पहल सत्यापन प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और नागरिक-हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

देर रात लोकल ट्रेनों में बढ़ता अपराध, सुरक्षा पर उठे सवाल

एनसीपी मुंबई उपाध्यक्ष संजीव उपाध्याय ने देर रात लोकल ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ाने की उठाई मांग


मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)कल्याण, बदलापुर, कर्जत और खोपोली की दिशा में देर रात लोकल ट्रेनों से सफर करना यात्रियों के लिए लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। खासकर रात 11 बजे के बाद इन रूट्स पर चलने वाली लोकल ट्रेनों के लगेज डिब्बों और दिव्यांग कोचों में असामाजिक तत्वों, शराबियों और चोर-उचक्कों की मौजूदगी बढ़ने से आम यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) मुंबई के डैशिंग उपाध्यक्ष एवं पहला अपराध समाचार पत्र के संपादक संजीव उपाध्याय ने मध्य रेलवे के सुरक्षा आयुक्त से औपचारिक रूप से मांग की है कि कल्याण, बदलापुर और कर्जत की ओर जाने वाली लोकल ट्रेनों में रात के समय विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।
हाल ही में सामने आई एक दर्दनाक घटना ने इस समस्या की गंभीरता को और उजागर कर दिया। ठाणे से बदलापुर लौट रहे एक लगभग 30 वर्षीय युवक ने लोकल ट्रेन में मोबाइल छीनने का विरोध किया, जिसके बाद अंबरनाथ स्टेशन के पास उसे चलती ट्रेन से धक्का दे दिया गया। हादसे में युवक का बायां पैर ट्रेन के नीचे आकर कट गया। गंभीर रूप से घायल युवक का इलाज मुंबई के केईएम अस्पताल में जारी है।

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देर रात यात्रा करने वाले कई यात्रियों का कहना है कि सुरक्षा बलों की नियमित गश्त, आरपीएफ की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी की कमी के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। संजीव उपाध्याय ने मांग की है कि संवेदनशील समय और कोचों में अतिरिक्त आरपीएफ जवानों की तैनाती, आकस्मिक जांच और त्वरित शिकायत तंत्र लागू किया जाए, ताकि यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
यह मांग न केवल एक राजनीतिक आग्रह है, बल्कि लाखों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा जनहित का विषय भी है।

जंगल में भीषण मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने 10 नक्सली ढेर किए, एक करोड़ का इनामी शामिल

सिंहभूमि (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने और दुर्गम सारंडा जंगल में गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों और भाकपा माओवादी नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में 10 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि सामने आई है, जिनमें एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली भी शामिल बताया जा रहा है। मुठभेड़ छोटानागरा थाना क्षेत्र में हुई, जिसकी पुष्टि डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने की।

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गुप्त सूचना के आधार पर संयुक्त ऑपरेशन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीआरपीएफ, कोबरा, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सारंडा के जंगली इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की विश्वसनीय गुप्त सूचना मिली थी। इसी इनपुट पर संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही सुरक्षाबल नक्सलियों के करीब पहुंचे, खुद को घिरा देख नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और मुठभेड़ काफी देर तक चली।
भारी पड़ते सुरक्षाबल, जंगल का फायदा लेकर भागे नक्सली
बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों की रणनीतिक घेराबंदी के चलते कई नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। इसके बाद पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। किरीबुरू थाना क्षेत्र के कुमड़ी स्थित सारंडा जंगल में कोबरा के जवानों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों से हथियार और अन्य सामग्री बरामद होने की सूचना है।

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कोल्हान-सारंडा में सक्रिय टॉप नक्सली, अभियान तेज
सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में माओवादी संगठन के कई बड़े नाम सक्रिय बताए जाते हैं, जिनमें मिसिर बेसरा, अनमोल, मोछु और अनल शामिल हैं। इनके अलावा असीम मंडल, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन, पिंटु लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अपटन, जयकांत और रापा मुंडा जैसे नक्सली अपने दस्तों के साथ इलाके में भ्रमणशील बताए जा रहे हैं। हाल ही में सीआरपीएफ डीजी की जिला पुलिस मुख्यालय में हुई बैठक में नक्सल विरोधी ऑपरेशन तेज करने के निर्देश दिए गए थे। फिलहाल क्षेत्र में 32 लाख से 1.20 करोड़ रुपये तक के इनामी नक्सलियों की मौजूदगी की बात कही जा रही है और ऑपरेशन जारी है।

चोरी की 12 मोटरसाइकिल बरामद, बिहार तक फैला था नेटवर्क

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरजनपदीय मोटरसाइकिल चोरी गिरोह का खुलासा किया है। थाना सलेमपुर पुलिस ने चोरी की कुल 12 मोटरसाइकिलों के साथ 6 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत की गई।

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अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी सुनील कुमार सिंह के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी सलेमपुर मनोज कुमार के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष सलेमपुर महेन्द्र कुमार चतुर्वेदी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने यह सफलता हासिल की। मुखबिर की सूचना पर सेंट पॉल स्कूल ग्राउंड से तीन चोरी की मोटरसाइकिलों के साथ छह अभियुक्तों को पकड़ा गया।

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कड़ाई से पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे देवरिया के विभिन्न क्षेत्रों से बाइक चोरी कर नंबर प्लेट बदलकर बिहार में बेचते थे। उनकी निशानदेही पर बंद पड़े ईंट भट्ठे से 9 अन्य चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। बरामद सभी मोटरसाइकिलों की अनुमानित कीमत करीब 4.56 लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस ने अभियुक्तों के विरुद्ध थाना सलेमपुर में बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। एक फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अलग टीम गठित की गई है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं।