Thursday, June 11, 2026
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बहराइच: कतर्नियाघाट में स्कूली वैन पलटी, 12 बच्चे घायल

बहराइच/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। थाना सुजौली क्षेत्र के कतर्नियाघाट जंगल में आज सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। यहाँ बच्चों को स्कूल ले जा रही एक निजी स्कूल की वैन अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दुर्घटना में वैन चालक समेत करीब एक दर्जन स्कूली बच्चे घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जंगल के बीच बिछिया बैरियर के पास हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, चफ़रिया स्थित बप्पा जी निजी स्कूल की वैन सुबह नेपाल सीमा से सटे बर्दिया, आम्बा, विशुनापुर और फकीरपुरी गांवों से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। जैसे ही वैन बिछिया वन बैरियर के पास पहुंची, वह अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे राहगीरों और स्थानीय लोगों ने बच्चों को वैन से बाहर निकाला।

घायल बच्चों की सूची और स्थिति

हादसे में घायल होने वाले बच्चों में अनुज, सूर्या, आदर्श, सीता, रियार्थ, आर्यन, रीना, साबरीन, कृष और अख्तर रज़ा शामिल हैं।
गंभीर स्थिति: कक्षा 8 के छात्र सूर्या को सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं, जिसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
चालक: वैन चालक आमिर खान भी इस दुर्घटना में घायल हुआ है।

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पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुँचाया

घटना की सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष प्रकाश चंद्र शर्मा अपनी टीम (चौकी इंचार्ज मंजेश, दीवान आत्माराम और कांस्टेबल पन्नेलाल) के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल सभी घायल बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली में भर्ती कराया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है कि हादसा वाहन की तकनीकी खराबी के कारण हुआ या तेज रफ्तार की वजह से।

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Delhi Weather Update: कड़ाके की ठंड और बारिश का डबल अटैक, मौसम विभाग का ‘येलो अलर्ट’ जारी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)

Delhi Weather Update: राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (NCR) में आज, 27 जनवरी 2026, को मौसम ने फिर से करवट ली है। एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मंगलवार की सुबह कड़ाके की ठंड, कोहरे और मध्यम बारिश के साथ हुई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने खराब मौसम और तेज बर्फीली हवाओं की आशंका को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।

बारिश, ओलावृष्टि और बर्फीली हवाओं का अलर्ट

​मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को दिनभर रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

  • तेज हवाएं: 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं ठंड के एहसास को और बढ़ाएंगी।
  • प्रभावित क्षेत्र: दिल्ली के नरेला, बवाना, रोहिणी और मुंडका के साथ-साथ हरियाणा के सफीदों, बरवाला और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) और गरज-चमक के साथ भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
  • तापमान में गिरावट: बारिश और घने बादलों के कारण दिन का अधिकतम तापमान 18°C से 20°C के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 8°C से 9°C के आसपास बना रह सकता है।

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प्रदूषण और वायु गुणवत्ता (AQI) का हाल

​बारिश और तेज हवाओं के बावजूद दिल्ली की हवा फिलहाल ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। मंगलवार सुबह औसत AQI 281 दर्ज किया गया। प्रमुख इलाकों का हाल इस प्रकार है:

इलाकाAQIश्रेणी
जहांगीरपुरी367बहुत खराब
अलीपुर/आनंद विहार 362बहुत खराब
वजीरपुर363बहुत खराब
आईटीओ/द्वारका312बहुत खराब
लोधी रोड 184मध्यम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश की तीव्रता बढ़ती है, तो आने वाले 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में सुधार हो सकता है और AQI ‘मध्यम’ श्रेणी में आ सकता है।

जनजीवन पर प्रभाव: ट्रैफिक और विजिबिलिटी

​मंगलवार सुबह कम दृश्यता (Visibility) और सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ।

  • नोएडा और गुरुग्राम: नोएडा के प्रमुख चौराहों पर भारी बारिश के चलते सुबह के समय ट्रैफिक जाम की स्थिति देखी गई।
  • IMD की सलाह: मौसम विभाग ने लोगों को बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे न रुकने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

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UGC New Rules 2026: दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन, छात्रों ने दी ‘कैंपस में अराजकता’ की चेतावनी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ को लेकर विवाद गहरा गया है। मंगलवार को दिल्ली में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने इन नए नियमों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए UGC मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और घेराव की घोषणा की है।

क्या हैं UGC के नए नियम और क्यों हो रहा विरोध?

​UGC द्वारा 13 जनवरी को जारी किए गए नए नियमों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना है। इसके तहत संस्थानों को Equal Opportunity Centres (EOC), विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी दल (Equity Squads) गठित करने का निर्देश दिया गया है। ये तंत्र मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की शिकायतों का निवारण करेंगे।

​हालांकि, सामान्य वर्ग के छात्रों ने इन नियमों को “भेदभावपूर्ण” और “एकतरफा” करार दिया है। छात्रों का तर्क है कि यह ढांचा परिसरों में सामाजिक विभाजन को और गहरा कर सकता है।

छात्रों की मुख्य चिंताएं: ‘सबूत का बोझ’ और ‘निगरानी का डर’

​विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्रों का कहना है कि ये नियम बेहद कठोर हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के पीएचडी छात्र आलोकित त्रिपाठी ने मीडिया से बात करते हुए कहा:

“नए नियम बेहद कठोर और दमनकारी हैं। इनमें पीड़ित की परिभाषा पहले से ही तय कर दी गई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब सबूत पेश करने का पूरा बोझ आरोपी पर डाल दिया गया है, जबकि गलत तरीके से फंसाए गए छात्रों के लिए कोई सुरक्षा उपाय नहीं दिए गए हैं।”

​त्रिपाठी ने आगे चेतावनी दी कि प्रस्तावित ‘इक्विटी स्क्वाड’ (Equity Squads) के कारण छात्रों को कैंपस के अंदर लगातार निगरानी में रहने जैसा महसूस होगा, जिससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा और अराजकता फैलेगी।

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‘अभी नहीं तो कभी नहीं’: छात्रों की एकजुटता की अपील

​सोशल मीडिया और पोस्टरों के जरिए छात्रों ने इस आंदोलन को “अभी या कभी नहीं” का नाम दिया है। विरोध कर रहे समूहों ने सभी छात्रों, विशेषकर सामान्य वर्ग के युवाओं से एकजुट होने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि जब तक बड़ी संख्या में छात्र अपनी आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा।

सरकार और आलोचकों का पक्ष
  • सरकार का तर्क: केंद्र सरकार और UGC का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता लाना है ताकि किसी भी छात्र के साथ उसकी पहचान के आधार पर भेदभाव न हो।
  • आलोचकों की राय: आलोचकों का मानना है कि नियमों में स्पष्टता की कमी और ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ की संभावना कैंपस के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकती है।

​दिल्ली के विभिन्न कॉलेजों से भारी संख्या में छात्रों के इस प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

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गोपालगंज में दरिंदगी: 2 साल की मासूम से रेप

गोपालगंज/बिहार (राष्ट्र की परम्परा) बिहार के गोपालगंज जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। नगर थाना क्षेत्र के एक गांव में घर के बाहर खेल रही मात्र दो साल की मासूम बच्ची के साथ हैवानियत की गई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है।

खेल रही बच्ची को किया अगवा

मिली जानकारी के अनुसार, मासूम बच्ची अपने घर के दरवाजे पर खेल रही थी। तभी आरोपी ने उसे अकेला पाकर अगवा कर लिया और एक सुनसान जगह पर ले जाकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। बच्ची की चीख सुनकर जब परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर दंग रह गए।

अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही मासूम

पीड़िता की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। उसे तत्काल सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसकी निगरानी कर रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे आरोपी के लिए फांसी की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ा, पुलिस ने किया गिरफ्तार
वारदात के बाद भाग रहे आरोपी को आक्रोशित ग्रामीणों ने पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की। सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।

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आरोपी की पहचान: मोहम्मद सारीक (निवासी: बिजनौर, उत्तर प्रदेश)।

पेशा: आरोपी गोपालगंज के एक बाइक शोरूम में पेंटर का काम करता था।

हालाँकि, आरोपी खुद पर लगे आरोपों को गलत बता रहा है, लेकिन पुलिस के पास पुख्ता सबूत और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान मौजूद हैं।

एसपी विनय तिवारी का सख्त रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विनय तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने कहा:
“पुलिस इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपी को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की गई है।”

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राहुल गांधी पर बयान के बाद शकील अहमद को धमकी का दावा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस के पूर्व सांसद शकील अहमद ने अपनी जान को खतरा बताते हुए सनसनीखेज दावा किया है। यह बयान उन्होंने राहुल गांधी को “असुरक्षित नेता” कहने के कुछ दिनों बाद दिया है। शकील अहमद का कहना है कि पार्टी नेतृत्व से जुड़े कुछ लोगों ने उनके खिलाफ हिंसक प्रदर्शन और हमले की साजिश रची है।

बिहार से तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके शकील अहमद ने कहा कि उन्हें कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों से गुप्त जानकारी मिली है। उनके मुताबिक, मंगलवार को पटना और मधुबनी में उनके घर के बाहर पुतला दहन के बहाने हमला किया जा सकता है।

सोशल मीडिया पर साझा किया सबूत

शकील अहमद ने सोशल मीडिया पर एक व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया है, जिसमें लोगों से उनका पुतला जलाने की अपील की गई है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ बताया।

राहुल गांधी पर लगाए थे गंभीर आरोप

गौरतलब है कि हाल ही में शकील अहमद ने राहुल गांधी को असुरक्षित नेता बताते हुए कहा था कि वे वरिष्ठ नेताओं के सामने असहज महसूस करते हैं और केवल अपनी तारीफ करने वालों को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि इसी रवैये के कारण राहुल गांधी अमेठी जैसी पारंपरिक सीट हार गए।

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भाजपा ने साधा कांग्रेस पर निशाना

शकील अहमद के दावों पर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह मामला कांग्रेस की अंदरूनी तानाशाही और असहिष्णुता को उजागर करता है।

कांग्रेस में तीखी प्रतिक्रिया

वहीं कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने शकील अहमद को “जयचंद” करार देते हुए कहा कि राहुल गांधी देश को जोड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और कुछ लोग नए राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए उन पर हमला कर रहे हैं। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस विवाद पर सार्वजनिक टिप्पणी से इनकार किया है।

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देवरिया: मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत किसानों को मिलेगा बागवानी को बढ़ावा, ऑनलाइन आवेदन शुरू

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी क्षेत्र को सशक्त करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना लागू कर दी गई है। इस योजना के तहत देवरिया जनपद को सब्जी उत्पादन, मशरूम इकाई, फेंसिंग, वर्मी बेड और मचान निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण लक्ष्य प्रदान किए गए हैं, जिनका क्रियान्वयन मार्च 2026 तक किया जाएगा।

जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार, योजना के अंतर्गत सकर शाकभाजी उत्पादन, लो-कॉस्ट मशरूम इकाई (एकीकृत बागवानी विकास मिशन), एचडीपीई वर्मी बेड, खेतों में फेंसिंग तथा सब्जियों पर मचान निर्माण के लिए किसानों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए इच्छुक कृषक http://dbt.uphorticulture.in पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।

ऑनलाइन आवेदन के दौरान आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी और पासपोर्ट साइज फोटो अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा। लाभार्थियों का चयन प्रथम आवक-प्रथम पावक के आधार पर किया जाएगा, जबकि एकीकृत बागवानी विकास मिशन में पहले से पंजीकृत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी।

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इसके साथ ही चयनित किसानों को ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के अंतर्गत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली से भी जोड़ा जाएगा। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाने का अवसर प्रदान करेगी।

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यूजीसी नियम 2026 और अलंकार अग्निहोत्री: शिक्षा नीति से सियासत तक

अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा मामला: यूजीसी नियम, ब्राह्मण विरोध के आरोप और यूपी की सियासत में बढ़ता सामाजिक टकराव

लखनऊ उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है। बरेली के नगर मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा देकर न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी एक नई बहस में धकेल दिया। यह बहस सिर्फ एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यूजीसी के नए नियम 2026, कथित ब्राह्मण विरोध, और अगड़ा बनाम पिछड़ा सामाजिक विमर्श तक फैल चुकी है।
अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब लोकसभा चुनावों में झटका झेल चुकी भाजपा आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है। ऐसे में यह मामला सरकार के लिए प्रशासनिक संकट से कहीं अधिक राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।
क्यों अहम है अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा मामला?
अलंकार अग्निहोत्री उत्तर प्रदेश प्रांतीय प्रशासनिक सेवा के 2019 बैच के अधिकारी हैं। कानपुर नगर के निवासी अग्निहोत्री इससे पहले उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ जैसे जिलों में एसडीएम के रूप में कार्य कर चुके हैं। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक सख्त और स्पष्टवादी अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है।

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अपने इस्तीफे के साथ जारी बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और बुजुर्ग संतों के साथ कथित मारपीट का हवाला देते हुए प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
उनका कहना था कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि आस्था और सम्मान पर सीधा हमला है। यही बयान अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा मामला को सामाजिक असंतोष के केंद्र में ले आया।
यूजीसी नए नियम 2026 पर सीधा हमला
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में यूजीसी के नए नियम 2026 को “काला कानून” करार दिया। उनका आरोप है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लाए गए ये नियम शैक्षणिक माहौल को विभाजित करेंगे और सामान्य वर्ग के छात्रों व शिक्षकों में असुरक्षा की भावना पैदा करेंगे।
यूजीसी के नए नियमों के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी दल गठित करने का प्रावधान है। इनका उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों का समाधान करना है।
हालांकि, सामान्य वर्ग के कई संगठन और बुद्धिजीवी इसे संभावित भेदभाव के रूप में देख रहे हैं। इसी बिंदु पर अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा मामला सरकार के लिए दोधारी तलवार बन गया है।
सरकार की त्वरित कार्रवाई और निलंबन
इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया। उन्हें जिलाधिकारी शामली के कार्यालय से संबद्ध किया गया और बरेली मंडल के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
सरकार का कहना है कि अधिकारी ने सार्वजनिक मंच से सरकार और उसकी नीतियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर सेवा नियमों का उल्लंघन किया है। वहीं, इस कार्रवाई को उनके समर्थक “दमनात्मक कदम” बता रहे हैं।
डीएम आवास विवाद: बंधक बनाने का आरोप बनाम सरकारी सफाई
इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि डीएम आवास पर उन्हें 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया, गालियां दी गईं और अपमानित किया गया।
इसके विपरीत, जिलाधिकारी अविनाश सिंह और एडीएम देश दीपक सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। अधिकारियों का कहना है कि बैठक सौहार्दपूर्ण थी, कॉफी पर बातचीत हुई और बंधक बनाने जैसी कोई स्थिति नहीं थी।
यह विरोधाभास अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा मामला को और जटिल बना देता है, जहां सच और आरोपों के बीच की रेखा धुंधली दिखती है।
राजनीति में अगड़ा बनाम पिछड़ा की बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश में अगड़ा बनाम पिछड़ा की बहस को नई धार दे दी है। एक तरफ सवर्ण संगठनों में रोष है, तो दूसरी ओर पिछड़ा और दलित वर्ग यूजीसी नियमों को सामाजिक न्याय की दिशा में जरूरी कदम मान रहा है।
मोदी और योगी सरकार के सामने चुनौती यह है कि यदि यूजीसी के नियम वापस होते हैं तो पिछड़ा समुदाय नाराज हो सकता है, और यदि नियम लागू रहते हैं तो सवर्णों की नाराजगी चुनावी नुकसान में बदल सकती है।
प्रशासन बनाम व्यवस्था: बड़ा सवाल
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि कौन सही है और कौन गलत, बल्कि यह है कि संवाद की जगह टकराव ने क्यों ले ली?
जब एक अधिकारी खुद को इतना असहज महसूस करे कि उसे सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देना पड़े, तो यह तंत्र के लिए चेतावनी है।
अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा मामला केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि उस संतुलन की तलाश है जहां आस्था, शिक्षा और प्रशासन एक-दूसरे के पूरक हों, विरोधी नहीं।

UNSC में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार: आतंकवाद, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि पर बेनकाब किया झूठ

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर भारत पाकिस्तान बहस ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तीखा रूप ले लिया। अंतरराष्ट्रीय कानून और शासन पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव और उसके राज्य-प्रायोजित आतंकवाद को सख्ती से उजागर किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान के दूत असीम इफ्तिखार अहमद के आरोपों का तथ्यों के साथ करारा जवाब दिया।
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने अपने वक्तव्य में ऑपरेशन सिंदूर, जम्मू-कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों को उठाया, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि ये सभी दावे भ्रामक और तथ्यहीन हैं। भारत ने दो टूक कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए बार-बार ऐसे झूठे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उछालता है।
ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने UNSC में दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह मापा हुआ, ज़िम्मेदार और गैर-उत्तेजक सैन्य अभियान था। इसका उद्देश्य केवल पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ढांचे को निष्क्रिय करना था।
राजदूत हरीश ने बताया कि पाकिस्तान का आक्रामक रुख तब बदला जब उसकी सेना ने स्वयं भारतीय सेना से संपर्क कर तनाव कम करने की पहल की। उन्होंने यह भी कहा कि क्षतिग्रस्त पाकिस्तानी एयरबेस, टूटे रनवे और नष्ट हैंगर की तस्वीरें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जो सच्चाई बयां करती हैं।

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कश्मीर भारत का आंतरिक मामला
जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की टिप्पणी का कड़ा विरोध करते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
भारत ने दोहराया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है, है और हमेशा रहेगा। UNSC में भारत पाकिस्तान बहस के दौरान यह संदेश बेहद स्पष्ट और दृढ़ था।
सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त फैसला
सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने बताया कि यह समझौता 65 वर्ष पहले सद्भावना के आधार पर किया गया था, लेकिन पाकिस्तान ने युद्ध और आतंकवाद को बढ़ावा देकर इसकी भावना का बार-बार उल्लंघन किया।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने साफ किया कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता।
पाकिस्तान के कमजोर शासन पर भारत की चिंता
भारत ने पाकिस्तान में कानून के राज के कमजोर होते हालात पर भी चिंता जताई। UNSC में भारत पाकिस्तान बहस के दौरान 27वें संवैधानिक संशोधन का हवाला देते हुए कहा गया कि पाकिस्तानी सेना को दी गई आजीवन संवैधानिक छूट लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
भारत ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सामान्य नहीं बनाया जा सकता और राज्य नीति के रूप में आतंकवाद का इस्तेमाल अस्वीकार्य है।

पश्चिमी विक्षोभ से बारिश, ओलावृष्टि और सर्द हवाओं का कहर, ठंड और बढ़ी

जयपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राजस्थान में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मंगलवार सुबह राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। राजस्थान मौसम अपडेट के अनुसार बेमौसम हुई इस बारिश के साथ तेज सर्द हवाओं ने ठंड को और अधिक बढ़ा दिया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है।
मौसम केंद्र जयपुर के मुताबिक, राजस्थान मौसम अपडेट के तहत मंगलवार को बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, कोटा और अजमेर संभाग के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की प्रबल संभावना बनी हुई है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के अनेक जिलों में रुक-रुक कर बारिश दर्ज की गई, वहीं घने कोहरे और शीतलहर के कारण सड़कों पर दृश्यता भी कम रही।
जयपुर सहित कई जिलों में सुबह से बारिश
राजधानी जयपुर के कई इलाकों में मंगलवार सुबह हल्की से मध्यम बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान मौसम अपडेट में यह स्पष्ट किया गया है कि नए पश्चिमी विक्षोभ का आज सर्वाधिक प्रभाव रहेगा। इस कारण तापमान में गिरावट बनी रही और सर्दी का असर तेज हो गया।

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राज्य में न्यूनतम तापमान की बात करें तो अलवर में सबसे कम 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, अन्य जिलों में भी तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सर्द हवाएं चलने की संभावना है।
शीतलहर और कोहरे से जनजीवन प्रभावित
लगातार हो रही बारिश, कोहरा और ठंडी हवाओं के कारण सुबह और रात के समय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसान वर्ग भी मौसम के इस बदले मिजाज से चिंतित है, क्योंकि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। राजस्थान मौसम अपडेट किसानों और आम नागरिकों के लिए सतर्क रहने की सलाह देता है।
आने वाले दिनों में मिल सकती है राहत
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कमजोर पड़ने के बाद अगले कुछ दिनों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे शीतलहर से धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि तब तक लोगों को ठंड, बारिश और तेज हवाओं से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की जरूरत है। राजस्थान मौसम अपडेट के अनुसार मौसम की यह गतिविधि अगले 24 से 48 घंटों तक प्रभावी रह सकती है।

करोड़ों की लागत से भृगु कॉरिडोर, बलिया बनेगा आस्था और पर्यटन का केंद्र

बलिया में भृगु कॉरिडोर को सीएम कैबिनेट की मंजूरी, करोड़ों की लागत से बदलेगी धार्मिक-पर्यटन की तस्वीर

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।उत्तर प्रदेश के बलिया जिले को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दिलाने वाली महर्षि भृगु कॉरिडोर परियोजना को मुख्यमंत्री कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इसके निर्माण की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। यह महत्वाकांक्षी योजना बलिया स्थित प्राचीन महर्षि भृगु मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र को आधुनिक धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
सरकार का उद्देश्य भृगु कॉरिडोर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करना है, जिससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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क्या है भृगु कॉरिडोर योजना
भृगु कॉरिडोर योजना के तहत महर्षि भृगु मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास किया जाएगा। इस परियोजना में मंदिर सुंदरीकरण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार और यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि भूमि अधिग्रहण, नाले की सफाई, संरचनात्मक योजना और डिजाइन से जुड़े प्रस्ताव शीघ्र तैयार किए जाएँ ताकि कार्य समयबद्ध ढंग से शुरू हो सके।

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परियोजना के प्रमुख घटक
भृगु कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत
मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण
श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएँ
व्यवस्थित दुकानें और यात्री सुविधा केंद्र
अंडरग्राउंड पार्किंग
मंडप, प्रवेश द्वार और पाथवे
ड्रेनेज और स्वच्छता व्यवस्था
का निर्माण प्रस्तावित है।
इन सुविधाओं से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन अनुभव मिलेगा और भीड़ प्रबंधन में भी सुधार होगा।
लागत, विकास और रोजगार
हालांकि परियोजना की अंतिम लागत अभी तय नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार करोड़ों रुपये का निवेश प्रस्तावित है। भृगु कॉरिडोर के निर्माण से

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स्थानीय युवाओं को रोजगार
पर्यटन आधारित व्यवसायों को बढ़ावा
होटल, परिवहन और हस्तशिल्प क्षेत्र का विकास
बलिया की राष्ट्रीय पहचान
सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
ज्योतिष अनुसंधान का केंद्र बनेगा बलिया
सरकार इस परियोजना को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के रूप में भी विकसित करने पर विचार कर रही है। मान्यता है कि महर्षि भृगु का संबंध ज्योतिष विज्ञान से रहा है, ऐसे में भृगु कॉरिडोर बलिया को वैश्विक स्तर पर ज्योतिष अध्ययन का केंद्र बना सकता है।

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भविष्य की दिशा
भृगु कॉरिडोर परियोजना के पूर्ण होने से बलिया न केवल पूर्वांचल का प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बनेगा, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत, आस्था और आधुनिक विकास का अनूठा संगम भी प्रस्तुत करेगा।

India–EU Free Trade Agreement से बदलेगा भारत का वैश्विक व्यापार परिदृश्य

भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता: 18 साल बाद ऐतिहासिक FTA पर मुहर, निर्यात, निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच पिछले 18 वर्षों से चली आ रही लंबी और जटिल बातचीत आज 27 जनवरी 2026 को एक निर्णायक मुकाम पर पहुंच गई है। भारत के व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (India–EU FTA) पर हस्ताक्षर के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच होने वाली शिखर बैठक को भारत की व्यापारिक कूटनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

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गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को “दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच भरोसे और सहयोग का मजबूत उदाहरण” बताया। उन्होंने कहा कि India–EU Free Trade Agreement से भारत के ज्वेलरी, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को वैश्विक पहचान मिलेगी और देश में करोड़ों नए रोजगार अवसर पैदा होंगे।
शेयर बाजार में दिखा FTA का असर
India–EU FTA की पुष्टि होते ही भारतीय शेयर बाजार में निर्यात आधारित कंपनियों के शेयरों में तेज़ी देखी गई।
टेक्सटाइल सेक्टर:
गोकलदास एक्सपोर्ट्स (लगभग 5%), केपीआर मिल (3%) और वर्धमान टेक्सटाइल (5%) में मजबूत खरीदारी।

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झींगा (Shrimp) निर्यातक:
अवंती फीड्स और एपेक्स फ्रोजन फूड्स जैसे शेयरों में 12% तक की उछाल दर्ज की गई।
यह साफ संकेत है कि निवेशक India–EU Free Trade Agreement को भारत के निर्यात भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक मान रहे हैं।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव
इस समझौते का सबसे बड़ा और चर्चित असर ऑटोमोबाइल उद्योग पर पड़ेगा।
कस्टम ड्यूटी में कटौती:
यूरोपीय कारों पर लगने वाली 110% ड्यूटी को पहले चरण में घटाकर 40% किया जाएगा, जिसे आगे चलकर 10% तक लाने का लक्ष्य है।

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लग्जरी कारों को लाभ:
BMW, मर्सिडीज-बेंज और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश आसान होगा। यह छूट केवल 15,000 यूरो (करीब ₹14 लाख) से अधिक कीमत वाली कारों पर लागू होगी।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV):
घरेलू कंपनियों टाटा मोटर्स और महिंद्रा के हितों की सुरक्षा के लिए अगले 5 वर्षों तक EV को इस छूट से बाहर रखा गया है।
निर्यात और व्यापार को कितनी मिलेगी ताकत?
विशेषज्ञों के अनुसार, India–EU FTA लागू होने के बाद भारत के निर्यात में $3 से $5 बिलियन की अतिरिक्त वृद्धि संभव है।
वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और EU के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार करीब $136 बिलियन रहा था।
इलेक्ट्रॉनिक्स:
EU को भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र, लगभग $11.3 बिलियन।
रिफाइंड पेट्रोलियम:
सबसे बड़ा निर्यात ($15 बिलियन), हालांकि इस पर असर सीमित रहेगा क्योंकि टैरिफ पहले से कम हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता भारत के लिए केवल एक व्यापारिक डील नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भागीदारी, निवेश वृद्धि और दीर्घकालिक आर्थिक विकास का रास्ता खोलने वाला कदम है। आने वाले वर्षों में यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार हब बनाने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।

नालियां बनी मुसीबत, प्रशासन से जल्द समाधान की मांग

वार्ड नंबर 7 सिकंदरपुर में टूटी नालियों से जनजीवन बेहाल, मरम्मत में देरी से बढ़ा संक्रमण का खतरा


सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। आदर्श नगर पंचायत सिकंदरपुर के वार्ड नंबर 7 में टूटी नालियों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। मोहल्ले के कई हिस्सों में नालियों के क्षतिग्रस्त होने से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड नंबर 7 में टूटी नालियां न केवल आवागमन में बाधा बन रही हैं, बल्कि दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का कारण भी बन रही हैं।
स्थानीय निवासी जितेंद्र कुमार ने बताया कि वार्ड नंबर 7 सिकंदरपुर की नाली समस्या की जानकारी नगर पंचायत प्रशासन को पहले ही दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि टूटी नालियों के कारण बरसात और घरेलू उपयोग का पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। इससे कीचड़ फैल रहा है और राहगीरों, बच्चों तथा बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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ग्रामीणों के अनुसार, वार्ड नंबर 7 में नाली मरम्मत में देरी के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। गंदा पानी जमा रहने से डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियों का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नाली मरम्मत कार्य सिकंदरपुर में शुरू नहीं हुआ तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
जितेंद्र कुमार ने यह भी बताया कि उन्होंने नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी को लिखित और मौखिक रूप से समस्या से अवगत कराया था। इसके बावजूद अभी तक वार्ड नंबर 7 में टूटी नालियों की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी बढ़ती जा रही है।

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इस संबंध में जब नगर पंचायत सिकंदरपुर के अधिशासी अधिकारी मनोज पांडे से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें वार्ड नंबर 7 की नाली समस्या की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में छुट्टियों के कारण कार्य में विलंब हुआ, लेकिन अब जल्द ही स्थल का निरीक्षण कराकर नाली मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा।
अधिशासी अधिकारी ने आश्वासन दिया कि नगर पंचायत जनता की बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर है और वार्ड नंबर 7 सिकंदरपुर में टूटी नालियों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा। वहीं, वार्डवासियों का कहना है कि वे प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा तो कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें जल्द से जल्द जमीन पर काम दिखाई देने की उम्मीद है।

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स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नाली मरम्मत सिकंदरपुर का कार्य स्थायी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया जाए, ताकि भविष्य में जलभराव और गंदगी की समस्या दोबारा न उत्पन्न हो। लोगों का मानना है कि स्वच्छ नालियों से ही स्वस्थ नगर की कल्पना साकार हो सकती है।

रसूलाबाद गांव में नाली निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

🔴 नाली निर्माण में लापरवाही का आरोप, बिना मसाले के चुनाई का वीडियो वायरल


संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद के खलीलाबाद ब्लॉक अंतर्गत रसूलाबाद गांव में कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नाली निर्माण के दौरान सीमेंट और बालू के मसाले का प्रयोग किए बिना ही ईंटों की चुनाई कराई जा रही थी, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, जब निर्माण कार्य चल रहा था, उसी दौरान कुछ लोगों ने मौके पर राजगीर द्वारा बिना मसाले के ईंटों की चुनाई करते हुए फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर साझा किए गए, जो कुछ ही समय में वायरल हो गए। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि नाली निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है।

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ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से किया गया नाली निर्माण लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रहेगा। बिना मसाले की चुनाई से नाली जल्दी क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे बरसात के मौसम में जलभराव और गंदगी की समस्या और गंभीर हो जाएगी। इसके साथ ही सरकारी धन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार द्वारा विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर गुणवत्ता से समझौता क्यों किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में यही नाली टूटकर दोबारा निर्माण का कारण बनेगी, जिससे जनता का पैसा बर्बाद होगा।

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वायरल वीडियो के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इससे पहले भी गांव में कराए गए कुछ विकास कार्यों की गुणवत्ता संदिग्ध रही है, लेकिन इस बार वीडियो वायरल होने के कारण मामला खुलकर सामने आ गया है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर उचित कदम उठाएगा।

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अब देखना यह होगा कि नाली निर्माण में लापरवाही के इस मामले में संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करता है और क्या दोषियों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

पटना शंभु हॉस्टल केस: छात्रा मौत में 6 संदिग्धों का DNA टेस्ट

पटना (राष्ट्र की परम्परा)। पटना के शंभु हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में बड़ा और अहम अपडेट सामने आया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में छात्रा के अंडरगार्मेंट से सीमेन मिलने की पुष्टि के बाद मामले में रेप की आशंका और गहरा गई है। इसके बाद पटना पुलिस ने जांच तेज करते हुए 6 संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनके DNA सैंपल लिए हैं।

इन सभी संदिग्धों के डीएनए सैंपल को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है, जहां इनका मिलान छात्रा के कपड़ों से मिले डीएनए प्रोफाइल से किया जाएगा।

SIT ने कलेक्ट किए DNA सैंपल, मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, इस मामले की जांच कर रही SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने गर्दनीबाग अस्पताल में सभी 6 संदिग्धों के DNA सैंपल कलेक्ट किए। यह पूरी प्रक्रिया मेडिकल टीम और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में की गई।
DNA सैंपल लेने के बाद उन्हें विधिवत सील कर फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेज दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की कानूनी या तकनीकी चूक न हो।

शंभु हॉस्टल आते-जाते थे सभी संदिग्ध

पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये सभी 6 संदिग्ध शंभु हॉस्टल के आसपास अक्सर आते-जाते रहते थे। जिस दिन छात्रा की मौत का मामला सामने आया, उस दिन भी ये लोग हॉस्टल के पास देखे गए थे।
इसी आधार पर पुलिस ने इन पर शक गहराते हुए इन्हें जांच के दायरे में लिया है।

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कॉल डिटेल और CCTV फुटेज से गहराया शक

पटना पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन डेटा की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में इन सभी संदिग्धों की लोकेशन घटना के समय हॉस्टल के आसपास पाई गई है।
इसके अलावा, ये सभी CCTV फुटेज में भी नजर आ रहे हैं, जिससे पुलिस का शक और मजबूत हुआ है। पुलिस हर संदिग्ध की गतिविधियों को टाइमलाइन के आधार पर जोड़ने की कोशिश कर रही है।

फॉरेंसिक रिपोर्ट से रेप की आशंका मजबूत

इस केस में सबसे अहम मोड़ तब आया, जब फॉरेंसिक टीम ने अपनी रिपोर्ट SIT को सौंपी। रिपोर्ट में साफ तौर पर छात्रा के अंडरगार्मेंट में मेल स्पर्म (सीमेन) मिलने की पुष्टि हुई है।
इसके बाद यह आशंका जताई जा रही है कि छात्रा के साथ यौन शोषण किया गया हो सकता है। परिजन पहले दिन से ही रेप के बाद हत्या का आरोप लगा रहे हैं और इस रिपोर्ट के बाद उनके आरोपों को मजबूती मिली है।

DNA रिपोर्ट से खुल सकता है राज

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अब इस मामले में DNA रिपोर्ट निर्णायक साबित हो सकती है। छात्रा के कपड़ों पर मिले सीमेन से तैयार की जा रही DNA प्रोफाइल का मिलान संदिग्धों के सैंपल से किया जाएगा।
अगर डीएनए मैच होता है, तो यह मामले में सबसे बड़ा सबूत होगा और दोषियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

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पुलिस जांच का दायरा और बढ़ा

पटना पुलिस ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है और किसी भी एंगल को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। जरूरत पड़ने पर और लोगों से पूछताछ की जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।

ठंड में भी नहीं रुकी सेवा: देवरिया में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर से बदली ज़िंदगियां

ठंड, तकलीफ़ और उम्मीद: देवरिया में राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन का निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, 1650 मरीजों का इलाज, 100 से अधिक को नई दृष्टि


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक जरूरत को रेखांकित करते हुए राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर ने देवरिया जनपद के तेलियां कला क्षेत्र में मानवता और सेवा की एक मिसाल पेश की। कड़ाके की ठंड के बावजूद आयोजित इस निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 1650 से अधिक मरीजों ने चिकित्सकीय परामर्श, जांच और दवाइयों का लाभ उठाया।
इस निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर देवरिया की सबसे बड़ी उपलब्धि रही 100 से अधिक मोतियाबिंद रोगियों की पहचान, जिन्हें निःशुल्क इलाज और आगे की सर्जरी प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन दिया गया। वर्षों से आंखों की रोशनी खो चुके जरूरतमंद मरीजों के लिए यह शिविर नई उम्मीद और नया जीवन लेकर आया।
ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में निःशुल्क एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई, जिससे मरीजों को लाने और वापस पहुंचाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। यह पहल गरीब और वंचित वर्ग के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनी।
शिविर के दौरान मरीजों और ग्रामीणों के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का विशेष प्रसारण भी किया गया। इस अवसर पर श्री राजेश सिंह दयाल ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण और जनकल्याण से जुड़े विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि आम नागरिक भी सकारात्मक सोच से जुड़ सकें।
गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय, गोरखपुर के लिए रेफर किया गया। यह चिकित्सालय माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल है, जहां मरीजों को उच्चस्तरीय और निरंतर इलाज की सुविधा मिलती है।
इस निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर देवरिया में श्री गोरक्षनाथ मेडिकल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के अनुभवी चिकित्सकों ने न्यूरोलॉजी, बाल रोग, स्त्री रोग, फेफड़ा रोग, हड्डी रोग, नेत्र रोग, जनरल मेडिसिन, ईएनटी, डेंटल सहित कई विशेषज्ञ ओपीडी सेवाएं प्रदान कीं। ऑन-द-स्पॉट जांच केंद्र और निःशुल्क दवा वितरण शिविर की प्रमुख विशेषताएं रहीं।
तेलियां कला, बरहज और देवरिया के आसपास के क्षेत्रों के गरीब, असहाय और वंचित लोगों को इस राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मिला।
प्रेस को संबोधित करते हुए “यूपी के मेडिसिन मैन” के नाम से प्रसिद्ध श्री राजेश सिंह दयाल ने भविष्य में भी ऐसे निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने इस जनसेवा अभियान के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी तथा श्री गोरक्षनाथ मेडिकल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह शिविर न केवल चिकित्सा सहायता का माध्यम बना, बल्कि सामाजिक सरोकार, संवेदनशीलता और जनकल्याण की दिशा में एक मजबूत कदम भी सिद्ध हुआ।