Thursday, June 11, 2026
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पटना में अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती, 81 लोगों को नोटिस

पटना में 5 एकड़ सरकारी जमीन से हटेगा अतिक्रमण, DM के आदेश के बाद बुलडोजर की तैयारी

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पटना में 5 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम के आदेश के बाद सदर अंचल प्रशासन ने इस जमीन पर रह रहे लोगों को नोटिस जारी कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, इस जमीन पर 81 लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। सभी कब्जाधारकों को अपने-अपने दस्तावेजों के साथ 5 फरवरी को सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
यह पूरा मामला पटना के बेहद महत्वपूर्ण इलाके से जुड़ा है, जहां सरकारी जमीन पर वर्षों से अतिक्रमण बना हुआ था। अब प्रशासन इसे हटाकर सरकारी योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में है।

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5 फरवरी को होगी सुनवाई, दस्तावेजों की होगी जांच
सदर अंचलाधिकारी रजनीकांत की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सभी कब्जाधारकों को अपने स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यदि दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए, तो सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी दायरे में और पारदर्शिता के साथ की जा रही है।

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गैरमजरुआ आम जमीन को लेकर प्रशासन का स्पष्ट रुख
जिला प्रशासन के मुताबिक, बुद्धा कॉलोनी मोड़ से काली मंदिर तक फैली यह जमीन गैरमजरुआ आम श्रेणी में आती है। इसका अर्थ है कि इस जमीन पर सरकार का पूर्ण अधिकार है और इसका उपयोग सार्वजनिक हित में किया जा सकता है।
प्रशासन का दावा है कि कुछ लोगों ने न केवल अवैध कब्जा किया, बल्कि पक्के मकान तक बना लिए। जमीन की सीमाएं इस प्रकार हैं—
दक्षिण में मंदिरी और बुद्धा कॉलोनी क्षेत्र, उत्तर में अशोक राजपथ, पश्चिम में बुद्धा कॉलोनी रोड, और पूरब में काली मंदिर।

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5 एकड़ सरकारी जमीन पर क्या है सरकार की योजना
सूत्रों के अनुसार, 5 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद यहां वेंडिंग जोन, पार्क या फिर सरकारी भवन के निर्माण की योजना है। सरकार इस जमीन का उपयोग शहरी सुविधा विस्तार और आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगी।
प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए एक सख्त संदेश भी मानी जा रही है।

जैक इंटर और ICSE परीक्षा पर भारी पड़ा चुनावी शेड्यूल

झारखंड नगर निकाय चुनाव 2026 बनाम बोर्ड परीक्षा: 23 फरवरी को मतदान और जैक इंटर–ICSE परीक्षा से बढ़ी छात्रों की चिंता

✍️ रिपोर्ट: विशेष संवाददाता (राष्ट्र की परम्परा)

रांची झारखंड में नगर निकाय चुनाव 2026 और बोर्ड परीक्षाओं की तारीख एक साथ घोषित होने से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग की चिंता अचानक बढ़ गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने घोषणा की है कि 23 फरवरी 2026 को राज्य के 48 नगर निकायों में एक ही चरण में मतदान होगा। संयोग नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक टकराव यह है कि इसी दिन जैक इंटर परीक्षा और ICSE 12वीं बोर्ड परीक्षा भी निर्धारित हैं।
यह स्थिति केवल तारीखों का टकराव नहीं, बल्कि ट्रैफिक, सुरक्षा, शिक्षक ड्यूटी और परीक्षा केंद्र प्रबंधन जैसी जमीनी चुनौतियों का बड़ा संकट बनकर उभर रही है।
48 नगर निकायों में एक साथ मतदान, बैलेट पेपर से चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, झारखंड के 09 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में एक साथ मतदान कराया जाएगा।

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मतदान बैलेट पेपर से होगा– NOTA का विकल्प नहीं रहेगा,2 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी होगी,उसी दिन से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी,चुनाव को शांतिपूर्ण बनाने के लिए राज्यभर में संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथ चिह्नित किए जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और सख्त होगी।
23 फरवरी को कौन-कौन सी परीक्षाएं होंगी?
23 फरवरी 2026 झारखंड के शिक्षा कैलेंडर का सबसे व्यस्त दिन बनने जा रहा है।
जैक इंटर (आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स):हिंदी बी (Compulsory Core Language),मातृभाषा की परीक्षा,ICSE 12वीं बोर्ड:केमिस्ट्री परीक्षा (दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक),ICSE 10वीं बोर्ड: रोबोटिक एंड AI बेसिक डेटा इंटरप्रेटर इसका सीधा असर लाखों छात्रों की आवागमन व्यवस्था पर पड़ेगा।

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जहां परीक्षा, वहीं पोलिंग बूथ: दोहरी व्यवस्था का दबाव,जैक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:मैट्रिक परीक्षा: 4,23,861 छात्र
1232 परीक्षा केंद्र
इंटर परीक्षा: 2,12,547 छात्र,757 परीक्षा केंद्र
इनमें से अधिकांश स्कूल और कॉलेज वही हैं जिन्हें चुनाव के दौरान मतदान केंद्र भी बनाया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है—
👉 पहले परीक्षा होगी या मतदान?
👉 एक ही परिसर में दोनों गतिविधियां कैसे संचालित होंगी?
ट्रैफिक और सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती,चुनाव के दिन आमतौर पर:बैरिकेडिंग,वाहन जांच,रूट डायवर्जन,पुलिस गश्त जैसी व्यवस्थाएं लागू रहती हैं। ऐसे हालात में ग्रामीण इलाकों से शहरों में परीक्षा देने आने वाले छात्रों के लिए समय पर केंद्र पहुंचना बड़ी चुनौती बन सकता है। गार्जियन मानते हैं कि मतदान सुबह शुरू होने से दोपहर की परीक्षाओं पर भी असर पड़ सकता है।
शिक्षक ड्यूटी से परीक्षा व्यवस्था पर संकट
चुनावों में परंपरागत रूप से शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाई जाती है।
लेकिन परीक्षा केंद्रों पर भी वही शिक्षक—केंद्र अधीक्षक,वीक्षक,रूम कंट्रोलर,की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में एक ही दिन दोनों जिम्मेदारियां निभाना व्यवहारिक रूप से कठिन माना जा रहा है।
अन्य कक्षाओं की परीक्षाएं भी चुनावी माहौल में
चुनावी अवधि में केवल इंटर या ICSE ही नहीं, बल्कि:8वीं की परीक्षा: 24 फरवरी
11वीं की परीक्षा: 25, 26, 27 फरवरी
9वीं की परीक्षा: 28 फरवरी से
पूरे परीक्षा कैलेंडर पर चुनावी असर साफ दिखेगा।
गार्जियन की मांग: छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था
अभिभावकों की प्रमुख मांगें हैं:
परीक्षार्थियों के लिए अलग ट्रैफिक कॉरिडोर
परीक्षा केंद्रों तक विशेष पास/अनुमति
संवेदनशील इलाकों में विशेष वाहन सुविधा
गार्जियन का कहना है कि “चुनाव लोकतंत्र का पर्व है, लेकिन बच्चों का भविष्य उससे भी ज्यादा अहम है।”
🔎 निष्कर्ष
झारखंड नगर निकाय चुनाव 2026 और जैक इंटर–ICSE परीक्षा का एक ही दिन होना प्रशासन के लिए कसौटी है। यदि समय रहते समन्वय नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर लाखों छात्रों पर पड़ सकता है। अब निगाहें राज्य सरकार, निर्वाचन आयोग और शिक्षा विभाग के समन्वित फैसले पर टिकी हैं।

स्कूलों में डिजिटल क्रांति: बिहार शिक्षा बजट का बड़ा ऐलान संभव

बिहार बजट 2026: शिक्षा पर सरकार का बड़ा दांव, बजट में 5% तक बढ़ोतरी तय, उच्च शिक्षा को मिलेगा खास फोकस

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार सरकार इस बार बिहार बजट 2026 में शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक प्राथमिकता देने जा रही है। आगामी 3 फरवरी को बिहार विधानमंडल में पेश होने वाले बजट में शिक्षा विभाग के लिए 3 से 5 प्रतिशत तक बजट बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने शिक्षा पर 72,652.44 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो पहले तय बजट से कहीं अधिक है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शिक्षा के लिए 60,964 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सरकार को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ी। यह संकेत है कि आने वाले बजट में शिक्षा पर रिकॉर्ड निवेश देखने को मिल सकता है।

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तय बजट से ज्यादा खर्च, बढ़ी जरूरतें बनी वजह
सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा विभाग की बढ़ी हुई आवश्यकताओं के कारण सरकार को करीब 11,688 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। इसमें शिक्षकों के वेतन, अधोसंरचना सुधार, डिजिटल शिक्षा और नई नियुक्तियों का बड़ा हिस्सा रहा। यही वजह है कि बिहार शिक्षा बजट 2026 में उल्लेखनीय बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।
उच्च शिक्षा बजट में ऐतिहासिक उछाल की तैयारी
इस बार बिहार सरकार शिक्षा के लिए दो अलग-अलग बजट ढांचे पर काम कर रही है—एक स्कूली शिक्षा और दूसरा उच्च शिक्षा के लिए। जानकारों की मानें तो उच्च शिक्षा बजट में दो गुना तक बढ़ोतरी संभव है।
फिलहाल शिक्षा बजट में उच्च शिक्षा की हिस्सेदारी लगभग 5,000 करोड़ रुपये है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा विश्वविद्यालय कर्मियों के वेतन पर खर्च होता है। आगामी वर्ष में नई भर्तियों, विश्वविद्यालयों के आधुनिकीकरण और शोध सुविधाओं के विस्तार के चलते उच्च शिक्षा का बजट तेजी से बढ़ सकता है।

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स्कूली शिक्षा में तकनीक और डिजिटल सुविधाओं पर जोर
जहां तक स्कूली शिक्षा बजट की बात है, सरकार बच्चों को आधुनिक और तकनीकी सुविधाएं देने की योजना पर काम कर रही है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी कारण स्कूली शिक्षा के बजट में कम से कम 5% की बढ़ोतरी प्रस्तावित है।
साल 2025 में शिक्षा पर कुल 72,652.44 करोड़ रुपये के खर्च में से लगभग 5,000 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा पर और शेष राशि स्कूली शिक्षा पर खर्च की गई थी।

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शिक्षा बजट से बदलेगी बिहार की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार शिक्षा बजट 2026 राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता, रोजगारपरक शिक्षा और डिजिटल लर्निंग को नई दिशा देगा। इससे न केवल छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि बिहार का शैक्षणिक ढांचा भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगा।

बारामती में विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत

बारामती में निजी विमान हादसा: इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान क्रैश, जांच के आदेश

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह एक निजी विमान हादसा सामने आया, जब मुंबई से आ रहा एक लाइट जेट विमान इमरजेंसी लैंडिंग के प्रयास के दौरान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद विमान में आग लग गई, जिससे वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान में सवार सभी लोगों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
प्राप्त विवरण के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त विमान Learjet 45 श्रेणी का था, जो मुंबई से उड़ान भरकर बारामती एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा था। लैंडिंग के समय विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह रनवे से फिसलकर क्रैश-लैंड हो गया। हादसे के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड और आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया।

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हादसे के संभावित कारण
उड्डयन विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी खराबी, रनवे की स्थिति, या मौसम संबंधी कारक इस निजी विमान हादसे के संभावित कारण हो सकते हैं। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच के आदेश
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने मामले की औपचारिक जांच के संकेत दिए हैं। जांच में विमान की मेंटेनेंस हिस्ट्री, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, पायलट इनपुट्स और एयरपोर्ट ऑपरेशंस की समीक्षा की जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच शुरू कर दी है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। नागरिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने विमानन सुरक्षा मानकों को और सख्त करने की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी निजी विमान हादसा को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है।

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आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक आधिकारिक बयान का इंतजार किया जाए। एयरपोर्ट पर सुरक्षा उपायों को अस्थायी रूप से बढ़ाया गया है और उड़ान संचालन की समीक्षा की जा रही है।

मोबाइल, व्हाट्सएप और CCTV से खुलेगा NEET छात्रा मौत का राज

जहानाबाद की NEET छात्रा की संदिग्ध मौत: SIT जांच तेज, मोबाइल-CCTV से खुलेगा पूरा सच

जहानाबाद (राष्ट्र की परम्परा )जहानाबाद की रहने वाली और पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार के प्रशासनिक और पुलिस सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नये तथ्यों के सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस मामले को हाई प्रोफाइल जांच घोषित कर दिया है। डीजीपी के स्पष्ट निर्देश हैं कि विधानसभा सत्र से पहले पूरे केस की परतें खोली जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई हो।
पुलिस मुख्यालय के दबाव के बीच अब यह मामला केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि संभावित आपराधिक साजिश की जांच बन चुका है। इसी क्रम में मुख्यालय ने SIT से करीब 40 अहम सवालों के जवाब मांगे हैं, जो हॉस्टल, हॉस्पिटल, परिवार और स्थानीय पुलिस की भूमिका पर केंद्रित हैं।

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मुख्यालय की बैठक के बाद तेज हुई जांच
मंगलवार को एडीजी CID पारसनाथ और एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार के बीच लंबी उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि सिटी एसपी के नेतृत्व में बनी SIT के सभी सदस्यों को अलग-अलग स्पेशल टास्क दिए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय ने कुल 59 बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें से 40 से अधिक सवालों के जवाब आईजी सेंट्रल और एसएसपी पटना से मांगे गए हैं।

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मोबाइल और डिजिटल ट्रांजेक्शन बने जांच की धुरी
अब NEET छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में सबसे अहम कड़ी पीड़िता का मोबाइल फोन बन गया है। पुलिस छात्रा के मोबाइल से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट, ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है। यह जानने की कोशिश हो रही है कि पैसे का लेन-देन कब, कहां और किन परिस्थितियों में हुआ। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही ट्रांजेक्शन छात्रा के अंतिम दिनों की सच्चाई उजागर कर सकते हैं।
व्हाट्सएप मैसेज से बढ़ा रहस्य
हॉस्पिटल के एक डॉक्टर के बयान ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। डॉक्टर के अनुसार छात्रा के मोबाइल से एक व्हाट्सएप मैसेज भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि परिवार केस दर्ज नहीं कराना चाहता। सवाल यह है कि यह मैसेज किसने और किन हालात में भेजा। क्या यह छात्रा ने स्वयं लिखा या किसी और ने? यह पहलू अब SIT की प्राथमिक जांच सूची में शामिल है।

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CCTV फुटेज की होगी FSL जांच
जिस CCTV फुटेज के आधार पर दावा किया गया था कि घटना के दिन छात्रा के कमरे में कोई नहीं गया, उसे अब FSL जांच के लिए भेजने की तैयारी है। पुलिस को आशंका है कि फुटेज से छेड़छाड़ या सबूतों के नष्ट होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। घटनास्थल पर फॉरेंसिक साक्ष्य सुरक्षित थे या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
पुलिस की भूमिका भी कटघरे में
इस मामले में स्थानीय थाना से लेकर अनुमंडल स्तर तक की पुलिस की भूमिका की जांच होगी। शुरुआती जांच में लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या साक्ष्य सुरक्षित न रखने जैसे बिंदुओं पर जवाबदेही तय की जाएगी।

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SIT अब तक पटना और जहानाबाद में चार लोगों से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि उन्हें फिलहाल घर जाने दिया गया है, लेकिन उनके बयानों का मिलान डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों से किया जा रहा है।
स्पष्ट है कि जहानाबाद की NEET छात्रा की संदिग्ध मौत अब एक बड़े सच की ओर बढ़ रही है, जहां हर कड़ी जोड़कर न्याय तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

महराजगंज: मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान महिला बीएलओ से मारपीट, सरकारी कागजात फाड़े

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र की आधारशिला माने जाने वाले मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान महिला सरकारी कर्मचारी के साथ हुई हिंसा ने प्रशासन और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है। थाना कोतवाली ठूठीबारी क्षेत्र के ग्राम ठूठीबारी टोला धर्मौली में महिला बीएलओ और आंगनवाड़ी कार्यकत्री के साथ सरेआम मारपीट, अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा डालने का गंभीर मामला सामने आया है।

पीड़िता मंजू यादव उर्फ मंजू देवी, पुत्री जगदीश, बीएलओ (भाग संख्या-8) के पद पर कार्यरत हैं। 27 जनवरी को वह अपने घर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य कर रही थीं। इसी दौरान गांव निवासी कृष्णा पुत्र स्व. प्रेमलाल अपनी पत्नी लक्ष्मी का नाम मतदाता सूची में जुड़वाने से संबंधित जानकारी लेने पहुंचा।

नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज—मायके की मतदाता सूची और परिवार रजिस्टर की प्रमाणित प्रति—मांगे जाने पर आरोपी ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इसके बाद पीड़िता द्वारा नियमानुसार नोटिस जारी किया गया, जिससे आरोपी आक्रोशित हो गया।

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आरोप है कि कृष्णा ने अपने भाई इंद्र कमल को बुलाकर पीड़िता से गाली-गलौज की, सरकारी कागजात छीनकर फाड़ दिए और बाल पकड़कर घर से बाहर खींचते हुए सड़क पर पटक दिया। इस दौरान लात-घूंसे मारे गए और कपड़े खींचकर अभद्रता की गई।

बीच-बचाव करने पहुंचे पीड़िता के वृद्ध पिता के साथ भी मारपीट की गई और उन्हें नाली में धक्का दे दिया गया। हमले में महिला बीएलओ को सिर, छाती, पीठ, कमर और जांघ समेत कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
घटना के बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। पीड़िता की तहरीर पर थाना ठूठीबारी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह घटना न केवल महिला सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ़ती हिंसा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।

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बलिया दवा मंडी समस्याएं: धर्मेन्द्र सिंह ने दिया समाधान का भरोसा

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया की दवा मंडी में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को लेकर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों और व्यापारियों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुज धर्मेन्द्र सिंह ने शिरकत की और व्यापारियों को समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।

बैठक के दौरान दवा व्यापारियों ने बदहाल सड़कों, जलभराव, सार्वजनिक शौचालय की कमी, साफ-सफाई, नाली व्यवस्था और यातायात अव्यवस्था जैसी प्रमुख समस्याएं रखीं। व्यापारियों ने बताया कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें रोजमर्रा के कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ग्राहक भी परेशान होते हैं।

धर्मेन्द्र सिंह ने व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि बलिया के समग्र विकास के लिए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दवा मंडी की जर्जर सड़क और सार्वजनिक शौचालय निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभागों से समन्वय कर जल्द शुरू कराया जाएगा।

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उन्होंने कहा कि व्यापारी समाज जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उनकी समस्याओं की अनदेखी नहीं की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाकर दवा मंडी को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

बैठक के दौरान धर्मेन्द्र सिंह ने आगामी “बाबू मैनेजर सिंह मैराथन दौड़” कार्यक्रम का भी उल्लेख करते हुए सभी से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ जिले की सकारात्मक पहचान भी बनाते हैं।

बैठक में बड़ी संख्या में दवा व्यापारी मौजूद रहे। अध्यक्षता आनंद सिंह ने की जबकि संचालन बब्बन यादव द्वारा किया गया। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि जल्द ही प्रशासनिक कार्रवाई से दवा मंडी की समस्याओं का समाधान होगा।

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बलिया आयुर्वेदिक अस्पताल में 6 माह से दवाएं नहीं, मरीज परेशान

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पिछले करीब छह महीनों से आवश्यक आयुर्वेदिक दवाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है। इस वजह से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीज आयुर्वेदिक इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

बुजुर्ग और गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित

मरीजों के अनुसार वे जोड़ों के दर्द, पेट की बीमारियों, त्वचा रोग और पुरानी समस्याओं के इलाज के लिए नियमित रूप से चिकित्सालय आते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा पर भरोसा रखने वाले बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। दवाएं उपलब्ध न होने के कारण कई मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगी आयुर्वेदिक दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ समाधान

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दवाओं की कमी को लेकर कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हो सका। चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर मरीजों को परामर्श तो दे रहे हैं, लेकिन दवाओं के अभाव में इलाज अधूरा रह जा रहा है।

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इस माह दवा आपूर्ति की उम्मीद

इस संबंध में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ. विजय यादव ने बताया कि दवाओं की आपूर्ति उच्च स्तर पर लंबित होने के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस माह दवाओं की खेप आने की पूरी संभावना है। विभागीय स्तर पर खरीद प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जल्द ही आवश्यक औषधियां उपलब्ध करा दी जाएंगी।

मरीजों ने की नियमित आपूर्ति की मांग

डॉ. विजय यादव के बयान से मरीजों में उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन उनका कहना है कि जब तक दवाएं वास्तव में चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक राहत नहीं मिलेगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में दवाओं की नियमित और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क और प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार मिल सके।

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CIC का बड़ा फैसला: पत्नी को पति की आय की जानकारी मिलेगी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने भरण-पोषण और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पत्नी को पति की आय से जुड़ी सामान्य जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता, और इसके लिए गोपनीयता का हवाला नहीं दिया जा सकता।

भरण-पोषण से जुड़ा है महिला का अधिकार

CIC ने कहा कि जब कोई कानूनी पत्नी भरण-पोषण के लिए अपने पति की आय संबंधी जानकारी मांगती है, तो यह केवल निजी जानकारी नहीं रह जाती। यह मामला सीधे तौर पर महिला के जीवन-यापन, न्यायिक अधिकार और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा होता है।
यह आदेश उस मामले में दिया गया, जिसमें एक महिला ने RTI के तहत अपने पति की पिछले पांच वर्षों की आय से जुड़ी जानकारी मांगी थी। महिला का आरोप था कि उसका पति अपनी वास्तविक कमाई छिपाकर भरण-पोषण से बचने की कोशिश कर रहा है।

ITR और निजी दस्तावेज नहीं दिए जाएंगे

हालांकि, आयोग ने यह भी साफ किया कि आयकर रिटर्न (ITR) की कॉपी या अन्य संवेदनशील निजी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। आयोग के अनुसार, पत्नी को केवल आय से संबंधित सामान्य जानकारी दी जा सकती है, जिससे वह अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा कर सके।

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आयकर विभाग की दलील खारिज

इससे पहले आयकर विभाग ने महिला की RTI अर्जी को RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत खारिज कर दिया था। विभाग का तर्क था कि यह तीसरे पक्ष की निजी जानकारी है और इसे साझा नहीं किया जा सकता।
लेकिन CIC ने इस दलील को खारिज करते हुए अपील स्वीकार कर ली। आयोग ने कहा कि भरण-पोषण से जुड़े मामलों में पति की आय की जानकारी सार्वजनिक हित से जुड़ी होती है और इसे पूरी तरह गोपनीय नहीं माना जा सकता।

महिलाओं के अधिकारों को मिलेगी मजबूती

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला भरण-पोषण मामलों में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करेगा। अब पति द्वारा आय छिपाने के मामलों में पत्नी को न्याय पाने में आसानी होगी और अदालतों को भी वास्तविक आर्थिक स्थिति का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी।

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जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, डोडा में 60 लोग सुरक्षित निकाले गए, 58 उड़ानें रद्द

जम्मू (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी ने एक बार फिर जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही बर्फबारी और फिसलन भरी परिस्थितियों के कारण कई अहम सड़कें बंद कर दी गई हैं, वहीं हवाई यातायात भी ठप हो गया है। सबसे बड़ी राहत की खबर डोडा जिले से सामने आई है, जहां सीमा सड़क संगठन (BRO) ने बर्फ में फंसे राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के 40 जवानों समेत कुल 60 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
डोडा जिले के भद्रवाह-चतरगला मार्ग पर स्थित चतरगला दर्रा, जो करीब 10,500 फीट की ऊंचाई पर है, भारी बर्फबारी के चलते पूरी तरह बंद हो गया था। यहां पांच से छह फीट तक बर्फ जम गई थी। इस दौरान 20 नागरिक और राष्ट्रीय राइफल्स के 40 जवान हथियारों और जरूरी सामान के साथ फंस गए थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए 35 सीमा सड़क कार्य बल (BRTF) की 118 सड़क निर्माण कंपनी (RCC) ने 24 जनवरी को युद्ध स्तर पर बचाव और सड़क बहाली अभियान शुरू किया।

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लगभग 38 किलोमीटर लंबी सड़क को लगातार 40 घंटे चली बर्फबारी के बाद साफ किया गया। कड़ी मेहनत और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद BRO ने 25 जनवरी की शाम तक मार्ग को आंशिक रूप से खोल दिया, जबकि 26 जनवरी की सुबह तक पूरा बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान में कोई हताहत नहीं हुआ।
🔹 कश्मीर घाटी में भारी बर्फबारी का असर मुगल रोड पर भी देखने को मिल रहा है। BRO पुंछ की 79 RCC द्वारा लगातार बर्फ हटाने का काम किया जा रहा है। फिलहाल पीर की गली के रास्ते पुंछ से कश्मीर और हीरपुर मार्ग से कश्मीर से पुंछ की ओर जाने वाला ट्रैफिक पूरी तरह रोक दिया गया है। फिसलन और खराब मौसम के चलते यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।

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🔹भारी बर्फबारी के कारण मंगलवार को श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आने-जाने वाली सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। अधिकारियों के अनुसार, रनवे को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही उड़ान संचालन दोबारा शुरू होगा। कुल 58 उड़ानें रद्द की गई हैं, जिनमें 29 आगमन और 29 प्रस्थान उड़ानें शामिल हैं। इससे सैकड़ों पर्यटक प्रभावित हुए हैं, जो सप्ताहांत और गणतंत्र दिवस की छुट्टियां बिताकर वापस लौटने वाले थे।
🔹प्रशासन ने मौसम को देखते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। सड़क बहाली और राहत कार्य लगातार जारी हैं ताकि हालात सामान्य किए जा सकें।

Budget Session 2026: राष्ट्रपति के संबोधन से शुरुआत, रविवार को बजट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। संसद के Budget Session 2026 की शुरुआत आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधन के साथ हो रही है। यह सत्र कई ऐतिहासिक कारणों से खास माना जा रहा है। देश के संसदीय इतिहास में पहली बार केंद्रीय बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा।

1 फरवरी को बनेगा संसदीय इतिहास

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी (रविवार) को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। अब तक परंपरा रही है कि बजट कार्यदिवस में ही प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन इस बार रविवार को बजट पेश कर सरकार नया इतिहास रचने जा रही है। सरकार ने 1 फरवरी को औपचारिक रूप से ‘बजट डे’ घोषित किया है।

हलवा सेरेमनी से शुरू हुई बजट प्रक्रिया

बजट से पहले पारंपरिक हलवा सेरेमनी का आयोजन नॉर्थ ब्लॉक में किया गया। इस कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। हलवा सेरेमनी को बजट तैयार करने की गोपनीय प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। इसके बाद बजट से जुड़े अधिकारी ‘लॉक-इन’ प्रक्रिया में चले जाते हैं।

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दो चरणों में होगा बजट सत्र

बजट सत्र को दो हिस्सों में आयोजित किया जाएगा।

पहला चरण: आज से 13 फरवरी 2026 तक

दूसरा चरण: 9 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक (संभावित)

पहले चरण के बाद सत्र को अस्थायी रूप से स्थगित किया जाएगा, जिसके दौरान संसदीय समितियां बजट प्रस्तावों की विस्तार से समीक्षा करेंगी।

लंबित विधेयकों पर भी रहेगी नजर

लोकसभा में फिलहाल नौ अहम विधेयक लंबित हैं। इनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025 और संविधान संशोधन विधेयक 2024 जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। बजट सत्र के दौरान इन विधेयकों पर भी चर्चा और निर्णय की संभावना है।

वैश्विक दबाव के बीच पेश होगा बजट

यह बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। अमेरिका की टैरिफ नीतियों, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अनिश्चितता का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार का आर्थिक रोडमैप बेहद अहम माना जा रहा है।

महंगाई नियंत्रण, रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे में निवेश और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने को लेकर इस बजट से बड़े फैसलों की उम्मीद की जा रही है। राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से यह बजट सरकार के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

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मदर ऑफ ऑल डील: भारत की आर्थिक कूटनीति का ऐतिहासिक मोड़

भारत और यूरोपीय संघ के बीच संपन्न ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ महाडील केवल एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी की बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक सोच, आर्थिक आत्मविश्वास और परिपक्व कूटनीति का स्पष्ट प्रमाण है। प्रधानमंत्री द्वारा इसे “मदर ऑफ ऑल डील” कहा जाना इसके दूरगामी प्रभाव और वैश्विक महत्व को रेखांकित करता है।
27 जनवरी को आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते की औपचारिक घोषणा के साथ-साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़े अहम समझौतों पर सहमति बनी। इससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत और यूरोपीय संघ अब केवल व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोगी के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।

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बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत-ईयू महाडील का महत्व
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की अस्थिरता, आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन और बढ़ते संरक्षणवाद से प्रभावित है। ऐसे समय में भारत-यूरोपीय संघ महाडील एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभरती है, जो बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण के लिए भी नई संभावनाएँ खोलती है।
प्रधानमंत्री द्वारा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की उपस्थिति में इस डील की घोषणा भारत की आर्थिक कूटनीति में आए आत्मविश्वासपूर्ण परिवर्तन को दर्शाती है। अधिकारियों के अनुसार कानूनी प्रक्रियाओं के बाद लगभग छह महीनों में एफटीए पर हस्ताक्षर होंगे और अगले वर्ष इसके लागू होने की संभावना है।
दशकों की वार्ता के बाद साकार हुआ ऐतिहासिक समझौता
भारत-ईयू एफटीए वर्षों की जटिल बातचीत का परिणाम है। टैरिफ, पर्यावरणीय मानक, श्रम कानून और नियमों को लेकर लंबे समय तक मतभेद बने रहे। लेकिन भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता और वैश्विक भूमिका ने यूरोप को यह स्वीकार करने पर मजबूर किया कि भारत केवल एक उभरता बाजार नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार है।
भारत के लिए यह समझौता इसलिए अहम है क्योंकि इससे उसे उच्च-मूल्य वाले यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुँच मिलेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उसकी भूमिका और मजबूत होगी।
सुरक्षा और रक्षा सहयोग: रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
भारत-यूरोपीय संघ महाडील का दूसरा अहम पक्ष सुरक्षा और रक्षा सहयोग है। दोनों पक्ष रक्षा ढांचा समझौते, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयासों और रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं।

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यूरोप, जो अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है, उसके लिए भारत एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक भागीदार के रूप में उभरा है। वहीं भारत को इस साझेदारी से उन्नत तकनीक, निवेश और वैश्विक मंच पर प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
प्रधानमंत्री की छह प्रमुख बातें: महाडील की आत्मा
प्रधानमंत्री द्वारा कही गई छह प्रमुख बातें इस समझौते की गहराई को स्पष्ट करती हैं—
साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट – यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास का आधार है।
भारत का सबसे बड़ा FTA – यूरोपीय संघ के साथ समझौता भारत को वैश्विक व्यापार मानचित्र में नई ऊँचाई पर ले जाता है।
किसानों और MSME को लाभ – भारतीय कृषि और लघु उद्योगों को यूरोपीय बाजारों तक सीधी पहुँच मिलेगी।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा – ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलेगा।
तीसरे देशों में संयुक्त परियोजनाएँ – इंडो-पैसिफिक से कैरेबियन तक त्रिपक्षीय सहयोग का विस्तार।
बहुपक्षवाद और वैश्विक संस्थानों में सुधार – संयुक्त राष्ट्र और WTO जैसे मंचों में सुधार की साझा प्रतिबद्धता।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की नई भूमिका
यह महाडील टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम कर भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी। तकनीक, पूंजी और बाजार की जरूरत वाले क्षेत्रों में यह समझौता मील का पत्थर साबित हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत-यूरोपीय संघ महाडील भारत को अमेरिका-चीन के बीच एक संतुलनकारी और नियम-आधारित शक्ति के रूप में स्थापित करती है।

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निष्कर्ष
समग्र रूप से देखें तो भारत-यूरोपीय संघ महाडील 21वीं सदी की बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक छलांग है। यह समझौता भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक वैश्विक नीति-निर्माता के रूप में स्थापित करता है। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव व्यापार, कूटनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन—तीनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। यही कारण है कि इसे “मदर ऑफ ऑल डील” कहना पूरी तरह सार्थक है।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

लूट का खुलासा, भदसामानोपुर रेलवे क्रासिंग से बदमाश दबोचे गए

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद मऊ में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना कोपागंज क्षेत्र के भदसामानोपुर रेलवे क्रासिंग के पास पुलिस ने दो शातिर व इनामी बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जो 13 जनवरी 2026 को सर्राफा व्यापारी से हुई लूट की घटना में वांछित चल रहे थे। दोनों अभियुक्तों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस अधीक्षक मऊ के निर्देश पर, अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी घोसी के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक रविन्द्रनाथ राय अपनी टीम के साथ काछीकला अंडरपास के पास संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि सर्राफा लूटकांड में वांछित बदमाश भदसामानोपुर रेलवे क्रासिंग के पास मोटरसाइकिल के साथ खड़े होकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में हैं।

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सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रेलवे क्रासिंग से पहले ही घेराबंदी कर दोनों बदमाशों को मौके से दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल कुमार पुत्र राजू राम, निवासी सुरहूरपुर (भुजही मोड़), थाना मोहम्मदाबाद गोहना तथा शिवम सोनकर पुत्र महेन्द्र सोनकर, निवासी हलीमाबाद, थाना मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद मऊ के रूप में हुई है।
तलाशी के दौरान विशाल कुमार के कब्जे से एक तमंचा 315 बोर, एक जिंदा कारतूस, 700 रुपये नकद, दो सफेद धातु की पायल और रियलमी कंपनी का मोबाइल फोन बरामद किया गया। वहीं, शिवम सोनकर के पास से दो सफेद धातु की पायल, 500 रुपये नकद और सैमसंग कंपनी का मोबाइल फोन बरामद हुआ।

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कड़ाई से पूछताछ में विशाल कुमार ने स्वीकार किया कि 13 जनवरी 2026 को उसने अपने साथी शिवम सोनकर और अन्य बदमाशों के साथ मिलकर टड़ियांव क्षेत्र में खाद गोदाम के पास हाईवे पर एक सर्राफा व्यापारी को तमंचा दिखाकर जेवरात और नकदी लूटी थी। पुलिस के अनुसार बरामद जेवरात और नकदी उसी लूट की घटना से संबंधित हैं।

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गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर थाना कोपागंज में मु0अ0सं0-37/2026, धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अभियुक्त विशाल कुमार के खिलाफ पहले से भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों आरोपियों को बरामद माल सहित माननीय न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया है।
पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अपराधियों में हड़कंप मच गया है और आम जनता ने पुलिस की तत्परता की सराहना की है।

शंकराचार्य प्रकरण पर सरकार से सार्वजनिक माफी की उठी मांग

शंकराचार्य अपमान व बटुकों पर पुलिस अत्याचार के विरोध में मऊ में हुआ बुद्धि-शुद्धि यज्ञ, सरकार से माफी की मांग

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य जी के कथित अपमान और बटुकों पर पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार के विरोध में मंगलवार को जनपद मऊ के कोपागंज स्थित ऐतिहासिक गौरीशंकर मंदिर परिसर में बुद्धि-शुद्धि यज्ञ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला कांग्रेस कमेटी मऊ के पूर्व महासचिव गौरव कुमार राय के आह्वान पर आयोजित हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की सद्बुद्धि की कामना की गई।

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कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ संपन्न कराया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, धार्मिक आस्थावान और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि शंकराचार्य जैसे सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु के साथ हुआ व्यवहार निंदनीय है और इससे पूरे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
सत्ता के अहंकार में धर्मगुरुओं का अपमान: गौरव कुमार राय
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौरव कुमार राय ने कहा कि योगी सरकार सत्ता के अहंकार में सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु का अपमान कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेल में बटुकों के साथ जिस प्रकार का दुर्व्यवहार किया गया, वह सरकार की धर्म-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि इस घटना से देशभर के सनातन धर्मावलंबियों में गहरा आक्रोश है।

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भाजपा केवल वोट की राजनीति करती है: उमाशंकर सिंह
वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमाशंकर सिंह ने कहा कि भाजपा हमेशा धर्म की आड़ में राजनीति करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुओं की भावनाओं को भड़काकर सत्ता हासिल करना भाजपा की पुरानी रणनीति रही है, जबकि जमीनी स्तर पर धर्मगुरुओं और धार्मिक परंपराओं का सम्मान नहीं किया जा रहा।
धर्म और ब्राह्मण विरोधी है सरकार: रत्नेश राय
जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष रत्नेश राय ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार का रवैया धर्म और ब्राह्मण समाज के प्रति विरोधपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी का अपमान और बटुकों पर पुलिसिया अत्याचार इसका स्पष्ट प्रमाण है।

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सार्वजनिक माफी की मांग
वरिष्ठ कांग्रेस नेता धर्मेंद्र सिंह ने सरकार से शंकराचार्य जी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सच में सनातन संस्कृति का सम्मान करती है, तो उसे अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।
कार्यक्रम में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अबसार अहमद, वीरेंद्र कुशवाहा, छोटेलाल, प्रकाश मौर्य, रोशन विश्वकर्मा, जितेंद्र चौहान, अमित चौहान सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता व स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।

तालिबान का नया कानून: अफगानिस्तान में गुलामी को मिली कानूनी मान्यता

अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने अपने नए कानून के जरिए एक बार फिर गुलामी जैसी अमानवीय प्रथा को कानूनी मान्यता दे दी है। तालिबान सरकार द्वारा लागू किए गए नए क्रिमिनल प्रोसीजर कोड फॉर कोर्ट ने देश में न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कानून के तहत न सिर्फ मौलवियों को कानूनी कार्रवाई से बाहर रखा गया है, बल्कि समाज को चार अलग-अलग वर्गों में बांट दिया गया है।
तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने 58 पन्नों वाले इस नए कानून को मंजूरी दी है। दस्तावेज़ में कई स्थानों पर “गुलाम (Slave)” और “मालिक (Master)” जैसे शब्दों का खुलकर इस्तेमाल किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें मौलवियों को समाज के शीर्ष पर रखा गया है।

मौलवियों पर नहीं चलेगा केस

नए कानून के अनुसार यदि कोई मौलवी अपराध करता है, तो उसके खिलाफ कोई एफआईआर या मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। मानवाधिकार संगठन रवादारी के मुताबिक, ऐसे मामलों में मौलवियों को केवल ‘सलाह’ दी जाएगी, जबकि आम नागरिकों को कठोर सजा का सामना करना पड़ेगा।

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निचले वर्ग के लिए कठोर दंड

तालिबान प्रशासन ने समाज को चार श्रेणियों — उलेमा, अशराफ, मध्यम वर्ग और निचला वर्ग — में विभाजित किया है। निचले वर्ग और गुलामों के लिए जेल, शारीरिक दंड और सख्त सजाओं का प्रावधान रखा गया है। यह व्यवस्था साफ तौर पर सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देती है।

हिंसा की नई परिभाषा

लंदन स्थित अफगान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, नए कानून में शारीरिक हिंसा को भी बेहद सीमित रूप में परिभाषित किया गया है। कानून कहता है कि जब तक हड्डी न टूटे या त्वचा न फटे, तब तक उसे हिंसा नहीं माना जाएगा। यहां तक कि पिता को अपने 10 वर्षीय बच्चे को नमाज न पढ़ने पर शारीरिक दंड देने की भी छूट दी गई है।

मानवाधिकार संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया

नेशनल रजिस्टेंस फ्रंट के मीडिया सेल ने कहा है कि तालिबान ने गुलामी को वैध बनाकर अफगान समाज को मध्ययुगीन दौर में धकेल दिया है। अब अदालतें आरोपियों की सामाजिक हैसियत के आधार पर फैसले सुनाएंगी, जो न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।

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