Thursday, June 11, 2026
Home Blog Page 210

जीवन सरल व सादा रखना है

मेलों की भीड़ में कितने भी हों,
पर पहचाने कोई कोई जाते हैं,
दुनिया में लाखों के मेले लगते हैं,
पर हंस उड़ते हैं तो अकेले उड़ते हैं।

संत और बसंत एक समान होते हैं,
जैसे जब संत का आगमन होता है,
तो हमारा समाज सुधर जाता है,
वसंत आने से संसार खिल जाता है।

किसी को क्षमा करने का यह अर्थ
नहीं होता कि उसे स्वीकार किया है,
न उसका व्यवहार स्वीकार होता है,
न उसका विश्वास किया जाता है।

उसे क्षमा इसलिए किया जाता है,
क्योंकि स्वयं को आगे बढ़ना है,
जीवन सरल व सादा रखना है,
आदित्य जटिलता रहित जीना है।

  • डॉ. कर्नल
    आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’

कोर्ट परिसर में हथियार और बम की धमकी, प्रशासन अलर्ट मोड में

पटना सिविल कोर्ट में हथियारबंद युवक गिरफ्तार, बिहार के 5 जिलों की सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में सिविल कोर्ट की सुरक्षा को लेकर एक साथ कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। पटना सिविल कोर्ट में हथियारबंद युवक गिरफ्तार होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार को दो युवक हथियार लेकर सिविल कोर्ट परिसर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन एंट्री गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने समय रहते उन्हें रोक लिया। जांच के दौरान एक युवक को हथियार के साथ पकड़ लिया गया, जबकि उसका साथी मौके से फरार हो गया।

ये भी पढ़ें – संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन: सामाजिक न्याय पर केंद्रित Budget Session 2026

पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार युवक से पूछताछ की जा रही है और फरार आरोपी की तलाश के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि युवक कोर्ट परिसर में किसी आपराधिक मंशा से घुसने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल पूरे पटना सिविल कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
बिहार के 5 जिलों में सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी
इसी बीच बिहार के 5 जिलों की सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। भागलपुर, सीवान, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर की सिविल कोर्ट को ई-मेल के जरिए धमकी दी गई।

ये भी पढ़ें – कौन थी पवार के प्लेन में जौनपुर की बेटी की जिसकी आसमान में टूटी उड़ान

भागलपुर में धमकी मिलने के बाद एसएसपी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों की सघन तलाशी ली गई। हालांकि, कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
सीवान में मामला और गंभीर तब हो गया जब एसपी और डीएम को सीधे धमकी भरा ई-मेल भेजा गया। इसके बाद दोपहर 12 बजे तक कोर्ट में आम लोगों और वकीलों की एंट्री रोक दी गई और व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

ये भी पढ़ें – बहेरवां टोला–परसिया मार्ग की बदहाली बनी ग्रामीणों की बड़ी पीड़ा, गड्ढों में तब्दील सड़क पर रोज हो रहे हादसे

मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और बेगूसराय में हाई अलर्ट
समस्तीपुर सिविल कोर्ट को भी ई-मेल से धमकी मिलने के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। एसपी स्वयं कोर्ट पहुंचे और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की।
मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट में धमकी के बाद पूरा परिसर खाली कराया गया। एसएसपी कांतेष कुमार मिश्रा ने बताया कि डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ता कोर्ट परिसर की बारीकी से जांच कर रहा है। इस मामले में धमकी भरे ई-मेल की जांच के लिए सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है।
बेगूसराय में भी सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जिला जज के निर्देश पर माइक से घोषणा कर सभी वकीलों, मुवक्किलों और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही हैं।

ये भी पढ़ें – एक घर, दो राय: बृजभूषण शरण सिंह के बेटे आमने-सामने

निष्कर्ष
पटना सिविल कोर्ट में हथियारबंद युवक गिरफ्तार होने की घटना और बिहार के 5 जिलों की सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी ने राज्य की न्यायिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जांच पूरी होने तक हाई अलर्ट जारी रहेगा।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में AI शिक्षा को बढ़ावा, एमएस-बीटेक-बीसीए में नए पाठ्यक्रम शुरू

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा को भविष्य की तकनीकी जरूरतों से जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय द्वारा एआई को शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास का केंद्र बनाते हुए व्यापक कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि एआई को केवल तकनीकी विषयों तक सीमित न रखते हुए सभी संकायों और पाठ्यक्रमों में समाहित किया जाए, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी एआई की बुनियादी समझ के साथ उसके व्यावहारिक उपयोग में भी दक्ष बन सके। कुलपति प्रो. पूनम टंडन के अनुसार पाठ्यक्रम संरचना में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे छात्र भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

गोरखपुर विश्वविद्यालय में एम.एस. (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और बी.सी.ए. स्तर पर एआई पाठ्यक्रम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। ये पाठ्यक्रम राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के सहयोग से संचालित हो रहे हैं और छात्रों को उद्योगोन्मुखी तकनीकी दक्षता प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने बी.टेक. (Artificial Intelligence) कार्यक्रम की भी शुरुआत की है, जो आधुनिक रोजगार बाजार की मांगों के अनुरूप तैयार किया गया है।

कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्यार्थी स्वयं (SWAYAM) प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआई से जुड़े विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भी पंजीकरण कर रहे हैं। इससे छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिल रहा है।

प्रधानमंत्री उषा योजना (PM-USHA) के तहत विश्वविद्यालय परिसर में एक अत्याधुनिक एआई लैब की स्थापना की जा रही है। यह लैब प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की क्षमताओं को नई दिशा देगी और छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने का मंच उपलब्ध कराएगी।

ये भी पढ़ें – ईरान की ओर बढ़ा अमेरिकी नौसेना का बेड़ा, ट्रंप के बयान से वैश्विक युद्ध की आशंका बढ़ी

इसी क्रम में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित “एआई मंथन-2026 : उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में चुनौतियाँ और अवसर” कार्यक्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय की टीम ने कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में प्रभावी भागीदारी की। इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा में एआई की भूमिका, प्रशासनिक सुधार और शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।

तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने एआई टूल्स, जेनरेटिव एआई, साइबर सुरक्षा, परीक्षा मूल्यांकन और छात्र सहायता सेवाओं में एआई के उपयोग जैसे विषयों पर विचार साझा किए। उद्योग विशेषज्ञों के साथ पैनल चर्चा में विश्वविद्यालयों में एआई आधारित सुविधाओं के विकास और अनुसंधान सहयोग पर विशेष जोर दिया गया।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान और भविष्य की शिक्षा का आधार है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि एआई को सभी पाठ्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए, जिससे विद्यार्थी बदलते तकनीकी परिदृश्य में स्वयं को सक्षम और प्रतिस्पर्धी बना सकें।

Read this: https://ce123steelsurvey.blogspot.com/2025/10/compass-survey-200-jeae-200-je-ae.html?m=1#google_vignette

ईरान की ओर बढ़ा अमेरिकी नौसेना का बेड़ा, ट्रंप के बयान से वैश्विक युद्ध की आशंका बढ़ी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर युद्ध की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है।

यह बयान ट्रंप ने मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को अमेरिका के आयोवा राज्य के क्लाइव शहर में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए दिया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी सैन्य शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि एक “खूबसूरत आर्माडा” इस समय ईरान की ओर बढ़ रही है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि ईरान किसी समझौते के लिए आगे आए।

अपने भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि जून 2025 में अमेरिका ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, जिससे उसकी परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। हालांकि, इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कितना नुकसान हुआ, इस पर अब भी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में मतभेद बने हुए हैं।

गौरतलब है कि अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) को एकतरफा तौर पर रद्द कर दिया था और इसके बाद ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे। इन प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा था।

अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई की, तो उसे “भारी और पछतावे वाली प्रतिक्रिया” का सामना करना पड़ेगा।

ये भी पढ़ें – Ajit Pawar Plane Crash के बाद Jaipur में Air India Landing फेल

ईरान की राजधानी तेहरान में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। वहां एक विशाल होर्डिंग लगाया गया है, जिसमें एक अमेरिकी विमानवाहक पोत को नष्ट अवस्था में दिखाया गया है। होर्डिंग पर फारसी और अंग्रेजी में लिखा है— “अगर तुम हवा बोओगे, तो तूफान काटोगे।”

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत और उसके साथ कई मिसाइलों से लैस युद्धपोत हाल ही में मध्य पूर्व क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। इससे इलाके में हजारों अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी और बढ़ गई है।

हालांकि ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह सैन्य तैनाती “सिर्फ एहतियात के तौर पर” की गई है और इसका इस्तेमाल जरूरी नहीं कि किया ही जाए।

इसी बीच ईरान के अंदर सरकार विरोधी प्रदर्शनों की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों और सुरक्षा कार्रवाई में 6,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक शामिल हैं।

Read this: https://ce123steelsurvey.blogspot.com/2025/10/compass-survey-200-jeae-200-je-ae.html?m=1#google_vignette

Ajit Pawar Plane Crash के बाद Jaipur में Air India Landing फेल

जयपुर/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे के कुछ ही घंटों बाद एक और विमान घटना सामने आने से हड़कंप मच गया। बुधवार, 28 जनवरी 2026 को दिल्ली से Jaipur जा रहे एयर इंडिया के विमान AI-1719 की जयपुर एयरपोर्ट पर पहली लैंडिंग असफल हो गई। विमान में पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा सवार थे। हालांकि दूसरी कोशिश में विमान की सुरक्षित लैंडिंग करा ली गई और सभी यात्री सुरक्षित हैं।

पहली लैंडिंग क्यों हुई फेल?

एयर इंडिया का विमान दोपहर करीब 1:05 बजे जयपुर एयरपोर्ट पर उतारने का प्रयास किया गया। जैसे ही विमान रनवे को छूने वाला था, पायलट ने स्थिति को असुरक्षित मानते हुए तुरंत गो-अराउंड का फैसला लिया।
एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक, पहली कोशिश के दौरान अनस्टेबल अप्रोच की स्थिति बन गई थी। संभावित कारणों में रनवे कंडीशन या तकनीकी समस्या बताई जा रही है।

दूसरी कोशिश में सुरक्षित लैंडिंग

पहली असफल लैंडिंग के बाद विमान लगभग 10 मिनट तक हवा में चक्कर लगाता रहा। इसके बाद पायलट ने दूसरी बार प्रयास किया, जिसमें विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। एयर इंडिया ने पुष्टि की है कि विमान में सवार सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं।
इस घटना में सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

क्या होता है गो-अराउंड?

एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, गो-अराउंड एक मानक सुरक्षा प्रक्रिया है।
जब पायलट को किसी भी कारण से लैंडिंग सुरक्षित नहीं लगती—जैसे खराब रनवे, मौसम या तकनीकी दिक्कत—तो वह विमान को दोबारा हवा में ले जाता है। इसे ही गो-अराउंड कहा जाता है और इसे यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।

ये भी पढ़ें – UGC बिल के विरोध में सलेमपुर में सवर्ण समाज का जोरदार प्रदर्शन, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा

कुछ घंटे पहले हुआ था अजित पवार का प्लेन क्रैश

इसी दिन सुबह महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का चार्टर्ड विमान Learjet 45 पुणे जिले के बारामती में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
विमान में अजित पवार सहित कुल 5 लोग सवार थे, जिनकी इस हादसे में मौत हो गई। विमान रनवे से फिसलकर आग की चपेट में आ गया था।
अजित पवार मौजूदा सरकार में वित्त और योजना मंत्री थे और फरवरी में होने वाले बजट सत्र में 2026-27 का बजट पेश करने वाले थे।
अजित पवार के विमान हादसे और उसके कुछ घंटों बाद जयपुर में हुई यह घटना देशभर में विमान सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

Read this: https://ce123steelsurvey.blogspot.com/search/label/AE%20exam?m=1

UGC बिल के विरोध में सलेमपुर में सवर्ण समाज का जोरदार प्रदर्शन, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा

0

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
UGC बिल के विरोध में मंगलवार को सलेमपुर नगर में सवर्ण समाज के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में एकत्रित प्रदर्शनकारियों ने भारत के महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसील प्रशासन के माध्यम से सौंपते हुए इस बिल को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान “योगी मोदी होश में आओ” जैसे नारे भी लगाए गए।

इसे भी पढ़ें –महराजगंज पुलिस का हाईटेक कंट्रोल रूम बना अपराध नियंत्रण की मजबूत कड़ी


सुबह से ही सलेमपुर डाक बंगले परिसर में सवर्ण समाज के लोग एकत्र होने लगे। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में लोग नारेबाजी करते हुए सोहनाग मोड़, गांधी चौक होते हुए सलेमपुर तहसील पहुंचे, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सलेमपुर प्रभारी निरीक्षक महेंद्र कुमार चतुर्वेदी पुलिस बल के साथ मौके पर उपस्थित रहे।


सभा में वक्ताओं ने UGC बिल को उच्च शिक्षा, छात्रों और शिक्षकों के हितों के खिलाफ बताया। वक्ताओं का कहना था कि यह बिल भले ही उच्च शिक्षा में सुधार के उद्देश्य से लाया गया हो, लेकिन इसके प्रावधान समाज को बांटने वाले हैं। उनका आरोप था कि UGC बिल में सामान्य वर्ग के छात्रों के प्रति भेदभाव है और इसमें जातिगत भेदभाव की परिभाषा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।
उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के हितों के लिए बिल में किसी प्रकार का ठोस प्रतिनिधित्व नहीं है। आशंका जताई गई कि इस बिल का दुरुपयोग कर सामान्य वर्ग के छात्रों को प्रताड़ित किया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय एकता भी प्रभावित हो सकती है। साथ ही यह बिल सामान्य वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
सभा के पश्चात महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार सलेमपुर अलका सिंह को सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि राष्ट्रपति सरकार को निर्देशित करें कि UGC बिल को वापस लिया जाए और सभी वर्गों के छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रदर्शन के दौरान एक भाजपा नेता विशेष रूप से चर्चा में रहे, जो हाथ में चूड़ियां और सिर पर कफन के प्रतीकात्मक रूप में धोती बांधकर सभा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे संसद में गए सवर्ण समाज के सांसदों के लिए चूड़ियां और कफन लेकर आए हैं।
इस प्रदर्शन में डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र, नरसिंह तिवारी, सौरभ पांडेय, उमेश तिवारी, अमित सिंह, शिवाकांत तिवारी, नवीन तिवारी, प्रतीक कुमार मिश्रा, वाचस्पति त्रिपाठी, शैलेंद्र सिंह, नितिन सिंह, अशोक पांडेय, सल्टू पांडेय सहित बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग शामिल रहे।

एक घर, दो राय: बृजभूषण शरण सिंह के बेटे आमने-सामने

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देशभर में यूजीसी के नए नियमों को लेकर जबरदस्त बवाल मचा हुआ है। खासकर सवर्ण समाज का विरोध अब सड़क से लेकर सियासी गलियारों तक पहुंच चुका है। छात्र संगठनों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने भी यूजीसी के नए नियमों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इस बीच सत्तारूढ़ दल भाजपा के भीतर भी इस मुद्दे पर असहजता साफ दिखाई देने लगी है।
सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब भाजपा के कद्दावर और बाहुबली नेता रहे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के दोनों बेटे इस मुद्दे पर आमने-सामने खड़े नजर आए। एक ओर विधायक बेटे ने यूजीसी के नए नियमों का खुला विरोध किया, तो दूसरी ओर सांसद बेटे ने इन्हीं नियमों का समर्थन कर दिया।
🔹 विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने क्यों जताया विरोध
भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सवर्ण समाज की नाराजगी को जायज ठहराते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियम पारंपरिक सामाजिक संतुलन और अवसरों को प्रभावित कर सकते हैं। उनका मानना है कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों में असंतोष बढ़ा है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
प्रतीक भूषण सिंह ने साफ संकेत दिए कि वे अपने क्षेत्र की सामाजिक भावना के साथ खड़े हैं और सवर्ण समाज विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
🔹 सांसद करण भूषण सिंह नियमों के पक्ष में
वहीं दूसरी ओर, भाजपा सांसद करण भूषण सिंह का रुख बिल्कुल उलट है। वे उस संसदीय कमेटी के सदस्य रहे हैं, जिसने यूजीसी के नए नियमों के मसौदे को तैयार किया। करण भूषण सिंह का कहना है कि ये नियम उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, पारदर्शिता लाने और लंबे समय में छात्रों के हित में हैं।
उनके अनुसार, विरोध से ज्यादा जरूरी है नियमों की सही जानकारी और उनके दूरगामी लाभों को समझना।
🔹 भाजपा के लिए बढ़ी असहजता
एक ही परिवार के भीतर दो विपरीत राय ने भाजपा को भी असहज कर दिया है। जहां एक ओर पार्टी सरकार में रहते हुए यूजीसी के नए नियमों का बचाव कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर भाजपा नेताओं को सवर्ण समाज विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह विवाद आने वाले समय में पार्टी की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
🔹 सियासत से आगे सामाजिक संदेश
बृजभूषण शरण सिंह के बेटों का यह मतभेद सिर्फ पारिवारिक नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि यूजीसी के नए नियम किस कदर समाज और राजनीति को दो हिस्सों में बांट रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विरोध को कैसे संभालती है और क्या नियमों में कोई संशोधन होता है।

महराजगंज पुलिस का हाईटेक कंट्रोल रूम बना अपराध नियंत्रण की मजबूत कड़ी

0

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।जिले में अपराध नियंत्रण और कानून- व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महराजगंज पुलिस लगातार तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने पुलिस कार्यालय स्थित जनपदीय सीसीटीवी कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कंट्रोल रूम में स्थापित सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम की कार्यप्रणाली, कवरेज,कैमरों की स्पष्टता और तकनीकी स्थिति की गहन समीक्षा की।
पुलिस अधीक्षक ने कंट्रोल रूम में उपलब्ध संसाधनों, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सतर्कता और कार्यशैली का बारीकी से जायजा लिया। साथ ही विभिन्न रजिस्टरों एवं सूचना पंजिकाओं का अवलोकन कर निर्देश दिया कि जिले भर से प्राप्त होने वाली हर छोटी-बड़ी सूचना को बिना देरी के दर्ज किया जाए और तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाए।

सेवा समिति के शैक्षिक संस्थानों में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति के साथ मनाया गया
एसपी ने शहर के प्रमुख चौराहों, संवेदनशील स्थलों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में लगे कैमरों की लाइव फीड देखी। उन्होंने तकनीकी ऑपरेटरों को सख्त निर्देश दिए कि सभी सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे सक्रिय और कार्यशील रहें। यदि किसी कैमरे में तकनीकी खराबी आती है तो उसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग को भेजकर उसे शीघ्र ठीक कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने कहा कि संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखना और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में निकटतम पीआरवी को तुरंत मौके पर भेजना प्राथमिकता होनी चाहिए। सूचना के आदान-प्रदान में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि पुलिस की सक्रियता ही अपराध नियंत्रण की पहली सीढ़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईटेक सीसीटीवी कंट्रोल रूम का मुख्य उद्देश्य जिले में कहीं भी घटना होने पर त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स सुनिश्चित करना है, ताकि आमजन को सुरक्षा और सहायता का भरोसा मिल सके। उन्होंने कहा कि तकनीक के बेहतर और प्रभावी इस्तेमाल से अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ जिले की कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा।

बहेरवां टोला–परसिया मार्ग की बदहाली बनी ग्रामीणों की बड़ी पीड़ा, गड्ढों में तब्दील सड़क पर रोज हो रहे हादसे

0

2026-27 की कार्ययोजना में पक्की सड़क निर्माण का मिला आश्वासन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर विकास खंड एवं तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत बागापार अंतर्गत बहेरवा टोला से परसिया तक जाने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग वर्षों से बदहाली का दंश झेल रहा है। गड्ढों, ऊबड़-खाबड़ सतह और टूटे हिस्सों से जूझती यह सड़क अब ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं बल्कि दुर्घटनाओं का रास्ता बन चुकी है। हालत यह है कि इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर आए दिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक स्थायी समाधान नहीं कर सका।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग क्षेत्र की अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है, जिससे प्रतिदिन हजारों लोग जिला मुख्यालय महराजगंज सहित आस-पास के क्षेत्रों में आवागमन करते हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है। बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति और भयावह हो जाती है—कीचड़, जलजमाव और फिसलन से निकलना दूभर हो जाता है। कई बार एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है।
इस गंभीर जनहित के मुद्दे को लेकर ग्राम पंचायत बागापार निवासी समाजसेवी उमेश चन्द्र मिश्र ने संबंधित विभाग को प्रार्थना पत्र देकर बहेरवा टोला से परसिया तक पक्की सड़क निर्माण की मांग उठाई थी। प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया कि सड़क की जर्जर स्थिति न केवल आमजन के लिए परेशानी का कारण है, बल्कि इससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
इस मामले में सहायक अभियंता रामनरेश मौर्य ने बताया कि उक्त मार्ग के नव निर्माण को वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में शामिल कर लिया गया है। प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सड़क निर्माण कार्य कराया जाएगा। विभागीय स्तर पर दिए गए इस आश्वासन से ग्रामीणों में कुछ उम्मीद जगी है, हालांकि अब भी लोगों के मन में संशय बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी कई बार केवल कागजी आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया, लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हुआ। लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता पर लेते हुए तय समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाए, ताकि वर्षों से झेल रहे कष्ट से उन्हें निजात मिल सके और क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।

कौन थी पवार के प्लेन में जौनपुर की बेटी की जिसकी आसमान में टूटी उड़ान

बारामती हेलीकॉप्टर क्रैश: उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन, यूपी की पिंकी माली समेत 5 लोगों की मौत

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) आज का दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक ऐसा काला दिन बन गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन हो गया। यह दर्दनाक हादसा उसी बारामती क्षेत्र में हुआ, जिसे पवार परिवार की राजनीतिक कर्मभूमि माना जाता है।
इस बारामती हेलीकॉप्टर क्रैश में उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई। हेलीकॉप्टर में सवार सभी लोग इस हादसे में जान नहीं बचा सके। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर पूरी तरह जलकर खाक हो गया, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भी भारी मुश्किलें आईं।

ये भी पढ़ें – बारामती में विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत

हादसे में यूपी की पिंकी माली की भी मौत
इस हादसे में जिस नाम ने लोगों का ध्यान खींचा, वह है पिंकी माली। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिंकी माली उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की रहने वाली थीं और हेलीकॉप्टर में एयरक्राफ्ट स्टाफ के रूप में तैनात थीं।
बताया जा रहा है कि पिंकी माली जौनपुर की केराकत तहसील से ताल्लुक रखती थीं। यह उनका चौथा मौका था जब वह अजित पवार के साथ यात्रा कर रही थीं। इससे पहले भी वह कई वीआईपी उड़ानों का हिस्सा रह चुकी थीं।
पिंकी माली के पिता ने सुनाई आखिरी बातचीत की कहानी,टीवी मीडिया से बातचीत में पिंकी माली के पिता ने बताया कि उनकी बेटी से आखिरी बातचीत एक दिन पहले हुई थी। पिंकी ने फोन पर बताया था कि वह अजित पवार के साथ बारामती जा रही है और वहां से उन्हें छोड़कर नांदेड़ के लिए रवाना होगी।
पिता ने कहा,“मैंने कहा था कि सुबह बात करेंगे, लेकिन फिर कभी बात नहीं हो पाई। सुबह परिजनों ने हादसे की खबर दी और टीवी पर सब साफ हो गया।”

ये भी पढ़ें – छह बार उपमुख्यमंत्री रहे Ajit Pawar का निधन, महाराष्ट्र की राजनीति में खालीपन

पिंकी माली का प्रोफेशनल करियर
पिंकी माली पिछले 5 वर्षों से प्राइवेट चार्टर्ड फ्लाइट्स में काम कर रही थीं। वह इससे पहले एयर इंडिया में भी अपनी सेवाएं दे चुकी थीं। पिंकी राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उड़ान भर चुकी थीं, जिससे उनके अनुभव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
राजनीति और प्रशासन में शोक की लहर
अजित पवार हेलीकॉप्टर हादसा की खबर सामने आते ही महाराष्ट्र समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं।

संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन: सामाजिक न्याय पर केंद्रित Budget Session 2026

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संसद के संयुक्त सत्र को संबोधन के साथ हुई। अपने प्रभावशाली भाषण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और विकसित भारत के लक्ष्य को केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। यह संबोधन 18वीं लोकसभा के सातवें सत्र और राज्यसभा के 270वें सत्र के उद्घाटन अवसर पर हुआ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उन्हें संसद को संबोधित करते हुए गर्व और प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने पिछले वर्ष को भारत की तीव्र प्रगति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक बताया। राष्ट्रपति ने वंदे मातरम के 150 वर्ष, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और सरदार पटेल की 150वीं जयंती जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्मरणोत्सवों ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत किया है।

ये भी पढ़ें – छह बार उपमुख्यमंत्री रहे Ajit Pawar का निधन, महाराष्ट्र की राजनीति में खालीपन

सामाजिक न्याय पर जोर देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रतिपादित समानता और न्याय के मूल्य ही भारतीय संविधान की आत्मा हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रत्येक नागरिक को बिना भेदभाव के समान अधिकार मिलना चाहिए और उनकी सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, जो सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
Budget Session 2026 के अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच में हुए बड़े विस्तार को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ केवल 25 करोड़ लोगों तक सीमित था, जबकि आज लगभग 95 करोड़ नागरिक इन योजनाओं से जुड़े हैं। यह बदलाव दलितों, पिछड़ों, आदिवासी समुदायों और समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ये भी पढ़ें – कोर्ट को उड़ाने की धमकी से भागलपुर अलर्ट, एंटी बम स्क्वॉड तैनात

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मनरेगा के स्थान पर लाए गए नए कानून ‘विकसित भारत-जी-आरएएम जी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार और विकास को नई दिशा देगा। इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। हालांकि इस मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली।
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियों ने देश को मजबूत आधार प्रदान किया है और आने वाला समय विकसित भारत के सपने को साकार करने का है। Budget Session 2026 का यह संबोधन सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता और भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा को दर्शाता है।

छह बार उपमुख्यमंत्री रहे Ajit Pawar का निधन, महाराष्ट्र की राजनीति में खालीपन

महाराष्ट्र की राजनीति के मजबूत स्तंभ अजित पवार का विमान हादसे में निधन


मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)महाराष्ट्र की राजनीति को 28 जनवरी 2026 को गहरा झटका लगा, जब अजित पवार का बारामती में विमान लैंडिंग के दौरान हुए हादसे में निधन हो गया। 66 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले अजित पवार न सिर्फ एक अनुभवी नेता थे, बल्कि वे उन गिने-चुने राजनेताओं में शामिल थे जिन्होंने विरासत के बावजूद अपनी अलग पहचान खुद बनाई। Ajit Pawar Death News ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
अजित पवार, भारतीय राजनीति के दिग्गज शरद पवार के भतीजे थे, लेकिन उन्होंने कभी अपने चाचा की राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं किया। उनका जीवन संघर्ष, मेहनत और जमीन से जुड़ी राजनीति की मिसाल रहा। कॉलेज के दिनों में ही उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पढ़ाई छोड़कर उन्होंने जीवन की चुनौतियों का सामना किया और राजनीति को अपना माध्यम बनाया।
बारामती क्षेत्र से उनका जुड़ाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी था। उस दौर में जब बारामती के किसान गंभीर संकट से जूझ रहे थे, अजित पवार ने किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उन्होंने किसानों की समस्याओं को अपनी समस्याएं माना और इसी वजह से वे एक सच्चे जननेता के रूप में उभरे। यही कारण है कि Ajit Pawar Death News बारामती ही नहीं, पूरे महाराष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति मानी जा रही है।

ये भी पढ़ें – कोर्ट को उड़ाने की धमकी से भागलपुर अलर्ट, एंटी बम स्क्वॉड तैनात

अजित पवार ने वर्ष 1982 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बारामती विधानसभा क्षेत्र से रिकॉर्ड 7 बार चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। 1991 में उन्होंने बारामती लोकसभा सीट से जीत दर्ज की, लेकिन यह सीट उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी। यह फैसला उनके राजनीतिक चरित्र और पारिवारिक मूल्यों को दर्शाता है।
उनका मंत्री और उपमुख्यमंत्री के तौर पर कार्यकाल बेहद प्रभावशाली रहा। 1991-92 में सुधाकर राव नाइक सरकार में वे कृषि और बिजली राज्य मंत्री रहे। 1992 में शरद पवार के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें मृदा संरक्षण, बिजली और योजना विभाग की जिम्मेदारी मिली। 1999 में वे सिंचाई मंत्री बने और 2003 में ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में कार्य किया। जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने कई बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया।
अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेता थे। वे कुल छह बार उपमुख्यमंत्री बने और पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे जैसे मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया। उनका मंत्र था—“कम बोलो, ज्यादा काम करो।” यही सोच उन्हें जनता के बीच खास बनाती थी।
आज Ajit Pawar Death News के साथ महाराष्ट्र ने एक कर्मठ, जमीनी और परिणाम देने वाले नेता को खो दिया है। उनकी राजनीति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

कोर्ट को उड़ाने की धमकी से भागलपुर अलर्ट, एंटी बम स्क्वॉड तैनात

भागलपुर सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, आधिकारिक ई-मेल से भेजा गया संदेश, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट


भागलपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रशासनिक और न्यायिक महकमे में हड़कंप मच गया है। यह धमकी सीधे जजशिप की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भेजी गई, जिसे बेहद गंभीर माना जा रहा है। मामले की सूचना मिलते ही कोर्ट प्रशासन ने पुलिस और जिला प्रशासन को तत्काल अवगत कराते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की मांग की है।
ई-मेल के जरिए दी गई धमकी, कोर्ट प्रशासन सतर्क
बुधवार (28 जनवरी) को सिविल कोर्ट भागलपुर के प्रशासनिक प्रभारी ने जिलाधिकारी (DM), वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) भागलपुर और एसपी नवगछिया को लिखित रूप से जानकारी दी। पत्र में स्पष्ट किया गया कि भागलपुर सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी ई-मेल के माध्यम से दी गई है और इसे अत्यंत संवेदनशील मामला मानते हुए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
एंटी बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की मांग
कोर्ट प्रशासन ने पत्र में मांग की है कि—एंटी बम स्क्वॉड से पूरे न्यायालय परिसर की गहन जांच कराई जाए।एंटी-सैबोटेज टीम को तैनात किया जाए।स्निफिंग डॉग टीम के जरिए चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जाए।कोर्ट परिसर के भीतर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती हो।ताकि किसी भी संभावित अनहोनी को समय रहते रोका जा सके।न्यायिक अधिकारियों और बार एसोसिएशन को भी सूचना। इस गंभीर धमकी की जानकारी जज-इन-चार्ज नवगछिया और कहलगांव, जिला बार एसोसिएशन के सचिव सहित अन्य संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है। अधिवक्ताओं और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

ये भी पढ़ें – प्रशासनिक अनदेखी से बेलभरियां में जल निकासी ठप, बढ़ा बीमारियों का खतरा

पुलिस और जांच एजेंसियां अलर्ट मोड में
भागलपुर सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी सामने आते ही पुलिस, खुफिया और जांच एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं। कोर्ट परिसर के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
साइबर सेल कर रही है ई-मेल की जांच
साइबर सेल की विशेष टीम धमकी भरे ई-मेल की तकनीकी जांच में जुट गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि—
ई-मेल किस लोकेशन से भेजा गया।किस सर्वर और आईपी एड्रेस का इस्तेमाल हुआ।मेल भेजने वाले की पहचान क्या है। प्राथमिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि यह किसी शरारती तत्व की हरकत है या इसके पीछे कोई संगठित साजिश।
कोर्ट परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा
एहतियातन कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। वाहनों की चेकिंग, आईडी वेरिफिकेशन और सुरक्षा गेट्स पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
प्रशासन ने साफ किया है कि न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक अनदेखी से बेलभरियां में जल निकासी ठप, बढ़ा बीमारियों का खतरा

🔴 बेलभरियां में प्रशासनिक लापरवाही से बिगड़े हालात, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में ग्रामीण


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।सदर तहसील क्षेत्र के मिठौरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलभरियां में प्रशासनिक उदासीनता के चलते हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। गांव की सार्वजनिक नालियों को पाट दिए जाने और ग्राम सभा की कीमती भूमि पर अवैध कब्जों के कारण जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नतीजतन घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे गांव में गंदगी, दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बेलभरियां नाली समस्या अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बन चुकी है। कई बार तहसील, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे अवैध कब्जाधारियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।

ये भी पढ़ें – बारामती में विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत

ग्राम सभा भूमि पर अवैध कब्जा बना बड़ी समस्या
शिकायतकर्ता अयोध्या प्रसाद पुत्र स्वर्गीय शुभग ने बताया कि गांव की कई सार्वजनिक नालियां पूरी तरह पाट दी गई हैं। इसके साथ ही खलिहान, बंजर भूमि, खाद गड्ढा, छवर और पोखरी जैसी ग्राम सभा की जमीन पर अवैध कब्जा वर्षों से बना हुआ है। इससे न केवल जल निकासी बाधित हुई है, बल्कि गांव की मूल संरचना भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने सफाई कर्मियों, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और एडीओ पंचायत की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण ही अवैध कब्जों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बेलभरियां प्रशासनिक लापरवाही का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है।

ये भी पढ़ें – पटना में अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती, 81 लोगों को नोटिस

बरसात में हालात और भयावह
जल जमाव के कारण गांव की सड़कों पर कीचड़, गंदगी और फिसलन बनी रहती है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीणों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

ये भी पढ़ें – भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: अमेरिका में बढ़ी बेचैनी

हाईकोर्ट जाने का फैसला
लगातार अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब हाईकोर्ट इलाहाबाद में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। अयोध्या प्रसाद के साथ ममता, गीता, सुनीता, महेश, पिंकी, प्रेम, मुन्नी, जीउत और लल्लन सहित कई ग्रामीण एकजुट होकर इस कानूनी लड़ाई में शामिल हैं। याचिका में जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही नालियों को खुलवाकर ग्राम सभा की भूमि से अवैध कब्जे नहीं हटाए गए, तो यह मामला कानून के रास्ते और भी गंभीर रूप लेगा। बेलभरियां नाली समस्या अब प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन चुकी है।

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: अमेरिका में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक करार को “मदर ऑफ ऑल डील” नाम दिया गया है। दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ यह समझौता भारत के लिए आर्थिक के साथ-साथ भू-राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका के दबाव के बीच बड़ा कदम

यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की थी। ऐसे माहौल में यूरोपीय संघ के साथ भारत का यह करार दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपने रणनीतिक विकल्प खुद तय कर रहा है। इस डील के बाद अमेरिका में बेचैनी साफ तौर पर देखी जा रही है।

क्यों ऐतिहासिक है भारत–EU FTA

भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते पर कई वर्षों से बातचीत चल रही थी। इस डील से—

• भारत को यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी

• निर्यात और विदेशी निवेश में बढ़ोतरी होगी

• रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे

• व्यापारिक शुल्क कम होंगे और सप्लाई चेन मजबूत होगी

• टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी में सहयोग बढ़ेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत चीन पर निर्भरता कम कर पाएगा और खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करेगा।

ये भी पढ़ें – पटना में अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती, 81 लोगों को नोटिस

अमेरिका की नाराजगी, टैरिफ में राहत से इनकार

भारत-EU समझौते के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया सख्त रही है। ट्रंप प्रशासन के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा है कि भारत को अमेरिका की ओर से टैरिफ में फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी।
फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में ग्रीर ने कहा कि रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की चिंताएं अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने माना कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कुछ हद तक कम की है, लेकिन पूरी तरह इससे अलग होना फिलहाल संभव नहीं है।

रूसी तेल पर बदला अमेरिका का रुख

ग्रीर का यह बयान अमेरिका के पहले के दावों से अलग है। इससे पहले ट्रंप प्रशासन और खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह कह चुके थे कि भारत ने रूस से तेल खरीद लगभग बंद कर दी है।
हाल ही में दावोस इकोनॉमिक फोरम में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया था कि भविष्य में भारत को टैरिफ में राहत मिल सकती है, लेकिन ताजा बयान से साफ है कि अमेरिका फिलहाल दबाव की रणनीति जारी रखना चाहता है।

Read this: https://ce123steelsurvey.blogspot.com/2025/10/compass-survey-200-jeae-200-je-ae.html?m=1#google_vignette