Friday, March 13, 2026
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डीडीयू विश्वविद्यालय ने घोषित किया विभिन्न पाठ्यक्रमों का सेमेस्टर परिणाम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा बी.फार्मा तृतीय सेमेस्टर, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर, बी.बी.ए. तृतीय सेमेस्टर, बी.कॉम तृतीय सेमेस्टर, बी.कॉम (बैंकिंग एंड इंश्योरेंस) तृतीय सेमेस्टर, बी.जे.एम.सी. तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर, बी.पी.एड. तृतीय सेमेस्टर, बी.एससी कृषि पंचम एवं सप्तम सेमेस्टर, बी.एससी तृतीय सेमेस्टर, एम.ए. प्राचीन इतिहास तृतीय सेमेस्टर, एम.ए. अंग्रेजी तृतीय सेमेस्टर तथा एम.ए./एम.एससी सांख्यिकी तृतीय सेमेस्टर सत्र 2025-26 का परीक्षाफल घोषित कर दिया गया है।
उक्त परीक्षाफल विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय आधिकारिक वेबसाइट (www.ddugu.ac.in) पर अपलोड कर दिया गया है। परीक्षार्थी वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं।

भारतीय ज्ञान परंपरा में लोक और शास्त्र का अद्भुत समन्वय: प्रो. अनामिका राय

ज्ञान से भारतीयता परिभाषित होती है, भारतीयता से ज्ञान नहीं: प्रो. अनामिका राय

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग में राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘पुरातत्व एवं साहित्य के आलोक में भारतीय ज्ञान परंपरा’ के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज की स्कॉलर एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अनामिका राय ने कहा कि रामचरितमानस हमारी सामाजिक परंपरा और इतिहास दोनों का प्रतिबिंब है। कालिदास और अभिनव गुप्त का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में सृजन निरंतरता का रूप है, जिसमें नवीनता परंपरा के भीतर से ही उद्भासित होती है।
यक्षिणी मूर्तियों के संदर्भ में भरहुत, सांची और अमरावती के कलाकारों की प्रेरणा पर प्रश्न उठाते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को लंबे समय तक उपनिवेशवादी दृष्टि से देखा गया। भारतीय ज्ञान परंपरा में लोक और शास्त्र परस्पर घुले-मिले हैं; केवल संगीत में भेद स्पष्ट दिखता है, अन्यथा दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। शास्त्रों में मूर्ति निर्माण हेतु पत्थरों की विशेषताओं का उल्लेख है और मूर्ति के नेत्र को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
प्रो. राय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्रतीकों की परंपरा है। ‘वूमेन स्टडी’ भले पश्चिम में नई अवधारणा हो, किंतु भारत में स्त्री विमर्श प्राचीन काल से विद्यमान रहा है। तमिलनाडु की लोककथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मां काली द्वारा शिव को नृत्य की चुनौती देना स्त्री-शक्ति की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने गायत्री चक्रवर्ती स्पीवाक सहित उन विद्वानों के विचारों पर चर्चा की, जो वेद-पुराण और महाकाव्यों को आंशिक इतिहास मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परंपरा न केवल मिथक है और न मात्र इतिहास; वह सामाजिक परिवर्तन से प्रभावित भी होती है और समाज को प्रभावित भी करती है। गिरमिटिया मजदूरों द्वारा मॉरीशस जाते समय गंगाजल, तुलसी पत्र और रामचरितमानस साथ ले जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने महाकाव्यों की सामाजिक भूमिका रेखांकित की।
स्त्री लेखन पर उठते प्रश्नों के संदर्भ में उन्होंने जयदेव के गीत गोविंद और काज़ी नज़रुल इस्लाम के काव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संवेदना का संबंध केवल लिंग से नहीं, बल्कि सृजनात्मक चेतना से है।
मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रशांत श्रीवास्तव ने मानव उद्भव से लेकर भारतीय सभ्यता के विकास तक का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया और जापानी चिकित्सा पद्धति के सूत्र भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़े।
कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए इतिहास, पुरातत्व और साहित्य महत्वपूर्ण आधार हैं तथा पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर साक्ष्यों का अध्ययन आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ. यशवंत सिंह राठौड़ ने संयुक्त शोध की प्रतिबद्धता दोहराई।
द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उमेश सिंह ने की, जिसमें 23 शोधपत्र प्रस्तुत हुए। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वनाथ प्रसाद तिवारी उपस्थित रहेंगे।
उद्घाटन सत्र में पांच पुस्तकों का विमोचन
डॉ. कन्हैया सिंह की ‘प्राचीन भारतीय मुद्राओं का आर्थिक एवं सांस्कृतिक विवेचन’, डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी की ‘पेशवा बाजीराव’, डॉ. धर्मेंद्र मौर्य की ‘प्राचीन भारत में सूर्योपासना के विविध आयाम’, डॉ. कृष्ण कुमार पांडेय की ‘पूर्वांचल नामाख्यान’ तथा प्रोफेसर राजवंत राव, प्रोफेसर प्रज्ञा चतुर्वेदी, डॉ. मनीन्द्र यादव और डॉ. विनोद कुमार के संयुक्त संपादन में प्रकाशित ‘अयोध्या की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत’ का विमोचन हुआ।

होम स्टे नीति-2025 से पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यटन विभाग द्वारा प्रख्यापित “उ0प्र0 बेड एण्ड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे पालिसी-2025” के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से जनपद के नव निर्मित होटल लोटस ग्राण्ड में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की।
पर्यटक अधिकारी विकास नारायण ने नीति की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना किसी भी सक्षम नागरिक के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है। इसके अंतर्गत जनपद निवासी अपने आवास पर पर्यटकों के ठहरने योग्य अधिकतम 6 कक्ष अथवा 12 बेड तक होम स्टे के रूप में विकसित कर सकते हैं। यदि भवन में स्वामी स्वयं निवास नहीं करता है तो केयरटेकर रखकर “बेड एण्ड ब्रेकफास्ट” इकाई के रूप में संचालन किया जा सकता है। योजना को पूर्णतः अव्यवसायिक गतिविधि की श्रेणी में रखा गया है तथा लीज पर लिए गए भवन पर भी इसका लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे पर्यटकों को घर जैसा अनुभव मिलेगा और जनपद में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव ने योजना को लाभकारी बताते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उद्योग एवं व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित कुमार जैन ने पर्यटन स्थलों के विकास के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की और और अधिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। प्रदेश महामंत्री श्रवण कुमार अग्रहरि ने पर्यटक स्थलों एवं प्रमुख मार्गों की स्वच्छता को प्राथमिकता देने की अपील की, ताकि आगंतुकों का अनुभव बेहतर हो सके।
उ0प्र0 इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अरविन्द पाठक ने नीति के ग्रामीण स्तर तक व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता जताई। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप कुमार त्रिपाठी, डीसी पंचायतीराज विभाग द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागीय अधिकारियों, व्यापार मंडल पदाधिकारियों, होटल व्यवसायियों एवं जनपद के अन्य प्रमुख व्यवसायियों ने सहभागिता की।

विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर प्रतियोगिताओं की धूम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर विविध शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार तिवारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें एम.एससी. वर्ग के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
विज्ञान प्रश्नोत्तरी, निबंध, भाषण, पोस्टर प्रस्तुति और विज्ञान मॉडल प्रदर्शन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रश्नोत्तरी में सी. वी. रमन के जीवन, ‘रमन प्रभाव’ तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की उपलब्धियों से जुड़े प्रश्न शामिल रहे। इसके अलावा परमाणु संरचना, अक्षय ऊर्जा, क्वांटम मिशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे समसामयिक विषयों पर भी प्रतिभागियों से सवाल पूछे गए।
निबंध प्रतियोगिता में तनिष्क पांडे प्रथम, दिव्यांशी पांडेय द्वितीय और अनुराग यादव तृतीय रहे। भाषण प्रतियोगिता का विषय “उसकी शक्ति, हमारा भविष्य: ग्रामीण सशक्तिकरण के आर्थिक तर्क” रखा गया। “ग्राम्य महिलाओं में रोजगार सृजन कैसे करें?” विषय पर प्रतिभागियों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आत्मनिर्भरता एवं उद्यमिता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इसमें श्रुति त्रिपाठी ने प्रथम, आयुषी मिश्रा ने द्वितीय और दिव्या मिश्रा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
पोस्टर प्रस्तुति में जैव-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, क्वांटम मिशन, जलवायु लचीलापन, सतत ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। 28 फरवरी को विजेताओं को कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

28 फरवरी 2026 का पंचांग: त्रिपुष्कर योग में करें ये खास कार्य, मिलेगा तीन गुना फल

आज का पंचांग 28 फरवरी 2026: द्वादशी तिथि, त्रिपुष्कर योग, राहुकाल समय और शुभ मुहूर्त की संपूर्ण जानकारी



आज का पंचांग 28 फरवरी 2026 (शनिवार)
28 फरवरी 2026 का पंचांग फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर आधारित है। आज शनिवार का दिन है और विशेष रूप से गोविंद द्वादशी का पावन अवसर है। ज्योतिषीय दृष्टि से आज त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
जो लोग प्रतिदिन आज का पंचांग 28 फरवरी 2026 देख कर अपने दिन की शुरुआत करते हैं, उनके लिए यहां विस्तृत और प्रमाणिक जानकारी प्रस्तुत है।

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तिथि और वार
तिथि: शुक्ल पक्ष द्वादशी रात्रि 08:43 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी प्रारंभ
वार: शनिवार
मास: फाल्गुन (अमांत और पूर्णिमांत)
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
नक्षत्र और योग
पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 09:34 बजे तक
इसके बाद पुष्य नक्षत्र प्रारंभ
सौभाग्य योग सायं 05:02 बजे तक
इसके बाद शोभन योग

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विशेष शुभ योग:
त्रिपुष्कर योग: सुबह 06:23 बजे से 09:34 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग (पूर्व प्रभाव)
रवि पुष्य योग (01 मार्च प्रातः)
आज का पंचांग 28 फरवरी 2026 के अनुसार सुबह का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है।
सूर्योदय और चंद्रमा स्थिति
सूर्योदय: 06:23 AM
सूर्यास्त: 05:51 PM
चंद्रोदय: 02:47 PM
चंद्रास्त: प्रातः 04:50 AM (1 मार्च)
सूर्य राशि: कुंभ
चंद्र राशि: कर्क (पूरा दिन-रात)
चंद्रमा का कर्क राशि में गोचर भावनात्मक स्थिरता और पारिवारिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

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राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: 09:15 AM – 10:41 AM
यमगंड: 01:33 PM – 02:59 PM
कुलिक काल: 06:23 AM – 07:49 AM
दुर्मुहूर्त: 07:55 AM – 08:41 AM
वर्ज्य: 05:15 PM – 06:47 PM
आज का पंचांग 28 फरवरी 2026 के अनुसार राहुकाल में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 11:44 AM – 12:30 PM
अमृत काल: 07:17 AM – 08:48 AM तथा रात्रि 02:26 AM – 03:57 AM
ब्रह्म मुहूर्त: 04:46 AM – 05:34 AM
धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए ये समय श्रेष्ठ माने गए हैं।

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दिन का चौघड़िया
शुभ: 07:49 AM – 09:15 AM
लाभ: 01:33 PM – 02:59 PM
अमृत: 02:59 PM – 04:25 PM
रात्रि का चौघड़िया
शुभ: 08:59 PM – 10:32 PM
अमृत: 10:32 PM – 12:06 AM
लाभ: 04:48 AM – 06:22 AM
चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल (01 मार्च 06:22 AM तक):
वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुंभ
ताराबल (09:34 AM तक):
भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा, रेवती

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आज का पर्व
गोविंद द्वादशी – भगवान विष्णु की पूजा का विशेष दिन।
इस दिन व्रत, दान और विष्णु सहस्रनाम पाठ का विशेष महत्व है।
ज्योतिषीय निष्कर्ष
आज का पंचांग 28 फरवरी 2026 दर्शाता है कि सुबह का समय विशेष रूप से शुभ है। त्रिपुष्कर योग में किया गया कार्य तीन गुना फलदायी माना जाता है। हालांकि राहुकाल और वर्ज्य काल में नए कार्य प्रारंभ करने से बचें।
जो लोग नियमित रूप से 28 फरवरी 2026 पंचांग देख कर कार्य करते हैं, उनके लिए आज धार्मिक और पारिवारिक गतिविधियों के लिए अनुकूल दिन है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में विधिक जागरूकता कार्यशाला आयोजित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर “राइट्स. जस्टिस. एक्शन. फॉर ऑल वीमेन एंड गर्ल्स.” थीम के अंतर्गत “लीगल अवेयरनेस एंड लीगल हेल्थ” विषय पर गुव्वा हॉल में एक व्यापक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर विश्वविद्यालय महिला कल्याण संघ (गुव्वा) एवं महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हुआ, जिसमें विभिन्न संकायों की छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
कार्यक्रम की संरक्षिका कुलपति प्रो. पूनम टंडन रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में महिलाओं के कानूनी अधिकारों की जानकारी को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि कानून महिलाओं को हर प्रकार की हिंसा से संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने विशाखा गाइडलाइन के तहत गठित कैंपस की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की भूमिका को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम का संयोजन महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. दिव्या रानी सिंह ने किया, जबकि गुव्वा की अध्यक्ष प्रो. नंदिता सिंह कार्यक्रम की संयोजक रहीं।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता यशपाल सिंह (पूर्व डीजीसी, क्रिमिनल, गोरखपुर) ने महिलाओं के संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013, दहेज निषेध अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी उत्पीड़न की स्थिति में महिला को प्राथमिकी दर्ज कराने, महिला हेल्पलाइन 1090/181 पर संपर्क करने तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है।
साइबर सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल, मॉर्फिंग, ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल वित्तीय ठगी तथा डेटा चोरी जैसे अपराधों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। छात्राओं को मजबूत एवं गोपनीय पासवर्ड का उपयोग, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखने, अनजान लिंक, कॉल या संदेशों से सावधान रहने तथा सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने में संयम बरतने का सुझाव दिया गया। किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल या निकटतम थाने में शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई।
कार्यक्रम में प्रो. अनुभूति दुबे, प्रो. सुनीता मुर्मू, डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, डॉ. कल्पना, डॉ. तुलिका मिश्रा, डॉ. अफरोजा, डॉ. प्रतिमा जायसवाल एवं डॉ. विस्मिता पालिवाल सहित अनेक प्राध्यापिकाएं उपस्थित रहीं। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्राओं ने कार्यस्थल सुरक्षा, साइबर अपराध में साक्ष्य संकलन, शिकायत प्रक्रिया, कानूनी परामर्श एवं आत्मरक्षा से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने सरल भाषा में समाधान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह कार्यशाला महिला सशक्तिकरण, विधिक साक्षरता एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।

ज्योति दिव्य कलश यात्रा का भव्य अभिनंदन

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा निकाली गई पावन ज्योति दिव्य कलश यात्रा का शुक्रवार को आदर्श नगर पंचायत चितबड़ागांव में भव्य स्वागत किया गया। प्रातः लगभग 9 बजे यात्रा के नगर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और मंत्रोच्चारण के साथ दिव्य कलश का अभिनंदन किया। पूरा वातावरण गायत्री मंत्र और जयघोष से भक्तिमय हो उठा।

यात्रा के दौरान दिव्य कलश का विधिवत पूजन क्षेत्रीय गायत्री परिजनों एवं नगर पंचायत अध्यक्ष अमरजीत सिंह के करकमलों द्वारा संपन्न कराया गया। वैदिक रीति से दीप प्रज्वलन और आरती के उपरांत शांतिकुंज से पधारे गायत्री परिवार के मनीषियों ने भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और युग परिवर्तन के संदेश को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि यह कलश केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है, जो मानवता में सद्भाव, संयम और संस्कारों के पुनर्जागरण का संदेश देता है।

वक्ताओं ने बताया कि पावन ज्योति दिव्य कलश देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर भ्रमण कर गुरुदेव के विचारों का प्रसार कर रहा है। इसका दर्शन और स्वागत प्रत्येक श्रद्धालु के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण तथा नैतिक शिक्षा के प्रसार का आह्वान किया।

यात्रा के साथ गायत्री शक्तिपीठ महावीर घाट के प्रभारी वीरेंद्र नाथ चौबे भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष अमरजीत सिंह, गायत्री परिवार की वरिष्ठ परिजन उषा दीदी, विनोद शंकर गुप्ता, डॉ. श्रीकृष्ण यादव, फागु प्रसाद, भारत गुप्ता, अरविंद तिवारी, सत्येंद्र सिंह, प्रकाश तिवारी, लक्ष्मण गुप्ता, शशांक सिंह, श्रीकृष्ण केसरी, शंभू सिंह, धीरेंद्र प्रसाद सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक संकल्प दिलाया गया कि सभी लोग अपने जीवन में सदाचार, सेवा और संस्कारों को अपनाते हुए समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। दिव्य कलश यात्रा के आगमन से नगर में आध्यात्मिक उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

होली व रमजान को लेकर शांति समिति की बैठक, प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में होली एवं रमजान माह को शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शांति समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जयप्रकाश तथा अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद की परंपरागत शांतिपूर्ण छवि को बनाए रखते हुए सभी समुदायों से आपसी तालमेल, अमन और भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की। उन्होंने कानून व्यवस्था, बिजली, पानी और साफ-सफाई सहित आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने भी प्रशासन को सहयोग का भरोसा दिलाया।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने कहा कि त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार से सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से सावधान रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को देने की अपील की।
जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों, पुलिस क्षेत्राधिकारियों और थाना प्रभारियों को संवेदनशील स्थलों का पूर्व निरीक्षण करने तथा स्थानीय स्तर पर संभ्रांत नागरिकों से समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि होलिका दहन परंपरागत स्थलों पर ही किया जाए और कोई नई परंपरा शुरू न की जाए।
स्वास्थ्य विभाग को जिला चिकित्सालय, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखने तथा जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नगर निकायों को साफ-सफाई, पेयजल और विद्युत व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश भी जारी किए गए।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानुज कन्नौजिया, डीएफओ हरिकेश यादव, विभिन्न उप जिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी, नगर निकाय प्रतिनिधि, ग्राम प्रधान एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इतिहास के पन्नों में दर्ज अहम दिन

28 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ: विश्व इतिहास में दर्ज बड़े फैसले और ऐतिहासिक समझौते



28 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ – इतिहास के पन्नों में दर्ज अहम दिन
28 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ विश्व राजनीति, कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सिनेमा जगत में कई बड़े फैसलों और ऐतिहासिक मोड़ों की गवाह रही हैं। इस दिन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण समझौते हुए, युद्ध विराम लागू हुआ और वैश्विक मंच पर कई निर्णायक कदम उठाए गए। आइए जानते हैं 28 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ विस्तार से।

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1991 – खाड़ी युद्ध में युद्ध विराम लागू
Gulf War के दौरान 28 फ़रवरी 1991 को आधिकारिक रूप से युद्ध विराम लागू किया गया। अमेरिका के नेतृत्व वाली बहुराष्ट्रीय सेना ने कुवैत को इराकी कब्जे से मुक्त कराया। यह निर्णय मध्य पूर्व की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस युद्ध ने वैश्विक सामरिक संतुलन को नई दिशा दी।
1992 – भारत और ब्रिटेन के बीच आतंकवाद विरोधी समझौता
28 फ़रवरी 1992 को भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग बढ़ाने हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह कदम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग की दिशा में अहम माना गया। इस समझौते ने दोनों देशों के बीच खुफिया साझेदारी और कानूनी सहयोग को मजबूत किया।

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1994 – नामीबिया को वाल्विस बे पोर्ट एन्क्लेव सुपुर्द
Namibia को 28 फ़रवरी 1994 को दक्षिण अफ्रीका ने वाल्विस बे (Walvis Bay) पोर्ट एन्क्लेव सौंप दिया। यह क्षेत्र लंबे समय से दक्षिण अफ्रीका के नियंत्रण में था। इस हस्तांतरण ने नामीबिया की संप्रभुता को पूर्ण रूप से स्थापित किया।
1996 – पाकिस्तान को अमेरिकी हथियार आपूर्ति पर रोक
Clinton Administration ने 28 फ़रवरी 1996 को पाकिस्तान को 35.6 करोड़ डॉलर के हथियारों की आपूर्ति न करने का निर्णय लिया। यह फैसला परमाणु अप्रसार नीति और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया था।

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1999 – ब्रिटेन के गुब्बारा उड़ान का विश्व रिकॉर्ड
ब्रिटेन के कोलीन प्रेसकोट और एंडी एल्सन ने 233 घंटे 55 मिनट तक हॉट एयर बैलून में रहकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि साहसिक विमानन इतिहास में दर्ज की गई और मानव सहनशक्ति का अद्भुत उदाहरण बनी।
2003 – सैम नुजोमा की भारत यात्रा
Sam Nujoma 28 फ़रवरी 2003 को चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे। इस यात्रा ने भारत और नामीबिया के बीच आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती दी।
इसी दिन भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता से संबंधित प्रस्ताव अमेरिकी संसद में प्रस्तुत किया गया।

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2005 – ‘मिलियन डॉलर बेबी’ को चार ऑस्कर
Million Dollar Baby को 28 फ़रवरी 2005 को चार एकेडमी अवॉर्ड (ऑस्कर) से सम्मानित किया गया। फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री सहित कई प्रमुख पुरस्कार जीते। यह हॉलीवुड सिनेमा की उल्लेखनीय उपलब्धि रही।
2006 – फिलीपींस में आपातकाल पर न्यायालय में मामला
Philippines में 28 फ़रवरी 2006 को लागू आपातकाल के खिलाफ मामला न्यायालय पहुँचा। इसने देश में लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी।

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2008 – भारत और नेपाल से जुड़ी प्रमुख घटनाएँ
आर्थिक समीक्षा पेश
28 फ़रवरी 2008 को तत्कालीन वित्त मंत्री P. Chidambaram ने संसद में आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत की। इसमें देश की विकास दर, राजकोषीय स्थिति और आगामी आर्थिक रणनीति पर प्रकाश डाला गया।
उत्तर प्रदेश में वैट विधेयक को मंजूरी
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल T. P. Rajeshwar ने वैट (VAT) विधेयक को मंजूरी दी, जिससे राज्य की कर प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव आया।

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नेपाल में शांति समझौता
Nepal में सरकार और संयुक्त मधेशी लोकतांत्रिक मोर्चा के बीच 28 फ़रवरी 2008 को शांति समझौता हुआ। इससे राजनीतिक स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले।

28 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि यह दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक उपलब्धियों के लिए अत्यंत अहम रहा है। खाड़ी युद्ध का अंत, आतंकवाद विरोधी समझौते, आर्थिक नीतियाँ और ऑस्कर सम्मान—सभी ने इतिहास में इस तिथि को विशेष बना दिया है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज 28 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ हमें यह समझने का अवसर देती हैं कि वैश्विक निर्णय किस प्रकार विश्व व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

शराब की दुकानों के खिलाफ मोर्चा, अधिवक्ताओं ने डीएम से की सख्त कार्रवाई की मांग

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। महुली स्थित शराब की दुकान को हटाने की मांग शुक्रवार को जिलाधिकारी की चौखट तक पहुंच गई। अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी आलोक कुमार से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। मुख्य मार्ग पर शराबियों के उत्पात और खुले में बिक रहे मांस को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराकर समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया।
महुली निवासी अधिवक्ता गंगाधर द्विवेदी के नेतृत्व में जिला एवं सत्र न्यायालय के अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने महुली-नाथनगर मुख्य मार्ग पर स्थित शराब की तीन दुकानों को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना है कि सड़क किनारे खुले में मांस की बिक्री भी होती है, जिससे आवागमन प्रभावित होता है। यह मार्ग डिहवा, कुर्मियाना, बौरीहवा सहित महुली के दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ता है।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार शाम तीन बजे से रात्रि नौ बजे तक शराबियों के उत्पात के कारण राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। स्कूल जाने वाली छात्राओं और दैनिक कार्यों से निकलने वाली महिलाओं को अशोभनीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है।
इससे पूर्व महिला अधिवक्ता सविता ने भी सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना पत्र तहसील दिवस धनघटा में सौंपकर शराब की दुकान हटाने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिवक्ताओं ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराकर स्थायी समाधान का आश्वासन दिया है।

घायल तेंदुए की मौत से जुम्मन पूरवा में दहशत

इलाके में और तेंदुओं की मौजूदगी से बढ़ी चिंता

शाहजहांपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)l जनपद के थाना सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के ग्राम जुम्मन पूरवा में घायल अवस्था में मिले एक तेंदुए की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, आसपास के क्षेत्रों में एक से अधिक तेंदुओं को देखे जाने की सूचना है, जिससे लोगों में भय और असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तेंदुओं की बढ़ती सक्रियता से किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने बच्चों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। साथ ही, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
वन विभाग द्वारा क्षेत्र में सघन निगरानी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि अन्य तेंदुओं की मौजूदगी की पुष्टि कर उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ने या जंगल की ओर खदेड़ने की कार्रवाई की जा सके। प्रशासन ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और अकेले बाहर न निकलने की अपील की है।

सुभासपा नेता अरविंद राजभर का जिले में ऐतिहासिक स्वागत

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के सुप्रीमो व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के पुत्र पार्टी के सक्रिय नेता अरविंद राजभर के जनपद आगमन पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय गणमान्य लोगों ने जोरदार स्वागत किया। खलीलाबाद क्षेत्र के मंझरिया स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे पशु बाजार पहुंचने पर मिर्जा बंधुओं ने उनका अभिनंदन किया।

सेमरियावा ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि मुमताज अहमद के नेतृत्व में आयोजित स्वागत समारोह में सुभासपा कार्यकर्ताओं ने अरविंद राजभर का फूलों की वर्षा और भारी मालाओं के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर ढोल-नगाड़ों की थाप से माहौल उत्साहपूर्ण हो गया। पशु बाजार के मालिक शादाब मिर्जा और नायाब मिर्जा ने मुख्य अतिथि के सम्मान में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।
स्वागत समारोह के बाद अरविंद राजभर ने मिर्जा बंधुओं और मुमताज अहमद के साथ क्षेत्र के विकास, संगठन विस्तार और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा की। स्थानीय स्तर पर इस मुलाकात को सुभासपा की सक्रियता और संगठनात्मक मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से सभासद मोहम्मद आतिफ, इसरार अहमद, पिंटू भाई, सुशील ठाकुर, अजय कुमार, बंटी ठाकुर, सूरज सिंह, राजेंद्र यादव, रितेश पाण्डेय समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

होली-ईद से पहले देवरिया में एकता का संदेश, जिला एकीकरण समिति की अहम बैठक

देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा)
आगामी होली और ईद पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से देवरिया जिला एकीकरण समिति बैठक विकास भवन स्थित गांधी सभा7गार में आयोजित की गई। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर जनपद में अमन-चैन और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लिया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी देवरिया, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
विविध समुदायों की सहभागिता से मजबूत हुआ संदेश
देवरिया जिला एकीकरण समिति बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिष्ठित सदस्यों की उपस्थिति ने आपसी एकता का मजबूत संदेश दिया।
समिति के सदस्य कमलेश पाण्डेय (जिला पंचायत सदस्य), डॉ. शोभा शुक्ला, संत पुष्पा मिशन से फादर सिन्जोजान, अंजुमन इस्लामिया के पूर्व सदर विस्मिल्ला लारी, गुरु सिंह सभा देवरिया के ग्रंथी दामोदर दास, मनोकामना पूर्ण श्री हनुमान जी मंदिर के उत्तराधिकारी राजेश नारायण दास सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार रखे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि त्योहारों की असली पहचान प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता है।
सम्मान समारोह से हुई शुरुआत
बैठक की शुरुआत सभी आमंत्रित सदस्यों को पुस्तक और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित करने के साथ हुई। इस पहल का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी विश्वास और समन्वय को सुदृढ़ करना था।
देवरिया जिला एकीकरण समिति बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि समिति का मूल उद्देश्य सामाजिक समरसता को बनाए रखना और किसी भी प्रकार के तनाव की स्थिति को रोकना है।
होली और ईद पर शांति की अपील
बैठक में आगामी होली और ईद पर्व की शुभकामनाएं देते हुए सभी सदस्यों ने जनपदवासियों से अपील की कि वे त्योहारों को आपसी सद्भाव के साथ मनाएं।
धार्मिक नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि त्योहार सामाजिक मेल-मिलाप का अवसर होते हैं और इन्हें किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।
देवरिया जिला एकीकरण समिति बैठक में विशेष रूप से युवाओं से जिम्मेदार व्यवहार अपनाने और सोशल मीडिया पर संयम बरतने का आग्रह किया गया।
समिति की सक्रिय भूमिका पर जोर
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि जिला एकीकरण समिति को केवल औपचारिक संस्था न रहकर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
सदस्यों ने सुझाव दिया कि समय-समय पर मोहल्ला स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि छोटे-छोटे विवादों को प्रारंभिक स्तर पर ही सुलझाया जा सके।
देवरिया जिला एकीकरण समिति बैठक में यह लक्ष्य निर्धारित किया गया कि समिति प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो।
प्रशासन और समाज का साझा प्रयास
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शांति व्यवस्था बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि यदि समाज के सभी वर्ग मिलकर कार्य करें तो किसी भी प्रकार की अशांति की संभावना स्वतः समाप्त हो जाती है।
देवरिया जिला एकीकरण समिति बैठक ने प्रशासन और समाज के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में सकारात्मक पहल की है।
सामाजिक समरसता की दिशा में ठोस कदम
बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि त्योहारों से पूर्व विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।
इसके अतिरिक्त, समिति के सदस्यों ने यह भी सुझाव दिया कि विद्यालयों और महाविद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से एकता और सद्भाव का संदेश दिया जाए।
देवरिया जिला एकीकरण समिति बैठक में यह सहमति बनी कि किसी भी प्रकार की अफवाह या विवाद की स्थिति में तुरंत प्रशासन को सूचित किया जाए।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक संपन्न
बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने एक-दूसरे को होली और ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
देवरिया जिला एकीकरण समिति बैठक ने स्पष्ट संदेश दिया कि जनपद में शांति, सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने के लिए प्रशासन और समाज दोनों प्रतिबद्ध हैं।

उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी, देवरिया बीएसए निलंबित

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)
जनपद देवरिया में चर्चित कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन मामले में उत्तर प्रदेश शासन ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह कार्रवाई जिलाधिकारी की संस्तुति के आधार पर की गई है। शासन ने न केवल निलंबन आदेश जारी किया, बल्कि विभागीय अनुशासनिक जांच भी संस्थित कर दी है। इस निर्णय के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
डीएम की संस्तुति पर हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, 23 फरवरी 2026 को दिव्या मित्तल द्वारा शासन को भेजी गई संस्तुति में संबंधित प्रकरण में लापरवाही और आदेशों के अनुपालन में शिथिलता की बात कही गई थी।
इसी संस्तुति के आधार पर शासन स्तर पर परीक्षण किया गया, जिसके बाद देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन का निर्णय लिया गया।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शिथिलता का आरोप
उत्तर प्रदेश शासन, बेसिक शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा जारी कार्यालय आदेश में उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शिथिलता बरती गई। लगभग एक वर्ष तक प्रभावी कार्रवाई न किए जाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
शासन ने इसे शासकीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता और लापरवाही की श्रेणी में माना है, जो गंभीर कदाचार के अंतर्गत आता है।
देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन इसी आधार पर किया गया है।
नियम-4 के तहत निलंबन, नियम-7 के तहत जांच
शासनादेश के अनुसार शालिनी श्रीवास्तव को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-4 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
साथ ही नियम-7 के अंतर्गत विभागीय जांच संस्थित की गई है।
जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
साथ ही उनका संबद्धीकरण शिक्षा निदेशक (बेसिक) उत्तर प्रदेश कार्यालय, लखनऊ से किया गया है।
देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन के बाद यह व्यवस्था प्रशासनिक औपचारिकताओं के तहत की गई है।
अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का पद रिक्त होने के कारण शासन ने शैक्षिक और प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान न आए, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है।
तत्काल प्रभाव से डायट देवरिया के प्राचार्य को उनके वर्तमान पद के साथ-साथ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, देवरिया का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
यह आदेश नियमित तैनाती होने तक प्रभावी रहेगा।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में परिजनों की तहरीर पर थाना गुलहरिया में नामजद मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोपित पटल सहायक को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
अब देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर
जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि जनपद में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन इसी सख्त प्रशासनिक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग में हलचल
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह संदेश स्पष्ट गया है कि उच्च न्यायालय के आदेशों और शासन निर्देशों की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विभागीय अनुशासन को मजबूत करेगा और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक होगा।
आगे क्या?
अब निगाहें विभागीय जांच की प्रक्रिया पर टिकी हैं। जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो सेवा नियमावली के तहत और कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।
देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन प्रशासनिक जवाबदेही के मामले में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।

अनियमित अभिकर्ताओं पर शिकंजा, जिला बचत कार्यालय मऊ में जांच प्रक्रिया सख्त

मऊ।(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद मऊ में जिला बचत कार्यालय से जुड़े अभिकर्ताओं के कार्यों को लेकर इन दिनों प्रशासनिक सख्ती चर्चा का विषय बनी हुई है। मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद उस समय सुर्खियों में आया जब जिला बचत अधिकारी ने अनियमित अभिकर्ताओं द्वारा दबाव बनाने, झूठी शिकायतें भेजने और सोशल मीडिया पर भ्रामक अभियान चलाने के आरोप लगाए।
जिला बचत अधिकारी डॉ. शैलेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि अभिकर्ताओं को अनुबंध की शर्तों के तहत ही कार्य करना होगा। नियमों से हटकर किसी भी प्रकार का कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे इसके लिए कितना भी दबाव क्यों न बनाया जाए।
1000 से अधिक अभिकर्ता, 500 से ज्यादा महिला एजेंट सक्रिय
जिला बचत कार्यालय के अंतर्गत जनपद मऊ में लगभग 1000 से अधिक राष्ट्रीय बचत अभिकर्ता एवं महिला प्रधान अभिकर्ता विभिन्न डाकघरों में कार्यरत हैं। इनमें 500 से अधिक सक्रिय महिला अभिकर्ता शामिल हैं, जिन्हें प्रति माह 5 से 36 खाते खोलने का लक्ष्य दिया गया है।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के बीच यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी अभिकर्ताओं की जिम्मेदारी निवेशकों के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए अनुबंध शर्तों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है।
धन गमन की शिकायतों से बढ़ी सख्ती
डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि जिला बचत कार्यालय को समय-समय पर कुछ अभिकर्ताओं के विरुद्ध निवेशकों की धनराशि के गमन (मिसएप्रोप्रियेशन) की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच प्रक्रिया को सख्त किया है। एजेंसी के नवीनीकरण से पहले अभिलेखों की गहन जांच और संपूर्ण औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के संदर्भ में अधिकारी ने कहा कि यदि समय रहते सख्ती न बरती जाए तो जिले की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
अनियमित अभिकर्ताओं पर आरोप: दबाव और षड्यंत्र
जिला बचत अधिकारी ने आरोप लगाया कि कुछ अनियमित अभिकर्ता, जिनकी एजेंसी नवीनीकरण में अनियमितताओं के कारण बाधा आ रही है, वे संगठित होकर दबाव की राजनीति कर रहे हैं।
उनका कहना है कि ये अभिकर्ता जनप्रतिनिधियों और बाहरी व्यक्तियों को साथ लेकर विभाग पर मनमुताबिक कार्य कराने का प्रयास कर रहे हैं।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद में यह भी सामने आया है कि विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर हर माह शिकायतें भेजी जा रही हैं, ताकि प्रशासन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा सके।
सोशल मीडिया पर भ्रामक अभियान का आरोप
जिला बचत अधिकारी ने कहा कि कुछ अभिकर्ता विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक खबरें प्रसारित करवा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा उठाए गए कदम निवेशकों के हित में हैं। यदि किसी अभिकर्ता द्वारा धन गमन जैसी गंभीर शिकायत पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के चलते विभाग ने यह भी कहा है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही उनकी प्राथमिकता है।
बाहरी व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल
अधिकारी ने यह भी कहा कि कुछ बाहरी व्यक्तियों द्वारा जिला बचत कार्यालय से असंबंधित होते हुए भी हस्तक्षेप की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला बचत कार्यालय मऊ की कार्यप्रणाली पूरी तरह नियमों और अनुबंध शर्तों पर आधारित है। किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निवेशकों के हित सर्वोपरि
डॉ. शैलेश कुमार ने दोहराया कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी आम निवेशकों के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के बीच उन्होंने यह संदेश दिया कि जो अभिकर्ता ईमानदारी और नियमों के तहत कार्य कर रहे हैं, उन्हें किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है।
लेकिन जो अभिकर्ता अनियमितता में लिप्त पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
एजेंसी नवीनीकरण की नई प्रक्रिया
जिला बचत कार्यालय ने एजेंसी नवीनीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों और रिकॉर्ड सत्यापन की व्यवस्था लागू की है।
अब बिना अभिलेखों की जांच और पूर्ण औपचारिकताओं के कोई भी एजेंसी नवीनीकृत नहीं की जाएगी।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विभाग नियमों से समझौता करने के मूड में नहीं है।
प्रशासन की छवि बचाने की चुनौती
अधिकारी ने कहा कि यदि अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई न की जाए तो इससे न केवल विभाग बल्कि जिला प्रशासन की छवि भी धूमिल हो सकती है।
इसलिए आवश्यक है कि नियमों का पालन सख्ती से कराया जाए और किसी भी प्रकार के अनैतिक दबाव को अस्वीकार किया जाए।
निष्कर्ष: नियमों से समझौता नहीं
मऊ में जिला बचत कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर उत्पन्न विवाद ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि वित्तीय लेन-देन से जुड़े विभागों में पारदर्शिता और अनुशासन कितना आवश्यक है।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के बीच प्रशासन का स्पष्ट संदेश है—अभिकर्ताओं को अनुबंध शर्तों के अधीन ही कार्य करना होगा।
निवेशकों के हितों की रक्षा और विभाग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों को प्रशासनिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।