Tuesday, May 5, 2026
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बारात में आया चालक, लौटी नहीं सांसें — दूल्हे के ड्राइवर की संदिग्ध हालात में मौत, गली में मिला शव

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। घुघली थाना क्षेत्र के पकड़ियार बिशुनपुर गांव में रविवार देर रात उस समय सनसनी फैल गई, जब कुशीनगर से आई एक बारात में शामिल दूल्हे के वाहन चालक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ। मृतक की पहचान जितेंद्र खरवार (37) पुत्र शंभू खरवार, निवासी सपहा थाना कसया, जिला कुशीनगर के रूप में हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुशीनगर से बारात पकड़ियार बिशुनपुर गांव आई थी। विवाह की सभी रस्में शांतिपूर्वक संपन्न हो चुकी थीं और देर रात बारात वापसी की तैयारी में थी। इसी दौरान चालक जितेंद्र खरवार अचानक लापता हो गया। काफी देर तक तलाश करने के बाद भी जब वह नहीं मिला तो परिजनों और बारातियों में चिंता बढ़ गई।
बताया जा रहा है कि खोज-बीन के दौरान बारात स्थल के समीप एक संकरी गली में उसका शव पड़ा मिला। शव मिलने की खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना पाकर घुघली पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सोमवार दोपहर थाना प्रभारी कुंवर गौरव सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामले को संदिग्ध मानते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
घटना के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। वहीं गांव में भी तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। पुलिस आस-पास के लोगों से पूछ-ताछ कर रही है और घटनास्थल के हालातों की बारीकी से जांच कर रही है।
फिलहाल पूरे मामले की गुत्थी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सुलझने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

यातायात पुलिस का सख्त अभियान, 138 वाहनों का ई-चालान, 10 वाहन सीज

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।जनपद देवरिया में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से यातायात पुलिस द्वारा व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में यातायात प्रभारी गुलाब सिंह के नेतृत्व में शहर क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर सघन वाहन जांच की गई।इस अभियान के दौरान कोतवाली क्षेत्र में संचालित ई-रिक्शा वाहनों की विशेष जांच की गई। जिन ई-रिक्शा वाहनों के पास वैध दस्तावेज उपलब्ध थे, उनकी विधिवत नंबरिंग कराई गई, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की गई।यातायात पुलिस की टीम ने गोरखपुर ओवरब्रिज, कसया ओवरब्रिज, मालवीय रोड एवं बस स्टैंड जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सड़क पर वाहन खड़ा कर सवारियां भरने वाले अनुबंधित बस, ऑटो एवं ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ चालान एवं सीज की कार्यवाही की। इस कार्रवाई से अव्यवस्थित यातायात और जाम की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिली।अभियान के दौरान कुल 138 वाहनों का ई-चालान किया गया, वहीं 10 वाहनों को सीज कर दिया गया। यातायात पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चलाया जा रहा है और आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगा।यातायात पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना, सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम करना तथा यह स्पष्ट संदेश देना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें।

22फरवरी को होगा मेगा विधिक सहायता एवं सेवा शिविर, तैयारियों को लेकर डीएम व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में मंथन

कुशीनगर(राष्ट्र की परम्परा)जनपद कुशीनगर में प्रस्तावित मेगा/वृहद विधिक सहायता एवं सेवा शिविर को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के क्रम में जनपद न्यायाधीश के मार्गदर्शन में 22 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाले इस शिविर को लेकर जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रभात सिंह के बीच विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।बैठक में शिविर की रूपरेखा, व्यवस्थाएं, विभागीय समन्वय तथा आमजन को अधिकतम लाभ पहुंचाने की रणनीति पर गहन चर्चा हुई। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि इस मेगा शिविर के सफल आयोजन हेतु जनपद के 40 से अधिक विभागों की सहभागिता आवश्यक होगी। इस पर जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया।तैयारियों को और मजबूत करने के उद्देश्य से 11 फरवरी 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार में सभी विभागाध्यक्षों के साथ एक समन्वय बैठक आयोजित किए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।यह मेगा विधिक सहायता एवं सेवा शिविर समाज के निर्बल वर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन, बच्चे, अनुसूचित जाति-जनजाति, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, किसान, बेरोजगार युवा एवं निर्धन परिवारों को एक ही स्थान पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।शिविर का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर, कुशीनगर में किया जाएगा। यह कार्यक्रम दो चरणों में संपन्न होगा। प्रथम चरण में विभिन्न क्षेत्रों में लघु शिविर आयोजित कर पात्र लाभार्थियों की पहचान की जाएगी, जबकि द्वितीय चरण में चिन्हित लाभार्थियों को मेगा शिविर में योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा।

पटना में भगवामय स्वागत, काले रंग ने दिया समर्थन का संदेश

फागुन, होली और राजनीति के रंग: पटना में नितिन नवीन के स्वागत ने बदली ‘काले रंग’ की परिभाषा


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)फागुन का महीना है, यानी होली का मौसम। होली रंगों का पर्व है, लेकिन आज के समय में रंग सिर्फ खुशियों और उल्लास तक सीमित नहीं रह गए हैं। समाज, मजहब और राजनीति—तीनों ने अपने-अपने रंग तय कर लिए हैं। हरा इस्लाम से, भगवा सनातन से और नीला सामाजिक न्याय की राजनीति से जोड़ा जाने लगा है। राजनीतिक दलों में भी रंग पहचान बन चुके हैं—भगवा भाजपा का, हरा आरजेडी और टीएमसी का, काला-लाल वामपंथ और डीएमके का प्रतीक है।

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इन्हीं तयशुदा धारणाओं के बीच सोमवार को पटना के बापू सभागार में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने रंगों के मायने बदल दिए। मौका था भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के भव्य स्वागत का। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका पहला पटना दौरा था। पूरा सभागार भगवा रंग में डूबा हुआ था—मंच से लेकर दर्शक दीर्घा तक भगवा गमछे, पटके और झंडे लहरा रहे थे।
उत्साह अपने चरम पर था। कार्यकर्ता ‘मोदी स्टाइल’ में जो हाथ में आया, उसे लहराते दिखे। इसी भगवामय माहौल के बीच अचानक एक काला गमछा भी लहराता नजर आया। सैकड़ों भगवा प्रतीकों के बीच वह अलग जरूर दिखा, लेकिन उसका मतलब विरोध नहीं था। वह भी समर्थन का ही रंग बन गया। यह दृश्य बताता है कि भावनाएं रंग नहीं देखतीं—कार्यकर्ता के पास जो था, वही समर्थन में लहरा दिया गया। उस पल काला रंग भी समर्थन का प्रतीक बन गया।

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नितिन नवीन पटना आगमन पर एयरपोर्ट से ही उत्सव का माहौल बन गया। ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्वागत के दौरान “जोड़ी मोदी-नीतीश के हिट हो गइल” गीत बजा, जिसने माहौल को पूरी तरह उत्सव में बदल दिया। एयरपोर्ट से शहर तक जगह-जगह स्वागत पोस्टर लगाए गए थे। बाइक रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
बापू सभागार में आयोजित अभिनंदन समारोह में बिहार के सभी जिलों से हजारों कार्यकर्ता पहुंचे। नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा की ताकत उसका कार्यकर्ता है और यही शक्ति चुनावी सफलता की कुंजी बनती है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने इसे बिहार और संगठन के लिए गर्व का क्षण बताया।

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यह कार्यक्रम सिर्फ एक स्वागत समारोह नहीं था, बल्कि राजनीति में रंगों की जड़ हो चुकी धारणाओं को तोड़ने वाला संदेश भी था। फागुन के रंगों ने बता दिया कि समर्थन और विश्वास किसी एक रंग के मोहताज नहीं होते। जब भावनाएं साथ हों, तो हर रंग अपना हो जाता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद खुलेगा नहर में मिले युवक की मौत का राज

नहर में मिला अज्ञात युवक का शव, भैंसा पुल के पास सनसनी — पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।भिटौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत देवरिया शाखा नहर में भैंसा पुल के पास सोमवार सुबह नहर में मिला अज्ञात युवक का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सुबह टहलने निकले ग्रामीणों की नजर जब नहर में उतराते शव पर पड़ी तो हड़कंप मच गया। देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही भिटौली थानाध्यक्ष मदन मोहन मिश्र पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से शव को नहर से बाहर निकलवाया गया। पानी में कई दिनों तक रहने के कारण शव काफी फूल चुका था, जिससे पहचान करना मुश्किल हो रहा है। प्रारंभिक आकलन में नहर में मिला अज्ञात युवक का शव दो से तीन दिन पुराना प्रतीत हो रहा है।

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पुलिस के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 25 से 30 वर्ष के बीच आंकी जा रही है। शव पर किसी प्रकार के स्पष्ट चोट के निशान नहीं मिले हैं, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
थानाध्यक्ष मदन मोहन मिश्र ने बताया कि नहर में मिला अज्ञात युवक का शव की शिनाख्त के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। आसपास के गांवों में पूछताछ की जा रही है और जनपद के सभी थानों को सूचना भेज दी गई है, ताकि किसी भी थाने में दर्ज गुमशुदगी से मिलान कराया जा सके। इसके साथ ही नहर और भैंसा पुल के आसपास के इलाकों में भी छानबीन की जा रही है।

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घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे हादसा मान रहे हैं तो कुछ अन्य आशंकाएं भी जता रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आ जाती और मृतक की पहचान नहीं हो जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी के परिवार या परिचित का युवक लापता है, तो वे तत्काल भिटौली थाना से संपर्क करें। नहर में मिला अज्ञात युवक का शव मामले में सच्चाई पहचान और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही पूरी तरह सामने आ सकेगी।

खामोशी की ताकत: आकाश सैनी का एशिया कप तक सफर

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खामोशी से इतिहास रचने वाला बेटा: मूकबधिर आकाश सैनी का भारतीय डेफ टीम एशिया कप के लिए चयन


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।यह खबर सिर्फ एक खिलाड़ी के चयन की नहीं है, यह कहानी है उस जज़्बे की जिसने खामोशी को ताकत बना दिया। कुशीनगर नगर पालिका क्षेत्र के पकवा इनार निवासी मूकबधिर आकाश सैनी का भारतीय डेफ टीम एशिया कप के लिए चयन हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे जिले और देश के लिए गर्व का विषय है। आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे—और यही बात इस कहानी को ऐतिहासिक बनाती है।
जन्म से मूकबधिर होने के बावजूद आकाश सैनी ने कभी अपनी स्थिति को कमजोरी नहीं माना। जहां बहुत से लोग शब्दों के सहारे आगे बढ़ते हैं, वहीं आकाश ने अनुशासन, मेहनत और निरंतर अभ्यास से अपनी पहचान बनाई। आज जब आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप के लिए चुने गए हैं, तो यह साबित हो गया है कि सीमाएं परिस्थितियों की होती हैं, सपनों की नहीं।

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पिता का संबल, बेटे का सपना
आकाश सैनी, नंदलाल सैनी के पुत्र हैं। उनके संघर्ष भरे सफर में पिता नंदलाल सैनी एक मजबूत ढाल बनकर हर मोड़ पर साथ खड़े रहे। सीमित संसाधन, आर्थिक कठिनाइयां और सामाजिक उपेक्षा—इन सबके बीच पिता ने बेटे के सपनों को अपना सपना बना लिया। खेल किट से लेकर अभ्यास तक, हर ज़रूरत को पूरा करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। यही वजह है कि आज आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप के मंच तक पहुंचे हैं।
मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास
आकाश की दिनचर्या अनुशासन का उदाहरण रही है। नियमित अभ्यास, फिटनेस पर फोकस और कोचों की सलाह को गंभीरता से अपनाना—यही उनकी सफलता की कुंजी बनी। खेल के मैदान पर उनका फोकस और प्रदर्शन बताता है कि प्रतिभा को बस सही मंच और समर्थन चाहिए। आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप के लिए चुने गए हैं, क्योंकि उन्होंने मैदान पर खुद को साबित किया है।

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इशारों में भावनाएं, आंखों में गर्व
एक छोटे से साक्षात्कार में आकाश ने इशारों में अपनी भावनाएं साझा कीं। भारतीय टीम की जर्सी पहनना उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना रहा है। उन्होंने अपने पिता की ओर देखते हुए धन्यवाद जताया—वह पल भावनाओं से भरा था। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। यह दृश्य बताता है कि जीत सिर्फ पदक की नहीं होती, रिश्तों और विश्वास की भी होती है।
समाज के लिए प्रेरणा
आकाश सैनी का चयन समाज के लिए एक मजबूत संदेश है—कमज़ोरी अभिशाप नहीं, अगर उसे ताकत में बदला जाए। वे कहते हैं कि भारतीय डेफ टीम एशिया कप में खेलकर वे हर उस मूकबधिर बच्चे को प्रेरित करना चाहते हैं, जो चुपचाप सपने देखता है। उनका मानना है कि प्रतिभा को सहानुभूति नहीं, अवसर चाहिए।

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जिले में जश्न का माहौल
आकाश सैनी की इस उपलब्धि से पकवा इनार गांव समेत पूरे कुशीनगर जिले में खुशी की लहर है। लोगों ने मिठाइयां बांटीं, शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह जीत गांव की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय गौरव बन गई है। आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप में उतरेंगे—यह खबर युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

डेफ स्पोर्ट्स का बढ़ता सम्मान

भारत में डेफ स्पोर्ट्स को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। आकाश सैनी जैसे खिलाड़ी इस बदलाव के चेहरे हैं। उनकी सफलता बताती है कि समावेशी खेल व्यवस्था और निरंतर समर्थन से असाधारण परिणाम मिल सकते हैं। आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप में देश का परचम लहराने के लिए तैयार हैं—और पूरा देश उनके साथ है।
आज आकाश सैनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं हैं,
वे उन लाखों मूकबधिर युवाओं की आवाज़ हैं,
जो खामोशी में भी बड़े सपने देखते हैं—और उन्हें सच करने की हिम्मत रखते हैं।

साहिबगंज हत्या कांड: ग्रामीणों का सड़क जाम, पुलिस पर दबाव

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साहिबगंज में टोटो स्टैंड विवाद बना खूनी संघर्ष, एक की मौत, सड़क जाम से हालात तनावपूर्ण


साहिबगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)झारखंड के साहिबगंज जिले के राजमहल थाना क्षेत्र अंतर्गत कल्याणचक गांव में सोमवार सुबह टोटो स्टैंड पर सवारी बैठाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। इस घटना में टोटो चालक मंतोष कुमार की मौत हो गई, जबकि उनका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया और आक्रोशित ग्रामीणों ने तालझारी–तीनपहाड़ मुख्य सड़क जाम कर दी।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह कल्याणचक दुर्गा मंदिर प्रांगण के पास स्थित टोटो स्टैंड पर सवारी को लेकर दलाही निवासी मंतोष कुमार और काला बहियार निवासी जमशेद अंसारी के पुत्र के बीच कहासुनी हुई। विवाद बढ़ने पर जमशेद का पुत्र मौके से चला गया, लेकिन कुछ देर बाद अपने भाइयों के साथ वापस लौटकर टोटो स्टैंड पर दोबारा विवाद शुरू कर दिया।
इसी दौरान आरोप है कि एक युवक ने रॉड और चाकू से मंतोष कुमार पर जानलेवा हमला कर दिया। शोर सुनकर मंतोष का भाई बीच-बचाव के लिए पहुंचा, लेकिन उस पर भी रॉड से हमला किया गया। हमले के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। आसपास के लोगों ने दोनों घायलों को अनुमंडलीय अस्पताल, राजमहल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मंतोष कुमार को मृत घोषित कर दिया। घायल भाई की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।

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मंतोष की मौत की खबर फैलते ही कल्याणचक और आसपास के इलाकों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए ग्रामीणों ने तालझारी–तीनपहाड़ मुख्य सड़क को जाम कर दिया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे। जाम की सूचना मिलते ही राजमहल थाना प्रभारी हसनैन अंसारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजमहल पुलिस इंस्पेक्टर राजीव रंजन, तीनपहाड़ थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार पांडे और राधानगर थाना प्रभारी अमर कुमार मिंज अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, सड़क जाम नहीं हटेगा।
घटना के बाद कल्याणचक बाजार की सभी दुकानें बंद करा दी गईं। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

ग्वाल टोली हादसा: लग्जरी कार, बाउंसर और पुलिस—सवालों के घेरे में सिस्टम

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कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा: वीडियो में दिखा ड्राइवर, FIR में ‘अज्ञात’—पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल


कानपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा ने न सिर्फ एक भीषण सड़क दुर्घटना को उजागर किया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रविवार दोपहर ग्वाल टोली इलाके में एक तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार दुर्घटना का शिकार हुई, जिसमें एक पैदल यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के वीडियो सामने आने के बाद विवाद इसलिए गहराया क्योंकि वीडियो में कार से एक युवक साफ तौर पर बाहर निकलता दिख रहा है, जबकि पुलिस ने FIR में आरोपी को “अज्ञात ड्राइवर” बताया है।

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क्या है पूरा मामला
प्रत्यक्षदर्शियों और FIR के अनुसार, लैंबॉर्गिनी कार तेज गति और लापरवाही से चलाई जा रही थी। कार पहले एक खड़ी बुलेट मोटरसाइकिल से टकराई, फिर फुटपाथ पर चढ़ गई और वहां खड़े लोगों को चपेट में ले लिया। इस कानपुर सड़क हादसा में मोहम्मद तौफीक (उर्फ तौफीक अहमद) नामक पैदल यात्री के पैर में गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। कार रुकने से पहले एक ऑटो-रिक्शा से भी टकराई।
वीडियो बनाम FIR: असली विवाद

हादसे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए, जिनमें एक व्यक्ति को दुर्घटनाग्रस्त लैंबॉर्गिनी कार से बाहर निकलते देखा गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान तंबाकू व्यापारी ए.के. मिश्रा के बेटे शिवम के रूप में की गई है। इसके बावजूद FIR में नाम दर्ज नहीं किया गया। यही विरोधाभास कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा को लेकर सबसे बड़ा सवाल बन गया है—जब पहचान हो चुकी है, तो FIR में नाम क्यों नहीं?

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पुलिस का पक्ष और उठते सवाल
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (सेंट्रल) अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है और गाड़ी जब्त कर ली गई है। पुलिस का प्रारंभिक दावा है कि ड्राइवर को गाड़ी चलाते समय चक्कर आया या दौरा पड़ा, जिससे नियंत्रण खो गया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी हाई-परफॉर्मेंस कार के मामले में यह तर्क कई सवाल खड़े करता है—यदि ड्राइवर को मेडिकल एपिसोड का इतिहास था, तो वह ऐसी कार कैसे चला रहा था?
पुलिस स्टेशन के दृश्य और विशेष व्यवहार के आरोप
हादसे के बाद पुलिस स्टेशन के अंदर के दृश्य भी सामने आए। वीडियो में दिखा कि लैंबॉर्गिनी कार को चादर से ढका जा रहा है, जिसका वहां मौजूद लोगों ने विरोध किया। आरोप है कि आरोपी से जुड़े निजी बाउंसर कार की रखवाली करते दिखे और पीड़ितों के परिजनों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। इन घटनाओं ने कानपुर पुलिस कार्रवाई पर पक्षपात के आरोपों को और हवा दी।

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पीड़ित की आपबीती
घायल तौफीक अहमद ने बताया कि वह फुटपाथ पर खड़ा था, तभी अचानक कार उसकी ओर आ गई। परिवार ने सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए वीडियो सबूतों को निष्पक्ष जांच का आधार बनाने की अपील की है।
कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा अब केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि कानून, जवाबदेही और समान न्याय की परीक्षा बन चुका है।

बिहार विधानसभा में विपक्ष का उग्र प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था पर सरकार घिरी

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बिहार विधानसभा बजट सत्र में हंगामा: पप्पू यादव की गिरफ्तारी और बढ़ते अपराध पर विपक्ष का जोरदार विरोध


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरू होते ही सदन के अंदर और बाहर सियासी घमासान तेज हो गया। सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी और बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। राजद, कांग्रेस समेत कई दलों के विधायकों ने सदन के भीतर पोस्टर और नारेबाजी के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया, वहीं सदन के बाहर भी प्रदर्शन हुआ।
राजद विधायकों के हाथों में पोस्टर थे, जिन पर लिखा था— “रेप, हत्या, किडनैपिंग कब रुकेगी? कानून है, पर डर नहीं। जवाब दो सरकार।” विपक्ष का आरोप है कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

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पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर विपक्ष का हमला
पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस और राजद ने सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन सदन में खास टी-शर्ट पहनकर पहुंचे, जिस पर लिखा था— “आज जेल होई, काल बेल होई, परसों से वही खेल होई।”
कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने कहा कि नीट छात्रा के परिवार को न्याय दिलाने के लिए जंतर-मंतर पर धरना प्रस्तावित था, लेकिन उससे पहले ही पप्पू यादव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनका कहना था कि “जो न्याय की आवाज उठाएगा, उसे जेल भेजा जा रहा है।”

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31 साल पुराने मामले पर गिरफ्तारी का सवाल
कांग्रेस विधायक कमरूल होदा ने कहा कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी 31 साल पुराने मामले में की गई, जबकि वे अदालत में पेश होने को तैयार थे। आरोप है कि पुलिस ने रात में सिविल ड्रेस में उन्हें उठाया। कमरूल होदा ने कहा, “बिहार में लोकतंत्र नहीं, राजतंत्र चल रहा है। हर दिन हत्या, डकैती हो रही है, प्रशासन फेल है।”
दरभंगा रेप केस ने बढ़ाया आक्रोश
दरभंगा रेप केस में बच्ची के साथ दुष्कर्म और मौत की घटना ने विपक्ष के गुस्से को और भड़का दिया। राजद के प्रधान महासचिव और विधायक रणविजय साहू ने कहा कि पिछले एक महीने से बच्चियों के खिलाफ अपराध बढ़े हैं। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में तानाशाही जैसा माहौल बन गया है।
कांग्रेस विधायक कमरूल होदा ने पटना और दरभंगा की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार सच्चाई छुपाने की कोशिश कर रही है और अपराधियों पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हुई है।

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सदन के अंदर भी बाधित रही कार्यवाही
जानकारी के अनुसार, विपक्षी विधायकों ने सदन के अंदर पार्टी कार्यालयों और वेल में भी हंगामा किया, जिससे बजट सत्र की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष का साफ संदेश है कि जब तक पप्पू यादव की गिरफ्तारी और बिहार अपराध पर सरकार जवाब नहीं देती, विरोध जारी रहेगा।

निर्विकार प्रेम कविता: भक्ति, धर्म और ईश्वर का सार

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— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

प्रेम केवल भावना नहीं, यह भक्ति का स्वरूप है,
प्रेम पूजा है, जहां न स्वार्थ है, न अहंकार का रूप है।
जब प्रेम निस्वार्थ बन जाए, वही सच्ची सेवा कहलाए,
और जब हर प्राणी से प्रेम हो, वही धर्म बन जाए।

प्रेम केवल किसी एक से नहीं, स्वयं से भी होता है,
जो खुद से प्रेम करता है, वही संसार से जुड़ा होता है।
प्रेम में ही ईश्वर का साक्षात वास माना गया है,
क्योंकि प्रेम ही ईश्वर है और ईश्वर ही प्रेम कहा गया है।

जहां प्रेम में पवित्रता है, वहां सम्मान अपने आप है,
प्रेम ही राधा है, प्रेम ही श्रीकृष्ण का भाव है।
प्रेम लीनता है, विकारों से परे एक अवस्था है,
जहां न कोई भेद है, न कोई स्वार्थ की व्यथा है।

प्रेम की न कोई सीमा है, न कोई परिभाषा,
यह निराकार भी है और साकार भी—यही इसकी भाषा।
पूरा संसार प्रेम से ही संचालित हो रहा है,
क्योंकि प्रेम में ही जीवन का वास्तविक अर्थ छिपा है।

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संत कबीर नगर: जनसुनवाई में एसपी ने सुनीं शिकायतें, त्वरित निस्तारण के निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनसुनवाई को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने जनसुनवाई के दौरान फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना। इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिकायतकर्ताओं ने अपनी समस्याएं पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखीं।

जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों पर एसपी संदीप कुमार मीना ने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

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पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और समस्याओं के समाधान की प्रगति से उन्हें अवगत कराया जाए। जनसुनवाई के माध्यम से आमजन की समस्याओं को सीधे सुनकर त्वरित कार्रवाई करने से पुलिस-जन संवाद को और मजबूत किया जा रहा है।

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चेतना महोत्सव-2026 में विद्यार्थियों की प्रतिभा का हुआ सम्मान

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। साहित्य चेतना समाज, गाजीपुर की मऊ इकाई द्वारा आयोजित वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह “चेतना महोत्सव-2026” का आयोजन प्राथमिक विद्यालय कोपागंज के प्रांगण में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर जनपदस्तरीय गणित, सामान्य ज्ञान एवं निबंध प्रतियोगिता-2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्मृति-चिह्न और प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि राजेश अग्रवाल (उपजिलाधिकारी, मधुबन) रहे। विशिष्ट अतिथियों में नूपुर अग्रवाल (पूर्व अध्यक्ष, भाजपा मऊ) एवं प्रभात सिंह (सहायक श्रम आयुक्त, मऊ) शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाजसेवी बिनोद कुमार श्रीवास्तव ने की।

संस्था के अध्यक्ष बालकृष्ण ठरड ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य चेतना समाज पिछले 40 वर्षों से बिना किसी शासकीय वित्तीय सहायता के विद्यार्थियों और युवाओं की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें मंच प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य शिक्षा, साहित्य और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना है।

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गणित प्रतियोगिता में कनिष्ठ वर्ग से यश यादव ने प्रथम, आर्यन यादव ने द्वितीय और अंशु यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं ज्येष्ठ वर्ग में गौरव प्रजापति प्रथम तथा शीतल गुप्ता द्वितीय स्थान पर रहे।

सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग में आंचल चौहान और काजल यादव संयुक्त रूप से प्रथम, जान्हवी यादव द्वितीय तथा श्रेया यादव तृतीय रहीं। ज्येष्ठ वर्ग में मधु संगम मौर्य ने प्रथम, सिया सिंह ने द्वितीय और पंकज राजभर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

निबंध प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग में आराध्या यादव प्रथम, शालिनी गुप्ता द्वितीय और तनीषा चौहान तृतीय रहीं। जबकि मध्यम वर्ग में खुशी प्रथम, संजना द्वितीय और वंदना तृतीय स्थान पर रहीं। इसके अतिरिक्त कई विद्यार्थियों को प्रशंसित श्रेणी में भी सम्मानित किया गया।

अतिथियों ने चयनित विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए साहित्य चेतना समाज के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होता है। समारोह में विभिन्न विद्यालयों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं, उनके अभिभावक, प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन संस्था के उपाध्यक्ष शिवाकांत सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संस्था के सचिव शिवम् पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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संत कबीर नगर: बिना आदेश कट रहे हरे पेड़, वन माफियाओं का खेल बेखौफ जारी

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। संत कबीर नगर जिले में वन माफियाओं की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला सेमरियावां ब्लॉक के बूधा खुर्द चौराहे का है, जहां आम और महुआ जैसे बहुमूल्य हरे पेड़ों की अवैध कटान खुलेआम जारी है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, माफिया पहले पेड़ों के ऊपरी हिस्से को काटते हैं और फिर रात के अंधेरे में पूरे पेड़ को धराशायी कर देते हैं, ताकि किसी को इसकी भनक न लगे।

ग्रामीणों का कहना है कि इसी स्थान पर पहले भी इसी तरह पेड़ों की कटान की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो किसी तरह का वैध आदेश दिखाया गया और न ही संबंधित विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई की गई। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि बिना अनुमति और आदेश के यह अवैध कटान आखिर किसके संरक्षण में हो रही है।

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क्षेत्र के लोगों के अनुसार, अवैध कटान की शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन इसके बावजूद वन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लगातार हो रही पेड़ों की कटान से न केवल पर्यावरण संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। आम और महुआ जैसे पेड़ ग्रामीण जीवन और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र की हरियाली पूरी तरह समाप्त हो सकती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब इस मामले का संज्ञान लेते हैं और वन माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं।

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रेलवे में जगह नहीं, होली पर घर आना हुआ मुश्किल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। होली का पर्व जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे घर लौटने की तैयारी कर रहे प्रवासी यात्रियों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। लंबी दूरी की अधिकांश ट्रेनों में पहले से ही सीटें फुल हो चुकी हैं और वेटिंग लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है। कई ट्रेनों में स्लीपर और एसी कोच की वेटिंग 150 से 200 के पार पहुंच चुकी है, जिससे यात्रियों की उम्मीदें अब केवल तत्काल टिकट पर टिकी हैं।

चार मार्च को होली का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। इसे देखते हुए मुंबई, अहमदाबाद, सूरत और लुधियाना जैसे बड़े शहरों से बलिया व आसपास के क्षेत्रों में आने वाली ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ देखी जा रही है। रेलवे आरक्षण प्रणाली के अनुसार मुंबई से आने वाली पवन एक्सप्रेस (11061 डाउन) में तीन मार्च तक स्लीपर क्लास पूरी तरह हाउसफुल है, जबकि एसी कोच में वेटिंग 179 तक पहुंच गई है।

अहमदाबाद से आने वाली साबरमती एक्सप्रेस में भी स्लीपर क्लास में कोई सीट उपलब्ध नहीं है और थर्ड एसी में 65 यात्रियों की वेटिंग चल रही है। वहीं लुधियाना से चलने वाली सरयू-यमुना एक्सप्रेस में स्लीपर श्रेणी में 125 तक वेटिंग दर्ज की गई है। सूरत से आने वाली ताप्ती-गंगा एक्सप्रेस में भी स्लीपर में 125 और एसी में 52 यात्रियों की प्रतीक्षा सूची है।

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लगातार बढ़ती वेटिंग के चलते प्रवासी श्रमिकों और नौकरीपेशा लोगों में मायूसी साफ दिखाई दे रही है। यात्रियों का कहना है कि उन्होंने कई हफ्ते पहले टिकट बुक कराने की कोशिश की, लेकिन तब भी सीट नहीं मिल सकी।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। फिलहाल होली को लेकर किसी विशेष स्पेशल ट्रेन की घोषणा नहीं हुई है। यात्रियों को तत्काल टिकट, वैकल्पिक रूट और अन्य परिवहन साधनों पर भी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

कुल मिलाकर, इस बार होली पर घर पहुंचना आसान नहीं दिख रहा और हजारों यात्रियों की निगाहें रेलवे के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

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बाकला की सब्जी से पार्किंसन पर काबू, IIVR का बड़ा शोध

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। पौष्टिक आहारों में शामिल पारंपरिक सब्जी बाकला (फाबा बीन) अब दिमागी रोगों के इलाज में नई उम्मीद बनकर सामने आई है। वाराणसी के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) के वैज्ञानिकों के शोध में यह सामने आया है कि बाकला की सब्जी पार्किंसन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी में सहायक साबित हो सकती है।

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के अनुसार वैज्ञानिकों ने बाकला की 100 से अधिक प्रजातियों पर अध्ययन किया, जिसके बाद एक उन्नत किस्म ‘काशी संपदा’ विकसित की गई। इस किस्म में एल-डोपा (L-DOPA) नामक प्राकृतिक अमीनो एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में जाकर डोपामिन में बदल जाता है।

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डोपामिन मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाता है। पार्किंसन रोग में डोपामिन बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिससे हाथ-पैर कांपना, संतुलन बिगड़ना और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

IIVR के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इंदीवर प्रसाद के अनुसार बाकला के दानों में उच्च मात्रा में प्रोटीन, लाइसिन और लेवोडोपा पाया जाता है। अंकुरित बाकला का सेवन, भुने हुए दाने या आटे के रूप में इसका उपयोग पोषण को और अधिक बढ़ा देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि काशी संपदा किस्म का व्यापक प्रसार न केवल स्वास्थ्य लाभ देगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक होगा।

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