Tuesday, May 5, 2026
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शेखपुर में तिलक समारोह के दौरान युवक की बाइक चोरी

सिकन्दरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जनपद के सिकन्दरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शेखपुर गांव में तिलक समारोह के दौरान बाइक चोरी की घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। कार्यक्रम में शामिल होने आए युवक की नई बाइक अज्ञात उचक्कों द्वारा चोरी कर ली गई। पीड़ित ने मामले की सूचना पुलिस को देकर लिखित तहरीर सौंपी है और जल्द कार्रवाई की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार की रात नगरा थाना क्षेत्र के लहसनी गांव निवासी अनिल शर्मा के यहां से शेखपुर गांव निवासी अरविंद शर्मा पुत्र आत्मा शर्मा के यहां तिलक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अनिल शर्मा का पुत्र मोनू शर्मा अपनी नई होंडा शाइन बाइक (नंबर यूपी 60 एएक्स 3266) से शेखपुर गांव पहुंचा था।

तिलक समारोह के दौरान वधु पक्ष के लोग जलपान करने के बाद गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास रुके हुए थे। इसी दौरान मोनू शर्मा ने अपनी बाइक अन्य लोगों की गाड़ियों के साथ विद्यालय के पास खड़ी कर दी। इसके बाद सभी लोग तिलक की रस्म अदा करने के लिए वर पक्ष के दरवाजे पर चले गए।

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इसी बीच मौका पाकर अज्ञात उचक्कों ने मोनू शर्मा की बाइक चोरी कर ली। जब तिलक की रस्म पूरी होने के बाद मोनू अन्य लोगों के साथ वापस लौटा, तो वहां अपनी बाइक न पाकर वह हैरान रह गया। इसके बाद आसपास के लोगों की मदद से काफी तलाश की गई, लेकिन बाइक का कोई सुराग नहीं मिल सका।

काफी खोजबीन के बाद पीड़ित युवक ने डायल 112 पर सूचना दी और इसके बाद सिकन्दरपुर थाने पहुंचकर लिखित तहरीर सौंपी। पीड़ित ने पुलिस से चोरी की घटना को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की है।

समाचार लिखे जाने तक पुलिस बाइक चोरी की घटना का खुलासा नहीं कर सकी थी। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि पारिवारिक कार्यक्रमों के दौरान इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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देवरिया: बालपुर खुर्द में राज्य स्तरीय फुटबॉल मुकाबला, कुरुक्षेत्र की जीत

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सलेमपुर विकास क्षेत्र के बालपुर खुर्द में आयोजित स्वर्गीय फूल मुहम्मद मेमोरियल राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता के तहत हरियाणा के कुरुक्षेत्र और गोरखपुर की टीमों के बीच रोमांचक मुकाबला खेला गया। कड़े संघर्ष के बाद कुरुक्षेत्र की टीम ने गोरखपुर को पराजित कर जीत दर्ज की।

यह प्रतियोगिता ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से स्वर्गीय फूल मुहम्मद द्वारा शुरू की गई थी। उनके इंतकाल के बाद सिंटू भाई उर्फ शिफ्ते हसन द्वारा इस खेल परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

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मैच के दौरान खिलाड़ियों का जोश और अनुशासन देखने लायक रहा। बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों ने तालियों के साथ खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। आयोजन में खेल भावना और सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहा।

इस प्रतियोगिता के सफल आयोजन में अध्यक्ष जियाउल्लाह हसन, कोषाध्यक्ष सरफराज खान, भट्टू खान सहित अन्य पदाधिकारियों की अहम भूमिका रही। आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना और उनकी प्रतिभा को निखारना है।

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देवरिया: प्यासी गांव की दलित बस्ती में जलजमाव, ग्रामीणों ने चंदे से संभाली व्यवस्था

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जनपद के सलेमपुर विकासखंड अंतर्गत प्यासी गांव की दलित बस्ती (खटीक टोला) में लंबे समय से जलजमाव और गंदगी की गंभीर समस्या बनी हुई है। चारों ओर दूषित पानी भरा रहने और दुर्गंध फैलने से ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन हो गया है। हालात ऐसे हैं कि मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण नाली का गंदा पानी आसपास के खेतों और कुछ किसानों की निजी जमीन में भर रहा है। इससे खेती को नुकसान पहुंच रहा है और लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या उस समय और गंभीर हो गई, जब नाली की जमीन पर कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया, जिसके चलते पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई।

देवरिया प्रशासन की अनदेखी के बीच ग्रामीणों ने चंदे से संभाली जलनिकासी की जिम्मेदारी।

बार-बार शिकायत करने के बावजूद जब प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो निराश ग्रामीणों ने खुद ही पहल करने का निर्णय लिया। बस्ती के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर जलनिकासी की समस्या के समाधान की कोशिश शुरू कर दी है।

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ग्रामीण संजय सिंह और विकास कुमार ने बताया कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा। सभी ग्रामीणों ने मिलकर आपसी सहयोग से धन जुटाया और चंदा देने वालों की सूची पर्ची के माध्यम से तैयार की गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नाली पर हुए अवैध कब्जे को हटाया जाए और स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में बस्ती को इस तरह की समस्या से निजात मिल सके।

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बरहज: घंटों बाधित रही बिजली आपूर्ति, बरहज में लोग रहे परेशान

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विद्युत तार में आए फाल्ट के कारण बरहज क्षेत्र में शनिवार रात लगभग 12 बजे से रविवार शाम 6 बजे तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित रही। करीब 18 घंटे तक चली इस कटौती के चलते आम जनता को पानी भरने, मोबाइल व बैटरी चार्ज करने समेत रोजमर्रा की जरूरतों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

विद्युत विभाग के अनुसार मुख्य लाइन में गंभीर फाल्ट आ जाने के कारण बिजली सप्लाई बंद करनी पड़ी। रात के समय फाल्ट का सटीक पता न चल पाने के कारण मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका, जिससे लोगों की रात अंधेरे में गुजरी। रविवार सुबह पानी की किल्लत को लेकर लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।

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रविवार सुबह बिजली विभाग के कर्मचारी फाल्ट तलाशने में जुट गए। पहला फाल्ट बेलडाढ़ के पास मिला, जहां लाइन टूट गई थी। इसे ठीक करने के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिसके बाद कर्मचारी फाल्ट खोजते हुए देवरिया की ओर बढ़े।

लगातार जांच के बाद शाम करीब चार बजे कतरारी मोड़ के पास एक हैवी फाल्ट मिला। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद शाम छह बजे बिजली आपूर्ति बहाल की गई, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।

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लक्ष्य फाउंडेशन व उद्धारक इंटरप्राइजेज ने चलाया स्वच्छता जागरूकता अभियान, कूड़ा अलग रखने पर दिया प्रशिक्षण

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत लक्ष्य फाउंडेशन एवं उद्धारक इंटरप्राइजेज के संयुक्त तत्वावधान में नगर पालिका परिषद गौरा बरहज के वार्ड नंबर 18, पटेल नगर दक्षिणी पश्चिमी में स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान चौपाल कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय लोगों को कचरा संग्रहण की सही विधि और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक एवं प्रशिक्षित किया गया।

कार्यक्रम में लोगों को बताया गया कि गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग रखना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि यह बेहतर स्वास्थ्य और साफ-सफाई की गारंटी है। विशेषज्ञों ने समझाया कि मिला-जुला कूड़ा जहां बीमारी और अव्यवस्था का कारण बनता है, वहीं अलग किया गया कूड़ा संसाधन के रूप में उपयोगी सिद्ध होता है और उसके निस्तारण में भी आसानी होती है।

चौपाल में यह संदेश भी दिया गया कि स्वच्छता केवल नगर पालिका की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। जब प्रत्येक घर से कूड़ा सही तरीके से अलग-अलग निकलने लगेगा, तभी शहर वास्तविक अर्थों में स्वच्छ और सुंदर बन सकेगा।

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इस जागरूकता अभियान में नगर पालिका परिषद गौरा बरहज की अधिशासी अधिकारी निरुपमा प्रताप, नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल, DPM यदवेश यादव, रत्नाकर तिवारी, शक्ति मिश्रा, SBM प्रमुख शंभु दयाल भारती, वार्ड सभासद शुभम निषाद सहित प्रशिक्षक कुमारी संज्ञा, कुमारी किरण, शिवम निषाद, अतुल तिवारी, सुधीर सोनी, सफाई नायक, सफाईकर्मी एवं बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने स्वच्छता अपनाने और कूड़ा पृथक्करण को नियमित रूप से करने का संकल्प लिया।

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जब अधिकारों के साथ कर्तव्यों की समझ विकसित होती है, तब राष्ट्रहित सर्वोपरि बनता है

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चंद्रकांत सी. पूजारी, गुजरात

किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की मजबूती केवल उसके संविधान, कानून या शासन-प्रणाली पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके नागरिकों की सोच, आचरण और कर्तव्य-बोध पर भी समान रूप से आधारित होती है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता में निहित होती है और जनता तभी सशक्त बनती है, जब वह अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे और उनका पालन करे। अधिकार और कर्तव्य नागरिक जीवन के दो ऐसे महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो एक-दूसरे के पूरक हैं और जिनका संतुलन ही एक स्वस्थ, समरस और सुदृढ़ समाज की नींव रखता है।

जब व्यक्ति केवल अपने अधिकारों की मांग करता है और अपने कर्तव्यों से विमुख रहता है, तब समाज में असंतुलन, अव्यवस्था और टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसी सोच सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करती है और आपसी अविश्वास को जन्म देती है। इसके विपरीत, जब नागरिक अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समान महत्व देते हैं, तब वे जाति, धर्म, भाषा और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के बारे में सोचने लगते हैं।

भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान किए हैं, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या सामाजिक वर्ग से संबंधित क्यों न हो। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार हमारे लोकतंत्र की पहचान हैं। लेकिन ये अधिकार तभी सुरक्षित और सार्थक रह सकते हैं, जब उनके साथ कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन किया जाए। कर्तव्य हमें यह सिखाते हैं कि हमारी स्वतंत्रता वहीं तक है, जहां तक दूसरों की स्वतंत्रता बाधित न हो।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A में वर्णित मौलिक कर्तव्य इसी संतुलन का जीवंत उदाहरण हैं। वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े गए इन कर्तव्यों में प्रमुख है—भारत के सभी लोगों के बीच धार्मिक, भाषाई, क्षेत्रीय या सांप्रदायिक भेदभाव से ऊपर उठकर सद्भाव और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना। यह कर्तव्य नागरिकों को जाति-धर्म की संकीर्णताओं से ऊपर उठने और राष्ट्र की एकता व अखंडता को सर्वोपरि मानने की प्रेरणा देता है।

जब कोई नागरिक इस कर्तव्य का पालन करता है, तो वह अपने अधिकारों का प्रयोग जिम्मेदारी और विवेक के साथ करता है। समाज में ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं, जब लोग आपदा, सामाजिक कार्यों या दैनिक जीवन में जाति और धर्म से ऊपर उठकर एक-दूसरे की सहायता करते हैं। यही व्यवहार राष्ट्रहित की वास्तविक अभिव्यक्ति है।

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जब नागरिक यह समझने लगता है कि उसके अधिकार दूसरों के कर्तव्यों से जुड़े हैं और दूसरों के अधिकार उसके स्वयं के कर्तव्यों से, तब समाज में आपसी सम्मान, सहयोग और सह-अस्तित्व की भावना विकसित होती है। यही भावना एक सभ्य और समरस समाज का निर्माण करती है।
वर्तमान समय में जाति और धर्म के आधार पर समाज का विभाजन एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। कई बार व्यक्तिगत स्वार्थ या समूह विशेष के हितों को राष्ट्रहित से ऊपर रख दिया जाता है। इसका प्रमुख कारण कर्तव्य-बोध की कमी है। जब नागरिक केवल अपने अधिकारों पर जोर देते हैं, लेकिन सामाजिक सद्भाव, सहिष्णुता और जिम्मेदार व्यवहार जैसे कर्तव्यों को नजरअंदाज करते हैं, तब मतभेद और तनाव बढ़ते हैं।

इसके विपरीत, जो नागरिक अपने कर्तव्यों को समझते हैं, वे यह जानते हैं कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और शांति बनाए रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। वे यह भी समझते हैं कि आलोचना का अधिकार विवेक, मर्यादा और जिम्मेदारी के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।

कर्तव्य-बोध व्यक्ति को व्यापक और दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रदान करता है। वह यह समझने लगता है कि राष्ट्र केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं का सुंदर समन्वय है। जब नागरिक यह स्वीकार करता है कि देश की प्रगति में सभी वर्गों का योगदान आवश्यक है, तब जाति और धर्म के भेद स्वतः ही गौण हो जाते हैं।

इस संदर्भ में शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि शिक्षा केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित न रहकर नैतिक मूल्यों, संवैधानिक आदर्शों और नागरिक कर्तव्यों की समझ विकसित करे, तो आने वाली पीढ़ी अधिक जागरूक, संवेदनशील और राष्ट्रनिष्ठ बनेगी। परिवार, विद्यालय और समाज—तीनों की जिम्मेदारी है कि बच्चों में यह संस्कार विकसित किए जाएं कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी अनिवार्य है।

अंततः कहा जा सकता है कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। केवल अधिकारों की चर्चा से न तो सशक्त समाज का निर्माण संभव है और न ही मजबूत राष्ट्र का। जब नागरिक कानून का पालन करते हैं, दूसरों के प्रति सम्मान रखते हैं, सामाजिक सौहार्द बनाए रखते हैं और राष्ट्र की एकता को सर्वोपरि मानते हैं, तब वे जाति-धर्म के संकीर्ण भेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को अपना ध्येय बना लेते हैं। यही सोच एक सशक्त, एकजुट और प्रगतिशील भारत की सच्ची नींव रखती है।

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तीन तल, तीन टनल और दो कॉरिडोर: पटना मेट्रो का मास्टर प्लान

पटना मेट्रो जंक्शन स्टेशन बनेगा पूरे नेटवर्क का दिल, तीन लेयर में मिलेगा इंटरचेंज का आधुनिक अनुभव


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मेट्रो परियोजना के तहत जंक्शन के पास बुद्धा पार्क के समीप बन रहा पटना मेट्रो जंक्शन स्टेशन पूरे नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। यह स्टेशन न केवल आकार में सबसे बड़ा होगा, बल्कि संचालन के लिहाज से भी पटना मेट्रो की रीढ़ साबित होगा। यहां से पटना मेट्रो के दोनों प्रमुख रूट—कॉरिडोर वन और कॉरिडोर टू—की सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, जिससे यात्रियों को बिना स्टेशन बदले दिशा बदलने की सुविधा मिलेगी।

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यह इंटरचेंज स्टेशन तीन लेयर में विकसित किया जा रहा है। पहले तल पर यात्रियों के लिए टिकट काउंटर, सुरक्षा जांच द्वार, प्रवेश-निकास और अन्य मूलभूत सुविधाएं होंगी। इसके ऊपर दूसरे और तीसरे तल पर प्लेटफार्म बनाए जाएंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट की आधुनिक व्यवस्था रहेगी, ताकि भीड़ का संतुलन बना रहे और आवागमन सुगम हो।
कॉरिडोर वन और टू का सीधा इंटरचेंज
दूसरे तल से पटना मेट्रो कॉरिडोर टू की ट्रेनें चलेंगी, जो पटना मेट्रो स्टेशन से पाटलिपुत्र बस टर्मिनल तक जाएंगी। वहीं तीसरे तल से पटना मेट्रो कॉरिडोर वन की सेवाएं मिलेंगी, जो दानापुर होते हुए खेमनीचक तक जाएंगी। इस व्यवस्था से यात्रियों को लंबी दूरी तय करने में समय और मेहनत दोनों की बचत होगी।

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भूमिगत संरचना और टनल नेटवर्क
डाकबंगला चौराहा के पास दोनों कॉरिडोर की मेट्रो ट्रेनें जमीन के नीचे करीब छह मीटर की दूरी पर समानांतर चलेंगी और पटना मेट्रो जंक्शन स्टेशन तक पहुंचेंगी। आकाशवाणी की ओर से आने वाली मेट्रो लगभग 11–12 मीटर नीचे से स्टेशन के दूसरे तल तक पहुंचेगी, जबकि विद्युत भवन की दिशा से आने वाली ट्रेनें 23–24 मीटर की गहराई से तीसरे तल तक आएंगी।
इस स्टेशन से कुल तीन टनल जुड़ेंगी। आकाशवाणी की ओर जाने वाली एक टनल बनकर तैयार हो चुकी है। मीठापुर और बिजली भवन की दिशा में जाने वाली दो अन्य टनलों के लिए खुदाई का काम जल्द शुरू किया जाएगा। यह टनल नेटवर्क स्टेशन को पटना मेट्रो का सबसे व्यस्त और रणनीतिक जंक्शन बना देगा।

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निर्माण की मौजूदा स्थिति
फिलहाल साइट पर यूटिलिटी टेस्ट पिट का काम चल रहा है। इसके जरिए जमीन के नीचे मौजूद बिजली, पानी, सीवर और अन्य लाइनों की पहचान की जा रही है। इसके पूरा होते ही बड़े पैमाने पर मुख्य खुदाई कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे स्टेशन निर्माण को गति मिलेगी।
शहर की कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार
पटना मेट्रो जंक्शन स्टेशन के चालू होने के बाद शहर के लगभग सभी प्रमुख मेट्रो स्टेशनों तक सीधा संपर्क संभव होगा। यह स्टेशन न केवल यातायात को आसान बनाएगा, बल्कि राजधानी पटना को आधुनिक शहरी परिवहन के नक्शे पर नई पहचान भी देगा।

SIPB की मंजूरी से बिहार में अस्पताल और फार्मा उद्योग को बढ़ावा

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बिहार में औद्योगिक निवेश को नई रफ्तार, 47 कंपनियों के 1191 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 के तहत राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं। निवेशकों का भरोसा बढ़ने का साफ संकेत देते हुए बिहार निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) ने 47 कंपनियों के कुल 1191 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को पहला क्लियरेंस दे दिया है। यह निर्णय हाल ही में विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया।
स्वास्थ्य, होटल और फार्मा सेक्टर पर खास फोकस
इन निवेश प्रस्तावों में सबसे अहम हिस्सेदारी हेल्थ केयर सेक्टर की है। बीआईआईपीपी-2025 के अंतर्गत 581 करोड़ रुपये के 7 बड़े प्रस्तावों को हरी झंडी मिली है। इनमें 426 करोड़ रुपये के दो प्रमुख प्रस्ताव सीधे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हैं, जो बिहार में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई देंगे।

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गया में 650 बेड का अस्पताल और मेडिकल कॉलेज
सबसे बड़ा प्रस्ताव 377 करोड़ रुपये का है। इसके तहत बुद्धा हॉस्पिटल रिसर्च इंस्टीट्यूट गया में 650 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल स्थापित करेगा। साथ ही 150 एमबीबीएस सीटों वाला मेडिकल कॉलेज भी खोला जाएगा। यह परियोजना न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और मेडिकल शिक्षा के नए अवसर भी पैदा करेगी।
भागलपुर, वैशाली और पटना में नई परियोजनाएं
भागलपुर में एक कंपनी द्वारा 60 बेड का अस्पताल स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिस पर लगभग 48.87 करोड़ रुपये का निवेश होगा। वहीं फार्मास्युटिकल सेक्टर में सिलिका हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड ने वैशाली में 105 करोड़ रुपये के निवेश से विशेष दवा निर्माण इकाई लगाने का प्रस्ताव दिया है।

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राज्य निवेश प्रोत्साहन की अन्य नीतियों के तहत भी 610 करोड़ रुपये के 40 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत बाढ़ के बेलछी में 750 बेड का स्पेशियलिटी अस्पताल (72 करोड़), बेगूसराय में 90 बेड का मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल और 90 सीट का नर्सिंग कॉलेज, तथा पटना जिले के खगौल में एक आधुनिक अस्पताल निर्माण की योजनाएं शामिल हैं।
धरातल पर उतरने की तैयारी
इसी बैठक में 22 कंपनियों के 383 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को फाइनेंशियल क्लियरेंस भी दिया गया है, जिससे ये परियोजनाएं जल्द जमीन पर उतर सकेंगी। इससे बिहार में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

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निवेश के लिए आकर्षक बनता बिहार
बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 और SIPB की सक्रिय भूमिका ने राज्य को निवेशकों के लिए एक उभरते हुए गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। सरकार का लक्ष्य है कि उद्योग, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश के जरिए बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए।

3 करोड़ की सड़क पांच साल की गारंटी में ही जर्जर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत विकास खंड हैसर के प्रजापतिपुर से निकल कर निरंजनपुर से कटार मिश्र को जोड़ने वाला मार्ग योजना के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। लगभग 3.17 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह सड़क अपनी पांच वर्षीय डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के बीच ही बुरी तरह जर्जर हो चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिस पर रोजाना स्कूली बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों की आवाजाही रहती है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी सतह और धंसी हुई परत के कारण आवागमन बेहद कठिन हो गया है।
क्षेत्रीय जन राघवेंद्र पांडेय, रामकेश, राजू उपाध्याय और राजेश यादव ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे, लेकिन संबंधित ठेकेदार ने शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। सड़क बनने के कुछ ही समय बाद इसकी परत उखड़ने लगी थी।
उन्होंने ने कि वर्तमान स्थिति में सड़क पर पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है, जबकि बरसात के मौसम में गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क का शीघ्र सुदृढ़ीकरण कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
विभागीय सूत्रों के अनुसार सड़क की खराब स्थिति को स्वीकार किया गया है। बताया गया कि सड़क की पांच वर्षीय गारंटी अवधि अभी प्रभावी है। संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया गया है और तकनीकी टीम से सड़क की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। जांच के उपरांत नियमानुसार मरम्मत कराकर सड़क को गड्ढामुक्त कराया जाएगा।

दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर कार में मिले 3 शव, आत्महत्या की आशंका; पुलिस जांच में जुटी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर रविवार (8 फरवरी) को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक सफेद रंग की कार के अंदर दो पुरुष और एक महिला के शव बरामद किए गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया। शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है।

हत्या या आत्महत्या?

पुलिस के अनुसार, कार में मिले शवों में एक महिला की उम्र करीब 40 साल, एक पुरुष की उम्र 46 साल और दूसरे पुरुष की उम्र लगभग 60 साल बताई जा रही है। तीनों शव टाटा की सफेद रंग की टिगोर कार में पाए गए। प्राथमिक जांच में जहर से मौत की आशंका जताई जा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मौके से किसी तरह की लूटपाट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं, जिससे हत्या की संभावना कम लग रही है।

मृतकों की पहचान

दिल्ली पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान रणधीर सिंह (60 वर्ष), लक्ष्मी सिंह (40 वर्ष) और शिव नारायण (46 वर्ष) के रूप में हुई है। गाड़ी रणधीर सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड है। पुलिस के मुताबिक तीनों एक-दूसरे को जानते थे, लेकिन आपस में रिश्तेदार नहीं थे। प्रारंभिक जांच में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तीनों ने किसी पेय पदार्थ में जहर मिलाकर सेवन किया हो।

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पुलिस का बयान

आउटर नॉर्थ जिले के डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया,
“शाम करीब 4 बजे सूचना मिली कि एक गाड़ी में तीन लोग मौजूद हैं और कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। मौके पर पहुंचने पर दो पुरुष और एक महिला के शव मिले। शुरुआती जांच में हत्या का एंगल नहीं लग रहा है। मामले की गहराई से जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की जा रही है।”

कार और मौके की जानकारी

जिस टाटा टिगोर कार में शव मिले, वह दिल्ली के मयूर विहार आरटीओ में रजिस्टर्ड है। कार के अंदर से हेलमेट, गमछा, स्वेटर और पानी की बोतल समेत कुछ अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं। सभी सामान सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे लूट या जबरदस्ती की आशंका और कम हो गई है।

फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के नतीजों का इंतजार कर रही है, जिसके बाद मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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T20 World Cup 2026: IND vs PAK मैच पर सस्पेंस, पाकिस्तान ने ICC के सामने रखीं 3 शर्तें

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T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन क्रिकेट फैंस जिस मुकाबले का सबसे ज्यादा इंतजार कर रहे हैं—भारत बनाम पाकिस्तान—उस पर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। 15 फरवरी को प्रस्तावित इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका है। टूर्नामेंट से पहले ही पाकिस्तान सरकार ने साफ कर दिया था कि उनकी टीम वर्ल्ड कप में हिस्सा तो लेगी, लेकिन भारत के खिलाफ मैच खेलने मैदान पर नहीं उतरेगी।

पाकिस्तान सरकार के इस रुख के बाद से ही IND vs PAK मुकाबले को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इसी बीच रविवार (08 फरवरी) को खबर सामने आई कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के साथ लाहौर में एक इमरजेंसी मीटिंग की। इस बैठक के दौरान सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए तीन शर्तें रखी हैं।

पाकिस्तान ने ICC के सामने रखीं तीन मांगें

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से रखी गई तीनों शर्तें ऐसी हैं, जिनका सीधा फायदा बांग्लादेश को होता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि इन मांगों ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है।

पहली शर्त:
पाकिस्तान ने मांग की है कि बांग्लादेश के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए।

दूसरी शर्त:
दूसरी शर्त में कहा गया है कि जो बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले रहा है, उसे भी भागीदारी फीस दी जाए। यानी बिना खेले ही बांग्लादेश को ICC से हिस्सा राशि देने की मांग की गई है।

तीसरी शर्त:
पाकिस्तान की तीसरी मांग यह है कि भविष्य में बांग्लादेश को ICC के किसी बड़े इवेंट की मेजबानी सौंपी जाए।

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बांग्लादेश के पक्ष में क्यों खड़ा हुआ पाकिस्तान?

अब सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने को लेकर बांग्लादेश के हित में शर्तें क्यों रखीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश के टी20 वर्ल्ड कप से हटने के फैसले के बाद ही पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मुकाबला नहीं खेलने का रुख अपनाया।

सीधे शब्दों में कहा जाए तो पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन और सहानुभूति में भारत के खिलाफ खेलने से इनकार किया है। इसी कारण पाकिस्तान की सभी शर्तें बांग्लादेश को लाभ पहुंचाने वाली बताई जा रही हैं।

IND vs PAK मुकाबले पर टिकी हैं नजरें

भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला टी20 वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है। ऐसे में ICC के लिए भी यह फैसला बेहद अहम है। फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और क्रिकेट प्रशंसक 15 फरवरी को होने वाले संभावित IND vs PAK मैच को लेकर लगातार अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।

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जापान चुनाव 2026: सनाए ताकाइची की LDP की रिकॉर्ड जीत

जापान चुनाव 2026: जापान में प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के नेतृत्व वाली लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने एक बार फिर ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सत्ता में जोरदार वापसी की है। रविवार, 8 फरवरी 2026 को हुए संसदीय चुनावों में सत्तारूढ़ दल ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। जापानी मीडिया और पब्लिक ब्रॉडकास्टर NHK ने शुरुआती नतीजों के हवाले से इसकी पुष्टि की है।

चुनाव में मिली इस प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने NHK को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका मुख्य फोकस ऐसी नीतियों को आगे बढ़ाने पर होगा, जिनसे जापान और अधिक विकसित, मजबूत और आत्मनिर्भर बन सके। जीत के बाद ताकाइची एलडीपी मुख्यालय पहुंचीं, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ उन्होंने जीत का जश्न मनाया।

एलडीपी को ऐतिहासिक जनसमर्थन

NHK के मुताबिक, सोमवार 9 फरवरी की सुबह तक एलडीपी ने अकेले 316 सीटों पर जीत दर्ज कर ली थी। इसके साथ ही 465 सदस्यीय जापान के निचले सदन में बहुमत के लिए जरूरी 261 सीटों का आंकड़ा पार्टी ने आसानी से पार कर लिया।

यह 1955 में एलडीपी की स्थापना के बाद पहला मौका है, जब पार्टी को इतना बड़ा जनसमर्थन मिला है। इससे पहले दिवंगत प्रधानमंत्री यासुहिरो नाकासोन के नेतृत्व में 1986 में एलडीपी ने 300 सीटें जीती थीं।

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विपक्ष को नहीं मिली चुनौती देने की ताकत

प्रधानमंत्री ताकाइची को उम्मीद थी कि एलडीपी अपने नए सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी के साथ मिलकर मजबूत बहुमत हासिल करेगी, जो पूरी तरह सही साबित हुआ। वहीं, विपक्षी दलों का नया गठजोड़ सत्तारूढ़ एलडीपी के सामने कोई प्रभावी चुनौती पेश करने में नाकाम रहा।

आगे की रणनीति पर बोलीं ताकाइची

चुनावी जीत के बाद ताकाइची ने कहा कि वह अपनी नीतियों और योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विपक्षी दलों का भी सहयोग लेने की कोशिश करेंगी। हालांकि एलडीपी की लोकप्रियता बरकरार है, लेकिन पार्टी को हाल के वर्षों में फंडिंग और धार्मिक संगठनों से जुड़े स्कैंडल्स का सामना करना पड़ा है।

गौरतलब है कि ताकाइची ने प्रधानमंत्री बनने के केवल तीन महीने बाद ही समय से पहले चुनाव कराने का फैसला किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला उनकी लोकप्रियता के चरम पर रहते हुए हालात को अपने पक्ष में मोड़ने की रणनीति का हिस्सा था, जो पूरी तरह सफल रही।

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ट्रंप की 15 फीट गोल्डन प्रतिमा विवादों में, भुगतान न होने से अब तक नहीं हुई स्थापना

वॉशिंगट (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 15 फीट ऊंची गोल्डन कलर की ब्रॉन्ज प्रतिमा इन दिनों विवादों के कारण सुर्खियों में है। एक साल पहले बनकर तैयार हो चुकी यह विशालकाय प्रतिमा अब तक स्थापित नहीं की जा सकी है और खराब हालात में पड़ी हुई है। मूर्ति में ट्रंप को मुट्ठी बांधकर ऊपर उठाए हुए दिखाया गया है, जो 2024 में उन पर हुए हमले के बाद उनके जीवित बचने और समर्थकों को संदेश देने वाले आइकॉनिक पोज पर आधारित है।

प्रतिमा को तैयार करने वाले मूर्तिकार एलन कॉट्रिल ने इसके पीछे की असली वजह बताई है। उनके मुताबिक, अभी तक इस प्रतिमा का पूरा भुगतान नहीं किया गया है, जिस कारण इसे इंस्टॉल नहीं किया गया। कॉट्रिल का कहना है कि बिना पूरा भुगतान मिले प्रतिमा को स्थापित करना उनके लिए संभव नहीं है।

दो मंजिला इमारत जितनी ऊंची है प्रतिमा

डोनाल्ड ट्रंप की यह प्रतिमा करीब दो मंजिला इमारत के बराबर ऊंची है। इसे स्थापित करने के लिए 6,000 पाउंड यानी लगभग 2,720 किलो का भारी बेस तैयार किया गया था। इस प्रतिमा की कुल कीमत करीब 3,60,000 डॉलर बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रतिमा को ट्रंप के समर्थकों और क्रिप्टो निवेशकों ने बनवाया था।

मूर्तिकार एलन कॉट्रिल ने बताया कि अभी भी करीब 92,000 डॉलर का भुगतान बकाया है। जब तक यह राशि नहीं मिलती, तब तक प्रतिमा को किसी सार्वजनिक स्थान पर स्थापित नहीं किया जाएगा।

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चार महीने में बनकर तैयार हुई थी मूर्ति

73 वर्षीय मूर्तिकार एलन कॉट्रिल के अनुसार, प्रतिमा को ढालने में करीब एक महीना लगा था, जबकि इसकी फिनिशिंग में लगभग तीन महीने का समय लगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिना भुगतान के इंस्टॉलेशन करना “बेवकूफी” होगी और वह ऐसा नहीं करेंगे। इसी वजह से प्रतिमा फिलहाल एक स्थान पर रखी हुई है और इसकी हालत भी खराब होती जा रही है।

क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा है पूरा विवाद

इस प्रतिमा को लेकर विवाद की जड़ क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी हुई है। दरअसल, नवंबर 2024 में $PATRIOT नाम का मीम कॉइन मार्केट में लॉन्च किया गया था। उसी महीने डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव में जीत हासिल की थी। बाद में जनवरी में ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले उन्होंने अपनी खुद की क्रिप्टोकरेंसी $TRUMP लॉन्च कर दी।

$TRUMP के लॉन्च के बाद $PATRIOT मीम कॉइन की कीमत में भारी गिरावट देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी कीमत लगभग 95 प्रतिशत तक गिर गई। हालांकि $PATRIOT का ट्रेड अब भी जारी है। इसी मीम कॉइन से जुड़े निवेशकों ने ट्रंप की इस प्रतिमा को बनवाया था, जिसे “डॉन कोलोसस” नाम दिया गया है।

क्रिप्टो मार्केट में आई गिरावट और निवेशकों के नुकसान के कारण प्रतिमा से जुड़ा भुगतान विवाद खड़ा हो गया। इसका सीधा असर इस विशालकाय मूर्ति की स्थापना पर पड़ा है।

भुगतान विवाद के चलते अधर में प्रतिमा का भविष्य

फिलहाल ट्रंप की यह 15 फीट ऊंची गोल्डन प्रतिमा न तो किसी पार्क में लगी है और न ही किसी सार्वजनिक कार्यक्रम का हिस्सा बन पाई है। भुगतान विवाद सुलझने तक इसके भविष्य पर सवाल बने हुए हैं। यह मामला राजनीति, कला और क्रिप्टोकरेंसी—तीनों के टकराव का उदाहरण बन गया है।

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भक्ति और उल्लास से सराबोर जड़ार: भव्य कलश यात्रा के साथ प्रज्ञा पुराण कथा का शुभारंभ


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पनियरा ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत जड़ार में रविवार को आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रज्ञा पुराण कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसने पूरे गांव को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। श्रद्धा, उल्लास और सामूहिक सहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
यज्ञ स्थल से प्रारंभ हुई कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सहभागिता ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। यात्रा ग्राम सभा के विभिन्न पुरवों से होती हुई जड़ार चौराहे तक पहुंची। मार्ग में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। शंखध्वनि, भक्ति गीतों और जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।

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जड़ार चौराहे पर ग्रामवासी बच्चा पटेल द्वारा कलश यात्रियों को मीठा पानी पिलाकर आत्मीय स्वागत किया गया। यह सेवा भाव सामाजिक सौहार्द, अपनत्व और सामूहिक चेतना का प्रेरक उदाहरण बना।
कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे युगदूतों ने युग संगीत और प्रेरक प्रवचनों के माध्यम से मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण जैसे युग संदेशों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आत्मिक जागरण, चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों के बिना समाज और राष्ट्र का स्थायी उत्थान संभव नहीं है।

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यह आयोजन युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के सूक्ष्म संरक्षण तथा माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। प्रज्ञा पुराण कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नशा प्रवृत्ति, सामाजिक कुरीतियों, वैमनस्य और नैतिक पतन से समाज को मुक्त कर सकारात्मक सोच और संस्कारों का विस्तार करना है।
आयोजकों के अनुसार आगामी 9 फरवरी से प्रातः 8 बजे सामूहिक पंचकुंडीय यज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जो लगातार तीन दिनों तक चलेगा। इसमें क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता अपेक्षित है। यज्ञ और कथा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, सनातन संस्कृति संरक्षण और सामाजिक जागरण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है।

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कार्यक्रम की सफलता में ग्रामवासियों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। जड़ार और आसपास के क्षेत्रों में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण है और लोग बढ़-चढ़कर सहभागिता निभा रहे हैं। प्रज्ञा पुराण कथा न केवल आस्था का पर्व बन रही है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और नैतिक उत्थान का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हो रही है।

स्मारक सिक्कों से झलकता है प्राचीन भारत का राजनीतिक-सांस्कृतिक इतिहास

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में आयोजित “प्राचीन भारतीय अभिलेख एवं मुद्राएं–अभिरुचि कार्यशाला” के अंतर्गत छठे व्याख्यान में प्राचीन भारत के स्मारक सिक्कों के माध्यम से राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास की गहराई से व्याख्या की गई। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के आचार्य प्रो. प्रशान्त श्रीवास्तव ने “प्राचीन भारत में स्मारक सिक्के” विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि ये सिक्के केवल आर्थिक लेन-देन का माध्यम नहीं थे, बल्कि सत्ता, स्मृति और संस्कृति के प्रतीक भी थे।
उन्होंने बताया कि भारत में स्मारक सिक्कों की परंपरा इण्डो-ग्रीक शासकों के समय से दिखाई देती है। इन सिक्कों का उद्देश्य महत्वपूर्ण घटनाओं, पूर्वजों और पूर्व शासकों की स्मृति को स्थायी रूप देना था। प्रो. श्रीवास्तव के अनुसार, डायोडोटस की स्मृति में जारी सिक्कों को प्रथम स्मृति सिक्का माना जाता है। आगाथोक्लिज द्वारा छह राजाओं की स्मृति में जारी सिक्के इस परंपरा को और मजबूत करते हैं।

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व्याख्यान में यह भी बताया गया कि सिकन्दर के काल से राजतत्व के प्रतीक के रूप में सिर पर डायडन अथवा फीता बांधने की परंपरा सिक्कों पर अंकित चित्रों से प्रमाणित होती है। प्लेटो के सिक्कों पर सूर्य देव के ग्रीक स्वरूप हेलियोस का अंकन उस समय की धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं को दर्शाता है। कुषाण काल में कुजुल कदफिसस के स्मारक सिक्के विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिनसे सत्ता विस्तार और सांस्कृतिक समन्वय की झलक मिलती है।
गुप्त काल को भारतीय मुद्रा इतिहास का स्वर्णयुग माना जाता है। इस काल में कुमारदेवी प्रकार तथा समुद्रगुप्त का अश्वमेध प्रकार सिक्का स्मारक सिक्कों के रूप में स्वीकार किए जाते हैं। कुछ विद्वान गुप्तकालीन काच प्रकार और कुमारगुप्त प्रथम के अप्रतिघ प्रकार सिक्कों को भी स्मृति स्वरूप मानते हैं। इन सिक्कों से गुप्त शासकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं, धार्मिक विश्वासों और सांस्कृतिक गौरव का स्पष्ट संकेत मिलता है।
व्याख्यान के उपरांत प्रो. राजवन्त राव के निर्देशन में प्रतिभागियों को संग्रहालय की सात वीथिकाओं का शैक्षिक भ्रमण कराया गया। इस दौरान मथुरा और गांधार शैली की बौद्ध प्रतिमाओं के साथ-साथ जैन एवं वैष्णव प्रतिमाओं की जानकारी दी गई। प्रदर्शित उत्कृष्ट मृणमूर्तिकला ने प्रतिभागियों को प्राचीन शिल्प परंपरा से परिचित कराया।
कार्यशाला संयोजक डॉ. यशवन्त सिंह राठौर ने बताया कि कार्यशाला का अंतिम सप्तदिवसीय व्याख्यान 9 फरवरी 2026 को प्रातः 10 बजे यशोधरा सभागार में होगा। समापन एवं प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम पूर्वाह्न 11:30 बजे संपन्न होगा, जिसमें कुलपति प्रो. पूनम टंडन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। छठे व्याख्यान दिवस में लगभग 74 प्रतिभागियों सहित संग्रहालय के कार्मिक भी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि स्मारक सिक्कों के माध्यम से प्राचीन भारत के इतिहास को समझने का सशक्त माध्यम भी बना।