Categories: कविता

आचरण

हमारी स्वयं की राह यदि सही है,
तो किसी को सबूत क्यों देना है,
ख़ुद अपनी मंज़िल पर डटे रहना,
सबूत सभी को वक्त दे देता है।

अँधेरा हटाने में वक़्त बर्बाद होता है,
दीपक जलाने में एक पल लगता है,
दूसरों को नीचा दिखाना छोड़ खुद
को ऊँचा उठाना सार्थक होता है।

बुरे वक्त में जो सहारा देता है,
वह तो ईश्वर स्वरूप होता है,
सफल असफल होना अपने
अपने कर्म पर निर्भर होता है।

एक ओर जहाँ सफलता दुनिया
को हमारी पहचान करवाती है,
दूसरी ओर हमारी असफलता
हमें दुनिया को पहचनवाती है।

सफलता हेतु गुरु, सन्त दोनों हैं,
उनकी शिक्षा और उपदेश भी हैं,
आदित्य फिर भी हम दुःखी रहते हैं,
क्योंकि हममें वह आचरण नहीं हैं।

कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

rkpNavneet Mishra

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