भरे बसन्त मेँ हुआ
पतझड़ का अहसास,
गमगीन मौसम हुआ
गया हास-परिहास।
टोने-टोटके,बिधि-बिधान
सभी हो गये फेल,
देवी-देवताओं के माथे से
उठा अन्धविश्वास।
घर-आँगन, देहरी-दीवारें
सभी हो गये सूने,
पल भर मेँ ही टूट गयी
कई माह से बँधी जो आस।
घिग्घी उसकी बँधी रह गयी
चाहा था जब चिल्लाना,
खँजर ताने खड़े हैं सिर पर
जब देखी वह आवाक्।
थर-थर काँपे डर के मारे
मूक हो गयी माँ की ममता,
सन्नाटे में डूब गया
पलभर में बदला हालात।
जाने कहाँ उड़े सुख के बादल
बसन्ती हवा भी बनी आँधियाँ,
तनी भृकुटियाँ करा रही हैं
तूफानों का आभास।
पलभर में क्या हुआ अचानक
समझ न पाये ‘श्रीश’
क्या कुसूर है उस बेटी का ?
जन्मी है जो आज ।।
उमेश कुमार पटेल ‘श्रीश’
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) देवरिया में…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के बांसगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत कनईचा गांव में चुनावी रंजिश…
सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा) महरो गांव में दर्दनाक सड़क हादसे में 24 वर्षीय युवती की…
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)जिला ग्रामोद्योग अधिकारी वीरेन्द्र प्रसाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की…
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)जिले के गोला थाना क्षेत्र में बेकाबू स्कॉर्पियो सड़क किनारे खड़ी गेहूं लदी…
संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। संत कबीर नगर के धनघटा थाना क्षेत्र के गायघाट पूर्वी गांव…