एक पल की लापरवाही, दो जिंदगियां खत्म—गांव में पसरा सन्नाटा

तालाब में डूबने से दो मासूम भाई-बहनों की मौत, औरंगाबाद के गांव में पसरा मातम

औरंगाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) औरंगाबाद जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया है। मदनपुर थाना क्षेत्र के उमगा टोले बरछीवीर गांव में तालाब में डूबने से दो मासूम भाई-बहनों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृत बच्चों की पहचान नालंदा निवासी विक्की सिंह की पांच वर्षीय बेटी वैष्णवी कुमारी और तीन वर्षीय बेटे रंजन कुमार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे अपने घर के पास स्थित एक तालाब के किनारे खेल रहे थे। खेलते-खेलते अचानक एक बच्चे का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। दूसरे बच्चे ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वह भी संतुलन खो बैठा और तालाब में गिर गया।
घटना के बाद काफी देर तक जब दोनों बच्चे नजर नहीं आए तो परिजनों को चिंता हुई और उन्होंने उनकी तलाश शुरू की। इस दौरान कुछ ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों को आखिरी बार तालाब के किनारे खेलते हुए देखा गया था। आशंका के आधार पर ग्रामीण तालाब में उतरे और खोजबीन शुरू की। कुछ देर बाद एक-एक कर दोनों बच्चों के शव बरामद किए गए। जैसे ही यह खबर गांव में फैली, हर तरफ चीख-पुकार मच गई।
सूचना मिलने पर मदनपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शवों को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह एक हादसा प्रतीत होता है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद मृत बच्चों की मां पलक देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के अन्य सदस्य भी गहरे सदमे में हैं। बताया जाता है कि यह परिवार उमगा टोले बरछीवीर में ससुराल में रहकर किसी तरह जीवन यापन कर रहा था। परिवार के मुखिया गोलगप्पे की दुकान लगाकर घर का खर्च चलाते थे। अचानक आई इस त्रासदी ने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।
गांव के लोगों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव के तालाबों के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं बार-बार होती रहती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तालाबों के किनारे सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड और अन्य जरूरी इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खुले जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं है। बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

Editor CP pandey

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