221 पद, सिर्फ 87 डॉक्टर: बलिया की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई

बलिया में स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट: फिजिशियन डॉ. पंकज झा का इस्तीफा, पांच साल में सात डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. पंकज झा के इस्तीफे ने न केवल चिकित्सा सेवाओं की कमजोर स्थिति को उजागर किया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों से डॉक्टरों के लगातार पलायन की चिंताजनक प्रवृत्ति को भी सामने ला दिया है। बीते पांच वर्षों में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से कुल सात डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, जिनमें तीन महिला चिकित्सक भी शामिल हैं।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोरोना काल के बाद से अब तक करीब 25 डॉक्टर बिना सूचना के अनुपस्थित चल रहे हैं। इसके अलावा, छह चिकित्सक लगभग नौ महीने पहले पीजी की पढ़ाई के लिए गए थे, लेकिन अब तक वापस नहीं लौटे हैं। ऐसे हालात में मरीजों को समय पर और समुचित इलाज मिलना मुश्किल होता जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि सरकारी सेवा से डॉक्टरों का मोहभंग तेजी से बढ़ रहा है। बेहतर सुविधाओं, कम दबाव और अधिक आय के चलते कई चिकित्सक निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। बीते पांच वर्षों में दो फिजिशियन, एक रेडियोलॉजिस्ट, दो महिला चिकित्सक और एक बाल रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल छोड़ चुके हैं। इनमें से कई अब निजी नर्सिंग होम संचालित कर रहे हैं।

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डॉक्टरों के इस्तीफे के पीछे कई गंभीर कारण सामने आ रहे हैं। अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी, अत्यधिक कार्यभार, वीआईपी ड्यूटी का दबाव, मेडिको-लीगल मामलों की जटिलता और चिकित्सकों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। हालांकि, अधिकांश चिकित्सकों ने अपने इस्तीफे में निजी कारणों का उल्लेख किया है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे कहीं अधिक गंभीर है।
जिला अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था भी बदहाल स्थिति में है। यहां कुल 24 ओपीडी संचालित हैं, लेकिन ट्रॉमा सेंटर की छह ओपीडी को छोड़ दें तो बाकी 18 ओपीडी में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कई ओपीडी कक्षों में कूलर और एसी तक नहीं हैं, जिससे भीषण गर्मी में मरीजों और डॉक्टरों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
डॉ. पंकज झा ओपीडी नंबर चार में कार्यरत थे, जहां वे बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ए.के. उपाध्याय के साथ प्रतिदिन 250 से अधिक मरीजों को देखते थे। इतनी भारी संख्या के बावजूद वहां केवल पंखों के सहारे काम चलाया जा रहा था। संसाधनों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गर्मी के चलते एक चिकित्सक की तबीयत भी खराब हो चुकी है, लेकिन बार-बार मांग के बावजूद ओपीडी में एसी लगाने की व्यवस्था नहीं की जा सकी।
जिले में कुल 221 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में मात्र 87 डॉक्टर ही तैनात हैं। महिला रोग विशेषज्ञों की संख्या भी बेहद कम है, जिससे महिलाओं को उपचार के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कई गंभीर मामलों को मजबूरी में अन्य जिलों के लिए रेफर करना पड़ता है।

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प्रभारी सीएमओ डॉ. आनंद सिंह ने बताया कि अनुपस्थित और पीजी करने गए चिकित्सकों की सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही उन्हें नोटिस जारी कर वापस बुलाने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कदम कब तक उठाता है।
जिले की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था न केवल मरीजों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि जल्द ही हालात में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।

Editor CP pandey

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