वर्ष 2016 से 2026 तक का दशक केरल के लिए तेज़, संतुलित और समावेशी विकास का प्रतीक बनकर उभरा है। वित्तीय चुनौतियों और केंद्र की सीमाओं के बावजूद, राज्य ने आर्थिक वृद्धि, सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
आर्थिक विकास और निवेश में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
केरल ने इस दशक में राष्ट्रीय औसत के बराबर या उससे अधिक विकास दर हासिल की।
• 1,200+ इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी
• पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि
• स्थानीय निकायों की भूमिका मजबूत
केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) ने विकास परियोजनाओं को नई गति दी।
शिक्षा में क्रांति: डिजिटल और शून्य ड्रॉपआउट
• प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर 0% ड्रॉपआउट
• भारत का पहला पूरी तरह डिजिटल स्कूली राज्य
• SC/ST छात्रों की न्यूनतम ड्रॉपआउट दर
राज्य ने शिक्षा के हर स्तर पर गुणवत्ता सुधार और भारी निवेश किया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक पहचान
• शिशु मृत्यु दर: प्रति 1000 जन्म पर सिर्फ 5
• 42 लाख परिवारों को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज
• कोविड-19 और निपाह वायरस से सफल मुकाबला
‘आर्द्रम मिशन’ और ‘कारुण्य आरोग्य सुरक्षा योजना’ ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया।
गरीबी उन्मूलन और आवास में ऐतिहासिक सफलता
• नवंबर 2025 में अत्यधिक गरीबी का पूर्ण अंत
• ‘लाइफ़ मिशन’ के तहत 5 लाख+ घरों का निर्माण
यह उपलब्धि देश के लिए एक मिसाल बनी है।
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महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय
• ‘कुडुम्बश्री’ मॉडल से महिलाओं को आर्थिक ताकत
• लिंग आधारित बजट: कुल व्यय का 20%+
• 75% बुजुर्ग पेंशन योजनाओं से कवर
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव
•हिल हाईवे और 4-लेन नेशनल हाईवे
• कोच्चि मेट्रो और वॉटर मेट्रो
• विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह (2024)
• 100% विद्युतीकरण और सौर ऊर्जा विस्तार
आईटी और स्टार्टअप में तेज़ उछाल
• स्टार्टअप इकोसिस्टम में 147% वृद्धि (2025)
• इंटरनेट को मौलिक अधिकार का दर्जा
• K-FON परियोजना से डिजिटल कनेक्टिविटी
संघीय वित्तीय चुनौतियाँ
हालांकि विकास के बावजूद, केरल को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा:
• GST के कारण राजस्व पर असर
• उधारी की सीमाएं
• केंद्र से मिलने वाले फंड में कमी
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