लखनऊ, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के दिहाड़ी और प्रवासी मजदूरों के जीवन में बदलाव लाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की घोषणा की है। इस योजना के अंतर्गत अब मजदूरों को काम की तलाश में चौराहों या फुटपाथों पर दिन बिताने और रातें गुजारने की मजबूरी से निजात मिलेगी। सरकार प्रदेश भर में श्रमिक सुविधा केंद्र और आवासीय हॉस्टल स्थापित करने जा रही है, जहां मजदूरों को एक ही स्थान पर पंजीकरण, ठहराव, भोजन, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह योजना राज्य के लाखों असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी जीवन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य न केवल श्रमिकों को बुनियादी सुविधाएं देना है, बल्कि उन्हें स्थायी रोजगार से जोड़ना भी है।
इन केंद्रों में मिलेंगी ये प्रमुख सुविधाएं:डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था के माध्यम से मजदूरों की पहचान व स्किल मैपिंग।स्वच्छ एवं सुरक्षित आवासीय हॉस्टल की सुविधा। निःशुल्क भोजन और स्वास्थ्य सेवा।कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिससे मजदूर आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित हो सकें।
स्थानीय उद्योगों, निर्माण कंपनियों और नगर निकायों से रोजगार का सीधा लिंकअप।सरकार ने इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की रणनीति बनाई है। पहले चरण में राज्य के 20 औद्योगिक और शहरी जिलों में इन सुविधा केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसके बाद इसे पूरे राज्य में विस्तारित किया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि इससे न केवल श्रमिकों को सुरक्षित और बेहतर जीवन मिलेगा, बल्कि प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा को भी सशक्त जनशक्ति का मजबूत आधार मिलेगा।
यह योजना उत्तर प्रदेश को “श्रमिकों के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य” बनाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है, जो सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ती है।
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