कार्तिक मास 2026: 27 अक्टूबर से शुरू होगा दामोदर मास, जानिए धनतेरस, दीपावली, छठ पूजा और देव दीपावली की सही तिथियां

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पंडित सुधीर मिश्र (अंतिम बाबा) की कलम से

शास्त्रोक्त पंचांग, व्रत-पर्व एवं धार्मिक मान्यताओं पर विशेष
सनातन धर्म में कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र, पुण्यदायी और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व वाला महीना माना गया है। भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना, भगवान श्रीकृष्ण के दामोदर स्वरूप की उपासना और माता तुलसी की सेवा से जुड़ा यह महीना भक्तों के लिए भक्ति, संयम, दान, दीपदान और आत्मशुद्धि का अनुपम अवसर लेकर आता है। मान्यता है कि इस माह में श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ, स्नान, दीपदान और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि कार्तिक मास में कौन-सा व्रत किस दिन रखा जाएगा? धनतेरस और दीपावली कब मनाई जाएगी? छठ महापर्व में किस दिन डूबते और किस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा? और देवउठनी एकादशी से लेकर देव दीपावली तक कौन-कौन से प्रमुख धार्मिक आयोजन होंगे?
आइए, पंडित सुधीर मिश्र (अंतिम बाबा) के माध्यम से कार्तिक मास के धार्मिक महत्व, प्रमुख व्रत-त्योहारों और पंचांग की तिथियों को विस्तार से समझते हैं।कार्तिक मास का धार्मिक महत्व: क्यों खास है यह महीना?
हिंदू धर्मग्रंथों और धार्मिक परंपराओं में कार्तिक मास को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। इसे दामोदर मास भी कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के दामोदर स्वरूप का स्मरण इस महीने की प्रमुख वैष्णव परंपराओं में शामिल है।
इस माह में प्रातःकाल स्नान, भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा, तुलसी सेवा, दीपदान, जप, ध्यान तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। संध्या के समय तुलसी के समीप दीपक जलाने और घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करने की परंपरा भी प्रचलित है।
पंडित सुधीर मिश्र (अंतिम बाबा) के अनुसार, धार्मिक अनुष्ठानों में केवल तिथि जानना ही पर्याप्त नहीं है। व्रत का संकल्प, पूजा का समय, तिथि की अवधि, स्थानीय सूर्योदय और संबंधित पर्व की परंपरा को ध्यान में रखना भी आवश्यक है। विशेषकर व्रत-उपवास और पारण के लिए स्थानीय पंचांग का परामर्श करना चाहिए।
कार्तिक मास 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार
कार्तिक मास से संबंधित तिथियों को लेकर अलग-अलग पंचांगों में क्षेत्र, परंपरा और चंद्र तिथि की गणना के कारण अंतर हो सकता है। इसलिए नीचे दिए गए कैलेंडर को अंतिम शास्त्रोक्त सूची मानने से पहले स्थानीय पंचांग से सत्यापित करना आवश्यक है।
अक्टूबर 2026
27 अक्टूबर — कार्तिक मास का आरंभ एवं मासिक कार्तिगाई
इस दिन से कार्तिक मास की शुरुआत मानी जा रही है। मासिक कार्तिगाई दक्षिण भारतीय परंपरा में भगवान शिव और कार्तिकेय की उपासना से जुड़ा पर्व है। मासारंभ की तिथि को स्थानीय अमांत या पूर्णिमांत पंचांग परंपरा के अनुसार अवश्य जांचें।
29 अक्टूबर — करवा चौथ, रोहिणी व्रत और संकष्टी चतुर्थी
करवा चौथ पर विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। परंपरागत रूप से कई महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और चंद्रोदय के बाद व्रत खोलती हैं। संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की उपासना का दिन है। इन पर्वों की तिथि स्थानीय पंचांग से सुनिश्चित करें।
नवंबर 2026
2 नवंबर — अहोई अष्टमी सहित प्रमुख व्रत
अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना से व्रत रखती हैं। राधाकुंड स्नान, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी जैसे पर्वों की तिथियां भी संबंधित पंचांग के अनुसार जांची जानी चाहिए।
5 नवंबर — गोवत्स द्वादशी एवं एकादशी संबंधी तिथि की जांच
गोवत्स द्वादशी में गाय और बछड़े की पूजा की परंपरा है। इस दिन को लेकर क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है। रमा एकादशी की तिथि और व्रत का दिन भी स्थानीय पंचांग से निर्धारित करें।
6 नवंबर — धनतेरस, प्रदोष व्रत एवं एकादशी पारण की पुष्टि आवश्यक
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। लोग अपनी परंपरा के अनुसार नए बर्तन, आभूषण या अन्य शुभ वस्तुएं खरीदते हैं। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। हालांकि धनतेरस और एकादशी पारण की बताई गई तिथियों की पुष्टि आवश्यक है।
7 नवंबर — छोटी दीपावली से जुड़े अनुष्ठान
नरक चतुर्दशी, हनुमान पूजा, काली चौदस और मासिक शिवरात्रि की तिथियों का क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार मिलान करें। छोटी दीपावली पर घर की साफ-सफाई, दीप प्रज्वलन और धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा है।
8 नवंबर — दीपावली, लक्ष्मी-गणेश पूजन और अमावस्या
दीपावली प्रकाश, समृद्धि और मंगलकामना का प्रमुख पर्व है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाए जाते हैं। लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त स्थानीय पंचांग और अपने नगर के अनुसार निर्धारित करना चाहिए।
10 नवंबर — गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला की स्मृति में मनाई जाती है। इस अवसर पर गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर पूजा की जाती है और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। पर्व की तिथि दीपावली के अगले दिन या स्थानीय पंचांग की निर्धारित तिथि के अनुसार हो सकती है।
11 नवंबर — भाई दूज
भाई दूज भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों का पर्व है। बहनें भाइयों के मंगलमय जीवन की कामना करती हैं और तिलक लगाकर उनका स्वागत करती हैं।
13 नवंबर — लाभ चतुर्थी
इस दिन गणेश जी की पूजा और शुभ कार्यों में सफलता की कामना करने की परंपरा है। क्षेत्रीय पंचांग में नाम और तिथि का मिलान कर लें।
14 से 18 नवंबर — छठ महापर्व
छठ पर्व सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना का महत्वपूर्ण लोकपर्व है। इसमें शुद्धता, संयम, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और परिवार की मंगलकामना का विशेष महत्व है।
छठ महापर्व के चार प्रमुख चरण हैं:
नहाय-खाय: व्रत की तैयारी और शुद्धता के साथ भोजन ग्रहण करना।
खरना: दिनभर उपवास के बाद परंपरागत प्रसाद ग्रहण करना।
संध्या अर्घ्य: अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना।
उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करना।
ध्यान दें कि वर्ष 2026 में छठ पूजा की तिथियां बताने से पहले स्थानीय पंचांग और पर्व की प्रचलित गणना से चारों चरणों का सत्यापन अवश्य करें।
20 नवंबर — देवउठनी एकादशी
देवउठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने का प्रतीकात्मक उत्सव मनाया जाता है। कई क्षेत्रों में इसी अवसर से मांगलिक कार्यों के आरंभ की परंपरा जुड़ी है।
21 नवंबर — तुलसी विवाह
तुलसी विवाह में माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह कराया जाता है। घरों और मंदिरों में पूजा, भजन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस पर्व की तिथि स्थानीय परंपरा के अनुसार सुनिश्चित करें।
22 नवंबर — प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार उपवास रखते हैं और प्रदोषकाल में शिवपूजन करते हैं।
23 नवंबर — वैकुंठ चतुर्दशी
यह पर्व भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना से जुड़ा है। अनेक मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।
24 नवंबर — देव दीपावली, गुरु नानक जयंती और कार्तिक पूर्णिमा संबंधी तिथि की पुष्टि
कार्तिक पूर्णिमा को स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है। काशी सहित अनेक तीर्थस्थलों पर देव दीपावली की भव्य परंपरा है। गुरु नानक जयंती सिख धर्म के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है। इन सभी पर्वों की तिथि अपने स्थानीय पंचांग से अवश्य मिलाएं।
व्रत और पर्व मनाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
तिथि का निर्धारण केवल अंग्रेजी तारीख देखकर न करें; तिथि की शुरुआत और समाप्ति भी देखें।
व्रत रखने से पहले संबंधित व्रत-विधि, संकल्प और पारण का समय जान लें।
दीपावली, छठ और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों में स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पूजा मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें।
पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता, संयम और सद्भाव को प्राथमिकता दें।
स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर निर्जला उपवास करने से पहले उचित चिकित्सकीय सलाह लें।
निष्कर्ष: कार्तिक मास केवल त्योहारों का नहीं, साधना और संस्कारों का भी महीना
कार्तिक मास हमें भक्ति के साथ-साथ संयम, सेवा, दान, पारिवारिक प्रेम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है। दीपावली का प्रकाश हो, छठ का सूर्योपासना पर्व हो या तुलसी विवाह की परंपरा—हर आयोजन जीवन में सकारात्मकता और सद्भाव का भाव जगाता है।
पंडित सुधीर मिश्र (अंतिम बाबा) का संदेश: कार्तिक मास में पूजा-पाठ के साथ अपने आचरण को भी पवित्र बनाने का संकल्प लें। जरूरतमंदों की सहायता करें, परिवार में प्रेम बनाए रखें और धार्मिक परंपराओं का पालन सही जानकारी तथा श्रद्धा के साथ करें।
विशेष सूचना: यह लेख धार्मिक परंपराओं और उपलब्ध तिथि-सूची के आधार पर तैयार किया गया है। वर्ष 2026 के व्रत-पर्वों की सभी तिथियां, विशेषकर धनतेरस, दीपावली, छठ पूजा, देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा, प्रकाशन से पहले मान्य स्थानीय पंचांग से सत्यापित की जानी चाहिए।