
झांसी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बधाई मांगने के क्षेत्र को लेकर किन्नरों के दो गुटों के बीच चल रहा विवाद शनिवार को सड़क पर हंगामे में बदल गया। एक गुट के लोग एसएसपी कार्यालय के बाहर पहुंच गए और सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान यातायात बाधित हुआ, राहगीरों से अभद्रता किए जाने और ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड को धक्का देकर गिराने के आरोप भी सामने आए। सूचना पर पहुंची पुलिस को भी विरोध और कथित अभद्रता का सामना करना पड़ा। मामले में पुलिस ने चार किन्नरों और एक महिला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर अंशिका उर्फ अभिषेक अपनी मां ममता और पूजा, नैनतारा, रसियन समेत अन्य लोगों के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंची। अंशिका का आरोप था कि पुलिस उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं कर रही है और दूसरा गुट उसे जान से मारने की धमकी दे रहा है। अपनी शिकायत को लेकर पहुंचे इस गुट ने कार्यालय के बाहर हंगामा शुरू कर दिया और सड़क पर जाम लगा दिया।
राहगीरों से अभद्रता, होमगार्ड को धक्का देने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान सड़क से गुजर रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वीडियो में भी हंगामे और राहगीरों के साथ कथित अभद्रता के दृश्य सामने आने की बात कही जा रही है। जाम हटाने की कोशिश के दौरान एक होमगार्ड को धक्का देकर गिराने का आरोप है। सड़क पर हंगामे की सूचना मिलने पर नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने और यातायात बहाल कराने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया। इसके बाद पुलिस ममता समेत आरोपियों को थाने ले गई।
पहले भी सामने आया था मामला
बताया गया है कि अंशिका ने कुछ दिन पहले नवाबाद थाने में फिनाइल पी लिया था। ताजा घटनाक्रम में उसने आरोप लगाया कि दूसरा गुट उसे धमका रहा है और उसकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही है। हालांकि, दोनों गुटों के बीच विवाद के सभी पहलुओं और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव के मुताबिक, हंगामे के मामले में चार किन्नरों समेत एक महिला के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
विवाद का समाधान जरूरी, लेकिन कानून हाथ में लेना नहीं
किसी भी विवाद में शिकायत दर्ज कराना और न्याय की मांग करना हर नागरिक का अधिकार है। यदि किसी को धमकी मिल रही है या उसके साथ अन्याय हुआ है, तो उसे पुलिस और संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए। लेकिन सड़क जाम करना, राहगीरों को परेशान करना, सरकारी काम में बाधा डालना या पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट अथवा अभद्रता करना समस्या का समाधान नहीं है।
वहीं, पुलिस प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच करे और प्रत्येक पक्ष को कानून के अनुसार न्याय दिलाने का प्रयास करे। झांसी की इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि आपसी विवादों का निपटारा सड़क पर हंगामे से होगा या कानून के दायरे में रहकर?
