नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। वैश्विक बाजार में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान रुपया 95.22 प्रति डॉलर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
शुरुआती बढ़त के बाद बड़ी गिरावट
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर मजबूत शुरुआत के साथ खुला और 93.57 तक पहुंचा, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी। दिन के कारोबार में भारी दबाव के चलते रुपया गिरकर 95.22 पर आ गया।
मिडिल ईस्ट तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात और मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है।
इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया 94.85 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था।
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आम आदमी पर सीधा असर
रुपये की गिरावट का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। कमजोर रुपये का मतलब है कि विदेश से आने वाले सामान महंगे हो जाएंगे।
- पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतें बढ़ सकती हैं
- मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे होंगे
- विदेश यात्रा और पढ़ाई का खर्च बढ़ेगा
- माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं
महंगाई बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
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