Friday, February 27, 2026
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DVR बना ‘डिलीट मशीन’? देवरिया में शिक्षक मौत केस के सबूत पर बड़ा खेल, विधायक ने पहले ही उठाए गंभीर सवाल

सबूत साफ़, साहिबा फरार: देवरिया शिक्षा विभाग में ‘कातिलों’ का नंगा नाच; विधायक की आशंका सच, पुलिस को ठेंगा दिखा उड़ाया DVR फुटेज!

बड़ा विस्फोट: CDO की जांच में जो फुटेज था, पुलिस के आते ही वो ‘गायब’ कैसे हुआ? क्या सस्पेंशन रोकने वाली ‘लखनऊ की लॉबी’ ही मिटा रही है ‘कातिल’ साक्ष्य?


गौरव कुशवाहा विशेष संवाददाता

देवरिया/गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा ) शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह को मौत के फंदे तक पहुँचाने वाले ‘सिस्टम’ ने अब उनके खून के निशानों को मिटाना शुरू कर दिया है। देवरिया सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने जिस ‘साक्ष्य मिटाने’ की आशंका जताते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री को कड़ा पत्र लिखा था, वह खौफनाक सच 24 घंटे के भीतर सामने आ गया। जिस डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) में 20 फरवरी को शिक्षक के साथ हुई अंतिम बदसलूकी और ‘वसूली कांड’ का कच्चा चिट्ठा कैद था, वह गुलरिहा पुलिस के हाथ लगते ही ‘कोरा’ (खाली) निकला। यह महज़ तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि कानून की आंखों में धूल झोंककर किया गया ‘ऑर्गेनाइज्ड क्राइम’ है।

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विधायक का ‘विस्फोटक’ पत्र: अपनी ही सरकार की अफसरशाही पर अविश्वास!

​विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने पत्र (पत्रांक: MLA/VIP/544558/26) के जरिए शासन को आईना दिखाया है। उन्होंने साफ कहा कि आरोपी BSA को तत्काल निलंबित न करना ‘साक्ष्यों को नष्ट’ करने का मौका देने जैसा है। विधायक की यह चिंता तब हकीकत में बदल गई जब पुलिस को दफ्तर में ‘खाली’ डीवीआर थमा दिया गया। सवाल उठता है कि जब सोमवार को CDO राजेश कुमार सिंह की टीम ने फुटेज देखकर उसे सुरक्षित किया था, तो पुलिस के पहुँचने तक वह डीवीआर किसने बदला या ‘फॉर्मेट’ किया? क्या विभाग के भीतर बैठे ‘सफेदपोश मददगार’ अब भी भगोड़ी साहिबा के लिए बैटिंग कर रहे हैं?

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भगोड़ी BSA का हाईकोर्ट वाला ‘कवच’: पत्नी गुड़िया सिंह को बनाया पक्षकार

​एक तरफ दफ्तर में सबूत मिटाए जा रहे हैं, दूसरी तरफ आरोपी BSA शालिनी श्रीवास्तव गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में पहुँच गई हैं। मंगलवार को दाखिल अपनी याचिका में उन्होंने चालाकी दिखाते हुए एसएसपी गोरखपुर और वादिनी गुड़िया सिंह (मृतक की पत्नी) को पक्षकार बनाया है ताकि कानूनी दांव-पेच में मामले को उलझाया जा सके। हैरानी की बात यह है कि DM की रिपोर्ट के 72 घंटे बाद भी लखनऊ से ‘निलंबन’ का आदेश न आना यह साबित करता है कि कैबिनेट मंत्री का ‘वरदहस्त’ कानून के हाथ बांधे हुए है।

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एसपी सिटी की दो-टूक: ‘साजिश हुई तो सीधे जाएंगे जेल’

​इस महा-जालसाजी पर एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 20 फरवरी के फुटेज का गायब होना गंभीर मामला है और यदि जानबूझकर छेड़छाड़ की पुष्टि हुई, तो संबंधित कर्मचारियों पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा। पुलिस अब उन चेहरों की पहचान कर रही है जिन्होंने जांच दल के जाने और पुलिस के आने के बीच डीवीआर के साथ खेल किया।

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