सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रस्तावित नए कानून के विरोध में गुरुवार को सिकंदरपुर तहसील परिसर में सामान्य वर्ग के छात्रों, अधिवक्ताओं तथा विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी सिकंदरपुर श्री सुनील कुमार को राज्यपाल, उत्तर प्रदेश के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपकर कानून को वापस लेने की मांग की।प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी का यह नया प्रावधान न्यायसंगत नहीं है और यह संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार की भावना के विपरीत है। छात्रों और अधिवक्ताओं का कहना था कि इस प्रकार के कानून से विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के बीच जातिगत विभाजन की भावना को बढ़ावा मिलेगा, जिससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा। उनका तर्क था कि शिक्षा का मूल उद्देश्य सभी को समान अवसर प्रदान करना है, न कि समाज को वर्गों में विभाजित करना।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी भी नीति या कानून का उद्देश्य समावेशी विकास होना चाहिए। यदि शिक्षा व्यवस्था में असमानता या भेदभाव की भावना उत्पन्न होती है, तो इसका नकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस कानून पर पुनर्विचार किया जाए और शिक्षा व्यवस्था को समानता एवं न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप संचालित किया जाए।इस विरोध प्रदर्शन को सिकंदरपुर बार एसोसिएशन का पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ। साथ ही जननायक विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), गोरखपुर विश्वविद्यालय तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।इस अवसर पर प्रमुख रूप से भोला सिंह, अमरनाथ सिंह, विवेक राय, अजय श्रीवास्तव, धर्मेन्द्र सिंह (एडवोकेट), अंगद सिंह, लक्ष्मण पाण्डेय, सुरेश सिंह, सम्भव राय, विश्वजीत सिंह, अशोक श्रीवास्तव (एडवोकेट), सुशील सिंह (एडवोकेट), उदय सिंह (एडवोकेट), राजन सिंह, विक्की सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। अंत में सभी प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में यूजीसी के नए कानून को वापस लेने की मांग दोहराई।
