Wednesday, March 11, 2026
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दोहरीघाट में मौन व्रत, दान-पुण्य और भजन-कीर्तन से सजा पर्व

मौनी अमावस्या पर सरयू स्नान: दोहरीघाट में उमड़ी श्रद्धा की लहर, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर मऊ जनपद के दोहरीघाट स्थित सरयू नदी के तट पर आस्था का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के भोर से ही रामघाट, गौरी शंकर घाट और मातेश्वरी घाट पर हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए और “हर-हर महादेव” व “जय बजरंगबली” के जयघोष के बीच पवित्र सरयू जल में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर सरयू में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। आचार्य श्याम पांडे ने बताया कि यह तिथि आत्मशुद्धि, संयम और दान-पुण्य के लिए विशेष मानी जाती है।
पवित्र स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने सरयू तट स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों ने हनुमान जी को फूल-माला, सिंदूर और प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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मंदिर के पुजारी बबलू पांडे ने बताया कि मौनी अमावस्या पर दान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान की। कई भक्तों ने मौन व्रत रखकर भगवान की आराधना की, जो इस तिथि की विशिष्ट परंपरा है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। क्षेत्राधिकारी घोसी जितेंद्र सिंह और दोहरीघाट थाना प्रभारी संजय त्रिपाठी के निर्देशन में घाटों पर गोताखोरों की तैनाती, पुलिस बल की मुस्तैदी और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासनिक सतर्कता के चलते स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हुआ। यह आयोजन सरयू तट की धार्मिक महत्ता और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को एक बार फिर उजागर करता है।

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