Wednesday, March 11, 2026
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World Book Fair 2026: सोशल मीडिया ने बनाई किताबों से दूरी, अब वही ला रहा है पाठकों को पास — यहां लगा ‘आजाद’ पुस्तक मेला

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। कभी किताबों से दूरी बढ़ाने का आरोप झेलने वाला सोशल मीडिया अब पाठकों को वापस साहित्य की दुनिया में ला रहा है। विश्व पुस्तक मेला 2026 (World Book Fair 2026) में उमड़ी भीड़, खासकर Gen Z युवाओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि किताबों का आकर्षण आज भी उतना ही गहरा है, बस माध्यम बदल गया है।

‘रेत की मछली’ की तलाश और वायरल किताबें

विश्व पुस्तक मेले के हॉल नंबर-2 में स्टॉल SN-14 पर दो युवतियां एक खास किताब की तलाश में पहुंचीं— ‘रेत की मछली’। बातचीत में पता चला कि यह किताब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।
राजकमल प्रकाशन के स्टॉल संचालक के अनुसार,
“सोशल मीडिया ने पहले पाठकों को किताबों से दूर किया, लेकिन अब वही प्लेटफॉर्म उन्हें पुस्तक मेले तक खींच लाया है।”

दरअसल, ‘रेत की मछली’ को ‘गुनाहों का देवता’ का उत्तर माना जा रहा है, इसी कारण युवा पाठक इसे पढ़ने को उत्सुक हैं।

चंदर देवता है या गुनाहगार?

सदी प्रकाशन के संयोजक जितेंद्र जित्यांशु से जब यह सवाल पूछा गया कि ‘गुनाहों के देवता’ का चंदर गुनाहगार है या नहीं, तो उन्होंने जवाब को पाठक पर छोड़ दिया।
सोशल मीडिया पर चल रही बहस— चंदर ने सुधा का त्याग क्यों किया?— इस बार पुस्तक मेले की चर्चाओं का अहम हिस्सा रही।

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Gen Z और किताबों की नई दोस्ती

कभी कहा गया था—
“अजदहा बन के आया मोबाइल, ये किताबें निगल गया कितनी…”
लेकिन World Book Fair 2026 में Gen Z की भारी मौजूदगी ने इस धारणा को तोड़ दिया।

Instagram और Reels पर #WorldBookFair2026 के साथ ‘दीवार में एक खिड़की हुआ करती थी’, ‘रेत की मछली’, ‘गुनाहों का देवता’ और ‘October Junction’ जैसी किताबें ट्रेंड करती रहीं।

उर्दू शायरी, डिबेट और नई किताबों का जन्म

पुस्तक मेले में इस बार बायोपिक, इतिहास और कहानियों के साथ-साथ उर्दू शायरी की किताबों ने खास जगह बनाई।
मेले के दौरान—

• साहित्यिक डिबेट
• कविता पाठ
• लेखक संवाद
• पुस्तक विमोचन
जैसे कई कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें नामचीन साहित्यकारों ने हिस्सा लिया।

भारत मंडपम के बाहर ‘आजाद’ पुस्तक मेला

भारत मंडपम के भीतर चल रहे विश्व पुस्तक मेले से अलग, गेट नंबर-10 के बाहर सड़क पर एक अनोखा दृश्य देखने को मिला— ‘आजाद पुस्तक मेला’।
यहां—

• न गार्ड, न एंट्री टिकट
• 25 से ज्यादा स्टॉल
• किताबें अंदर के मेले से कहीं सस्ती

पाठकों के लिए यह खुला और सहज पुस्तक बाजार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

विश्व पुस्तक मेले के प्रमुख हॉल

• लेखक मंच: हॉल नंबर 2
• हिंदी व भारतीय भाषाएं: हॉल 2 और 3
• ऑथर्स कॉर्नर / थीम मंडप: हॉल 5
• बाल मंडप: हॉल 6
• विदेशी मंडप: हॉल 4

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