Saturday, February 28, 2026
HomeNewsbeatकागजों में खत्म, जमीन पर जिंदा—किसानों की समस्या से महकमे की लापरवाही...

कागजों में खत्म, जमीन पर जिंदा—किसानों की समस्या से महकमे की लापरवाही बेनकाब!

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। कागज़ों में किसानों की समस्याएं भले ही हीरोइन की एंट्री की तरह पलभर में गायब दिख जाती हों, लेकिन जमीनी हकीकत किसी ब्लॉक-बस्टर फिल्म की खलनायकी से कम नहीं है। जिले के हजारों किसान आज भी बीज, खाद, सिंचाई, समर्थन मूल्य और फसल सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
गांवों में खेतों का हाल यह है कि कहीं सिंचाई के साधन नहीं, तो कहीं बीज भंडारों पर स्टॉक आने वाला है के नाम पर हफ्तों से टाल-मटोल चल रही है। किसान सुबह से लाइन में लगे रहते हैं और शाम तक कल आना जवाब पाकर लौट जाते हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह कि महकमे के अधिकारी दफ्तरों में बैठकर समस्याओं को सिर्फ कागज़ों में सॉल्व दिखा देते हैं। वहीं किसान बताते हैं कि न कोई नियमित निरीक्षण होता है, न ही क्षेत्रीय स्तर पर उनकी समस्याओं को सुनने के लिए कोई जिम्मेदार मौजूद मिलता है।
खेती को घाटे का सौदा बनाने वाली बिजली कटौती भी किसानों की कमर तोड़ रही है। दिन में घंटों की कटौती और रात में उपकरण खराब होने से सिंचाई का काम ठप पड़ जाता है। फसल सूखने पर जब किसान शिकायत दर्ज कराते हैं तो विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल देता है। इधर बढ़ती लागत और घटते दाम ने किसानों की जेब पर गहरा वार किया है। धान-गेहूं का समर्थन मूल्य सिर्फ कागजों पर राहत दिखाता है,जबकि मंडियों में बिचौलियों की मनमानी जारी है। किसान मजबूरी में औने-पौने दाम पर उपज बेचकर घर लौटता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बीज-खाद वितरण की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, बिजली सप्लाई दुरुस्त हो।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments