Sunday, February 15, 2026
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सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का असर शुरू

टीचर्स ऑफ बिहार की सकारात्मक पहल से बच्चों के सीखने की गुणवत्ता में सुधार

पटना (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का माहौल अब तेजी से बदल रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम बच्चों की पढ़ाई और उनकी रुचि में साफ तौर पर झलकने लगे हैं। राज्य के शिक्षकों की अग्रणी संस्था टीचर्स ऑफ बिहार लगातार नवाचारी शिक्षण पद्धतियों और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में जुटी है। संस्था का यह प्रयास विद्यालयों में न केवल बच्चों की भागीदारी बढ़ा रहा है, बल्कि शिक्षकों के लिए भी प्रेरणास्रोत साबित हो रहा है। शिक्षा विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ.एस.सिद्धार्थ ने टीचर्स ऑफ बिहार को शुभकामना संदेश भेजते हुए कहा—“टीचर्स ऑफ बिहार का प्रयास बच्चों की शिक्षा के स्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह पहल बिहार के शैक्षणिक परिदृश्य को नई दिशा प्रदान करेगी।” सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों ने इस बदलाव पर खुशी जताई है। नवसृजित प्राथमिक विद्यालय खुटौना यादव टोला,पताही, पूर्वी चंपारण के शिक्षक -सह-प्रदेश मीडिया संयोजक, टीचर्स ऑफ बिहार मृत्युंजय कुमार ने कहा — “गतिविधि आधारित शिक्षण से बच्चों की रुचि बढ़ी है। वे सवाल पूछते हैं, चर्चा करते हैं और अपने विचार भी साझा करते हैं। यह बदलाव शिक्षण-प्रक्रिया को सार्थक बना रहा है। बच्चों ने भी नई शिक्षण पद्धति को सराहा है।
एक छात्रा ने कहा — “अब पढ़ाई मजेदार लगती है। खेल-खेल में पढ़ाई करने से कठिन विषय भी आसानी से समझ आ जाता है।” वहीं एक अन्य छात्र ने उत्साह से बताया — “अब स्कूल आने का मन करता है। पढ़ाई अब बोझ नहीं लगती।” शिक्षा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि यदि इसी तरह के प्रयास लगातार जारी रहे, तो बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था आने वाले समय में देश के लिए एक आदर्श मॉडल साबित होगी।

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