जनसहभागिता और डिजिटल तकनीक से तैयार होंगी गुणवत्तापूर्ण ग्राम पंचायत विकास योजनाएं

श्रावस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। ग्राम पंचायतों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विकासोन्मुख बनाने के उद्देश्य से जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी) भिनगा में विकास खंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), Q-GPDP, डिजिटल पंचायत, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल तथा पंचायतों में जनसहभागिता बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ फैकल्टी बृजेश कुमार पाण्डेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजना तभी प्रभावी होगी, जब उसका निर्माण स्थानीय आवश्यकताओं, जनसहभागिता और डिजिटल तकनीक के समुचित उपयोग के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को ग्राम स्तर तक पहुंचाकर योजनाओं के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन का आह्वान किया।
जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन राज कुमार तिवारी ने पंचायतों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित नवीन प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि स्वच्छता से जुड़े सभी बिंदुओं को ग्राम पंचायत विकास योजना में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाए, ताकि पंचायतें स्वच्छ और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ सकें।
प्रशिक्षक चंचल देवी ने ग्राम सभा की बैठकों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन और पंचायत की स्वयं की आय (OSR) बढ़ाने के प्रयासों से गुणवत्तापूर्ण GPDP तैयार होगी। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2026 तक सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड की जानी हैं।
मुख्य प्रशिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने प्रतिभागियों को GPDP की आठ चरणीय प्रक्रिया, Q-GPDP, पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI), डिजिटल पंचायत ब्लूप्रिंट, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल तथा ग्राम गरीबी निवारण योजना (VPRP) के समेकन की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही डिजिटल अपलोड, अभिसरण और सहभागी योजना निर्माण की व्यवहारिक प्रक्रिया का प्रदर्शन भी कराया गया।
प्रशिक्षण में बताया गया कि ग्राम पंचायतों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर विभागीय योजनाओं का प्रभावी अभिसरण तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से विकास कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रावस्ती की सचिव अनुप्रिया ने सामाजिक रूप से सुरक्षित और न्यायसंगत ग्राम पंचायतों के निर्माण पर बल देते हुए कहा कि गरीब एवं जरूरतमंद नागरिकों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने पंचायत सहायकों से बाल विवाह, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति और घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा बालिका शिक्षा, महिला हितैषी और बाल हितैषी पंचायतों के लिए कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।
जिला परियोजना प्रबंधक सपना यादव ने पंचायत पोर्टल, GPDP पोर्टल, पंचायत निर्णय ऐप और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के तकनीकी संचालन की जानकारी दी। वहीं जिला समन्वयक C-3 ने स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े बजट को GPDP में शामिल करने तथा स्वस्थ एवं महिला हितैषी पंचायतों के निर्माण पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंचायत सचिव, पंचायत सहायक एवं अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
