गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन से विश्वविद्यालय से संबद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रबंधकों ने शिष्टाचार भेंट कर बी.एड. पाठ्यक्रम की स्थायी संबद्धता के संबंध में लिए गए निर्णय का स्वागत किया। प्रबंधकों ने इस निर्णय को छात्रहित एवं संस्थानों के दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कुलपति के प्रति आभार व्यक्त किया।
बताया गया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध 37 स्ववित्तपोषित बी.एड. महाविद्यालय पिछले लगभग नौ वर्षों से स्थायी संबद्धता की प्रतीक्षा कर रहे थे। हाल ही में कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा इस संबंध में आवश्यक पहल करते हुए संबद्धता विभाग को दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिससे संबंधित महाविद्यालयों को बड़ी राहत मिली है।
बैठक के दौरान प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल प्रदेश के राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों को भी इसी भावना के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना चाहिए।
महाविद्यालय प्रबंधकों ने अपने संस्थानों के संचालन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं एवं व्यावहारिक चुनौतियों से कुलपति को अवगत कराया। कुलपति ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए यथासंभव समाधान का आश्वासन दिया।
प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए महाविद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं तथा नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के मूल्यांकन की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य करने का भी आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में महाविद्यालयों को रोजगारपरक एवं कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों के संचालन पर विशेष बल देना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता में वृद्धि हो और वे बदलती वैश्विक आवश्यकताओं एवं रोजगार बाजार की मांगों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।
स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों को मिली बड़ी राहत, कुलपति प्रो. पूनम टंडन के निर्णय का स्वागत
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