लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा हेल्थ डेस्क)। बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और खानपान की गड़बड़ी के कारण डायबिटीज समेत कई जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद को ब्लड शुगर प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कड़ी में सामान्य गति से की जाने वाली वॉक एक आसान और कम जोखिम वाली गतिविधि हो सकती है।
खाने के बाद हल्की वॉक क्यों उपयोगी मानी जाती है?
भोजन के बाद हल्की चाल से चलने पर मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर में होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। नियमित वॉक शारीरिक सक्रियता बढ़ाने के साथ वजन प्रबंधन, मूड और नींद के लिए भी उपयोगी हो सकती है।
डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए वॉक इसलिए भी सुविधाजनक है क्योंकि इसके लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती। आरामदायक जूते पहनकर अपनी क्षमता के अनुसार शुरुआत की जा सकती है। हालांकि, जिन लोगों को डायबिटीज के साथ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें अपनी गतिविधि की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
नियमित स्लो वॉक के संभावित फायदे
इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार में मदद
ब्लड शुगर नियंत्रण में सहयोग
वजन प्रबंधन में सहायता
ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
शरीर का संतुलन बेहतर करने में मदद
तनाव और मूड पर सकारात्मक प्रभाव
नींद की गुणवत्ता में सुधार
एकाग्रता और मानसिक सक्रियता में सहायता
कड़वी लौकी को बिल्कुल न खाएं
लौकी सामान्य तौर पर हल्की और आसानी से पचने वाली सब्जी मानी जाती है, लेकिन बहुत ज्यादा या असामान्य कड़वी लौकी खतरे का संकेत हो सकती है। ऐसी लौकी को पकाकर या उसका जूस बनाकर खाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
इसका कारण कुकुर्बिटासिन नामक प्राकृतिक यौगिक हो सकता है। इनकी अधिक मात्रा वाली लौकी खाने से फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसके लक्षणों में तेज पेट दर्द, उल्टी और दस्त शामिल हो सकते हैं। अधिक गंभीर मामलों में शरीर में पानी की कमी, ब्लड प्रेशर गिरना और पाचन तंत्र में रक्तस्राव जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
लौकी इस्तेमाल करने से पहले स्वाद जरूर जांचें
अगर लौकी काटने पर उसके स्वाद में सामान्य से बहुत ज्यादा कड़वाहट महसूस हो, तो उसे खाने से बचें। थोड़ी मात्रा का स्वाद जांचते समय यदि तेज कड़वाहट लगे तो उसे निगलने के बजाय तुरंत थूक दें और ऐसी लौकी को इस्तेमाल न करें।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ पकाने, उबालने या प्रेशर कुकर में पकाने से अत्यधिक कड़वी लौकी के संभावित विषैले तत्वों के सुरक्षित रूप से खत्म होने की गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए। इसलिए ऐसी लौकी को पकाकर या जूस बनाकर सेवन करने का जोखिम नहीं लेना चाहिए।
सिर्फ लौकी ही नहीं, इन सब्जियों में भी रहें सतर्क
कुकुर्बिट परिवार की कुछ अन्य सब्जियों में भी यदि सामान्य स्वाद के बजाय असामान्य और तेज कड़वाहट महसूस हो, तो उन्हें खाने से बचना चाहिए। तोरी, खीरा और कुछ प्रकार के कद्दू में भी यह सावधानी रखी जा सकती है।
ध्यान रखें: सामान्य स्वाद वाली लौकी को लेकर अनावश्यक डरने की जरूरत नहीं है। चिंता का विषय मुख्य रूप से उसका असामान्य रूप से बहुत कड़वा स्वाद है। डायबिटीज में वॉक या खानपान में बदलाव को इलाज का विकल्प न मानें और दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना बंद न करें।