
सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले ऋषि पंचमी पर्व का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना गया है। इस अवसर पर श्रद्धालु सप्तऋषियों का विधि-विधान से पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना करते हैं। महिलाओं द्वारा विशेष रूप से ऋषि पंचमी का व्रत रखकर पूजा-अर्चना की जाती है।
आचार्य अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि यह पर्व 15 सितम्बर को मनाया जाएगा। 15 सितम्बर को पंचमी तिथि की शुरुआत सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगी,तिथि का समापन 16 सितम्बर को सुबह 8 बजकर 59 मिनट पर होगा। इस दौरान सप्त ऋषियों की पूजा का शुभ मुहूर्त 15 सितम्बर को सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक का होगा । ऋषि पंचमी का पर्व सप्तऋषियों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत एवं पूजन करने से जाने-अनजाने में हुए दोषों से मुक्ति तथा पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान सप्तऋषियों—कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ—का स्मरण कर विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद कलश स्थापित कर सप्तऋषियों का पूजन, पंचोपचार अथवा षोडशोपचार विधि से किया जाता है। श्रद्धालुओं को पवित्र मन से फल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित कर भगवान एवं सप्तऋषियों से परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
