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योग बंधन–2026: दक्षिण प्रशांत देशों के साथ योग से जुड़ा वैश्विक स्वास्थ्य और सद्भाव का संदेश

गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में 12 प्रशांत देशों के प्रतिभागियों ने की सहभागिता

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम “योग बंधन–2026” के दूसरे दिन योग के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में किया गया।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, विशेष रूप से योग, को वैश्विक पहचान दिलाने में कुलाधिपति का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि गोरखपुर प्राचीन काल से हठयोग और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र रही है। साथ ही विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारियों को और मजबूत करने तथा स्वास्थ्य एवं कल्याण आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

कार्यक्रम का मुख्य व्याख्यान लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, ग्वालियर के सहायक आचार्य डॉ. अमित यादव ने “रोगों की रोकथाम एवं प्रबंधन हेतु योग : एक सार्वभौमिक चिकित्सीय दृष्टिकोण” विषय पर दिया। उन्होंने योग को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन, आंतरिक शांति और स्वस्थ समाज निर्माण का प्रभावी माध्यम बताते हुए विभिन्न योगासनों एवं प्राणायामों के चिकित्सीय लाभों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि द यूनिवर्सिटी ऑफ द साउथ पैसिफिक की सक्रिय भागीदारी रही। फिजी, किरिबाती, समोआ, टोंगा, तुवालु, वानुआतु, सोलोमन द्वीप, कुक द्वीप, मार्शल द्वीप, नाउरू, निउए और टोकेलाउ सहित 12 दक्षिण प्रशांत द्वीपीय देशों की सेवा प्रदान करने वाले इस विश्वविद्यालय से जुड़े लगभग 50 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इनमें प्रमाणित योग प्रशिक्षक, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल रहे।

कार्यक्रम में डॉ. आर. के. प्रजापति, डॉ. तनवीर हैदर नकवी, डॉ. कपिल दवे, रांगी जोसेफ डेविस, एंडे लोवे, सतीब निशा खान, शेरोन घाबूस तथा जलेसी राबाकेवा सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि योग आज वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक संवाद, शांति और मानव कल्याण का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

कार्यक्रम का समन्वयन अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. रामवंत गुप्ता ने किया। समापन अवसर पर डॉ. आर. के. प्रजापति ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि “योग बंधन–2026” जैसे आयोजन भारतीय सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्वास्थ्य संवर्धन को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

Karan Pandey

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