‘दिमागी नक्सली’ टिप्पणी पर राहुल गांधी का पलटवार, सत्य निकेतन हादसे को लेकर BJP सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस के भाषण में की गई ‘दिमागी नक्सली’ टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों और जवाबदेही से जुड़े सवालों से बचने के लिए विपक्ष तथा सवाल उठाने वाले लोगों पर विवादित और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है।
राहुल गांधी ने अपने हिंदी X पोस्ट में दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। गांधी का कहना है कि राजधानी में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और हादसों के बाद निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई तक मामला सीमित रह जाता है, जबकि व्यवस्था की बड़ी खामियों को दूर करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
गांधी ने दावा किया कि सत्य निकेतन की घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं है। उन्होंने पिछले कुछ महीनों में दिल्ली के सैदुलाजाब और हौज रानी में हुई घटनाओं का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, सैदुलाजाब में एक हादसे में छह लोगों की जान गई, जबकि हौज रानी में आग की घटना में 22 लोगों की मौत हुई।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसी घटनाओं में आम लोगों की जान के साथ उनके परिवारों के सपने और भविष्य भी प्रभावित होते हैं, लेकिन हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई दिखाई नहीं देती।
‘सवाल पूछने वालों को चुप कराने की कोशिश’ का आरोप
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की ‘दिमागी नक्सली’ टिप्पणी को भी अपने हमले का हिस्सा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष या आम नागरिक सरकार से जवाबदेही की मांग करता है, तो उसे बदनाम करने के लिए इस तरह के राजनीतिक लेबल इस्तेमाल किए जाते हैं।
गांधी ने प्रधानमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सली’ और ‘नाराज़ फूफा’ जैसे शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे संबोधनों का उद्देश्य सवाल उठाने वालों को शर्मिंदा और हतोत्साहित करना है।
दिल्ली सरकार पर भी उठाए सवाल
रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दिल्ली की ‘ट्रिपल-इंजन’ सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि राजधानी में हुई ऐसी घटना की जिम्मेदारी से बचने के लिए सरकार के पास कोई उचित बहाना नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था में इच्छाशक्ति की कमी के कारण जवाबदेही तय नहीं हो पाती। गांधी के मुताबिक, यदि सरकार वास्तव में हादसों को रोकने के लिए गंभीर है तो केवल घटना के बाद जिम्मेदार व्यक्ति तलाशने के बजाय ऐसी परिस्थितियों को खत्म करने के लिए स्थायी कदम उठाने होंगे।
स्वतंत्रता दिवस के भाषण के बाद बढ़ा विवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सलियों’ का उल्लेख किया था। इसके बाद BJP और कांग्रेस के बीच इस शब्द को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राहुल गांधी की ताजा प्रतिक्रिया को इसी राजनीतिक विवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है। सत्य निकेतन हादसे को मुद्दा बनाकर उन्होंने दिल्ली में सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी के सवाल को भी बहस के केंद्र में ला दिया है।
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