नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा की आराधना : सुख, स्वास्थ्य और संपन्नता का अद्भुत मार्ग

विशेष लेख – पंडित ध्रुव मिश्र


शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन देवी माँ के कूष्माण्डा स्वरूप की उपासना के लिए समर्पित है। नवरात्र के पहले तीन दिनों में माँ दुर्गा के कल्याणकारी, शौर्यपूर्ण और संतुलनकारी स्वरूपों की आराधना होती है, वहीं चौथे दिन आदिशक्ति के उस स्वरूप का पूजन होता है, जिनके उदर से संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति हुई। यही कारण है कि इन्हें ब्रह्माण्ड की जननी और ‘आदि सृष्टि की अधिष्ठात्री’ कहा जाता है।
माँ कूष्माण्डा का स्वरूप और महत्व
माँ कूष्माण्डा अष्टभुजा धारी हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृतकलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित होते हैं। उनका वाहन सिंह है, जो पराक्रम का प्रतीक है। देवी का यह स्वरूप आरोग्य, बल, वैभव, तेज और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। मान्यता है कि उनकी कृपा से साधक के भीतर दिव्य ऊर्जा और आत्मबल का संचार होता है।

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पूजा का विधिविधान
नवरात्रि के चौथे दिन प्रातःकाल स्नान कर घर अथवा मंदिर के पवित्र स्थान पर कलश स्थापना के समीप देवी कूष्माण्डा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  1. संकल्प – जलपात्र में जल लेकर संकल्प करें कि मैं देवी कूष्माण्डा की आराधना कर रहा हूँ और उनसे सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं वैभव की कामना करता हूँ।
  2. आवाहन – माँ का ध्यान करते हुए धूप, दीप, पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
  3. पंचोपचार/षोडशोपचार पूजा – गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएँ। इच्छानुसार फल, नारियल, मालपुआ और हलुआ नैवेद्य के रूप में अर्पित किए जाते हैं।
  4. विशेष भोग – माँ कूष्माण्डा को कद्दू (कूष्माण्ड) विशेष रूप से प्रिय है, इसलिए इसे अवश्य अर्पित करें। यह माना जाता है कि इस भोग से रोग निवारण और आयु वृद्धि होती है।
    देवी कूष्माण्डा के मंत्र
    पूजन के समय निम्न मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना गया है –
    बीज मंत्र
    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः॥
    ध्यान मंत्र
    सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
    दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

    इन मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करने से साधक को आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

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  1. पूजन के लाभ
    माँ कूष्माण्डा की कृपा से साधक की आयु बढ़ती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है।साधना से व्यक्ति को अपार ऊर्जा, तेज और आत्मबल प्राप्त होता है।पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और घर में सदैव शांति बनी रहती है। रोग, शोक और संकटों का निवारण होता है।
    नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्माण्डा की आराधना का विशेष अवसर है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त करने का अद्भुत साधन है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से माँ का पूजन करते हैं, वे जीवन में असीम ऊर्जा और आत्मविश्वास का अनुभव करते हैं। अतः इस दिन माँ कूष्माण्डा का स्मरण, पूजन और मंत्रजप अवश्य करें, ताकि जीवन हर क्षेत्र में प्रकाश और समृद्धि से भर सके।
Editor CP pandey

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