विश्व रेबीज दिवस पर स्वास्थ्य केंद्रों पर विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न

मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में विकास भवन में आयोजित हुई गोष्ठी

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर जनपद के समस्त सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बुधवार को गोष्ठी एवं जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी प्रवीण वर्मा की अध्यक्षता में एक गोष्ठी का आयोजन विकास भवन सभागार में किया गया। इस गोष्ठी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० जयन्त कुमार ने कहा की इस वर्ष विश्व रेबीज दिवस की थीम “वन हेल्थ – जीरो डेथ” रखी गई है। यह दिन फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुईस पाश्चर की डेथ एनिवर्सरी के तौर पर मनाया जाता है। लुईस पाश्चर ने पहली बार रेबीज का टीका तैयार कर मेडिकल फील्ड को एक सुरक्षा कवच दिया था। रेबीज एक जूनोटिक बीमारी है, जो जानवरों से इंसानों में फैलती है और इसका कारण है लायसा वायरस। शरीर में यह वायरस कुत्ते बिल्ली और बंदरों के काटने के बाद प्रवेश करता है और इसी के बचाव के लिए लुईस पाश्चर ने रेबीज का टीका तैयार किया था। उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए हर साल 28 सितंबर को यानी उनकी डेथ एनिवर्सरी के अवसर पर विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है।
इस दिन को मनाने का उद्देश्य रेबीज के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इस बीमारी के रोकथाम को बढ़ावा देना है। साथ ही रेबीज के टीके के बारे में बताना की रेबीज के टीके के माध्यम से इस बीमारी से लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह एक वायरल डिजीज है जो इंसानों और जानवरों में दिमाग की सूजन के कारण होती है।
उन्होंने कहा कि रेबीज किसी भी जानवर के काटने से हो सकता है परंतु यह सबसे अधिक कुत्तों, बिल्लियों आदि के काटने के कारण होता है। वर्तमान में जनपद के समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रेबीज टीकाकरण नि:शुल्क उपलब्ध है। साथ ही रेबीज नियंत्रण हेतु परामर्श उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि रेबीज जानवरों अथवा कुत्ते के छूने चाटने या खरोंच लगने पर जिसमें कि स्किन इंटैक्ट हो अर्थात खून ना निकला हो, उनमें टीके की कोई आवश्यकता नहीं होती है। रेबीज का टीका केवल उन्हीं व्यक्तियों को दिया जाता है जिनमें कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि के काटने पर जख्म हो गए हो इसके साथ ही जानवरों के काटने के ऐसे मामले जिनमें की अत्यधिक गहरा जख्म हो गया हो उनमें रेबीज वैक्सीन के साथ इम्यूनोग्लोबुलीन भी दी जाती है। रेबीज रेब्डो वायरस नाम के एक विषाणु से होता है, तथा इसका इनक्यूबेशन पीरियड 30 से 90 दिनों के मध्य होता है।
जिला सर्विलांस अधिकारी/वेक्टर बॉर्न के नोडल अधिकारी डॉ० अभिषेक मिश्रा ने कहा कि रेबीज का टीकाकरण तथा जागरूकता ही इस रोग से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है। समस्त पालतू जानवरों विशेषकर पालतू कुत्तों को रेबीज का टीका अवश्य लगाया जाना चाहिए, उन्होंने बताया की रेबीज एक लाइलाज बीमारी है, अतः टीकाकरण तथा जागरूकता ही रेबीज रोग से बचाव के मुख्य साधन हैं ।
इस गोष्ठी में जिला विकास अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला महामारी रोग विशेषज्ञ एवं अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

Editor CP pandey

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